जानें कौन हैं भारत के टॉप 10 संस्थानएबीएन कैरियर डेस्क। क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2024 जारी कर दी गयी है। गौरतलब है कि इसमें दुनिया भर के विश्वविद्यालयों को रैंकिंग दी जाती है। दुनियाभर के इंस्टिट्यूट्स को अलग-अलग पैमानों पर आंकने के बाद उसे स्कोर दिया जाता है। इसी स्कोर के आधार पर रैंकिंग तैयार की जाती है। हालिया रैंकिंग मंगलवार को जारी की गयी है, इस रैंकिंग में दुनिया के टॉप 150 विश्वविद्यालयों में एक भारतीय संस्थान ने भी जगह बनायी है। यह संस्थान है आईआईटी बांबे। आईआईटी बॉम्बे को इस रैंकिंग में 149वां स्थान मिला है। इसके बाद दूसरा भारतीय संस्थान है आईआईटी दिल्ली, जिसे 197वीं रैंक दी गयी है।यह बीते 8 सालों में पहली बार है, जब किसी भारतीय संस्थान ने टॉप 150 में जगह बनायी है। इससे पहले वर्ष 2016 में आईआईएससी बैंगलोर को 147वीं रैंक मिली थी। हांलाकि पिछले साल के मुकाबले आईआईएससी बैंगलोर के स्थान में काफी गिरावट आयी है। जहां पिछले साल संस्थान की रैंकिंग 155 थी, वहीं इस साल इसे 225वां स्थान दिया गया है।दुनिया के टॉप 500 संस्थानों में भारत के 11 संस्थानों ने जगह बनायी है। आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी दिल्ली, आईआईएससी बैंगलोर के बाद 271वें स्थान पर आईआईटी खडगपुर, 278वें में आईआईटी कानपुर, 285वें स्थान पर आईआईटी मद्रास, 364वें में आईआईटी गुवाहाटी, 369वें में आईआईटी रुड़की, 407वें में दिल्ली विश्वविद्यालय और 427वें में अन्ना विश्वविद्यालय शामिल है।149 आईआईटी बॉम्बे197 आईआईटी दिल्ली225 इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस271 आईआईटी खड़गपुर278 आईआईटी कानपुर285 आईआईटी मद्रास364 आईआईटी गुवाहाटी369 आईआईटी रुड़की407 दिल्ली विश्वविद्यालय427 अन्ना विश्वविद्यालय
टीम एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन नर्सिंग एवं आईटीआई कौशल कॉलेज और कल्याण गुरुकुल के 500 छात्र-छात्राओं को नियुक्ति पत्र का वितरण 28 जून को करेंगे। कार्यक्रम कल्याण विभाग, झारखण्ड सरकार की विशेष प्रयोजन वाहिनी के रूप में कार्य कर रही प्रेझा फाउंडेशन द्वारा आईटीआई कौशल कॉलेज नगरा टोली में आयोजित है।इस मौके पर मुख्यमंत्री आईटीआई कौशल कॉलेज के अंतर्गत कुलीनरी विभाग की छात्राओं के द्वारा संचालित सेवा कैफ़े का भी उद्घाटन करेंगे। राज्य सरकार की विशेष प्रयोजन वाहिनी के रूप में कार्य कर रही प्रेझा फाउंडेशन द्वारा सेवा कैफ़े के अनुभव से छात्राओं को एक सफल उद्यमी बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। सेवा कैफ़े के माध्यम से बेटियों में उद्यमिता संबंधी व्यवाहरिक ज्ञान की जानकारी कॉलेज में पढ़ाई के दौरान करवायी जायेगी।उल्लेखनीय है कि कल्याण विभाग की एसपीवी प्रेझा फाउंडेशन राज्य के 24 जिलों में 28 कल्याण गुरुकुल, 8 नर्सिंग कौशल कॉलेज और एक आईटीआई कौशल कॉलेज का संचालन कर रही है। इस परियोजना के माध्यम से अभी तक 30,000 से अधिक युवक युवतियों को देश की नामी गिरामी कंपनियों में रोजगार की प्राप्ति हुई है।
छात्राओं में उद्यमिता संबंधी व्यावहारिक ज्ञान देने को करेंगे सेवा कैफे का करेंगे उद्घाटन सेवा कैफे के माध्यम से बेटियों को उद्यमी बनाने का लक्ष्य टीम एबीएन, रांची। सीएम की पहल पर झारखंड में नियुक्ति का दौर जारी है। लगातार नियुक्ति पत्र बांटने का दौर चल रहा है। हाल ही में मुख्यमंत्री ने पंचायत सचिव समेत अन्य विभागों के नवनियुक्त कर्मचारियों को दिया था। अब, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बुधवार को फिर एक बार कल्याण विभाग की विशेष प्रयोजन वाहिनी के रूप में कार्य कर रही प्रेझा फाउंडेशन द्वारा संचालित नर्सिंग और आईटीआई कौशल कॉलेज के युवक-युवतियों के बीच नियुक्ति पत्र बांटेंगे। इस नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में अनुसूचित जनजाति मंत्री चंपई सोरेन, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल होंगे। इस अवसर पर नर्सिंग और आईटीआई कौशल कॉलेज एवं कल्याण गुरुकुल के 500 युवक-युवतियों को नियुक्ति पत्र दिया जायेगा। सेवा कैफे का भी उद्घाटन भी करेंगे वहीं कार्यक्रम में मुख्यमंत्री आईटीआई कौशल कॉलेज की छात्राओं द्वारा संचालित सेवा कैफे का भी उद्घाटन करेंगे। इस सेवा कैफे का उद्देश्य एक सफल उद्यमी बनाने में छात्र-छात्राओं की मदद करना है। सेवा कैफे के माध्यम से विशेषकर छात्राओं में उद्यमिता संबंधी व्यावहारिक ज्ञान दिया जायेगा। बताते चलें कि कल्याण विभाग, झारखंड सरकार की एसपीवी प्रेझा फाउंडेशन कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 8 के तहत एक गैर लाभकारी संयुक्त उद्यम के रूप में कार्य कर रहा है। इसके राज्य के 24 जिलों में 28 कल्याण गुरुकुल, 8 नर्सिंग कौशल कॉलेज और एक आईटीआई कौशल कॉलेज हैं। इस परियोजना के माध्यम से अभी तक 30,000 से अधिक युवक-युवतियों को देश की नामी-गिरामी कंपनियों में रोजगार की प्राप्ति हुई है।
एबीएन कैरियर डेस्क। आईएनएई-एसईआरबी-बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान मेसरा द्वारा आयोजित आत्मनिर्भर टेक्नोलॉजीज-इंजीनियरिंग सिक्योर्ड फ्यूचर विषय पर 17वें नेशनल फ्रंटियर्स ऑफ इंजीनियरिंग (NatFoE-23) कॉन्क्लेव का दूसरा दिन सेमिनार हॉल- I, आर एंड डी बिल्डिंग में सुबह 9:30 बजे शुरू हुआ। सत्र का विषय इंजीनियरिंग वाटर- स्मार्ट वाटर हार्वेस्टिंग एंड प्युरीफिकेशन था।सत्र की शुरुआत संयोजक डॉ सुमित मिश्रा द्वारा वक्ता भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास (आईआईटीएम) के प्रोफेसर थलप्पिल प्रदीप के परिचय के साथ हुई। दीपक पारेख इंस्टीट्यूट के चेयर प्रोफेसर टी प्रदीप ड्रिंकिंग वाटर पूरीफिकेशन के लिए टेक्नोलॉजी के विकास में शामिल हैं और उनमें से कुछ का व्यावसायीकरण किया गया है।प्रोफेसर प्रदीप ने अफोर्डेबल क्लीन वाटर यूसिंग एडवांस्ड मैटेरियल्स विषय पर चर्चा की। वार्ता में वर्षा जल संचयन और नैनो-मेटल टेक्नोलॉजी के अनुप्रयोग द्वारा आयरन और आर्सेनिक जैसी भारी धातुओं को हटाने जैसे विषयों पर चर्चा की गयी।सत्र के दूसरे वक्ता भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रूड़की के डिपार्टमेंट ऑफ केमिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर विमल चंद्र श्रीवास्तव थे। उनका परिचय फैकल्टी को-ऑर्डिनेटर डॉ नरेश कुमार ने कराया। प्रोफेसर श्रीवास्तव की प्रमुख अनुसंधान रुचियों में केमिकल एंड एनवायर्नमेंटल इंजीनियरिंग, अल्टरनेटिव फ्यूल्स और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट शामिल हैं।उन्होंने कैटलिसीस एंड इंजीनियरिंग चैलेंजेस टुवर्ड्स कार्बन डाइऑक्साइड कन्वर्शन ट्व आर्गेनिक कार्बोनेट विषय पर चर्चा की। बातचीत में कार्बन डाइऑक्साइड का मीथेन और विभिन्न केमिकल में कन्वर्शन, डाय अलकाइल कार्बोनेट के सिंथेसिस रुट्स आदि जैसे विवरण शामिल थे।फिर, सत्र के तीसरे वक्ता तमिलनाडु केंद्रीय विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ राजेश बानू का स्वागत डॉ नरेश कुमार ने किया। प्रोफेसर बानू एससीआई और एससीआईई पत्रिकाओं में संचयी प्रभाव कारक के साथ 340 प्रकाशनों के लेखक हैं।उन्होंने रीसेंट एडवांसेज इन द रिमूवल ऑफ़ इमर्जिंग पोलूटेंट्स फ्रॉम वाटर एंड वेस्ट वाटर विषय पर चर्चा की। उनकी बातचीत में स्लज रिडक्शन, फॉस्फोरस प्रोफाइलिंग आदि जैसे विवरण शामिल थे।चौथे वक्ता, एसोसिएट प्रोफेसर, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बॉम्बे डॉ प्रदीप पी कलबर का परिचय डॉ नरेश ने कराया।डॉ कलबर संस्थान में फैकल्टी के रूप में शामिल होने से पहले आईआईटी- बी में शहरी विज्ञान और इंजीनियरिंग केंद्र में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में काम करते हैं। उन्होंने डेनमार्क के तकनीकी विश्वविद्यालय के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग, क्वांटिटेटिव सस्टेनिबिलिटी असेसमेंट विभाग में एक पेशेवर शोधकर्ता के रूप में दो साल तक काम किया।डॉ कल्बर ने स्मार्ट एंड इनोवेटिव टेक्नॉलजी फॉर एक्विटेबल वाटर सप्लाई टू एव्री हाउसहोल्ड विषय पर बात की। उनके भाषण में भारत में डब्ल्यूएसएस फेलियर के दुष्चक्र, सिंगल विलेज अष्ट, चंद्रपुर, महाराष्ट्र आदि के लिए शाफ्ट बेस्ड डिजाइन (सोलर पावर ऑपरेटेड), शाफ्ट प्रोजेक्ट जैसे मामलों पर चर्चा की गयी। इसके बाद आजादी वार्ता के लिए सफाई कर्मचारी आंदोलन की अनुसंधान निदेशक डॉ इंदिरा खुराना और एनजीओ तरूण भारत संघ के उपाध्यक्ष डॉ नरेश कुमार का परिचय कराया गया। वह बायोकैमिस्ट्री में पीएचडी हैं और उन्होंने नेचुरल रिसोर्स मैनेजमेंट, पेयजल और स्वच्छता, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका पर लगभग तीन दशकों तक काम किया है।उनके सत्र का विषय था क्लाइमेट अडॉप्टेशन थ्रू प्रैक्टिकल साइंस एंड टेक्नोलॉजी। उनकी बातचीत में बाढ़ के खतरे वाले देशों, सूखे के प्रभाव, बाढ़ और जलवायु परिवर्तन आदि जैसे विवरण शामिल थे। दूसरी आज़ादी वार्ता के लिए, अध्यक्ष मस्ट रिसर्च, हैदराबाद के संस्थापक जॉय मुस्तफ़ी का परिचय डॉ नरेश कुमार द्वारा कराया गया।उनके सत्र का विषय ऍप्लिकेशन्स ऑफ़ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रिसर्च था। उन्होंने एआई के डेमोक्रेटिज़ेशन पर बात की, उन्होंने यह भी बताया कि एआई को विभिन्न इंडस्ट्रीज में कैसे शामिल किया जा रहा है।सत्र की अंतिम वार्ता और तीसरी आज़ादी वार्ता के लिए डॉ ताड़ीकोंडा वेंकट भारत का परिचय फैकल्टी एडवाइजर, डॉ संजय कुमार स्वैन द्वारा कराया गया। डॉ भरत वर्तमान में आईआईटी गुवाहाटी में सिविल इंजीनियरिंग विभाग में जियोटेक्निकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर हैं। कम्प्यूटेशनल जियोमैकेनिक्स और जियो-एन्वॉयरन्मेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च में उनके योगदान के लिए उन्हें भारत और विदेशों में कई पुरस्कार प्राप्त हुए हैं।उनके सत्र का विषय कर्रेंट सेनारिओ ऑफ इंजीनियरिंग एजुकेशन इन टेक्निकल इंस्टीटूशन एंड अ वे फॉरवर्ड था। उनकी बातचीत में हाल के वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रिमोट लर्निंग और वर्चुअल लैब के विकास और प्रसार जैसे विषयों पर चर्चा हुई।अंत में, सुबह के सत्र के वक्ताओं को बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान के वाईस चांसलर, प्रो इंद्रनील मन्ना, और डीन ऑफ रिसर्च, इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप डॉ सी जेगनाथन ने सम्मानित किया गया।प्रातः सत्र 1:30 बजे भोजनावकाश के साथ समाप्त हुआ।दोपहर का सत्रदोपहर का सत्र 2:30 बजे पुनः प्रारंभ हुआ। अंतिम सत्र का विषय वर्तमान इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम में भविष्य की प्रौद्योगिकियों को अपनाने पर था, जिसे डॉ निशा गुप्ता ने प्रस्तुत किया।अंतिम सत्र की पहली वार्ता डॉ राजीव शोरे की थी। वह क्वींसलैंड विश्वविद्यालय के पूर्व सीईओ थे और अब आईआईटी दिल्ली में कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग विभाग में सहायक प्रोफेसर हैं। उन्होंने मशीन लर्निंग और एज कंप्यूटिंग के अंतर्संबंध में हालिया जांच के बारे में बात की।डॉ मिश्रा को बीआईटी मेसरा के कुलपति डॉ इंद्रनील मन्ना ने सम्मानित किया। इसके बाद डॉ तपन के गांधी का व्याख्यान हुआ, जो पहले मुख्य वक्ता थे, जिन्हें संकाय सलाहकार एलएन पटनायक द्वारा परिचय कराया गया।वह वर्तमान में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर, एआई और ऑटोमेशन के कैडेंस चेयर प्रोफेसर, एआई स्कूल, आईआईटी दिल्ली के संयुक्त फैकल्टी और एआई और डेटा साइंस स्कूल, आईआईटी जोधपुर में सहायक फैकल्टी के रूप में काम कर रहे हैं। वह एमआईटी, यूएस से भी संबंध हैं और उन्होंने वही से अपनी पीएचडी प्राप्त की है।डॉ गांधी ने तकनीकी संस्थानों में इंजीनियरिंग शिक्षा के वर्तमान परिदृश्य और आगे की राह पर चर्चा की। दूसरे मुख्य वक्ता डॉ कौशल कुमार भगत थे जिन्हें संकाय सलाहकार एलएन पटनायक द्वारा परिचय कराया गया। डॉ भगत आईआईटी खड़गपुर में उन्नत प्रौद्योगिकी विकास केंद्र में सहायक प्रोफेसर हैं। उन्होंने अपनी पीएचडी नेशनल ताइवान नॉर्मल यूनिवर्सिटी से प्राप्त की, फिर बीजिंग नॉर्मल यूनिवर्सिटी के स्मार्ट लर्निंग इंस्टीट्यूट में 2 साल तक राष्ट्रपति पद पर कार्य किया। उन्हें वर्ष 2015 में एनटीएनयू इंटरनेशनल आउटस्टैंडिंग अचीवमेंट अवार्ड मिला। उन्हें वर्ष 2017 में आईईईई टीसीएलटी यंग रिसर्चर पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।डॉ भगत ने संवर्धित वास्तविकता के साथ इंजीनियरिंग शिक्षा को बढ़ाने के बारे में बात की। उन्होंने ऑगमेंटेड रियलिटी और वर्चुअल रियलिटी के बीच अंतर पर चर्चा की और इसके विभिन्न प्रकारों पर भी चर्चा की।अंतिम मुख्य वक्ता डॉ मंजिरा सिन्हा थीं, जिन्हें संकाय सलाहकार एलएन पटनायक द्वारा परिचय कराया गया। वे आईआईटी खड़गपुर में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं| इससे पहले, वह एक्सेंचर एआई लैब्स और रिसर्च साइंटिस्ट कंडुएंट लैब्स और भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए एसोसिएट प्रिंसिपल रिसर्चर थीं। डॉ सिन्हा ने इंजीनियरिंग शिक्षा में समावेशन और कैसे प्रौद्योगिकी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है... को संबोधित किया।वक्ताओं को बीआईटी मेसरा के कुलपति प्रोफेसर इंद्रनील मन्ना ने सम्मानित किया। दो दिवसीय सत्र में शामिल विभिन्न विषयों को प्रदर्शित करते हुए आर एंड डी भवन में एक पोस्टर प्रस्तुति हुई। सत्र का समापन शाम 5:30 बजे हुआ।
तीसरी की छोड़, बीआरसी तक भी नहीं पहुंच सकी हैं किताबें स्कूली शिक्षा सचिव को भी झूठी रिपोर्ट दे रहे हैं अधिकारी टीम एबीएन, रांची। राज्य के विभिन्न जिलों में गर्मी की छुट्टी के बाद सरकारी स्कूल गुरुवार से खोल दिये गये। बच्चों को पहली से 7वीं तक की कक्षाओं में प्रमोशन भी दे दिया गया। उनके हाथ किताबें नहीं आयी। नतीजा स्कूल के साथ ही बच्चे बे‘किताब’ बैठे रहे। हां, कुछ फटी-चिटी पुरानी किताबों के सहारे बच्चों का पहला दिन कटा। परंतु दूसरे दिन शुक्रवार को वह बे‘किताब’ कैसे पढ़ेंगे? क्या सिर्फ खाना खाने के लिए स्कूल जायेंगे? शिक्षकों का कहना है कि राज्य स्तर से अब तक नये सत्र के लिए किताबें नहीं आयी है। ऐसे में बच्चों को पुरानी किताबों से ही काम चलाना होगा। हालांकि उत्कृष्ट विद्यालयों के लिए राज्य के कई जिलों में किताबें पहुंच गयी हैं। इन विद्यालयों के लिए तीसरी से 11वीं कक्षा तक की किताबें भेजी गयी हैं। विभाग को दी जा रही है झूठी रिपोर्ट विभागीय अधिकारियों का कहना है कि स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता सचिव को राज्य के विभिन्न जिलों में किताब भेजे जाने की झूठी रिपोर्ट भेजी जा रही है। राज्य के कुछ जिलों में तीसरी कक्षा को छोड़ किताबें नहं पहुंची है। ऐसे में स्कूलों को किताब उपलब्ध कराने की बात बेमानी लगती है। मुख्यालय से भेजी जानी हैं किताबें शैक्षणिक सत्र 2023-24 में कक्षा एक से आठवीं तथा कक्षा नौवीं से 12वीं तक के लिए किताबें मुख्यालय से भेजी जानी हैं। इसके लिए झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद रांची की ओर से सात जून को पत्र जारी किया गया था, लेकिन अब तक किताबें राज्य के किसी भी जिले में नहीं पहुंची है। इन बच्चों को देनी है प्राथमिकता सरकार के स्तर स्कूलों में किताब बांटने के लिए कुछ प्राथमिकताएं तय की गयी है। इसके अनुसार जिन छात्र-छात्राओं को अधिकतम अंक प्राप्त हुए है, जो पहली बार विद्यालय में नामांकित हुए हैं और जिन छात्र-छात्राओं की कक्षा में उपस्थिति सर्वोत्तम रही है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर किताबें देने की योजना है। ऐसा बात नहीं है कि किताबें बच्चों को नहीं मिली है। किताबें स्कूल में पहुंचा दी गयी है। शुक्रवार को इसकी डिटेल्स रिपोर्ट उपलब्ध करा दूंगा। -के रवि कुमार, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता सचिव, झारखंड।
टीम एबीएन, रांची। इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग, NatFoE-2023 का प्रमुख कार्यक्रम 24 और 25 जून, 2023 को BIT मेसरा में इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग (INAE) के सहयोग से INAE-SERB कॉन्क्लेव के तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। आत्मनिर्भर टेक्नोलॉजीज इंजीनियरिंग सिक्योर्ड फ्यूचर पर। इस आयोजन का उद्देश्य ज्ञान का एक इंटरफेस बनाना और युवा बुद्धिजीवियों को इंजीनियरिंग चमत्कारों को नया करने के लिए प्रेरित करना है। इस आयोजन के मुख्य अतिथि भारतीय संसद के सदस्य और पूर्व मंत्री जयंत सिन्हा होंगे। वित्त राज्य मंत्री और भारत सरकार में नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री। इस आयोजन में 4 विषयगत क्षेत्र हैं, खनन प्रौद्योगिकी- मास्टरिंग गहराई और अन्वेषण, भविष्य की प्रौद्योगिकी- एआई, जीपीटी और रोबोटिक्स, इंजीनियरिंग जल- स्मार्ट जल संचयन और वर्तमान इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम में शुद्धिकरण और भविष्यवादी तकनीकों को अपनाना। विभिन्न संस्थानों के 39 वक्ताओं के साथ, इस आयोजन में 26 जून को राष्ट्रीय स्तर की परियोजना प्रतियोगिता IMP-2023 (इनोवेशन इन मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेस) होगी। यह सभी इंजीनियरिंग छात्रों और व्यवसायियों के लिए तीन श्रेणियों, स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी विद्वानों में विनिर्माण क्षेत्र में इंजीनियरिंग प्रौद्योगिकी में प्रगति के आसपास अपनी परियोजनाओं का प्रदर्शन करने के लिए खुला है। IMP-2023 के दौरान प्रस्तुति के लिए कुल 18 प्रविष्टियों को शॉर्टलिस्ट किया जाएगा, और शीर्ष छह टीमों को INAE विशेषज्ञों की एक राष्ट्रीय समिति द्वारा चुना जायेगा। प्रत्येक श्रेणी में प्रथम पुरस्कार के रूप में 40,000 और द्वितीय पुरस्कार के रूप में 20,000 का नकद पुरस्कार प्रदान किया जायेगा।आईएमपी-2023 में मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के सचिव डॉ राहुल पुरवार मुख्य अतिथि होंगे। 20 जून को कुलपति, डॉ इंद्रनील मन्ना, डीन और कुलसचिवों द्वारा एक प्री-इवेंट प्रेस विज्ञप्ति आयोजित की गयी, जिसमें आयोजित किये जाने वाले कार्यक्रम के बारे में विवरण के साथ-साथ वक्ताओं की सूची पर अपडेट किया गया, जो इसमें उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम की जानकारी प्रेस और मीडिया घरानों को दी गयी।
फर्मों, पूर्व छात्रों और डोनर्स ने जमकर दिये पैसेइंस्टीट्यूट ने बताया कि दस वर्षों में कुल फंडिंग 45 फीसदी सालाना चक्रवृद्धि दर से बढ़ी हैएबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी मद्रास) ने वित्त वर्ष 2022-23 (एफवाई-23) में पूर्व छात्रों, इंडस्ट्री और इंडिविजुअल डोनर्स से 231 करोड़ रुपये जुटाये हैं। आईआईटी मद्रास ने सोमवार को कहा कि यह अब तक की जुटायी गयी सबसे ज्यादा रकम है।आईआईटी मद्रास की तरफ से शेयर किये गये डेटा के मुताबिक, संस्थान ने वित्त वर्ष 22 में 131 करोड़ रुपये की फंडिंग इकट्ठा की थी, जो वित्त वर्ष 23 में 76 फीसदी बढ़ गयी। 1 करोड़ से ज्यादा की रकम दान करने वाले सदस्यों की संख्या सालाना आधार पर 64 फीसदी से ज्यादा बढ़ गयी है। बता दें कि आईआईटी मद्रास ने वित्त वर्ष 21 में 101.2 करोड़ रुपये जुटाये थे।इंस्टीट्यूट ने बताया कि 10 वर्षों में कुल फंडिंग 45 फीसदी सालाना चक्रवृद्धि दर से बढ़ी है। इंस्टीट्यूट को सीएसआर (कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) फंड, कई भारतीय और बहुराष्ट्रीय कॉरपोरेट फर्मों (मल्टीनैशनल कॉरपोरेट फर्म्स) से ग्रांट यानी अनुदान मिला। इसके अलावा पूर्व छात्रों और व्यक्तिगत परोपकारी लोगों से भी धन मिला।आईआईटी मद्रास की ऑफिस ऑफ इंस्टीट्यूशनल एडवांसमेंट के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) ने कविराज नायर कहा- हमारे हितैषियों ने हमें स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, एनर्जी, कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) और कृषि जैसे सामाजिक रूप से आवश्यक क्षेत्रों में नई तकनीकों के विकास के लिए सेंटर्स ऑफ एक्सलेंस बनाने में मदद की। वे छात्रवृत्ति और फेलोशिप के माध्यम से जरूरतमंद छात्रों को फाइनैंशियल सपोर्ट भी प्रदान करते हैं।नायर ने कहा- पूर्व छात्रों ने कैंपस के ओवरऑल इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार जैसे इनोवेशन हब, इनडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के कंस्ट्रक्शन में सहायता की। इसके अलावा उन्होंने कैंपस में ट्रांसपोर्टेशन की बेहतर सुविधा के लिए इलेक्ट्रिक बसों को खरीदा। हम आईआईटी मद्रास से जुड़े एक वर्ल्ड क्लास स्टार्टअप इकोसिस्टम बनाने के लिए अपने पूर्व छात्रों के साथ बड़े पैमाने पर काम करते हैं।उन्होंने कहा कि पूर्व छात्रों के समर्थन से इंस्टीट्यूट को तकनीकी विशेषज्ञता, प्रोफेशनल नेटवर्क या फाइनैंशियल सोर्सेज में सहायता मिल सकती है। भारत भर में और विश्व स्तर पर पूर्व छात्रों और इंडिविजुअल डोनर्स ने संस्थान के लिए लगभग 96 करोड़ रुपये का योगदान दिया। विशेष क्षेत्रों में रिसर्च के लिए चेयर प्रोफेसरशिप स्थापित करने के अलावा उनके फोकस क्षेत्रों में विभिन्न सामाजिक प्रभाव विषयों पर रिसर्च, इन्फ्रास्ट्रक्चर, छात्रों के लिए स्कॉलरशिप शामिल हैं।सीएसआर सेगमेंट में पिछले वर्ष की तुलना में 56 फीसदी की वृद्धि देखी गयी, जिसमें पिछले वर्ष 40 की नई पार्टनरशिप शामिल हैं। जिन क्षेत्रों ने डोनर्स से सबसे अधिक रुचि आकर्षित की उनमें सीएसआर के तहत रिसर्च के लिए सहयोग है। इसके अलावा एनर्जी, पर्यावरण, स्वास्थ्य और शिक्षा में प्रौद्योगिकी संचालित पहल में भी डोनर्स ने विशेष फोकस किया है।2023-24 के चालू वित्त वर्ष के लिए संस्थान के प्रमुख रकम जुटाने वाले लक्ष्यों में भारत और अमेरिका में पूर्व छात्रों की रकम जुटाने वाली टीम को मजबूत करना शामिल है ताकि पूर्व छात्रों के सेगमेंट में और अधिक पहुंच बनायी जा सके।
टीम एबीएन, रांची। डीएवी गांधीनगर के बच्चों ने इस वर्ष आयोजित जी एडवांस की परीक्षा में शानदार सफलता प्राप्त की है। राकेश कुमार हेंब्रम एसटी श्रेणी में 990, संकल्प कुमार ईडब्ल्यूएस श्रेणी में 4200, सूरज प्रसाद ओबीसी श्रेणी में 4513, सत्यम शिवम ओबीसी श्रेणी में 4534 तथा आशीष कुमार ओबीसी ग्रूप में 5741 आल इंडिया रैंक के साथ सफलता अर्जित कर विद्यालय का नाम रोशन किया है। बच्चों की शानदार सफलता पर प्राचार्य एसके सिन्हा ने उन्हें हार्दिक बधाई दी तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी हमारे विद्यालय के छात्रों ने उत्कृष्ट प्रतिभा का परिचय दिया है। इसके लिए उन्हें उनके अभिभावकों तथा छात्रों की प्रतिभा को तराशने वाले शिक्षकों को बधाई दी।
टीम एबीएन, रांची। डीएवी पब्लिक स्कूल सीसीएल गांधीनगर के छात्रों ने इस वर्ष की नीट परीक्षा में शानदार प्रदर्शन किया है l रोहित कुमार ने सामान्य श्रेणी में 8017,नंदिनी सिन्हा ने 8881, आफताब ऊर्ज 20771, सौम्या प्रिया 10543 तथा तनजिल बकार ने ओबीसी श्रेणी में 1324 स्निग्धा झा AIR रैंक 56833 के साथ उत्तीर्णता को प्राप्त कर विद्यालय का नाम ऊंचा किया है। प्राचार्य श्री एस के सिन्हा ने विद्यार्थियों की इस शानदार सफलता पर हर्ष व्यक्त किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी हमारे विद्यार्थियों ने शानदार प्रदर्शन किया है। इसके लिए उन्होंने छात्रों की कड़ी मेहनत शिक्षकों के उचित मार्गदर्शन तथा अभिभावकों की सहभागिता की सराहना की।
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