टीम एबीएन, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के अधिवक्ता राजीव कुमार को ईडी रिमांड पर लेकर कोलकाता से रांची पहुंच चुकी है। वापस लाने के बाद राजीव कुमार का रांची सदर अस्पताल में मेडिकल जांच कराया गया। मेडिकल जांच के बाद ईडी की टीम अधिवक्ता राजीव कुमार को अपने साथ रांची एयरपोर्ट रोड स्थित ईडी के जोनल कार्यालय लेकर पहुंची है, जहां उनसे पूछताछ शुरू हो गई है। कोलकाता से 50 लाख रुपये के साथ गिरफ्तार झारखंड हाई कोर्ट के अधिवक्ता राजीव कुमार को ईडी की टीम रांची लेकर पहुंच गई। राजीव कुमार से 20 अगस्त से ही पूछताछ होनी थी, लेकिन यह संभव नहीं हो पाया। क्योंकि कोलकाता पुलिस ने इस मामले में अड़ंगा लगा दिया था। जिसके बाद ईडी कोर्ट चली गई और फिर वहां से ईडी को राजीव कुमार को रांची लाने की इजाजत मिली। 31 जुलाई को झारखंड हाई कोर्ट के अधिवक्ता राजीव कुमार की कोलकाता से गिरफ्तारी हुई थी। आरोप था कि उनके खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में दाखिल एक जनहित याचिका में राहत पहुंचाने के नाम पर अधिवक्ता ने पहले 10 करोड़ रुपये की मांग की थी, लेकिन बाद में एक करोड़ रुपये देने की बात तय हुई। पहली किस्त में 50 लाख रुपये लेने के लिए ही राजीव कुमार कोलकाता आये थे। जहां उन्हें 50 लाख रुपये कैश के साथ गिरफ्तार कर लिया गया।
टीम एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने निलंबित अभियंता प्रमुख, पथ निर्माण विभाग, झारखण्ड रास बिहारी सिंह के विरुद्ध प्रारंभिक जांच (पीई) दर्ज कर जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने के प्रस्ताव का अनुमोदन किया है। मालूम हो कि इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने रास बिहारी सिंह के विरुद्ध प्राप्त परिवाद के आलोक में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा दर्ज आईआर सं०-06/17 के सत्यापनकर्ता द्वारा आरोपी के विरुद्ध आय की तुलना में 199 प्रतिशत अधिक धन पाये जाने के आलोक में पीई दर्ज करने के बिन्दु पर मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग (निगरानी), झारखण्ड, रांची को अनापत्ति संसूचित करने के प्रस्ताव को अनुमोदित किया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस : पूर्व में भी भ्रष्टाचार के खिलाफ मुख्यमंत्री ने सख्त कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री ने अनिल कुमार सिंह, तत्कालीन अंचलाधिकारी, हेहल, रांची के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की अनुमति दी थी। वहीं अनुसूचित जनजाति, अनसूचित जाति अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग विभाग, झारखण्ड, द्वारा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, पलामू थाना कांड संख्या 10/2021 के प्राथमिकी अभियुक्त मनोज कुमार, सहायक, जिला कल्याण कार्यालय, पलामू एवं सुभाष कुमार, जिला कल्याण पदाधिकारी, पलामू के विरुद्ध भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम, 1988 (संशोधित अधिनियम, 2018) की धारा-7 (ए) के तहत अभियोजन स्वीकृत्यादेश दिया गया है। साथ ही अरविन्द कुमार, तत्कालीन अध्यक्ष, झारखण्ड राज्य विद्युत नियामक आयोग, आरएन सिंह, सदस्य (अभियंत्रण), झारखण्ड राज्य विद्युत नियामक आयोग एवं गौरव बुधिया, प्रोपराईटर, मेसर्स बिहार फाउंडरी एण्ड कास्टिंग लिमिटेड के विरुद्ध निगरानी जांच की स्वीकृति दी है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पशु तस्करी मामले में टीएमसी नेता अनुब्रत मंडल की परेशानियां खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। इस बीच शनिवार को अनुब्रत मंडल को सीबीाई की विशेष अदालत में पेश किया गया और कोर्ट ने उन्हें 24 अगस्त के लिए सीबीआई की हिरासत में भेज दिया। एजेंसी ने मंडल पर जांच में सहयोग न करने का भी आरोप लगाया है। अनुब्रत मंडल को 10 दिनों की हिरासत के बाद शनिवार को आसनसोल की विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया गया था। कोर्ट में शनिवार को सीबीआई ने यह दावा किया कि टीएमसी नेता अनब्रत मंडल अपने बॉडीगॉर्ड सहगल हुसैन के जरिए गाय तस्करी के माफिया एनामुल हक के संपर्क में बने हुए थे। मंडल को बहुत शक्तिशाली और अत्यधिक प्रभावशाली व्यक्ति बताते हुए सीबीआई ने टीएमसी नेता की हिरासत बढ़ाने की अपील करते हुए कहा कि वह जमानत मिलने पर गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं और सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं। सीबीआई के वकील ने कहा कि 10 बार समन जारी होने के बावजूद मंडल का शुरू से ही असहयोगी रवैया रहा है। वकील ने यह भी दावा किया कि मंडल ने एक डॉक्टर पर पर्चे में पूरी तरह आराम करने की सलाह लिखने लिए भी दबाव डाला था। मंडल को 11 अगस्त को सीबीआई ने कथित पशु तस्करी घोटाले की जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया था। बता दें, पशु तस्करी मामले में सीबीआई का टीएमसी नेता अनुब्रत मंडल और उनके परिवार पर शिकंजा कसता जा रहा है। मंडल और उनके परिवार के सदस्यों की 16.97 करोड़ की सावधि जमा की निकासी पर रोक लगा दी है। अधिकारियों ने बताया कि जांच में पाया गया कि मंडल ने कथित तौर पर अपने सहयोगियों को नकदी प्रदान कर इसे बैंक खातों में जमा कराया और बाद में अपने नाम पर सावधि जमा में तब्दील कर दिया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश की अदालतों में करीब 5 करोड़ लंबित मामले पड़े हैं। इसके बारे में कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने शनिवार को कहा कि अगर कोई जज 50 मामलों का निपटारा करता है, तो 100 नए मुकदमे दायर कर दिए जाते हैं। क्योंकि लोग अब अधिक जागरूक हैं और विवादों को निपटाने के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाते हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में सशस्त्र बल न्यायाधिकरण के कामकाज पर एक सेमिनार में रिजिजू ने कहा कि सरकार अदालतों में लंबित मामलों को कम करने के लिए टेक्नोलॉजी का उपयोग कर रही है। एक खबर के मुताबिक कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र पर नए सिरे से ध्यान देने के साथ मध्यस्थता पर प्रस्तावित कानून अदालतों में मुकदमों की संख्या को कम करने में मदद करेगा। रिजिजू ने यह भी कहा कि दूसरे देशों में लंबित मामलों और भारत के मामलों की संख्या में कोई तुलना नहीं होनी चाहिए क्योंकि हमारी समस्याएं अलग तरह की हैं। संसद के मानसून सत्र के दौरान एक सवाल के जवाब में कानून मंत्री रिजिजू ने कहा था कि देश भर की अदालतों में 4.83 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं। निचली अदालतों में 4 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट में 72,000 से अधिक मामले लंबित हैं। कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि कुछ देश ऐसे भी हैं जिनकी आबादी 5 करोड़ तक नहीं है, जबकि भारत में लंबित मामलों की संख्या 5 करोड़ के करीब है। उन्होंने आश्वासन दिया कि कानून मंत्रालय न्याय को जल्द से जल्द उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में सशस्त्र बल न्यायाधिकरण को कोई भी मदद करने को तैयार है। गौरतलब है कि भारत में मध्यस्थता का भविष्य पर अपने भाषण में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने भी कहा था कि भारत में मध्यस्थता में सामाजिक परिवर्तन को उस तरीके से प्रभावित करने की क्षमता है, जो कानून नहीं कर सकता है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने भारत की नेशनल सिक्योरिटी, विदेश संबंधों और सार्वजनिक व्यवस्था संबंधी गलत सूचना फैलाने के मामले में 8 यूट्यूब चैनल ब्लॉक किए। आईटी नियम, 2021 के तहत सरकार द्वारा ब्लॉक किए गए 8 यूट्यूब चैनल में 7 भारतीय और एक पाकिस्तानी न्यूज चैनल शामिल हैं। भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर डालने वाली सामग्री परोसने के खिलाफ ये कार्रवाई की गई है। जानकारी मुताबिक यूट्यूब चैनल पर भारत के विदेशी संबंधों और सार्वजनिक व्यवस्था से संबंधित दुष्प्रचार फैलाने का भी आरोप हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने राजस्थान के करौली में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की एक शाखा के लॉकर (तिजोरी) से 11 करोड़ रुपये के सिक्के गायब होने के मामले में बृहस्पतिवार को 25 ठिकानों पर तलाशी ली। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि केंद्रीय एजेंसी ने राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश के बाद 13 अप्रैल को इस संबंध में मामला दर्ज किया था। उन्होंने बताया कि दिल्ली, जयपुर, दौसा, करौली, सवाई माधोपुर, अलवर, उदयपुर और भीलवाड़ा में बैंक के लगभग 15 पूर्व अधिकारियों और अन्य के परिसरों की तलाशी ली गई। गौरतलब है कि यह मामला तब सामने आया जब एसबीआई की शाखा ने अगस्त, 2021 में अपने नकदी भंडार में अंतर के बाद पैसे की गिनती करने का फैसला किया था। नकदी की गिनती एक निजी वेंडर ने की। इससे पता चला कि शाखा से 11 करोड़ रुपये के सिक्के गायब थे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोलकाता पुलिस के द्वारा 50 लाख रुपये के साथ गिरफ्तार किए गए झारखंड हाईकोर्ट के राजीव कुमार को ईडी रिमांड पर लेगी। फिलहाल, ईडी ने अधिवक्ता राजीव कुमार केस को टेकओवर कर लिया है। अब पश्चिम बंगाल पुलिस को अधिवक्ता राजीव कुमार को ईडी कोर्ट में पेश करना है। 18 अगस्त को पश्चिम बंगाल पुलिस को अधिवक्ता राजीव कुमार को ईडी की विशेष अदालत के समक्ष हाजिर करना है। इधर, राजीव कुमार को रिमांड पर लेने के लिए ईडी ने तैयारी कर ली है। इसी दिन ईडी कोर्ट को आवेदन देगी। राजीव कुमार की रिमांड मिलने के बाद अधिवक्ता से ईडी जोनल आफिस में पूछताछ करेगी। ईडी इतनी बड़ी रकम मिलने के मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से भी जांच कर रही है। इससे पहले 31 जुलाई को कोलकाता में गिरफ्तारी के बाद से अधिवक्ता राजीव कुमार पश्चिम बंगाल पुलिस की हिरासत में हैं। कारोबारी अमित अग्रवाल ने राजीव पर पीआईएल मैनेज करने के बदले पैसे लेने का आरोप लगाया था, उनके पास से कोलकाता पुलिस ने 50 लाख रुपये नगदी बरामद किए थे। कोलकाता में दर्ज मामले के आधार पर रांची के ईडी जोनल ऑफिस में इस संबंध में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं पर जांच शुरू की गई है। इधर गिरफ्तारी के बाद बंगाल पुलिस की डिटेक्टिव टीम भी जांच कर रही है। टीम ने राजीव कुमार को रिमांड पर लिया था। बंगाल पुलिस ने दावा किया है कि राजीव कुमार के संबंध में कई सनसनीखेज जानकारियां मिलीं है। पश्चिम बंगाल पुलिस का यह दावा है कि राजीव कुमार ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर कीं, इसके बाद प्रभावित पक्षों से काफी वसूली की। कोलकाता पुलिस की टीम ने राजीव कुमार की गिरफ्तारी के बाद उनके रांची स्थित आवास पर छापेमारी की थी। पुलिस ने राजीव कुमार की संपत्ति का विवरण भी तैयार किया था। बंगाल पुलिस ने माना है कि राजीव कुमार ने पीआईएल का इस्तेमाल कर काफी कमाई की है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मवेशी तस्करी घोटाले के संबंध में तृणमूल कांग्रेस नेता अनुब्रत मंडल और उनके परिवार के सदस्यों की 16.97 करोड़ रुपये की सावधि जमा की निकासी पर रोक लगा दी है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मामले की जांच के दौरान एजेंसी को इस सावधि जमा के बारे में पता चला। अधिकारियों ने बताया कि जांच में पाया गया कि मंडल ने कथित तौर पर अपने सहयोगियों को नकदी प्रदान कर इसे बैंक खातों में जमा कराया और बाद में अपने नाम पर सावधि जमा में तब्दील कर दिया। सीबीआई की एक टीम ने बृहस्पतिवार को तृणमूल के बीरभूम जिलाध्यक्ष मंडल को बोलपुर में उनके आवास से गिरफ्तार किया था। उन्होंने अपनी स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देते हुए कई बार सीबीआई के समन को नजरअंदाज किया था। अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई ने आरोप लगाया है कि फरार तृणमूल नेता विनय मिश्रा के भाई विकास मिश्रा और मंडल ने कथित मवेशी तस्कर इनामुल हक के सहयोगियों को संरक्षण प्रदान किया था। उन्होंने कहा कि इनामुल हक इलम बाजार में मवेशियों की खरीद करता था। अधिकारियों ने बताया कि तस्कर इलमबाजार से भारत-बांग्लादेश सीमा तक मवेशियों को ले जाते थे और इस काम में राज्य प्रवर्तन एजेंसियों से उनका बचाव करने में कथित तौर पर मंडल और मिश्रा की भूमिका होती थी। इस बीच, सीबीआई ने बुधवार को आरोप लगाया कि कथित मवेशी तस्करी घोटाले की जांच के सिलसिले में अनुब्रत मंडल की बेटी ने पूछताछ के दौरान उसके अधिकारियों के साथ सहयोग नहीं किया। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, मंडल के यहां स्थित आवास पर पहुंचे सीबीआई के चार सदस्यीय दल से उनकी बेटी सुकन्या मंडल ने कहा कि हाल में मां का निधन होने और पिता की गिरफ्तारी के चलते वह भावनात्मक रूप से अच्छी स्थिति में नहीं है इसलिए अधिकारियों से बात नहीं कर सकती। अधिकारी ने कहा, अनुब्रत मंडल की तरह ही उनकी बेटी ने भी सीबीआई के साथ सहयोग नहीं किया। उसने (सुकन्या) हमारे अधिकारियों से बात करने से मना कर दिया। उन्होंने बताया कि सीबीआई की एक महिला अधिकारी समेत चार सदस्यीय दल जांच के लिए यहां मंडल के निचुपत्ती आवास पर भी गया था। अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय एजेंसी को संदेह है कि इस घोटाले में वित्तीय लेनदेन के लिए मंडल की बेटी के कई बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया। सीबीआई की एक महिला अधिकारी समेत चार सदस्यीय दल जांच के लिए मंडल के निचुपत्ती आवास पर गया था लेकिन सुकन्या के उनसे बातचीत से इंकार करने पर वे करीब 10 मिनट बाद ही वहां से चले गए। सुकन्या एक प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका है। सीबीआई के अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका रहते हुए सुकन्या ने कैसे इतनी संपत्ति अर्जित की। अधिकारी ने कहा, सुकन्या मंडल के नाम पर कई संपत्तियां दर्ज हैं। वह कुछ कंपनियों की निदेशक भी हैं। हम एक स्कूल शिक्षिका के रूप में उसकी आय का विवरण मांगेंगे। कई सवालों का जवाब मिलने की जरूरत है। वहीं, सीबीआई ने कथित मवेशी तस्करी घोटाले की जांच के सिलसिले में यहां अपने अस्थायी कार्यालय में मंडल के लेखाकार से बुधवार सुबह पूछताछ की। अधिकारी ने बताया कि जांच एजेंसी के एक दल ने मंडल के लेखाकार मनीष कोठारी तथा उस बैंक के दो अधिकारियों से दो घंटे तक पूछताछ की, जहां टीएमसी नेता के कई खाते थे। अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय एजेंसी को संदेह है कि इस घोटाले में वित्तीय लेनदेन के लिए मंडल की बेटी के कई बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोविड-19 मामलों में वृद्धि को देखते हुए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने एयरलाइनों को मॉस्क न पहनने वालों पर सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने एयरलाइनों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि यात्री यात्रा के दौरान ठीक से फेस मास्क पहने। यदि कोई यात्री निदेर्शों का पालन नहीं करता है, तो एयरलाइन द्वारा यात्री के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। डीजीसीए ने कहा कि हवाई अड्डों और एयरलाइनों में यात्रियों का औचक निरीक्षण किया जाएगा। डीजीसीए ने कहा है कि एयरलाइनों को यह सुनिश्चित करना होगा कि यात्री पूरी यात्रा के दौरान फेस मास्क ठीक से पहनें और विभिन्न प्लेटफार्मों के जरिए समुचित सैनेटाइजेशन सुनिश्चित किया जाए। बता दें कि, भारत में बुधवार को कोविड-19 के 9,062 नए मामले सामने आने से संक्रमण के कुल मामलों की संख्या 4,42,86,256 पर पहुंच गयी, जबकि उपचाराधीन मरीजों की संख्या कम होकर 1,05,058 हो गयी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 36 और मरीजों के जान गंवाने से मृतकों की संख्या 5,27,134 पर पहुंच गयी है। इस बीमारी से उबरने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 4,36,54,064 हो गयी है जबकि मृत्यु दर 1.19 प्रतिशत है। देशव्यापी कोविड-19 रोधी टीकाकरण अभियान के तहत अभी तक 208.57 करोड़ से अधिक खुराकें दी जा चुकी है।
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