टीम एबीएन, रांची। केंद्रीय प्रवर्त्तन निदेशालय (ईडी) ने अवैध खनन मामले में आज दूसरे दिन भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रेस सलाहकार अभिषेक प्रसाद उर्फ पिंटू से पूछताछ की जा रही है। इससे पहले बुधवार को भी करीब 10 घंटे तक उनसे ईडी कार्यालय में पूछताछ की गई थी। ईडी के समन पर सीएम के प्रेस सलाहकार अभिषेक प्रसाद उर्फ पिंटू बुधवार भी सुबह करीब 11 बजे रांची के हिनू रोड स्थित ईडी के क्षेत्रीय कार्यालय पहुंचे, जहां करीब 10 घंटे तक उनसे पूछताछ हुई। कल यानि बुधवार की पूछताछ समाप्त होने के बाद अभिषेक प्रसाद रात करीब 9 बजे ईडी के क्षेत्रीय कार्यालय से बाहर निकले थे। वे अपने साथ एक झोला में कुछ कागजात लेकर पहुंचे थे, जिसके आधार पर ईडी की टीम ने उनसे पूछताछ की। वहीं इससे पहले अवैध खनन और बिना लाइसेंस गंगा नदी के माध्यम से पानी जहाज की सहायता से पत्थरों के अवैध खनन से जुड़े मामले में ईडी ने सीएम हेमंत सोरेन के विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा को गिरफ्तार किया था और अभी वे रिम्स में इलाजरत है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जिस तरह से बुधवार को ईडी ने अभिषेक प्रसाद से गहन पूछताछ की और आज गुरुवार को पूछताछ कर रही है। उससे आने वाले समय में उनकी मुश्किलें बढ़ सकती है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के जिन तीन कांग्रेस विधायकों के पास हावड़ा से भारी मात्रा में कैश बरामद हुआ था, उस मामले की जांच में पश्चिम बंगाल की CID टीम जुट चुकी है। इस पूरे मामले के तार झारखंड के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के भी तार जुड़ गए है। इस पूरे कैश कांड में असम का कनेक्शन भी चल रहा है; क्योंकि इस मामले में झारखंड सरकार गिराने का आरोप भी लग रहा है। दूसरी तरफ गिरफ्तार कांग्रेस विधायक धीरे-धीरे कई राज खोल रहे हैं और जांच तेजी से बढ़ रही है। इसी क्रम में पश्चिम बंगाल सीआईडी की ओर से लाल बाजार के सामने उस कार्यालय में छापेमारी की गयी, जहां कथित तौर पर तीनों विधायकों के लिए उनके सहयोगी ने यहीं से 49 लाख रुपये बरामद किया गया हावड़ा से गिरफ्तार तीन कांग्रेसी विधायकों से पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर पश्चिम बंगाल सीआईडी की कार्रवाई मंगलवार को भी जारी रही। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कोलकाता सीआईडी की टीम ने तीन कांग्रेस विधायकों की गुप्त सूचना के आधार पर भगौड़े व्यवसायी के ठिकाने पर छापेमारी की। छापेमारी में करीब साढ़े तीन लाख रुपये नकद और 250 चांदी के सिक्के बरामद किये हैं। बताया गया है कि अब तक महेंद्र अग्रवाल का पता सीआईडी को नहीं चल पाया है। चर्चा है कि इस पूरे घटनाक्रम में हवाला के माध्यम से असम से पैसा आया है और अब तक कई लाख रुपये नकद बरामद किये जा चुके हैं। हालांकि सीआईडी या पश्चिम बंगाल पुलिस की ओर से अब तक इस संबंध में किसी भी तरह की आधिकारिक जानकारी नहीं दी गयी है। लेकिन, पश्चिम बंगाल पुलिस और सीआईडी की टीम पैसे बरामदगी की पूरी प्रक्रिया वीडियोग्राफी के जरिये रिकॉर्ड कर रही है, ताकि इसे साक्ष्य के रूप में अदालत में पेश कर सके।
टीम एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रेस सलाहकार अभिषेक प्रसाद उर्फ पिंटू से बुधवार को लंबी पूछताछ के बाद ईडी आज भी उनसे पूछताछ करेगी। बुधवार को करीब 9 घंटे की पूछताछ के बाद आज फिर उनसे कई सवाल किए जाएंगे। जानकारी के मुताबिक, सीएम के प्रेस सलाहकार अभिषेक प्रसाद के नाम पर तकरीबन एक दर्जन कंपनियां निबंधित थी। इन कंपनियों में अधिकांश अब स्ट्राइक ऑफ की प्रक्रिया में हैं। ऐसे में ईडी की टीम ने इन कंपनियों और उनमें निवेश के पहलूओं पर पूछताछ की। ईडी ने पूर्व में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बरहेट विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा को गिरफ्तार किया था, पंकज मिश्रा ने भी अवैध खनन से जुड़े मामले में पिंटू का नाम लिया था। ऐसे में ईडी ने उन्हें पूछताछ के लिए समन भेजा था। वहीं दूसरी तरफ, अवैध खनन मामले में सीएम के विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा की हिरासत अवधि 18 अगस्त तक बढ़ा दी गई है। फिलहाल, पंकज मिश्रा न्यायिक हिरासत में रिम्स में इलाजरत हैं, जहां उनके आचरण में बदलाव के बाद डॉक्टरों की टीम में साइकोलॉजिस्ट को भी शामिल किया गया है।
टीम एबीएन, गुमला/रांची। एडीजे वन दुर्गेश चंद्र अवस्थी की अदालत ने भरनो थाना क्षेत्र में डायन बिसाही के आरोप में दो महिलाओं की हत्या किए जाने मामले पर सुनवाई की। इस मामले में उन्होंने 19 महिलाओं को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 25 हजार रुपए जुर्माना की सजा सुनाई गई है। जुर्माने की राशि नहीं देने पर अतिरिक्त 2 साल की सजा भुगतनी पड़ सकती है। इसमें सरकारी पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक मोहम्मद जावेद हुसैन ने पैरवी कर रहे थे। गुमला जिला के भरनो प्रखंड स्थित करंज थाना क्षेत्र के करौंदाजोर टुकुटोली गांव में 9 वर्ष पहले 11 जून 2013 को वारदात को अंजाम दिया गया था। इसमें डायन बिसाही के आरोप में 2 महिलाओं बृजेनिया इंदवार और इग्नेशिया इंदवार की हत्या सामूहिक रूप से कर दी गई थी। इस मामले में दोषी पाई गई आरोपियों में भलेरिया इंदवार, इमिलिया इंदवार, करिया देवी, जरल दिता इंदवार, मंगरी देवी, खिस्टीना इंदवार, चिंतामणि देवी, विनीता इंदवार, ज्योति इंदवार, मालती इंदवार, गब्रेला इंदवार, रिजीता इंदवार, मोनिका इंदवार, करेसनिया इंदवार, नीलम इंदवार, सुशीला इंदवार, कुरमेला इंदवार, ललिता इंदवार और रोजलिया इंदवार शामिल हैं जिनके खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। दो लोगों की हत्या के बाद पुलिस ने अगले ही दिन 12 जून 2013 को सभी आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। दर्ज प्राथमिकी के अनुसार 11 जून 2013 को जिस दिन दोनों की हत्या हुई थी उसी दिन घटना को अंजाम देने से पहले लोगों ने बैठक कर एक युवक की मौत के लिए बृजेनिया इंदवार और इग्नेशिया इंदवार को दोषी ठहराया। इसके बाद दोनों महिलाओं को जन अदालत में बुलाकर लाठी डंडे से पीटकर हत्या कर दी गई थी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। उच्चतम न्यायालय ने 13 अनुसूचित क्षेत्रों के स्थानीय लोगों को सरकारी नौकरी में 100 फीसदी आरक्षण देने के झारखंड सरकार के 2016 के फैसले को मंगलवार को खारिज कर दिया। शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय के निर्णय को बरकरार रखा, जिसमें इस फैसले को भेदभावपूर्ण और अनुचित बताया गया था। सर्वोच्च अदालत ने कहा, नागरिकों के समान अधिकार हैं और एक वर्ग के लिए अवसर पैदा करके बाकियों को पूरी तरह से वंचित करना भारतीय संविधान के निमार्ताओं के विचार के अनुरूप नहीं है न्यायमूर्ति एमआर शाह और न्यायमूर्ति बीवी नागरथन ने कहा कि वे उच्च न्यायालय की ओर से पारित आदेश का समर्थन करते हैं, जिसने 14 जुलाई 2016 को जारी अधिसूचना/आदेश को असंवैधानिक घोषित किया था। वर्ष 2016 में झारखंड सरकार ने सरकारी माध्यमिक स्कूलों में प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) के पद पर नियुक्ति के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे और इसमें 100 फीसदी आरक्षण स्थानीय उम्मीदवारों/राज्य के 13 अनुसूचित क्षेत्रों के निवासियों के लिए था। शीर्ष अदालत ने कहा कि वह उच्च न्यायालय के दृष्टिकोण और प्रभावित उम्मीदवारों द्वारा दायर अपीलों से पूरी तरह से सहमत है। न्यायालय ने आंध्र प्रदेश में नौकरियों में 100 प्रतिशत आरक्षण से संबंधित 2020 के संविधान पीठ के फैसले का हवाला दिया और कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों को लेकर राज्यपाल को दी गई शक्ति संविधान से ऊपर नहीं है।
टीम एबीएन, दुमका/रांची। चार दिन पहले दुमका मनरेगा लोकपाल राजेंद्र प्रसाद साह और एक बिचौलिए के बीच रुपए के लेनदेन से संबंधित ऑडियो वायरल होने के बाद प्रशासनिक कार्रवाई की जा रही है। ऑडियो में रानीश्वर प्रखंड मे संचालित मनरेगा योजनाओं में हुई गड़बड़ी की लीपापोती और रफा-दफा करने के बदले रुपये की लेनदेन की बात की जा रही है। वायरल ऑडियो सामने आने के बाद उपायुक्त ने ग्रामीण विकास विभाग के सचिव से मनरेगा लोकपाल के खिलाप एफआईआर दर्ज करने की अनुमति मांगी है। वायरल ऑडियो में बिचौलिया लोकपाल से कहता है कि आपने जो आठ हजार रुपये लिए उसके बावजूद मेरा बचाव नहीं किया। इसके साथ ही बिचौलिया यह भी कह रहा है कि एक तालाब में आप एक लाख रुपये मांग रहे हैं। इसमें हम कितना कमाएंगे। इसपर मनरेगा लोकपाल बिचौलिये को धमकी देते हुए कह रहा है कि मामला कोर्ट में चल जाएगा तो पांच लाख रुपये खर्च हो जाएगा। दुमका उपायुक्त रवि शंकर शुक्ला ने ग्रामीण विकास विभाग के सचिव को पत्र लिखा है। इस पत्र में कहा गया है कि मनरेगा लोकपाल के पद पर पदस्थापित राजेंद्र प्रसाद साह द्वारा कथित बिचौलिया विपद तरण घोष से अवैध राशि लेते हुए ऑडियो वायरल हुआ है। डीसी ने यह भी बताया है कि रानीश्वर बीडीओ से पाटजोड़ योजनाओं की जांच करवाई गई, जिन योजनाओं की जांच हुई है, उनमें पहाड़पुर में मुक्ख्तार मुर्मू का डोभा निर्माण, जिसकी लागत राशि 1,73,528 कुल व्यय 18,450 रुपये, नवग्राम में सूरज मुर्मू का डोभा निर्माण, जिसकी लागत राशि 1,73,528 और कुल व्यय 1,26,600 रुपये और ढोड्डा में रानी सोरेन का तालाब निर्माण, जिसकी लागत राशि 4,02,330 और कुल व्यय 2,70,000 शामिल है। जांच प्रतिवेदन के मुताबिक इन योजनाओं में बरती गई अनियमितता की लीपापोती को लेकर बिचौलिया द्वारा 8 हजार रुपये मनरेगा लोकपाल राजेंद्र प्रसाद साह को देने की पुष्टि हुई है। इस जांच के आधार पर रोजगार सेवक द्वारा रानीश्वर थाना में बिचौलिया विपद तरण घोष के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवाई गई है। उपायुक्त ने विभागीय सचिव से चयन मुक्त और प्राथमिकी दर्ज करवाने की अनुमति मांग की है। उपायुक्त रवि शंकर शुक्ला ने बताया कि ग्रामीण विकास विभाग के सचिव से मनरेगा लोकपाल को चयन मुक्त करने का आग्रह किया है। इसके साथ ही राजेंद्र प्रसाद साह पर प्राथमिकी दर्ज करवाई की अनुमति भी मांग की है।
टीम एबीएन, रांची। मनरेगा घोटाला मामले में जेल में बंद निलंबित आईएएस पूजा सिंघल की जमानत याचिका पर आज (3 अगस्त ) सुनवाई होगी। उनके अधिवक्ता ने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए जमानत देने का आग्रह किया था, जिसके बाद 26 जुलाई की सुनवाई में ईडी ने अपना पक्ष रखने के लिए समय की मांग की थी। ईडी की मांग के बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए आज की तिथि निर्धारित की थी। आपको बता दें कि पूजा सिंघल के आवास और उनसे जुड़े कई ठिकानों पर ईडी ने छापेमारी के थी। इस दौरान उनके सीए सुमन कुमार के ठिकानों से 19 करोड़ से ज्यादा नकद बरामद किए गए थे। इस मामले में ईडी ने 11 मई को पूजा सिंघल को हिरासत में ले लिया था। निलंबित आईएएस पूजा सिंघल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं। मई माह में ईडी की टीम ने उनके आवास सहित 25 ठिकानों पर छापा मारा था। इस छापेमारी में सीए सुमन कुमार के घर से 19 करोड़ से अधिक रुपये बरामद किये थे। पूजा सिंघल के खिलाफ ECIR 03/2018 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। पिछले दिनों विशेष अदालत में पूजा सिंघल की ओर से जमानत याचिका दायर की गई, जिस पर 19 जुलाई को अदालत में सुनवाई होगी। इस मामले में कई जिलों के डीएमओ से भी पूछताछ हो चुकी है। मनी लॉन्ड्रिंग केस में अब तक के अपडेट्सः ईडी ने निलंबित आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल, उनके पति अभिषेक झा, सीए सुमन सिंह, खूंटी जिला परिषद के तत्कालिन कनीय अभियंता रामविनोद सिन्हा, तत्कालीन सहायक अभियंता राजेंद्र जैन, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता जयकिशोर चौधरी, खूंटी विशेष प्रमंडल के तत्कालीन कार्यपालक अभियंता शशि प्रकाश के खिलाफ भी मनी लाउंड्रिंग की धारा 3, 4 और पीसी एक्ट की संगत धाराओं के तहत आरोप पत्र दाखिल की है। 5 जुलाई को ईडी की टीम ने तकरीबन 200 पन्नों की चार्जशीट ईडी के विशेष न्यायाधीश प्रभात कुमार शर्मा के कोर्ट में दायर की। वहीं, ईडी ने तकरीबन पांच हजार पन्नों से अधिक का साक्ष्य भी कोर्ट में जमा कराया है। ईडी के अधिकारी दो बक्सों में कागजात लेकर कोर्ट पहुंचे थे। आरोप पत्र में छह से 25 मई तक ईडी की ओर से की गयी कार्रवाई की जिक्र है। इस आरोप पत्र में ईडी की ओर से कहा गया है कि इस मामले की जांच अभी जारी है और इसमें पूरक आरोपपत्र भी दाखिल किया जाएगा। आरोप पत्र के साथ ईडी ने जो दस्तावेज दिए हैं, वह पूजा सिंघल, सीए सुमन सिंह, अभिषेक झा और कुछ जिलों के खनन पदाधिकारियों से पूछताछ को बाद ईडी को हाथ लगे थे। ईडी के आरोप पत्र में बताया गया है कि चतरा, खूंटी और पलामू में डीसी रहते हुए उनके खातों में उनकी सैलरी से 1.43 करोड़ रुपये अधिक थे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने दिल्ली स्थित नेशनल हेराल्ड के दफ्तर में छापा मारा है। जानकारी के मुताबिक, ईडी के अधिकारी नेशनल हेराल्ड के दफ्तर में मौजूद हैं और तलाशी अभियान चला रही हैं। गौरतलब है कि इस मामले में पहले कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी से भी पूछताछ हो चुकी है। जानकारी के मुताबिक, नेशनल हेराल्ड मामले में देश भर में 14 लोकेशन पर छापेमारी की गई। इसमें नेशनल हेराल्ड का दफ्तर भी शामिल है। देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 20 नवंबर 1937 को एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड यानी AJL का गठन किया था। इसका उद्देश्य अलग-अलग भाषाओं में समाचार पत्रों को प्रकाशित करना था। तब AJL के अंतर्गत अंग्रेजी में नेशनल हेराल्ड, हिंदी में नवजीवन और उर्दू में कौमी आवाज समाचार पत्र प्रकाशित हुए। भले ही AJL के गठन में पंडित जवाहर लाल नेहरू की भूमिका थी, लेकिन इसपर मालिकाना हक कभी भी उनका नहीं रहा। क्योंकि, इस कंपनी को 5000 स्वतंत्रता सेनानी सपोर्ट कर रहे थे और वही इसके शेयर होल्डर भी थे। 90 के दशक में ये अखबार घाटे में आने लगे। साल 2008 तक AJL पर 90 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज चढ़ गया। तब AJL ने फैसला किया कि अब समाचार पत्रों का प्रकाशन नहीं किया जाएगा। अखबारों का प्रकाशन बंद करने के बाद AJL प्रॉपर्टी बिजनेस में उतरी। 2010 में AJL के 1057 शेयरधारक थे। घाटा होने पर इसकी होल्डिंग यंग इंडिया लिमिटेड यानी YIL को ट्रांसफर कर दी गई। यंग इंडिया लिमिटेड की स्थापना उसी वर्ष यानी 2010 में हुई थी। इसमें तत्कालीन कांग्रेस पार्टी के महासचिव राहुल गांधी डायरेक्टर के रूप में शामिल हुए। कंपनी में 76 प्रतिशत हिस्सेदारी राहुल गांधी और उनकी मां सोनिया गांधी के पास रखी गई। शेष 24 फीसदी कांग्रेस नेताओं मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीस (दोनों का निधन हो चुका है) के पास थी। शेयर ट्रांसफर होते ही AJL के शेयर होल्डर्स सामने आ गए। पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण, इलाहाबाद व मद्रास उच्च न्यायालयों के पूर्व मुख्य न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू सहित कई शेयरधारकों ने आरोप लगाया कि जब YIL ने AJL का "अधिग्रहण" किया था तब उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया था। यही नहीं, शेयर ट्रांसफर करने से पहले शेयर होल्डर्स से सहमति भी नहीं ली गई। बता दें कि शांति भूषण और मार्कंडेय काटजू के पिता के नाम पर AJL में शेयर था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल के गिरफ्तार किए गए मंत्री पार्थ चटर्जी पूछताछ में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के साथ सहयोग नहीं कर रहे हैं। ईडी अधिकारी ने कहा, वह गिरफ्तारी के बाद से ही हमारे साथ सहयोग नहीं कर रहे हैं। वह अक्सर थकावट की शिकायत करते हैं और हमारे सवालों के जवाब देने से बच रहे हैं। केंद्रीय एजेंसी के एक अधिकारी ने सोमवार को यह बात कही। उन्होंने बताया कि चटर्जी ने कथित स्कूल भर्ती घोटाले की जांच के संबंध में ईडी के ज्यादातर सवालों का जवाब नहीं दिया है। ईडी अधिकारी के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस से निलंबित किए गए नेता चटर्जी पूछताछ के दौरान ज्यादातर वक्त चुप रहे। चटर्जी ने शुक्रवार को कहा था कि वह "साजिश का शिकार" हुए हैं। उन्होंने खुद को निलंबित करने के टीएमसी के फैसले पर नाखुशी भी जताई थी। ईडी अधिकारी ने कहा, वह गिरफ्तारी के बाद से ही हमारे साथ सहयोग नहीं कर रहे हैं। वह अक्सर थकावट की शिकायत करते हैं और हमारे सवालों के जवाब देने से बच रहे हैं। हमने चटर्जी से उनके दावों के बारे में पूछा था कि छापे में बरामद नकदी उनकी नहीं है। हम इस धन के स्रोत के बारे में पता लगा रहे हैं।
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