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राकेश झुनझुनवाला के पोर्टफोलियो में शामिल दो स्टॉक्स औंधे मुंह गिरे, बिग बुल को 866 करोड़ का नुकसान
Published / 2022-06-17 15:28:10
राकेश झुनझुनवाला के पोर्टफोलियो में शामिल दो स्टॉक्स औंधे मुंह गिरे, बिग बुल को 866 करोड़ का नुकसान

एबीएन बिजनेस डेस्क। भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार 17 जून को भी गिरावट रही। बिग बुल राकेश झुनझुनवाला के पोर्टफोलियो में शामिल टाइटन और स्टार हेल्थ के शेयर भी आज औंधे मुंह गिरे। टाइटन के शेयरों में 6.09 फीसदी की गिरावट आई वहीं स्टार हेल्थ का स्टॉक 4.54 फीसदी गिरकर बंद हुआ है। आज इन दोनों शेयरों के गिरने से राकेश झुनझुनवाला को 8,666,527,875.25 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। टाइटन और स्टार हेल्थ के शेयरों में पिछले कई दिनों से बिकवाली हावी है। वर्ष 2022 में टाइटन का शेयर अब तक 23 फीसदी गिर चुका है। पिछले छह महीनों में टाटा ग्रुप के इस शेयर ने 13.57 फीसदी का गोता लगाया है तो पिछले एक महीने में टाइटन का शेयर 10.67 फीसदी गिरा है। पिछले पांच कारोबारी सत्रों में ही यह शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहा है और इसमें आठ फीसदी की गिरावट आई है। आज यह 6.09 फीसदी गिरकर 1935.45 रुपये पर बंद हुआ है। लगातार गिर रहा है स्टार हेल्थ का शेयर : स्टार हेल्थ के शेयर का हाल भी कुछ अच्छा नहीं है। पिछले पांच कारोबारी सत्रों में ही यह आठ फीसदी से ज्यादा गिर चुका है। पिछले छह महीनों में इसने 20 फीसदी से ज्यादा गोता लगाया है। वर्ष 2022 में यह अब तक 18.67 नुकसान निवेशकों को करा चुका है। शुक्रवार को भी इस शेयर में 4.54 फीसदी की गिरावट आई और यह 634 रुपये पर बंद हुआ। झुनझुनवाला को लगा 866 करोड़ का झटका : मार्च के शेयर होल्डिंग पैटर्न के अनुसार राकेश झुनझुनवाला और उनकी पत्नी रेखा झुनझुनवाला के पास टाइटन कंपनी के कुल 4,48,50,970 शेयर हैं। आज टाइटन के शेयर 125.5 रुपये गिरे हैं। इससे झुनझुनवाला दंपति को 5,628,796,735 रुपये (4,48,50,970- 125.5 रुपये) का नुकसान टाइटन के शेयरों में हुआ है। बिग बुल के पास स्टार हेल्थ के कुल 10,07,53,935 शेयर हैं। अगर प्रत्येक शेयर में आज आई 30.15 रुपये की गिरावट को जोड़ा जाए, तो पता चलता है कि राकेश झुनझुनवाला को इस स्?टॉक में आज 3,037,731,140.25 रुपये (30.10 रुपये - 10,07,53,935) का घाटा हुआ है। इस तरह टाइटन और स्टार हेल्थ के शेयरों में आज गिरावट आने से झुनझुनवाला की नेटवर्थ में 8,666,527,875.25 रुपये की कमी हो गई है।

बाजार टूटने से दुनियाभर के निवेशकों में हाहाकार...
Published / 2022-06-17 15:25:53
बाजार टूटने से दुनियाभर के निवेशकों में हाहाकार...

एबीएन बिजनेस डेस्क। फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों में 75 आधार अंकों की बढ़ोतरी के बाद गुरुवार को अमेरिकी बाजारों में कमजोरी के आसार हैं। फेड ने महंगाई पर लगाम कसने के लिए आगे ब्याज दरों में और बढ़ोतरी का संकेत दिया है। यूरोप में केंद्रीय बैंक भी इसी राह पर चल रहे हैं और वहां स्विटजरलैंड ने गुरुवार को ब्याज दरों में अचानक बढ़ोतरी कर दी, जो करीब एक साल से अपरिवर्तित था। बैंक आॅफ इंगलैंड ने भी ब्याज दरों में इजाफा किया है। डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल फ्यूचर्स 1.7 फीसदी टूट गया और एसऐंडपी फ्यूचर में भी 2.1 फीसदी की गिरावट आई? यूरोपीय बेंचमार्क और ज्यादातर एशियाई बाजार भी टूटे क्योंकि तेल की कीमत का भी इस पर असर पड़ा। फेड की ब्याज बढ़ोतरी के बाद न्यूयॉर्क में बुधवार दोपहर शेयरों में तेजी आई थी, जो 1994 के बाद की सबसे बड़ी बढ़ोतरी है क्योंकि निवेशकों ने शुरू में फेड चेयरमैन जीरोम पॉवेल की टिप्पणी से संकेत लिया, जो बताता है कि भविष्य में ब्याज दरों में कम बढ़ोतरी हो सकती है। लेकिन अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि उच्च महंगाई को देखते हुए यह बढ़त अल्पावधि की ही हो सकती है। बैंक आॅफ इंगलैंड ने गुरुवार को ब्याज दरों में 25 आधार अंकों का इजाफा किया। यह ब्रिटिश केंद्रीय बैंक की तरफ से दिसंबर के बाद ब्याज दरों में पांचवीं बढ़ोतरी है, जिसने मुख्य दरों को 1.25 फीसदी पर पहुंचा दिया है। स्विस नैशनल बैंक ने ब्याज दरों में आधा फीसदी का इजाफा किया है। ताइवान के केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरें 0.125 आधार अंक बढ़ाकर 1.5 फीसदी कर दी है। एसपीआई ऐसेट मैनेजमेंट के स्टीफंस इन्स ने कहा, एफओएमसी ने अपना रुख सामने कर दिया है और हम अन्य केंद्रीय बैंकों की तरफ से आक्रामक ब्याज बढ़ोतरी देख सकते हैं। फ्रांस का सीएसी 40 भी 2 फीसदी टूटा जबकि जर्मनी का डैक्स 2.7 फीसदी और ब्रिटेन का एफटीएसई 100, 2.3 फीसदी लुढ़क गया। एशियाई कारोबार में जापान के बेंचमार्क निक्केई 225 में 0.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और यह 26,431.20 पर बंद हुआ। आॅस्ट्रेलिया के पी-एएसएक्स 200 ने शुरूआती बढ़त गंवा दी और करीब 0.2 फीसदी टूटकर 6,591.10 पर आ गया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 0.2 फीसदी चढ़कर 2,451.41 पर पहुंचा। हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग 2.2 फीसदी फिसलकर 20,845.43 पर बंद हुआ, वहीं शांघाई कम्पोजिट 0.6 फीसदी फिसलकर 3,285.38 पर आ गया। बैंक आॅफ जापान की दो दिन की नीतिगत बैठक शुरू हो गई है, जो शुक्रवार को खत्म होगी। जापानी केंद्रीय बैंक येन में गिरावट को लेकर दबाव में है। निवेशक येन की बिकवाली कर डॉलर की खरीद कर रहे हैं क्योंकि उन्हें लग रहा है कि डॉलर वाली होल्डिंग में ज्यादा प्रतिफल मिलेगा। जापान के राजनेता और केंद्रीय बैंक प्रमुख ने घटते येन पर चिंता जताई है, लेकिन नीति में कोई नाटकीय बदलाव शायद नहीं होगा। इस साल बॉन्ड से लेकर बिटकॉइन तक, यानी हर तरह के निवेश पर गिरावट देखने को मिली है क्योंकि उच्च महंगाई केंद्रीय बैंकों को इस पर लगाम कसने के लिए बाध्य कर रहे हैं, जिसने अर्थव्यवस्थाओं को महामारी से सुधरने बाधा खड़ी की है। यूक्रेन युद्ध? ने संकट और बढ़ा दिया है।

एएनआईएल में टोटाल एनर्जीज का निवेश
Published / 2022-06-16 07:02:36
एएनआईएल में टोटाल एनर्जीज का निवेश

एबीएन बिजनेस डेस्क। फ्रांस की दिग्गज ऊर्जा कंपनी टोटाल एनर्जीज ने एक बार फिर अदाणी समूह की कंपनी में निवेश किया है। अदाणी समूह की हरित हाइड्रोजन तैयार करने की मुहिम में निवेश के साथ ही वह मुकेश अंबानी की हरित हाइड्रोजन योजना को टक्कर देगी। स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में अदाणी समूह ने बताया टोटाल एनर्जीज अदाणी न्यू इंडस्ट्रीज (एएनआईएल) में अदाणी एंटरप्राइजेज से 25 फीसदी हिस्सेदारी खरीदेगी और उसके साथ मिलकर हरित हाइड्रोजन का तंत्र तैयार करेगी। मगर कंपनी ने सौदे के मूल्य का खुलासा नहीं किया। अदाणी समूह की कंपनियों में टोटाल का यह चौथा निवेश है। एएनआईएल अगले 10 साल में हरित हाइड्रोजन और उससे जुड़े तंत्र में 50 अरब डॉलर (3.9 लाख करोड़ रुपये) निवेश करना चाहती है। शुरुआती चरण में वह 2030 से पहले 10 लाख टन सालाना हरित हाइड्रोजन उत्पादन की क्षमता तैयार करेगी। टोटाल और अदाणी समूह के बीच यह चौथी साझेदारी है। 2021 में उसने अदाणी ग्रीन एनर्जी में 20 फीसदी हिस्सेदारी का अ​धिग्रहण किया था। 2019 में टोटाल ने अदाणी गैस में 37.4 फीसदी और समूह की धामरा एलएनजी परियोजना में 50 फीसदी हिस्सेदारी का अ​धिग्रहण किया था। संयुक्त उपक्रम के तहत ये कंपिनयां 10 साल में धामरा एलएनजी सहित वि​भिन्न रीगैसिफिकेशन टर्मिनल और 1,500 सर्विस स्टेशन का रिटेल नेटवर्क खड़ा करेंगी। 2020 में टोटाल और अदाणी ने 2.3 गीगावाट सौर संप​त्तियों के लिए 17,385 करोड़ रुपये के उद्यम मूल्य वाला संयुक्त उपक्रम बनाया था, जिसमें दोनों कंपनियों की 50-50 फीसदी हिस्सेदारी है। अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि कंपनी दुनिया की सबसे सस्ती हरित हाइड्रोजन विकसित करने में सक्षम होगी। उन्होंने कहा, दुनिया की सबसे बड़ी हरित हाइड्रोजन कंपनी बनने के हमारे सफर में टोटाल एनर्जीज के साथ साझेदारी से शोध एवं विकास, बाजार शोध और वास्तविक ग्राहकों के बारे में समझ विकसित करने में मदद मिलेगी। इससे बाजार की मांग का भी पता लगाने में मदद मिलेगी। टोटाल एनर्जीज के चेयरमैन और मुख्य कार्या​धिकारी पैट्रिक पॉयने ने कहा कि भविष्य में 10 लाख टन प्रतिवर्ष हरित हाइड्रोजन की उत्पादन क्षमता से फर्म को नए डीकार्बनाइज्ड मॉलिक्यूल की हिस्सेदारी बढ़ाकर कुल ऊर्जा उत्पादन और बिक्री की 25 फीसदी करने में मदद मिलेगी। अदाणी ने यह दावा तब किया है, जब मुकेश अंबानी हाल ही में घोषणा कर चुके हैं कि रिलायंस इंडस्ट्रीज एक दशक के अंदर हरित हाइड्रोज की लागत 1 डॉलर प्रति किलोग्राम तक ले आएगी। पिछले दो साल में इन दोनों अरबपति भारतीय उद्योगपतियों ने हरित हाइड्रोजन कारोबार में महत्त्वाकांक्षी निवेश योजनाओं की घोषणा की है। अदाणी ने 2020 में घोषणा की थी कि समूह अपने पूंजीगत व्यय का 70 फीसदी से अधिक स्वच्छ और ऊर्जा कुशल प्रणालियों में लगाएगा। जून 2021 में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 75,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ हरित ऊर्जा के क्षेत्र में उतरने का ऐलान किया था। रिलायंस ने अपनी नई इकाई न्यू एनर्जी ऐंड न्यू मटीरियल्स के तहत सौर ऊर्जा उत्पादन और विनिर्माण, हाइड्रोजन उत्पादन, ई-ईंधन और ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में निवेश की योजना बनाई है।

जून में सुधरी दवाओं की बिक्री
Published / 2022-06-13 16:33:49
जून में सुधरी दवाओं की बिक्री

एबीएन बिजनेस डेस्क (सोहिनी दास)। पहली तिमाही में बिक्री में बड़ी गिरावट के बाद देसी दवा बाजार उद्योग में सुधार नजर आया। जून में बाजार में 2.4 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई जबकि मई में उसमें करीब 9 फीसदी की गिरावट आई थी और अप्रैल में बिक्री पर 11 फीसदी की चोट पड़ी थी। ज्यादातर थेरेपी में सुधार नजर रआया है, जो संकेत देता है कि मांग वापस आ रही है। हालांकि इससे जुड़े लोग दावा कर रहे हैं कि मॉनसून के जल्द आने और जून 2019 के निचले आधार ने इसमें आंशिक भूमिका निभाई। बाजार शोध फर्म एआईओसीडी अवैक्स के आंकड़ोंं के मुताबिक, देसी दवा बाजार ने इस वित्त वर्ष में अप्रैल-जून के दौरान 5.9 फीसदी की नकारात्मक बढ़त दर्ज की। सालाना मूविंग औसत के आधार पर हालांकि बिक्री में 6.1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। एआईओसीडी अवैक्स के निदेशक अमीष मासुरेकर का मानना है कि जून 2019 का आधार निचला था क्योंंकि मॉनसून में थोड़ी देर हुई थी। उन्होंने कहा, उसकी तुलना में इस साल मॉनसून जल्दी आ गया। यह मोटे तौर पर संक्रमरोधी दवाओं जैसी श्रेणी की बिक्री बढ़ाती है। उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि प्रमुख थेरेपी की रफ्तार में सुधार को सकारात्मक संकेत के तौर पर देखा जा सकता है। एआईओसीडी अवैक्स का मानना है कि जून के मुकाबले जुलाई की रफ्तार हालांकि स्थिर रहने की संभावना है। मासुरेकर ने कहा, यह मानना अभी जल्दबाजी होगी कि देसी दवा उद्योग जल्द ही बढ़त की पटरी पर लौट आएगा। जून के मुकाबले जुलाई करीब 2-3 फीसदी की बढ़त के साथ स्थिर रहेगा। क्रॉनिक थेरेपी क्षेत्र हालांकि पटरी पर लौटा है और हृदय रोग के इलाज की दवा में 11.8 फीसदी का इजाफा हुआ है जबकि मधुमेह की दवा में 7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। श्वसन से संबंधित बीमारी की दवा मेंं जून में 9.3 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। चूंकि लोग घर से बाहर निकल रहे हैं, लिहाजा संक्रमण की दर तेज हो रही है। एंटीबायोटिक (संक्रमणरोधी) और एलर्जी की दवा में कमी आई है। एक विश्लेषक ने कहा, उदाहरण के लिए अस्थमा की परेशानी कम हुई है क्योंकि लोग घर में रह रहे हैं। ये चीजें श्वसन रोग के इलाज की दवाओं की बिक्री में नजर आई हैं। एडलवाइस ने कहा कि ग्लेनमार्क फार्मा (13.1 फीसदी), अजंता (9.3 फीसदी), सिप्ला (7.4 फीसदी), टॉरंट (6.7 फीसदी) की रफ्तार भारतीय दवा बाजार के मुकाबले तेज रही। वहीं अन्य कंपनियों मसलन एल्केम (-1.8 फीसदी), नैटको (0.1 फीसदी), जायडस (0.2 फीसदी), सन फार्मा (0.8 फीसदी), डॉ. रेड्डीज (1.1 फीसदी), एलेंंबिक (1.7 फीसदी), ल्यूपिन (1.8 फीसदी) ने सुस्त बढ़ोतरी दर्ज की। ग्लेनमार्क के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि जून में दो अंकों की रफ्तार फेविपिराविर के कारण दर्ज नहीं हुई। फेविपिराविर का इस्तेमाल कोविड-19 के मरीजों के इलाज में होता है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से हमारी बढ़त की रफ्तार बाजार के मुकाबले लगातार बेहतर रही है।

निवेशकों को पसंद आ रहीं होटल क्षेत्र की कंपनियां
Published / 2022-06-13 16:28:08
निवेशकों को पसंद आ रहीं होटल क्षेत्र की कंपनियां

एबीएन सेंट्रल डेस्क (देवांशु दत्ता)। हॉ​स्पिटै​लिटी यानी आतिथ्य सत्कार क्षेत्र में सुधार आता दिख रहा है। मार्च 2020 के बाद से पहली बार, इस उद्योग में ग्राहकों की दर अप्रैल में 65 प्रतिशत के स्तर से ऊपर पहुंच गई। औसत किराया दरें (एआरआर) अब अप्रैल 2019 के मुकाबले 4 प्रतिशत ऊपर हैं। उपलब्ध प्रति कमरा राजस्व (रेवपार) भी अप्रैल 2019 के आंकड़ों से करीब 5 प्रतिशत ऊपर है। लेकिन पांच होटलों के लिए समग्र राजस्व भी वित्त वर्ष 2022 की चौथी तिमाही में तिमाही आधार पर 19 प्रतिशत घटा है, भले ही राजस्व में सालाना आधार पर 40 प्रतिशत तक का इजाफा दर्ज किया गया। समग्र एबिटा में तिमाही आधार पर 52 प्रतिशत की कमी आई, लेकिन कई सूचीबद्ध होटल कंपनियों के लिए सालाना आधार पर इसमें 200 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई। कुल मिलाकर, होटल अब कोविड-पूर्व स्तरों से अपनी एआरआर सुधारने में सक्षम होंगे। कॉरपोरेट मांग कोविड से पहले जैसी ​स्थिति में आने की संभावना मजबूत हो गई है। कमरों की मांग एवं आपूर्ति के बीच अंतर है, जिससे बेहतर प्रा​प्तियां दर्ज की जा सकती हैं। इंडियन होटल्स (आईएचसीएल) के लिए लागत कटौती से कॉरपोरेट खर्च घटकर 28 प्रतिशत रह गया। यह मौजूदा समय में 20 से ज्यादा शहरों में मौजूद है और 25 अन्य शहरों में विस्तार की संभावना तलाश रही है। चौथी तिमाही में कंपनी का राजस्व करीब कोविड-पूर्व स्तरों के 96 प्रतिशत के आसपास था। आईएचसीएल के प्रबंधन ने 300 होटलों का पोर्टफोलियो तैयार करने की योजना बानई है। वित्त वर्ष 2022 तक उसके पोर्टफोलियो में 175 होटलों के साथ 20,581 कमरे शामिल थे। मौजूदा समय में 60 होटलों पर विचार किया जा रहा है और 40 प्रतिशत परियोजनाएं जिंजर शृंखला के अधीन और 74 प्रतिशत प्रबंधन अनुबंधों के दायरे में हैं। आईएचसीएल ने 33 प्रतिशत एबिज मार्जिन का लक्ष्य रखा है जो मौजूदा समय में महज 13 प्रतिशत है। कंपनी के प्रबंधन ने नए व्यवसाय और प्रबंधन शुल्कों से वित्त वर्ष 2026 तक 35 प्रतिशत एबिटा योगदान का अनुमान जताया है, जो मौजूदा समय में 22 प्रतिशत है। प्रबंधन अनुबंध वित्त वर्ष 2022 में सभी कमरों के 36 प्रतिशत पर रहे और अगले 3-5 साल में यह लक्ष्य 50 प्रतिशत रखा गया है। कंपनी को प्रबंधन शुल्क से 400 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल होने की संभावना है। इन अनुबंधों से हासिल होने वाला मौजूदा राजस्व 230 करोड़ रुपये के आसपास है। एक विश्लेषक ने इस शेयर के लिए कीमत लक्ष्य 260 रुपये तय की है, जो उसकी मौजूदा 227 रुपये की कीमत के मुकाबले ज्यादा है। कंपनी के शेयर में बुधवार को करीब 1.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। अप्रैल और मई में लेमन ट्री होटल्स की बेंगलूरु, हैदराबाद, मुंबई और दिल्ली में कमरे भरे रहने यानी ग्राहकों के आने की दर 80 प्रतिशत थी।

एलआईसी का शेयर छह प्रतिशत और टूटा, निर्गम मूल्य से 29% नीचे पहुंचा
Published / 2022-06-13 16:24:00
एलआईसी का शेयर छह प्रतिशत और टूटा, निर्गम मूल्य से 29% नीचे पहुंचा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के शेयरों में लगातार दसवें दिन भी गिरावट का सिलसिला जारी रहा। सोमवार को कंपनी का शेयर करीब छह प्रतिशत और टूट गया। बीएसई में कंपनी का शेयर 5.85 प्रतिशत की गिरावट के साथ 668.20 रुपये प्रति शेयर के भाव पर बंद हुआ। दिन के कारोबार के दौरान यह छह प्रतिशत तक गिरकर 666.90 रुपये प्रति शेयर तक आ गया था। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) में कंपनी का शेयर 5.66 प्रतिशत की गिरावट के साथ 669.50 रुपये प्रति शेयर पर बंद हुआ। एलआईसी के शेयरों में पिछले दस दिन से गिरावट जारी है। इस दौरान कंपनी का शेयर 20.17 प्रतिशत तक टूट गया। एलआईसी का शेयर 17 मई को शेयर बाजारों में सूचीबद्ध हुए था। सरकार ने एक सफल आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के बाद एलआईसी के शेयरों का निर्गम मूल्य 949 रुपये तय किया था, जिसे लगभग तीन गुना अभिदान मिला था। शेयर बाजारों में सूचीबद्ध होने के बाद से एलआईसी का शेयर 949 रुपये के निर्गम मूल्य के मुकाबले अब तक 29.58 फीसदी टूट चुका है।

महंगाई : मई में रिटेल महंगाई दर घटकर 7.04% पर पहुंची
Published / 2022-06-13 15:06:07
महंगाई : मई में रिटेल महंगाई दर घटकर 7.04% पर पहुंची

एबीएन बिजनेस डेस्क। खाने का सामान सस्ता होने से खुदरा मुद्रास्फीति मई महीने में घटकर 7.04 प्रतिशत पर आ गयी। हालांकि, यह पिछले लगातार पांच माह से भारतीय रिजर्व बैंक के संतोषजनक स्तर से ऊपर बनी हुई है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित (सीपीआई) मुद्रास्फीति 7.79 प्रतिशत पर थी। पिछले साल मई में खुदरा मुद्रास्फीति 6.3 प्रतिशत थी। खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर मई, 2022 में घटकर 7.97 प्रतिशत रही जो पिछले महीने 8.31 प्रतिशत थी। भारतीय रिजर्व बैंक ने इस महीने मौद्रिक नीति समीक्षा में चालू वित्त वर्ष के लिये मुद्रास्फीति के अनुमान को 5.7 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है। केंद्रीय बैंक मौद्रिक नीति पर विचार करते समय मुख्य रूप से खुदरा महंगाई दर पर गौर करता है। सरकार ने रिजर्व बैंक को मुद्रास्फीति को दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर रखने की जिम्मेदारी दी हुई है।

राज्य घटाएं पेट्रोल, डीजल पर वैट, इससे मुद्रास्फीतिक दबाव कम होगा : रिजर्व बैंक गवर्नर
Published / 2022-06-09 03:49:48
राज्य घटाएं पेट्रोल, डीजल पर वैट, इससे मुद्रास्फीतिक दबाव कम होगा : रिजर्व बैंक गवर्नर

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि राज्यों के वाहन ईंधन पर मूल्य वर्धित कर (वैट) घटाने से मुद्रास्फीतिक दबाव को कम करने में मदद मिलेगी। केंद्र सरकार पहले ही राज्यों से पेट्रोल और डीजल पर वैट घटाने का आग्रह कर चुकी है। अब रिजर्व बैंक के गवर्नर ने भी केंद्र के सुर में सुर मिलाते हुए वाहन ईंधन पर वैट घटाने की वकालत की है। उन्होंने बुधवार को चालू वित्त वर्ष की तीसरी द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा पेश करने के बाद कहा कि राज्यों के पेट्रोल और डीजल पर लगाए जाने वाले मूल्य वर्धित कर को घटाने से मुद्रास्फीतिक दबाव को कम करने में मदद मिलेगी। सरकार ने पिछले महीने पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में आठ रुपए और डीजल पर छह रुपए लीटर की कटौती की थी। इससे आम लोगों को कुछ राहत मिली है। सरकार ने लोगों को और राहत देने के लिए राज्यों से भी वैट घटाने का अनुरोध किया था। हालांकि, ज्यादातर राज्यों ने सरकार के इस अनुरोध को अनदेखा किया है। दास ने कहा कि 21 मई को ईंधन पर उत्पाद शुल्क में कटौती के बाद शहरी परिवारों के बीच एक सर्वेक्षण में पाया गया कि इस कदम से उनकी मुद्रास्फीति अपेक्षाओं में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने कहा, इस स्थिति में राज्यों का पेट्रोल और डीजल पर वैट घटाना मुद्रास्फीति के साथ-साथ अपेक्षाओं के दबाव को कम करने में मदद कर सकता है। इससे पहले केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पूरी समेत मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों ने भी राज्यों से ईंधन पर वैट घटाने की अपील की थी।

महामारी से निपटने में सरकारी नीतियों ने की भारत की मदद : सीतारमण
Published / 2022-06-08 16:44:01
महामारी से निपटने में सरकारी नीतियों ने की भारत की मदद : सीतारमण

एबीएन सेंट्रल डेस्क। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को कहा कि सरकार की नीतियों और उसके द्वारा उठाए गए सक्रिय कदमों से देश को कोविड-19 महामारी के कारण पैदा हुई स्थिति से उबरने में मदद मिली। उन्होंने कहा कि इन कदमों में कॉरपोरेट कर में कटौती और अर्थव्यवस्था का डिजिटलीकरण जैसे उपाय शामिल हैं। उन्होंने आजादी के अमृत महोत्सव के तहत विशेष सप्ताह समारोह में आयोजित कार्यक्रम ‘भारत की आर्थिक यात्रा @75’ में कहा कि भारत ने अपने मजबूत बुनियादी ढांचे के साथ चुनौतियों का सामना किया और सफलता पाई। इस कार्यक्रम का आयोजन आर्थिक मामलों के विभाग और सेबी ने मिलकर किया था। वित्त मंत्री ने कहा कि 2014 से सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों ने अर्थव्यवस्था और लोगों को मुश्किल समय का मुकाबला करने में सक्षम बनाया। महामारी के दौरान सरकार के लक्षित दृष्टिकोण ने नागरिकों की मदद की। सीतारमण ने कहा, अर्थव्यवस्था को उबारने और (2014 के बाद से) वृद्धि की सभी बाधाओं को दूर करने के बावजूद चुनौतियां थीं और ऐसे में जो बड़े कदम उठाए गए- कॉरपोरेट टैक्स को कम करना, अर्थव्यवस्था का डिजिटलीकरण, आईबीसी कोड जीएसटी - उसने हमें ऐसे हालात का सामना करने के लिए तैयार किया, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। शेयर बाजार में खुदरा निवेशकों की भागीदारी बढ़ी : उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में कोविड के बावजूद भारतीय खुदरा निवेशकों ने शेयर बाजार तक पहुंचने के लिए आॅनलाइन साधन खोजे हैं और निवेशक शिक्षा में सेबी की भूमिका रही है। बढ़ेगी भारत की ग्रोथ : वहीं मुख्य आर्थिक सलाहकार अनंत नागेश्वरन ने कहा है कि महामारी के बादल छंटने और जियो-पॉलिटिकल टेंशन घटने के बाद देश की ग्रोथ रेट बढ़ेगी। वित्त मंत्रालय द्वारा आजादी का अमृत महोत्सव के तहत आयोजित विशेष साप्ताहिक समारोह को संबोधित करते हुए नागेश्वरन ने बुधवार को कहा कि भारत आज ऐसी स्थिति में है जहां उसे वैश्विक वृहद मौद्रिक नीतियों और राजनीतिक घटनाक्रमों दोनों की वजह से कई तरह की चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है। सीईए ने कहा कि इस साल भारत के समक्ष सतत उच्च वृद्धि, मुद्रास्फीति को नीचे लाने और राजकोषीय घाटे को संतुलन में रखने की चुनौतियां होंगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने की जरूरत होगी कि भारतीय रुपये का बाह्य मूल्य कायम रहे।

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