ग्राहक दिवस 24 दिसंबर पर विशेष दिनकर जी सबनीस एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय चिंतन के दृष्टिकोण से अर्थव्यवस्था के केंद्र बिंदु ग्राहक संप्रभुता पर विचार करने से पहले ग्राहक शब्द का अर्थ समझना आवश्यक है। क्योंकि वैश्विक ग्राहक आंदोलन ग्राहक को बाजार में की जाने वाली खरीद-बिक्री की गतिविधियों तक ही सीमित रखता है। जबकि ग्राहक शब्द अंग्रेजी में उपभोक्ता या कस्टमर का पर्याय नहीं है। इसे हिंदी शब्द उपभोक्ता का पर्याय भी नहीं माना जा सकता। उपभोक्ता शब्द उपभोग की अवधारणा से लिया गया है, जबकि ग्राहक शब्द प्राप्त करने या स्वीकार करने की क्रिया से उत्पन्न हुआ है। दोनों के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर है। उपभोग असीमित है और आवश्यकता के बजाय क्षमता को संतुष्ट करता है, जबकि प्राप्ति आवश्यकताओं की पूर्ति तक सीमित है। आवश्यकता पूरी होने पर संतुष्टि प्राप्त होती है। ग्राहक शब्द सुनकर वास्तव में विचार यह होना चाहिए कि ग्राहक ही अर्थव्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण घटक है। ग्राहक केवल वस्तुओं और सेवाओं के खरीदार नहीं हैं। ग्राहक आर्थिक ढांचे का केंद्रीय तत्व हैं। ग्राहक की मांग ही उत्पादन प्रक्रिया की शुरुआत करती है, और यही मांग अर्थव्यवस्था की गति को बनाये रखती है। ग्राहक की प्राथमिकताएं और शक्ति अर्थव्यवस्था को दिशा देती हैं। अगर ग्राहक उत्पादों या सेवाओं के प्रति उत्साह नहीं दिखाते हैं तो उद्योग और व्यवसाय मंदी का अनुभव कर सकते हैं, जिससे अंतत: उत्पादन में कमी और अर्थव्यवस्था में संभावित ठहराव आ सकता है। इसका मतलब है कि आर्थिक समृद्धि के लिए ग्राहक का आत्मविश्वास और क्रय शक्ति आवश्यक है। आर्थिक परिदृश्य में विभिन्न बाजार विकल्पों की उपलब्धता बढ़ रही है, परंतु ग्राहक को प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता है। उनकी जरूरतें और प्राथमिकताएं अद्वितीय हैं। इसलिए, सरकार और विभिन्न व्यवसाय अपने ग्राहक अनुभव और संतुष्टि पर ध्यान केंद्रित करते हुए रणनीतियां तैयार करते हैं। इस संदर्भ में ग्राहक की संप्रभुता का उल्लेख भी महत्वपूर्ण है। ग्राहकों के पास अब ज्ञान और विकल्प दोनों हैं और वे इनका उपयोग संतोषजनक अनुभव सुनिश्चित करने के लिए करते हैं। उनके लिए अपने अधिकारों और विकल्पों के बारे में जागरूक होना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे न केवल उनकी संप्रभुता मजबूत होती है, बल्कि अर्थव्यवस्था भी सशक्त होती है। अंतत: हम कह सकते हैं कि ग्राहक अर्थव्यवस्था के विकास और सुधार के लिए जरूरी कुंजी हैं। उनकी संतुष्टि और भरोसा दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता और विकास का मार्ग प्रशस्त करता है। किसी भी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए ग्राहक की सक्रिय भागीदारी एक अनिवार्य शर्त है। लेकिन, वर्तमान में वैश्विक आर्थिक गतिविधियां ग्राहक की अनदेखी करते हुए संचालित की जा रही हैं। पारदर्शिता का पूर्ण अभाव है। यही कारण है कि दुनिया की अधिकांश अर्थव्यवस्था इस समय संकट में हैं। सरकार, उत्पादक, कॉरपोरेट और व्यापारी ग्राहकों को अंधेरे में रखकर न केवल उनका शोषण कर रहे हैं, बल्कि अर्थव्यवस्था के पोषक तत्वों को भी नष्ट कर रहे हैं। वे भूल जाते हैं कि जैसे ही ग्राहक का बाजार से भरोसा डगमगाता है, वैसे ही मंदी की काली छाया बाजार को अपनी चपेट में लेने लगती है। ऐसी स्थिति में अर्थव्यवस्था के सभी घटक प्रभावित होने लगते हैं और वे ग्राहकों को बाजार की ओर आकर्षित करने के लिए अप्राकृतिक तरीकों का सहारा लेते हैं। पश्चिमी दुनिया में ग्राहकों की प्रकृति, व्यवहार और विशेषताओं के कारण बाजार मंदी से उबर जाते हैं, लेकिन इसकी कीमत ग्राहकों को चुकानी पड़ती है, जो लगातार कर्ज के बोझ तले दबते जाते हैं। इसके विपरीत हमारे देश में ग्राहक, भारतीय ग्राहक आंदोलनों और सांस्कृतिक प्रवृत्तियों से प्रभावित होकर अपनी आवश्यकताओं को सीमित करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं। सरकार विभिन्न वित्तीय संस्थानों के माध्यमों से ग्राहकों को अपनी जरूरत बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए आसान पूंजी और ऋण उपलब्ध कराने के बाद भी स्थानीय ग्राहक अपनी जरूरतें बढ़ाने में बहुत कम रुचि दिखाते हैं, क्योंकि वे अपने कर्ज का बोझ नहीं बढ़ाना चाहते। भारतीय बाजार में ग्राहक मांग बढ़ाने के कृत्रिम तरीकों से दूर रहते हैं। हालांकि, यह स्पष्ट है कि बाजार की समृद्धि पूरी तरह से ग्राहक के व्यवहार और आवश्यकताओं पर निर्भर करती है। इसके बावजूद वर्तमान में सरकार, उत्पादक और व्यापारी ग्राहक की अनदेखी कर रहे हैं। हालांकि, ग्राहक आंदोलनों के प्रचार-प्रसार और ग्राहक कार्यकतार्ओं की सतर्कता के कारण, ग्राहक सहायता के नाम पर कुछ कार्यक्रम शुरू किए गए हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश कार्यक्रम ग्राहक की समस्या को हल करने के बजाय उसे और जटिल बनाते नजर आते हैं। वे ग्राहक की समस्याओं को सुनते नहीं हैं, बल्कि ग्राहक को अपनी समस्याओं को अपने तैयार किए गए ढांचे में बांधने के लिए मजबूर करते हैं, जिससे समस्या-समाधान की आड़ में उनका ध्यान भटक जाता है। इन कार्यक्रमों का मूल उद्देश्य उत्पादकों के हितों की सेवा करना है, जिसके कारण अपनी समस्याओं का समाधान चाहने वाले अधिकांश ग्राहक निराशा में सिर पकड़कर बैठ जाते हैं। उत्पादक वस्तुओं का निर्माण करते हैं और सेवा प्रदाता ग्राहक को सेवाएं प्रदान करते हैं। ग्राहक को इन वस्तुओं और सेवाओं की आवश्यकता होती है। इसलिए दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। फिर इस प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव क्यों है? उत्पादकों और सेवा प्रदाताओं के मुनाफे पर ग्राहकों को कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि, इस मुनाफे की सीमा निर्धारित होनी चाहिए। आजकल ग्राहकों का शोषण करने के लिए नई-नई मार्केटिंग तकनीक अपनायी जा रही है। यह शोषण बंद होना चाहिए। ग्राहक आंदोलन वस्तुओं को सस्ता बनाने के बारे में नहीं है, यह उचित मूल्य पर उचित वस्तु की वकालत करता है। जब कोई ग्राहक किसी उत्पाद के लिए निमार्ता द्वारा मांगी गयी पूरी कीमत चुकाता है, तो उसे ऐसा उत्पाद मिलना चाहिए जो निमार्ता द्वारा वादा किए गए गुणों को पूरा करता हो। वे उत्पाद की गुणवत्ता से समझौता क्यों करें? ग्राहक उत्पाद के लिए चुकायी गयी कीमत का पूरा मूल्य चाहता है, थोड़ा भी कम नहीं। यही परिस्थितियां हैं जो बाजार में टकराव का माहौल बनाती हैं। नीतिगत विषय तो यह है कि ग्राहक आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बिंदु होने तथा आर्थिक ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के कारण संप्रभुता होना चाहिए। ये गतिविधियां पर्दे के पीछे नहीं, बल्कि पारदर्शी तरीके से संचालित होनी चाहिए। इन आर्थिक गतिविधियों में ग्राहक को शामिल होना चाहिए। आर्थिक गतिविधियां त्रिकोणीय (सरकार, उत्पादक और व्यापारी) नहीं होनी चाहिए। वे चतुर्भुज (सरकार, उत्पादक, व्यापारी और ग्राहक) होनी चाहिए। अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से और स्थायी रूप से विकसित करने के लिए यह एक आवश्यक शर्त है। इसके अभाव में सरकार, उत्पादक और ग्राहक के बीच टकराव जारी रहेगा, जो देश और उसकी अर्थव्यवस्था के लिए लाभदायक नहीं है। यह अलग बात है कि आज ग्राहक आंदोलन इतना संगठित या मजबूत नहीं है कि वह सीधे आर्थिक गतिविधियों में हस्तक्षेप कर उन्हें पंगु बना सके। हालांकि, ग्राहकों को संगठित करने के लिए अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के प्रयास सफल हो रहे हैं। वर्तमान समय की आवश्यकता है कि ग्राहकों को आर्थिक व्यवस्था के नीति निर्धारण में शामिल करना और उन्हें उनका उचित स्थान देना, प्राथमिकता होना चाहिए और आर्थिक ढांचे के सभी घटकों को साथ मिलकर अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। (लेखक, अखिल भारतीय संगठन ग्राहक पंचायत के केंद्रीय संगठन मंत्री हैं।)
शेयर बाजार में भूचाल, निवेशकों के 9 लाख करोड़ स्वाहा एबीएन बिजनेस डेस्क। घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार को जबरदस्त गिरावट देखी गयी। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स 1176.46 अंक की बड़ी गिरावट के साथ 78,041.59 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी 364.2 अंक लुढ़ककर 23,587.50 के स्तर पर बंद हुआ। इस गिरावट ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया। 19 दिसंबर को बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप 4.49 लाख करोड़ रुपये था, जो 20 दिसंबर को घटकर 4.40 लाख करोड़ रह गया। इस तरह निवेशकों को एक ही दिन में 9 लाख करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा। आज के कारोबार में ये स्टॉक्स हुए बेदम निफ्टी में ट्रेंट, टेक महिंद्रा, एमएंडएम, इंडसइंड बैंक, एक्सिस बैंक में सबसे ज्यादा गिरावट रही, जबकि डॉ रेड्डीज लैब्स, नेस्ले इंडिया, आईसीआईसीआई बैंक में बढ़त रही। सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान पर बंद हुए। इसमें रियल्टी इंडेक्स में 4 प्रतिशत की गिरावट, आटो, आईटी, कैपिटल गुड्स, मेटल, टेलीकॉम, पीएसयू बैंक में 2-2 प्रतिशत की गिरावट रही। बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में 2-2 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गयी। निफ्टी आईटी सबसे अधिक 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट के साथ सबसे अधिक पिछड़ गया। इसके अलावा, एक्सेंचर की पहली तिमाही की मजबूत आय भी धारणा को बढ़ाने में विफल रही। पांच दिनों में निवेशकों को 18 लाख करोड़ का नुकसान बाजार में आज की गिरावट का कारण एफआईआई की बिकवाली में तेज वृद्धि है। लगातार पांचवें सत्र में गिरावट देखी गयी। पिछले पांच दिनों के नुकसान में निवेशकों को 18 लाख करोड़ का नुकसान हुआ है, क्योंकि शुक्रवार 13 दिसंबर को बीएसई-सूचीबद्ध फर्मों का कुल बाजार पूंजीकरण 459 लाख करोड़ था। एनएसई पर सभी प्रमुख क्षेत्रीय सूचकांकों में 20 दिसंबर को गिरावट दर्ज की गयी। निफ्टी रियल्टी में 4 प्रतिशत की गिरावट आयी, जबकि पीएसयू बैंक और आईटी सूचकांकों में लगभग 3 प्रतिशत की गिरावट आयी। निफ्टी मेटल, मीडिया, आॅटो और निफ्टी बैंक इंडेक्स में 2 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गयी।
सेंसेक्स 502 अंक गिरकर 80,182 के स्तर पर एबीएन बिजनेस डेस्क। शेयर बाजार में आज यानी बुधवार (18 दिसंबर) को गिरावट दिनभर गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स 502 अंक गिरकर 80,182 के स्तर जबकि निफ्टी में भी 137 अंक की गिरावट रही, ये 24,198 के स्तर पर बंद हुआ। कोराबर के दौरान सेंसेक्स 600 अंक से ज्यादा गिरा और ये 80,071 के स्तर लेवल पर पहुंचा गया। वहीं, निफ्टी में भी करीब 178 अंक की गिरावट देखी गयी, ये 24,157 के स्तर पर था। बुधवार के कारोबार में सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 21 में गिरावट और 9 में तेजी रही। निफ्टी के 50 शेयरों में से 31 में गिरावट और 19 में तेजी रही। एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार एशियाई बाजार में जापान के निक्केई में 0.21% की गिरावट जबकि कोरिया के कोस्पी में 0.95% की तेजी है। चीन का शंघाई कम्पोजिट इंडेक्स 0.52% की तेजी के साथ कारोबार कर रहा है। एनएसई के डेटा के अनुसार, 17 दिसंबर को विदेशी निवेशकों की नेट सेल 6,409.86 करोड़ रुपये रही। इस दौरान घरेलू निवेशकों ने 2,706.48 करोड़ के शेयर्स खरीदे। 17 दिसंबर को अमेरिका का डाओ जोंस 0.61% गिरकर 43,449 पर बंद हुआ। एस एंड पी 500 0.39% की गिरावट के साथ 6,050 और नैस्डैक 0.32% नीचे 20,109 के स्तर पर बंद हुआ। मंगलवार को 1000 अंक गिरकर बंद हुआ था बाजार कल यानी मंगलवार (16 दिसंबर) को सेंसेक्स 1,064 अंक की गिरावट के साथ 80,684 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 332 अंक की गिरावट रही, ये 24,336 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, बीएसई मिडकैप 311 अंक की गिरावट के साथ 47,816 के स्तर पर बंद हुआ। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 29 में गिरावट और 1 में तेजी रही। निफ्टी के 50 शेयरों में से 49 में गिरावट रही, इसके केवल एक शेयर बढ़त के साथ बंद हुआ। एनएसई के सभी सेक्टोरल इंडेक्स में गिरावट रही। निफ्टी पीएसयू बैंक सबसे ज्यादा 1.88% की गिरावट के साथ बंद हुआ। इसके अलावा, निफ्टी मेटल, बैंक, आॅटो, फार्मा में भी करीब 2% की गिरावट रही।
सेंसेक्स 1064 अंक टूटा, निफ्टी 24350 से फिसलाएबीएन बिजनेस डेस्क। अमेरिकी फेड के ब्याज दर निर्णय से पहले निवेशकों के सतर्क रूख के बीच व्यापक बिकवाली से मंगलवार को शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट आयी। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स लगातार दूसरे दिन गिरावट के साथ 1,064.12 अंक या 1.30 प्रतिशत टूटकर 80,684.45 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 1,136.37 अंक या 1.39 प्रतिशत गिरकर 80,612.20 अंक पर आ गया। एनएसई निफ्टी 332.25 अंक या 1.35 प्रतिशत गिरकर 24,336 पर आ गया।डॉलर का मजबूत होनारुपये की तुलना में अमेरिकी डॉलर की कीमत लगातार बढ़ रही है। डॉलर इंडेक्स 106.77 पर स्थिर है, लेकिन इस साल इसमें 5% की तेजी आ चुकी है। मजबूत डॉलर भारतीय शेयर मार्केट के लिए विदेशी निवेशकों की रुचि को कम करता है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह उभरते बाजारों में निवेश को कम आकर्षक बनाता है।चीन की अर्थव्यवस्था में कमजोरीनवंबर में चीन की खपत उम्मीद से कहीं ज्यादा कम रही है। खुदरा बिक्री में सिर्फ 3% की वृद्धि हुई, जो अक्टूबर के 4.8% की वृद्धि से काफी कम है। वहीं दूसरी ओर औद्योगिक उत्पादन में साल-दर-साल 5.4% की वृद्धि हुई, जो अक्टूबर के अनुरूप है। यह मंदी वैश्विक कमोडिटी मांग को प्रभावित कर सकती है। इससे भारत में मेटल, एनर्जी और आटो सेक्टर के लिए जोखिम पैदा हो सकता है। आज के कारोबार में निफ्टी मेटल और आटो सेक्टर में बड़ी गिरावट आयी।व्यापार घाटा बढ़नाभारत का व्यापारिक व्यापार घाटा नवंबर में बढ़कर 37.84 बिलियन डॉलर के अब तक के हाई लेवल पर पहुंच गया है। यह अक्टूबर में 27.1 बिलियन डॉलर था। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि देश का आयात बिल बढ़ गया और निर्यात में गिरावट आयी। व्यापारिक घाटा बढ़ने से रुपये पर दबाव पड़ेगा जिससे यह डॉलर के मुकाबले 85 डॉलर पर पहुंच जायेगा। इससे आईटी और फार्मा जैसे निर्यातकों को रुपये में गिरावट से लाभ होगा लेकिन आयातकों के लिए आयात लागत में वृद्धि से उनके शेयर की कीमतों पर असर पड़ेगा।ग्लोबल मार्केट में गिरावटफेड रिजर्व की बैठक को लेकर दुनिया के दूसरे बाजार भी मंगलवार को सहम गये। जापान के बाहर एशिया-प्रशांत शेयरों के एमएससीआई के व्यापक सूचकांक में 0.3% की गिरावट आयी। जापान के निक्केई में 0.15% की गिरावट आयी, जबकि वायदा कारोबार ने यूरोपीय शेयर बाजारों के लिए सुस्त शुरुआत का संकेत दिया। यूरोस्टॉक्स 50 वायदा कारोबार में 0.16% की गिरावट आयी। वहीं जर्मन डीएएक्स वायदा कारोबार में 0.06% की गिरावट आयी। एफटीएसई वायदा कारोबार में 0.24% की कमजोरी आयी।
खुदरा महंगाई दर छह फीसदी से नीचे 5.48% पर, सरकारी आंकड़े जारीएबीएन सेंट्रल डेस्क। महंगाई के मोर्चे पर नवंबर महीने में लोगों को मामूली राहत मिली। सांख्यिकी व कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत की उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति दर बीते महीने 5.48% रही। इससे पहले अक्तूबर में खुदरा महंगाई दर 6.21% थी। भारतीय रिजर्व बैंक ने खुदरा मुद्रास्फीति को 4% पर रखने का लक्ष्य रखा है, जिसमें दोनों ओर दो प्रतिशत अंकों की सहनशीलता सीमा तय की गयी है। गुरुवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार खुदरा मुद्रास्फीति दर नवंबर में धीमी होकर 5.48 प्रतिशत पर आ गयी। अक्तूबर में यह 6.21 प्रतिशत थी। खुदरा महंगाई घटने का मुख्य कारण खाद्य पदार्थों, विशेषकर सब्जियों की कीमतों में नरमी आना है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की ओर से जारी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के आंकड़ों के अनुसार, नवंबर में खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति घटकर 9.04 प्रतिशत रह गयी। अक्तूबर में यह 10.87 प्रतिशत और नवंबर 2023 में 8.70 प्रतिशत रही थी। एनएसओ ने कहा, नवंबर 2024 के महीने के दौरान सब्जियों, दालों और उत्पादों, चीनी और मिठाई, फलों, अंडे, दूध और उससे जुड़े उत्पादों, मसालों, परिवहन और संचार व व्यक्तिगत देखभाल जैसे उपसमूहों में मुद्रास्फीति में उल्लेखनीय गिरावट देखी गयी है। सीपीआई आधारित हेडलाइन मुद्रास्फीति जुलाई-अगस्त के दौरान औसतन 3.6 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 5.5 प्रतिशत और अक्तूबर 2024 में 6.2 प्रतिशत हो गयी थी। यह आंकड़ा सितंबर 2023 के बाद से एक वर्ष से अधिक समय में सबसे अधिक था। बीते सप्ताह, रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए मुद्रास्फीति अनुमान को 4.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 4.8 प्रतिशत कर दिया है। आरबीआई ने यह भी कहा कि खाद्य कीमतों पर दबाव के कारण दिसंबर तिमाही में महंगाई दर के ऊंचे स्तर पर बने रहने की संभावना है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित हेडलाइन मुद्रास्फीति जुलाई-अगस्त तिमाही के दौरान औसतन 3.6 प्रतिशत थी।
गैस डिस्ट्रीब्यूटर पीएसयू ने शेयरधारकों को दी गुड न्यूज, 1 शेयर पर देगी 1 बोनस शेयर आईजीएल का शेयर 1:50 बजे 0.34% या 1.30 रुपये बढ़कर 386.85 रुपये पर कारोबार कर रहा था। पिछले एक हफ्ते में कंपनी के शेयर 5% से ज्यादा चुके हैं एबीएन बिजनेस डेस्क। गैस डिस्ट्रीब्यूटर कंपनी इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड ने निवेशकों को मंगलवार को बड़ी गुड़ न्यूज दी है। कंपनी ने पहली बार बोनस इश्यू का एलान किया है। रेगुलेटरी फाईलिंग के मुताबिक, कंपनी हर एक 1 शेयर पर निवेशकों को 1 बोनस शेयर देगी। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड के बोर्ड आफ डायरेक्टर्स ने मंगलवार (10 दिसंबर) को हुई बैठक के बाद यह घोषणा की। आईजीएल का शेयर 1:50 बजे 0.34% या 1.30 रुपये बढ़कर 386.85 रुपये पर कारोबार कर रहा था। पिछले एक हफ्ते में कंपनी के शेयर 5% से ज्यादा चुके हैं। आईजीएल ने 1:1 के रेश्यो में बोनस इश्यू का ऐलान किया है। इसका मतलब है कि प्रत्येक 2 रुपये के फेस वैल्यू वाले शेयर पर 2 रुपये का पूरी तरह से पेड अप शेयर दिया जायेगा। आईजीएल ने रेगुलेटरी फाईलिंग में कहा कि एलिजिबल शेयरहोल्डर्स को 2 रुपये फेस वैल्यू वाले पूरी तरह से पेड अप प्रत्येक शेयर पर 1 शेयर दिया जायेगा। रिकॉर्ड डेट अभी तय नहीं की गई है। इसे शेयरहोल्डर्स की तरफ से बोनस इश्यू को अप्रूवल मिलने के बाद तय किया जायेगा। शुरुआती कारोबार में 2.26% चढ़ा शेयर आईजीएल के शेयर में आज सुबह से ही हलचल देखने को मिल रही है। गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी का शेयर मंगलवार (10 दिसंबर) सुबह 2.26% चढ़कर खुला। वहीं, बीते एक सप्ताह में कंपनी का शेयर 5% से ज्यादा चढ़ा है।
क्या खरीदने का सही समय? जानें एक्सपर्ट्स की राय वित्त वर्ष 2024-25 की सितंबर तिमाही के अंत में मंथली लेनदेन करने वाले यूजर्स की संख्या 7.1 करोड़ होने के साथ सुधार के संकेत दिख रहे हैं। जतिन भूटानी एबीएन बिजनेस डेस्क। शेयर बाजार में भारी उठापटक के बीच फिनटेक कंपनी कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस के शेयर हाल ही में 52 वीक हाई पर पहुंच गये। पेटीएम ब्रांड नाम से कारोबार चलाने वाली कंपनी के शेयर अपने आल टाइम लो से 217% चढ़ चुके हैं। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में पेटीएम 0.83% या 8.10 रुपये गिरकर 963.10 पर ट्रेड कर रहा है। पेटीएम 8 मई, 2024 को 317 रुपये प्रति शेयर के अपने आल टाइम लो पर पहुंच गया था। कंपनी के शेयरों में उस समय यह गिरावट आरबीआई के उस निर्देश के बाद आयी थी, जिसमें पेटीएम को अपनी बैंकिंग यूनिट बंद करने को कहा गया था। आरबीआई ने इस साल की शुरुआत में लगातार अनुपालन नियमों में खामियों के कारण पेटीएम पेमेंट्स बैंक पर रोक लगा दी थी। केंद्रित बैंक की इस कार्रवाई के बाद पेटीएम का शेयर बुरी तरह लुढ़क गया था। पेटीएम 6 महीने में 146% चढ़ा पेटीएम का शेयर आरबीआई की कार्रवाई से अब पूरी तरह उबरने के साथ पिछले 6 महीने में 146% चढ़ भी चुका है। वहीं, पिछले 3 महीने में पेटीएम ने 47.09% और 1 महीने में 13.37 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। बता दें कि वन97 कम्युनिकेशंस की सिंगापुर स्थित कंपनी ने जापान की पेपे में अपने शेयर अधिग्रहण अधिकारों को बेचने की मंजूरी दे दी है। 2,364 करोड़ रुपये में हुई डील के बाद कंपनी के शेयर में तेजी देखी गयी। इससे पहले अगस्त में न97 कम्युनिकेशंस ने अपने एंटरटेनमेंट टिकटिंग बिजनेस को जोमैटो को 2,048 करोड़ रुपये में बेच दिया था। वित्त वर्ष 2024-25 की सितंबर तिमाही के अंत में मंथली लेनदेन करने वाले यूजर्स (टळव) की संख्या 7.1 करोड़ होने के साथ कंपनी में सुधार के संकेत दिख रहे हैं। एक्सपर्ट्स की राय एक्सपर्ट्स का मानना है कि पेटीएम का शेयर शार्ट से मिड टर्म में 1380 से 1500 रुपये तक के लेवल तक जा सकता है। स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट लिमिटेड में सीनियर टेक्नीकल एनालिस्ट प्रवेश गौड़ ने कहा, पेटीएम के शेयर ने वापसी करते हुए शानदार मजबूती दिखाई है। यह अपने 52 वीक के हाई लेवल के करीब कारोबार कर रहा है और 1000 के मनोवैज्ञानिक स्तर पर वीकली रेसिस्टेंस लेवल के करीब पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि इस स्तर से ऊपर का ब्रेकआउट मजबूत बुलिश चाल को चिंगारी दे सकता है। इस ब्रेकआउट में शार्ट से मध्यम अवधि के दौरान शेयर को 1380 और 1500 के स्तर तक ले जाने की क्षमता है। वहीं, डाउनसाइड देखें तो प्रमुख सपोर्ट 870 पर मजबूती से दिख रहा है।
सिर्फ 100 रुपये से शुरू करें बड़े बिजनेस घरानों में निवेश आदित्य बिड़ला सन लाइफ कॉन्ग्लोमरेट फंड 22 सेक्टर्स की 169 कंपनियों में निवेश का अवसर देगा, जो इरए के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन का 33 प्रतिशत हिस्सा हैं एबीएन बिजनेस डेस्क। आदित्य बिड़ला सन लाइफ म्यूचुअल फंड ने बड़े बिजनेस घरानों पर फोकस करते हुए आदित्य बिड़ला सन लाइफ कॉन्ग्लोमरेट फंड नाम से एक नया फंड लॉन्च किया है। निवेशक बिड़ला ग्रुप के इस न्यू फंड आॅफर पर 5 दिसंबर से 19 दिसंबर 2024 तक दांव लगा सकते हैं। यह ओपन-एंडेड इक्विटी फंड, भारत का पहला ऐसा फंड है जो खासतौर पर बड़े बिजनेस घरानों में पैसा लगायेगा और निवेशकों को टाटा, रिलायंस और अदाणी जैसे कॉन्ग्लोमरेट की ग्रोथ का फायदा उठाने का मौका देगा। क्या होता है कॉन्ग्लोमरेट? कॉन्ग्लोमरेट ऐसे बड़े बिजनेस होते हैं, जो कई पीढ़ियों से दूरदर्शी नेतृत्व और मजबूत गवर्नेंस के लिए जाने जाते हैं। इनके मजबूत बिजनेस मॉडल और सस्ती फंडिंग की सुविधा उन्हें बड़े पैमाने पर और विविधता के साथ लगातार बढ़ने में मदद करती है। चूंकि बिड़ला ग्रुप का नया फंड देश के बड़े बिजनेस घरानों पर फोकस करेगा, तो ऐसे में आप इसमें निवेश करके, इन कॉन्ग्लोमरेट की लॉन्ग टर्म ग्रोथ से फायदा उठा सकते हैं। आदित्य बिड़ला कॉन्ग्लोमरेट फंड में निवेश शुरू करें सिर्फ 100 से! लंपसम निवेश और स्विच-इन : आप इस फंड में कम से कम 100 रुपये का निवेश कर सकते हैं। इसके बाद, आप 1 रुपये के गुणकों में और निवेश कर सकते हैं। मंथली, वीकली और डेली सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान : अगर आप सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान के जरिये निवेश करना चाहते हैं, तो न्यूनतम 100 रुपये से शुरुआत कर सकते हैं। इसके बाद आप 1 रुपये के गुणकों में अपनी राशि बढ़ा सकते हैं। यह सुविधाजनक न्यूनतम राशि निवेशकों को छोटे कदमों से निवेश शुरू करने और अपने निवेश पोर्टफोलियो को व्यवस्थित तरीके से बढ़ाने का मौका देती है।169 कंपनियों में निवेश का मौका, 33% मार्केट कैप होगा कवरआदित्य बिड़ला सन लाइफ कॉन्ग्लोमरेट फंड 22 सेक्टर्स की 169 कंपनियों में निवेश का अवसर देगा, जो बीएसई के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन का 33 प्रतिशत हिस्सा हैं। इस फंड में 36 लार्जकैप, 30 मिडकैप और 103 स्मॉलकैप शेयरों का विविध मिश्रण शामिल हैं, जो निवेशकों को व्यापक ग्रोथ पोटेंशियल और सेक्टोरल डाइवर्सिटी का लाभ प्रदान करता है।आदित्य बिड़ला सन लाइफ कॉन्ग्लोमरेट फंड के फीचरकुणाल सांगोई और हरीश कृष्णन आदित्य बिड़ला सन लाइफ कांग्लोमरेट फंड के लिए फंड मैनेजर होंगे। यह फंड बीएसई सेलेक्ट बिजनेस ग्रुप्स इंडेक्स टीआरआई पर आधारित है।इक्विटी-आधारित थीमेटिक फंडयह अपनी तरह का पहला इक्विटी-ओरिएंटेड थीमेटिक फंड है, जो अपनी कुल संपत्ति का 80% तक देश के बड़े बिजनेस घरानों में निवेश करेगा।विविधता से भरा पोर्टफोलियोइस फंड का निवेश 41 इंडस्ट्री और करीब 20 सेक्टर तक फैला है, जिससे यह अलग-अलग सेक्टर में मजबूत विविधता सुनिश्चित करता है। यह फंड लार्ज, मिड और स्मॉल कैप शेयरों का मिला-जुला पोर्टफोलियो रखेगा।एक्टिव फंड मैनेजमेंट स्ट्रेटेजीफंड मैनेजर देश के बड़े बिजनेस घरानों की कंपनियों को उनके ग्रोथ प्रॉस्पेक्ट्स के आधार पर चुनता है। यह फंड बड़े ग्रुप पर ध्यान देते हुए मिड और स्मॉल कैप शेयरों पर ज्यादा फोकस करेगा।लंबी अवधि के निवेश के लिए उपयुक्तयह इक्विटी फंड उन निवेशकों के लिए सही है, जिनका निवेश समय 3-5 साल या उससे ज्यादा का है।
होम लोन लेने वालों के लिए बड़ी खबर: RBI ने ब्याज दरों पर लिया अहम फैसला...एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में लगातार 11वीं बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। यह फैसला अर्थव्यवस्था की स्थिरता बनाए रखने और महंगाई को नियंत्रण में रखने के उद्देश्य से लिया गया है।आखिरी बदलाव फरवरी 2023 मेंRBI ने आखिरी बार फरवरी 2023 में रेपो रेट में 0.25% की बढ़ोतरी की थी, जिसके बाद रेपो रेट 6.50% पर पहुंच गया। तब से लेकर अब तक ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।महंगाई और आर्थिक विकास पर फोकसब्याज दरों को स्थिर बनाए रखने के पीछे का उद्देश्य महंगाई को काबू में रखना और आर्थिक विकास को गति देना है। मौजूदा स्थिति को देखते हुए RBI ने यह संतुलन बनाकर रखने का निर्णय लिया है।ब्याज दर स्थिर रहने का असरऋण लेने वालों के लिए राहत: होम लोन, ऑटो लोन, और अन्य प्रकार के ऋणों की ब्याज दरों में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं होगी।फिक्स्ड डिपॉजिट पर असर: ब्याज दर स्थिर रहने से FD पर मिलने वाले रिटर्न में भी कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा।RBI की इस नीति से बाजार में स्थिरता बनी हुई है और यह आगे भी आर्थिक गतिविधियों को समर्थन देने की दिशा में कारगर साबित हो सकती है।
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