Breaking
ताज़ा समाचार लोड हो रहा है...

बिजनेस

View All
एक जुलाई से फिर बढ़ सकते हैं इस्पात के दाम : JSPL
Published / 2022-06-29 17:18:52
एक जुलाई से फिर बढ़ सकते हैं इस्पात के दाम : JSPL

एबीएन बिजनेस डेस्क। कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण इस्पात के दाम एक जुलाई से फिर बढ़ सकते हैं। हालांकि, इससे पहले इस्पात कीमतें कुछ नीचे आई हैं। जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड (जेएसपीएल) के प्रबंध निदेशक वी आर शर्मा ने इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स की तरफ से यह बात कही। उन्होंने कहा, जहां कोयले की कीमत 17,000 रुपए प्रति टन है, वहीं ओडिशा खनिज निगम के लौह अयस्क की कीमतें अब भी ऊंची हैं। यह ओडिशा में लौह अयस्क का मुख्य आपूर्तिकर्ता है। उन्होंने कहा, इस्पात की कीमतें पहले ही नीचे आ चुकी हैं। उन्हें और कम करने की कोई संभावना नहीं है। मुख्य रूप से उच्च लागत के कारण शुक्रवार यानी एक जुलाई से इस्पात की कीमतों में बढ़ोतरी की जाएगी। शर्मा ने कहा कि द्वितीयक श्रेणी के इस्पात विनिर्माताओं ने पिछले चार दिन में पहले ही सरिये की कीमत 2,000 रुपए बढ़ाकर 55,000 रुपए प्रति टन कर दी है। उन्होंने कहा कि इस्पात विनिर्माताओं पर दबाव के कई और कारण हैं और इसमें कोयले की उपलब्धता का भी मुद्दा हैं। कोयले की आपूर्ति के लिए रैक भी उपलब्ध नहीं हैं क्योंकि उनमें से ज्यादातर का बिजली क्षेत्र के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

रिलांयस जियो के चेयरमैन बने आकाश अंबानी, मुकेश ने दिया इस्तीफा
Published / 2022-06-28 12:57:23
रिलांयस जियो के चेयरमैन बने आकाश अंबानी, मुकेश ने दिया इस्तीफा

एबीएन बिजनेस डेस्क। रिलायंस समूह के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने अपनी दूरसंचार सेवा कंपनी रिलायंस जियो के निदेशक मंडल से इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही उनके बड़े पुत्र आकाश अंबानी को कंपनी का नया चेयरमैन बनाया गया है। रिलायंस जियो इन्फोकॉम ने मंगलवार को शेयर बाजारों को इसकी सूचना दी। इसके मुताबिक, कंपनी के निदेशक मंडल की सोमवार को हुई बैठक में गैर-कार्यकारी निदेशक आकाश अंबानी को कंपनी के चेयरमैन के रूप में नियुक्ति को मंजूरी दी गई। उसके पहले मुकेश अंबानी ने रिलायंस जियो के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके साथ ही पंकज मोहन पवार को अगले पांच साल के लिए कंपनी के प्रबंध निदेशक पद पर नियुक्त किया गया है। वहीं रमिंदर सिंह गुजराल और के वी चौधरी को स्वतंत्र निदेशक नियुक्त किया गया है।

झारखंड : पेट्रोल-डीजल की नई कीमतें जारी, जानें नई कीमत...
Published / 2022-06-27 07:46:25
झारखंड : पेट्रोल-डीजल की नई कीमतें जारी, जानें नई कीमत...

टीम एबीएन, रांची। पेट्रोल डीजल की नई कीमतों को जारी कर दिया गया है। सोमवार (27 जून 2022) को जारी कीमतों के मुताबिक झारखंड के कुछ जिलों में पेट्रोल डीजल के दाम में आंशिक रूप से कमी की गई है तो कई जिलों में दाम में बढ़ोतरी हुई है। दाम में कमी से लोगों ने जहां राहत की सांस ली वहीं कुछ जिलों में दाम बढ़ने से लोग परेशान हैं। आइये जानते हैं कि झारखंड के प्रमुख शहरों में पेट्रोल डीजल का रेट क्या है। रांची में पेट्रोल का दाम : नए रेट के मुताबिक राजधानी रांची में पेट्रोल डीजल के दाम में कल के मुकाबले आज 0.17 पैसे की वृद्धि हुई है। रांची में पेट्रोल 100.01 ₹ प्रति लीटर मिल रहा है, जबकि डीजल का दाम 94.82₹ प्रति लीटर है। इसके साथ ही जमशेदपुर की बात करें तो यहां पेट्रोल डीजल के दाम में 0.10 पैसे की कमी हुई है। इसके साथ ही जमशेदपुर में पेट्रोल का दाम 100.18 ₹ प्रति लीटर हो गया है, जबकि डीजल 94.97 ₹ प्रति लीटर की दर से मिल रहा है।

इलेक्ट्रिक साइकिल खरीदने से पहले जान लें कितनी मिल रही सब्सिडी?
Published / 2022-06-26 15:38:02
इलेक्ट्रिक साइकिल खरीदने से पहले जान लें कितनी मिल रही सब्सिडी?

एबीएन बिजनेस डेस्क। दिल्ली सरकार ने एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया है, जिसके माध्यम से ग्राहक चुनिंदा इलेक्ट्रिक साइकिल की खरीद पर सब्सिडी का लाभ उठा सकते हैं। बैटरी से चलने वाले इलेक्ट्रिक साइकिलों को बड़े पैमाने पर लोगों के लिए अधिक किफायती बनाने के लिए अलग-अलग सब्सिडी की घोषणा की है। सब्सिडी सभी इलेक्ट्रिक साइकिलों के लिए नहीं है। दिल्ली सरकार ने चार कंपनियों से 11 इलेक्ट्रिक साइकिल मॉडल को मंजूरी दी है, जो अब तक सब्सिडी के लिए पात्र हैं। हालांकि इस बात की संभावना है कि आने वाले समय में यह संख्या बढ़ सकती है। इनमें हीरो लेक्ट्रो ई-साइकिल, नेक्सज़ू मोबिलिटी लिमिटेड, स्ट्राइडर साइकिल प्राइवेट लिमिटेड और मोटरवोल्ट मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों के मॉडल शामिल हैं। दिल्ली सरकार 11 इलेक्ट्रिक साइकिल मॉडल में से किसी एक को चुनने वाले पहले 10,000 खरीदारों को ₹5,500 की सब्सिडी प्रदान कर रही है। पहले 1,000 खरीदार दिल्ली ईवी नीति के तहत 2,000 रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी का भी लाभ उठा सकते हैं। सब्सिडी से पहले सरकार द्वारा अनुमोदित इलेक्ट्रिक साइकिल मॉडल की लागत ₹31,000 से ₹55,000 के बीच है। सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए सरकार ने एक ऑनलाइन पोर्टल खोला है, जिस पर डीलर पात्र खरीदारों के जानकारी लगा सकते हैं। पोर्टल खुलने के पहले दिन बुधवार को दो खरीदारों का विवरण अपलोड किया गया, जबकि स्वीकृत सूची में से 20 से अधिक इलेक्ट्रिक साइकिल बेची गईं। दिल्ली सरकार का कहना है कि सब्सिडी राशि जमा करने के लिए खरीदार जानकारी अपलोड करने की तारीख से पांच दिन तक का समय लगेगा। सब्सिडी ग्राहक के आधार से जुड़े बैंक खाते में जमा की जाएगी। इलेक्ट्रिक साइकिल में रजिस्ट्रेशन प्लेट नहीं हैं, दिल्ली सरकार का परिवहन विभाग बेची जाने वाली प्रत्येक इलेक्ट्रिक साइकिल के लिए एक यूनिक नंबर अटैच करेगा। एक डीलर को अन्य जानकारियों के साथ इस नंबर को पोर्टल पर अपलोड करना होगा।

टाटा कैपिटल जुटायेगी रकम
Published / 2022-06-25 17:19:45
टाटा कैपिटल जुटायेगी रकम

एबीएन बिजनेस डेस्क। टाटा कैपिटल की सहायक कंपनी टाटा कैपिटल फाइनैंशियल सर्विसेज अपने खुदरा ऋण कारोबार को मजबूती देने के लिए चालू वित्त वर्ष के दौरान 20,000 करोड़ रुपये तक अतिरिक्त रकम जुटाने की योजना बना रही है। कंपनी तेजी से अपने नेटवर्क का डिजिटलीकरण कर रही है। साथ ही वह हाल में टाटा समूह द्वारा शुरू की गई ई-कॉमर्स कंपनी टाटान्यू नए ऋण देकर नए ग्राहकों को आकर्षित करने में मदद करेगी। इस साल 31 मार्च के अनुसार कंपनी का ऋण बोझ लगभग 48,300 करोड़ रुपये था। टीसीएफएल के अनुसार, कंपनी अपने शेयरधारकों को निजी प्लेसमेंट के आधार पर गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर जारी कर अतिरिक्त रकम जुटाएगी। टाटा कैपिटल की सबसे बड़ी होल्डिंग कंपनी टाटा संस सोमवार को संभवत: फंड जुटाने और उधार लेने की सीमा बढ़ाकर 70,000 करोड़ रुपये करने के लिए अपनी मंजूरी दे सकती है। टीसीएल टाटा संस लिमिटेड की सहायक कंपनी है। टीसीएल में टाटा संस की 94.55 फीसदी हिस्सेदारी है। पिछले पांच वर्षों के दौरान टीसीएल को टाटा संस से 3,500 करोड़ रुपये की पूंजी मिली है। इसमें से 1,000 करोड़ रुपये वित्त वर्ष 2020 में और 2,500 करोड़ रुपये वित्त वर्ष 2019 में टाटा संस से प्राप्त हुए थे। टाटा संस ने वित्त वर्ष 2022 के दौरान टीसीएल में कोई इक्विटी निवेश नहीं किया है। कंपनी ने कहा है कि कोविड वैश्विक महामारी के बावजूद उसके बही खाते का आकार मार्च 2021 में समाप्त वित्त वर्ष के दौरान 45,101 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2022 में 56,169 करोड़ रुपये हो गया क्योंकि ग्राहकों को टाटान्यू जैसे डिजिटल ऐप्लिकेशन के जरिये आकर्षित किया गया। टाटा समूह की वित्तीय सेवा कंपनी ने 817 करोड़ रुपये का कर पश्चात मुनाफा दर्ज किया। कंपनी के दमदार मुनाफे का श्रेय मुख्य रूप से वाहन ऋण, कारोबारी ऋण, व्यक्तिगत ऋण सहित खुदरा फाइनैंस को जाता है क्योंकि कंपनी ने 21,245 करोड़ रुपये का ऋण वितरण किया। पिछले वित्त वर्ष के दौरान उसने 10,288 करोड़ रुपये का ऋण वितरण किया था। कंपनी ने अपने शेयरधारकों को बताया कि पिछले दो वर्षों के कोविड काल के दौरान टाटा समूह के परिवेश के साथ-साथ फिनटेक कंपनियों ने भी नए ग्राहकों को आकर्षित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। कंपनी ने कहा, टाटा डिजिटल, मासिक ईएमआई कार्ड और टाटान्यू प्लेटफॉर्म पर लॉन्च किए गए पर्सनल लोन के लिए भागीदारी से कारोबार को रफ्तार मिली।

वाहनों के लिए जारी हुआ कार सुरक्षा मूल्यांकन कार्यक्रम, जानें कब होगा शुरू...
Published / 2022-06-25 15:08:32
वाहनों के लिए जारी हुआ कार सुरक्षा मूल्यांकन कार्यक्रम, जानें कब होगा शुरू...

एबीएन नॉलेज डेस्क। नया कार सुरक्षा मूल्यांकन कार्यक्रम भारत एनसीएपी, 1 अप्रैल 2023 से शुरू किया जाएगा। यह दुर्घटना परीक्षणों में उनके प्रदर्शन के आधार पर आॅटोमोबाइल को स्टार रेटिंग देने का सिस्टम प्रस्तावित करता है। आधिकारिक बयान के अनुसार, भारत न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम (भारत एनसीएपी) श्रेणी एम 1 (यात्रियों की गाड़ी के लिए इस्तेमाल होने वाले मोटर वाहन, जिसमें चालक की सीट के अलावा आठ सीटें शामिल हैं) के प्रकार के अनुमोदित मोटर वाहनों पर लागू होता है, जिनका सकल वाहन वजन 3.5 टन से कम है चाहे ये देश में निर्मित हो या आयातित। बयान में कहा गया है कि भारत एनसीएपी रेटिंग उपभोक्ताओं को वाहन का मूल्यांकन करने वाले लोगों के लिए प्रदान की जाने वाली सुरक्षा के स्तर का एक संकेत प्रदान करेगी। इस कार्यक्रम के लिए वाहनों का परीक्षण आवश्यक बुनियादी ढांचे के साथ परीक्षण एजेंसियों पर किया जाएगा। उपभोक्ता-केंद्रित मंच के रूप में काम करेगा : ट्वीट्स की एक शृंखला में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि भारत न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम (भारत एनसीएपी) एक उपभोक्ता-केंद्रित मंच के रूप में काम करेगा, जिससे ग्राहक अपनी स्टार-रेटिंग के आधार पर सुरक्षित कारों का विकल्प चुन सकेंगे। जबकि सुरक्षित वाहनों के निर्माण के लिए भारत में मूल उपकरण निमार्ताओं (ओईएम) के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होगी। गडकरी ने कहा, मैंने अब भारत एनसीएपी (न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम) शुरू करने के लिए जीएसआर अधिसूचना के मसौदे को मंजूरी दे दी है, जिसमें भारत में आॅटोमोबाइल को क्रैश टेस्ट में उनके प्रदर्शन के आधार पर स्टार रेटिंग दी जाएगी। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री ने जोर देकर कहा था कि क्रैश परीक्षणों के आधार पर भारतीय कारों की स्टार रेटिंग न केवल कारों में संरचनात्मक और यात्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, बल्कि भारतीय आॅटोमोबाइल की निर्यात-योग्यता को बढ़ाने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। गडकरी ने कहा था कि भारत एनसीएपी के परीक्षण प्रोटोकॉल को मौजूदा भारतीय नियमों में फैक्टरिंग वैश्विक क्रैश-टेस्ट प्रोटोकॉल के साथ जोड़ा जाएगा, जिससे ओईएम अपने वाहनों का परीक्षण भारत की इन-हाउस परीक्षण सुविधाओं में कर सकेंगे।

केंद्र ने बफर स्टॉक के लिए मई तक 52,460 टन प्याज खरीदा
Published / 2022-06-24 17:00:58
केंद्र ने बफर स्टॉक के लिए मई तक 52,460 टन प्याज खरीदा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्र ने बफर स्टॉक बनाए रखने के लिए इस साल मई महीने के अंत तक 52,460 टन प्याज की खरीद की है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। सरकार पिछले कुछ वर्षों से उत्पादन की कमी वाले दिनों में कीमतों में बढ़ोतरी की स्थिति से निपटने के लिए प्याज का बफर स्टॉक बनाए हुए है। प्याज की खरीद नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (नेफेड) के जरिए की जा रही है। वर्ष 2022-23 के लिए 2.50 लाख टन रबी 2022 के मौसम के प्याज की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अधिकारी ने कहा, नेफेड ने इस साल 31 मई तक 52,460.34 टन प्याज की खरीद की है। अधिकारी ने कहा कि चालू वर्ष के लिए निर्धारित लक्ष्य को अगले महीने तक हासिल कर लिया जाएगा। वर्ष 2021-22 में, प्याज कीमतों को नरम बनाने के लिए सुनियोजित और लक्षित रूप से जारी करने के लिए कुल 2.08 लाख टन रबी (सर्दियों) प्याज की खरीद की गई थी। कृषि मंत्रालय के अनुमान के अनुसार, फसल वर्ष 2022-23 (जुलाई-जून) में देश का कुल प्याज उत्पादन 16.81 प्रतिशत बढ़कर तीन करोड़ 11.2 लाख टन होने का अनुमान है, जो कि फसल वर्ष 2021-22 में दो करोड़ 66.4 लाख टन था।

बेहतर कृषि उत्पादन से मिलेगी विकास को गति, 7-7.8% की दर से बढ़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था
Published / 2022-06-23 17:06:51
बेहतर कृषि उत्पादन से मिलेगी विकास को गति, 7-7.8% की दर से बढ़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय अर्थव्यवस्था मौजूदा वैश्विक रूकावटों के बीच दोबारा से सुधर रही है। बेहतर कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने से चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7-7.8 प्रतिशत रह सकती है। अर्थशास्त्रियों ने यह अनुमान जताया है। उनका मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मौजूदा समय में जिन चुनौतियों का सामना कर रही है, उनमें से अधिकतर बाहरी स्रोतों से उत्पन्न हुई है। जाने-माने अर्थशास्त्री और बीआर अंबेडकर स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के कुलपति एन आर भानुमूर्ति ने कहा कि इस समय भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक कारणों से कई चुनौतियों का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि वैश्विक मुद्रास्फीति के दबाव और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण अर्थव्यवस्था के सामने जोखिम पैदा हुआ है। लेकिन अगर हम घरेलू हालात देखें तो भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत है। भानुमूर्ति ने कहा कि बेहतर कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने से भारत को चालू वित्त वर्ष में वैश्विक बाधाओं के बावजूद 7 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल करनी चाहिए। औद्योगिक विकास अध्ययन संस्थान (ISID) के निदेशक नागेश कुमार ने कहा कि जीएसटी संग्रह, निर्यात और पीएमआई के मजबूत आंकड़े 2022-23 के दौरान एक मजबूत वृद्धि दर का संकेत दे रहे हैं। नागेश कुमार का कहना है कि वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7-7.8 प्रतिशत के बीच रह सकती है। फ्रांस के अर्थशास्त्री गाय सोर्मन ने कहा कि ऊर्जा और उर्वरक आयात की उच्च लागत भारत को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है। उन्होंने कहा कि भारत अभी भी एक कृषि अर्थव्यवस्था है। इस वजह से धीमी वृद्धि का सामाजिक प्रभाव शहर के श्रमिकों के अपने गांव वापस जाने से कम हो जाएगा। इससे कृषि उत्पादन और खाद्यान्न निर्यात बढ़ सकता है। एनआर भानुमूर्ति का कहना है कि मार्च 2022 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के उच्च स्तर पर पहुंने और पिछले तीन महीनों में इसमें तेजी जारी रहने का प्रमुख कारण ईंधन के दाम में उछाल है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर ईंधन के दाम बढ़ने और अन्य चीजों के भाव में तेजी से खुदरा महंगाई में अचानक उछाल आया है। लेकिन ईंधन दरों में कटौती और रेपो रेट में बढ़ोतरी होने से महंगाई दर आने वाली तिमाहियों में नरम पड़ सकती है।

घोषणाओं के बाद साहसी और महत्त्वाकांक्षी समझी जा रहीं कंपनियां
Published / 2022-06-19 13:32:49
घोषणाओं के बाद साहसी और महत्त्वाकांक्षी समझी जा रहीं कंपनियां

एबीएन डेस्क (अजय सानी)। पिछले महीने कंपनी क्षेत्र में महज कुछ ही सप्ताहों के भीतर दो घोषणाएं हुर्इं। दोनों घोषणाओं का भारतीय उपभोक्ता बाजार के अतीत से संबंध था। टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने 5 मई को कहा कि वह व्यक्तिगत देखभाल खंड (पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स) खंड में दोबारा कदम रखने की योजना बना रही है। इसी तरह 25 मई को आई एक खबर में कहा गया कि हिंदुस्तान मोटर्स और प्यूजो के बीच संयुक्त उद्यम अगले दो वर्षों में एंबेसडर कार का नया और अधिक खूबियों वाला संस्करण पेश करेगा। इन घोषणाओं के बाद ये कंपनियां कम से कम साहसी और महत्त्वाकांक्षी अवश्य समझी जा सकती हैं। जब उपभोक्ता बाजार छोटा था उनका कारोबार काफी चमका था और ऊंचे शुल्क की वजह से भारतीय बाजार स्थानीय कंपनियों के लिए एक तरह से कारोबारी दृष्टिकोण से सुरक्षित था। हालांकि धीरे-धीरे बाजार की संरचना कारोबारी नियम-कायदों में काफी बदलाव हुआ है। नई ऐंबेसडर कार कैसी होगी इसकी कोई ठोस जानकारी किसी के पास नहीं है। हमें इतना जरूर मालूम है कि यह नई कार हिंदुस्तान मोटर्स के तमिलनाडु संयंत्र में बनेगी। इस नये संयंत्र पर अब सी के बिड़ला समूह की सहायक कंपनी का नियंत्रण है। यह परियोजना हिंदुस्तान मोटर्स की उस योजना से अलग है जिसके तहत वह इलेक्ट्रिक वाहन बनाएगी। हिंदुस्तान मोटर्स इलेक्ट्रिक वाहन कंपनी के पश्चिम बंगाल में उत्तरपाड़ा संयंत्र में बनाएगी। इस संयंत्र के लिए एक विदेशी साझेदार की तलाश कर रही है। पेट्रोल से चलने वाली पुरानी ऐंबेसडर कार 1950 के दशक की तकनीक पर आधारित थी। इस कार को उम्मीद से कहीं अधिक सफलता मिली थी मगर 2014 में इसका सुहाना सफर खत्म हो गया। हिंदुस्तान मोटर्स ने अपना यह ब्रांड प्यूजो को बेच दिया। प्यूजो भारत के कारोबारी बाजार में सबसे पहले कदम रखने वाली कुछ विदेशी कंपनियों में एक थी। ऐंबेसडर कार की दो विशेष खूबियां थीं। उनकी बनावट काफी मजबूत थी और दूसरी खासियत यह थी कि कोई खराबी आने पर मामूली से मामूली मैकेनिक भी उसे ठीक कर सकता था। बाद में स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल(एसयूवी) के बाजार में उतरने के बाद तकनीक पेचीदा होती गई और मैकेनिकों के लिए भी नए हुनर सीखना जरूरी हो गया। एंबेसडर तेजी से सफलता की सीढ़ियां चढ़ रही थी और उस समय केवल प्रीमियर पद्मिनी उसे टक्कर देने वाली एकमात्र कार थी। प्रीमियर पद्मिनी फिएट तकनीक से बनाई गई थी। इसके बाद एक और कार आई जो छोटी थी और उसमें गियर बदलने के लिए कम ताकत का इस्तेमाल करना पड़ता था। इन खूबियों की वजह से यह ऐंबेसडर से उम्दा मानी जाने लगी थी। खरीदारों की लंबी कतार, जल्द डिलिवरी के लिए अतिरिक्त रकम और दूसरी कंपनियों को बाजार से दूर रखने की कवायद के बूते ये दोनों ही कंपनियां काफी मुनाफे में थीं। अपने शुरूआती दिनों में हिंदुस्तान मोटर्स का शेयर बाजार में सबसे महंगे शहरों में एक हुआ करता था। अस्सी के दशक की शुरूआत में मारुति ने बाजार में शानदार मुनाफे के साथ जब आगाज किया और हिंदुस्तान मोटर्स की बाजार हिस्सेदारी में सेंध लगाई तब भी ऐंबेसडर कार की खासी मांग थी। मगर धीरे-धीरे ऐंबेसडर की बाजार में पकड़ कमजोर होती गई। सरकार ने दूसरे मॉडल की कारें खरीदनी शुरू कर दी थी। यह ऐंबेसडर के प्रति घटते आकर्षण का एक स्पष्ट संकेत था। पहले ऐंबेसडर कारों के लिए एक ही बार में भारी भरकम आॅर्डर आते थे मगर बाद में यह सिलसिला कमजोर पड़ने लगा। ब्रिटेन और यूरोप में ऐंबेसडर की बिक्री बढ़ाने का पूरा प्रयास किया गया मगर यह ऐंबेसडर की रफ्तार बनाए रखने के लिए काफी साबित नहीं हुआ। इतिहास के पन्ने पलटने के बाद एंबेसडर के नए अवतार में लोगों की काफी दिलचस्पी हो सकती है। हो सकता है कि नया संस्करण एक बार फिर बाजार में छा जाए। आयशर के उदाहरण पर विचार किया जा सकता है जिसने रॉयल एनफील्ड ब्रांड के तहत मोटरसाइकिल उतारी और इससे कंपनी की किस्मत दोबारा चमक गई। एक प्रमुख अंतर यह है कि एनफील्ड एक अच्छा उत्पाद था मगर यह खराब प्रबंधन का शिकार हो गया। ऐंबेसडर के साथ जुड़ा एक पहलू यह भी था कि इसका कारोबार एक सीमित बाजार में होता रहा। ब्रांड की महत्ता दोबारा स्थापित करना ऐंबेसडर के नए संस्करण के लिए एक चुनौती होगी। देश में उदारीकरण के शुरूआती दिनों में ही टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट पर्सनल केयर कारोबार से बाहर निकल गई थी। टाटा आॅयल मिल कंपनी (टॉमको ) बेच दी गई और बाद में हिंदुस्तान यूनिलीवर ने लैक्मे कॉस्मेटिक ब्रांड खरीद लिया। उदारीकरण से पहले टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के उत्पाद का लोगों में काफी रसूख हुआ करता था। वह ऐसा दौर था जब किसी को एक आयातित कैमे साबुन देना एक महंगा उपहार माना जाता था। टाटा आॅयल मिल कंपनी में बने साबुन जैसे हमाम और मोती उस समय कम दाम में अच्छे उत्पाद माने जाते थे और अच्छी पैकिंग में आते थे। तब एक मोटे ग्लास बोतल में नारियल तेल भी आया करता था और टाटा कुछ सुगंधित उत्पाद भी बनाया करती थी जो डियोड्रेंट की तरह भी काम करता था। उस समय भारत में डियोड्रेंट कर मिलना बड़ी बात हुआ करती थी। मोती साबुन उस समय महंगा समझा जाता था, खासकर सीमित पैसों में घर चलाने वाली महिलाओं के लिए यह एक बड़ा उत्पाद हुआ करता था। मगर किशोर एवं युवाओं को मोती साबुन रास नहीं आया करता था। अस्सी के दशक में पैदा हुए लोगों के लिए लैक्मे ब्रांड अब भी खासा मायने रखता है। विदेशी ब्रांडों की चमक के बावजूद मध्यम दायरे में आने वाला यह उत्पाद 80 के दशक के लोगों का पसंदीदा हुआ करता था। नमक एवं चाय की खुदरा बिक्री करने वाली टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने पर्सनल केयर श्रेणी को लेकर फिलहाल विस्तार से कुछ नहीं कहा है। मगर हम इतना जानते हैं कि यह टाटा ब्रांड के बूते बाजार में फिर अपनी धाक जमाना चाहती है। यह एक सुरक्षित दांव है, बशर्ते कंपनी नैनो की तरह कोई उत्पाद नहीं लाए जिसका अंत सुखद नहीं रहा। इलेक्ट्रिक वाहन अवतार में अपनी वापसी करने वाली चेतक स्कूटर की तरह ही दो पुराने स्थापित ब्रांडों का वापसी की योजना बनाना एक तरह से उन ब्रांडों का पुनर्जन्म हो सकता है जो आर्थिक सुधारों के बाद कमजोर या विलुप्त हो गए थे। ऊंचे शुल्क और आत्मनिर्भरता के नारे के बीच पुराने ब्रांडों को नए अवतार में उतारने के लिए पर्याप्त संभावनाएं नजर आ रही हैं।

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ 24 अपने सभी पाठकों और प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और विश्वास के लिए धन्यवाद।

विज्ञापन

© 2026 ABN News 24. All Rights Reserved.

कुल पाठक (Total Visitors): 56,568