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बंगाल जाकर अभिषेक बनर्जी से इडी की पूछता पर सुप्रीम कोर्ट ने की अहम टिप्पणी
Published / 2022-05-12 14:24:21
बंगाल जाकर अभिषेक बनर्जी से इडी की पूछता पर सुप्रीम कोर्ट ने की अहम टिप्पणी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से कहा कि वे (एजेंसी के अधिकारी) कोलकाता जा सकते हैं और पश्चिम बंगाल में कथित कोयला घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले की जांच कर सकते हैं। इस मामले में ईडी ने तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी रुजिरा बनर्जी को समन जारी किया है। ईडी ने जिक्र किया कि अतीत में किस प्रकार सीबीआई अधिकारियों को कोलकाता में घेराव किया गया था और अभिषेक बनर्जी राजनीतिक रूप से "प्रभावशाली" व्यक्ति हैं। इस पर न्यायालय ने कहा कि वह कह सकता है कि कोलकाता पुलिस सभी सहयोग करेगी और एजेंसी 72 घंटे पहले मांग करेगी तो राज्य इसके लिए बाध्य होगा। न्यायमूर्ति यूयू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी रुजिरा बनर्जी की उस अपील पर सुनवाई कर रही थी जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट के एक आदेश को चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल में एक कथित कोयला घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में उन्हें जारी किए गए समन को रद्द करने के अनुरोध वाली उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि वे मामले में जांच को नहीं रोक रहे हैं और ईडी कोलकाता आकर मामले में जांच कर सकता है। पीठ ने ईडी का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एसवी राजू से कहा, मान लीजिए... आपको जो भी दस्तावेज, जो भी रिकॉर्ड चाहिए, हर पृष्ठ उपलब्ध कराया जाएगा और आप कोलकाता आ सकते हैं। पीठ में न्यायमूर्ति एसआर भट्ट और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया भी शामिल हैं। राजू ने कहा, आप जानते हैं... मुझे नहीं कहना चाहिए, ऐसे उदाहरण हैं जब सीबीआई अधिकारियों का भी घेराव किया गया था। सुनवाई के दौरान सिब्बल ने कहा कि ईडी का कोलकाता में क्षेत्रीय कार्यालय है। उन्होंने कहा, मैं (याचिकाकर्ता) जांच को रोक नहीं रहा हूं। मैं कह रहा हूं कि कृपया आएं और मेरी जांच करें। विषय जांच का नहीं है, स्थान का है। मैं कह रहा हूं कि कृपया आएं और मेरी जांच करें। मैं आपके सभी सवालों का जवाब दूंगा, आप कोलकाता आइए। वे कहते हैं नहीं, हम नहीं आएंगे, आप दिल्ली आइए। पीठ ने एएसजी से कहा कि वह पश्चिम बंगाल सरकार को अदालत की ओर से यह अवगत कराये कि ईडी के अनुरोध पर, पुलिस बल मुहैया कराया जाए। मामले में अगली सुनवाई 17 मई को होगी।

झारखंड : लंबी पूछताछ के बाद आइएएस अधिकारी पूजा सिंघल गिरफ्तार
Published / 2022-05-11 13:16:30
झारखंड : लंबी पूछताछ के बाद आइएएस अधिकारी पूजा सिंघल गिरफ्तार

टीम एबीएन, रांची। प्रवर्तन निदेशालय ने कअर पूजा सिंघल को लंबी पूछताछ करने के बाद गिरफ्तार कर लिया है। आय से अधिक संपत्ति के मामले में हुई गिरफ्तारी हुई है। मनरेगा घोटाला मामले में पूछताछ के लिए झारखंड की खान सचिव पूजा सिंघल से आज यानी बुधवार को भी ईडी कार्यालय पहुंच थी। ईडी ने उन्हें रांची छोड़कर बाहर नहीं जाने को कहा है। इधर, झारखंड सरकार भी पूजा सिंघल के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। मंगलवार को आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में झामुमो विधायक सुदिव्य कुमार सोनू ने इसके संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि ईडी ने पूजा को समन जारी किया है, लिहाजा झारखंड सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। जल्द ही इसपर निर्णय होगा।

13 साल पुराने मामले में अभियुक्त को सुनाई 10 साल कैद की सजा
Published / 2022-05-11 10:13:27
13 साल पुराने मामले में अभियुक्त को सुनाई 10 साल कैद की सजा

टीम एबीएन, पलामू। मेदिनीनगर के एक सत्र न्यायालय ने 13 साल पुराने हत्या के प्रयास के मामले में एक व्यक्ति को दोषी करार देते हुए मंगलवार को दस वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई और पचास हजार रुपये जुर्माना लगाया। अदालत में सुनाये अपने फैसले में कहा गया है कि यदि अर्थ दण्ड की राशि नहीं दी जाती है तो, सजा की अवधि एक वर्ष बढ़ जाएगी। अदालत ने कहा कि जुर्माने की राशि जमा होने पर उसकी आधी राशि यानी 25 हजार रुपये पीड़ित अलखदेव महतो को दिए जायेंगे। पलामू जिला एवं सत्र न्यायाधीश संतोष कुमार की अदालत ने आज यह फैसला सुनाया। इस मामले में अलखदेव महतो ने तेरह वर्ष पूर्व एक जून 2009 को छत्तरपुर थाने में गोपाल महतो समेत ग्यारह लोगों के विरुद्ध आपराधिक प्राथमिकी दर्ज कराई थी। यह प्राथमिकी भूमि विवाद से जुड़ी हुई थी जिसमे वादी अलखदेव महतो ने पुलिस एवं अदालत को दिये अपने बयान में कहा था कि 25 मई 2009 को गोपाल महतो और उसके साथियों ने जान से मारने की नीयत से उस पर धारदार हथियार से हमला कर दिया था। इस घटना में गंभीर रुप से घायल होने वाले अलखदेव महतो का इलाज बिहार के गया में मगध चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल में किया गया था। अन्य दस आरोपियों को संदेह के लाभ देते हुए अदालत ने रिहा करने के आदेश दिये।

मनी लॉन्ड्रिंग : खनन सचिव पूजा सिंघल से ईडी ने की 9 घंटे पूछताछ
Published / 2022-05-11 09:50:23
मनी लॉन्ड्रिंग : खनन सचिव पूजा सिंघल से ईडी ने की 9 घंटे पूछताछ

टीम एबीएन, रांची। झारखंड की खनन सचिव पूजा सिंघल से मंगलवार को करीब नौ घंटे तक पूछताछ की गई। खूंटी में मनरेगा राशि की कथित हेराफेरी से जुड़े धनशोधन मामले एवं अन्य आरोपों की जांच के सिलसिले में वह अपने पति के साथ यहां ईडी के सामने पेश हुईं थीं। यह जानकारी अधिकारियों ने दी। सिंघल को बुधवार को अगले दौर की पूछताछ के लिए फिर से पेश होने को कहा गया है। ईडी ने धनशोधन रोकथाम कानून (पीएमएलए) के तहत वर्ष 2000 बैच की भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी सिंघल का बयान दर्ज किया। अधिकारियों ने कहा कि सिंघल के व्यवसायी पति अभिषेक झा का बयान भी दर्ज किया गया। दंपति पूर्वाह्नन करीब 11 बजे एयरपोर्ट रोड स्थित हिनू इलाके में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कार्यालय पहुंचे और रात करीब आठ बजे वहां से निकले। ईडी ने नौकरशाह, उनके पति, उनसे जुड़ी संस्थाओं और अन्य के खिलाफ 6 मई को झारखंड और कुछ अन्य स्थानों पर छापेमारी के बाद पूछताछ की है। अधिकारियों ने कहा कि एजेंसी ने चार एसयूवी भी जब्त की हैं - जो धनशोधन रोधी कानून के तहत गिरफ्तार सीए सुमन कुमार या उससे जुड़े व्यक्तियों के नाम पर थीं। ईडी कार्यालय में दिन भर की पूछताछ के दौरान काफी व्यस्तता देखी गई। इस दौरान कुछ बक्सों के साथ कुछ कारें एजेंसी की इमारत में प्रवेश करती दिखी, जबकि बाहर कई मीडियाकर्मी खड़े थे। सिंघल एवं अन्य के खिलाफ यह मामला धनशोधन से जुड़ा है, जिसमें झारखंड सरकार के पूर्व जूनियर इंजीनियर राम विनोद सिन्हा को ईडी ने 17 जून 2020 को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया था। उससे पहले उसके खिलाफ राज्य सतर्कता ब्यूरो की प्राथमिकी का अध्ययन करने के बाद 2012 में एजेंसी द्वारा पीएमएलए के तहत मामला दर्ज किया गया था। सिन्हा पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की आपराधिक धाराओं के तहत धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार से संबंधित आपराधिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। उस पर 1 अप्रैल 2008 से 21 मार्च 2011 तक जूनियर इंजीनियर के रूप में काम करते हुए कथित तौर पर जनता के पैसे की धोखाधड़ी करके उसे अपने नाम के साथ-साथ अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर निवेश करने का आरोप है। सिन्हा ने ईडी को बताया कि उसने जिला प्रशासन को पांच प्रतिशत कमीशन (धोखाधड़ी में से) का भुगतान किया।

मनी लॉन्ड्रिंग मामला : 10 मई को ईडी के सामने पेश होंगी आईएएस पूजा सिंघल
Published / 2022-05-09 14:58:24
मनी लॉन्ड्रिंग मामला : 10 मई को ईडी के सामने पेश होंगी आईएएस पूजा सिंघल

टीम एबीएन, रांची। ईडी के छापे के बाद सुर्खियों में आईं झारखंड की खान सचिव पूजा सिंघल पर मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच एजेंसी का शिकंजा कसता जा रहा है। ईडी ने इस मामले में खान सचिव पूजा सिंघल को नोटिस जारी किया है। आईएएस पूजा सिंघल को मंगलवार दस मई को ईडी के सामने पेश होना है, जहां उनसे सवाल-जवाब किया जाएगा। इससे पहले सोमवार को ईडी की विशेष टीम पूजा सिंघल के सीए सुमन कुमार को सेफ हाउस से लेकर ईडी आॅफिस पहुंची। जहां उनसे पूछताछ की जा रही है। इधर, सीए सुमन कुमार के ईडी आॅफिस पहुंचने के बाद ईडी के निर्देश पर पूजा सिंघल के पति अभिषेक झा भी वहां पहुंच गए हैं। अभिषेक झा सफेद रंग की सफारी गाड़ी से ठीक 11 बजे ईडी आॅफिस पहुंचे। उनसे भी पूछताछ की जा रही है। सीए सुमन कुमार के परिजन भी ईडी दफ्तर पहुंच गए हैं। ईडी के अधिकारी उनसे भी पूछताछ कर रहे हैं। इससे पहले शुक्रवार को झारखंड की खान एवं उद्योग विभाग की सचिव पूजा सिंघल और उनके करीबियों के 25 ठिकानों पर ईडी ने एक साथ छापेमारी की थी। छापेमारी की प्रक्रिया पूरे 14 घंटे 35 मिनट तक चली। छापेमारी के दौरान पूजा सिंघल और उनके करीबियों द्वारा तकरीबन 150 करोड़ के निवेश संबधी दस्तावेज एजेंसी को मिले हैं। वहीं उनके सीए सुमन कुमार के आवास से 19 करोड़ करोड़ 31 लाख रुपये बरामद किए हैं। हालांकि ईडी के अधिकारियों ने मामले में अबतक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। वहीं ईडी ने सीए सुमन कुमार और उसके भाई पवन को हिरासत में ले लिया है। ईडी के अधिकारी कागजातों की पड़ताल कर रहे हैं। इसके लिए भारत सरकार के वित्त विभाग के अधिकारियों से भी संपर्क किया गया था। तभी से जांच एजेंसी मामले से जुड़े सभी लोगों से पूछताछ कर रही है। खास बात यह रही कि पहली बार ईडी के छापे के दौरान स्थानीय पुलिस की जगह सीआरपीएफ की मदद ली गई थी। वहीं यहां मिले नोट गिनने के लिए मशीन भी मंगाई गई थी। >> शुक्रवार को खान सचिव के सीए सुमन कुमार और उनके करीबियों के ठिकाने पर छापे >> शनिवार को आईएएस पूजा सिंघल के अस्पताल पल्स और आवास पर अधिकारियों कागजात खंगाले >> रविवार को खान सचिव पूजा सिंघल के पति अभिषेक झा और सीए सुमन कुमार को आमने-सामने बिठाकर देर रात तक पूछताछ >> रविवार को खान सचिव पूचा सिंघल के छापे के बाद मुख्यमंत्री को फंसाने की कोशिश का आरोप लगा जेएमएम का भाजपा कार्यालय के सामने प्रदर्शन >> रविवार को ही भाजपा कार्यकतार्ओं ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर भ्रष्टाचार के आरोपी आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल को बचाने का आरोप लगा झारखंड सरकार की शवयात्रा निकाली >> सोमवार को भी सीए सुमन कुमार और आईएएस पूजा सिंघल के पति अभिषेक झा से ईडी की पूछताछ। सुबह 10 बजकर 19 मिनट पर टीम सीए सुमन कुमार को सेफ हाउस से लेकर ईडी आॅफिस पहुंची। बाद में पूजा सिंघल के पति अभिषेक झा भी 11बजे ईडी आॅफिस पहुंचे। उनसे भी पूछताछ की जा रही है। >> सोमवार को ही ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आईएएस पूजा सिंघल को मंगलवार को ईडी आॅफिस बुलाया।

सीएम हेमंत सोरेन के खनन पट्टा मामले पर हाई कोर्ट में अगले सप्ताह हो सकती है सुनवाई
Published / 2022-05-07 04:08:04
सीएम हेमंत सोरेन के खनन पट्टा मामले पर हाई कोर्ट में अगले सप्ताह हो सकती है सुनवाई

टीम एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर मुख्यमंत्री रहते हुए खनन पट्टा लेने के आरोप में दायर जनहित याचिका पर झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई नहीं हो सकी। झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डॉ रवि रंजन और न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत नहीं बैठने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। पूर्व में हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अदालत में खनन पट्टा अपने नाम लेने के मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री और खनन विभाग के भी मंत्री हेमंत सोरेन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए साथ ही साथ खनन मंत्री होते हुए खनन पट्टा अपने नाम करने को लेकर याचिकाकर्ता शिव शंकर शर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उस याचिका पर झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डॉ रवि रंजन और न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत में सुनवाई हुई थी। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के उपरांत मुख्यमंत्री को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने को कहा था। अदालत ने इस मामले की विस्तृत बिंदुवार अद्यतन जानकारी अदालत में पेश करने को कहा था। अब देखना होगा कि उनकी तरफ से क्या कुछ जवाब आया है अदालत अब इस जवाब को देखने के उपरांत क्या कुछ आदेश देता है। बता दें कि कि कुछ दिनों पहले सीएम हेमंत सोरेन के नाम पत्थर खदान का पट्टा एलॉट होने का मामला सामने आया था। इस मामले में हाइकोर्ट में पीआइएल दाखिल हुआ था। कोर्ट ने इस मामले पर महाधिवक्ता से भी जवाब तलब करने का आदेश दिया है। मालूम हो कि झारखंड हाइकोर्ट में सीएम हेमंत सोरेन के किलाफ 11 फरवरी को जनहित याचिका दायर की गयी थी। प्रार्थी शिव शंकर शर्मा की ओर से अधिवक्ता राजीव कुमार ने पीआइएल दाखिल किया था। प्रार्थी की ओर से इस जनहित याचिका में कहा गया था कि हेमंत सोरेन खनन मंत्री, मुख्यमंत्री औऱ वन पर्यावरण विभाग के विभागीय मंत्री भी हैं। उन्होंने स्वंय पर्यावरण क्लीयरेंस के लिए आवेदन दिया था और खनन पट्टा हासिल किया है। ऐसा करना पद का दुरुपयोग है और जन प्रतिनिधि अधिनियम का उल्लंघन है। इसलिए इस पूरे मामले की सीबीआइ से जांच करायी जाये। साथ ही प्रार्थी ने हेमंत सोरेन की सदस्यता रद्द करने की मांग भी कोर्ट से की थी। प्रार्थी ने हाइकोर्ट से मांग की थी कि अदालत राज्यपाल को यह निर्देश दे कि वह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेने के खिलाफ प्राथमिकी के लिए अभियोजन स्वीकृति प्रदान करें।

पीएम पर टिप्पणी में राहुल गांधी को राहत नहीं, सुनवाई टली
Published / 2022-05-06 09:02:19
पीएम पर टिप्पणी में राहुल गांधी को राहत नहीं, सुनवाई टली

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जातिसूचक आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को झारखंड उच्च न्यायालय से बृहस्पतिवार को भी राहत नहीं मिल सकी। समयाभाव के कारण इस मामले में सुनवाई नहीं हो सकी। यह मामला बृहस्पतिवार को न्यायमूर्ति एसके द्विवेदी की अदालत में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था। लेकिन समय की कमी के चलते मामले में सुनवाई नहीं हो सकी। अब इस मामले में 11 जून को सुनवाई होगी। यद्यपि राहुल गांधी को इस मामले में पहले से मिली अंतरिम राहत फिलहाल बरकरार रहेगी। बता दें कि इस मामले में निचली अदालत की ओर से जारी समन के खिलाफ कांग्रेस नेता ने झारखंड उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की है जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दाखिल इस मामले को खारिज करने की अपील की है।

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका खारिज, नहीं रुकेगा पंचायत चुनाव
Published / 2022-05-04 13:28:15
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका खारिज, नहीं रुकेगा पंचायत चुनाव

टीम एबीएन, रांची। झारखंड पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण की मांग को लेकर दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद झारखंड में पंचायत चुनाव अब अपने निर्धारित समय पर ही होगा। झारखंड में चार चरणों में हो रहे त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में वोटिंग इसी महीने होना है। ऐसे में कोर्ट के इस आदेश से राज्य सरकार को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट में तीन जजों की बेंच ने पूरे मामले की सुनवाई की। झारखंड पंचायत चुनाव में ओबीसी को आरक्षण को लेकर सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी की ओर से उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर किया गया था। याचिका में कहा गया था कि झारखंड में चार चरणों में पंचायत चुनाव हो रहे हैं लेकिन ओबीसी को आरक्षण नहीं दिया गया है। पंचायत चुनाव में आरक्षण न देकर राज्य के ओबीसी के साथ हेमंत सोरेन सरकार अन्याय कर रही है। इस मामले में दायर याचिका पर 25 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी। तब तीन जजों की बेंच ने विस्तृत सुनवाई के लिए 4 मई की तारीख तय कर दी थी। इससे पहले जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस अभय एस ओका की अदालत ने इस मामले को सुना। तब अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका को तीन जजों के बेंच में स्थानांतरित कर दिया था। अदालत में क्या हुआ : झारखंड हाईकोर्ट के महाधिवक्ता राजीव रंजन ने जानकारी देते हुए बताया कि अदालत ने मामले में सभी पक्षों को सुनने के उपरांत पंचायत चुनाव मामले में दायर याचिका को खारिज कर दिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आदेश सुनाते हुए कहा कि झारखंड में चुनाव स्टार्ट हो गया। ऐसे में फिलहाल बिना आरक्षण के पंचायत चुनाव कराया जाएगा। इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को अगले पंचायत चुनाव से पहले ओबीसी आरक्षण को लेकर जरूरी प्रावधान पूरे कर लेने का निर्देश दिया। बता दें कि झारखंड विधानसभा में सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा था कि ट्रिपल टेस्ट कराकर ओबीसी को आरक्षण देने में परेशानी हो रही है। इसलिए फिलहाल बिना आरक्षण के पंचायत चुनाव कराया जा रहा है।

कोविड टीकाकरण के लिए किसी को मजबूर नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट
Published / 2022-05-02 13:57:59
कोविड टीकाकरण के लिए किसी को मजबूर नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट

एबीएन सेंट्रल डेस्क। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि किसी भी व्यक्ति को कोविड-19 रोधी टीकाकरण के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है और न्यायालय ने केंद्र से इस तरह के टीकाकरण के प्रतिकूल प्रभाव के आंकड़ों को सार्वजनिक करने के लिए कहा है। न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत शारीरिक स्वायत्तता और अखंडता की रक्षा की जाती है। शीर्ष अदालत ने कहा कि वर्तमान कोविड-19 वैक्सीन नीति को स्पष्ट रूप से मनमाना और अनुचित नहीं कहा जा सकता है। पीठ ने कहा, संख्या कम होने तक, हम सुझाव देते हैं कि संबंधित आदेशों का पालन किया जाए और टीकाकरण नहीं करवाने वाले व्यक्तियों के सार्वजनिक स्थानों में जाने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जाए। यदि पहले से ही कोई प्रतिबंध लागू हो तो उसे हटाया जाए। पीठ ने यह भी कहा कि टीका परीक्षण आंकड़ों को अलग करने के संबंध में, व्यक्तियों की गोपनीयता के अधीन, किए गए सभी परीक्षण और बाद में आयोजित किए जाने वाले सभी परीक्षणों के आंकड़े अविलंब जनता को उपलब्ध कराए जाने चाहिए। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को व्यक्तियों के निजी आंकड़ों से समझौता किए बिना सार्वजनिक रूप से सुलभ प्रणाली पर जनता और डॉक्टरों पर टीकों के प्रतिकूल प्रभावों के मामलों की रिपोर्ट प्रकाशित करने को भी कहा। अदालत ने जैकब पुलियेल द्वारा दायर एक याचिका पर फैसला सुनाया जिसमें कोविड-19 टीकों और टीकाकरण के बाद के मामलों के नैदानिक परीक्षणों पर आंकड़ों के प्रकटीकरण के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी।

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