एबीएन कैरियर डेस्क। बिरला इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी, मेसरा (लालपुर इकाई) में इंसाइटा सीरीज 1.0 के अंतर्गत 1 अप्रैल 2026 को एक अतिथि व्याख्यान का सफल आयोजन किया गया। इस व्याख्यान का विषय था डेटा आधारित से निर्णय आधारित संगठन एजेंटिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता की संभावनाएं। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री नीलमाधव मंडल (Analytics Director at Tiger Analytics, formal analytic leader SAS) थे, जो डेटा विज्ञान और विश्लेषण के क्षेत्र में दो दशकों से अधिक अनुभव रखने वाले विशेषज्ञ हैं। यह सत्र मिश्रित माध्यम (हाइब्रिड मोड) में आयोजित किया गया, जिसमें वक्ता ऑनलाइन जुड़े जबकि छात्र-छात्राएं व्याख्यान कक्ष में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली और पूरे सत्र के दौरान एक ज्ञानवर्धक वातावरण बना रहा।अपने व्याख्यान में वक्ता ने विस्तार से बताया कि वर्तमान समय में संगठन केवल डेटा संग्रह और विश्लेषण तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि वे कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सहायता से स्वतः निर्णय लेने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने एजेंटिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता की अवधारणा को सरल भाषा में समझाते हुए इसके व्यावहारिक उपयोगों पर प्रकाश डाला। यह कार्यक्रम डॉ. तन्मय कुमार बनर्जी (ग्राफिक्स टीम के संकाय प्रभारी) के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया, जिनका सहयोग कार्यक्रम की सफलता में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। अंत में ग्राफिक्स टीम की अध्यक्ष करिना तामांग द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने मुख्य वक्ता, संकाय सदस्यों तथा सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन सकारात्मक और प्रेरणादायक वातावरण में हुआ।
टीम एबीएन, रांची। रांची स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) परिसर में आज एक भव्य एवं विचारोत्तेजक प्रमुख जन गोष्ठी आयोजित की गयी। इस गरिमामयी कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों—शिक्षा, प्रशासन, चिकित्सा, मीडिया एवं सामाजिक जीवन—से जुड़े बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन सम्मिलित हुए। कार्यक्रम का प्रारंभ पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसके पश्चात अतिथियों का स्वागत एवं परिचय कराया गया। प्रारंभिक संबोधन में राजीव कमल बिट्टू, प्रांत संपर्क प्रमुख ने इस गोष्ठी के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर समाज के विभिन्न वर्गों के बीच सार्थक संवाद स्थापित करना समय की आवश्यकता है, ताकि राष्ट्र निर्माण में सभी की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित हो सके। अपने विस्तृत और प्रेरणादायी उद्बोधन में सुनील आंबेकर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्षों की यात्रा, उसकी कार्यपद्धति, विचारधारा एवं समाज में उसकी भूमिका पर गहन प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्ष 1925 में विजयादशमी के पावन अवसर पर एक छोटे से प्रयास के रूप में प्रारंभ हुआ संघ आज एक विशाल सामाजिक-सांस्कृतिक शक्ति के रूप में विकसित हो चुका है। उन्होंने बताया कि संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के साथ ही पूरे देश में उसके कार्य और विचार को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है। पहले जहां संघ के बारे में जानकारी सीमित दायरे में ही रहती थी, वहीं आज समाज का सामान्य नागरिक भी संघ के सकारात्मक पक्ष को जानने और समझने के लिए उत्सुक है। उन्होंने कहा कि देशभर में आयोजित हो रहे ऐसे कार्यक्रमों में विभिन्न पृष्ठभूमियों के लोग बड़ी संख्या में भाग ले रहे हैं और संघ के विचार को प्रत्यक्ष रूप से समझने का प्रयास कर रहे हैं। श्री आंबेकर ने कहा कि संघ केवल एक संगठन नहीं है, बल्कि यह एक अनुभूति का विषय है। उन्होंने वर्तमान सरसंघचालक के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि संघ को शब्दों में पूर्ण रूप से व्यक्त करना कठिन है, इसे अनुभव के माध्यम से ही समझा जा सकता है। उन्होंने संघ के संस्थापक डॉ केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन और उनके राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत व्यक्तित्व का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने बताया कि डॉ हेडगेवार जन्म से ही राष्ट्र के प्रति समर्पित थे। बाल्यकाल से ही उनके मन में देशभक्ति की भावना प्रबल थी। उन्होंने अंग्रेजों के शासनकाल में भारतीय समाज और संस्कृति पर पड़े प्रभाव को निकट से देखा और अनुभव किया, जिससे उनके मन में राष्ट्र के पुनर्निर्माण का संकल्प जागृत हुआ। उन्होंने आगे बताया कि डॉ हेडगेवार ने अपने जीवन के अनुभवों से यह निष्कर्ष निकाला कि भारत की पराधीनता का मुख्य कारण समाज की असंगठित स्थिति थी। जाति, पंथ, भाषा और क्षेत्र के आधार पर विभाजित समाज को संगठित किये बिना राष्ट्र की स्वतंत्रता और उन्नति संभव नहीं है। इसी विचार के आधार पर उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की, जिसका मूल उद्देश्य समाज को संगठित करना और राष्ट्र को सशक्त बनाना है। श्री आंबेकर ने संघ की कार्यपद्धति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संघ ने व्यक्ति निर्माण को केंद्र में रखा है। शाखा के माध्यम से अनुशासन, संस्कार, समर्पण और राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित की जाती है। आज देशभर में हजारों शाखाएं संचालित हो रही हैं, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन रही हैं। उन्होंने कहा कि संघ ने हमेशा सामान्य व्यक्तियों की शक्ति पर विश्वास किया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समाज परिवर्तन के लिए किसी विशेष वर्ग या व्यक्तियों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सहभागिता आवश्यक है। अपने उद्बोधन में उन्होंने पंच परिवर्तन के संकल्प का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर समाज के समक्ष पांच महत्वपूर्ण विषयों को रखा गया है : कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्व का बोध, नागरिक कर्तव्य बोध। उन्होंने बताया कि कुटुंब प्रबोधन के अंतर्गत परिवार को संस्कारों का केंद्र बनाने पर बल दिया गया है, जहां बच्चों में नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों का विकास हो। सामाजिक समरसता के माध्यम से जाति और भेदभाव से ऊपर उठकर एकता और बंधुत्व की भावना को सुदृढ़ करने का आह्वान किया गया है। पर्यावरण संरक्षण के विषय में उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जीवनशैली को प्रकृति के अनुकूल बनाना अत्यंत आवश्यक है। जल, वन, भूमि और ऊर्जा के संतुलित उपयोग से ही सतत विकास संभव है। स्व के बोध पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि अपनी भाषा, संस्कृति, परंपरा और जीवन मूल्यों के प्रति गर्व की भावना विकसित करना आवश्यक है। साथ ही नागरिक कर्तव्य बोध के अंतर्गत प्रत्येक व्यक्ति को अपने दायित्वों के प्रति सजग रहकर समाज और राष्ट्र के हित में कार्य करने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि संघ केवल तात्कालिक मुद्दों पर कार्य करने वाला संगठन नहीं है, बल्कि यह दीर्घकालिक दृष्टि से राष्ट्र निर्माण में लगा हुआ है। संघ का कार्य शताब्दियों की योजना के साथ चलता है और इसका उद्देश्य एक सशक्त, संगठित और आत्मनिर्भर समाज का निर्माण करना है। कार्यक्रम में प्रांत प्रचारक गोपाल शर्मा जी गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ायी। इसके अतिरिक्त समाज के विभिन्न क्षेत्रों से अनेक प्रमुख व्यक्तित्व उपस्थित रहे, जिनमें दीपक श्रीवास्तव (निदेशक, ककट), प्रो. एस. पी. अग्रवाल (कुलपति, साईं नाथ विश्वविद्यालय), डॉ. गोपाल पाठक, सुनील बादल (संपादक, राष्ट्रीय नवीन मेल), सुमन श्रीवास्तव, संजय कुमार, डॉ. अजीत सिन्हा, डॉ. रश्मि, डॉ. जिज्ञासा ओझा, पिंकी खोया, राजीव कमल बित्तू, डॉ. त्रिवेणी नाथ साहू, डॉ. सहदेव राम, डॉ. डी. के. सिंह (कुलपति, खवळ), मंटू कुमार (विभाग प्रचारक), विशाल कुमार(महानगर प्रचारक), दीपक पांडेय (महानगर कार्यवाह) विजय कुमार ( प्रांत सह प्रचार प्रमुख), स्निग्ध कुमार रंजन (महानगर प्रचार प्रमुख), रवींद्र (महानगर संपर्क प्रमुख), संतोष कुमार, रवि भूषण, डॉ ज्योति प्रकाश सहित अनेक गणमान्य नागरिकों की सहभागिता रही। कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें उपस्थित जनों ने विभिन्न विषयों पर अपने प्रश्न रखे और सुझाव प्रस्तुत किये। आंबेकर ने सभी प्रश्नों का सरल एवं सारगर्भित उत्तर देते हुए संवाद को और अधिक सार्थक बनाया।
एबीएन कैरियर डेस्क। बिरला इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलॉजी, मेसरा (लालपुर यूनिट) के प्रबंधन अध्ययन विभाग ने 30 मार्च 2026 को दोपहर 2:30 बजे एलएच-01 में केसएक्ससेलेंस एक केस स्टडी प्रतियोगिता का सफलतापूर्वक आयोजन किया। यह आयोजन वास्तविक दुनिया के व्यावसायिक परिदृश्यों के माध्यम से छात्रों की विश्लेषणात्मक सोच, समस्या-समाधान क्षमताओं और रणनीतिक निर्णय लेने के कौशल को बढ़ाने के उद्देश्य से टीम मीडिया और पीआर द्वारा आयोजित किया गया था। प्रतियोगिता में विभिन्न प्रबंधन विषयों के छात्रों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखी गई, जिन्होंने टीमें बनायीं और बड़े उत्साह और प्रतिस्पर्धी भावना के साथ सक्रिय रूप से कार्यक्रम में भाग लिया। इस कार्यक्रम को वास्तविक व्यावसायिक चुनौतियों का अनुकरण करने के लिए संरचित किया गया था, जहां प्रतिभागियों को गहन विश्लेषण और नवीन समाधानों की आवश्यकता वाले केस अध्ययन के साथ प्रस्तुत किया गया था। टीमों को स्थिति का मूल्यांकन करने, रणनीति विकसित करने और न्यायाधीशों के पैनल के सामने अपने विचार प्रस्तुत करने का समय दिया गया। प्रत्येक प्रस्तुति के बाद एक इंटरैक्टिव प्रश्न-उत्तर सत्र हुआ, जिससे प्रतिभागियों को अपने दृष्टिकोण को सही ठहराने और अपनी समझ प्रदर्शित करने का मौका मिला। मूल्यांकन विश्लेषणात्मक क्षमता, रचनात्मकता, समाधान की व्यवहार्यता, प्रस्तुति कौशल और टीम समन्वय जैसे मानदंडों पर आधारित था। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ विजय कुमार झा (प्रभारी प्रोफेसर), संकाय प्रमुख डॉ एआर के प्रतिभागियों को प्रेरक भाषण से हुई। श्रीवास्तव और संकाय सदस्य डॉ सैयद अनीश हैदर, डॉ जीपी मिश्रा, डॉ सोमनाथ मुखर्जी, डॉ सौमित्रो चक्रवर्ती ने आयोजन का मूल्यांकन किया। कार्यक्रम समन्वयकों ने प्रतिभागियों की नवोन्मेषी भावना और नवोन्वेषी भविष्य के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे अनुभव छात्रों के करियर के लिए अमूल्य हैं, जो उन्हें भविष्य के उद्यमी बनने के लिए आवश्यक कौशल और मानसिकता से लैस करते हैं। आयोजन टीम के अध्यक्ष प्रिंस और शान्या सिन्हा और सुमैया नईम (समन्वयक) के नेतृत्व में इस कार्यक्रम का समन्वय किया गया था। इसकी शानदार सफलता के साथ, केसएक्ससेलेंस ने बीआईटी मेसरा की वास्तविकता को बढ़ावा देने की चल रही प्रतिबद्धता में एक महत्वपूर्ण योगदान के रूप में खुद को मजबूती से स्थापित किया हैअपने छात्र संगठन के बीच विश्व परिदृश्य। कड़े मुकाबले के बाद विजेताओं की घोषणा की गयी। प्रथम पुरस्कार: टीम धृति (श्रुति अग्रवाल, रिधि प्रियानी) दूसरा पुरस्कार: टीम कोटलर (हर्षिता तिवारी, अदिति सिन्हा) तीसरा पुरस्कार: टीम संप्रकी (संपूर्ण घोष, अश्मित तिर्की)
झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा-2026 में उर्दू भाषा को हटाने के खिलाफ कड़ा विरोध टीम एबीएन, रांची। आजसू छात्र संघ, रांची द्वारा झारखंड सरकार की नयी अधिसूचना (2026) का कड़ा विरोध किया जाता है, जिसमें जिला स्तर पर क्षेत्रीय भाषाओं की सूची से उर्दू भाषा को हटा दिया गया है। यह निर्णय न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि उर्दू भाषी अभ्यर्थियों के साथ सीधा अन्याय और भेदभाव भी है। वर्ष 2022 की अधिसूचना में उर्दू को लगभग सभी जिलों में स्थान दिया गया था, जिससे हजारों अभ्यर्थियों को समान अवसर मिला। लेकिन 2026 की अधिसूचना में उर्दू को हटाना यह स्पष्ट करता है कि सरकार एक वर्ग विशेष को नजरअंदाज कर रही है। आजसू छात्र संघ के जमाल गद्दी ने कहा कि उर्दू झारखंड की महत्वपूर्ण और मान्यता प्राप्त भाषा है। इसे परीक्षा से बाहर करना संविधान की भावना और समान अवसर के अधिकार के खिलाफ है। आजसू छात्र संघ की प्रमुख मांगें झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा-2026 में उर्दू भाषा को तुरंत पुन: शामिल किया जाए। सभी जिलों में पहले की तरह उर्दू को विकल्प के रूप में रखा जाए। इस निर्णय की तत्काल समीक्षा कर संशोधित अधिसूचना जारी की जाए।आजसू छात्र संघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार इस निर्णय को जल्द वापस नहीं लेती है, तो संगठन राज्यभर में छात्रों के साथ मिलकर विरोध प्रदर्शन एवं आंदोलन करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। अंत में, आजसू छात्र संघ सरकार से अपील करता है कि सभी भाषाओं के साथ समान व्यवहार करते हुए उर्दू को पुन: शामिल कर न्याय सुनिश्चित किया जाये।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, भंडरा। भंडरा के पीएम श्री उत्क्रमित हाई स्कूल बिटपी में शनिवार को वार्षिकोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें बीडीओ प्रतिमा कुमारी, बीईईओ राजीव रंजन, स्थानीय मुखिया धनेश्वरी देवी, ग्राम प्रधान महादेव उरांव, सेवानिवृत शिक्षक मुजेबुल मीरदाहा मुख्य रुप से उपस्थित हुए। कार्यक्रम में स्कूल के छात्र छात्राओं ने बम्बू डांस, असामी नृत्य, कश्मीरी नृत्य सहित कई मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति कर अतिथियों का दिल जित लिया। बच्चों का फैशन शो लोगों को आकर्षित करने में सफल रहा। उत्सव के दौरान विज्ञान प्रदर्शनी और एफ़एलएन मेला का आयोजन भी काफी आकर्षक ढंग से किया गया। सभी प्रतिभागी छात्र छात्राओं को पुरस्कृत कर सम्मानित किया गया। मौके पर बीडीओ ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि जिस उदेश्य से यह स्कूल पीएम श्री बनाया गया है। इस कार्यक्रम से इसका झलक दिखाई पड़ रहा है। कार्यक्रम के सफल आयोजन में अजय तिर्की, मतीउलला परवेज, रामप्रवेश गुप्ता, नेहा कुजूर, ललिता कुजूर, सुनीता तिर्की, पंकज सिंह, सजीत एक्का, राकेश उरांव, अम्मानुल्ला खान, पित्रुस उरांव, सीखा कुमारी, अमन साहू आदि ने सराहनीय भूमिका निभाई।
एस आर डीएवी पुन्दाग में उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजनटीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 28 फरवरी 2026 को एस आर डीएवी पब्लिक स्कूल, पुन्दाग,राँची में कक्षा नर्सरी से पाँचवीं तक के नए विद्यार्थियों के लिए एक विशेष उन्मुखीकरण कार्यक्रम (परिचय समारोह )का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को विद्यालय के वातावरण से परिचित कराना, उनमें आत्मविश्वास विकसित करना तथा सीखने के प्रति उत्साह जगाना था।कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य डॉ तापस घोष ने मुख्य अतिथि शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ विक्रम प्रताप के साथ दीप प्रज्वलित करके किया। विद्यालय के नन्हें विद्यार्थियों ने अपने सहपाठियों का स्वागत करने के लिए शानदार नृत्य प्रस्तुत किया। विद्यालय के प्राचार्य डॉ तापस घोष ने अपने स्वागत भाषण में बच्चों को विद्यालय की दिनचर्या, नियमों एवं शिक्षकों से परिचित कराया। उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि विद्यालय केवल पढ़ाई का स्थान नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण का केंद्र है।शिक्षकों ने बच्चों के साथ संवाद स्थापित कर उन्हें सहज महसूस कराया तथा उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया। अभिभावकों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया। नर्सरी शिक्षिकाओं ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना पूर्ण सहयोग दिया जिनमें रंजू पांडे, कंवलजीत कौर, सुरभी नेहा, भावना त्रेहान, श्रृष्टि मिश्रा, अन्नू सिंह, नेहा साहू, नेहा प्रिया, कविता तिर्की आदि सम्मिलित थीं।संपूर्ण कार्यक्रम का संचालन अंग्रेजी शिक्षिका श्रीमती नमिता सिंह द्वारा किया गया।समारोह को सफल बनाने में विद्यालय प्रबंधन ने सराहनीय भूमिका निभाई।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़, सुलभ और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने राज्य के विभिन्न चिकित्सा महाविद्यालयों एवं सरकारी अस्पतालों में रिक्त पड़े कुल 942 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इनमें से 276 पदों के लिए कार्मिक विभाग ने झारखंड लोक सेवा आयोग को अधियाचना भेज दी है। शेष 666 पदों के लिए विभाग की ओर से कार्मिक विभाग को पत्र लिख कर अनुरोध किया गया है कि वह जेपीएससी से रिक्त पदों को भरने हेतु आदि अधियाचना करे। यह व्यापक बहाली प्रक्रिया न केवल स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लायेगी, बल्कि राज्य के ग्रामीण एवं दूरदराज क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित करेगी। सरकार द्वारा इस वृहद बहाली प्रक्रिया को तीन प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है, जिससे चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं दोनों को समान रूप से मजबूती मिल सके। राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में शिक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 180 सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति की जायेगी, जिनमें 155 पद नियमित तथा 25 पद बैकलॉग श्रेणी के हैं। ये नियुक्तियां 24 विभिन्न विभागों में की जाएंगी, जिनमें मेडिसिन, सर्जरी, निश्चेतना, स्त्री एवं प्रसव रोग तथा शिशु रोग जैसे महत्वपूर्ण विभाग शामिल हैं। यह प्रक्रिया झारखंड चिकित्सा शिक्षा सेवा नियमावली 2018 (संशोधित 2021) तथा राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) के नवीनतम मानकों 2025 के अनुरूप संपन्न होगी, जिससे मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा। इसके साथ ही राज्य के पांच प्रमुख मेडिकल कॉलेजों धनबाद, जमशेदपुर, हजारीबाग, पलामू और दुमका में सुपर स्पेशियलिटी विभागों को सशक्त बनाने के लिए 96 विशेषज्ञ फैकल्टी की नियुक्ति की जायेगी। इन पदों में न्यूरो सर्जरी, कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी और आॅन्कोलॉजी जैसे अत्याधुनिक चिकित्सा क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गयी है। इस पहल से राज्य में जटिल एवं गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को अन्य राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और उन्हें अपने ही राज्य में उन्नत उपचार सुविधाएं मिल सकेंगी। स्वास्थ्य सेवाओं के जमीनी स्तर को मजबूत करने के लिए राज्य के विभिन्न जिला एवं अनुमंडल अस्पतालों में 666 विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति की जायेगी, जिनमें 506 पद नियमित तथा 160 पद बैकलॉग के हैं। इस संबंध में विभाग ने कार्मिक विभाग को पत्र लिखा है कि जेपीएससी को अधियाचना की जाय ताकि नियमित नियुक्ति हो सके। इनमें सर्वाधिक पद फिजिशियन (226) और शिशु रोग विशेषज्ञ (224) के हैं, जबकि निश्चेतक और स्त्री रोग विशेषज्ञ के पद भी उल्लेखनीय संख्या में शामिल हैं। यह पहल विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रही है। हम आपको बता दें कि इसके अतिरिक्त 335 चिकित्सा पदाधिकारियों की भी नियुक्ति की जानी है जो प्रक्रियाधीन है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बहाली अभियान झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था में गुणात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में एक निर्णायक पहल है। इससे न केवल चिकित्सा संस्थानों में मानव संसाधन की कमी दूर होगी, बल्कि मरीजों को समय पर बेहतर और विशेषज्ञ उपचार भी उपलब्ध हो सकेगा। सरकार की इस पहल से यह स्पष्ट है कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता देते हुए उन्हें राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है, जो आने वाले समय में झारखण्ड को स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध होगा।
डीएवी कपिलदेव में अभिभावक उन्मुखीकरण कार्यक्रम में दिखा- नवाचार, संस्कार और शिक्षा का संगमटीम एबीएन, रांची। डीएवी कपिलदेव विद्यालय में 23 मार्च 2026 को कक्षा तृतीय एवं चतुर्थ के विद्यार्थियों के अभिभावकों के लिए एक भव्य, सुव्यवस्थित एवं उद्देश्यपूर्ण उन्मुखीकरण (ओरिएंटेशन) कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अभिभावकों को विद्यालय की शैक्षणिक प्रणाली, आधुनिक शिक्षण-पद्धति, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों एवं विद्यार्थियों के समग्र विकास के प्रति विद्यालय की प्रतिबद्धता से परिचित कराना था। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ, जिससे सम्पूर्ण वातावरण गरिमामय एवं सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण हो उठा। इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य-सह सहायक क्षेत्रीय अधिकारी एमके सिन्हा (डीएवी पब्लिक स्कूल्स, झारखंड जोन-बी) ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि विद्यालय और अभिभावक, दोनों ही बच्चों के सर्वांगीण विकास के मजबूत आधार स्तंभ हैं। जब शिक्षा, संस्कार और अनुशासन का समन्वय होता है, तभी एक सशक्त एवं जिम्मेदार नागरिक का निर्माण संभव है।उन्होंने वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक युग की आवश्यकताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि केवल शैक्षणिक ज्ञान ही पर्याप्त नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, रचनात्मकता, आत्मविश्वास एवं जीवन-कौशलों का विकास भी अत्यंत आवश्यक है, और विद्यालय इस दिशा में निरंतर प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।कार्यक्रम के दौरान कक्षा तृतीय एवं चतुर्थ के शिक्षकों द्वारा अभिभावकों को पाठ्यक्रम, मूल्यांकन प्रणाली, गृहकार्य नीति, अनुशासन, गणवेश एवं विभिन्न सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही स्मार्ट कक्षाओं, डिजिटल शिक्षा एवं नवाचार आधारित शिक्षण विधियों के उपयोग से भी उन्हें अवगत कराया गया।कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण आकर्षण संवाद सत्र रहा, जिसमें अभिभावकों ने अपनी जिज्ञासाएं एवं सुझाव साझा किए। प्राचार्य श्री सिन्हा एवं शिक्षकों ने उनके प्रश्नों का संतोषजनक समाधान प्रस्तुत करते हुए प्रत्येक विद्यार्थी के व्यक्तिगत एवं समग्र विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहरायी।कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ शिक्षक नागेंद्र झा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। अभिभावकों ने विद्यालय की इस पहल की सराहना करते हुए इसे अत्यंत उपयोगी, प्रेरणादायक एवं सार्थक बताया। यह उन्मुखीकरण कार्यक्रम न केवल विद्यालय एवं अभिभावकों के बीच सशक्त संवाद स्थापित करने में सफल रहा, बल्कि विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक सशक्त कदम भी सिद्ध हुआ।मौके पर एसके राणा, जीके पाठक, संजय कुमार सिंह, अशोक कुमार सिंह, जीवन कुमार सिंह, वीके द्विवेदी, रश्मि पांडेय, अंजु कुमारी, काकोली दत्ता, विनीता वर्मा एवं मंजू राणा सहित अन्य गणमान्य शिक्षकगण उपस्थित रहे। इसी तरह का आयोजन कल कक्षा पहली एवं दूसरी के छात्रों-अभिभावकों के लिए विद्यालय परिसर में सुबह 7:30 बजे से 9 बजे तक आयोजित किया जायेगा। उक्त जानकारी डीएवी कपिलदेव, कडरू, रांची के मीडिया प्रभारी आलोक इंद्रगुरु ने दी।
अविराम स्कूल ऑफ एक्सीलेंसी टिको को मिली सीबीएसई से मान्यता, बच्चों ने मनाया जश्न एबीएन कैरियर डेस्क। अविराम ग्रामीण विकास स्वयं सेवी संस्थान माराडीह के द्वारा संचालित अविराम स्कूल आॅफ एक्सीलेंसी जो प्रखंड के टिको में संचालित है। केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड दिल्ली के द्वारा विद्यालय में उपलब्ध सुविधाओं, भवन आदि का निरीक्षण के बाद टेन प्लस टू तक के लिए मान्यता प्रदान कर दी गयी है। विद्यालय को 10 +2 तक मान्यता मिलने के बाद सोमवार को विधालय में जश्न मनाया गया। विद्यालय के सचिव इंद्रजीत कुमार भारती ने बताया कि टिको की धरती शहीदों की धरती है। इसीलिए यहां टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज की स्थापना के बाद से आधारभूत शिक्षा में गुणवत्ता लाने और क्षेत्र के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए अविराम स्कूल आॅफ एक्सीलेंसी की स्थापना की गयी, जिसके लिए सीबीएसई के मानक अनुरूप पुस्तकालय पेयजल, प्रशिक्षित शिक्षकों व सीसीटीवी से आच्छादित परिसर, वृहद पुस्तकालय, संगीत, कंयूटर, लैब, मैथ फिजिक्स, बायो लैब, हेल्थ और फिजिकल रूम आदि प्रयोगशाला जो अत्याधुनिक सामग्री से सुसज्जित है। दिव्यांगों हेतु रैंप और विशेष प्रसाधन कक्ष, कॉमन रूम स्टाफ रूम, एडमिनिस्ट्रेशन के लिए कक्ष गार्ड रूम बाउंड्रीवाल फी काउन्टर वेटिंग रूम विजिटिंग रूम आदि से परिपूर्ण किया गया और प्रथम प्रयास में ही विद्यालय को टेन प्लस टू की मान्यता मिल गयी। सबसे बड़ी बात है कि अविराम स्कूल आॅफ एक्सीलेंसी प्रखंड का पहला सीबीएसई से संबद्ध विद्यालय बन गया है। सचिव इंद्रजीत कुमार भारती ने कहा कि इस विद्यालय को झारखंड के शिक्षा जगत के पटल पर उसकी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से लाना चाहते है जिससे स्थानीय और दूरदराज के बच्चों को कक्षा बारह तक की शिक्षा के साथ-साथ बच्चों का भविष्य बेहतर हो सकें। सोमवार को विधालय में जश्न मनाते हुए खुशियां मनायी गयी।
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