टीम एबीएन, रांची। चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने झारखंड सरकार और इस मामले से जुड़े सभी स्टेकहॉल्डरों को जांच में सीबीआई को सहयोग करने का निर्देश दिया है। राष्ट्रीय खेल के आयोजन के दौरान मेगा स्पोर्ट्स कांपलेक्स और खेल सामग्री की खरीद में 28.34 करोड़ का घोटाला किए जाने की शिकायत को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में कई जनहित याचिकाएं दायर की गयी थीं। इस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह निर्देश दिया। मामले में एसीबी ने झारखंड ओलंपिक संघ के अध्यक्ष आरके आनंद, पूर्व मंत्री बंधु तिर्की, तत्कालीन खेल निदेशक पीसी मिश्र समेत झारखंड ओलंपिक संघ के कई सदस्यों को आरोपी बनाते हुए प्राथमिकी दर्ज की है। अदालत ने राज्य सरकार को सीबीआई को सभी संसाधन और मामले से जुड़ी सभी फाइल उपलब्ध कराने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य सरकार की ओर से कमी की जाती है तथा किसी पक्ष द्वारा सहयोग नहीं किया जाए या बाधा पहुंचायी जाए, तो सीबीआई इसकी जानकारी हाईकोर्ट को दे। अदालत इस पर आदेश पास करेगी। अदालत ने सीबीआई को इस बात की भी जांच करने का निर्देश दिया है कि एसीबी के किन अधिकारियों के चलते जांच में देरी हुई है। 12 साल में भी जांच पूरी नहीं कर सकी एसीबी : एसीबी इस मामले की जांच 12 साल में भी पूरा नहीं कर सकी। सुनवाई के दौरान अदालत को प्रार्थियों की ओर खेल उपकरण खरीदारी और मेगा स्पोर्ट्स कांप्लेक्स बनाने में हुए घोटाले का मुद्दा उठाया गया। अदालत को बताया कि मामले में एसीबी भेदभाव कर रहा है। इस मामले में कई वरीय पुलिस अधिकारी भी शामिल है, लेकिन उनके खिलाफ अभी तक कोई जांच नहीं की गई है। इनके खिलाफ पुलिस जांच कर भी नहीं सकती है, इसलिए इस मामले को सीबीआई को सौंप जाना चाहिए। घोटाले में दूसरे राज्य के लोग भी शामिल हैं। इस दौरान महाधिवक्ता की ओर से कहा गया कि मामले में पांच चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। अन्य आरोपियों को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया गया है। जल्द ही इस मामले की जांच पूरी कर ली जाएगी। एसीबी ने इन्हें बनाया है मुख्य आरोपी : झारखंड ओलंपिक संघ के अध्यक्ष और राष्ट्रीय खेल आयोजन समिति के अध्यक्ष आरके आनंद, कोषाध्यक्ष मधुकांत पाठक, निदेशक पीसी मिश्रा, महासचिव एसएम हासमी एचएल दास और सुविमल मुखोपाध्याय। खेल घोटाले में एसीबी ने आरके आनंद, बंधु तिर्की, पीसी मिश्रा, एसएम हाशमी पर लगे आरोप एसीबी जांच में सही पाए गए और सरकार की सहमति पर इनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया जा चुका है। फिलहाल इस मामले की सुनवाई एसीबी कोर्ट में चल रही है। कुछ दिन पहले ही झारखंड हाईकोर्ट ने एफआईआर रद्द करने के आरके आनंद की अर्जी को खारिज भी कर दिया था।
टीम एबीएन, रांची। राजधानी में रामनवमी जुलूस को लेकर ट्रैफिक रूट प्लान जारी कर दिया गया है। 9, 10 और 11 अप्रैल के लिए रांची का रूट डायवर्ट किया गया है। शनिवार को दोपहर 2 बजे से ही शहर में बड़े वाहनों की एंट्री बंद हो जाएगी, जबकि रांची के अपर बाजार इलाके में किसी भी तरह के वाहनों की एंट्री बंद रहेगी। रांची में रामनवमी जुलूस 10 अप्रैल को निकलेगा, इसे देखते हुए 10 अप्रैल को जुलूस के दौरान मेन रोड में सभी प्रकार के वाहनों की नो एंट्री होगी। यह व्यवस्था रामनवमी जुलूस की समाप्ति तक होगी। भारी वाहनों के लिए रिंग रोड को वैकल्पिक मार्ग बनाया गया है। वहीं, सामान्य वाहन शहर के हरमू बायपास रोड होते हुए अरगोड़ा के रास्ते आपात के लिए रूट निर्धारित की गई है। इसी रूट से आपात की स्थिति वाले वाहन बैरिकेडिंग से बचने के लिए आवागमन कर सकेंगे। इसी तरह बहु बाजार, कांटाटोली वाली रूट और बरियातू रोड का इस्तेमाल किया जा सकेगा। रांची ट्रैफिक पुलिस की ओर से रूट चार्ट भी जारी कर दी गई है। 9 अप्रैल की दोपहर 2 बजे से 10 अप्रैल की सुबह 6 बजे तक शहर में भारी वाहनों की नो एंट्री होगी। 9 अप्रैल की दोपहर 2 बजे से लेकर 10 अप्रैल की सुबह 4 बजे तक नागाबाबा खटाल, जाकिर हुसैन पार्क, किशोरी यादव चौक, शहीद चौक, सुभाष चौक, ग्वाला टोली, श्रद्धानंद रोड, गांधी चौक, रातू रोड गोलचक्कर से अपर बाजार महावीर चौक की ओर जाने वाले सभी प्रकार के रिक्शा छोटे बड़े दोपहिया या चार पहिया वाहनों का प्रवेश पूरी तरह बंद रहेगा। 10 अप्रैल की सुबह 8 बजे से 11 अप्रैल सुबह 4 बजे तक भारी वाहनों की नो एंट्री होगी। 10 अप्रैल दिन के 11 बजे से लेकर 11 अप्रैल कि सुबह 4 बजे तक अपर बाजार, महावीर चौक की ओर से आनेवाले सभी प्रकार के रिक्शा, छोटे-बड़े दोपहिया व चार पहिया वाहन का प्रवेश नागाबाबा खटाल, जाकिर हुसैन पार्क, किशोरी यादव चौक, शहीद चौक, सुभाष चौक, ग्वाला टोली, श्रद्धानंद रोड, गांधी चौक, रातू रोड गोलचक्कर की ओर से प्रवेश वर्जित रहेगा। बदले गए कई रूट : • पिस्का मोड़ होकर हजारीबाग रोड जाने वाले सभी बड़े वाहन तिलता चौक से रिंग रोड लॉ यूनिवर्सिटी होकर हजारीबाग रोड की ओर जाएगी। इसी तरह हजारीबाग रोड से लातेहार, पलामू, गढ़वा, इटकी रोड, सिमडेगा गुमला, लोहरदगा रोड, पिस्कामोड़ जाने वाले वाहन रिंग रोड लॉ यूनिवर्सिटी तिलता चौक की ओर जा सकेंगे। • खूंटी की ओर से आने वाले सभी बड़े वाहन रिंग रोड होते हुए रामपुर, नामकुम, दुर्गा सोरेन चौक, खेलगांव, बूटी मोड़ होते हुए हजारीबाग की ओर जा सकेंगे। उसी मार्ग से हजारीबाग रोड से खूंटी की ओर जाएंगे। • टाटा रोड से हजारीबाग रोड जाने वाले सभी बड़े वाहन नामकुम, दुर्गा सोरेन चौक, टाटीसिल्वे, खेलगांव, बूटी मोड़ होकर हजारीबाग रोड की ओर जा सकेंगे। इसी प्रकार हजारीबाग रोड से जमशेदपुर जाने वाले सभी बड़े वाहन खेलगांव, टाटी सिल्वे, दुर्गा सोरेन चौक, नामकुम होकर जा सकेंगे। • गुमला रोड, लोहरदगा रोड, खूंटी रोड से जमशेदपुर जाने वाले वाहन एवं जमशेदपुर रोड से गुमला रोड, लोहरदगा रोड, खूंटी रोड जाने वाले वाहन रिंग रोड सीठियो होकर आवागमन कर सकेंगे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। ऑस्कर 2022 में विल स्मिथ की थप्पड़ की घटना के कुछ दिनों बाद, एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर्स आर्ट्स एंड साइंसेज के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने शुक्रवार (08 अप्रैल) को द परस्यूट ऑफ हैप्पीनेस स्टार विल स्मिथ को 10 सालों के लिए बैन कर दिया है। एकेडमी के अध्यक्ष डेविड रुबिन ने कहा कि इस साल के ऑस्कर समारोह के दौरान मंच पर क्रिस रॉक को थप्पड़ मारने के कारण विल को अगले 10 सालों तक एकेडमी के किसी भी कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस निर्णय को बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की सहमति से लिया गया है। डेविड ने कहा कि इस घटना के बाद विल को हॉलीवुड के डॉल्बी थिएटर में बैठने की अनुमति देने और उन्हें पुरस्कार देने के बाद एकेडमी आलोचना के घेरे में आ गई थी। ऑस्कर सेरेमनी के दौरान घटी इस घटना के बाद स्मिथ लगातार सोशल मीडिया पर आलोचना का शिकार बन रहे थे। हालांकि, बाद में अपने भाषण में विल रो पड़े थे और मंच पर क्रिस को थप्पड़ मारने के लिए सभी से माफी मांगी थी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। डिजिटल फ्रॉड के बढ़ते मामलों के बीच आरबीआई ने इसे रोकने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब लोगों को बिना डेबिट कार्ड डाले एटीएम से पैसा निकालने की सुविधा मिलेगी। ये सुविधा सभी बैंकों में दी जाएगी। रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने इस बात की पुष्टि की है। अभी तक केवल कुछ ही बैंकों में बिना कार्ड के रुपए निकालने की सुविधा थी। ये सुविधा वढक के माध्यम से पूरी होगी, जिसमें कार्ड की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इसका सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि ठग कार्ड का क्लोन नहीं बना पाएंगे और इस तरह से होने वाले फ्रॉड के मामले खत्म हो जाएंगे। इस बारे में फइक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने भी बात की और कहा कि इससे ट्रांजेक्शन्स काफी सेफ हो जाएंगी। ये बात भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक में फइक गवर्नर शक्तिकांत दास ने कही। अभी सभी एटीएम पर कार्डलेस निकलेगा कैश : आरबीआई गवर्नर ने कहा, वर्तमान में एटीएम के जरिए कार्डलेस नकद निकासी की सुविधा केवल कुछ बैंकों तक ही सीमित है। अब यूपीआई का उपयोग करते हुए सभी बैंकों और एटीएम नेटवर्क पर कार्डलेस नकद निकासी की सुविधा उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा, लेनदेन में आसानी के अलावा ये भी फायदा होगा कि ऐसे लेनदेन के लिए फिजिकल कार्ड की आवश्यकता नहीं होगी और कार्ड स्किमिंग और कार्ड क्लोनिंग आदि धोखाधड़ी को रोकने में मदद मिलेगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सन 1992 यानी लगभग 25 साल पहले सोफिया गर्ल्स स्कूल अजमेर की लगभग 250 से ज्यादा हिन्दू लडकियों का रेप जिन्हें लव जिहाद/प्रेमजाल में फंसा कर, न केवल सामूहिक बलात्कार किया बल्कि हर लड़की का रेप कर उसकी फ्रेंड/भाभी/बहन आदि को लाने को कहा, एक पूरा रेप चेन सिस्टम बनाया जिसमें पीड़ितों की न्यूड तस्वीरें लेकर उनका व्यावसायिक रूप से प्रयोग भी किया गया। फारूक चिश्ती, नफीस चिश्ती और अनवर चिश्ती, इस बलात्कार कांड के मुख्य आरोपी थे जो कांग्रेस के कद्दावर नेता भी थे। ये वही लोग थे, जिन पर ख्वाजा चिश्ती दरगाह की देखरेख की जिम्मेदारी थी। ये वही लोग थे, जो खुद को चिश्ती का वंशज मानते हैं। उन पर हाथ डालने से पहले प्रशासन को भी सोचना पड़ता। अंदरखाने में बाबुओं को ये बातें पता होने के बावजूद इस पर पर्दा पड़ा रहा। फारूक चिश्ती ने सोफिया गर्ल्स स्कूल की 1 हिन्दू लड़की को प्रेमजाल में फंसा कर एक दिन फार्म हाउस पर ले जा कर सामूहिक बलात्कार करके, उसकी न्यूड तस्वीरें लीं और तस्वीरों से ब्लैकमेल कर उस लड़की की सहेलियों को भी लाने को कहा, एक के बाद एक लड़की के साथ पहले वाली लड़की की तरह फार्म हाउस पर ले जाना बलात्कार करना न्यूड तस्वीरें लेना और ब्लैकमेल कर उसकी भी बहन/सहेलियों को फार्म हाउस पर लाने को कहना और उन लड़कियों के साथ भी यही घृणित कृत्य करना। इस चेन सिस्टम में लगभग 250 से ज्यादा लडकियों के साथ भी वही शर्मनाक कृत्य किया गया। उस समय डिजिटल कैमरे नहीं रील होते थे, जिसे स्टूडियो में निकलवाना पड़ता था, वो जगह भी मुसलमानों कि थी, इन्होंने भी उनका बलात्कार किया और बाद में इनके मुस्लिम पड़ोसियों ने भी रेप किया। ये भी कहा जाता है कि स्कूल की इन लड़कियों का व्यावसायिक प्रयोग होने लगा था, किसी को कोई काम करवाना होता तो वो इन बच्चियों को उन्हें सौंप देता, जिससे रेप करने में नेता, सरकारी अधिकारी भी शामिल हो गए थे। आगे चलकर ब्लैकमैलिंग में और भी लोग जुड़ते गये। आखिरी में कुल 18 ब्लैकमेलर्स हो गये। बलात्कार करने वाले इनसे तीन गुने। ये केवल सरकारी आंकड़े हैं हकीकत में इससे कई गुना ज्यादा थे। इन लोगों में लैब के मालिक के साथ-साथ नेगटिव से फोटोज डेवेलप करने वाला टेकनिशियन भी था। यह ब्लैकमेलर्स स्वयं तो बलात्कार करते ही थे, अपने नजदीकी अन्य लोगों को भी ओब्लाइज करते थे। इसे भारत का अब तक का सबसे बडा सेक्स स्कैंडल माना गया। लेकिन जो भी लड़ने के लिए आगे आता, उसे धमका कर बैठा दिया जाता, उनकी आवाज उठाने वाली स्वयंसेवी संस्था को भी भागना पड़ा। अधिकारियों ने कम्युनल टेंशन न हो जाये, इसका हवाला दे कर आरोपियों को बचाया। करीब 400 से ज्यादा स्थानीय पत्रकारों ने परिवार वालो को ही परेशान करना शुरू कर दिया, जिससे कि मामला फैले नहीं, कभी परिवार वालो को जान से मारने कि धमकी दी गई तो पूरे खानदान की रेप और लूट की। अजमेर शरीफ दरगाह के खादिम (केयरटेकर) चिश्ती परिवार का खौफ इतना था, जिन लड़कियों की फोटोज खींची गई थीं, उनमें से कईयों ने सुसाइड कर लिया। एक समय अंतराल में 6-7 लड़कियां ने आत्महत्या की। जिन पत्रकारों ने इसका खुलासा करने का प्रयास किया उनकी हत्या कर दी गई, पुलिस को मार दिया गया था। न सोसाइटी आगे आ रही थी, न उनके परिवार वाले। उस समय की मोमबत्ती गैंग भी लड़कियों की बजाय आरोपियों को सपोर्ट कर रही थी। डिप्रेस्ड होकर इन लड़कियों ने आत्म- हत्या जैसा कदम उठाया। एक ही स्कूल की लड़कियों का एक साथ सुसाइड करना खौफनाक सा था। सब लड़कियां नाबालिग और 10वी,12वी में पढने वाली मासूम बच्चियां थी। आश्चर्य की बात यह कि रेप की गई लड़कियों में आईएएस, आईपीएस की बेटियां भी थीं। ये सब किया गया अश्लील फोटो खींच कर। पहले एक लड़की, फिर दूसरी और ऐसे करके 250 से ऊपर लड़कियों के साथ हुई ये हरकत। ये लड़कियां किसी गरीब या मिडिल क्लास बेबस घरों से नहीं, बल्कि अजमेर के जाने-माने घरों से आने वाली बच्चियां थीं। वो दौर सोशल मीडिया का नहीं पेड/बिकाऊ मीडिया का था। फिर पच्चीस तीस साल पुरानी खबरें कौन याद रखता है? ये वो खबरें थी जिन्हें कांग्रेसी नेताओं ने वोट और तुष्टीकरण की राजनीति के लिए दबा दिया था। पुलिस के कुछ अधिकारियों और इक्का दुक्का महिला संगठनों की कोशिशों के बावजूद लड़कियों के परिवार डर से आगे नहीं आ रहे थे। इस गैंग में शामिल लोगों के कांग्रेसी नेताओं और खूंखार अपराधियों तथा चिश्तियों से कनेक्शन्स की वजह से लोगों ने मुंह नहीं खोला। बाद में फोटो और वीडियोज के जरिए तीस लड़कियों की शक्लें पहचानी गईं। इनसे जाकर बात की गई। केस फाइल करने को कहा गया लेकिन सोसाइटी में बदनामी के नाम से बहुत परिवारों ने मना कर दिया। बारह लड़कियां ही केस फाइल करने को तैयार हुई। बाद में धमकियां मिलने से इनमे से भी दस लड़कियां पीछे हट गई। बाकी बची दो लड़कियों ने ही केस आगे बढ़ाया। इन लड़कियों ने सोलह आदमियों को पहचाना। ग्यारह लोगों को पुलिस ने अरेस्ट किया। जिला कोर्ट ने आठ लोगों को उम्र कैद की सजा सुनाई। इसी बीच मुख्य आरोपियों में से फारूक चिश्ती का मानसिक संतुलन ठीक नहीं का सर्टिफिकेट पेश कर फांसी की सजा से बचा कर 10 साल की सजा का ही दंड मात्र दिया। अजमेर बलात्कार काण्ड के अपराधी चिश्तियों में से कोई भी अब जेल में नहीं है। बाकी आप जोड़ते रह सकते हैं, एक बलात्कार की सजा 10 साल तो लगभग 250 बलात्कार की सजा कितनी होनी चाहिए थी ? राजस्थान सरकार ने तब आरोपियों की सजा कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी तक लगा दी थी। कठुआ रेप केस को मंदिर में बलात्कार, बलात्कारी हिन्दू कहकर बदनाम किया गया था, खेद है कि आज कोई विकाऊ मीडिया वाला इसे दरगाह के खादिमों द्वारा बलात्कार और मुस्लिम बलात्कारी नहीं कहता। मैं पूछना चाहता हूं, क्या ख्वाजा की मजार पर मन्नते मांगने वाले हिन्दू ख्वाजा से ये सवाल पूछेंगे कि जब सैकड़ों लड़कियों की अस्मत उनके ही वंशजों द्वारा लूटी जा रही थी तब वे कहाँ थे ? किसकी मन्नत पूरी कर रहे थे ? ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर मन्नतें मांगने वालों को विचार करना चाहिए कि कहीं वे वहां जा कर पाप तो नहीं कर रहे ?
टीम एबीएन, रांची। भारतीय जनता पार्टी के विधायक समरी लाल की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। गलत तरीके से जाति प्रमाण पत्र बनाकर चुनाव लड़ने का मामला सामने आने के बाद अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र को रद्द करने का आदेश दिया गया है। राज्य में कल्याण सचिव की अध्यक्षता में गठित जाति छानबीन समिति ने जांच के बाद समरी लाल के 31 अक्टूबर 2009 को राज्य सरकार द्वारा निर्गत अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र को रद्द करने का आदेश दिया है। डीसी ने जाति से जुड़े इस रिपोर्ट को छानबीन समिति सह विशेष सचिव अनुसूचित जाति जनजाति अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग को भेज दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक 1950 से पहले की मतदान सूची में नाम या कोई सरकारी दस्तावेज भी नहीं है, जिससे साफ होता है कि समरी लाल मुख्य रूप से राजस्थान के निवासी हैं और आजीविका चलाने के लिए यहां आकर बस गए हैं। इसलिए वर्ष 2009 में जारी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर लिया गया लाभ मान्य नहीं है क्योंकि वे इस राज्य में अनुसूचित जाति का सदस्य होने के लिए जरूरी अहर्ता को पूरा नहीं कर रहे हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोरोना वैक्सीन का निर्माण करने वाली कंपनी भारत बायोटेक ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर झटका लगा है। हैदराबाद की इस कंपनी की ओर निर्मित की जा रही कोवैक्सीन की सप्लाई को लेकर डब्ल्यूएचओ ने यह निर्णय लिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोवैक्सीन की अंतर्राष्ट्रीय सप्लाई पर रोक लगा दी है। वहीं इससे पहले ही कोवैक्सीन उत्पादन में अस्थाई रूप से कमी लाने की बात कही गई थी। दवा कंपनी की ओर जारी बयान में इसके लिए कुछ अहम कारणों का हवाला दिया गया। डब्ल्यूएचओ की ओर से भारत बायोटेक की सप्लाई अस्थाई तौर पर रोक दी है। हैदराबाद स्थित वैक्सीन निर्माता भारत बायोटेक ने शुक्रवार को यह घोषणा कर दी थी। जिसमें कंपनी की ओर से यह कहा गया था कि वह अपने सभी विनिर्माण संयंत्रों में कोविड वैक्सीन कोवैक्सीन के उत्पादन में अस्थायी रूप से कमी लाएगी। कंपनी की ओर से इसका कारण मांग में कमी और खरीद एजेंसियों को आपूर्ति दायित्वों को पूरा करने प्रतिबद्धता की बात कही। हालांकि कंपनी ने उत्पादन में अस्थाई रूप से कटौती करन की घोषणा की। भारत बायोटेक की ओर से कहा गया कि इस दौरान कंपनी अपनी सुविधा, रखरखाव समेत अन्य गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करेगी। भारत बायोटेक की ओर कहा गया कि चूंकि कोविड-19 के सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल को पूरा करने के लिए पिछले एक साल के दौरान निरंतर वैक्सीन के उत्पादन का कार्य किया गया। अब वैक्सीन के निर्माण के संयंत्रों और सुविधाओं की मरम्मत करने की आवश्यकता है। गत 14 मार्च से 22 मार्च तक भारत बायोटेक के प्लांट का विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का ईयूएल निरीक्षण हुआ था। जिसमें दौरान भारत बायोटेक की गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन के अधिकारियों ने दवा कंपनी को सुझाव दिए थे। कंपनी की ओर से इसमे जल्द सुधार लाने की बात कही गई थी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में गूगल की परेशानियां आने वाले दिनों में बढ़ सकती हैं। कंपनी के खिलाफ भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग द्वारा की गई जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, उनके अनुसार ऐप डेवलपर्स के लिए बनाए गए बिलिंग सिस्टम के नियम न केवल अनुचित है, बल्कि ये भेदभावपूर्ण भी है। यही नहीं गूगल अनुचित तरीके से अपने पेमेंट ऐप गूगल पे को बढ़ावा दे रहा है। यह जांच आयोग के एडिशनल डायरेक्टर जनरल ने की है। गौरतलब है कि गूगल के नए नियमों के अनुसार, ऐप डेवलपर्स के लिए इन-ऐप्स की खरीदारी कंपनी के अपने बिलिंग सिस्टम से करना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे भारतीय भारतीय स्टार्ट-अप्स में काफी नाराजगी है। उनका आरोप है कि गूगल अपने प्रभुत्व का दुरुपयोग करते हुए गूगल पे के अन्य प्रतिस्पर्धी ऐप्स को गलत तरीके से दरकिनार कर रही है। ईटी पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, जांच के निष्कर्षों पर जल्द सुनवाई शुरू हो सकती है। गूगल को भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के सामने आरोपों और जांच निष्कर्षों पर जवाब देना होगा। वहीं, गूगल ने अपने नियमों को पूरी तरह सही और सभी के लिए फायदेमंद बताया है। सीसीआई 2020 और 2021 में गूगल के खिलाफ आई तीन शिकायतों की एक साथ जांच कर रही है। इनमें आरोप लगाया गया है कि गूगल प्ले स्टोर और एंड्रायड ऑपरेटिंग सिस्टम पर अपने एकाधिकार का प्रयोग कर गूगल पे को दूसरे ऐप्स पर प्राथमिकता दे रहा है। सूत्रों का कहना है कि जांच में पता चला है कि गूगल अपने कुछ ऐप्स के लिए गूगल बिलिंग पेमेंट सिस्टम का प्रयोग नहीं कर रही है। वहीं दूसरे डेवलपर्स को पेमेंट के लिए इसे उसने अनिवार्य बनाया है। इससे पता चलता है कि प्ले स्टोर की पेमेंट पॉलिसी भेदभावपूर्ण है। सूत्रों ने ईटी को बताया कि इस मामले में सीसीआई ने बहुत गहराई और पारदर्शिता से जांच की है। उसने सभी डेवलेपर्स से जानकारियां जुटाई है और सिस्टम का गहराई से अध्ययन किया है। इससे आयोग इस नतीजे पर पहुंचा है कि अगर ये नीतियां लागू की गई तो इससे डेवलपर्स को बहुत नुकसान होगा। आयोग ने गूगल के गूगल पे को बढावा देने के लिए सर्च मेनिपुलेशन किए जाने के आरोपों की भी जांच की है। सीसीआई ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को भी इस मामले को देखने का आदेश दिया है। इस पूरे मामले पर गूगल के प्रतिनिधि का कहना है कि कंपनी अभी डायरेक्टर जनरल की रिपोर्ट का अध्ययन कर रही है। यह रिपोर्ट सीसीआई का अंतिम निर्णय नहीं है। इसलिए अभी केवल रिपोर्ट के आधार पर ही निर्णय पर पहुंचना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि गूगल लगातार सीसीआई के संपर्क में रहेगा और यह बताएगा की उसकी नीतियों से भारतीय उपभोक्ता और डेवलपर्स को फायदा होगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अब एक क्लिक पर अपराधियों की कुंडली देखी जा सकेगी। इसके लिए सोमवार को केंद्र सरकार ने लोकसभा में दंड प्रक्रिया (पहचान) विधेयक-2022 पेश किया है. जानिए इस बिल की अहम बातें... एक क्लिक पर अपराधियों की कुंडली देखी जा सकेगी। इसके लिए सोमवार को केंद्र सरकार ने लोकसभा में दंड प्रक्रिया (पहचान) विधेयक-2022 पेश किया है। बिल कहता है कि किसी भी मामले में गिरफ्तार या दोषसिद्ध अपराधियों का रिकॉर्ड रखने में अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। यह बिल कई मायनों में खास है क्योंकि अब तक आरोपियों का रिकॉर्ड रखने के लिए पुलिस फिंगरप्रिंट और पैरों के निशान लेती थी लेकिन जल्द ही आंखों की पुतलियों के प्रिंट से लेकर उनकी लिखावट तक के नमूने तक लिए जाएंगे। अपराधियों की डिजिटल कुंडली तैयार होगी। 1. केंद्र सरकार ने इस नए बिल को 102 साल पुराने मौजूदा कानून की जगह पेश किया है। अब तक पुलिस केवल अपराधियों का रिकॉर्ड रखने के लिए फिंगरप्रिंट और पैरों के निशान लेती थी, लेकिन नए बिल के जरिए इन पर शिकंजा कसा जाएगा। नए बिल के तहत अब अपराधियों की आंखों का प्रिंट लिया जाएगा। इसके अलावा हथेली और पैरों की छाप, फोटो, बायोलॉजिकल सैम्पल और लिखावट के नमूने भी लिए जाएंगे। आसान भाषा में समझें तो डिजिटली इनकी पहचान पुलिस के पास होगी। 2. बिल से एक बात साफ है कि केंद्र सरकार अपराधियों से जुड़ी हर वो जानकारी डिटिजली स्टोर करना चाहती है जो उन्हें पकड़ने और पहचानने में मदद करेगी। पूरा डाटा डिजिटल रिकॉर्ड में शामिल होने पर एक क्लिक पर अपराधियों की हर जरूरी जानकारी सामने आ जाएगी। केंद्र सरकार का मानना है अपराधियों का ज्यादा ब्यौरा सामने होने पर सजा सुनाने के काम में तेजी आएगी। 3. बिल में बताई गईं बातों का रिकॉर्ड रखते समय अगर कोई अपराधी या दोषी इंकार करता है तो सजा और जुर्माना दोनों लगाया जा सकता है। बिल के मुताबिक, जांच से मना करने पर दोषी को तीन महीने की सजा या 500 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है या फिर दोनों ही हो सकता है। 4. बिल पेश करते हुए गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी ने कहा, बिल से जांच एजेंसियों को मदद मिलेगी। वहीं, लोकसभा में इस बिल का विरोध भी किया गया। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा, यह बिल अनुच्छेद 20 और 21 का उल्लंघन है। वहीं, आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन ने कहा, अगर मेरे खिलाफ कोई मामला सामने आता है तो मेरा DNA जांचा जाएगा, इसका क्या मतलब है? 5. इस बिल को लेकर कांग्रेस, टीएमसी, आरएसपी, बीएसपी जैसे राजनीतिक दलों ने विरोध किया। उनके विरोध के बाद वोटिंग कराने की नौबत आई। विपक्ष की मांग पर हुई वोटिंग में विरोधी 58 मतों के मुकाबले पक्ष में आए 120 मतों के आधार पर सदन में इस पेश करने की मंजूरी दी गई।
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