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पूरे झारखंड मंत्रिमंडल को पूछताछ के लिए बुला सकती है ईडी
Published / 2022-05-31 16:32:50
पूरे झारखंड मंत्रिमंडल को पूछताछ के लिए बुला सकती है ईडी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। सांसद निशिकांत दुबे के ट्वीट ने झारखंड की राजनीति में उबाल ला दिया है। मंगलवार को भाजपा सांसद निशिकांत दुबे दिल्ली से रांची पहुंचे। यहां मीडिया से बात के दौरान सांसद ने कहा कि दो-तीन दिन में झारखंड की राजनीति में तूफान आएगा। दुबे के इस बयान ने सियासी तपिश बढ़ाई ही थी कि उनका ट्वीट ने उबाल ला दिया। सांसद निशिकांद दुबे के ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर कहा कि ईडी पूरे मंत्रिमंडल को पूछताछ के लिए बुला सकती है। रांची में एयरपोर्ट परिसर के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड में बहुत जल्दी राजनीतिक धमाका होगा, अपने ट्विटर के माध्यम से प्रत्येक दिन चर्चा में रहने वाले निशिकांत दुबे ने एक बार फिर राज्य सरकार को आड़े हाथ लिया। सांसद ने कहा कि पूरा मंत्रिमंडल ही गलत तरीके से राज्य में काम कर रहा है। सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि माइनिंग की बात करें, बालू की बात करें या उत्पाद विभाग की बात करें सभी करप्शन में डूबे हुए हैं। इसका परिणाम राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भुगतना पड़ेगा। वहीं जेएमएम की ओर से महुआ माजी के राज्यसभा प्रत्याशी बनाए जाने और उनके नॉमिनेशन पर कहा कि हो सकता है कांग्रेस भी कोई बड़ा राजनीतिक धमाका कर सकती है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने मंगलवार को ट्वीट किया कि झारखंड में डायरेक्टर ईडी ने माइनिंग पॉलिसी, शराब पॉलिसी, सभी विभागों की ट्रांसफर और पोस्टिंग पॉलिसी, स्मार्ट सिटी पॉलिसी, उद्योग नीति इत्यादि को समझने के लिए पूरे मंत्रिमंडल के सदस्यों को ससम्मान बुलाने का निर्णय किया है। इधर, बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे के ट्वीट ने सियासी गलियारे में हलचल बढ़ा दी है। कांग्रेस ने दुबे के ट्वीट की तीखी आलोचना की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने निशिकांत दुबे पर ईडी और सीबीआई के प्रतिनिधि के रूप में काम करने का आरोप लगाया है।

निर्वाचन आयोग के नोटिस पर बोले बसंत सोरेन के अधिवक्ता- याचिका चुनाव समिति के समक्ष सुनवाई योग्य नहीं
Published / 2022-05-31 11:33:44
निर्वाचन आयोग के नोटिस पर बोले बसंत सोरेन के अधिवक्ता- याचिका चुनाव समिति के समक्ष सुनवाई योग्य नहीं

टीम एबीएन, रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के भाई बसंत सोरेन के अधिवक्ता ने सोमवार को दावा किया कि खनन कंपनी में सहस्वामित्व के आधार पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के विधायक की आयोग्यता की मांग को लेकर उनके खिलाफ दायर याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। अधिवक्ता ने इस मामले की सुनवाई को लेकर निर्वाचन आयोग के न्यायिक क्षेत्राधिकार संबंधी सवाल उठाए। आयोग ने हाल ही में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 9ए के तहत बसंत सोरेन को नोटिस दिया था, जो एक सरकारी अनुबंध के लिए एक विधायक की अयोग्यता से संबंधित है। इस तरह के मामलों की सुनवाई करते समय निर्वाचन आयोग एक अर्द्ध न्यायिक निकाय के रूप में कार्य करता है। दुमका से विधायक बसंत सोरेन को भेजे गए निर्वाचन आयोग के नोटिस का संबंध बोकारो जिले में स्थित एक खनन कंपनी में उनके कथित सहस्वामित्व से है। इस बाबत आरोप लगाये जा रहे थे कि यह जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 9ए का उल्लंघन है। निर्वाचन आयोग के समक्ष सुनवाई के बाद बसंत सोरेन का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता सोनल कुमार सिंह ने संवाददाताओं से कहा, हमने यह कहते हुए अधिकार क्षेत्र पर प्रारंभिक आपत्ति जताई कि याचिका (एक विधायक के रूप में उनकी अयोग्यता की मांग की गई) सुनवाई योग्य नहीं है। अधिवक्ता ने कहा कि आयोग ने अधिकार क्षेत्र पर सुनवाई के लिए समय दिया है, मामले की सुनवाई अगली तारीख पर होगी जिस पर अभी फैसला नहीं हुआ है।

पूजा सिंघल प्रकरण : प्रेम प्रकाश की जुबान खुली तो नपेंगे कई ब्यूरोक्रेट्स, 6 ठिकानों पर रेड
Published / 2022-05-26 09:06:52
पूजा सिंघल प्रकरण : प्रेम प्रकाश की जुबान खुली तो नपेंगे कई ब्यूरोक्रेट्स, 6 ठिकानों पर रेड

टीम एबीएन, रांची। झारखंड में सत्ता के गलियारे में ऊंची पहुंच रखने वाले प्रेम प्रकाश अब ईडी के रडार पर हैं। घर में हो रही छापेमारी की सूचना मिलने पर फरार होने की कोशिश करने वाले प्रेम प्रकाश को ईडी की टीम ने भागने का मौका नहीं दिया। बुधवार की शाम 7 बजे के करीब ईडी ने प्रेम प्रकाश से पूछताछ शुरू की जो रात के एक बजे तक चलती रही। वहीं आज भी ईडी की टीम लालपुर स्थित बिल्डर मनोज सिंह के घर पर रेड कर रही है। प्रेम प्रकाश से मामला जुड़ा है। प्रेम प्रकाश के ठिकानों से ईडी को करोड़ों रुपए के निवेश के दस्तावेज मिले हैं। दरअसल, वर्तमान समय में प्रेम प्रकाश झारखंड के सबसे बड़े पावर ब्रोकर माने जाते हैं। आईएएस हो या आईपीएस किसी भी अधिकारी का तबादला उनकी सहमति के बगैर नहीं होता था। बड़े-बड़े टेंडर को मैनेज करने के लिए भी झारखंड के कारोबारी प्रेम प्रकाश से संपर्क करते थे। जानकारी के अनुसार इसी की बदौलत प्रेम प्रकाश ने अकूत संपत्ति जमा की है। सीआरपीएफ की उपस्थिति में ईडी की टीम ने प्रेम प्रकाश से घंटों पूछताछ की। आज भी यह सिलसिला जारी रहेगा। प्रेम प्रकाश के ठिकानों पर ईडी की रेड से झारखंड के आईएएस, आईपीएस, बड़े बिल्डर, शराब माफिया और दूसरे अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। प्रेम प्रकाश की जुबान अगर खुलती है तब कई बड़े लोग फंसेंगे। प्रेम प्रकाश के अलग-अलग ठिकानों पर हर दिन बड़े अधिकारियों का आना जाना लगा रहता था। मिली जानकारी के अनुसार ईडी की टीम ने कई सीसीटीवी के डीवीआर भी जब्त किए हैं। पिछले एक महीने के दौरान प्रेम प्रकाश के कार्यालय और घर में क्या गतिविधियां थी इससे उसकी जानकारी मिल पाएगी। वहीं दूसरी तरफ प्रेम प्रकाश के मामले को लेकर ईडी के बाद इनकम टैक्स की टीम भी अलर्ट मोड में है, एक तरफ जहां आधी रात तक ईडी प्रेम प्रकाश के घर पर मिले कागजातों को खंगाल रही थी। वहीं दूसरी तरफ इनकम टैक्स की टीम रांची के लालपुर क्षेत्र में होटल लैंडमार्क समीप राज गर्ल्स हॉस्टल के पास बिल्डर मनोज सिंह पर दबिश दे रही थी। बताया जा रहा है कि बिल्डर मनोज सिंह प्रेम प्रकाश के करीबी हैं। पूरा मामला मनी लाउंड्रिंग में चल रहे ईडी की कार्रवाई से जुड़ा हुआ है। ईडी की टीम आयकर के अधिकारियों के साथ मिलकर इस मामले में तह तक जाने की कोशिश में जुटी हुई है। बिल्डर मनोज सिंह को गृह सचिव के बहनोई निशित केसरी का करीबी भी बताया जा रहा है। आज सुबह भी इनकम टैक्स की कार्रवाई जारी है।

अंतिम सांस तक जेल में रहेंगे अलगाववादी नेता यासीन मलिक
Published / 2022-05-25 14:51:26
अंतिम सांस तक जेल में रहेंगे अलगाववादी नेता यासीन मलिक

एबीएन सेंट्रल डेस्क। दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को आतंकवाद के वित्तपोषण मामले में कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक को उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने टेरर फंडिंग के दो अलग-अलग मामलों में उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके अलावा यासीन मलिक पर 10 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। स्पेशल जज प्रवीण सिंह ने गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत विभिन्न अपराधों के लिए अलग-अलग अवधि की सजा सुनायी। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। मलिक को दो अपराधों - आईपीसी की धारा 121 (भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना) और यूएपीए की धारा 17 (यूएपीए) (आतंकवादी गतिविधियों के लिए राशि जुटाना)- के लिए दोषी ठहराते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई गई। इससे पहले सजा सुनाने के के लिए कोर्ट रूम लाए गए यासीन मलिक ने कोर्ट से कहा, मैं कुछ नहीं कहूंगा, आपको जो सजा देनी है दे दीजिये। मैं भीख नहीं मांगूगा। आतंकवादी सरगना मलिक जनवरी 1990 में कश्मीर में स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना सहित भारतीय वायुसेना के चार अधिकारियों और जवानों की हत्या के मामले चर्चित हुआ था। उसके खिलाफ 2017 में आतंकवाद और विघटनकारी करतूतों में शामिल होने के आरोपों में मामला दायर किया गया था। मलिक ने 19 मई 2022 को एनआईए के मामलों की सुनवाई करने वाली पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष अदालत में अपने जुर्म कबूल किये थे। अदालत ने इस मामले में सजा सुनाने के लिए आज दोपहर बाद का समय निर्धारित किया था। अदालत परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी : मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गयी थी और परिसर सुरक्षा कर्मियों के शिविर जैसा लग रहा था। सुरक्षा में पुलिस के अलावा अर्द्धसैनिक बल के दस्ते भी तैनात किये गये थे। परिसर में मलिक को लाये जाने से पहले बम निस्तारण दस्ते और प्रशिक्षित कुत्तों से जांच करायी गयी थी। न्यायालय कक्ष में विशेष एनआईए न्यायाधीश प्रवीण सिंह के करीब साढ़े पांच से पहुंचने से पहले मलिक को वहां लाया गया था। बुधवार को अदालती कारर्वाई के दौरान एनआईए ने मलिक को मृत्यु दंड दिये जाने की दलील दी थी। मलिक के मामले में फैसला अपराह्न साढ़े तीन बजे सुनाया जाना था लेकिन इसमें घंटे भर से अधिक देरी हुई। मौत के बदले मौत की सजा मिले- स्क्वाड्रन लीडर खन्ना की पत्नी : इस बीच, जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर में यासीन के घर मैसुमा इलाके में पथराव की छिटपुट घटनाओं की रिपोर्ट आयी हैं। स्क्वाड्रन लीडर खन्ना की पत्नी निर्मल खन्ना ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह जेकेएलएफ के इस आतंकवादी को मौत की सजा चाहती हैं। उन्होंने कहा कि वह उनके पति की हत्या के बावजूद 32 साल तक जीवित बचा है। उन्होंने सजा सुनाये जाने से पहले जम्मू में संवाददाताओं से कहा था, मैं अपने मामले में चाहूंगी कि मौत के बदले मौत की सजा मिले। जहां तक आतंकवादियों को धन पहुंचाने का मामला है तो मलिक को उसमें अदालत जो उचित समझे, सजा दे। 28 साल पहले ही हिंसा का रास्ता छोड़ चुका है मलिक- वकील : अदालत में उपस्थित वकील के अनुसार जेकेएलएफ सरगना मलिक के अधिवक्ता ने कहा कि उसके मुवक्किल ने 28 साल पहले ही हिंसा का रास्ता छोड़ चुका है और तब से किसी हिसंक वारदात में शामिल नहीं रहा है। मलिक के खिलाफ इस मामले में जांच एजेंसी ने मलिक, अलगाववादी कश्मीरी कार्यकर्ता फारुक अहमद डार उर्फ बिट्टा कराटे, नईम खान, मोहम्मद अहमद खांडे, राजा महरुद्दीन कलवाल, बशीर अहमद भट्ट, जहूर अहमद शाह वटाली, शब्बीर अहमद शाह, अब्दुल रशीद शेख और नवल किशोर कपूर को आरोप पत्र में अभियुक्त बनाया था। इस मामले में इनके अलावा लश्करे तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद और हिजबुल मुजाहिदीन के सरगना सैयद सलाउद्दीन को भगोड़ा अभियुक्त घोषित किया गया था। यूएपीए के तहत हुए मामले दर्ज : इसी वर्ष मार्च में अदालत ने मलिक और अन्य के विरुद्ध गैर कानूनी गतिविधियां निवारक (यूएपीए) अधिनियम की धाराओं के तहत मुकदमा चलाये जाने का आदेश दिया था। मलिक और अन्य के खिलाफ यूएपीए की धारा 16 (आतंकवाद में संलिप्तता), धारा 17 (आतंकवाद के लिए धन जुटाना), धारा 18 (आतंकवाद की साजिश) और धारा 20(आतंकवादी गिरोह या संगठन से नाता) और भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी( आपराधिक षडयंत्र) और 124 ए राजद्रोह के अभियोग लगाये गये थे। मलिक ने आरोप पत्र को सुनाये जाने के बाद कहा कि वह अपने विरुद्ध लगाये गये अभियोगों का प्रतिवाद नहीं करेंगे। एनआईए अदालत के न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने मामले की सुनवाई के बाद यासीन मलिक की वित्तीय स्थिति के बारे में हलफनामा मांगा था और एनआईए से 25 मई रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था। अदालत ने कहा था कि इस मामले में 25 मई को सजा सुनायी जायेगी।

आठ जून तक के लिए न्यायिक हिरासत में पूजा सिंघल, भेजी गई होटवार जेल
Published / 2022-05-25 13:11:03
आठ जून तक के लिए न्यायिक हिरासत में पूजा सिंघल, भेजी गई होटवार जेल

टीम एबीएन, रांची। आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल की रिमांड अवधि खत्म होने के बाद उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच ईडी के विशेष कोर्ट में पेश किया गया। उनको रांची व्यवहार न्यायालय स्थित ईडी के विशेष न्यायाधीश प्रभात कुमार शर्मा की अदालत में पेश किया गया। जहां से उन्हें 8 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया है। ईडी कोर्ट में पेशी से पहले पूजा सिंघल की मेडिकल जांच करवाई गई। सदर अस्पताल के डॉक्टरों ने पूजा सिंघल का मेडिकल चेकअप किया। जांच के उपरांत डॉक्टरों ने बताया कि पूजा सिंघल कि स्थिति सामान्य है। गौरतलब है कि पूजा सिंघल को 5 दिनों के लिए ईडी ने रिमांड पर लिया था। इस दौरान उनसे पूछताछ की गई। चुकि रिमांड की अवधि खत्म हो चुकी है, ऐसे में उन्हें कोर्ट में पेश किया गया। निलंबित आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में लेते हुए जेल भेज दिया गया है। अब इस मामले में उनकी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये 8 जून को पेशी होगी। कोर्ट में ईडी की तरफ से जेल में भी पूछताछ की अनुमति देने की मांग की गई है। जिसपर कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसी जरूरत पड़ी तो कोर्ट अनुमति के लिए विचार करेगा। कोर्ट में पूजा सिंघल के अधिवक्ता विनय प्रभात ने अपना पक्ष रखा और अदालत से कहा कि इनका स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है ऐसे में इन्हें मेडिकल की आवश्यकता पड़ सकती है। ऐसे में इसे रिम्स में शिफ्ट किया जाए। जिस पर ईडी की ओर से कहा गया कि जेल में भी मेडिकल की टीम है वहां पर उनकी इलाज हो सकता है। पेशी के दौरान ईडी के विशेष लोक अभियोजक बीएमपी सिंह और आतिश कुमार ईडी की ओर से अदालत में पक्ष रखा, न्यायिक हिरासत के दरमियान ईडी जेल में भी पूजा सिंघल से पूछताछ कर सकती है। वहीं दूसरी तरफ साहिबगंज के डीएमओ विभूति से ईडी की टीम लगातार तीसरे दिन पूछताछ कर रही है। बुधवार को भी साहिबगंज डीएमओ ईडी दफ्तर पहुंचे जिसके बाद उनसे पूछताछ की जा रही है।

ज्ञानवापी विवाद : सुप्रीम कोर्ट में पूजा स्थल कानून की संवैधानिक वैधता को दी गई चुनौती
Published / 2022-05-25 06:18:16
ज्ञानवापी विवाद : सुप्रीम कोर्ट में पूजा स्थल कानून की संवैधानिक वैधता को दी गई चुनौती

एबीएन सेंट्रल डेस्क। ज्ञानवापी विवाद की वजह से इन दिनों पूजा स्थल कानून 1991 भी चर्चा में है। पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की ओर से लाए गए इस कानून का विरोध बहुत से धार्मिक नेता कर रहे हैं। इस बीच सुप्रीम कोर्ट में स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने एक नई याचिका दायर की है। जिसमें उन्होंने कहा कि ये कानून धर्मनिरपेक्षता और कानून के शासन के सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है। ऐसे में इस पर फिर से विचार किया जाए। इस कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पहले से ही दो याचिकाएं लंबित हैं। इसमें पहली याचिका लखनऊ के विश्व भद्र पुजारी पुरोहित महासंघ और दूसरी याचिका बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय की है। अश्विनी उपाध्याय वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब भी मांग चुका है। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक ये कानून न्यायिक समीक्षा पर रोक लगाता है, जो संविधान की बुनियादी विशेषता है। अब स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने भी इसी तरह का मुद्दा उठाकर पूजा स्थल कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। पूजा स्थल अधिनियम में क्या है : पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम 1991 के मुताबिक 15 अगस्त 1947 से पहले जो धार्मिक स्थल जिस भी धर्म का था वो उसी का रहेगा, उसे बदला नहीं जायेगा और अगर कोई इस कानून का उल्लंघन करता है तो उसे 1-3 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है।

सीएम माइनिंग लीज प्रकरण : अब हाई कोर्ट में 1 जून को सुनवाई
Published / 2022-05-24 07:51:14
सीएम माइनिंग लीज प्रकरण : अब हाई कोर्ट में 1 जून को सुनवाई

टीम एबीएन, रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन माइनिंग लीज मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाई कोर्ट को निर्देश दिया है कि वह पहले याचिका के विश्वसनीयता के मुद्दे पर विचार करे और फिर सीएम हेमंत सोरेन के खनन पट्टे और शेल कंपनियों से संबंधित मामले में कानून के अनुसार आगे बढ़े. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद झारखंड हाई कोर्ट में आज मामले में सुनवाई हुई। मामले की अगली सुनवाई अब 1 जून को होगी। बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने ईडी को बताया कि स्थिरता के परिणाम के बावजूद, उसके पास आरोपों की जांच करने का अधिकार है। यदि उसे लगता है कि मामले में जांच की आवश्यकता है। कोर्ट ने कहा कि उसे उस बचाव को उठाना चाहिए। सीएम हेमंत सोरेन की ओर से पेश हुए अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट जमा करने के खिलाफ तर्क दिया। उन्होंने कहा कि ईडी मामले को हाईजैक कर रहा है। छुट्टी के दौरान मामले की सुनवाई की अत्यावश्यकता पर भी उन्होंने सवाल उठाया। राज्य सरकार की ओर से वकील कपिल सिब्बल और हेमंत सोरेन की ओर से मुकुल रोहतगी ने माइनिंग लीज मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

पूजा सिंघल मामला : झारखंड और बिहार में 7 जगहों पर छापेमारी कर रही ईडी
Published / 2022-05-24 07:17:34
पूजा सिंघल मामला : झारखंड और बिहार में 7 जगहों पर छापेमारी कर रही ईडी

टीम एबीएन, रांची। झारखंड और बिहार में सात जगहों पर केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी छापेमारी कर रही है। निलंबित आईएएस पूजा सिंघल और माइनिंग घोटाला से मामला जुड़ा है। रांची में कुल 6 जगहों पर जबकि बिहार के मुजफ्फरपुर में एक जगह पर छापेमारी की जा रही है। ईडी की टीम राजधानी रांची में विशाल चौधरी नामक एक शख्स के यहां छापेमारी कर रही है। रांची के अशोक नगर रोड नंबर 6 में विशाल चौधरी का आलीशान घर है। विशाल चौधरी के बारे में बताया जा रहा है कि वह कई आईएएस अफसरों का बेहद करीबी है। वो ब्लैक पैसों को व्हाइट करने का काम किया करता था। ईडी की टीम फिलहाल विशाल चौधरी और उसके कई करीबियों के यहां एक साथ रेड कर रही है। पूरा मामला पूजा सिंघल प्रकरण से जुड़ा हुआ है। वहीं एकबार फिर गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने आज की छापेमारी को लेकर ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा है कि देखिए भैया हम देर से ट्वीट कर रहे हैं, आज जो छापा चल रहा है ईडी का वह झा जी और चौधरी जी पर चल रहा है, जो झारखंड के किसी राजा के यहां धन पहुंचाने के बिचौलिये थे।

सीएम माइनिंग लीज मामला : सुप्रीम कोर्ट में 24 को होगी सुनवाई
Published / 2022-05-23 16:53:21
सीएम माइनिंग लीज मामला : सुप्रीम कोर्ट में 24 को होगी सुनवाई

टीम एबीएन, रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन माइनिंग लीज मामले में 24 मई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। राज्य सरकार की ओर से वकील कपिल सिब्बल और हेमंत सोरेन की ओर से मुकुल रोहतगी ने माइनिंग लीज मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इस याचिका में उन्होंने झारखंड हाई कोर्ट की ओर से सुनवाई के दौरान पारित किए गए आदेशों को चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में पिछली सुनवाई 20 मई को भी हुई थी। उस दिन कपिल सिब्बल और मुकुल रोहतगी ने कोर्ट से समय की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि 19 मई के झारखंड हाई कोर्ट की प्रोसिडिंग्स अपलोड नहीं हो पाए हैं, इसलिए कुछ समय दिया जाय। सुप्रीम कोर्ट ने समय देते हुए अगली सुनवाई 24 मई को निर्धारित की थी। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस रविंद्र भट्ट और जस्टिस सुभाष धूलिया की खंडपीठ में इस मामले में सुनवाई की प्रक्रिया चल रही है। झारखंड हाई कोर्ट में सीएम हेमंत सोरेन के खिलाफ 11 फरवरी को जनहित याचिका दायर की गयी थी। प्रार्थी शिव शंकर शर्मा की ओर से अधिवक्ता राजीव कुमार ने पीआईएल दाखिल किया था। प्रार्थी की ओर से इस जनहित याचिका में कहा गया था कि हेमंत सोरेन खनन मंत्री, मुख्यमंत्री और वन पर्यावरण विभाग के विभागीय मंत्री भी हैं। उन्होंने स्वंय पर्यावरण क्लीयरेंस के लिए आवेदन दिया था और खनन पट्टा हासिल किया है। ऐसा करना पद का दुरुपयोग है और जन प्रतिनिधि अधिनियम का उल्लंघन है। इसलिए इस पूरे मामले की सीबीआई से जांच कराई जाए। इसके अलावा साथ ही प्रार्थी ने हेमंत सोरेन की सदस्यता रद्द करने की मांग भी कोर्ट से की थी।

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