टीम एबीएन, रांची। झारखंड पुलिस ने नक्सलियों के खिलाफ अपने अभियान को तेज कर दिया है। इसी कड़ी में चतरा जिले की प्रतापपुर थाना पुलिस ने भाकपा माओवादी के दुर्दांत उग्रवादी गौतम पासवान उर्फ सुरेश उर्फ अर्जुन के पैतृक घर प्रतापपुर थाना क्षेत्र के सोनवर्षा गांव में इश्तेहार चस्पा कर न्यायालय में हाजिर होने की बात कही है। यदि इसके बाद भी वह न्यायालय में हाजिर नहीं होगा तो न्यायालय के आदेश पर पुलिस उसके घर की संपत्ति कुर्क करेगी। कई बड़ी घटनाओं में नामजद बता दें कि गौतम लंबे समय से संगठन में सक्रिय है। सोनवर्षा गांव निवासी नागेश्वर पासवान के पुत्र गौतम पासवान वर्तमान समय में भाकपा माओवादी में स्पेशल रीजनल कमेटी का सदस्य है। झारखंड सरकार ने उसके ऊपर 25 लाख का इनाम घोषित कर रखा है। गौतम के खिलाफ झारखंड एवं बिहार के विभिन्न जिलों में पुलिस मुठभेड़, हत्या और अपहरण के पांच दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं। 21 फरवरी 2002 को सदर थाना क्षेत्र की संघरी घाटी में पुलिस बल पर हमला कर वशिष्ठ नगर थाना के तत्कालीन प्रभारी सहित कई पुलिस कर्मियों को बलिदान करने, छह अक्टूबर 2006 को कुंदा थाना क्षेत्र की बनियाडीह पहाड़ी पर तत्कालीन डीएसपी सहित एक दर्जन पुलिस कर्मियों की बलिदान तथा इस प्रकार की कई बड़ी घटनाओं में वह नामजद है।
टीम एबीएन, रांची। ईडी राज्य में मनरेगा घोटाले के केस में इसी हफ्ते चार्जशीट दायर करेगी। जांच एजेंसी ने इसकी तैयारी पूरी कर ली है। कहा जा रहा है कि चार या पांच जुलाई को ईडी आरोप पत्र दाखिल करेगी। इसमें निलंबित खनन सचिव पूजा सिंघल, सीए सुमन सिंह, पूजा के पति अभिषेक झा व कई डीएमओ पर भी आरोप पत्र दाखिल होगा। सूत्रों के मुताबिक, 2009-11 के बीच मनरेगा घोटाले से अर्जित पैसों की मनी लॉन्ड्रिंग हुई। बाद में सरकारी पद पर रहते हुए पूजा सिंघल ने डीएमओ की मिलीभगत से भी मनी लॉन्ड्रिंग की। जांच में डीएमओ से पैसे लेने की बात का खुलासा हुआ है। जानकारी के मुताबिक, घोटाले से अर्जित पैसों के जरिए पल्स डायग्नोसिस सेंटर व पल्स अस्पताल का निर्माण हुआ। इसके लिए अवैध तरीके से अर्जित संपत्ति की मनी लॉन्ड्रिंग की गई। जांच में इससे संबंधित तथ्य भी ईडी को मिले हैं, ऐसे में ईडी अभिषेक झा पर भी चार्जशीट कर सकती है। राज्य सरकार ने खूंटी में मनरेगा घोटाले में दर्ज केस की एसीबी से जांच का फैसला लिया है। 011 में भी मनरेगा घोटाले से जुड़े केस एसीबी में ट्रांसफर किए जाने का फैसला सरकार ने लिया था, लेकिन तब इस मामले की जांच नहीं हो पाई थी। ईडी की टीम खूंटी में दर्ज कांड के आधार पर ही मनी लॉन्ड्रिंग की कार्रवाई कर रही है। खूंटी के केस में जांच हुई तो पूजा सिंघल की परेशानी बढ़ सकती है। ईडी ने जांच में यह पाया है कि मनरेगा घोटाले के दौरान पूजा सिंघल के बैंक खाते में उनकी आय के सभी स्रोतों से 1.43 करोड़ की राशि अधिक थी। रिमांड के दौरान पूजा से ईडी ने इस संबंध में पूछताछ की थी, लेकिन उन्होंने इस आय के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी एजेंसी को नहीं दी थी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। झारखंड उच्च न्यायालय में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एवं उनके करीबियों से जुड़े शेल कंपनी और माइनिंग लीज मामले में सुनवाई हुई। अदालत ने अब इस मामले में अगली सुनवाई 5 जुलाई मंगलवार को निर्धारित की है। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डॉ रविरंजन और न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत में गुरुवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से सुप्रीम कोर्ट की वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा और राज्य सरकार की ओर से कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा, जबकि ईडी की ओर से प्रशांत पल्लव और प्रार्थी शिवशंकर शर्मा की ओर से राजीव रंजन ने कोर्ट में पक्ष रखा। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता की ओर से कोर्ट में शेल कंपनी का कई ब्यौरा दिया गया, जिसमें करोड़ों रुपए की लेन-देन का जिक्र करते हुए शेल कंपनी में सीएम हेमंत सोरेन, विधायक बसंत सोरेन, अभिषेक पिंटू, पंकज मिश्रा और रवि केजरीवाल की ओर से निवेश का दावा किया गया। शेल कंपनी मामले की सुनवाई के दौरान किसी अन्य याचिका का जिक्र करने पर अधिवक्ता राजीव कुमार ने खेद किया। राजीव कुमार ने बताया कि डीसी गढ़वा ने अपनी सास के नाम पर माइनिंग लीज ली थी, हालांकि बाद में उसे वापस ले लिया गया था, इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट की ओर से यह मौखिक टिप्पणी की गई कि पिंटू और पंकज का नाम कई बार सुना है। इससे पहले मनरेगा में वित्तीय गड़बड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़े पीआईएल पर सुनवाई के दौरान ईडी ने झारखंड हाईकोर्ट में एक सीलबंद लिफाफा पेश किया था। ईडी की दलील थी कि उसके पास शेल कंपनी से जुड़े कई अहम साक्ष्य हाथ लगे हैं, लिहाजा, मुख्यमंत्री से जुड़े खनन पट्टा और शेल कंपनी से जुड़े पीआईएल को भी एक साथ सुना जाना चाहिए। ईडी के स्टैंड को वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने दोनों केस के मेंटेनेबिलिटी पर सुनवाई के लिए झारखंड हाईकोर्ट को आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में खनन लीज से जुड़े पीआईएल संख्या 727 और शेल कंपनी से जुड़े पीआईएल संख्या 4290 को मेंटेनेबल बताया है। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद दोनों केस के मेरिट पर सुनवाई का रास्ता साफ हो गया था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। उच्चतम न्यायालय ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पूर्व नेता नूपुर शर्मा को पैगंबर मोहम्मद पर विवादित टिप्पणी के मामले में शुक्रवार को कड़ी फटकार लगाई और कहा कि इसके लिए उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए। न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की अवकाशकालीन पीठ ने इन सख्त टिप्पणियों के साथ सुश्री शर्मा की उस याचिका को खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने देशभर में अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकियोंं को दिल्ली स्थानांतरित करने की गुहार लगाई थी। न्यायमूर्ति सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली इस पीठ ने कहा कि एक टीवी कार्यक्रम के दौरान पैगंबर मोहम्मद पर की गई टिप्पणियों से कई राज्यों में भड़के दंगे और हिंसक घटनाओं के लिए उन्हें (नूपुर शर्मा) को देश से माफी मांगनी चाहिए। पीठ ने सख्त टिप्पणियां करते हुए कहा, हमने बहस देखी है। बहस के दौरान किस तरीके से देशभर को भड़काने वाली टिप्पणियां की गई थीं। इसके लिए सिर्फ वह महिला जिम्मेदार हैं। एक वकील होने के नाते जिस तरह से भड़काया गया, वह और भी अधिक शर्मनाक है। उन्हें पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए। शीर्ष अदालत इस दौरान दिल्ली पुलिस पर भी तल्ख टिप्पणी की। पीठ ने दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि उनकी (नूपुर शर्मा) शिकायत पर एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, लेकिन कई प्राथमिकियां दर्ज होने के बावजूद उनके (नूपुर) खिलाफ अभी तक दिल्ली पुलिस ने ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की। पीठ ने निचली अदालत में विचाराधीन उत्तर प्रदेश के ज्ञानवापी मस्जिद विवाद पर चर्चा कराने के लिए संबंधित टेलीविजन चैनल के प्रति भी नाराजगी व्यक्त की। इसी कार्यक्रम चर्चा में भाग लेने वालों में सुश्री शर्मा शामिल थीं। शीर्ष अदालत की सख्त रुख के बाद याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस लेने की गुजारिश की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर ली।
टीम एबीएन, चतरा। चतरा के एसडीओ मुमताज अंसारी ने तंबाकू रोक अधिनियम के तहत राज्य सरकार द्वारा 11 ब्रांडों के पान मसालों पर बैन लगा दिया है। ऐसे में सरकारी प्रबंध के मुताबिक रजनीगंधा, विमल, शिखर, पान पराग, दिलरुबा, राजनिवास, सोहरत, मुसाफिर, मधु, बहार, पान पराग प्रीमियम समेत अन्य ब्रांडों की बिक्री पर पूर्व प्रतिबंध हैं। उन्होंने सभी व्यापारियों को इन कंपनियों के पान मसाला बेचने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया है। मसाला बिक्री पर लगा पूर्ण प्रतिबंध : चतरा एसडीओ मुमताज अंसारी ने खाद्य व्यापारियों के साथ बैठक में निर्णय लिया कि तंबाकू निर्माण के अलावा उसकी ब्रिक्री, भंडारण और विनिर्माण का कार्य पूरी तरह प्रतिबंधित है। साथ ही जारी आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित दुकानदारों व हालसेलरों के विरुद्ध नियमसंगत कार्रवाई की जाएगी। एसडीओ के अनुसार तंबाकू जनित रोगों से प्रतिवर्ष भारत में लगभग 13 लाख लोगों की मृत्यु हो जाती है। सर्वे के अनुसार झारखंड में 50.1 प्रतिशत युवा किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते है, जिसमें 63.6 प्रतिशत पुरूष और 35.9 प्रतिशत महिलाएं हैं। सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों से होने वाली घातक बिमारियों के संबंध में जनमानस में युक्तिसंगत तरीकों से आवश्यक रूप से जागरूकता फैलाने की आवश्यकता हैं। स्कूल, कॉलेज और अस्पताल में धूम्रपान निषेध : एसडीओ ने कहा कि स्कूल, कॉलेज, अस्पताल समेत अन्य धूम्रपान निषेध क्षेत्र से 100 मीटर की दूरी तक किसी भी प्रकार की सिगरेट या अन्य तंबाकू उत्पाद को बेचने वालों पर कार्रवाई होगी। अगर कोई उसका सेवन करते हुए पकड़े जाने पर आर्थिक रूप से जुर्माना लगाने एवं अन्य नियम संगत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बैठक में जिला खाद्य संरक्षा पदाधिकारी अभिषेक आनंद, सचिव कृषि उत्पादन बाजार समिति, चेंबर ऑफ कॉमर्स अध्यक्ष, सभी होटल, रेस्टुरेंट, धर्मशाला एवं ढाबा संचालक, सभी खाद्य व्यापारी, सभी खैनी विक्रेता थोक एवं खुदरा चतरा अनुमंडल समेत अन्य संबंधित उपस्थित थे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देशभर में बढ़ती महंगाई के चलते सरकार ने कई बड़े नए बदलाव किए है जो 1 जुलाई से देशभर में लागू होने जा रहे हैं। इन बदलावों के बीच चार नए लेबर कोड (श्रम संहिता) के नियम भी लागू हो जाएंगे, इसके अलावा क्रिप्टोकरेंसी, टीडीएस और एसी खरीदने के लिए अब ज्यादा खर्च करना होगा। आईए जानते हैं 1 जुलाई से कौन-कौन से होंगे बदलाव- गैस सिलेंडर का बढ़ेगा बोझ : जुलाई महीने के पहले दिन गैस में बदलाव की संभावना है। ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में इजाफा हो सकता है। पैन-आधार लिंक कराना जरूरी : अगर 1 जुलाई से आपका पैन-आधार लिंक नहीं है तो आपकों भारी जुमार्ना देना होगा। पैन कार्ड और आधार को लिंक करने के लिए आज आखिरी तारीख 30 जून निर्धारित की गई है। इसके बाद 500 रुपये जुर्माने का प्रावधान है, एक जुलाई से आपको इन दस्तावेजों को लिंक करने के लिए 1,000 रुपये जुमार्ना भरना पड़ेगा। क्रिप्टोकरेंसी पर एक फीसदी टीडीएस : क्रिप्टोकरेंसी उभोक्ताओं के लिए यह जरूरी खबर है। बता दें कि 1 जुलाई से क्रिप्टोकरेंसी पर सरकार की ओर से 30 फीसदी का टैक्स लगाए जाने के बाद अब निवेशकों को सभी तरह के क्रिप्टो ट्रांजैक्शन पर 1 फीसदी की दर से टीडीएस का भुगतान करना होगा, चाहे वो क्रिप्टो असेट लाभ में बेचा गया हो या फिर नुकसान में। 10 फीसदी टीडीएस : वहीं, 1 जुलाई 2022 से व्यवसायों से प्राप्त गिफ्ट पर 10 फीसदी का टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स 6 देना होगा। ये टैक्स सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और डॉक्टरों पर लागू होगा। डॉक्टरों को मिलने वाली मुफ्त दवा के सैंपल, विदेशी फ्लाइट टिकट या अन्य मंहगे गिफ्ट पर यह नियम लागू होगा। प्लास्टिक बैन : भारत में 1 जुलाई से सिंगल यूज प्लास्टिक बैन हो जाएगा। इसके चलते पैक्ड जूस, सॉफ्ट ड्रिंक्स और डेयरी प्रोडक्ट बनाने और बेचने वाली कंपनियों को तगड़ा झटका लगा है। एक जुलाई से इस प्रतिबंध के लागू होने के बाद बेवरेज कंपनियां प्लास्टिक स्ट्रॉ के साथ अपने प्रोडक्ट को नहीं बेच पाएंगी। एयर कंडीशनर खरीदना 10 फीसदी तक होगा महंगा : गर्मियों के बीच आम जनता पर एक और बोझ बढ़ने वाला है। 1 जुलाई से एयर कंडीशनर खरीदना महंगा हो जाएगा। ब्यूरो आॅफ एनर्जी एफिशिएंसी (इएए) ने एयर कंडीशनर्स के लिए एनर्जी रेटिंग रूल्स में किए बदलाव 1 जुलाई 2022 से लागू होने जा रहा है। इसके मुताबिक, जुलाई महीने की पहली तारीख से 5-स्टार अउ की रेटिंग सीधे 4-स्टार हो जाएगी। इसके साथ ही भारत में एसी की कीमतों में आने वाले समय में 10 फीसदी तक की वृद्धि देखने को मिल सकती है। नए श्रम कानून होंगे लागू : 1 जुलाई से लेबर कोड के नए नियम लागू हो सकते हैं। नया कानून लागू होते ही इन हैंड सैलरी, कर्मचारियों की आॅफिस टाइमिंग, पीएफ योगदान और ग्रेच्युटी पर असर देखने को मिलेगा। कामकाज के अधिकतम घंटों को बढ़ाकर 12 करने का प्रस्ताव भी है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। जीएसटी परिषद ने कुछ सामानों पर छूट को वापस लेने जबकि कुछ अन्य पर दरें बढ़ाये जाने का फैसला किया है। इससे अब डिब्बाबंद और लेबल-युक्त गेहूं आटा, पापड़, पनीर, दही और छाछ पर पांच प्रतिशत कर लगेगा। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मीडिया को कहा कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की यहां दो दिन की बैठक में विभिन्न समूहों के दरों को युक्तिसंगत बनाने के बारे में दिये गये सुझावों को स्वीकार कर लिया गया। इससे कर की दरों में बदलाव हुए हैं। कर दर में बदलाव 18 जुलाई से प्रभाव में आएंगे। हालांकि परिषद ने कसीनो, आॅनलाइन गेमिंग और घुड़दौड़ पर रिपोर्ट को मंत्री समूह (जीओएम) के पास फिर विचार के लिए भेज दिया है। गोवा के वित्त मंत्री कसीनो पर जीएसटी दर के बारे में और चर्चा चाहते हैं। ऐसे में ‘आॅनलाइन गेमिंग’ और घुड़दौड़ पर भी फिर से विचार किया जाएगा। मंत्री समूह ने तीनों पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगाने की सिफारिश की थी। इस बारे में रिपोर्ट 15 जुलाई तक तैयार हो जाने की उम्मीद है और अगस्त में परिषद की अगली बैठक में इसपर विचार किया जाएगा। छूट समाप्त करने का मतलब है कि डिब्बा या पैकेट बंद और लेबल युक्त (फ्रोजन को छोड़कर) मछली, दही, पनीर, लस्सी, शहद, सूखा मखाना, सूखा सोयाबीन, मटर जैसे उत्पाद, गेहूं और अन्य अनाज तथा मुरमुरे पर अब पांच प्रतिशत जीएसटी लगेगा। इसी प्रकार, टेट्रा पैक और बैंक की तरफ से चेक जारी करने पर 18 प्रतिशत और एटलस समेत नक्शे तथा चार्ट पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगेगा। वहीं खुले में बिकने वाले बिना ब्रांड वाले उत्पादों पर जीएसटी छूट जारी रहेगी। इसके अलावा 1,000 रुपये प्रतिदिन से कम किराए वाले होटल कमरों पर 12 प्रतिशत की दर से कर लगाने की बात कही गई है। अभी इसपर कोई कर नहीं लगता है। इसके साथ ही अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिये 5,000 रुपये से अधिक किराए वाले कमरों (आईसीयू को छोड़कर) पर पांच प्रतिशत जीएसटी लगेगा। ‘प्रिंटिंग/ड्राइंग इंक’, धारदार चाकू, कागज काटने वाला चाकू और ‘पेंसिल शार्पनर’, एलईडी लैंप, ड्राइंग और मार्किंग करने वाले उत्पादों पर कर की दरें बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दी गई हैं। सौर वॉटर हीटर पर अब 12 प्रतिशत जीएसटी लगेगा जबकि पहले 5 प्रतिशत कर लगता था। सड़क, पुल, रेलवे, मेट्रो, अपशिष्ट शोधन संयंत्र और शवदाहगृह के लिए जारी होने वाले कार्य अनुबंधों पर अब 18 प्रतिशत जीएसटी लगेगा। जो अबतक 12 प्रतिशत था। हालांकि, रोपवे के जरिये वस्तुओं और यात्रियों के परिवहन तथा अवशिष्ट निकासी सर्जरी से जुड़े उपकरणों पर कर की दर घटाकर पांच प्रतिशत की गई है। पहले यह 12 प्रतिशत था। ट्रक, वस्तुओं की ढुलाई में इस्तेमाल होने वाले वाहनों जिसमें ईंधन की लागत शामिल है, पर अब 12 प्रतिशत जीएसटी लगेगा जो अभी 18 प्रतिशत है। बागडोगरा से पूर्वोत्तर राज्यों तक की हवाई यात्रा पर जीएसटी छूट अब इकनॉमी श्रेणी तक सीमित होगी। आरबीआई (भारतीय रिजर्व बैंक), बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड जैसे नियामकों की सेवाओं के साथ रिहायशी मकान कारोबारी इकाइयों को किराये पर देने पर कर लगेगा। बैटरी या उसके बिना इलेक्ट्रिक वाहनों पर रियायती पांच प्रतिशत जीएसटी बना रहेगा। जीएसटी परिषद ने ई-कॉमर्स पोर्टल के माध्यम से की जाने वाली अंतर-राज्य आपूर्ति के लिए प्रक्रिया को आसान बनाने का भी निर्णय किया है। अब ऐसे आपूर्तिकर्ताओं का वस्तुओं और सेवाओं का कारोबार क्रमश: 40 लाख रुपये और 20 लाख रुपये से कम है तो उन्हें जीएसटी पंजीकरण प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं होगी। यह एक जनवरी, 2023 से लागू होगा। परिषद ने जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण के गठन के संदर्भ में राज्यों की तरफ से उठाये गये विभिन्न मुद्दों पर चर्चा और सीजीएसटी कानून में उपयुक्त संशोधन के लिये मंत्री समूह भी गठित करने का निर्णय किया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। महाराष्ट्र में राजनीतिक संकट अब निर्णायक मोड़ पर आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को महाराष्ट्र के राज्यपाल के उस फैसले को सही ठहराया है, जिसमें उन्होंने उद्धव सरकार को गुरुवार को बहुमत साबित करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि वह राज्यपाल के फैसले पर रोक नहीं लगा रहा है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को होने वाले फ्लोर टेस्ट के खिलाफ शिवसेना के मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) सुनील प्रभु की याचिका पर करीब साढ़े तीन घंटे तक सुनवाई की। उसके बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान प्रभु ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई अपनी याचिका में महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार को गुरुवार (30 जून) को बहुमत साबित करने के लिए महाराष्ट्र के राज्यपाल के निर्देश को अवैध करार दिया। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुनील प्रभु से सवाल किया कि अगर किसी सरकार ने सदन में बहुमत खो दिया है और विधानसभा अध्यक्ष को समर्थन वापस लेने वालों को अयोग्य घोषित करने के लिए कहा जाता है, तो क्या राज्यपाल को फ्लोर टेस्ट का इंतजार करना चाहिए ? प्रभु का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की अवकाश पीठ के समक्ष दलील दी कि राज्यपाल मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह पर कार्य करने के लिए बाध्य हैं। उन्होंने कहा कि राज्यपाल मंत्रियों की सलाह पर काम कर सकते हैं या नहीं कर सकते हैं, लेकिन वे किसी भी हाल में विपक्ष की सलाह पर काम नहीं कर सकते हैं। सिंघवी ने कहा कि अगर गुरुवार को बागी विधायकों को वोट देने की अनुमति दी जाती है, तो अदालत उन विधायकों को वोट देने की अनुमति देगी, जिन्हें बाद में अयोग्य घोषित किया जा सकता है, जो लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ है। इस पर, बेंच ने सिंघवी से पूछा कि मान लीजिए कि एक सरकार को पता है कि उन्होंने सदन में बहुमत खो दिया है और अध्यक्ष को समर्थन वापस लेने वालों को अयोग्यता नोटिस जारी करने के लिए कहा जाता है। फिर उस समय, राज्यपाल को फ्लोर टेस्ट बुलाने की प्रतीक्षा करनी चाहिए या फिर वह स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकते हैं? पीठ ने पूछा, राज्यपाल को क्या करना चाहिए? क्या वह अपने विवेक का प्रयोग कर सकते हैं? सुनील प्रभु ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर महाराष्ट्र के राज्यपाल के उस निर्देश को चुनौती दी है, जिसमें मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को गुरुवार को बहुमत साबित करने के लिए कहा गया है। शिवसेना की इस याचिका में दलील दी गई है कि अभी बागी विधायकों के खिलाफ अयोग्य ठहराए जाने की कार्रवाई पूरी नहीं हुई है, ऐसे में बहुमत साबित करने का निर्देश पारित नहीं किया जाना चाहिए।
टीम एबीएन, कोडरमा। शहर में एक जुलाई से सिंगल यूज प्लास्टिक प्रतिबंध लग जाएगा। भारत सरकार के पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने वितरण, भंडारण और प्रयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। इसके बाद झुमरी तिलैया नगर परिषद भी इसे प्रतिबंधित करने के लिए एक-दो दिनों में चेंबर ऑफ कॉमर्स, व्यवसायिक और सामान बेचने वाले दुकानदारों के साथ बैठक करेगा। नप के ईओ विनीत कुमार के अनुसार एक जुलाई के बाद नियमों की अनदेखी करनेवालों पर कार्रवाई की जाएगी। प्रतिबंध की भनक मिलते ही मिलते ही दुकानदारों ने सामानों को मंगाना बंद कर दिया है। दुकान में बचे प्लास्टिक के सामान कम दामों में बेचे जा रहे हैं। प्लास्टिक स्टिक,प्लास्टिक के झंडे, आइसक्रीम स्टिक, थर्मोकोल की प्लेट, कप, ग्लास, कांटे के चम्मच, मिठाई के डब्बे, निमंत्रण कार्ड, सिगरेट पैकेट समेत सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग बंद हो जाएगा। दुकानदार पत्तल मंगाए जा रहे हैं। अचानक प्रतिबंधित होने की घोषणा से लोग परेशान दिख रहे हैं। हालांकि इससे पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा। ज्ञात हो कि पहले शादी-विवाह समेत अन्य सामूहिक भोज में पत्ते से बने पत्तल का उपयोग होता था। प्रतिबंध की घोषणा से प्राचीन परंपरा जीवित हो सकती है। उत्पादन पर लगे रोक : उपयोग पर प्रतिबंध की घोषणा के बाद शहर के कुछ व्यापारियों ने दबी जुवान से कहा कि सरकार को इसके उत्पादन पर ही रोक लगा देना चाहिए जिससे उपयोग की संभावना ही समाप्त हो जाती। सरकार की दोहरी नीति समझ से परे है। एक ओर, उत्पादन भी हो रहा है और दूसरी ओर उपयोग पर रोक भी लगाया जा रहा है जो समझ से परे है।
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