टीम एबीएन, रांची। राज्य के बेरोजगार युवक-युवतियों को निजी क्षेत्र में नौकरी के लिए 30 मई को रोजगार मेला लगाया जायेगा। राजधानी के आइटीआइ मैदान में दत्तोपंत ठेंगड़ी रोजगार मेला में 30 निजी कंपनियां हिस्सा लेंगी। निजी कंपनियों ने अलग-अलग पद के लिए रिक्तियां निकाली हैं। मेले में रिंची अस्पताल, श्री जगरनाथ हॉस्पीटल, फ्यूजन माइक्रो फाइनांस, मेदांता हॉस्पीटल, प्रेमसंस मोटर, रिब्लिक प्राइवेट लिमिटेड, रांची पेसेंट केयर सेंटर सहित कई कंपनियों ने अलग-अलग पद पर बहाली की इच्छा जतायी है। विभाग की ओर से कहा गया है कि जिन आवेदकों ने पहले से निबंधन नहीं कराया है, वो अब भी निबंधन करा सकते हैं। आवेदक अपने बायोडाटा की दो कॉपी, दो पास्पोर्ट साइज फोटो और मूल प्रमाण पत्रों की कॉपी के साथ साक्षात्कार में शामिल हो सकते हैं।
एबीएन कैरियर डेस्क। यूपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के पहले सत्र में जीएस-1 का पेपर हुआ। इस एग्जाम ने परीक्षा देने वालों को चौंका दिया। पिछले वर्षों के मुकाबले इस बार यूपीएससी का पैट्रन बिल्कुल अलग था। इस बार दावा और तर्क के 20 प्रश्न पूछे गये हैं। यह सवाल यूपीएससी बहुत साल पहले पूछती थी, लेकिन काफी सालों बाद इस बार इसे लाया गया है। इस बार अवार्ड और स्पोर्ट्स के प्रश्न भी पूछे गये हैं।
जूलॉजी डिपार्टमेंट तथा आइक्यूएसी आरयू का जलवायु परिवर्तन पर दो दिवसीय संगोष्ठी का शुभारंभ टीम एबीएन, रांची। 25 मई 2023 को आरयू के आर्यभट्ट सभागार में जूलॉजी विभाग, रांची विश्वविद्यालय में दो दिवसीय संगोष्ठी प्रारंभ हुआ। इस संगोष्ठि का विषय जलवायु परिवर्तन चुनौतियां एवं अवसर है। कार्यक्रम के शुभारंभ में पीएफए विभाग के कलाकारों द्वारा राष्ट्रगीत एवं कुलगीत प्रस्तुत किया उसके बाद केंद्रीय आदिवासी कल्याण मंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री झारखंड अर्जुन मुंडा, जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय, कुलपति आरयू प्रो डॉ अजीत कुमार सिन्हा संग देश के विभिन्न राज्यों से आये एक्सपर्ट्स, प्राध्यापकों एवं वक्ताओं ने दीप प्रज्जवलन किया। कुलपति ने सबों को पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। रांची विवि के छात्र नितिश मेहुल ने केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा , विधायक सरयू राय, कुलपति आरयू को कल्पतरु का पौधा देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर रिसर्च पेपर के संकलनों की एक पुस्तिका साथ ही जूलौजी विभाग के एक न्यूज लेटर का भी विमोचन किया गया। केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि दुनिया की 17प्रतिशत आबादी भारत में हैं। जलवायु परिवर्तन पर हमारी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। सारा विश्व प्रयत्नशील है कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती का हम मुकाबला करें। आम व्यक्ति जलवायु परिवर्तन को गंभीरता से नहीं समझता है। आज आमलोगों को इसे समझाने की आवश्यकता है। हमें विकास औश्र जलवायु परिवर्तन के बीच एक सांमजस्य बिठाना होगा।अर्जुन मुंडा ने संगोष्ठी की तारीफ की और कहा कि ऐसे संगोष्ठियों से किसी भी विषय पर नयी जानकारियां मिलती हैं। रांची विश्वविद्यालय का उन्होंने आभार जताया। सरयू राय ने अपने संबोधन में कहा कि जलवायु प्रदर्शन अब कोई नया शब्द नहीं हैं। पहले औद्योगिक क्रांति से चिमनियों से धुआं निकलता था तो उसे विकास का सूचक मानते थे, परंतु उस वक्त भी चेताने वाले थे पर उनकी बातों को अनसुना कर दिया गया।आज इस धुयें को देख कर चिंता होती है। जब एक डिग्री ही तापमान आज से सौ साल बढा तो इसका प्रभाव देखने को मिला था। आज स्थिति बेकाबू हो रहा है। अगर तापमान ऐसे ही बढा तो पृथ्वी के लिये अस्तित्व संकट हो जायेगा। हमारी पृथ्वी अब बीमार है और जब तक सामान्य व्यक्ति के संस्कार में पृथ्वी को को बचाने, जलवायु परिवर्तन को रोकने का आचरण नहीं आयेगा तब तक हम इस संकट से नहीं निबट सकते।यह सिर्फ वैज्ञानिकों का काम नहीं है। पर्यावरण संरक्षण की दिलायी गयी शपथ आर्यभट्ट सभागार में सैकड़ो की संख्या में आये छात्रों, शिक्षकों, वक्ताओं तथा प्रेस के लोगों को जूलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया की निदेश धृति बनर्जी ने पृथ्वी के संरक्षण की शपथ दिलायी। सबों ने शपथ ली कि वह हरियाली की रक्षा करने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण एवं वृक्षारोपण का कार्य करेंगे। उसके बाद धृति बनर्जी ने स्लाइड शो के माध्यम से जलवायु परिवर्तन एवं इससे होने वाले नुकसान को विस्तार से बताया। इस संगोष्ठी में इक्फाई युनिवर्सिटी के कुलपति प्रो आरके झा, मुख्य वक्ताओं में कुलपति आरयू प्रो डॉ अजीत कुमार सिन्हा, प्रदीप कुमार सेवानिवृत आइएफस झारखंड, जूलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया की निदेशक धृति बनर्जी, उमाशंकर सिंह सेवानिवृत आइएफएस उत्तरप्रदेश, प्रो एमके जमुआर, बीएचयू के एसके त्रिगुण ने जलवायु परिवर्तन और इससे होने वाले संकट के बारे में विस्तार से बताया। मुख्य अतिथि प्रो आरके झा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन एक वैश्विक संकट है और हमें मिल कर इस संकट से निबटना होगा।अगर हम पृथ्वी की रक्षा नहीं करेंगे तो पृथ्वी भी हमारी रक्षा नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार सूर्य खुद जलते हुये पृथ्वी पर सभी को जीवन देता है वैसे ही आज हमें जलवायु परिवर्तन के संकट से निबटने के लिये स्वयं प्रयास करना होगा। हम कालीदास की तरह व्यवहार न करें। सेवानिवृत आइएफएस एवं प्रोजेक्ट टाइगर के निदेशक रहे प्रदीप कुमार ने जलवायु परिवर्तन आ रहे खतरनाक बदलावों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि हमें अभी भी मौका है कि जल थल, नभ को बर्बाद करने से बचायें। हमारा व्यवहार अपनी पृथ्वी के प्रति कालीदास की तरह न हो कि, जिस डाल पर बैठे हैं उसे ही काट दें। जंगलों को आबाद करें, हरियाली को सिमटने न दें। उन्होंने पृथ्वी के संरक्षण के बारे में दिनकर की कई कविताओं का उल्लेख कर रोचक तरीके से आंकड़ों को बताया। उन्होंने कहा कि किसी का इंतजार न करें आज से ही एकल प्रयास शुरू कर दें। चाह लेने पर क्या नहीं हो सकता? बढते तापमान से मानसिक रोगों में वृद्धी हो रही है। बीएचयू से आये प्रो एसके त्रिगुण ने बताया कि जलवायु परिवर्तन पृथ्वी का तापमान बढ रहा है और इसका असर हमारे मस्तिष्क पर भी पड़ रहा है। यही कारण है कि मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ी है। उन्होंने बताया कि पारंपरिक जीवन का तरीका ही सबसे सही था। आधुनिक अस्त व्यस्त जीवन शैली ने जलवायु परिवर्तन को बढाया है। पहले रांची में पंखे की आवश्यकता नहीं होती थी। कुलपति आरयू प्रो डॉ अजीत कुमार सिन्हा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का ही नतीजा है कि रांची जैसे शहर में भी लू चल रही है। उन्होंने अपने विद्यार्थी जीवन को याद करते हुये बताया कि रांची में पंखे की कभी आवश्यकता ही नहीं होती थी। हर रोज बारिश होती थी। आज वनों के विनाश और उससे उपजे जलवायु परिवर्तन ने तापमान को खतरनाक स्तर तक बढ़ा दिया है। अभी भी अवसर है कि हम चेतें और पर्यावरण के विनाश को रोकें। जलवायु परिवर्तन की अलग से पढ़ाई होनी चाहिये। संगोष्ठी को संबोधित करते हुये प्रो एमके जमुआर ने कहा कि यह एक सार्थक संगोष्ठि का आयोजन है। इसमें देश भर के आये वक्ताओं ने हम सबों को जागरूक करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि आज जलवायु परिवर्तन इतना बड़ा संकट है कि इसे अब एक अलग संकाय के रूप में रख कर इसकी पढाई होनी चाहिये। सभी वक्ताओं ने जूलॉजी डिपार्टमेंट, आरयू तथा आइक्यूएसी के जलवायु परिवर्तन पर इस संगोष्ठँ के आयोजन की सराहना की। कार्यक्रम का संचालन डिप्टी डायरेक्टर वोकेशनल डॉ स्मृति सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन प्रो बीके सिन्हा एवं सोनी कुमारी तिवारी ने किया। प्रो बीके सिन्हा ने सभी वक्ताओं को समय निकाल कर अन्य राज्यों से आने के लिये आभार जताया। इस अवसर पर कुलसचिव आरयू डॉ मुकुंद चंद्र मेहता, एफओ डॉ कुमार आदित्यनाथ शाहदेव, डॉ फिरोज अहमद, एफए डॉ देवाशीष गोस्वामी, सीसीडीसी डॉ पीके झा, परीक्षा नियंत्रक डॉ आशीष कुमार झा, एफओ डॉ कुमार आदित्यनाथ शाहदेव, डीएसडब्ल्यू डॉ सुदेश साहु, डॉ राजकुमार शर्मा, डॉ जीएस झा समेत साईंस डीन डॉ कुनुल कुंदिर समेत कई विभागों के हेड, डीन एवं प्राध्यापक एवं सैकड़ों छात्र उपस्थित थे।
टीम एबीएन, रांची। गोस्सनर कॉलेज रांची के भूविज्ञान विभाग विद्यार्थियों के लिए बीआईटी मेसरा के द्वारा ड्रोन टेक्नोलॉजी का प्रयोग जियो इनफॉर्मेटिक्स में विषय पर कार्यशाला का आयोजन कराया गया। इस कार्यशाला का उद्घाटन कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर इलानी पूर्ति ने किया। आज के युग में विभिन्न क्षेत्रों में ड्रोन टेक्नोलॉजी की उपयोगिता बढ़ती जा रही है। इसके मद्देनजर भी यह कार्यशाला काफी उपयोगी रहा। इस कार्यशाला में बीआईटी मेसरा के कोर्स कोऑर्डिनेटर असिस्टेंट प्रोफेसर अभय कुमार के साथ अभिनव कुमार एवं ओमकार पांडे ने संयुक्त रूप से ड्रोन के प्रयोग और उसके फायदे को विस्तारपूर्वक बताया । इस अवसर पर विशेषज्ञों ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों का टोपोग्राफिकल मैपिंग किया जा सकता है। उन्होंने ड्रोन के प्रयोग को बताते हुए कहा कि किसी भी दिए हुए एरिया जैसे जियोलॉजिकल, टोपोग्राफिकल, माइनिंग एरिया का मैपिंग आसानी पूर्वक किया जा सकता है । ड्रोन अर्बन प्लैनिंग, ट्रैफिक मैनेजमेंट के साथ मेडिकल क्षेत्र में इमरजेंसी सेवाएं देने में अपनी बड़ी भूमिका अदा कर सकता है। इस अवसर पर भूविज्ञान विभाग के बच्चों को ड्रोन टेक्नोलॉजी की उपयोगिता एवं प्रयोग के साथ साथ नक्शा तैयार करने की भी जानकारी दी गयी। मौके पर बताया गया कि इसकी जानकारी रखने वाले विद्यार्थी इस क्षेत्र में अपने करियर को उड़ान दे सकते हैं । ऐसे विद्यार्थियों के लिए जियोलॉजिकल एक्सप्लोरेशन सेक्टर, सर्वे डिपार्टमेंट साथ-साथ फॉरेस्ट सेक्टर, अर्बन प्लैनिंग, टाउन प्लानर के क्षेत्र में भी करियर बनाने का अवसर मिल सकता है। कार्यशाला में कॉलेज के सहायक कोषाध्यक्ष प्रोफेसर प्रवीण सुरीन, शिक्षक प्रतिनिधि प्रोफेसर अमरदीप टोपनो, विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अमरेश चंद्र मिश्र प्रोफेसर सीआर नवल लुगुन, डॉ श्याम लाल सिंह, धनंजय कुमार सहित विभाग के बच्चे उपस्थित थे।
एबीएन कैरियर डेस्क। एक बार फिर धनबाद आईआईटी आइएसएम का डंका बज गया है। दरअसल यहां के छात्रों ने एक ऐसा आविष्कार कर दिया है, जो आने वाले समय में दिव्यांग और लकवाग्रस्त मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगा। यहां के छात्रों ने एक डिवाइस बनायी है जो आपके मन की बात जान लेगा। एक डिवाइस जो बेड पर लेटे मरीज की जरूरत को भांप लेगा। एक डिवाइस जो बिना कुछ कहे आपका काम कर देगा। ये किसी साइंस फिक्शन फिल्म की स्क्रिप्ट नहीं बल्कि हकीकत है और इसको सच करने का कमाल कर दिखाया है आईआईटी, आइएसएम धनबाद के छात्रों ने।मन की बात जानने वाला अनोखा बेडधनबाद आईआईटी के छात्रों का लोहा पूरा विश्व मानता है और एक बार फिर यहां छात्रों के आविष्कार ने लोगों को हैरान कर दिया है। दरअसल आईआईटी आइएसएम के असिस्टेंट प्रोफेसर जफर आलम और उसकी टीम ने गंभीर अवस्था में बेड पर पड़े वैसे मरीजों जिसका दिमाग तो काम कर रहा है, लेकिन शरीर काम नहीं कर रहा है। उनकी देखभाल के लिए एक ऐसा डिवाइस बनाया है जो मरीज के दिमाग में क्या चल रहा है ये जान सकेगा। यहां सबसे खास बात ये है कि ये डिवाइस एक बेड है, जिसे न्यूरो हेडसेट लगाकर मरीज खुद कंट्रोल कर सकेंगे और ये मशीन उसके हिसाब से ही काम कर सकेगी।लकवाग्रस्त मरीजों के लिए साबित होगा वरदानअसिस्टेंट प्रोफेसर जफर आलम को ये बेड बनाने का आइडिया एक फिल्म को देखकर आया। जिसमें एक किरदार चल फिर नहीं सकता है। ऐसे में उन्होंने सोचा कि क्यों ना ऐसा उपकरण बनाए जो लाचार मरीजों और दिव्यांगों की जरूरतों को भांप सके और ऐसे आविष्कार हुआ इस अनोखे बेड का।दरअसल, हमारा पूरा शरीर ब्रेन सिग्नल्स के जरिए काम करता है। हम कुछ भी सोचते हैं तो हमारा दिमाग एक सिग्नल देता है। जब न्यूरो हेडसेट डिवाइस को मरीज के दिमाग पर लगायेंगे तो वो सिग्नस्ल कैच करेगा। फिर न्यूरो हेडसेट उन सिग्नल्स को कंप्यूटर में डालकर ट्रैक करेगा। सिग्नल्स कैच करने के बाद बेड उसी के हिसाब से काम करेगा।बेशक ये बेड आने वाले समय में लकवाग्रस्त मरीजों के वरदान साबित होगा। इसके साथ ही इस मशीन के जरिए अस्पताल और कर्मचारियों का खर्च भी बचेगा। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए 9 महीने का समय लगा हैं और उम्मीद है कि जल्द मरीजों को इसका लाभ मिल पायेगा। जफर आलम की टीम ने इसके पेटेंट के लिए आवेदन दिया गया है वो भरोसा है कि उन्हें इसका पेटेंट मिल जायेगा।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड एकडेमिक काउंसिल की ओर से मैट्रिक और इंटर का रिजल्ट किसी भी वक्त जारी कर दिया जा सकता है। मैट्रिक और इंटर साइंस का रिजल्ट एक साथ और इंटर कॉमर्स और आर्ट्स का रिजल्ट एक साथ जारी किया जा सकता है। रिजल्ट देखने की आधिकारिक वेबसाईट और जरूरी गाइडलाइन जारी किए जा चुके है। रिजल्ट की घोषणा के बाद छात्र आधिकारिक वेबसाइट jacresults.comपर अपना परिणाम चेक कर सकेंगे।सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जैक बोर्ड के अध्यक्ष अनिल कुमार महतो झारखंड बोर्ड के मैट्रिक का रिजल्ट जारी करेंगे। 23 मई को रिजल्ट जारी किया जा सकता है।झारखंड बोर्ड के रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र एसएमएस के जरिए भी रिजल्ट देख सकेंगे। इसके लिए नीचे दिए गए इन स्टेप्स को फॉलो करना होगा :छात्रों को टाइप करना होगा JHA10<स्पेस>रोल नंबर और इसे 5676750 पर भेज देंसाथ ही आप रिजल्ट<स्पेस>JAC10<स्पेस>रोलकोड + रोल नंबर<स्पेस>रजिस्ट्रेशन नंबर 56263 पर भेज सकते हैं।अब इसी नंबर पर जेएसी 10वीं का रिजल्ट 2023 भेजा जाएगा।सीबीएसई और आईसीएसई के रिजल्ट जारी हो जाने के बाद झारखंड में बच्चों को अब इंतजार है जैक बोर्ड के परिणाम प्रकाशित होने का। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बोर्ड की ओर से मैट्रिक और इंटर साइंस का रिजल्ट 23 मई को जारी किया जा सकता है। हालांकि, इसे लेकर अभी तक आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है।
25 मई से 24 जून तक करें ऑनलाइन आवेदनटीम एबीएन, रांची। इंजीनियरिंग की पढ़ाई करके रोजगार की तलाश कर रहे झारखंड के युवाओं के लिए खुशखबरी है। हेमंत सोरेन की सरकार जल्द ही डेढ़ हजार से अधिक जूनियर इंजीनियर की बहाली करने जा रही है। अगर आप भी नौकरी की तलाश में हैं, तो यह आपके लिए सुनहरा अवसर हो सकता है। इस सरकारी नौकरी के लिए आपको ऑनलाइन आवेदन करना होगा। 25 मई से 24 जून तक डिप्लोमाधारी इंजीनियर आवेदन कर सकेंगे।1556 पदों पर बैकलॉग व नियमित नियुक्ति होगीजेएसएससी की ओर से डिप्लोमा स्तर (जूनियर इंजीनियर) के 1556 पदों पर बैकलॉग व नियमित नियुक्ति के लिए प्रक्रिया शुरू की गयी है। बैकलॉग के 11 तथा नियमित नियुक्ति के 1545 पदों पर नियुक्ति की जायेगी। इसमें मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर (एमवीआइ) के 44 पद, स्ट्रीट लाइट इंस्पेक्टर के 55 व पाइपलाइन इंस्पेक्टर के 16 पद भी शामिल हैं। इच्छुक व योग्य उम्मीदवारों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किया गया है।26 जून की आधी रात तक परीक्षा शुल्क का करें भुगतानआयोग ने झारखंड डिप्लोमा स्तर संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2023 के लिए 25 मई से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किया है। अभ्यर्थी 24 जून तक ऑनलाइन आवेदन दे सकेंगे। 26 जून की मध्य रात्रि तक परीक्षा शुल्क का भुगतान तथा फोटो व हस्ताक्षर अपलोड कर आवेदन का प्रिंट आउट लेने के लिए 28 जून की मध्य रात्रि तक लिंक उपलब्ध रहेगा। 29 जून से लेकर एक जुलाई की मध्य रात्रि तक ऑनलाइन आवेदन पत्र में अभ्यर्थी का नाम, जन्म तिथि, इमेल आइडी व मोबाइल नंबर को छोड़ कर किसी भी अशुद्ध प्रविष्टि को संशोधित करने के लिए पुन: लिंक उपलब्ध कराया जायेगा।
टीम एबीएन, रांची। एसआर डीएवी पब्लिक स्कूल पुंदाग में हर्ष का माहौल रहा। कारण कि विद्यालय के वाणिज्य विभाग के कुछ विद्यार्थियों ने कंपनी सेक्रेटरी एक्सिक्यूटिव एंट्रेंस टेस्ट जैसी सम्मानित परीक्षा में सफलता प्राप्त कर विद्यालय का नाम रोशन किया। उक्त परीक्षा के पूर्णांक 200 में से विवेक सिंह ने 152, तान्या जयसवाल ने 150, हेमंत ने 119 तथा वैभव पांडेय ने 110 अंकों के साथ सफलता के परचम लहराया। ध्यातव्य रहे कि अब ये विद्यार्थी एक्जीक्यूटिव स्तर की परीक्षा की तैयारी करेंगे। प्राचार्य संजीत कुमार मिश्र ने इन सभी विद्यार्थियों को बधाई तथा शुभकामना संदेश देते हुए कहा कि यह न केवल उनके माता - पिता अपितु विद्यालय परिवार के लिए भी गर्व का विषय है। यह इन विद्यार्थियों के अथक परिश्रम का सुखद परिणाम है। उन्होंने उम्मीद जतायी कि भविष्य में भी वे परिश्रम करते हुए एक्जीक्यूटिव स्तर की परीक्षा उत्तीर्ण करेंगे तथा सफलतापूर्वक कंपनी सेक्रेटरी एक्जीक्यूटिव कोर्स पूरा कर लेंगे। ऐसे विद्यार्थी अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेंगे। प्राचार्य ने विद्यार्थियों के अभिभावकों तथा शिक्षकों को भी बधाई दी।
टीम एबीएन, रांची। बीआईटी मेसरा लालपुर सेंटर के तत्वावधान में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला (जो वर्तमान परिदृश्य में शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया की गुणवत्ता को समृद्ध करना विषय पर आधारित था) के मुख्य वक्ता वेल्यू एजुकेशन के अध्यक्ष और इस कार्यशाला के निदेशक डॉ संजय कुमार ने शुरुआत में ही अपनी ओजस्वी बातों से शिक्षक और छात्रों ने महमरिक के बाद के परिदृश्य में शिक्षण अधिगम प्रक्रिया की गुणवत्ता और अधिगम पर प्रकाश डाला।डॉ श्रीमती वंदना भट्टाचार्य निदेशक लालपुर सेंटर ने इस कार्यशाला शिक्षक और छात्रों के बीच की महामारी काल में आयी दूरी के लिए इस प्रकार की कार्यशाला का आयोजन दोनों के बीच के संबंधों को बेहतर बनाने में सेतु का कार्य करेगा। इस आयोजन को चार श्रेणी में रखा गया था उनके विजेताओं को डॉ संजय कुमार और निदेशक डॉ वंदना भट्टाचार्य ने पुरस्कृत किया। आज के इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ प्रणव कुमार, डॉ अमृता प्रियम, डॉ श्रावणी मुखोपाध्याय, डॉ संजय कुमार, डॉ अभय रंजन श्रीवास्तव, डॉ सोमनाथ मुखर्जी, डॉ सिबा मोइत्रा, डॉ सोमित्रो, डॉ उमेश प्रसाद, डॉ संदीप, मनोज कुमार, स्वाति मिंज, अभिषेक तिग्गा, डॉ महुवा, डॉ पार्थो सहित काफी संख्या में छात्र और शिक्षकों ने भाग लिया। धन्यवाद ज्ञापन इस कार्यशाला के संयोजक डॉ प्रदीप मुंडा ने किया। यह जानकारी डॉ मृणाल पाठक और राणा प्रताप मिश्र ने दी।
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