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2024 में भाजपा नहीं आयी तो बेजोड़ गिरेगा शेयर मार्केट
Published / 2023-10-30 20:56:20
2024 में भाजपा नहीं आयी तो बेजोड़ गिरेगा शेयर मार्केट

भाजपा की नहीं बनी सरकार तो 25% लुढ़क सकता है बाजारएबीएन बिजनेस डेस्क। वुड ने बिजनेस स्टैण्डर्ड के सम्मेलन में कहा, भारत उभरते बाजारों के बीच सबसे अच्छी घरेलू इक्विटी मार्केट है। अगर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 2024 में सत्ता में नहीं लौटती है तो अगले साल भारतीय शेयर बाजारों में 25 प्रतिशत की गिरावट देखी जा सकती है। यह बात निवेश बैंक और वित्तीय सेवा कंपनी जेफरीज में इक्विटी रणनीति के वैश्विक प्रमुख क्रिस वुड ने बिजनेस स्टैंडर्ड के बीएफएसआई शिखर सम्मेलन 2023 में कही है। उन्होंने कहा- अगर 2004 में आश्चर्यजनक चुनाव के साथ जो हुआ, वो फिर से होता है तो बाजार में कम से कम 25 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। लेकिन गति के कारण बाजार तेजी से वापस आ जायेगी। मोदी सरकार ने कई बुनियादी सुधार किये हैं जिन्हें बदलना या वापस करना मुश्किल वुड ने कहा, मोदी सरकार ने कई बुनियादी सुधार किये हैं जिन्हें बदलना या वापस करना मुश्किल है। इसलिए, मैं आगामी आम चुनाव से पहले भारत पर कोई दबाव नहीं डालूंगा। उन्होंने कहा कि अगर यह सरकार वापस नहीं आयी तो बड़ी गिरावट होने का जोखिम है। हालांकि संभावना कम है, जोखिम अभी भी बना हुआ है। वुड ने बिजनेस स्टैण्डर्ड के सम्मेलन में कहा, भारत उभरते बाजारों के बीच सबसे अच्छी घरेलू इक्विटी मार्केट है। उभरते बाजारों में भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाला देश उन्होंने कहा, उभरते बाजारों और खास कर एशियाई बाजारों में भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाला देश है। चीन की समस्याओं के कारण इस विश्वास को बल मिला है। फिर भी, हालांकि यह दुनिया का सर्वसम्मति वाला दृष्टिकोण नहीं है क्योंकि वैश्विक निवेशकों ने भारत में मुश्किल से ही निवेश किया है। चीन की अर्थव्यवस्था में सुस्ती पर भी रखी अपनी राय वुड ने कहा कि चीन की स्थिति इस साल जापान की तरह लग रही है और आर्थिक ग्रोथ धीमी हो रही है। लेकिन मुख्य सवाल हालांकि, यह है कि क्या स्थिति में बदलाव आयेगा या फिर चीन की इकॉनमी बाउंस बैक या वापसी करेगी।

टाटा ग्रुप्स अब देश में ही बनायेगा आइफोन
Published / 2023-10-28 00:15:19
टाटा ग्रुप्स अब देश में ही बनायेगा आइफोन

विस्ट्रॉन फैक्ट्री का किया अधिग्रहण, दुनिया भर में होगा निर्यातएबीएन सेंट्रल डेस्क। आने वाले ढाई साल में टाटा ग्रुप्स भारत में शीघ्र ही आइफोन का निर्माण शुरू कर देगा। ये डिवाइस भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर के आईफोन प्रशंसकों तक पहुंचाया जायेगा। टाटा ग्रुप्स ने भारत में आइफोन बनाने वाली विस्ट्रॉन फैक्ट्री का अधिग्रहण कर लिया है। आइटी मंत्री राजीव चंद्रशेखर इसकी जानकारी दी। उन्होंने कंफर्म किया है कि टाटा ग्रुप जल्द भारत में आईफोन को बनाना शुरू कर देगा जिन्हें भारत के साथ-साथ दुनियाभर में एक्सपोर्ट किया जायेगा। राजीव चंद्रशेखर ने सोशल मीडिया पर अपने पोस्ट में लिखा कि मंत्रालय वैश्विक भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों के विकास में पूरी तरह से समर्थन में खड़ा है, जो भारत को अपना विश्वसनीय मैन्युफैक्चरिंग और टैलेंट पार्टनर बनाना चाहते हैं और भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स शक्ति बनाने के पीएम के लक्ष्य को साकार करना चाहते हैं।कंपनी का किया अधिग्रहणउन्होंने बताया कि टाटा ग्रुप्स ने भारत में आइफोन बनाने वाली विस्ट्रॉन फैक्ट्री पर अधिग्रहण कर लिया है। यह कंपनी भारत के कर्नाटक राज्य के साउथईस्ट में स्थित है। विस्ट्रॉन ने 2008 में भारत में अपनी शुरुआत की थी। उस समय यह कई कंपनियों के डिवाइस के लिए रिपेयरिंग का काम करती थी। बाद में लगभग 9 साल बाद कंपनी ने अपना बिजनेस बढ़ाते हुए आईफोन मैन्युफेक्चरिंग का काम शुरू किया। टाटा और विस्ट्रॉन की डील लगभग एक साल से चल रही थी, जो अब जाकर पूरी हुई है। 2024 में इस फैक्ट्री से 1.8 बिलियन आईफोन को मैन्युफेक्चर किया जायेगा। साथ ही कंपनी मेनफोर्स भी बढ़ाने का विचार कर रही है, फिलहाल इस फैक्ट्री में 10000 लोग काम करते हैं। रिपोर्ट में यह भी पता चला है कि विस्ट्रॉन को भारत में नुकसान का सामना करना पड़ रहा था क्योंकि एपल उससे फॉक्सकॉन और पेगाट्रॉन के मुकाबले ज्यादा मार्जिन लेता है।

बेमौसम बारिश से फसलों को भारी नुकसान
Published / 2023-10-24 18:43:00
बेमौसम बारिश से फसलों को भारी नुकसान

फल-सब्जी अधिक खाने से बढ़ रहीं हैं कीमतेंएबीएन बिजनेस डेस्क। लोग सब्जियों और फलों को अब ज्यादा खाने लगे हैं। इसलिए, इनकी कीमतों में तेजी आ रही है। क्रिसिल रिपोर्ट के अनुसार, अब लोग मांस, दालें, फल और सब्जियों जैसे गैर-अनाज उत्पादों को ज्यादा पसंद करते हैं। इससे आपूर्ति की तुलना में सब्जियों की मांग बढ़ी है। रिपोर्ट के अनुसार, उत्पादन में अस्थिरता और कीमतों की आपूर्ति-मांग में भारी अंतर से सब्जियों की कीमतों में मौसमी वृद्धि आम हो गयी है। खाद्य सूचकांक में सब्जियों का वजन 15.5% है, जो अनाज व दूध के बाद सर्वाधिक है। मौसम के असंतुलन से प्याज और टमाटर जैसी अक्सर उपयोग होने वाली सब्जियों की कीमतें बढ़ जाती हैं। इससे खाद्य महंगाई भी बढ़ती है। जून में मानसून देरी से आया। जुलाई में भारी बारिश हुई। अगस्त में कम फिर सितंबर में भारी बारिश हुई। इससे फसलों के उत्पादन पर बुरा असर पड़ा।वित्त वर्ष 2016-19 में सब्जियों की महंगाई औसतन 0 फीसदी थी। वित्त वर्ष 2020-23 के बीच बढ़कर 5.7% हो गयी। 100 महीनों में सीपीआई में सब्जी की महंगाई 49 महीने तक औसत 3.8% से ऊपर थी। 35 महीनों में 7% से ऊपर, 30 महीनों में 10% से ऊपर और 13 महीनों में 20% से ऊपर थी। तीन वित्त वर्ष में भी सब्जी की महंगाई में अस्थिरता देखी गयी है।उत्पादन में ढाई गुना की बढ़त लेकिन मांग उससे ज्यादासब्जियों की कीमतों में वृद्धि का एक बड़ा कारण मांग-आपूर्ति का बेमेल है। वित्त वर्ष 2003-23 के बीच सब्जी उत्पादन 2.5 गुना बढ़ गया। फिर भी, प्रति व्यक्ति सब्जी उत्पादन 2 गुना से भी कम बढ़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, सब्जियां पूरे वर्ष उगायी जाती हैं। इनमें कोई मूल्य संकेत तंत्र जैसे न्यूनतम समर्थन मूल्य या सरकार की ओर से सुनिश्चित खरीदारी नहीं होती है। चीन के बाद भारत दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।

अब गोदरेज के बंटवारे की तैयारी
Published / 2023-10-03 21:20:04
अब गोदरेज के बंटवारे की तैयारी

126 साल पुराने गोदरेज ग्रुप का हो सकता है बंटवाराएबीएन सेंट्रल डेस्क। 1.76 लाख करोड़ रुपये की वैल्यूएशन वाले गोदरेज ग्रुप की शुरुआत 1897 में हुई थी। अब इस 126 साल पुराने बिजनेस ग्रुप पर बंटवारे की तलवार लटक रही है। गोदरेज ग्रुप की शुरुआत ताले बेचने से हुई थी। इसी ग्रुप ने 1897 में भारत का पहला लीवर टेक्नोलॉजी वाला बनाया था। उस समय मुंबई में अपराध बढ़ रहा था। लोगों की जान-माल की सेफ्टी के मद्देनजर गोदरेज ने शुरू में खास ताले बनाना शुरू किया। ग्रुप की शुरुआत दो भाइयों अर्देशिर गोदरेज और पिरोजशा बुरजोरजी गोदरेज ने की थी। समय के साथ ग्रुप ने कई सेक्टरों में कामयाबी हासिल की। मगर अब इस ग्रुप का बंटवारा हो सकता है। किन सेक्टरों में फैला है गोदरेज ग्रुप का बिजनेस आज गोदरेज ग्रुप कई सेक्टरों में कारोबार करता है, जिनमें इंजीनियरिंग, इक्विपमेंट, सिक्योरिटी सॉल्यूशंस, एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स, रियल एस्टेट और कंज्यूमर प्रोडक्ट्स शामिल हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार इन सभी सेक्टरों में फैले कारोबार का बंटवारा किया जा सकता है। हालांकि अभी गोदरेज ग्रुप की तरफ से बंटवारे पर कोई बयान नहीं आया है।

कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर 209 रुपये महंगा
Published / 2023-10-01 16:33:50
कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर 209 रुपये महंगा

फेस्टिव सीजन से पहले महंगाई का तगड़ा झटकाएबीएन सेंट्रल डेस्क। अक्टूबर महीने की शुरुआत महंगाई के बड़े झटके के साथ हुआ है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर के दाम में बड़ा इजाफा किया है। 1 अक्टूबर 2023 से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ गये हैं। आज यानी 01 अक्टूबर से कमर्शियल गैस सिलेंडर के रेट में 209 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गयी है। फेस्टिव सीजन से पहले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में इजाफा होने से आम आदमी की जेब पर असर पड़ने वाला है। हालांकि, घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। अक्टूबर महीने में नवरात्र, दशहरा जैसे त्योहार पड़ रहे हैं और इन पर्वों से पहले ही तेल कंपनियों ने 19 किलोग्राम वाला कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर महंगा कर दिया है। बता दें कि 19 किलोग्राम वाला कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर का इस्तेमाल होटलों, रेस्त्रां और कैटरिंग वाले करते हैं। फेस्टिव सीजन पर इसका सीधा असर देखने को मिलेगा। आने वाले त्योहारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों में भी इजाफा देखने को मिल सकता है। इसके अलावा होटलों में खाना खाने के लिए भी ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ सकता है।

महंगा क्रूड यानी हवाई ईंधन महंगा, तो सफर भी होगा महंगा
Published / 2023-10-01 16:15:18
महंगा क्रूड यानी हवाई ईंधन महंगा, तो सफर भी होगा महंगा

महंगे क्रूड का असर : महंगा हुआ हवाई ईंधन, बढ़ सकते हैं फ्लाइट टिकट्स के दामएबीएन बिजनेस डेस्क। भारत में अगले कुछ दिनों में त्योहारी सीजन की शुरुआत हो जायेगी। इसके साथ ही लोग बड़ी संख्या में आवाजाही के लिए फ्लाइट का इस्तेमाल करेंगे। ऐसे में त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) ने बड़ा झटका दिया है और हवाई ईंधन को महंगा कर दिया है। इसके बाद राजधानी दिल्ली में एटीएफ कीमत 1,18,199.17 रुपये प्रति किलो लीटर पर पहुंच गयी है।यहां पिछले महीने के मुकाबले 5500 किलो लीटर यानी 5.50 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गयी है। बता दें कि नयी कीमत 1 अक्टूबर 2023 से लागू हो चुकी हैं। ध्यान देने वाली बात ये है कि कच्चे तेल के दाम में इजाफे के बाद एटीएफ की कीमत में इजाफा हुआ है। सितंबर 2023 में दिल्ली में एटीएफ का दाम 1.12 लाख प्रति लीटर पर बिक रहा था। सितंबर को भी एटीएफ की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गयी थी, जिसके बाद त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले एयरलाइंस कंपनियों की चिंता बढ़ गयी थी। ध्यान देने वाली बात ये है कि अक्तूबर के महीने में हुई हवाई ईंधन की कीमत में बढ़ोतरी को मिलाकर लगातार चार बार एयर फ्यूल के दाम में बढ़ोतरी की जा चुकी है। 1 जुलाई को भी तेल कंपनियों ने एटीएफ के दाम में 1.65 फीसदी की बढ़ोतरी की थी। जेट फ्यूल के दाम में बढ़ोतरी के पीछे मुख्य कारण है कच्चे तेल की कीमत में इजाफा। पिछले कुछ दिनों में इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल के दाम में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गयी है और इसकी कीमत 97 डॉलर तक पहुंच गयी है। ऐसे में जुलाई से लेकर अब तक कच्चे तेल के दाम में 30 फीसदी और सितंबर में अकेले कीमत में 15 फीसदी की जबरदस्त बढ़त देखी गयी है।

वाहनों की ऐसी बुकिंग कि कंपनियां नहीं दे पा रही हैं डिलीवरी
Published / 2023-09-25 21:20:16
वाहनों की ऐसी बुकिंग कि कंपनियां नहीं दे पा रही हैं डिलीवरी

एबीएन बिजनेस डेस्क। भारतीय कार बाजार में नयी गाड़ियों के आने का सिलसिला लगातार जारी रही हैं। कई गाड़ियों को दमदार बुकिंग मिल रही है तो गाड़ियां लोगों को खास पसंद नहीं आ रही है। हालांकि, कार बनाने वाली कंपनी टोयोटा की एक गाड़ी ऐसी भी है जिसे इतनी बुकिंग मिल गयी कि कंपनी को कुछ समय के लिए बुकिंग लेना ही बंद करना पड़ गया है। टोयोटा किर्लोस्कर मोटर ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि उसने लंबे समय से लंबित बैकलॉग के कारण रुमियन के सीएनजी एडिशन के लिए बुकिंग स्वीकार करना अस्थायी रूप से रोक दिया है। पिछले महीने लॉन्च हुई थी टोयोटा रुमियन बता दें कि टोयोटा ने पिछले महीने ही मारुति की रीबैज्ड अर्टिगा का अनावरण किया गया था, जबकि कीमतों की आधिकारिक घोषणा इस महीने की शुरुआत में की गयी थी। टोयोटा ने एक बयान में कहा कि बुकिंग पर यह अस्थायी रोक वास्तव में कार को भारत में कंपनी की उम्मीद से ज्यादा मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया के कारण है। हमने इस साल अगस्त में आल-न्यू टोयोटा रुमियन लॉन्च की और हमें अपने उन ग्राहकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है जो बी-एमपीवी सेगमेंट में टोयोटा वाहन का इंतजार कर रहे हैं। हम आॅल न्यू टोयोटा रुमियन के लिए बढ़ती पूछताछ और अच्छी बुकिंग को देखकर उत्साहित हैं।कंपनी की उम्मीद से ज्यादा निकली रुमियन की डिमांड कंपनी ने कहा- इस मॉडल की मांग हमारी उम्मीद से ज्यादा हो गयी है और इस वजह से सभी वेरिएंट्स की डिलीवरी में लंबा समय लग रहा है। खासकर ई-सीएनजी मॉडल के लिए। इसलिए हमने लंबी वेटिंग को देखते हुए ग्राहकों को किसी भी असुविधा से बचाने के लिए ई-सीएनजी विकल्प की बुकिंग को अस्थायी रूप से रोक दिया है। हालांकि, टोयोटा ने एमपीवी के पेट्रोल-संचालित (नियोड्राइव) वेरिएंट के लिए बुकिंग स्वीकार करना जारी रखा है। रुमियन में क्या है खास रुमियन का सीएनजी मॉडल 1.5 लीटर और 4 सिलेंडर इंजन से लैस है जो 87 बीएचपी और 121.5 एनएम का पीक टॉर्क पैदा करता है। यह केवल 5-स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन के साथ आती है। वहीं, पेट्रोल मॉडल में यह कार 102 बीएचपी और 137 एनएम का पीक टॉर्क पैदा करता है, जबकि पेट्रोल वेरिएंट में यह अतिरिक्त 6-स्पीड आॅटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ उपलब्ध है।

गणपति उत्सव की धूम के बीच सेंसेक्स धड़ाम
Published / 2023-09-20 19:17:06
गणपति उत्सव की धूम के बीच सेंसेक्स धड़ाम

शेयर बाजार में कोहराम, सेंसेक्स 796 अंक टूटा निवेशकों के 3 लाख करोड़ रुपये स्वाहा एबीएन बिजनेस डेस्क। गणेश चतुर्थी की छुट्टी के बाद आज शेयर बाजार भारी गिरावट के साथ खुला। खुलने के साथ यह गिरावट बढ़ती गयी। हैवी वेट शेयर में चौतरफा बिकवाली के कारण बीएसई सेंसेक्स 796.00 अंक की बड़ी गिरावट के साथ 66,800.84 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी 50 भी औंधे मुंह गिरकर बंद हुआ। निफ्टी 50 222.85 अंक लुढ़क कर 19,910.45 अंक पर बंद हुआ। इस तरह एक दिन में निवेशकों के लाख करोड़ रुपये डूब गये। 18 सितंबर को जब बाजार बंद हुआ था तो बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 3.23 लाख करोड़ रुपये था। वहीं, आज में बाजार में बड़ी गिरावट आने से लिस्टेड कंपनियों का पूंजीकरण घटकर 3.20 लाख करोड़ रह गया। इस तरह एक दिन में ही निवेशकों के 3 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गये।  सेंसेक्स में शामिल 30 में से सिर्फ 6 शेयर हरे निशान में और 24 बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए। रिलायंस इंडस्ट्रीज से लेकर एचडीएफसी बैंक के शेयरों में बड़ी गिरावट देखने को मिली। एचडीएफसी बैंक का शेयर 3.84% टूटकर 1565.50 रुपये पर बंद हुआ। रिलांयस के शेयरों में भी 2% से अधिक की गिरावट रही।

कारों में छह एयरबैग देना अनिवार्य नहीं : गडकरी
Published / 2023-09-15 14:33:24
कारों में छह एयरबैग देना अनिवार्य नहीं : गडकरी

नितिन गडकरी का बड़ा ऐलानएबीएन बिजनेस डेस्क। वाहनों में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर एयरबैग की संख्या बढ़ाने को लेकर लंबे समय से चर्चा हो रही थी। पिछली रिपोर्टों के मुताबिक आगामी अक्तूबर महीने से देश में बेची जाने वाली सभी कारों में 6-एयरबैग को अनिवार्य किये जाने की खबर थी लेकिन आज केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक कार्यक्रम में कहा कि इस साल की शुरुआत में नये क्रैश टेस्ट नियम लागू होने के बाद से सरकार भारत में यात्री कारों के लिए छह-एयरबैग सुरक्षा नियम को अनिवार्य नहीं बनायेगी। ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के वार्षिक बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि सरकार कारों के लिए 6 एयरबैग नियम को अनिवार्य नहीं बनायेगी। उन्होंने कहा कि देश में बहुत सी वाहन निर्माता कंपनियां हैं जो पहले से ही 6 एयरबैग दे रही हैं और वो कंपनियां अपने उन कारों का विज्ञापन भी कर रही हैं। ऐसे में 6-एयरबैग अनिवार्य किये जाने की जरूरत नहीं है।नितिन गडकरी ने कहा कि, देश का ऑटो सेक्टर तेजी से ग्रोथ कर रहा है। भारत ने हाल ही में जापान को पीछे कर दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटो बाजार बन चुका है। ऐसे में वाहनों में नयी तकनीक को लेकर कंपटीशन भी बढ़ रहा है। वाहन मालिक भी नये तकनीक और फीचर्स को तरजीह दे रहे हैं।ऐसे में कुछ कंपनियां पहले से ही 6 एयरबैग को वाहनों में शामिल कर चुकी हैं। इस स्थिति में जो ब्रांड्स प्रतिस्पर्धा में बने रहना चाहते हैं वो भी अपने वाहनों में 6 एयरबैग देंगे, लेकिन हम इसे अनिवार्य नहीं करेंगे।अक्तूबर से लागू होगा नियमबता दें कि पिछले साल नितिन गडकरी ने कहा था कि अक्तूबर-2023 से देश में इस नये नियम को लागू किया जायेगा। उन्होंने मीडिया को दिये अपने बयान में कहा था कि देश में सबसे ज्यादा छोटी कारों की खरीदारी मध्यम वर्गीय परिवारों द्वारा की जाती है और लो-बजट कारों की डिमांड सबसे ज्यादा है।लेकिन उन्होंने चिंता व्यक्त की थी कि वाहन निर्माता कंपनियां केवल उंची कीमत वाली प्रीमियम कारों में ही 6 या 8 एयरबैग की सुविधा क्यों देती हैं।

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