सेंसेक्स के बाद निफ्टी ने भी रचा गिरावट का इतिहास, तोड़ा 35 साल का रिकॉर्ड एबीएन बिजनेस डेस्क। इंडियन स्टॉक मार्केट अब गिरावट का नया रिकॉर्ड बनाने पर तुला है। बीएसई सेंसेक्स 28 साल में अपनी सबसे बड़ी गिरावट देख चुका है। अब 35 साल पहले शुरू हुए एनएसई निफ्टी ने 29 साल की सबसे बड़ी गिरावट का नया रिकॉर्ड बनाया है। हालांकि एक नजर में ये 35 साल के इतिहास में भी उसकी लगातार सबसे बड़ी गिरावट है।मंगलवार को बाजार जब बंद हुआ तो निफ्टी ने भी स्नैपचैट की तरह 10 दिन की एक स्ट्रीक क्रिएट कर ली, लेकिन ये स्ट्रीक लगातार 10 दिन तक इंडेक्स के गिरने से जुड़ी है। मंगलवार को निफ्टी लगातार दसवें दिन गिरकर बंद हुआ। इससे पहले निफ्टी में लगातार इतनी बड़ी गिरावट जनवरी 1996 में देखी गयी थी। तब 28 दिसंबर 1995 से 10 जनवरी 1996 तक लगातार 10 दिन निफ्टी गिरकर बंद हुआ था। हालांकि ये निफ्टी की आफिशियल लॉन्चिंग से पहले हुआ था। निफ्टी की आधिकारिक शुरुआत 22 अप्रैल 1996 को हुई थी। पीक हाई से 16% नीचे आया निफ्टी बीते साल सितंबर में निफ्टी ने अपने पिछले पीक लेवल यानी 26,277 अंक को छुआ था। अगर तब से तुलना करके देखें तो अब तक निफ्टी में 15.4 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। मंगलवार को निफ्टी 22,082.65 अंक पर बंद हुआ है।वहीं बीएसई सेंसेक्स भी अब तक 16.2 प्रतिशत गिर चुका है। इतना ही नहीं कोविड के चलते 2020 में मार्केट में आयी गिरावट के बाद ये अब तक की सबसे बड़ी गिरावट भी है।
खाद्य तेल आयात 4 साल के निचले स्तर पर, कीमतों में और बढ़ोतरी की आशंका एबीएन बिजनेस डेस्क। पिछले साल सितंबर में खाद्य तेलों पर आयात शुल्क बढ़ाने के फैसले का असर अब भी जारी है। फरवरी 2025 में खाद्य तेल का आयात चार साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है, जिससे कीमतों में और बढ़ोतरी की संभावना जतायी जा रही है। मौजूदा साल में खाने के तेल की कीमतें 3 से 11 रुपये तक बढ़ चुकी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, आयात शुल्क में बढ़ोतरी के चलते तेल की आपूर्ति में कमी आयी है। आयात में भारी गिरावट मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोया आयल और सूरजमुखी तेल के आयात में तेज गिरावट आयी, जिससे कुल खाद्य तेल आयात फरवरी में 12% घटकर 8.84 लाख टन पर आ गया, जो फरवरी 2021 के बाद सबसे कम है। पाम आॅयल का आयात जनवरी में 14 साल के निचले स्तर पर था लेकिन फरवरी में यह 36% बढ़कर 3.74 लाख टन हो गया। हालांकि, सोया तेल और सूरजमुखी तेल का आयात भारी गिरावट के साथ 8 महीने और 5 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया। सोया तेल : 36% गिरकर 2.84 लाख टन सूरजमुखी तेल : 22% घटकर 2.26 लाख टन कम आयात के कारण खाद्य तेल का स्टॉक 26% गिरकर 1.6 मिलियन टन रह गया, जो 4 साल में सबसे कम स्तर है।
टाटा संस के एग्जूक्टिव चेयरमैन ने जमशेदपुर में पत्रकारों से की बात कहा- सेमी कंडक्टर और एआई सेक्टर में बड़े स्तर पर निवेश करेगी टाटा एबीएन न्यूज नेटवर्क, जमशेदपुर। टाटा संस के एग्जूक्टिव चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने आज यहां कहा कि जमशेदपुर टाटा समूह के लिए बहुत पवित्र स्थान है। यहीं से उठ कर समूह ने अपनी वैश्विक पहचान बनायी है। जमशेदपुर और यहां के लोग हमारे परिवार का हिस्सा हैं। जमशेदपुर के लिए टाटा समूह का बड़ा प्लान है। यद्यपि उन्होंने इस पर विस्तृत जानकारी नहीं दी। चेयरमैन ने आगे कहा कि टाटा समूह आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) और सेमी कंडक्टर सेक्टर में बड़े स्तर पर निवेश कर रही है। समूह इस दिशा में कदम उठा रहा है। चंद्रशेखरन टाटा स्टील वर्क्स में पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि टाटा स्टील का भविष्य उज्ज्वल है। देश में स्टील की खपत बढ़ती रहेगी। यद्यपि चीन समेत अन्य भू-राजनीतिक चुनौतियों से समूह को दो-चार होना पड़ रहा है। डंपिंग भी यह एक समस्या है। यह सब जारी रहेगी, इसलिए हमें सक्षम बनना होगा। इस पर कारपोरेट एवं सरकार दोनों स्तर से मिल कर काम करना होगा। सरकार से नीति एवं ड्यूटी आदि के मामले में हमें सरकार की मदद चाहिए। टेक्नोलोजी एडपसन में इम्पलाई और यूनियन को मदद करनी होगी। क्षमता, लागत प्रबंधन, सक्षम परिचालन की दिशा में काम करना है। परिचालन में एआई का हमें प्रयोग करना होगा। इलेक्ट्रिक फर्नेस, हाइड्रोजन के उपयोग से हमें उत्पादन पर ध्यान देना होगा। अपने कर्मचारियों और सरकार के साथ मिल कर इन चुनौतियों से अवश्य पार होंगे। हमारे पूर्व चेयरमैन का इंतकाल चार माह पूर्व ही हुआ है। रतन टाटा के बिना यह पहला संस्थापक दिवस है। हम समाज और बिजनेस की तरक्की की कामना करते हैं। टाटा स्टील ट्रांसफॉरमेशन को लेकर संकल्पित है। हम बहुत कुछ कर रहे हैं। जहां तक टैरिफ की बात है तो यह चलते रहेगा। टाटा स्टील इंडिया पर कोई खास असर नहीं होगा क्योंकि हम अमेरिका को सीमित निर्यात करते हैं। किन्तु हमें याद रखना है कि हम अपने घरेलू बाजार में भी प्राइस तय नहीं कर सकते, बाजार तय कर रहा है। इसलिए कॉस्ट इफेक्वि बनना होगा। एक अन्य सवाल पर कहा कि इंडियन इंस्टीट्यूट आॅफ सांइस में मेडिकल कॉलेज ला रहे हैं जहां भारतीय बीमारियों पर रिसर्च होगा। इसके अलावा सेमी कंडक्टर चिप पर विशेष निवेश हो रहा है क्योंकि चिप्स हर उद्योग के लिए अब बेहद मायने रखता है। 6 जी के लिए देशी प्रौद्योगिकी हम विकसित कर रहे हैं।
एआइ टेक्नोलॉजी में रोजगार की संभावनाएं तलाश रही है टाटा स्टील : नटराजन चंद्रशेखरनएबीएन न्यूज नेटवर्क, जमशेदपुर/ रांची। टाटा स्टील के संस्थापक जेएन टाटा की जयंती पर टाटा स्टील कंपनी परिसर में टाटा संस के चेयरमैन समेत कई अधिकारियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर टाटा संस के चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन ने मीडिया से कहा कि टाटा स्टील निरंतर आगे बढ़ रहा है और कई क्षेत्र में हम निवेश कर रहे हैं। टाटा स्टील अक टेक्नोलोजी से जुड़ रहा है, इसके जरिये रोजगार के काफी अवसर मिलेंगे। 2 जनवरी 1919 में भारत के दूसरे वायसराय चेम्सफोर्ड अपनी टीम के साथ कालीमाटी स्टेशन उतरकर टाटा इस्पात कारखाना देखने साकची आये थे। उस समय टाटा स्टील का नाम टाटा कंपनी हुआ करता था। वायसराय चेम्सफोर्ड ने उस समय अपने संबोधन में कहा था कि मैं इस कंपनी से प्रभावित हूं और आज से साकची की पहचान संस्थापक जमशेदजी टाटा के नाम से होगी। 2 जनवरी 1919 को साकची का नाम बदलकर जमशेदपुर रखा गया और कालीमाटी रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर टाटानगर रेलवे स्टेशन रखा गया। वहीं संस्थापक को श्रद्धांजलि देने के बाद टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने मीडिया को बताया कि टाटा स्टील निरंतर आगे बढ़ रहा है, चुनौतियां हैं लेकिन हम अपनी कार्य क्षमता यूनियन कर्मचारी सबके साथ मिलकर उसका सामना कर रहे हैं।उन्होंने आगे बताया कि टाटा कई क्षेत्र में निवेश कर रहा है। आज विश्व बाजार के वर्तमान हालात में पॉलिसी में सरकार की मदद चाहिए। उन्होंने बताया कि अक टेक्नोलॉजी से टाटा स्टील जुड़ रहा है। एआई टेक्नोलोजी से जॉब के अवसर मिलेंगे। इसके अलावा चेयरमैन ने कई संभावित हालात की जानकारी लोगों से साझा की।
डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियां और विदेशी निवेशकों की बिकवाली...शेयर मार्केट में मचा हाहाकार, डूब गये निवेशकों के पैसेएबीएन सेन्ट्रल डेस्क। शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखी गयी। सेंसेक्स 1,395 अंक (1.87 फीसदी) और निफ्टी 428 अंक (1.9 फीसदी) टूट गया। यह गिरावट पिछले साल सितंबर से जारी है, जब से बाजार अपने ऑल-टाइम हाई से नीचे आया है। तब से सेंसेक्स 16 फीसदी (12,256 अंक) और निफ्टी 18 फीसदी (3,991 अंक) टूट चुका है। निवेशकों का करीब 18 फीसदी पैसा डूब चुका है।क्या है गिरावट की वजहशेयर बाजार की गिरावट के पीछे कई वजहें हैं। इसमें एक वजह विदेशी निवेशकों की बिकवाली। FPI पिछले साल अक्टूबर से लगातार बिकवाली कर रहे हैं। उन्होंने अब तक 2.13 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। इसके अलावा, ट्रंप के टैरिफ प्लान से भी बाजार पर असर पड़ रहा है।दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर 10 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है। इससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है। वहीं, एशियाई बाजारों में गिरावट भी इसके पीछे की वजह है. जापान का निक्केई 3 फीसदी, दक्षिण कोरिया का कोस्पी 2.7 फीसदी और हांगकांग का हेंग सेंग 1.5 फीसदी टूट गया है।मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों पर मारबीएसई स्मॉल-कैप इंडेक्स: 3.30 फीसदी गिराबीएसई मिड-कैप इंडेक्स: 2.90 फीसदी गिराम्यूचुअल फंड्स का AUMइक्विटी म्यूचुअल फंड्स का AUM जनवरी 2025 में 1.1 लाख करोड़ रुपये (3.26 फीसदी) घटकर 29.46 लाख करोड़ रुपये रह गया।स्मॉल-कैप फंड्स: 23,665 करोड़ रुपये (7.19 फीसदी) की गिरावटमिड-कैप फंड्स: 26,600 करोड़ रुपये (6.65 फीसदी) की गिरावटनिवेशकों पर क्या असर हुआ2024 में बड़ी संख्या में बाजार में आए रिटेल निवेशकों को भारी नुकसान हुआ है। चाहे वे सीधे शेयर खरीदें या म्यूचुअल फंड के जरिए, दोनों ही मामलों में उनकी पूंजी डूबी है।
अजय दीप वाधवाएबीएन बिजनेस डेस्क। टैक्स आडिट और कॉस्ट अकाउंटेंट्स किसी भी क्षेत्र में गुणवत्ता सुधारना है तो यह अति आवश्यक है कि वहां प्रतिस्पर्धा बढ़ायी जाये। सेवा या वस्तु प्रदान करने वाली संस्थाओं की संख्या बढ़ेगी तो वे उपभोक्ता को खुश करने के लिए अपनी सेवाओं में सुधार करेगी। हम यह भी जानते हैं कि भारत में सरकार की आय का एक बहुत बड़ा स्रोत आय कर या इनकम टैक्स है। सरकार को आय कर से जितनी ज्यादा आय प्राप्त होगी उतना भारत सरकार आम आदमी को देने वाली स्वास्थ्य, परिवहन, सुरक्षा और जन कल्याण सेवाओं या सुविधाओं में अधिक खर्च कर पायेगी। साथ ही आय बढ़ने से सरकार आम आदमी से मिलने वाली करों की दरों में कमी भी कर पायेगी जिस से आम आदमी को राहत मिलगी।इसी उद्देश्य से भारत के आय कर प्रावधानों में टैक्स आडिट या कर अंकेक्षण की व्यवस्था है। अगर किसी कर दाता की वार्षिक आय 1 करोड़ या 10 करोड़ (जैसी स्थिति हो) से ज्यादा है तो उसे अपना टैक्स आडिट करवाना है। यह अनिवार्य है। वर्तमान में टैक्स आडिट सिर्फ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स कर सकते हैं। हाल के वर्षों में यह पाया गया है कि सरकार के प्रयासों से निरन्तर आय कर दाताओं में वृद्धि हो रही है पर उस हिसाब से आडिटर की संख्या में वृद्धि नहीं हो रही है जिसके कारण अनेक केसों में टैक्स आडिट मात्र एक वार्षिक रिचुअल बन कर रह गई है। इसकी गुणवत्ता में सुधार न होने के कारण सरकार की आय में भी विशेष वृद्धि नहीं हो रही है। इसी कारण अब बेहद यह आवश्यक हो गया है कि टैक्स आडिटर्स की संख्या में न सिर्फ वृद्धि की जाए बल्कि अन्य प्रोफेशन, जैसे कॉस्ट एवं मैनेजमेंट अकाउंटेंट, को भी इसमें आने का अवसर दिया जाये जिस से कर और गुणवत्ता दोनों में वृद्धि हो सके। भारत में दी इंस्टीट्यूट आफ कॉस्ट अकाउंटेंट आफ इंडिया की स्थापना संसद के एक विशेष अधिनियम से हुई थी और इसके सदस्य कॉस्ट एवं मैनेजमेंट अकाउंटेंट कहलाते हैं। वे भी अपने कोर्स वही सारे आय कर के नियम पढ़ते हैं जो चार्टर्ड अकाउंटेंट्स पढ़ते हैं। पर भारत सरकार ने आय कर अधिनियम में इन्हें सिर्फ इन्वेंटरी वैल्युएशन के कार्य तक सीमित रखा है। अब जबकि भारत सरकार आय कर नियमों में अमूल चूल परिवर्तन लाना चाहती है और इसी कारण संसद के वर्तमान बजट सत्र में नये कानून की रूपरेखा सरकार ने पेश की है जिसे संसद की विशेष समिति को विचार हेतु भेजा गया है, में सरकार टैक्स आडिट में सुधार ला सकती है। समिति और सरकार को इस नए प्रस्तावित कानून में कॉस्ट अकाउंटेंट्स को टैक्स आडिट करने वाले अकाउंटेंट्स की श्रेणी में शामिल करना चाहिए; इस से न सिर्फ आडिट की गुणवत्ता में सुधार आएगा बल्कि सरकार की आय भी बढ़ेगी। आज जब सरकार हर क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मक गुणवत्ता लाना चाहती है तो उसे टैक्स आडिट में ऐसा आम जन हित में लाना ही चाहिए। (लेखक कॉस्ट अकाउंटेंट आडिट विशेषज्ञ हैं।)
लंदन से भी महंगा हुआ दिल्ली टू महाकुंभ का सफर एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ का सफर अब दिल्ली से लंदन जाने से भी ज्यादा महंगा हो गया है। जहां दिल्ली से लंदन की उड़ानें प्रयागराज से 30 फीसदी तक सस्ती हैं। वहीं, प्रयागराज तक जाने के लोगों को काफी महंगे टिकट खरीदने पड़ रहे हैं। पहले एयरलाइंस, घरेलू मार्गों पर यात्रियों को किफायती दरों में फ्लाइट टिकट उपलब्ध कराती थीं। लेकिन अब महाकुंभ के चलते टिकट की कीमतों में काफी उछाल देखने को मिला है।इससे कम बजट वाले व मध्यम वर्ग के श्रद्धालुओं को काफी परेशानी हो रही है। दिल्ली से प्रयागराज मार्ग पर सामान्य दिनों में फ्लाइट की कीमत चार से पांच हजार रुपये हुआ करती थी। वहीं, मौजूदा समय में यह बढ़कर 13 से 80 हजार तक पहुंच गई है। सामान्य दिनों की तुलना से टिकट की कीमतों में तीन गुना वृद्धि देखने को मिली है। महाकुंभ के महंगे सफर की मार सबसे ज्यादा भुवनेश्वर से प्रयागराज की उड़ान में देखने को मिल रही है। भुवनेश्वर से प्रयागराज की उड़ान की कीमत भुवनेश्वर से बैंकॉक तक की उड़ान की कीमत से चार गुना अधिक है। भुवनेश्वर से प्रयागराज की उड़ान की कीमत 39,508 है, जबकि भुवनेश्वर से बैंकॉक की उड़ान की कीमत 13,538 से शुरू है। वहीं, सामान्य दिनों में इस मार्ग के उड़ानों की कीमत तीन से चार हजार तक से शुरू हो जाती है। महांकुभ के कारण इसमें 15 से 20 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है। महाकुंभ के चलते आरक्षित ट्रेनों में भी काफी भीड़ है। लोग महाकुंभ में पहुंचने के लिए ज्यादा कीमत देकर तत्काल टिकट कराकर पहुंच रहे हैं। ट्रेनों में पहले से रिजर्वेशन टिकट करने वाले यात्रियों को भी मुश्किल से सीट मिल पा रही है। इसके साथ ही ट्रेनों में काफी दिनों तक वेटिंग टिकट ही मिल रहा है।
सोने की कीमतों ने बनाया नया रिकॉर्ड, भारत में गोल्ड का भंडार दुनिया में सबसे ज्यादा एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में सोने की कीमतें लगातार नयी ऊंचाइयों को छू रही हैं। स्पॉट मार्केट में सोना 86,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच चुका है, जबकि मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में यह 85,000 रुपये से ऊपर ट्रेड कर रहा है। बढ़ती कीमतों के बीच, भारत में सोने का भंडार और इसके आर्थिक प्रभावों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि घरेलू स्तर पर रखा गया सोना देश की अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन जाये, तो भारत एक बार फिर से सोने की चिड़िया बन सकता है। भारत में कितना सोना मौजूद है भारत में सोना सिर्फ निवेश का साधन ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और परंपरागत रूप से भी बेहद अहम रहा है। भारतीय परिवारों के पास मौजूद 24,000-25,000 टन सोना दुनिया के कई देशों के कुल स्वर्ण भंडार से ज्यादा है। भारतीय महिलाओं के पास लगभग 24,000-25,000 टन सोना है, जो दुनिया के कुल स्वर्ण भंडार का 11% है। मंदिरों में रखा सोना भी 5,000 टन से अधिक बताया जाता है, जो जल्द ही 10,000 टन तक पहुंच सकता है। दक्षिण भारत में सबसे ज्यादा सोना, जहां अकेले तमिलनाडु के पास 28% हिस्सेदारी है। दुनिया के कई देशों से ज्यादा है भारत का गोल्ड रिजर्व अगर हम भारत के पारिवारिक स्वर्ण भंडार की तुलना दुनिया के कुछ शीर्ष देशों से करें, तो यह कहीं अधिक निकलता है। देश कुल गोल्ड रिजर्व (टन में) अमेरिका 8,100 टन जर्मनी 3,300 टन इटली 2,450 टन फ्रांस 2,400 टन रूस 1,900 टन भारत (घरों और मंदिरों में रखा सोना) 30,000 टन से अधिक कैसे बन सकता है यह सोना भारतीय अर्थव्यवस्था का हिस्सा वर्तमान में, यह सोना भारतीय अर्थव्यवस्था का हिस्सा नहीं बन पाया है। यदि इसे गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम या अन्य सरकारी उपायों के तहत बैंकों में जमा किया जाये, तो यह देश की वित्तीय ताकत को जबरदस्त रूप से बढ़ा सकता है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा गोल्ड इंपोर्टर है, लेकिन अगर घरों में रखा सोना सिस्टम में लाया जाये, तो यह एक्सपोर्टर बनने की दिशा में बढ़ सकता है। गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम के तहत अगर लोग अपने घरों में रखा सोना बैंकों में जमा करें, तो इससे देश की विदेशी मुद्रा पर निर्भरता घट सकती है। अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिल सकती है, जिससे भारत की जीडीपी और विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ावा मिलेगा। दिल्ली में सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर दिल्ली में शुक्रवार को सोना 86,070 रुपये प्रति 10 ग्राम के अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। वहीं, 99.5% शुद्धता वाला सोना 85,670 रुपये प्रति 10 ग्राम पर स्थिर रहा। चांदी की कीमतें भी 96,500 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर बनी हुई हैं।
वित्त मंत्री के बजट की योजनाओं से झारखंड के छात्रों से लेकर महिलाओं को होगा फायदा टीम एबीएन, रांची। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में 2025 का बजट पेश किया। इसमें कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गयी हैं, लेकिन झारखंड के लिए केंद्र सरकार ने किसी खास योजना की घोषणा नहीं की है। हालांकि, बजट में कई ऐसी योजनाएं हैं जिनसे राज्य के लोगों को फायदा होगा। दरअसल, निर्मला सीतारमण ने अपने बजट में महिला, एससी-एसटी उद्यमियों के लिए भी बड़ी घोषणाएं की हैं। इन सभी योजनाओं का लाभ झारखंड के लोगों को भी मिलेगा। पहली योजना है- सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र और पोषण 2.0 योजना- सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र और पोषण 2.0 योजना का लाभ झारखंड को मिलेगा। झारखंड में 38 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे हैं। झारखंड के आदिवासी बहुल इलाकों में कुपोषण की समस्या भी गंभीर है। राज्य में 3.90 लाख बच्चे ऐसे हैं, जो कुपोषण के शिकार हैं। उनका वजन कम है। केंद्र सरकार की इस योजना का लाभ इन बच्चों को मिलेगा और झारखंड को कुपोषण से मुक्ति दिलाने में मददगार साबित होगा। बजट से पहले पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर प्रखंड से शिशु शक्ति खाद्य पैकेट के वितरण की शुरूआत की गयी थी। महिला, एससी-एसटी उद्यमियों के लिए फंड केंद्र सरकार 5 लाख महिलाओं, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों के लिए 10 हजार करोड़ का अतिरिक्त फंड देगी। उद्यमियों को सशक्त बनाने के लिए वित्त मंत्री ने इसकी घोषणा की है। झारखंड में बड़ी संख्या में आदिवासी और अनुसूचित जाति के लोग रहते हैं। झारखंड में महिला उद्यमियों की भी अच्छी-खासी संख्या है। इन्हें इस योजना का लाभ मिलेगा। केंद्र सरकार अगले 5 साल में 5 लाख लोगों को 2 करोड़ रुपये तक का टर्म लोन उपलब्ध करवायेगी। इसका उद्देश्य उद्यमशीलता और उद्यमियों का मैनेजमेंट स्किल बढ़ाना है।किसान क्रेडिट कार्डनिर्मला सीतारमण ने अपने बजट में किसान क्रेडिट कार्ड पर कृषि लोन की सीमा 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख करने की घोषणा की है। झारखंड के 21.50 लाख से अधिक किसानों को इसका लाभ मिल सकता है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना से इतने ही किसान जुड़े हुए हैं। 35773 सरकारी स्कूल ब्रॉडबैंड से जुड़ेंगेकेंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट 2025 में देश के सभी सरकारी स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों को ब्रॉडबैंड से जोड़ने की घोषणा की है। इस योजना का लाभ झारखंड के कम से कम 35,773 सरकारी स्कूलों को मिलेगा। ये स्कूल ब्रॉडबैंड से जुड़ जाएंगे। भारत नेट परियोजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सभी सरकारी माध्यमिक स्कूलों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी दी जायेगी।
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