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देश में फिर 54 चीनी ऐप बैन
Published / 2022-02-15 02:50:22
देश में फिर 54 चीनी ऐप बैन

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत सरकार ने फ्री फायर समेत 54 चीनी ऐप बैन कर दिए हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखकर यह फैसला किया गया है। जून 2020 से अब तक भारत 200 से ज्यादा चीनी ऐप बैन कर चुका है। इलेक्ट्रोनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी ने जिन ऐप पर बैन लगाया है, उनमें चीन की दिग्गज टेक कंपनियों के ऐप भी शामिल हैं। इन कंपनियों में टेंसेंट, अलीबाबा और नेट ईज के नाम लिए जा सकते हैं। भारत सरकार के ताजा फैसले में जिन पर प्रतिबंध लगाया गया है उनमें स्वीट सेल्फी एचडी, ब्यूटी कैमरा- सेल्फी कैमरा, इक्वेलाइजर एंड बास बूस्टर, कैमकार्ड फॉर सेल्सफोर्स एंट, आइसोलैंड2: एशेज ऑफ टाइम लाइट, विवा वीडियो एडिटर, टेंसेंट एक्सरीवर, ऑनम्योजी चेस, ऑनम्योजी एरीना, एपलॉक और ड्यूल स्पेस लाइट प्रमुख रूप से शामिल हैं। भारत में चीनी ऐप को बैन करने की शुरुआत जून 2020 में हुई जब टिकटॉक, अलीबाबा का यूसी और टेंसेंट के वीचैट समेत दर्जनों ऐप सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए बैन कर दिए गए थे। तब से भारत ने पबजी समेत 200 से ज्यादा चीनी ऐप को बैन किया है। कई कंपनियों ने भारत सरकार की चिंताओं को दूर करने की कोशिश की, लेकिन प्रतिबंध जारी रहा। भारत ऐप इंस्टोलेशन के मामले में सबसे बड़ा बाजार बताया जाता है। ऐप रैंकिंग प्लेटफॉर्म ऐप ऐनी के अनुसार पिछले साल भारत में 25 अरब डाउनलोड हुए। मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश की सुरक्षा का खतरा बताते हुए चीनी मूल के 54 ऐप्स पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। इसके बाद इलेक्ट्रोनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी ने औपचारिक तौर पर अधिसूचना जारी इन पर प्रतिबंध लगा दिया। ताजा फैसले में कुछ ऐसे भी ऐप है जिन्होंने पिछले प्रतिबंध के बाद खुद को नए रूप में पेश किया था।

ड्राइविंग लाइसेंस : अब नहीं कटेगा आपका चालान...
Published / 2022-02-13 12:34:51
ड्राइविंग लाइसेंस : अब नहीं कटेगा आपका चालान...

टीम एबीएन, रांची। ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर चालान नही कटने को लेकर हम आपको बड़ी जानकारी देने जा रहे है। अगर आप भी स्कूटी, मोटरसाइकिल या गाड़ी चलाते हैं, तो यह खबर आपके बहुत फायदे की है। दरअसल इस खबर का फायदा उन लोगों को होने वाला है जो ड्राइविंग करते है। दरअसल आपको ड्राइविंग लाइसेंस चालान से बचने के लिए साथ में लेकर चलने की जरुरत नहीं है। वाहन चालक यातायात पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा पूछे जाने पर डिजी-लॉकर प्लेटफॉर्म या एम-परिवहन मोबाइल ऐप में डिजिटल रूप में रखे इन दस्तावेजों को दिखा सकते हैं। डिजी-लॉकर में डॉक्यूमेंट सेव रखने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको अपने साथ अपने किसी भी डॉक्यूमेंट की हार्ड कॉपी रखने की जरूरत नहीं है। दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग के अनुसार डिजी-लॉकर प्लेटफॉर्म या एम-परिवहन मोबाइल ऐप पर डिजिटल स्वरूप में रखे ड्राइविंग लाइसेंस और गाड़ी का पंजीकरण प्रमाणपत्र मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत वैध दस्तावेज हैं। विभाग के अनुसार ये परिवहन विभाग द्वारा जारी प्रमाणपत्रों के अनुरूप वैध रूप से मान्य हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अन्य किसी रूप में ड्राइविंग लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट की सॉफ्ट कॉपी मूल रिकॉर्ड के रूप में स्वीकार्य नहीं होगी।

आरोग्य सेतु यूजर्स अब एक जगह रख सकेंगे अपने स्वास्थ्य का पूरा रिकॉर्ड
Published / 2022-02-12 03:08:56
आरोग्य सेतु यूजर्स अब एक जगह रख सकेंगे अपने स्वास्थ्य का पूरा रिकॉर्ड

एबीएन सेंट्रल डेस्क। आरोग्य सेतु ऐप का इस्तेमाल करने वाले लोगों को अब अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड को एक जगह पर रखने की सुविधा मिलेगी। सरकार ने अब आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (ABHA) से नागरिकों को जोड़ने के लिए यह नई सुविधा दी है। इसके तहत जो भी लोग आरोग्य सेतु पर पहले से रजिस्टर होंगे, वे ऐप से ही 14 अंकों का अनोखा आभा नंबर ले सकेंगे। वे इस अकाउंट नंबर के जरिए अपने पुराने और नए मेडिकल रिकॉर्ड्स को आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट पर अपलोड कर सकेंगे। केंद्र सरकार ने हाल ही में अपने नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन का नाम बदलकर आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) कर दिया था। इस कार्यक्रम को सभी नागरिकों तक डिजिटल स्वास्थ्य आईडी मुहैया कराने के मकसद से शुरू किया गया था। इस डिजिटल आईडी में स्वास्थ्य रिकॉर्ड की पूरी जानकारी मुहैया होगी। गौरतलब है कि सरकार ने नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन योजना को 15 अगस्त 2020 को शुरू किया था। अब तक यह योजना पायलट आधार पर संचालित की जा रही थी। इस योजना के अंतर्गत एक लाख से अधिक स्वस्थ आईडी बन चुकी हैं। क्या होगा आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का फायदा? आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अंतर्गत नागरिकों को जो हेल्थ आईडी कार्ड मिलेगा, वमाध्यम से व्यक्तियों की पहचान करके उनको प्रमाणित करने में एवं उनके स्वास्थ्य रिपोर्ट को कई प्रणालियों एवं हितधारकों तक पहुंचाया जाएगा। यह आईडी बनाने के लिए नागरिकों के कुछ बुनियादी विवरण एकत्रित किए जाएंगे। इस अभियान के अंतर्गत सभी नागरिकों के हेल्थ रिकॉर्ड का एक डाटाबेस तैयार किया जाएगा। इस हेल्थ रिकॉर्ड को नागरिक जब चाहे जहां चाहे इस्तेमाल कर सकेगा। हेल्थ रिकॉर्ड में मरीज की चिकित्सा से संबंधित सभी जानकारी स्टोर की जाएगी जैसे कि परामर्श, टेस्ट की रिपोर्ट आदि।

डोरंडा कोषागार : लालू फिर जाएंगे जेल या मिलेगा बेल? फैसला 15 को
Published / 2022-02-11 18:58:05
डोरंडा कोषागार : लालू फिर जाएंगे जेल या मिलेगा बेल? फैसला 15 को

टीम एबीएन, रांची। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। चर्चित चारा घोटाले से जुड़े पांच में से चार मामलों में दोषी करार दिए गए लालू यादव सजा की आधी अवधि जेल में काट लेने के बाद मेडिकल ग्राउंड पर जमानत पर हैं। लालू यादव को फिर से जेल जाना पड़ सकता है। चारा घोटाले से संबंधित डोरंडा कोषागार से 139 करोड़ रुपये की अवैध निकासी के मामले में 15 फरवरी को फैसला आना है। डोरंडा कोषागार से 139 करोड़ की अवैध निकासी के मामले में 15 फरवरी को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत फैसला सुनाने वाली है। इस दौरान लालू यादव को कोर्ट में सशरीर उपस्थित रहना होगा। लालू के स्वास्थ्य और पहले के चारा घोटाला मामलों में आए फैसलों को देख आरजेडी के खेमे में, आरजेडी के समर्थकों में चिंता बढ़ गई है।आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के रांची में अधिवक्ता प्रभात कुमार ने बताया कि डोरंडा कोषागार से 139.35 करोड़ रुपये की अवैध निकासी से जुड़ा मामला है चारा घोटाले के सबसे बड़े आरसी 47 ए/96 के ये मामले दरअसल 1990 से 1995 के बीच के हैं। लालू के स्वास्थ्य को लेकर उन्होंने बताया कि अगर सजा होती है तो स्वास्थ्य को बड़ा ग्राउंड बनाया जाएगा। लालू यादव किडनी की परेशानी से जूझ रहे हैं। उन्हें चिकित्सकों ने 24 घंटे में महज 500 मिली लीटर लिक्विड लेने के लिए कहा है। अधिवक्ता प्रभात कुमार ने कहा कि अगर क्रिएटिनिन लेवल पांच से ऊपर जाता है तो उनको नियमित रूप से डायलिसिस कराना पड़ेगा। हर रोज स्वास्थ्य का अपडेट एम्स को भेजा जाता है। प्रभात कुमार को उम्मीद है कि कोर्ट considerate रहेगा। हालांकि संशय इस बात को लेकर भी है कि इसके पहले तमाम मामलों में तीन साल से ज्यादा की सजा लालू को हुई है और लोअर कोर्ट से कभी भी राहत नही मिली है। उन्होंने बताया कि 14 फरवरी को लालू प्रसाद यादव के रांची आने की संभावना है।

अब 7 नहीं, 14 दिन सेल्फ क्वारंटाइन में रहेंगे अंतरराष्ट्रीय यात्री
Published / 2022-02-10 14:10:24
अब 7 नहीं, 14 दिन सेल्फ क्वारंटाइन में रहेंगे अंतरराष्ट्रीय यात्री

एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोरोना के मामलों में आई गिरावट के बाद अब स्वास्थ्य मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को लेकर नई गाइडलाइन जारी कर दी हैं। दरअसल, अब अंतरराष्ट्रीय यात्री 7 दिन के बजाए 14 दिनों के सेल्फ क्वारंटाइन में रहेंगे। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने गुरुवार को संशोधित दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं, जोकि 14 फरवरी से प्रभावी होंगे। नई गाइडलाइन के तहत यात्री अब अंतरराष्ट्रीय यात्रा से वापस आएंगे, उन्हें 14 दिनों तक सेल्फ क्वारंटाइन में रहना होगा। साथ ही, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि यात्रा से 72 घंटे पहले ली गई नेगेटिव आरटी-पीसीआर रिपोर्ट को अपलोड करने के अलावा पारस्परिक आधार पर यात्रियों को अन्य देशों द्वारा दिए गए वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट को भी अपलोड करने का विकल्प दिया जाएगा। बता दें कि देश में पिछले 24 घंटों में कोविड-19 के 67,084 नए मामले सामने आए हैं, जिसके बाद कुल मामलों का आंकड़ा 4,24,78,060 हो गया है। इसके अलावा पिछले 24 घंटों में देश में 1,241 लोगों की कोरोना से मौत हुई, जिसके बाद कुल मौतों की संख्या 5 लाख 06 हजार 520 हो गई है।

झारखंड : रिटायर होने के बावजूद पद पर बने रहे थे डीजीपी, अब याचिका पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
Published / 2022-02-09 17:24:32
झारखंड : रिटायर होने के बावजूद पद पर बने रहे थे डीजीपी, अब याचिका पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

एबीएन सेंट्रल डेस्क। उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि वह झारखंड सरकार और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नीरज सिन्हा के खिलाफ लंबित अवमानना याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर विचार करेगा। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सिन्हा 31 जनवरी को सेवानिवृत्ति के बाद भी पद पर काबिज हैं। प्रधान न्यायाधीश एनवी रमण, न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति हेमा कोहली की तीन सदस्यीय पीठ को बताया गया कि इस अवमानना याचिका को पिछले साल सितंबर में सूचीबद्ध करने का आदेश दिया गया था लेकिन यह अब तक सुनवाई के लिए नहीं आई है और इस बीच, सिन्हा अपनी सेवानिवृत्ति के बाद झारखंड के डीजीपी के रूप में पद पर काबिज हैं। पीठ कहा कि अदालतें कोविड के कारण प्रतिबंधित मामलों की सुनवाई कर रही हैं और जल्द सुनवाई के लिए याचिका पर विचार करेगी। अधिवक्ता अपूर्व खटोर ने कहा, यह मामला पिछले साल तीन सितंबर को सूचीबद्ध किया गया था और इसे दो सप्ताह के बाद सूचीबद्ध करने का आदेश दिया गया था। यह कभी सूचीबद्ध नहीं हुआ। यह झारखंड के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के शीर्ष पद से संबंधित है। पीठ ने कहा, यह प्राथमिकता वाली चीज नहीं है। हम जानते हैं कि हम प्रतिबंधित मामलों की सुनवाई कर रहे हैं। हम देखेंगे। जब वकील ने सुनवाई की तारीख देने का आग्रह किया, तो पीठ ने कहा, आइए देखते हैं। इससे पहले, राज्य सरकार और डीजीपी के खिलाफ एक लंबित अवमानना याचिका की तत्काल सुनवाई के अनुरोध वाली याचिका दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सिन्हा 31 जनवरी को सेवानिवृत्त होने के बाद भी शीर्ष पुलिस का पद संभाल रहे हैं। शीर्ष अदालत ने 14 जुलाई, 2021 को राज्य सरकार, उसके शीर्ष अधिकारियों और यूपीएससी के खिलाफ उसके फैसले के कथित उल्लंघन के लिए अवमानना याचिका पर नोटिस जारी किये थे। बाद में इसमें सिन्हा को अवमानना याचिका का पक्षकार भी बना दिया। अवमानना याचिकाकर्ता राजेश कुमार ने उच्चतम न्यायालय के फैसले के लगातार उल्लंघन का आरोप लगाते हुए मामले की तत्काल सुनवाई का अनुरोध करते हुए कहा कि इसे पिछले साल तीन सितंबर से सूचीबद्ध नहीं किया गया है।

CoWIN पर पंजीकरण के लिए आधार कार्ड जरूरी नहीं : सुप्रीम कोर्ट
Published / 2022-02-07 18:05:50
CoWIN पर पंजीकरण के लिए आधार कार्ड जरूरी नहीं : सुप्रीम कोर्ट

एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि CoWIN पोर्टल पर कोविड-19 रोधी टीकाकरण के वास्ते पंजीकरण करने के लिए आधार कार्ड अनिवार्य नहीं है। न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की एक पीठ को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बताया कि टीकाकरण के लिए पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, मतदान कार्ड, राशन कार्ड सहित नौ पहचान दस्तावेजों में से एक का ही होना अनिवार्य है। शीर्ष अदालत ने इस कथन पर गौर किया और सिद्धार्थशंकर शर्मा की याचिका का निपटारा किया। याचिका में दावा किया गया था कि "कोविन" मंच पर कोविड-19 रोधी टीकाकरण के लिए पंजीकृत कराने के लिए आधार कार्ड पर अनिवार्य रूप से जोर दिया जा रहा है। शीर्ष अदालत ने इस याचिका के संबंध में एक अक्टूबर 2021 को केन्द्र सरकार को नोटिस जारी किया था। पीठ ने कहा कि एक अक्टूबर, 2021 के इस अदालत के आदेश के अनुसार, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक हलफनामा दाखिल किया है, जिसमें कहा गया है कि ‘कोविन’ मंच पर पंजीकरण के लिए आधार कार्ड अनिवार्य नहीं है और नौ पहचान दस्तावेजों में से किसी एक को भी इसके लिए इस्तेमाल किया जा सकता है...। हलफनामे में यह भी कहा गया कि अन्य श्रेणी के लोगों के लिए प्रावधान किया गया है, जिनके पास पहचान पत्र नहीं हो सकते हैं जैसे जेल के कैदी, मानसिक स्वास्थ्य केन्द्रों के लोग आदि। अदालत ने कहा कि केन्द्र के अधिवक्ता ने बताया है कि बिना पहचान पत्र वाले लगभग 87 लाख लोगों को टीके लगाए गए हैं। याचिकाकर्ता की शिकायत है कि उसे आधार कार्ड नहीं होने के कारण टीकाकरण से वंचित कर दिया गया था, इस समस्या का भी हलफनामे में निपटारा किया गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने महाराष्ट्र के प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) को संबंधित निजी टीकाकरण केन्द्र के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए एक पत्र भेजा गया है, जिसने वैध पासपोर्ट आईडी होने के बावजूद याचिकाकर्ता को टीका लगाने से इनकार कर दिया था। याचिकाकर्ता की शिकायत का विधिवत निपटारा किया जाता है। सभी संबंधित अधिकारी सरकार की नीति के अनुसार कार्य करें।

भोक्ता समुदाय को अनुसूचित जातियों की सूची से हटाने का प्रावधान अर्जुन मुंडा ने राज्यसभा में पेश किया
Published / 2022-02-07 14:02:09
भोक्ता समुदाय को अनुसूचित जातियों की सूची से हटाने का प्रावधान अर्जुन मुंडा ने राज्यसभा में पेश किया

एबीएन सेंट्रल डेस्क। राज्यसभा में सरकार ने सोमवार को एक संशोधन विधेयक पेश किया जिसमें झारखंड में भोगता समुदाय को अनुसूचित जातियों की सूची से हटाने और कुछ समुदायों को अनुसूचित जनजातियों की सूची में शामिल करने का प्रस्ताव किया गया है। केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने सदन में संविधान (अनुसूचित जातियां और अनुसूचित जनजातियां) आदेश (संशोधन) विधेयक, 2022 पेश किया। इस विधेयक में झारखंड राज्य में अनुसूचित जातियों की सूची में से भोगता समुदाय को हटाने के लिए संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश, 1950 तथा अनुसूचित जनजातियों की सूचियों में कुछ समुदायों को शामिल करने के लिए संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश 1950 में और संशोधन का प्रस्ताव किया गया है।

अब हर जमीन का होगा आधार नंबर
Published / 2022-02-07 13:39:55
अब हर जमीन का होगा आधार नंबर

एबीएन डेस्क। जिस तरह भारत में नागरिकों के लिए एक यूनिक नंबर यानी आधार कार्ड की व्यवस्था है। वैसे ही सरकार अब जमीन का भी यूनिक रजिस्टर्ड नंबर जारी करने की तैयारी में है। बजट 2022 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा कि लैंड का डिजिटल तरीके से रिकॉर्ड रखा जाएगा। इसके लिए जमीन का 14 नंबर का यूनिक कोड जारी होगा। इसे जमीन का आधार नंबर कह सकते हैं। आइपी बेस्ड टेक्नोलॉजी का होगा यूज : जानकारी के अनुसार, लैंड का डिजिटल तरीके से रिकॉर्ड रखने के लिए आइपी बेस्ड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जायेगा। जमीनों के कागज की मदद से उनके रिकॉर्ड को डिजिटली रिकॉर्ड रखा जाएगा। केंद्र सरकार का लक्ष्य 2023 तक देशभर से लैंड रिकॉर्ड को डिजिटल करने का है। मार्च 2023 तक पूरे देश में जमीन का रिकॉर्ड डिजिटल करने का लक्ष्य रखा गया है। 14 अंकों का यूनिक नंबर होगा जारी : डिजिटल लैंड रिकार्ड करने से कई तरह से फायदे मिलेंगे। इसे 3सी फामूर्ले के तहत बांटा जाएगा, जो सभी फायदा देगा। इनमें सेंट्रल आॅफ रिकॉर्ड, कलेक्शन आॅफ रिकॉर्ड, कन्वीनियंस आॅफ रिकॉर्ड से आम जनता को काफी फायदा होगा। साथ ही आपकी जमीन की 14 डिजिट का एक आधार नंबर यानी यूनिक नंबर जारी होगा। एक क्लिक में पता लग जाएगी जमीन की पूरी डिटेल : प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी कई योजनाओं में भी इस यूएलपीन का प्रयोग हो सकेगा। इसके अलावा यूएलपीन नंबर के जरिए देश में कहीं भी जमीन खरीदने और बेचने में दिक्कत नहीं होगी। खरीदने और बेचने वाले की पूरी डिटेल सामने होंगे। अगर उस जमीन का आगे चलकर बंटवारा भी होता है तो उस जमीन का आधार नंबर अलग-अलग हो जाएगा। ड्रोन के जरिए हो गई जमीन की मापी : गौरलतब है कि वन नेशन, वन रजिस्ट्रेशन प्रोग्राम के जरिए सरकार ड्रोन की मदद से जमीन नापेगी। ड्रोन से जमीन पैमाइस से किसी तरह की गलती या गड़बड़ी की आशंका नहीं होगी। इसके बाद इस पैमाइश को सरकारी डिजिटल पोर्टल पर उपलब्ध करा दिया जाएगा। मौजूदा समय में देश में 140 मिलियन हेक्टेयर जमीन पर खेती हो रही है। 125 मिलियन हेक्टेयर जमीन को ठीक किया जा रहा है।

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