टीम एबीएन, रांची। सीनियर आईएएस पूजा सिंघल से जुड़े मनी लाउंड्रिंग मामले में ईडी के जांच का दायरा दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है। इस कड़ी में आज साहिबगंज के जिला खनन पदाधिकारी विभूति कुमार भी ईडी दफ्तर तलब किए गये हैं। विभूति कुमार को ईडी ने पिछलो दिनों समन भेजकर ऑफिस आने को कहा था। लेकिन बेटी की शादी की वजह से उन्होंने समय ले लिया था। दरअसल, विभूति कुमार को पूजा सिंघल का बेहद करीबी बताया जाता है। वह खूंटी जिला में भी पदस्थापित रह चुके हैं, जहां कभी पूजा सिंघल डीसी हुआ करती थीं। इनके नाम की चर्चा विधानसभा में भी हो चुकी है। उनपर रसूखदारों के नाम खनन पट्टा आवंटित कराने का आरोप लगता रहा है। इससे पहले ईडी की टीम दुमका के डीएमओ कृष्णचंद्र किस्कू और पाकुड़ के डीएमओ प्रदीप कुमार साह से पूछताछ कर चुकी है। बताते चलें कि 6 मई को पूजा सिंघल से जुड़े मनरेगा वित्तीय गड़बड़ी मामले में छापेमारी की थी। इसमें पूजा सिंघल के सीए के घर से 17.49 करोड़ रुपये बरामद हुए थे। इसके बाद पूजा सिंघल के पति अभिषेक झा के स्वामित्व वाली सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल भी जांच के दायरे में आ गया। फिलहाल ईडी की टीम सभी कड़ी को जोड़ने में जुटी है। यही वजह है कि अबतक दो बार पूजा सिंघल को रिमांड पर लिया जा चुका है। माना जा रहा है कि साहिबगंज के डीएमओ से पूछताछ के दौरान कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड सरकार ने उच्चतम न्यायालय में एक जनहित याचिका का विरोध करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य अल्पसंख्यकों और वंचित समूहों की मदद करना है। याचिका में केंद्र और राज्यों को अवैध प्रवासियों की पहचान करने, उन्हें हिरासत में लेने और निर्वासित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। वकील एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता अश्विनी उपाध्याय की एक याचिका पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो)-कांग्रेस-राष्ट्रीय जनता दल (राजद) गठबंधन सरकार ने अपना जवाब दाखिल किया। उपाध्याय ने याचिका में केंद्र और राज्यों को सभी अवैध प्रवासियों तथा बांग्लादेशियों और रोहिंग्या मुसलमानों समेत सभी घुसपैठियों की पहचान करने, उन्हें हिरासत में लेने और निर्वासित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया है। झारखंड पुलिस की विशेष शाखा के महानिरीक्षक प्रशांत कुमार के माध्यम से दायर 15 पन्नों के हलफनामे में राज्य सरकार ने कहा है कि अवैध अप्रवासियों या विदेशी नागरिकों की आवाजाही रोकने के लिए विभिन्न राज्यों में हिरासत केंद्र, निर्वासन केंद्र और शिविर स्थापित करने के लिए पहले से ही एक तंत्र है। झारखंड सरकार ने हजारीबाग जिले में एक ह्यमॉडल डिटेंशन सेंटर भी स्थापित किया है। झारखंड ने अपने जवाब में जनहित याचिकाओं पर उच्चतम न्यायालय के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा, जनहित याचिका का उद्देश्य अल्पसंख्यकों या वंचित समूहों की मदद करने को लेकर मानवाधिकारों और समानता को आगे बढ़ाने के लिए कानून का उपयोग करना या व्यापक सार्वजनिक चिंता के मुद्दों को उठाना है। झारखंड सरकार ने कहा है, नागरिकता के मुद्दे को नागरिकता कानून और विदेशी कानून के प्रावधानों के अनुसार तय किया जाना है। इस कानून के लागू होने के बाद ही निर्वासन, स्थानांतरण, प्रत्यावर्तन या पुनर्वास हो सकता है। जनहित याचिका को खारिज करने का अनुरोध करते हुए राज्य ने कहा है कि याचिकाकर्ता द्वारा बताया गया खतरनाक परिदृश्य गलत अटकलों और बिना किसी तथ्य पर आधारित है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के 2014 के एक पत्र का उल्लेख करते हुए हलफनामे में कहा गया है, ह्यह्ययह बताया गया था कि केंद्र सरकार को विदेशी नागरिक कानून-1946 की धारा 3 (2) सी के तहत आदेश देने के लिए अधिकृत किया गया है कि विदेशी भारत या उसके किसी निर्धारित क्षेत्र में नहीं रह सकेंगे। इससे पूर्व, कर्नाटक सरकार ने शीर्ष अदालत से कहा था कि वह एक जनहित याचिका पर पारित किए जाने वाले आदेश का निष्ठापूर्वक पालन करेगी, जिसमें केंद्र और राज्यों को अवैध प्रवासियों की पहचान करने, हिरासत में लेने और निर्वासित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। जनहित याचिका में केंद्र और राज्यों को अवैध आव्रजन और घुसपैठ को संज्ञेय, गैर-जमानती अपराध बनाने के लिए संबंधित कानूनों में संशोधन करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है। याचिका में कहा गया है, विशेष रूप से म्यांमा और बांग्लादेश से आए अवैध आप्रवासियों ने न केवल सीमावर्ती जिलों की जनसांख्यिकीय संरचना को खतरे में डाल दिया है, बल्कि सुरक्षा और राष्ट्रीय एकजुटता को भी गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अब आप किसी भी बैंक एटीएम से बिना कार्ड के पैसा निकाल पाएंगे। रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया (आरबीआइ) ने बिना कार्ड के किसी भी एटीएम से पैसे निकालने को लेकर नया नियम जारी किया है। बता दें कि यह सुविधा देश के सभी बैंक और एटीएम मशीनों में होगी। क्या है आरबीआइ का प्लान? रिजर्व बैंक ने 19 मई, 2022 को एक सर्कुलर जारी कर सभी बैंकों से यह सुविधा जल्द शुरू करने को कहा है। इस सुविधा को युनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) के माध्यम के जरिए लिया जा सकता है। बता दें कि आरबीआई की कोशिश है कि आज दौर में जब आॅनलाइन फ्रॉड बढ़ रहे हैं तब डिजिटल ट्रांजैक्शन को कैसे सुरक्षित बनाया जाए। जानिये क्या है सिस्टम : बैंक के एटीएम से पैसा निकालने के लिए कार्ड की जरूरत नहीं होगी। यह सुविधा 24़7 पूरे देश में उपलब्ध रहेगी। यह एक सुरक्षित पैसा निकासी का माध्यम है। इस सिस्टम के जरिए मोबाइल पिन जनरेट करना होगा। कैश लेस कैश विड्रॉल सुविधा में वढक के जरिए ट्रांजैक्शन पूरा होगा। यह सुविधा सिर्फ खुद से पैसा निकालने पर रहेगी। अभी तक सभी बैंकों में यह सुविधा नहीं है। साथ ही ट्रांजैक्शन लिमिट भी रहेगी। कैसे काम करेगा ये सिस्टम : मोबाइल और इंटरनेट बैकिंग के साथ सेविंग अकाउंट होल्डर्स को यह सुविधा रहेगी। कुछ बैंकों ने इस सुविधा की अनुमति दी है। बैंक की तरफ से लगाए गए कार्डलेस एटीएम में जाकर मोबाइल पर रिसीव हुए कोड को बस लिखना होगा। इस तरह की लेने-देन की सीमा 5 हजार से 10 हजार रुपये है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। टेरर फंडिंग मामले में एनआइए की टीम ने शुक्रवार को चतरा के पिपरवार में बड़ी कार्रवाई की है। टीम ने एक साथ छह रसूखदार लोगों के यहां छापेमारी की। इस दौरान एनआइए ने बिलारी में पूर्व उप प्रमुख बबलु मुंडा, किचटो में जानकी महतो, बेंती में रोहण गंझू, बेंती पंचायत के पूर्व उप मुखिया नागेश्वर गंझू और जोबिया में महेंद्र गंझू के यहां चल-अचल संपत्ति के दस्तावेज खंगाले। बताया जाता है कि एनआइए ने पूछताछ के लिए तीन लोगों को हिरासत में भी लिया है। इनमें से एक व्यक्ति को बेंती गांव से गुरूवार रात को ही उठाया था। उनसे पूछताछ की जा रही है। छापेमारी के दौरान स्थानीय पुलिस को इससे अलग रखा गया था। वहीं, चतरा से भारी संख्या में जिला पुलिस बल को बुलाया गया था। इनमें काफी संख्या में महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थी। बाद में चतरा एसपी राकेश रंजन भी पिपरवार पहुंचे। टीम सुबह पांच बजे ही पिपरवार पहुंच गयी थी। बताया जाता है कि पिछले दिनों टीएसपीसी के जोनल कमांडर भिखन गंझू की गिरफ्तारी के बाद उसने पुलिस के समक्ष कई राज खोले थे। इसी को आधार बना कर एनआइए ने कार्रवाई की। छापेमारी के संबंध में पूछने पर टीम के सदस्यों ने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया। फिलहाल, एनआइए की इस कार्रवाई से कोयला व्यवसायियों में हड़कंप मचा हुआ है। एनआईए ने दो साल पहले 77 लोगों को टेरर फंडिंग मामले में आरोपी बनाया था और सभी के विरुद्ध मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की थी। बाद में यह जांच ठंढा पड़ गया और इसको लेकर तरह तरह के कयास लगाये जाने लगे। आज जिन लोगों के यहां छापेमारी हुई है वे सभी के नाम 77 लोगों में शामिल हैं। एनआईए ने आज पूरी तैयारी के साथ कार्रवाई की। चतरा में टेरर फंडिंग को लेकर पुलिस और ऐसे लोगों के बीच गठजोड़ की चर्चा सरेआम है। यही कारण माना जा रहा है कि आज की कार्रवाई से चतरा पुलिस को अलग रखा गया और छापेमारी के घंटों बाद तक पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। बाद में चतरा एसपी भी पिपरवार पहुंचे थे। रांची के कांके में भी हुई छापेमारी : बबलू मुंडा फिलहाल रांची के कांके में रहते हैं और वहां भी एनआईए की टीम ने छापेमारी की है। बताया जा रहा है कि छापेमारी में पुलिस को कई अहम कागजात हाथ लगे हैं, जिससे और लोगों के भी रडार पर आने की संभावना है। इस कार्रवाई से कुछ सीसीएल अधिकारियों की नींद उड़ी हुई है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके परिवार के सदस्यों, साथियों द्वारा चलायी जा रही शेल कंपनियों को खनन पट्टों की कथित मंजूरी मामले की अब 24 मई को सुनवाई होगी। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और मुकुल रोहतगी की मांग पर मंगलवार (24 मई ) को अगली सुनवाई की तिथि निर्धारित की गई है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके परिवार के सदस्यों, साथियों द्वारा चलायी जा रही शेल कंपनियों को खनन पट्टों की कथित मंजूरी मामले की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया था। मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और मुकुल रोहतगी की दलीलों पर गौर करते हुए इसे गंभीर मामला बताया था, जिसमें जांच एजेंसी नोटिस जारी करने से पहले झारखंड उच्च न्यायालय में सीलबंद लिफाफे में दस्तावेज दाखिल कर रही है। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और मुकुल रोहतगी की दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि था हम इस पर 20 मई 2022 को सुनवाई करेंगे। बृहस्पतिवार (19 मई 2022) को झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान हेमंत के वकील वकील कपिल सिब्बल ने जानकारी दी थी कि सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। जिसमें राज्य सरकार की ओर से कोर्ट के उन आदेशों को चुनौती दी गई है जो पिछली दो सुनवाई के दौरान 13 और 17 मई को पारित किए गए थे। इसलिए इस मामले की सुनवाई ना की जाए और न ही किसी प्रकार का कोई आर्डर पास किया जाए।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के चर्चित आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल और उनके चार्टर्ड अकाउंटेंट सुमन सिंह की रिमांड अवधि आज यानी 20 मई को समाप्त हो रही है। अब पूजा सिंघल और सुमन सिंह जेल जाएंगे या फिर उन्हें फिर से रिमांड पर लिया जाएगा यह ईडी की विशेष अदालत तय करेगी। मिली जानकारी के अनुसार आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल की रिमांड अवधि एक बार फिर से बढ़ सकती है। कानून के जानकार बताते हैं कि सीए सुमन कुमार ने अपने रिमांड की अधिकतम अवधि को पूरा कर लिया है इसलिए उनका जेल जाना लगभग तय माना जा रहा है। सुमन सिंह 9 मई से जबकि पूजा सिंघल 12 मई से ईडी के रिमांड पर है। मनरेगा घोटाले मामले में 7 मई को पूजा सिंघल के कई ठिकानों पर एक साथ ईडी की टीम ने छापेमारी की थी। सात मई को इस मामले में पहली गिरफ्तारी सीए सुमन सिंह की हुई, जिसके बाद सबूत मिलने पर आठ मई को समन देकर सबसे पहले अभिषेक झा को ईडी दफ़्तर पूछताछ के लिए बुलाया गया। सुमन और अभिषेक से पूछताछ के बाद 9 मई को पूजा सिंघल को पूछताछ के लिए बुलाया गया और उसी दिन उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद ईडी ने पूजा को अदालत में पेश कर पहले पांच दिन के रिमांड पर लिया। फिर पांच दिन की पूछताछ के बाद दुबारा ईडी ने पूजा सिंघल को चार दिनों के रिमांड पर लिया। पूजा सिंघल के रिमांड पर आने के बाद इस केस में लगातार बड़े बड़े खुलासे हो रहे हैं। कई लोगों के नाम भी सामने आ रहे हैं ईडी की टीम ने अब तक आधा दर्जन लोगों से इस मामले में पूछताछ की है। कभी झारखंड मुक्ति मोर्चा के कोषाध्यक्ष रहे रवि केजरीवाल से भी ईडी की टीम पूछताछ कर चुकी है रवि केजरीवाल ने भी शेल कंपनियों को लेकर बड़े खुलासे किए हैं। वहीं झारखंड के मुख्यमंत्री के बेहद करीबी माने जाने वाले पंकज मिश्रा का नाम भी ईडी के जांच में उछला है। ईडी के सूत्र बताते हैं कि पूछताछ में पूजा सिंघल सहित सभी डीएमओ ने यह स्वीकार किया है कि अवैध खनन में पंकज मिश्रा की बड़ी भूमिका है। वहीं पूरे मामले की जांच कर रही ईडी के सामने कोलकाता के कारोबारी अमित अग्रवाल व प्रेम प्रकाश का भी नाम सामने आया है। अमित अग्रवाल भी माइनिंग सिंडिकेट में अहम सदस्य थे। वहीं पूजा सिंघल व सुमन के बयान में इन नामो के बारे में जानकारी मिली है। ईडी पूरे मामले में उन कंपनियों की भूमिका की जांच कर रही है, जो रेलवे ट्रांसपोर्टिंग से जुड़ी हैं। पाकुड़ की कंपनी ओटन दास एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड, स्टोन इंडिया व एनएसएस एंड कंपनी के द्वारा ट्रासंपोर्टिंग की बात सामने आयी है। एक कंपनी में इलाके के एक बड़े जनप्रतिनिधि भी निदेशक थे। कंपनी भी मनी लाउंड्रिंग मे संलिप्त बतायी जा रही है। हालांकि इसकी विस्तृत जांच ईडी आगे करेगी। दो डीएमओ के बयान में पंकज मिश्रा की भूमिका की बात बतायी गई है। जांच में यह बात सामने आयी है कि साहिबगंज के डीएमओ विभूति कुमार ने भी भारी रकम पूजा सिंघल तक पहुंचायी थी। साथ ही पंकज मिश्रा समेत कई अन्य लोगों को उन्होंन खनन पट्टा भी दिया है। ईडी ने विभूति कुमार को पूछताछ के लिए नोटिस किया था, लेकिन 17 फरवरी को बेटी की शादी होने की वजह से वह हाजिर नहीं हो पाए थे। ईडी के अधिकारियों को उम्मीद है कि वह 20 या 21 मई को एजेंसी के समक्ष हाजिर होंगे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। उच्चतम न्यायालय झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके परिवार के सदस्यों तथा साथियों द्वारा चलायी जा रही कुछ छद्म कंपनियों को खनन पट्टों की कथित मंजूरी को लेकर सीबीआई तथा प्रवर्तन निदेशालय की जांच से जुड़ी याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई के लिए राजी हो गया। मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और मुकुल रोहतगी की दलीलों पर गौर किया कि यह एक गंभीर मामला है, जिसमें जांच एजेंसी नोटिस जारी करने से पहले झारखंड उच्च न्यायालय में सीलबंद लिफाफे में दस्तावेज दाखिल कर रही है। उन्होंने दलील दी कि जांच एजेंसी दूसरे पक्ष को भी यह दस्तावेज नहीं दे रही है। इस पर पीठ ने कहा, हम इसे कल सूचीबद्ध करेंगे। वरिष्ठ अधिवक्ताओं में से एक ने कहा, यह गंभीर मामला है। झारखंड उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दाखिल की गयी है जिसे अभी स्वीकार नहीं किया गया है। उच्च न्यायालय मुख्यमंत्री तथा उनके परिवार के सदस्यों और साथियों द्वारा चलाई जा रही कुछ छद्म कंपनियों को कथित तौर पर दिए गए खनन पट्टों की सीबीआई तथा ईडी से जांच कराने का अनुरोध वाली दो जनहित याचिकाओं पर बृहस्पतिवार को सुनवाई जारी रखेगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पूर्व भारतीय बल्लेबाज नवजोत सिंह सिद्धू को सुप्रीम कोर्ट ने एक साल की सजा सुनाई है। यह सजा उन्हें 1988 से जुड़े एक मामले में सुनाई गई है, जिसमें गुरुनाम सिंह नामक एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट इस केस की समीक्षा कर रहा था। जस्टिस एएम खनविलकर और संजय किशन कौल की दो न्यायाधीशों की पीठ ने गुरुवार को इस फै़सले की घोषणा की, जो 2018 से अपने स्वयं के आदेश की समीक्षा कर रहे थे, जहां अदालत ने सिद्धू की सजा को तीन साल के कारावास से घटाकर 1000 रूपए जुमार्ना कर दिया था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने राजीव गांधी हत्याकांड मामले में दोषी एजी पेरारिवलन को रिहा करने का बुधवार को आदेश दिया जो उम्रकैद की सजा के तहत 30 साल से अधिक समय से जेल में बंद है। न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए पेरारिवलन को रिहा करने का आदेश दिया। पीठ ने कहा कि राज्य मंत्रिमंडल ने प्रासंगिक विचार-विमर्श के आधार पर अपना फैसला किया था। अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए, दोषी को रिहा किया जाना उचित होगा। संविधान का अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को विशेषाधिकार देता है, जिसके तहत संबंधित मामले में कोई अन्य कानून लागू ना होने तक उसका फैसला सर्वोपरि माना जाता है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारे ए. जी. पेरारिवलन को न्यायालय ने यह देखते हुए नौ मार्च को जमानत दे दी थी कि सजा काटने और पैरोल के दौरान उसके आचरण को लेकर किसी तरह की शिकायत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट 47 वर्षीय पेरारिवलन की उस याचिका पर सुनाई कर रही थी, जिसमें उसने ‘मल्टी डिसिप्लिनरी मॉनिटरिंग एजेंसी’ (एमडीएमए) की जांच पूरी होने तक उम्रकैद की सजा निलंबित करने का अनुरोध किया था। तमिलनाडु के श्रीपेरुम्बदुर में 21 मई, 1991 को एक चुनावी रैली के दौरान एक महिला आत्मघाती हमलावर ने खुद को विस्फोट से उड़ा लिया था जिसमें राजीव गांधी मारे गए थे। महिला की पहचान धनु के तौर पर हुई थी। न्यायालय ने मई 1999 के अपने आदेश में चारों दोषियों पेरारिवलन, मुरुगन, संथन और नलिनी को मौत की सजा बरकरार रखी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 18 फरवरी 2014 को पेरारिवलन, संथन और मुरुगन की मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया था। न्यायालय ने केंद्र सरकार द्वारा उनकी दया याचिकाओं के निपटारे में 11 साल की देरी के आधार पर फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने का निर्णय किया था।
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