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एमआरएफ : कभी बनाती थी गुब्बारे, आज शेयर्स ने बनाये रिकॉर्ड
Published / 2023-06-17 14:33:24
एमआरएफ : कभी बनाती थी गुब्बारे, आज शेयर्स ने बनाये रिकॉर्ड

एबीएन बिजनेस डेस्क। टायर बनाने वाली कंपनी एनएफ ने रिकॉर्ड बनाया है। हाल में कंपनी के शेयर्स ने 1 लाख रुपये के आंकड़े पार पहुंचकर इतिहास रच दिया। एमआरएफ को भले ही टायर बनाने की कंपनी के तौर पार जाना जाता है, लेकिन कभी यह कंपनी बच्चों के लिए गुब्बारा बनाने के लिए फेमस थी। 1946 में शुरू हुई कंपनी एमआरएफ का पूरा नाम है मद्रास रबर फैक्ट्री। मैमन मपिल्लई ने इसकी नींव आजादी से पहले रखी। वहीं मपिल्लई जो सड़कों गुब्बारे बेचा करते थे। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि गुब्बारे से शुरू हुए सफर के जरिये वो बुलंदिया छू लेंगे। ईसाई परिवार में जन्में मापिल्लई के पिता सफल कारोबारी थे, लेकिन जिन हालातों में कंपनी की शुरुआत हुई वो काफी चुनौतीपूर्ण थीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।जब त्रावणकोर के राजा आजादी की लड़ाई में शामिल हुए तो उन्होंने मपिल्लई के पिता की प्रॉपर्टी को जब्त कर लिया। नतीजा, पिता का कारोबार ठप हो गया। हालांकि हालातों से लड़ते हुए एक गुब्बारा बनाने वाली कंपनी शुरू की गयी।कंपनी के शुरुआती दौर में मपिल्लई ने खुद एक-एक दुकान पर जाकर गुब्बारा बेचना शुरू किया। आजादी के बाद हालात बदले और कारोबार को नई तरह विस्तार करने की योजना बनायी।  1954 में रबर उत्पादन की ट्रेनिंग लेने के बाद इससे जुड़ा कारोबार शुरू किया।1962 में रबर के टायर बनाने शुरू किये। देश में एमआरएफ के टायरों को पॉपुलैरिटी मिलनी शुरू हुई। साल 1964 कंपनी के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इसी साल कंपनी ने टायर अमेरिका एक्सपोर्ट करने शुरू किये।समय के साथ कंपनी ने विस्तार किया। 1989 में एमआरएफ ने स्पोर्ट्स में एंट्री की। 1989 में खिलौने बनाने वाली दिग्गज कंपनी हैसब्रो इंटरनेशनल यूएसए के साथ हाथ मिलाया। 1993 में बिजनेस के क्षेत्र में योगदान के लिए मपिल्लई को पद्मश्री से सम्मानित किया गया। मपिल्लाई यह सम्मान पाने वाले पहले दक्षिण कारोबारी रहे हैं।कंपनी ने 1973 में पहला रेडियल टायर बनाया। इसके बाद कंपनी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। एमआरएफ की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, पहली बार 2007 में एमआरएफ ने एक अरब अमेरिकी डॉलर का कारोबार करके रिकॉर्ड बनाया। अगले 4 सालों में कारोबार बढ़कर 4 गुना तक पहुंच गया।कंपनी वर्तमान में वाहनों, हवाईजहाज के साथ लड़ाकू विमान सुखोई के लिए भी टायर बना रही है। दुनिया के 65 देशों में एमआरएफ के उत्पादों की पहुंच है। एमआरएफ की कंपनी ने समय-समय पर अपने निवेशकों को मालामाल किया है।एनएसई की वेबसाइट के मुताबिक, 1991 कंपनी के एक शेयर की कीमत मात्र 11 रुपये थी। यह पहला मौका नहीं है जब कंपनी के शेयर 1 लाख के पार पहुंचे। फरवरी 2021 में भी कंपनी के शेयर्स ने 1 लाख रुपए की कीमत का आंकड़ा पार किया। इसके बाद कंपनी कई बार अपने रेवेन्यू के कारण चर्चा में रही।

Good News : टीवी, कंप्यूटर और स्मार्टफोन के दाम हो सकते हैं सस्ते
Published / 2023-06-17 10:51:04
Good News : टीवी, कंप्यूटर और स्मार्टफोन के दाम हो सकते हैं सस्ते

कलपुर्जों के दाम 80 प्रतिशत तक घटेएबीएन बिजनेस डेस्क। अगर आप टीवी, कंप्यूटर और स्मार्टफोन जैसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद खरीदने जा रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। कंपनियां इन उत्पादों के दाम जल्द घटा सकती हैं। दरअसल, पिछले 12 महीने से विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की मांग में कमी आयी है। वहीं, कोविड काल में रिकॉर्ड स्तर तक पहुंची माल ढुलाई की लागत अब घटकर करीब 10 फीसदी रह गयी है। इसके साथ ही इन उत्पादों से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जों की कीमतों में भी 60-80 फीसदी तक की गिरावट आयी है। यही कारण है कि कंपनियां अब मांग बढ़ाने के लिए इस त्योहारी सीजन में ग्राहकों के लिए कीमतें घटा सकती हैं।भारत में टीवी, मोबाइल फोन के कैमरे, चिप जैसे उत्पादों की मांग पिछले साल की दिवाली के बाद से कम हो गयी है, क्योंकि ग्राहकों ने ज्यादा महंगाई, ब्याज दरों में वृद्धि और तकनीकी क्षेत्र में नौकरी के नुकसान के कारण खर्च कम कर दिया है। जनवरी से मार्च तिमाही में भारतीय स्मार्टफोन बाजार में साल-दर-साल 16 फीसदी व कंप्यूटर बाजार में 30 फीसदी की गिरावट हुई है। कोविड के दौरान चीन से कलपुर्जों की कंटेनरों से ढुलाई की लागत साढ़े छह लाख रुपये प्रति कंटेनर तक पहुंच गयी थी। यह अब घटकर 70 हजार से 80 हजार रुपये तक रह गयी है। साथ ही, सेमीकंडक्टर चिप और कैमरा मॉड्यूल सहित सभी स्मार्टफोन कलपुर्जों की कीमतें अब तक के निचले स्तर पर हैं। सभी इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों और माल ढुलाई की कीमतें लगभग उसी स्तर पर हैं, जितनी कोविड से पहले थीं। कुछ मामलों में मांग में वैश्विक गिरावट और कुछ देशों में मंदी के कारण भी कीमतें कम हो गयी हैं।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में फीकी पड़ रही सोने की चमक
Published / 2023-06-16 12:24:28
अंतरराष्ट्रीय बाजार में फीकी पड़ रही सोने की चमक

वैश्विक बाजार में दो महीने के निचले स्तर पर पहुंचाएबीएन बिजनर्स डेस्क। इंटरनेशनल गोल्ड मार्केट में सोना पिछले दो महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। पिछले कारोबारी सत्र में इंटरनेशनल मार्केट में स्पॉट गोल्ड 0.40 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,935.09 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गया था। 17 मार्च के बाद पहली बार सोना इस स्तर तक नीचे लुढ़का है। इसी तरह यूएस गोल्ड फ्यूचर्स में भी सोने की कीमत में 1.10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी है, जिसकी वजह से गोल्ड फ्यूचर्स 1,947.10 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गया है।गोल्ड मार्केट के जानकारों का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मॉनेटरी पॉलिसी का ऐलान होने के बाद से ही इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमत में लगातार मिला-जुला रुख बना हुआ है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी नहीं किये जाने की वजह से डॉलर इंडेक्स में मजबूती आयी है। फिलहाल डॉलर इंडेक्स 103 के स्तर के करीब पहुंच गया है, जिसकी वजह से सोने की खरीदारी महंगी हो गयी है। इससे इंटरनेशनल मार्केट में सोने की मांग पर प्रतिकूल असर पड़ा है, जिसका परिणाम उसकी गिरती कीमत के रूप में साफ-साफ नजर आने लगा है।कमोडिटी मार्केट के जानकार मयंक मोहन के मुताबिक अमेरिकी अर्थव्यवस्था में अभी भी मंदी की आशंका बनी हुई है। ऐसे में अगर अमेरिका मंदी की चपेट में आता है तो संकट से उबरने के लिए अमेरिकी फेडरल रिजर्व को अपने रुख में नरमी लाने की मजबूरी बन जायेगी। इसका असर प्रत्यक्ष रूप से इंटरनेशनल गोल्ड मार्केट में सोने की कीमत पर भी पड़ेगा। फिलहाल बाजार की मांग और सप्लाई को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमत को 1,948 से लेकर 1,960 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कड़े रेसिस्टेंस का सामना करना पड़ सकता है। दूसरी ओर 1,912 से लेकर 1,926 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर सोने को मजबूत सपोर्ट मिला हुआ है। इसलिए जब तक अमेरिकी अर्थव्यवस्था के रूप में कोई स्पष्ट बदलाव नहीं होता और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रवैए में नरमी नहीं आती, तब तक इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमत एक सीमित दायरे में ही कारोबार करती नजर आ सकती है।

ग्लोबल 2000 सूची में मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड को 45वां स्थान
Published / 2023-06-14 18:40:21
ग्लोबल 2000 सूची में मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड को 45वां स्थान

भारत की 55 कंपनियां लिस्ट में...एबीएन सेंट्रल डेस्क। फोर्ब्स की नवीनतम ग्लोबल 2000 सूची में अरबपति कारोबारी मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड आठ पायदान चढ़कर 45वें स्थान पर पहुंच गयी है। इस सूची में किसी भी भारतीय कंपनी के मुकाबले यह सर्वोच्च स्थान है।फोर्ब्स ने 2023 के लिए दुनिया की शीर्ष 2,000 कंपनियों की सूची जारी करते हुए कहा कि इसे चार कारकों-बिक्री, लाभ, संपत्ति और बाजार मूल्यांकन के आधार पर तैयार किया गया है। अमेरिका का सबसे बड़ा बैंक जेपी मॉर्गन 2011 के बाद पहली बार इस सूची में शीर्ष पर है। बैंक की कुल संपत्ति 3700 अरब डॉलर है। वारेन बफेट की बर्कशायर हैथवे, जो पिछले साल सूची में सबसे ऊपर थी, वह इस साल निवेश पोर्टफोलियो में नुकसान के कारण 338वें स्थान पर आ गई। सऊदी तेल कंपनी अरामको दूसरे स्थान पर है, जिसके बाद तीन के तीन विशाल आकार के सरकारी बैंक हैं। प्रौद्योगिकी कंपनी अल्फाबेट और एप्पल 7वें और 10वें स्थान पर हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज को 109.43 अरब अमेरिकी डॉलर की बिक्री और 8.3 अरब अमेरिकी डॉलर के लाभ के साथ 45वां स्थान मिला। समूह का कारोबार तेल से लेकर दूरसंचार तक फैला हुआ है। रिलायंस इंडस्ट्रीज सूची में जर्मनी के बीएमडब्ल्यू समूह, स्विट्जरलैंड के नेस्ले, चीन के अलीबाबा समूह, अमेरिकी प्रॉक्टर एंड गैंबल और जापान की सोनी से आगे है। सूची में भारतीय स्टेट बैंक 77वें स्थान, एचडीएफसी बैंक 128वें स्थान और आइसीआइसीआइ बैंक 163वें स्थान पर हैं। अन्य कंपनियों में ओएनजीसी 226वें, एलआइसी 363वें, टीसीएस 387वें, एक्सिस बैंक 423वें, एनटीपीसी 433वें, लार्सन एंड टुब्रो 449वें, भारती एयरटेल 478वें, कोटक महिंद्रा बैंक 502वें, इंडियन आयल कॉर्पोरेशन 540वें, इंफोसिस 554वें और बैंक आफ बड़ौदा 586वें स्थान पर हैं। सूची में कुल 55 भारतीय कंपनियां शामिल हैं। अरबपति कारोबारी गौतम अडाणी के समूह की तीन कंपनियां अडाणी एंटरप्राइजेज (1062वां स्थान), अडाणी पावर (1488वां स्थान) और अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन इस सूची में शामिल हैं।

ब्याज दरों में आरबीआई ने नहीं किया कोई बदलाव
Published / 2023-06-08 14:11:21
ब्याज दरों में आरबीआई ने नहीं किया कोई बदलाव

रेपो रेट 6.50% पर बरकरार, जानें शक्तिकांत दास के वक्तव्यएबीएन बिजनेस डेस्क। रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि एमपीसी (मौद्रिक नीति समिति) ने नीतिगत रेपो दर को 6.5% पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था और वित्तीय क्षेत्र मजबूत तथा जुझारू बना हुआ है।मु्द्रास्फीति की स्थिति पर लगातार और नजदीकी नजर रखना जरूरीरिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति उदार नीतिगत रुख को वापस लेने पर ध्यान केंद्रित करेगी। मु्द्रास्फीति की स्थिति पर लगातार और नजदीकी नजर रखना अत्यंत जरूरी है। भू-राजनीतिक स्थिति की वजह से वैश्विक आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार घटेगी। उन्होंने कहा कि मुख्य मुद्रास्फीति चार प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर है। इसके पूरे साल के दौरान लक्ष्य से ऊपर रहने का अनुमान है। मुद्रास्फीति को तय दायरे में बनाए रखने के लिए एमपीसी त्वरित और उचित नीतिगत कार्रवाई जारी रखेगी। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि चालू वित्त वर्ष 2023-24 में जीडीपी वृद्धि दर के 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। आरबीआई को उम्मीद है कि जीडीपी वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में आठ प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 6.5 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में छह प्रतिशत और चौथी तिमाही में 5.7 प्रतिशत रहेगी। उन्होंने कहा कि आरबीआई ने वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान खुदरा मुद्रास्फीति के अनुमान को 5.2 प्रतिशत से घटाकर 5.1 प्रतिशत किया है। घरेलू मांग की स्थिति वृद्धि के लिए सहायक बनी हुई है, ग्रामीण मांग बेहतर हो रही है।भारतीय रुपया इस साल जनवरी से स्थिरआरबीआई गवर्नर ने कहा कि भारतीय रुपया इस साल जनवरी से स्थिर है। उन्होंने कहा कि चालू खाते का घाटा चौथी तिमाही में और नीचे आयेगा। यह काफी हद तक प्रबंधन के दायरे में रहेगा।ई-रुपया वाउचर के दायरे को बढ़ाने का फैसलाआरबीआई ने ई-रुपया वाउचर के दायरे को बढ़ाने का फैसला किया है। गैर-बैंकिंग कंपनियों को इस तरह के साधन जारी करने की अनुमति दी जायेगी। उन्होंने कहा कि आरबीआई ने बैंकों को  रुपे प्रीपेड फॉरेक्स कार्ड जारी करने की अनुमति दी।

करीब 6 करोड़ इपीएफओ सब्सक्राइबर्स के लिए आई जरूरी खबर, इस तरह से मिलेगी पासबुक की जानकारी
Published / 2023-06-04 22:15:58
करीब 6 करोड़ इपीएफओ सब्सक्राइबर्स के लिए आई जरूरी खबर, इस तरह से मिलेगी पासबुक की जानकारी

एबीएन बिजनेस डेस्क। अगर आप कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के मेंबर हैं तो ये खबर आपके काम की है। ईपीएफओ आपके लिए ऐसी सुविधा लेकर आयी है जिसे जानने के बाद आपका काम और आसान हो जाएगा। अब ईपीएफओ सब्सक्राइबर्स आॅनलाइन पासबुक के माध्यम से ही ये जान सकेंगे कि ब्याज उनके पीएफ खाते में जमा हुआ है या नहीं। इसके लिए आपको ईपीएफओ की वेबसाइट या ऐप पर जाना होगा, जहां से आपके पीएफ अकाउंट की सारी जानकारी मिल जायेगी। कैसे देखें ईपीएफओ पासबुक? ईपीएफओ पासबुक डाउनलोड करना एक आसान प्रक्रिया है। पीएफ अकाउंट की सारी जानकारी आॅनलाइन जानने के लिए आपको यूनिवर्सल अकाउंट नंबर यानी यूएएन और पासवर्ड पता होना चाहिए। ईपीएफओ से मिली जानकारी के मुताबिक, सबसे पहले उमंग ऐप डाउनलोड करना होगा। ऐप डाउनलोड करने के बाद आपको सर्च करना होगा ह्यईपीएफओ। सर्च करते ही आपको व्यू पासबुक का आप्शन दिखेगा। उस आप्शन पर क्लिक करने के बाद यूएएन दर्ज करना होगा। यूएएन दर्ज करते ही आपको गेट ओटीपी का आप्शन आयेगा और आपको अपने मोबाइल फोन पर ओटीपी मिल जायेगी। यूएएन डालने के बाद आपको मेंबर आईडी चुनना होगा और इसके बाद ही आप पासबुक डाउनलोड कर सकेंगे। कितना मिलता है ब्याजकर्मचारी भविष्य निधि संगठन ( ईपीएफओ) ने 2022-23 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफओ) पर 8.15 फीसदी की ब्याज दर निर्धारित कर दी है। ईपीएफओ 2021-22 के लिए अपने करीब पांच करोड़ अंशधारकों के पीएफओ पर ब्याज दर को घटाकर मार्च, 2022 में चार दशक से भी अधिक समय के निचले स्तर 8.1 फीसदी पर ले आया था। अगर हो गयी ब्याज अपडेट में देरी तो क्याहाल ही में ईपीएफओ ने बताया था कि मेंबर पासबुक को ब्याज सहित अपडेट करना एक एंट्री प्रोसेस है। जिस तारीख को मेंबर पासबुक की ब्याज अपडेट की जाती है उस तारीख का कोई वास्तविक वित्तीय प्रभाव नहीं पड़ता है। ईपीएफओ ने बताया कि इसकी वजह यह है कि मेंबर के करेंट मंथली बैलेंस पर जुटाया गया ब्याज हमेशा उस साल के क्लोजिंग बैलेंस में जोड़ा जाता है, और यही क्लोजिंग बैलेंस अगले साल के लिए ओपेनिंग बैलेंस बन जाता है। ईपीएफओ ने बताया कि अगर कोई मेंबर अपनी पासबुक में ब्याज अपडेट होने से पहले ही अपना ईपीएएफ बकाया निकाल लेता है तो भी उसे कोई नुकसान नहीं होता है। ऐसे मामले में भी मेंबर के दावा निपटान के समय देय ब्याज का कैलकुलेशन होता है और सिस्टम द्वारा आॅटोमेटिकली देय होने की तारीख से भुगतान किया जाता है।

कॉमर्शियल गैस सिलेंडर 83.50 रुपये सस्ता
Published / 2023-06-01 20:09:34
कॉमर्शियल गैस सिलेंडर 83.50 रुपये सस्ता

जून के पहले दिन मिली राहत, रसोई गैस सिलेंडर हुआ सस्ता, जानें नये रेट एबीएन बिजनेस डेस्क। एक जून 2023 को आम जनता की जेब के लिए राहत भरी खबर आयी है। गैस कंपनियों ने कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में 83.50 रुपये की कटौती की है। हालांकि घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में कोई कटौती नहीं की गयी है।आपको बता दें कि गैस कंपनियां हर महीने एलपीजी सिलेंडर के दाम तय करती है। इससे पहले 1 मई 2023 को भी कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में 172 रुपये की कटौती की गई थी। भारत में पेट्रोलियम और आयल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा कॉमर्शियल एलपीजी प्राइस कम करने से दिल्ली, मुबंई कोलकाता और चेन्नई समेत देश के कई हिस्सों में सिलेंडर सस्ता मिलेगा। दिल्ली में अब कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर 1773 रुपये का मिलेगा। वहीं घरेलू गैस सिलेंडर के दाम 1103 रुपये हैं। कोलकाता में 19 किलो का कॉमर्शियल सिलेंडर 1875.50 रुपये में, मुबंई में ये सिलेंडर 1725 रुपये और चेन्नई में इसकी कीमत अब 1973 रुपये होगी। पटना में घरेलू गैस की कीमत 1201 रुपये, कन्याकुमारी में 1187 रुपये, अंडमान 1179 रुपये, रांची 1160.50 रुपये, देहरादून में 1122 रुपये, चेन्नई 1118.50 रुपये, आगरा 1115.50 रुपये, चंडीगढ़ में 1112.50 रुपये, अहमदाबाद 1110 रुपये, शिमला में 1147.50 रुपये और लखनऊ में 1140.50 रुपये प्रति सिलेंडर बिक रहा है।

एलन मस्क फिर बने दुनिया के सबसे अमीर इंसान, बर्नार्ड अरनॉल्ट को पछाड़ा
Published / 2023-06-01 11:43:40
एलन मस्क फिर बने दुनिया के सबसे अमीर इंसान, बर्नार्ड अरनॉल्ट को पछाड़ा

टीम एबीएन बिजनेस। टेस्ला इंक के सीईओ एलन मस्क फिर से दुनिया के सबसे अमीर शख्स बन गए हैं। अब तक दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति रहे बर्नार्ड अर्नाल्ट से उनका अरबपति नंबर वन का ताज मस्क ने छीन लिया है। अब एलन मस्क 192 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ पहले नंबर पर हैं और बर्नार्ड अर्नाल्ट 187 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ दूसरे नंबर पर आ गए हैं।एलन मस्क की कितनी हुई संपत्तिब्लूमबर्ग बिलियनेयर इंडेक्स के मुताबिक, बुधवार को एलन मस्क की कुल संपत्ति में 1.98 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है। इस साल उनकी कुल संपत्ति 55.3 अरब डॉलर बढ़ी है। बता दें कि बर्नार्ड अर्नाल्ट की कंपनी LVMH के शेयरों में बुधवार को 2.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। जिसके चलते अर्नाल्ट को नुकसान उठाना पड़ा।अर्नाल्ट ने लग्जरी ब्रांड से जमाया था सिक्काब्लूमबर्ग बिलयनेयर इंडेक्स में इस साल एलन मस्क और बर्नार्ड अर्नाल्ट के बीच सबसे अमीर इंसान बनने के लिए कड़ा मुकाबला रहा और दोनों की संपत्ति में बहुत ज्यादा अंतर नहीं है। बीते साल दिसंबर में जब टेक इंडस्ट्री मुश्किलों से गुजर रही थी तो मस्क की संपत्ति में गिरावट आई। जिसका फायदा अर्नाल्ट की कंपनी एलवीएमएच को मिला। बता दें कि एलवीएमएच लग्जरी ब्रांड जैसे लुई विटॉन, फेंडी और हेनेसी की निर्माता कंपनी है।

2000 नहीं 500 रुपए के नकली नोट बने RBI की मुसीबत, एनुअल रिपोर्ट में हुआ खुलासा
Published / 2023-05-31 10:51:22
2000 नहीं 500 रुपए के नकली नोट बने RBI की मुसीबत, एनुअल रिपोर्ट में हुआ खुलासा

एबीएन बिजनेस डेस्क। भारतीय रिजर्व बैंक और सरकार के लिए 2000 रुपए के नोट से ज्यादा 500 रुपए का नोट मुसीबत बनता जा रहा है। आरबीआई की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल की तुलना में 2022-23 में बैंकिंग प्रणाली द्वारा पकड़े गए 500 रुपए के नकली नोटों की संख्या 14.6 प्रतिशत बढ़कर 91,110 नोट हो गई। मंगलवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक इसी अवधि में सिस्टम द्वारा पकड़े गए 2,000 रुपए मूल्यवर्ग के नकली नोटों की संख्या 28 प्रतिशत घटकर 9,806 नोट रह गई। हालांकि बैंकिंग क्षेत्र में पकड़े गए नकली भारतीय मुद्रा नोटों की कुल संख्या पिछले वित्तीय वर्ष में 2,30,971 नोटों की तुलना में 2022-23 में घटकर 2,25,769 नोट रह गई। उल्लेखनीय है कि यह 2021-22 में बढ़ गई थी। आरबीआई की सालाना रिपोर्ट में 20 रुपए के मूल्यवर्ग में पाए गए नकली नोटों में 8.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी और 500 रुपए मूल्यवर्ग में 14.4 फीसदी की बढ़ोतरी पर भी प्रकाश डाला गया है। दूसरी ओर, 10 रुपए, 100 रुपए और 2,000 रुपए के नकली नोटों में क्रमश: 11.6 प्रतिशत, 14.7 प्रतिशत और 27.9 प्रतिशत की गिरावट आई है।सरकारी घाटे व कर्ज में आई कमी        सामान्य सरकारी घाटा और कर्ज जीडीपी के क्रमश: 9.4 फीसदी और 86.5 फीसदी पर आ गया है, जो 2022-23 में क्रमश: 13.1 फीसदी और 2020-21 में 89.4 फीसदी के चरम स्तर पर था। यह बात भारतीय रिजर्व बैंक ने 2022-23 अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कही है। सरकारी वित्त पर टिप्पणी करते हुए रिपोर्ट ने कहा, विश्वसनीय राजकोषीय समेकन के लिए प्रतिबद्ध होने के दौरान, सरकार ने संवर्धित पूंजीगत व्यय के माध्यम से निवेश चक्र में पुनरुद्धार का नेतृत्व किया है, निजी निवेश में क्राउडिंग-इन द्वारा इसके गुणक प्रभावों को पहचाना है और अर्थव्यवस्था की विकास क्षमता को बढ़ाया है। यह रेखांकित किया गया है कि नीतिगत बफर्स के पुनर्निर्माण और ऋण स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए राजकोषीय समेकन को बनाए रखने की आवश्यकता होगी। 

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