एबीएन बिजनेस डेस्क। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने सोमवार को कहा कि देश में 2022 की शुरूआत में पारा चढ़ना खाद्य वस्तुओं के दाम में तेजी का प्रमुख घरेलू कारण रहा है। एजेंसी ने 2021-22 के मुकाबले चालू वित्त वर्ष में खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दबाव को देखते हुए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति 2022-23 में 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। यह भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 6.7 प्रतिशत के अनुमान से कुछ अधिक है। आरबीआई मुद्रास्फीति में वृद्धि का प्रमुख कारण रूस-यूक्रेन युद्ध और उससे जिंसों के दाम में तेजी को बताता रहा है। महंगाई दर लगातार रिजर्व बैंक के संतोषजनक स्तर (दो से छह प्रतिशत) के ऊपर बनी हुई है। फिलहाल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में खाद्य वस्तुओं की हिस्सेदारी 39 प्रतिशत है। क्रिसिल रिसर्च ने एक रिपोर्ट में कहा, ह्यह्यखाद्य वस्तुओं की महंगाई दर का मुख्य कारण आपूर्ति की कमी है। आपूर्ति कम होने की वजह रूस-यूक्रेन युद्ध के साथ घरेलू स्तर पर गर्मी का अचानक से बढ़ना है।' रेटिंग एजेंसी ने कहा, ह्यह्यहमारा अनुमान है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 6.8 प्रतिशत रहेगी। यह खाद्य मुद्रास्फीति के सात प्रतिशत के स्तर पर रहने के अनुमान पर आधारित है। रिपोर्ट के अनुसार मौद्रिक नीति समिति के समक्ष खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर एक बड़ी चुनौती है। गर्मी के बढ़ने से उत्तर पश्चिम और मध्य भारत में औसत तापमान 122 साल के उच्चस्तर पर पहुंच गया था। पारा चढ़ने से गेहूं, मूंगफली, बाजरा और आम जैसे फसलों पर असर पड़ा है। क्रिसिल ने कहा, ह्यह्यलू चलना प्रमुख घरेलू कारण है जिससे इस साल खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़े हैं। यह 2020 के आरबीआई के एक अध्ययन की ओर संकेत देता है। इसमें कहा गया है कि खाद्य मुद्रास्फीति पर जलवायु परिवर्तन का व्यापक आर्थिक प्रभाव पिछले दो दशकों में भारत के लिए सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण रहा है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के कुछ दिन बाद भारतीय रिजर्व बैंक भी प्रमुख नीतिगत दर रेपो में 0.25 से 0.35 प्रतिशत की वृद्धि कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मुद्रास्फीति पर अंकुश के लिए केंदीय बैंक आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में रेपो दर बढ़ा सकता है। केंद्रीय बैंक पहले ही अपने नरम मौद्रिक रुख को धीरे-धीरे वापस लेने की घोषणा कर चुका है। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिन की द्विमासिक बैठक तीन अगस्त से शुरू हो रही है। बैठक के नतीजों की घोषणा पांच अगस्त को होगी। खुदरा मुद्रास्फीति छह माह से रिजर्व बैंक के छह प्रतिशत के संतोषजनक स्तर से ऊपर बनी हुई है। ऐसे में रिजर्व बैंक ने मई और जून में रेपो दर में क्रमश: 0.40 प्रतिशत और 0.50 प्रतिशत की वृद्धि की थी। विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंक इस सप्ताह प्रमुख नीतिगत दर को कम से कम महामारी-पूर्व के स्तर पर ले जाएगा। आगामी महीनों में इसमें और वृद्धि होगी। बोफा ग्लोबल रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है, हमारा मानना है कि एमपीसी पांच अगस्त को रेपो दर में 0.35 प्रतिशत की बढ़ोतरी करेगी। साथ ही वह अपने रुख को धीरे-धीरे सख्त करेगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि रेपो दर में आक्रामक 0.50 प्रतिशत या कुछ नरम 0.25 प्रतिशत की वृद्धि की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। बैंक ऑफ बड़ौदा की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि फेडरल रिजर्व ने कैलेंडर साल 2022 में ब्याज दरों में 2.25 प्रतिशत की वृद्धि की है। इससे ऐसी संभावना बन रही है कि रिजर्व बैंक भी ब्याज दरों में तय समय से पहले अधिक वृद्धि कर सकता है। रिपोर्ट कहती है, हालांकि भारत में परिस्थितियों को देखते हुए अभी आक्रामक रुख की जरूरत नहीं है। हाउसिंग.कॉम के समूह मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) ध्रुव अग्रवाल ने कहा कि अमेरिका सहित दुनिया के अन्य देशों के बैंकिंग नियामक आक्रामक तरीक से ब्याज दरें बढ़ा रहे हैं। लेकिन भारत में स्थिति ऐसी नहीं है। यहां आक्रामक तरीके से ब्याज दरें बढ़ाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारा अनुमान है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में 0.20 से 0.25 प्रतिशत की वृद्धि करेगा। डीबीएस ग्रुप रिसर्च की कार्यकारी निदेशक और वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव ने एक रिपोर्ट में कहा कि रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति अगली दो तिमाहियों में मूल्य स्थिरता पर ध्यान केंद्रित करेगी। ऐसे में हमारा मानना है कि अगस्त में एमपीसी रेपो दर में 0.35 प्रतिशत की वृद्धि करेगी। भारतीय रिजर्व बैंक नीतिगत रुख तय करते समय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति पर गौर करता है। खुदरा मुद्रास्फीति जनवरी, 2022 से छह प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है। जून में यह 7.01 प्रतिशत के स्तर पर थी।
एबीएन बिजनेस डेस्क। रसोई गैस की बढ़ी हुई कीमतों से परेशान जनता को सरकार ने सोमवार को बड़ी राहत दी है। ऑयल कंपनियों ने रसोई गैस के दाम घटाए गए हैं। अब कमर्शियल सिलेंडर 36 रुपये सस्ता मिलेगा। हालांकि, घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। नए रेट के मुताबिक, एक अगस्त यानी आज से दिल्ली में 19 किलो वाला एलपीजी सिलेंडर 1976.50 रुपये में मिलेगा, जबकि पहले इसकी कीमत 2012.50 रुपये थी। इसके अलावा कोलकाता में यह 2095.50 रुपये, मुंबई में 1936.50 रुपये व चेन्नई में 2141 रुपये में मिलेगा। घरेलू सिलेंडर पर कोई राहत नहीं : भले ही ऑयल कंपनियों ने कमर्शियल सिलेंडर के दाम में भारी कटौती की हो, लेकिन घरलू सिलेंडर के दाम वहीं के वहीं हैं। 14.2 किलोग्राम वाला घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर पुराने ही दाम पर मिल रहा है। छह जुलाई को इसके दाम में भारी इजाफा किया गया था। ऑयल कंपनियों ने घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में 50 रुपये तक का इजाफा किया था। इसके बाद से इसके दाम 1000 रुपये के पार ही बने हुए हैं।
एबीएन बिजनेस डेस्क। पेटीएम की पैतृक कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस ने भुगतान और उधारी उत्पाद व्यवसायों के वितरण को प्राथमिकता दी है, क्योंकि कंपनी ने वित्त वर्ष 2023 की दूसरी तिमाही तक परिचालन मुनाफा हासिल करने का लक्ष्य रखा है। डिजिटल भुगतान कंपनी ने सूचीबद्धता के बाद पहली बार वित्त वर्ष 2022 के लिए सालाना रिपोर्ट पेश की है। पेटीएम के संस्थापक एवं मुख्य कार्याधिकारी विजय शेखर शर्मा ने कहा कि कंपनी ने भुगतान सेगमेंट में शानदार वृद्धि दर्ज की है और उधारी तथा पेमेंट डिवाइस व्यवसाय में तेजी से दायरा बढ़ाया है। शर्मा ने कहा, पेटीएम के बिजनेस मॉडल का उद्देश्य भुगतान सेवाओं के लिए उपभोक्ता ओर व्यवसायियों को जोड़ना और उपभोक्ताओं को सेवाएं मुहैया कराना है। यह हमारे वितरण, संग्रह, लेनदेन और व्यवहार संबंधित अंतर्दृष्टि का लाभ उठाकर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ‘बाई नाउ पे लैटर’ (बीएनपीएल) पसंदीदा पेशकश बन गई है। यह पेशकश उपभोक्ताओं को पॉइंट आॅफ सेल पर हमारे ऋण लाभ की अनुमति देती है। कंपनी ने अपनी सालाना रिपोर्ट में कहा, हमारा उधारी व्यवसाय लगातार बढ़ रहा है और महंगी बिक्री संबंधित राजस्व आकर्षित कर रहा है। पेटीएम वित्तीय संस्थानों की भागीदारी के जरिये पर्सनल लोन, मर्चेंट लोन और बीएनपीएल विकल्प मुहैया कराती है। पेटीएम के उधारी भागीदारों ने वित्त वर्ष 2022 में प्लेटफॉर्म के जरिये 1.52 करोड़ ऋण वितरित किए, जो वित्त वर्ष 2021 के मुकाबले 478 प्रतिशत की वृद्धि है। ऋणों की वैल्यू वित्त वर्ष 2022 में 441 प्रतिशत बढ़कर 7,623 करोड़ रुपये हो गई, जो वित्त वर्ष 2021 में 1,409 करोड़ रुपये थी। शर्मा ने कहा, पेटीएम ऐप के प्लेटफॉर्म पर अब ज्यादा संख्या में उपयोगकर्ता किसी रियायत के बगैर भी अपनी दैनिक जरूरतों के लिए जुड़ रहे हैं। हमने अच्छी गुणवत्ता के ग्राहक और कारोबारियों को जोड़कर अपने पेमेंट नेटवर्क का दायरा बढ़ाने पर ध्यान दिया है। पेटीएम के मासिक लेनदेन संबंधित उपयोगकर्ता की संख्या सालाना आधार पर 41 प्रतिशत बढ़ी, जो वित्त वर्ष 2022 की चौथी तिामही के दौरान 7 करोड़ के पार पहुंच गई। श्रेय के समाधान के लिए तीसरी बार बढ़ी समयसीमा : श्रेय समूह की फर्मों के लिए समाधान योजना जमा कराने की समयसीमा तीसरी बार बढ़ाई गई है और अब 10 अगस्त तक समाधान योजना जमा कराई जा सकती है। ये फर्में कॉरपोरेट दिवालिया कार्यवाही का सामना कर रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, चार आवेदकों ने लेनदारों से समयसीमा बढ़ाने का अनुरोध किया था। श्रेय के प्रशासक रजनीश शर्मा ने इस पर टिप्पणी करने से मना कर दिया। पहले की समयसीमा 30 जुलाई थी। समझा जाता है कि एरेना इन्वेस्टर्स, एलपी व वीएफएसआई होल्डिंग्स (वरडे पार्टनर्स की सहायक) तीन समाधान आवेदक हैं। वरडे ने टिप्पणी करने से मना कर दिया जबकि एरेना की टिप्पणी की प्रतीक्षा की जा रही है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। वैश्विक बाजार के मिलेजुले रुख के बीच स्थानीय स्तर पर धातु, बेसिक मैटेरियल्स, ऊर्जा, आईटी, तेल एवं गैस और टेक समेत सभी 19 समूहों में हुई लिवाली की बदौलत आज शेयर बाजार सवा प्रतिशत चढ़कर तीन माह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। बीएसई का तीस शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 712.46 अंक की उड़ान भरकर 29 अप्रैल के उच्चतम स्तर 57 हजार अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर के पार 57570.25 अंक पर पहुंच गया। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 228.65 अंक उछलकर 17 हजार अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर 17158.25 अंक पर रहा। बीएसई की छोटी और मझौली कंपनियों में भी तेजी रही। मिडकैप 1.01 प्रतिशत चढ़कर 24,050.90 अंक और स्मॉलकैप 1.38 प्रतिशत की छलांग लगाकर 27,056.38 अंक पर रहा। इस दौरान बीएसई में कुल 3471 कंपनियों के शेयरों में कारोबार हुआ, जिनमें से 2100 में लिवाली जबकि 1227 में बिकवाली हुई वहीं 144 में कोई बदलाव नहीं हुआ। इसी तरह एनएसई में 43 कंपनियां हरे जबकि शेष सात लाल निशान पर रही। बीएसई में सभी 19 समूहों में तेजी का रुख रहा। इस दौरान धातु समूह सर्वाधिक 4.59 प्रतिशत के बढ़त में रहा। साथ ही बेसिक मैटेरियल्स 2.30, सीडीजीएस 1.46, ऊर्जा 2.41, हेल्थकेयर 1.04, इंडस्ट्रियल्स 1.12, आईटी 1.71, ददूरसंचार 1.34, यूटिलिटीज 1.41, आॅटो 1.29, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.47, तेल एवं गैस 2.21, पावर 1.33 और टेक समूह के शेयर 1.68 प्रतिशत चढ़ गए। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मिलाजुला रुख रहा। ब्रिटेन का एफटीएसई 0.39 और जर्मनी का डैक्स 0.94 प्रतिशत मजबूत रहा वहीं जापान का निक्केई 0.05, हांगकांग का हैंगसैंग 2.26 और चीन का संघाई कंपोजिट 0.89 प्रतिशत उतर गया।
एबीएन बिजनेस डेस्क। फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो के शेयर अब तक अपने निवेशकों को तगड़ा नुकसान करवा चुके हैं। हर किसी के मन में अभी एक ही सवाल है कि आखिर जोमैटो के शेयरों में यह गिरावट कब थमेगी, लेकिन फिलहाल जोमैटो के शेयरों में तेजी की कोई आस नजर नहीं आ रही है। अब तो न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में फाइनेंस के प्रोफेसर और वैल्यूएशन गुरु अश्वथ दामोदरन ने भी कह दिया है कि जोमैटो के शेयरों में अभी और गिरावट आएगी। गौरतलब है कि दामोदरन जोमैटो के शेयर पर शुरू से ही नजर रखे हुए हैं। एक साल पहले ही उन्होंने कहा था कि इस शेयर की वैल्?यूएशन 41 रुपये है। उनकी बात सच हुई और जोमैटो का शेयर 26 जुलाई को 41.60 रुपये पर आ गया। हालांकि, गुरुवार को इस स्टॉक में तेजी दर्ज की गई है और यह 3.53 फीसदी की तेजी के साथ 45.50 रुपये पर बंद हुआ है। 35 रुपये तक जाएगा शेयर : दामोदरन ने अपने ब्लॉग पर लिखा है कि कंपनी और बाजार बदल चुके हैं। जोमेटो के प्रत्येक शेयर की वैल्यू 40.79 रुपये से गिरकर 35.32 रुपये पर आ गई है। पिछले साल से बुनियादी आर्थिक स्थितियों में बदलाव के बाद वैल्यू में भी बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि अब वैल्यू के लिए कंपनी को कंट्रीब्यूशन मार्जिन और एडजस्टेड को बार-बार दोहराना बंद करना होगा। उसे बेचे जाने वाले गुड्स की कॉस्ट की ग्रोथ में कमी लानी होगी। 19 फीसदी की ओर गिरावट : दामोदरन की वैल्यूएशन के हिसाब से जोमैटो के शेयरों में अभी 19 फीसदी की गिरावट और आ सकती है। हाल में स्टॉक मार्केट में लिस्ट होने वाली न्यू एज टेक कंपनियों में जोमैटो ने निवेशकों का सबसे ज्यादा पैसा डुबोया है। अगर वैल्यूएशन गुरु की गणना सही साबित हुई तो जोमैटो शेयर अपने उच्चतम स्तर से करीब 80 फीसदी गिर जाएगा। जोमैटो और इस तरह की दूसरी न्यू एज कंपनियों निवेशकों को अब तक 3 लाख करोड़ रुपये का नुकसान करा चुकी हैं। कब खरीदें : दामोदरन का कहना है कि अगर जोमैटो के शेयर का प्राइस 35 रुपये या इससे नीचे चला जाता है तो इसमें खरीदारी का मौका होगा। दामोदरन ने क?हा कि पिछले दो हफ्तों जैसी गिरावट अगर आगे भी आती है तो इस शेयर का प्राइस 35 रुपये तक आ सकता है। जोमैटो को लेकर दामोदरन का अनुमान ब्रोकरेज फर्म जेफरीज से उलट है। ब्रोकरेज ने तेजी का अनुमान जताते हुए कहा था कि एक साल में जोमैटो का शेयर 100 रुपये तक जाएगा।
एबीएन बिजनेस डेस्क। भारतीय बैंकों के पास बिना दावे वाली राशि लगातार बढ़ती जा रही है। आरबीआई की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2021-22 में बैंकों में बिना दावे वाली राशि बढ़कर 48,262 करोड़ रुपए हो गई है। इससे पिछले वित्त वर्ष में यह राशि 39,264 करोड़ रुपए थी। अब आरबीआई ने इस अनक्लेम्ड राशि के दावेदारों को ढूंढने के लिए अभियान चलाने का निर्णय लिया है। रिजर्व बैंक उन 8 राज्यों में अपना ध्यान केंद्रित करेगी, जहां सबसे ज्यादा रकम जमा है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के अनुसार, अगर कोई उपभोक्ता अपने खाते से 10 साल तक कोई लेनदेन नहीं करता है तो उस खाते में जमा रकम अनक्लेम्ड हो जाती है। जिस खाते से लेनदेन नहीं किया जा रहा है, वह निष्क्रिय हो जाता है। अनक्लेम्ड राशि बचत खाता, चालू खाता, फिक्स्ड डिपॉजिट और रेकरिंग डिपॉजिट खाते में हो सकती है। अनक्लेम्ड राशि को रिजर्व बैंक के डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड में डाल दिया जाता है। आठ राज्यों में ज्यादा रकम : एक रिपोर्ट के अनुसार, रिजर्व बैंक के एक अधिकारी ने बताया कि इसमें से ज्यादातर राशि तमिलनाडु, पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र, बंगाल, कर्नाटक, बिहार और तेलंगाना/आंध्र प्रदेश के बैंकों में जमा हैं। रिजर्व बैंक ने कहा कि बैंकों द्वारा कई जागरुकता अभियान चलाने के बावजूद समय के साथ बिना दावे वाली राशि लगातार बढ़ती जा रही है। केंद्रीय बैंक ने तय किए हैं नियम : आरबीआई द्वारा लावारिस जमा रकम को लेकर तय किए गए नियमों की बात करें, तो आरबीआई ने आदेश दिया था कि जिन खातों पर बीते 10 सालों से कोई दावेदार सामने नहीं आया है, उनकी लिस्ट तैयार की जाए। इस लिस्ट को सभी बैंक अपनी वेबसाइट पर अपलोड करें। इसमें खाताधारकों के नाम और पते भी शामिल होने चाहिए।
एबीएन बिजनेस डेस्क। भविष्य में गाड़ी खरीदने का प्लान कर रहे लोगों को सरकार ने एक अच्छी खबर दी है। दरअसल वर्तमान में पेट्रोल- डीजल काफी महंगा हो रहा है। लोग इसका विकल्प इलेक्ट्रिक वाहनों में ढूंढ रहे हैं लेकिन महंगा होने की वजह से कई लोग नहीं खरीद पाते हैं। लेकिन ऐसे लोगों के लिए सरकार अब विशेष व्यवस्था करने जा रही है जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमत पेट्रोल वाहनों जितनी हो जाएगी। नितिन गडकरी ने दी जानकारी : केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि प्रौद्योगिकी और हरित ईंधन में तेजी से प्रगति से इलेक्ट्रिक ऑटोमोबाइल की लागत कम हो जाएगी। आपको बता दें कि एक कार्यक्रम के दौरान इससे पहले नितिन गडकरी ने कहा था कि 2 साल के भीतर इलेक्ट्रिक व्हीकल की कीमत पेट्रोल वाहनों के बराबर हो जाएगी। यानी सरकार इस पर जोर-शोर से काम कर रही है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह एक क्रांति ला सकता है। सोडियम आयन बैटरी विकसित करने पर हो रहा काम : केंद्रीय मंत्री गडकरी ने सांसदों से भी हाइड्रोजन टेक्निक अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने सांसदों को अपने-अपने क्षेत्र में सीवेज के पानी को हरित हाइड्रोजन बनाने की पहल करें। उन्होंने यह भी बताया कि हाइड्रोजन जल्द सबसे सस्ता ईंधन विकल्प होगा। नितिन गडकरी ने कहा, लिथियम-आयन बैटरी की कीमत में तेजी से कमी आ रही है। हम जिंक-आयन, एल्यूमीनियम-आयन, सोडियम-आयन बैटरी को विकसित कर रहे हैं। अधिकतम दो साल में इलेक्ट्रिक स्कूटर, कार, ऑटो रिक्शा की कीमत पेट्रोल से चलने वाले स्कूटर, कार, ऑटोरिक्शा के बराबर होगी। खर्च में आएगा बहुत बड़ा अंतर : केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, ‘इसका फायदा यह होगा यदि आप आज पेट्रोल पर 100 रुपये खर्च कर रहे हैं तो इलेक्ट्रिक वाहन को चलाने में यह लागत घटकर 10 रुपये आ जाएगी।’ गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही नितिन गडकरी ने ग्रीन हाईड्रोजन फ्यूल कार लॉन्च किया था। दरअसल, नितिन गडकरी एलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। ग्रीन हाइड्रोजन से चलने वाली कार से चलने पर महज 1 रुपये प्रति किमी से भी कम का खर्च आएगा, जबकि पेट्रोल पर चलने वाली कार का खर्च 5-7 रुपये प्रति किमी आता है। अब वहां कंपनी निर्माता भी एलेक्ट्रिक वाहनों पर काम कर रही है। इस पायलट प्रोजेक्ट में टोयोटा किर्लोस्कर मोटर की FCEV टोयोटा मिराई कार शामिल है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। लगातार कमजोर हो रहे रुपए में और गिरावट आ सकती है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि व्यापार घाटा बढ़ने और अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा इस सप्ताह ब्याज दरों में आक्रामक वृद्धि से निकट भविष्य में रुपया और टूटकर 82 प्रति डॉलर तक गिर सकता है। ऐसी अटकलें हैं कि अमेरिका का केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व 26-27 जुलाई की बैठक में ब्याज दरों में 0.50-0.75 प्रतिशत तक की वृद्धि कर सकता है। इससे भारत जैसे उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी की निकासी तेज हो सकती है। डॉलर के बाह्य प्रवाह और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों की वजह से रुपए की कीमत में और गिरावट आ सकती है। बीते सप्ताह रुपया टूटकर 80.06 प्रति डॉलर के अपने सर्वकालिक निचले स्तर पर आ गया था। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि रुपया अपने सर्वकालिक निचले स्तर को छूने के बाद अगले साल मार्च तक करीब 78 प्रति डॉलर पर रह सकता है। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के प्रमुख अर्थशास्त्री सुनील कुमार सिन्हा ने कहा, हमारे आकलन के अनुसार रुपया करीब 79 प्रति डॉलर पर रहेगा। यह पूरे साल के लिए रुपये का औसत मूल्य होगा। गिरावट के मौजूदा दौर में रुपया और टूटकर 81 प्रति डॉलर से भी नीचे जा सकता है। इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, अंत में वैश्विक धारणा और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के प्रवाह से ही तय होगा कि साल के बाकी महीनों में रुपया और कमजोर होगा या फिर अमेरिका में मंदी की आशंका के बीच डॉलर की ताकत घटेगी। नोमुरा का मानना है कि जुलाई से सितंबर के दौरान रुपया कई कारकों की वजह से 82 प्रति डॉलर के निचले स्तर तक जा सकता है। क्रिसिल का भी अनुमान है कि निकट भविष्य में रुपया दबाव में रहेगा और रुपए-डॉलर की विनिमय दर उतार-चढ़ाव वाली होगी। क्रिसिल की प्रमुख अर्थशास्त्री दीप्ति देशपांडे ने कहा, हालांकि वित्त वर्ष के अंत तक रुपये का दबाव कुछ कम होगा। मार्च 2023 तक विनिमय दर 78 रुपए प्रति डॉलर रह सकती है। मार्च 2022 में यह 76.2 प्रति डॉलर रही थी। उल्लेखनीय है कि महंगे आयात की वजह से जून में व्यापार घाटा बढ़कर 26.18 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में व्यापार घाटा बढ़कर 70.80 अरब डॉलर रहा है।
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