रांची सहित पूरे झारखंड में बढ़े गैस सिलेंडर के दामएबीएन बिजनेस डेस्क। 2024 के अंतिम महीने दिसंबर के पहले दिन ही लोगों को मंहगाई का झटका लगा है। 1 दिसंबर से रांची सहित पूरे झारखंड में कमर्शियल गैस सिलेंडर के दामों में बढ़ोतरी हुई है।गैस के दामों में बढ़ोतरी होने के कारण अब 19 किलो वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत 1977 रुपये हो गयी है। 1 दिसंबर 2024 से कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में 16 रुपये की बढ़ोतरी हुई जिस कारण से अब 19 किलो वाले गैसे सिलेंडर की कीमत 1977 रुपये हो गयी है। नवंबर में इसकी कीमत 1961 रुपये थी। अगर 14 किलो वाले घरेलू गैस सिलेंडर की बात करें तो इसके दाम पिछले कुछ महीने से स्थिर हैं। फिलहाल रांची में इसकी कीमत 860.50 रुपये है। घरेलू गैस की कीमत में अंतिम बार बदलाव मार्च 2024 में देखने को मिला था जिसमें 100 रुपये की कटौती की गयी थी।
एबीएन बिजनेस डेस्क। लगातार बिकवाली के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारतीय शेयर बाजार में लौट रहे हैं। पिछले तीन दिनों में FPI ने 11,113 करोड़ रुपए का निवेश किया है। इससे पहले लगभग दो महीनों तक एफपीआई ने बाजार से 1,55,730 करोड़ रुपए की निकासी की थी। यह बदलाव भारतीय इक्विटी मार्केट में निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। एफपीआई ने 25 नवंबर को 9,947 करोड़ रुपए और 26 नवंबर को 1,157 करोड़ रुपए का निवेश किया। दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशकों ने पिछले तीन दिनों में 7,516 करोड़ रुपए के शेयर बेचे। डीआईआई ने नवंबर में अब तक 30,042 करोड़ रुपए और इस साल अक्टूबर में 107,254 करोड़ रुपए का निवेश किया है।एक्सचेंज डेटा के अनुसार, अक्टूबर में एक्सचेंजों के माध्यम से 113,858 करोड़ रुपए की इक्विटी बेचने के बाद, एफपीआई ने 22 नवंबर तक 41,872 करोड़ रुपए की इक्विटी बेची। इससे इस साल 1 अक्टूबर से अब तक कुल निकासी 155,730 करोड़ रुपए हो गई। 21 नवंबर से अब तक बेंचमार्क सेंसेक्स 3.98 फीसदी या 3,079 अंक बढ़कर 80,234.08 पर पहुंच गया है। 22 नवंबर को जब सेंसेक्स 1,961 अंक या 2.54 फीसदी बढ़कर 79,117.11 पर पहुंचा, तब एफपीआई ने सिर्फ 1,278 करोड़ रुपए निकाले। बुधवार को सेंसेक्स में 230 अंकों की तेजी आई।
अगले महीने 10 कंपनियां आईपीओ लाने की तैयारी में, 20 हजार करोड़ रुपये जुटायेंगी महाराष्ट्र चुनाव के नतीजों ने बाजार में सकारात्मक धारणा पैदा की, इससे आईपीओ गतिविधियों में तेजी आयेगी एबीएन सेंट्रल डेस्क (नयी दिल्ली)। प्राथमिक बाजार में अभी उत्साह बना हुआ है और अगले महीने कम-से-कम 10 कंपनियों आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के जरिये 20,000 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी कर रही हैं। मर्चेंट बैंकर का कहना है कि अगले महीने यानी दिसंबर में सुपरमार्ट विशाल मेगा मार्ट और ब्लैकस्टोन के स्वामित्व वाली डायमंड ग्रेडिंग कंपनी इंटरनेशनल जेमोलॉजिकल इंस्टिट्यूट (इंडिया) लिमिटेड सहित 10 कंपनियां सार्वजनिक निर्गम लाने की तैयारी में हैं। उन्होंने कहा कि इनमें शिक्षा-केंद्रित गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) अवांसे फाइनेंशियल सर्विसेज, टीपीजी कैपिटल समर्थित साई लाइफ साइंसेज, अस्पताल श्रृंखला परिचालक पारस हेल्थकेयर और निवेश बैंक डीएएम कैपिटल एडवाइजर्स भी शामिल हैं। इन कंपनियों का लक्ष्य अपने सार्वजनिक निर्गम के जरिये कुल 20,000 करोड़ रुपये जुटाने का है। ये आईपीओ विभिन्न क्षेत्रों और आकार के होंगे। इनमें नए शेयरों का निर्गम और बिक्री पेशकश (ओएफएस) दोनों शामिल हैं। आनलाइन ब्रोकरेज हाउस ट्रेडजिनी के मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) त्रिवेश डी ने पीटीआई-भाषा को बताया कि महाराष्ट्र चुनाव के नतीजों ने बाजार में सकारात्मक धारणा पैदा की है। इससे आईपीओ गतिविधियों में तेजी आयेगी। उन्होंने कहा कि 2024 आईपीओ के लिए एक मजबूत साल रहा है। हालांकि, हाल शेयर बाजार ने कुछ संघर्ष किया है। उन्होंने कहा, फिलहाल चुनाव से संबंधित कोष बाजार में वापस आ रहा है और ग्रे मार्केट फिर से सक्रिय हो रहा है। कंपनियां मौजूदा शेयरधारकों को बाहर निकलने का रास्ता प्रदान करने, विस्तार योजनाओं के लिए धन जुटाने, कर्ज चुकाने और कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं का समर्थन करने के लिए प्राथमिक बाजार का दोहन कर रही हैं। अद्यतन आईपीओ दस्तावेजों के अनुसार, विशाल मेगा मार्ट सार्वजनिक निर्गम से 8,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। यह पूरी तरह प्रवर्तक समायत सर्विसेज एलएलपी की ओर से बिक्री पेशकश (ओएफएस) के रूप में होगा। जेमोलॉजिकल इंस्टिट्यूट आईपीओ के जरिये 4,000 करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद कर रही है। आईपीओ दस्तावेजों से पता चलता है कि इस शुरूआती शेयर बिक्री में 1,250 करोड़ रुपये के इक्विटी शेयरों का नया निर्गम और ब्लैकस्टोन की अनुषंगी कंपनी बीसीपी एशिया दो टॉपको पीटीई लिमिटेड द्वारा 2,750 करोड़ रुपये की बिक्री पेशकश शामिल है। अवांसे फाइनेंशियल सर्विसेज का लक्ष्य आईपीओ से 3,500 करोड़ रुपये जुटाने का का है। इसमें 1,000 करोड़ रुपये तक नये शेयर जारी कर जुटाये जायेंगे। साथ ही इसमें 2,500 करोड़ रुपये तक का ओएफएस शामिल है। इसके अलावा, डायग्नॉस्टिक श्रृंखला सुरक्षा डायग्नॉस्टिक, पैकेजिंग उपकरण निर्माता ममता मशीनरी और ट्रांसरेल लाइटिंग अगले महीने अपने-अपने सार्वजनिक लायेंगे। इस साल हुंडई मोटर इंडिया, स्विगी, एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी, बजाज हाउसिंग फाइनेंस, ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और फर्स्टक्राई की मूल कंपनी ब्रेनबीज सॉल्यूशंस सहित 75 कंपनियां पहले ही मुख्य मंच के आईपीओ के जरिये सामूहिक रूप से लगभग 1.3 लाख करोड़ रुपये जुटा चुकी हैं। यह पूरे 2023 में इस मार्ग के जरिये 57 कंपनियों द्वारा जुटायी गयी 49,436 करोड़ रुपये की राशि से कहीं अधिक है। आगे की ओर रुख किया जाये, तो आने वाले महीनों में 30 से अधिक आईपीओ आने की उम्मीद है। पिछले पांच वित्त वर्षों में आईपीओ निवेशकों ने महत्वपूर्ण लाभ कमाया है। त्रिवेश ने बताया कि वित्त वर्ष 2020-21 और 2024-25 के बीच 236 आईपीओ लाये गये थे। इनमें सूचीबद्धता के दिन औसतन 27 प्रतिशत का लाभ हुआ है।
भाजपा की चुनावी जीत से दलाल स्ट्रीट पर शानदार शुरुआत, सेंसेक्स में 1,200 अंक की उछाल, निफ्टी 370 अंक चढ़ाएबीएन सेंट्रल डेस्क। महाराष्ट्र चुनावों में भाजपा की मजबूत जीत से दलाल स्ट्रीट पर सकारात्मक रुख देखने को मिला और आज के कारोबारी सत्र में निफ्टी +370 अंकों की बढ़त के साथ खुला। वहीं सेंसक्स +1,216 के साथ खुली। विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा के प्रदर्शन से बाजार में आत्मविश्वास बढ़ेगा, जिससे राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास और खर्च पर नया ध्यान केंद्रित होगा। यह बदलाव खासतौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि शुक्रवार को बेंचमार्क इंडेक्सों में 2.5 फीसदी से अधिक की बढ़त देखी गई थी, हालांकि इसके बाद कुछ करेक्शन भी आया था। अक्टूबर में लगभग 6% की गिरावट के बाद, नवंबर में सेंसेक्स और निफ्टी में मामूली गिरावट देखी गयी है।एक्सपर्ट का मानना है कि आज के सत्र के पहले हिस्से में निफ्टी 300-400 अंकों की बढ़त देख सकता है, जिससे यह 24,000 अंक के स्तर को पार कर सकता है। अगर यह गति कायम रहती है, तो निफ्टी 24,250-24,300 के स्तर तक पहुंच सकता है, और इसके बाद 24,700 तक की रैली संभव हो सकती है। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि निफ्टी के लिए 24,400 के स्तर को पार करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य हो सकता है। एक्सपर्ट ने कहा कि भले ही भाजपा की जीत से बाजार खुश होगा, यह देखना होगा कि यह तेजी लंबे समय तक बनी रहती है या नहीं। उनके अनुसार, भाजपा की हार की संभावना अधिक थी और बाजार ने जीत के अनुमान के आधार पर अपनी चाल चली थी। अब, बाजार की रैली की स्थिरता मुख्य रूप से सरकारी खर्च और विकास योजनाओं पर निर्भर करेगी, जो अगले कुछ महीनों में रैली की दिशा तय करेंगे।
एबीएन बिजनेस डेस्क। अडानी समूह के लिए गुरुवार, 21 नवंबर, 2024 का दिन एक बुरे सपने जैसा साबित हुआ, जब अमेरिकी अदालतों में उनके ऊपर रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी के आरोपों के बाद भारतीय शेयर बाजार में अडानी समूह के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली। समूह की लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में 20 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों में हड़कंप मच गया और बाजार में तनाव का माहौल बन गया।शेयर बाजार खुलते ही अडानी समूह की कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई। सबसे ज्यादा गिरावट अडानी एनर्जी सोल्युशंस के शेयरों में देखने को मिली, जो 20 फीसदी गिरकर 697.70 रुपये पर पहुंच गए और स्टॉक में लोअर सर्किट लग गया। लोअर सर्किट का मतलब है कि इस गिरावट के बाद इस शेयर पर और कारोबार नहीं हो सकता। निवेशकों के लिए यह बड़ा झटका था, क्योंकि यह शेयर हाल ही में अच्छा प्रदर्शन कर रहा था।समूह की प्रमुख कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज का शेयर भी 10 फीसदी की गिरावट के साथ 2539 रुपये पर गिरकर लोअर सर्किट में चला गया। इसके अलावा अडानी पोर्ट्स के शेयर भी 10 फीसदी नीचे गए और 1160 रुपये पर कारोबार कर रहे हैं। अंबुजा सीमेंट और अडानी पावर के शेयरों में भी क्रमशः 10 फीसदी और 16 फीसदी की गिरावट आई, जो निवेशकों के लिए एक और चिंता का कारण बन गया।अडानी ग्रीन एनर्जी के शेयरों में 18 फीसदी की गिरावट आई और यह 1159 रुपये पर पहुंच गए, जबकि अडानी टोटाल गैस के शेयर 14 फीसदी गिरकर 577.80 रुपये तक पहुंच गए। एसीसी के शेयरों में भी 10 फीसदी की गिरावट आई, जिससे यह 1966.55 रुपये पर कारोबार कर रहा था और इस स्टॉक में भी लोअर सर्किट लग गया। अडानी विल्मर का शेयर 8 फीसदी गिरकर 301 रुपये पर कारोबार कर रहा है। इस गिरावट के कारण निवेशकों के बीच चिंता बढ़ गई है और अडानी समूह की कंपनियों के भविष्य को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि अगर अडानी समूह पर लगाए गए आरोपों की जांच में कोई ठोस तथ्य सामने आते हैं, तो यह उनके लिए गंभीर परिणाम ला सकता है। इसके अलावा, विदेशी निवेशकों का विश्वास भी डगमगा सकता है, जिससे इन कंपनियों के शेयरों में और गिरावट हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अडानी समूह को इस समय अपनी रणनीतियों में बदलाव करने की जरूरत है, ताकि यह स्थिति और खराब न हो।
दिन के हाई से फिसला बाजारएबीएन बिजनेस डेस्क। कई दिनों बाद आज शेयर बाजार हरे निशान पर बंद हुआ। आज सेंसेक्स 1000 अंक से भी ज्यादा चढ़ा था लेकिन कारोबार के अंत में सेंसेक्स 239 अंक बढ़कर 77,578 और निफ्टी 64 अंकों की तेजी के साथ 23,518 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 1,000 अंक की बढ़त के साथ 78,350 के स्तर वहीं निफ्टी में भी 300 अंक से ज्यादा की तेजी थी, ये 23,750 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 27 में बढ़त और सिर्फ 3 शेयरों में गिरावट देखने को मिल रही है। आज आटो, एनर्जी और कळ शेयर्स में ज्यादा बढ़त देखने को मिल रही है। एम एंड एम और टाटा मोटर्स के शेयर्स में 2% से ज्यादा की तेजी है।
सेंसेक्स 241 अंक फिसला, निफ्टी 23500 से फिसलाएबीएन बिजनेस डेस्क। विदेशी पूंजी निकासी, आईटी शेयरों में बिकवाली और अमेरिकी बाजारों से कमजोर संकेत के चलते बेंचमार्क शेयर सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी सोमवार को भी गिरावट के साथ बंद हुए। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 241.30 अंक या 0.31 प्रतिशत गिरकर 77,339.01 अंक पर बंद हुआ। यह लगातार गिरावट का चौथा दिन रहा। कारोबार के दौरान यह 615.25 अंक या 0.79 प्रतिशत गिरकर 76,965.06 अंक पर आ गया। लगातार सातवें दिन गिरावट के साथ एनएसई निफ्टी 78.90 अंक या 0.34 प्रतिशत गिरकर 23,453.80 पर आ गया। आईटी सेक्टर के शेयर और पिछड़े, टाटा स्टील व एसबीआई में बढ़त सेंसेक्स के 30 शेयरों में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इंफोसिस, एनटीपीसी, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, एक्सिस बैंक, टेक महिंद्रा, बजाज फिनसर्व, सन फार्मा, इंडसइंड बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज प्रमुख रूप से पिछड़ गए। टाटा स्टील, हिंदुस्तान यूनिलीवर, महिंद्रा एंड महिंद्रा, नेस्ले और भारतीय स्टेट बैंक के शेयर लाभ में रहे। विदेशी निवेशकों ने इस महीने अब तक भारतीय इक्विटी बाजारों से 22,420 करोड़ रुपए निकाले एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने गुरुवार को 1,849.87 करोड़ रुपये मूल्य की इक्विटी बेची। विदेशी निवेशकों ने इस महीने अब तक भारतीय इक्विटी बाजारों से 22,420 करोड़ रुपये निकाले हैं। इसका कारण उच्च घरेलू शेयर मूल्यांकन, चीन में बढ़ते निवेश तथा अमेरिकी डॉलर के साथ-साथ ट्रेजरी प्रतिफल में वृद्धि है। इससे पहले, शुक्रवार को गुरु नानक जयंती के अवसर पर शेयर बाजार बंद रहे। आय वृद्धि में मंदी और मुद्रास्फीति के कारण रुपया कमजोर पड़ा, इससे बाजार में नरमी जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, "बाजार में कमजोरी का दौर जारी रह। तिमाही नतीजों में आय वृद्धि में मंदी और मुद्रास्फीति के कारण कमजोर रुपये ने धारणा को प्रभावित किया। दिसंबर में फेड ब्याज दर में कटौती की कम उम्मीद के कारण आज आईटी शेयरों ने नकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की, जिससे बीएफएसआई खंड में खर्च में देरी हो सकती है।
जापान को पछाड़ भारत जल्द बनेगा दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएबीएन सेंट्रल डेस्क। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जल्द ही जापान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। कुछ का कहना है कि यह मील का पत्थर अगले दो साल के भीतर हासिल किया जा सकता है। 2023 में जापान की अर्थव्यवस्था $4.22 ट्रिलियन की थी, जबकि भारत की $3.55 ट्रिलियन।कैपिटल इकोनॉमी के एशिया-प्रशांत प्रमुख मार्सेल थीलिएंट के अनुसार, हमारे मौजूदा अनुमानों के अनुसार, भारत 2026 तक जापान को पीछे छोड़ सकता था। लेकिन अब यह बदलाव जल्द होने की संभावना है।अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) ने भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि (जो महंगाई को ध्यान में रखती है) को 2024 में 7% और 2023 में 8.2% बताया है। 2025 और 2026 में यह वृद्धि 6.5% के आसपास बनी रहेगी। दूसरी ओर, जापान की आर्थिक स्थिति कमजोर नजर आ रही है। आइएमएफ ने 2024 में जापान की जीडीपी वृद्धि मात्र 0.3% रहने का अनुमान लगाया है, जो 2023 में 1.7% और 2022 में 1.2% थी। जापान मुद्रास्फीति, कमजोर येन और धीमी आर्थिक वृद्धि जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। पिछले महीने हुए चुनाव में इन मुद्दों पर बहस हुई, जहां जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा की लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी ने एक दशक में पहली बार सत्ता गंवा दी।हालांकि, इशिबा ने संसदीय मतदान में अपने पद को बरकरार रखा। भारत का भविष्य उज्ज्वल नजर आ रहा है। व्यापार, कृषि और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में तेज प्रगति हो रही है। एस एंड पी ग्लोबल के अभिषेक तोमर ने कहा, भारत की युवा और ऊर्जावान जनसंख्या इसे वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में मदद करेगी। एस एंड पी ग्लोबल का अनुमान है कि भारत 2030 या 2031 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भी बन सकता है। अमेरिका, जो अब भी दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, 2024 में 2.8% और 2025 तक 2.2% जीडीपी वृद्धि दर्ज कर सकता है।हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद उनकी आर्थिक नीतियां वैश्विक व्यापार पर असर डाल सकती हैं। ट्रंप द्वारा चीनी आयात पर 60% तक के शुल्क का प्रस्ताव अन्य अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित कर सकता है और अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए भी चीजें महंगी हो सकती हैं।
प्राइस बैंड 102-108 रुपये प्रति शेयरएबीएन बिजनेस डेस्क (नई दिल्ली)। एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने के लिए पूरी तरह तैयार है। एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी का आईपीओ निवेशकों के लिए 19 नवंबर को खुलेगा। कंपनी ने इसके लिए मूल्य का दायरा (प्राइस बैंड) 102-108 रुपये प्रति शेयर तय किया है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड का आईपीओ 19 नवंबर को खुलेगा। निवेशक इसके लिए 22 नवंबर, 2024 तक बोली लगा सकेंगे। कंपनी की योजना इस इश्यू के जरिए करीब 10,000 करोड़ रुपये जुटाने की है। एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के शेयर 27 नवंबर को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होंगे। बाजार नियामक सेबी को दी जानकारी के मुताबिक सार्वजनिक क्षेत्र की राष्ट्रीय तापविद्युत निगम मिटेड की सब्सिडियरी कंपनी एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड का आईपीओ 10 हजार करोड़ रुपये का पूरी तरह से फ्रेश इक्विटी शेयरों का है, जिसमें 92.59 करोड़ शेयर शामिल हैं। इसमें कोई आॅफर फॉर सेल नहीं होगा। उल्लेखनीय है कि एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में काम करती है, जो एनटीपीसी लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है।
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