टीम एबीएन, रांची। वकील राजीव कुमार अब मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा होटवार में रहेंगे। इससे पूर्व वह 31 जुलाई से कोलकाता के प्रेसीडेंसी सुधार गृह में बंद थे। कैश कांड में जमानत की सुविधा मिलने के बाद शुक्रवार को राजीव कुमार को ईडी कोर्ट में सशरीर पेश किया गया। अदालत ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में लेते हुए 30 सिंतबर तक के लिए बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा होटवार भेज दिया है। अब उक्त मामले में अगली पेशी 30 सितंबर को होगी। बता दें कि कोलकाता पुलिस के एआरएस विभाग ने हैरिसन स्ट्रीट में अवस्थित व्यावसायिक परिसर से बीते 31 जुलाई की रात को 50 लाख नकद के साथ राजीव को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के 18 वें दिन ईडी ने राजीव कुमार के खिलाफ मनी लाउंड्रिंग का केस किया था।
टीम एबीएन, रांची। मनी लाउंड्रिंग के आरोप में बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा होटवार में बंद निलंबित आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल को बुधवार को ईडी कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश किया गया। उनके साथ जेल में बंद सीए सुमन कुमार एवं बर्खास्त जूनियर इंजीनियर राम बिनोद प्रसाद सिन्हा को भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश किया गया। तीनों की न्यायिक हिरासत अवधि 28 सितंबर तक बढ़ा दी गई है। तीनों की पेशी अब अदालत में 28 सितंबर को होगी। पूजा 11 मई से जेल में है। जबकि राम बिनोद प्रसाद सिन्हा को ईडी ने कोलकाता से 17 जून 2020 को गिरफ्तार किया था। तब से जेल में है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। जम्मू कश्मीर में हुए उप-निरीक्षकों (एसआई) भर्ती घोटाले के मामले में जांच तेज कर दी गई है। इस घोटाले की जांच को लेकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई भी मंगलवार को एक्शन में दिख रही है। सीबीआई की ओर से मंगलवार को देश के कई शहरों में 33 जगहों पर छापेमारी की जा रही है। जिन शहरों में छापेमारी हो रही है, उनमें जम्मू, श्रीनगर, गाजियाबाद, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, दिल्ली, गांधीनगर, बेंगलुरु, शामिल हैं। जम्मू कश्मीर एसएसबी के पूर्व चेयरमैन खालिद जहांगीर और परीक्षा नियंत्रक अशोक कुमार के ठिकानों पर भी छापेमारी की जा रही है। इसके साथ ही जम्मू कश्मीर पुलिस और सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स के अफसरों के ठिकानों पर भी छापे मारे जा रहे है। बता दें कि इसी साल 22 जुलाई को जम्मू कश्मीर सर्विसेज सेलेक्शन बोर्ड ने पुलिस के उप निरीक्षकों के पद के लिए आयोजित हो रही लिखित परीक्षा को रद्द कर दिया था। 4 जून को घोषित हुए थे नतीजे : जम्मू कश्मीर शासन की ओर से पहले ही इस भर्ती घोटाले को लेकर सीबीआई जांच का आदेश दिया जा चुका था। जेकेएसएसबी ने जम्मू कश्मीर के विभिन्न स्थानों पर 27 मार्च, 2022 को 2022 के लिए जम्मू कश्मीर पुलिस के एसआई पदों के लिए परीक्षा आयोजित की थी। यह परीक्षा ओएमआर आधारित थी। इसका रिजल्ट 4 जून, 2022 को घोषित किया गया था। अनियमितताओं का लगा था आरोप : इस परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप लगने के बाद जम्मू कश्मीर सरकार ने एक कमेटी गठित कर मामले की आंतरिक जांच कराई। जांच के दौरान पाया गया कि परीक्षा आयोजित करने में अनेक अनियमितता बरती गई थी। साथ ही आपराधिक षडयंत्र के जरिए अनेक परीक्षार्थियों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई थी। ये परीक्षा 1200 पदों पर भर्ती के लिए रखी गई थी। सीबीआई में अगस्त में भी इस मामले में रेड की थी। सीबीआई ने इस मामले में जम्मू कश्मीर सेवा चयन बोर्ड के सदस्य समेत कुल 33 लोगों पर विभिन्न आपराधिक धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। ज्ञानवापी मस्जिद और श्रृंगार गौरी का मामला सुनवाई सुनने योग्य है कि नहीं इस पर फैसला सुनाते हुए वाराणसी जिला अदालत के जज डॉ अजय कृष्ण विश्वेश ने हिंदू पक्ष में फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस मामले में जिला अदालत में नियमित सुनवाई शुरू हुई थी। सिविल जज रवि दिवाकर के सर्वे के आदेश के बाद मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। ज्ञानवापी मस्जिद अंजुमन इंतजामिया कमेटी की याचिका 7 रूल 11 को खारिज करते हुए जिला जज ने हिंदू पक्ष के दावे को सही ठहराया और कहा कि यह वाद सुनवाई योग्य है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 22 सितम्बर को होगी। जिला जज के फैसले के बाद अब इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होगी। फैसले के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन ने कहा कि जिला अदालत ने मंदिर के पक्ष में फैसला सुनाते हुए मुस्लिम पक्ष की याचिका 7 रूल 11 को खारिज कर दिया। यह एक बड़ी जीत है। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने यह माना है कि मामला सुनवाई योग्य है और इस मामले में 1991 का वर्शिप एक्ट लागू नहीं होता। अब इस मामले में 22 सितंबर को अगली सुनवाई होगी। विष्णु जैन ने कहा कि इस मामले से जुड़ी पूरी लीगल टीम आज ही काशी विश्वनाथ के दर्शन भी करने जायेगी। धर फैसले के बाद भाजपा की तरफ से भी प्रतिक्रिया आई है। प्रदेश भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि अदालत का फैसला स्वागत योग्य है। अभी तो पूजा के अधिकार को लेकर यह लड़ाई थी। अभी यह लड़ाई लंबी चलेगी। उन्होंने साथ ही लोगों से शांति भी बनाये रखने की अपील की। राकेश त्रिपाठी ने कहा कि 1991 वर्शिप एक्ट का भाजपा हमेशा से ही विरोध करती रही है। अब कोर्ट का फैसला आ गया है। सभी को शांति और सौहार्द बनाये रखने की जरूरत है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में हुए घोटाले के मामले में एक दशक बाद सुनवाई शुरू होगी। दिल्ली में आयोजित हुए राष्ट्रमंडल खेलों में कई तरह के प्रबंध करने के दौरान अनियमितताएं बरती गई थीं और 600 करोड़ का घोटाला हुआ था। इस मामले पर प्राथमिकी दर्ज होने के लगभग 11 साल बाद सुनवाई हो रही है। अधिकारियों ने बताया है कि आयोजन समिति के पूर्व सदस्यों और अन्य के खिलाफ मुकदमा अगले महीने शुरू होगा। सीबीआई की एक विशेष अदालत ने 25 जनवरी को आरोपपत्र पर संज्ञान लिया है, जिसे एजेंसी ने प्रस्तुत किया था। इसमें आयोजन समिति के सदस्य एके सक्सेना, राजेंद्र प्रसाद गुप्ता, सुरजीत लाल और के उदय कुमार रेड्डी के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दी गई है। मामला राष्ट्रमंडल खेलों के लिए सामान की आपूर्ति से संबंधित है, जिसे कथित तौर पर अत्यधिक दरों पर खरीदा और किराए पर लिया गया था। इससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ था। एजेंसी ने अपने आरोप पत्र में जीएल मेरोफॉर्म के तत्कालीन निदेशक बीनू नानू, वायुसेना के पूर्व कप्तान और आपूर्तिकर्ता प्रवीण बख्शी और कम्फर्ट नेट ट्रेडर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक संदीप वाधवा को भी आरोपी बनाया है। वाधवा कथित रूप से प्राथमिकी में नामित नुस्ली इंडिया लिमिटेड से जुड़ा हुआ है, जिसे राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित विभिन्न राष्ट्रमंडल खेलों, 2010 के लिए टेंट, केबिन आदि की आपूर्ति के लिए लगभग 140 करोड़ रुपये का ठेका मिला था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल के अपराध जांच विभाग ने आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में रविवार को भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी देवाशीष धर और उनके एक करीबी कारोबारी की पांच संपत्तियों पर छापे मारे। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। कूचबिहार के पूर्व पुलिस अधीक्षक धर को पिछले साल के विधानसभा चुनावों के बाद निलंबित कर दिया गया था। चुनावों के दौरान जिले में केंद्रीय सुरक्षा बलों की कथित गोलीबारी में चार लोग मारे गये थे। अधिकारियों ने बताया कि साल्ट लेक इलाके के मेट्रोपॉलिटन सोसाइटी और जोधपुर पार्क में धर और व्यवसायी सुदीप्तो रॉयचौधरी के आवास सहित पांच संपत्तियों पर छापेमारी की गई। उन्होंने बताया कि यह छापेमारी सीआईडी द्वारा धर और रॉयचौधरी के खिलाफ आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने के मामले में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर की गयी थी। धर ने कहा कि वह सीआईडी की जांच में पूरी तरह सहयोग करेंगे। रॉयचौधरी ने कहा कि उन्हें कानून के शासन पर पूरा भरोसा है। दोनों ने दावा किया कि उन्होंने कभी एक दूसरे के साथ कोई वित्तीय लेनदेन नहीं किया है।
टीम एबीएन, रांची। भाजपा नेत्री नुपुर शर्मा के विवादित बयान के खिलाफ रांची में हुए बवाल और हिंसा मामले को लेकर सीआईडी ने अपनी चार्जशीट दायर कर दी है। रांची के मेन रोड में 10 जून को जुम्मा की नमाज के बाद हिंसा हुई थी। इस दौरान उपद्रवियों द्वार जमकर तोड़फोड़ की गई थी, वहीं इस हिंसा में करीब दर्जन भर पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे। 10 जून को हुई हिंसा के मामले सीआईडी ने अपनी चार्जशीट में बताया है कि जुमे की नमाज के बाद उपद्रव, पत्थरबाजी व गोलीबारी की गई थी। सीआईडी ने चार्जशीट में ये भी जिक्र किया है कि उपद्रवी सुनियोजित तरीके से इस हिंसा में शामिल हुए थे। उनके पास भरी मात्रा में पत्थर और हथियार भी थे। सुनियोजित तरीके की इस साजिश का उद्देश्य सांप्रदायिक तनाव भड़काने के साथ-साथ शहर को सांप्रदायिकता की आग में झोंकने का था, वहीं जब उपद्रवियों को रोकने पुलिस पहुंची थी तो उपद्रवियों ने उन्हें भी अपना निशान बनाया। सीआईडी की जांच के ये बातें भी सामने आई है कि पुलिस अफसरों पर जानलेवा हमला करने से भी उपद्रवी नहीं चुके। सीआईडी की चार्जशीट में फिलहाल मोहम्मद अमजद, इरफान जुवेर आलम उर्फ इरफान अंसारी, मोहम्मद माज, अरमान हुसैन, सरफराज आलम, शहबाज, अफसर आलम व रमजान अली व तीन अन्य शामिल हैं। इनके अलावा चार्जशीट में उन दोनों मृतकों मुद्दस्सिर उर्फ कैफी व मोहम्मद साहिल के नाम का भी जिक्र है जिनकी उपद्रव के दौरान गोली लगने से मौत हुई थी। 10 जून को हुई हिंसा मामले में रांची के विभिन्न थानों में कुल 47 केस दर्ज हैं, जिनमें से एक केस जो डेली मार्केट थाने में टाउन सीओ के द्वारा दर्ज कराया गया था, उस केस को सीआईडी ने टेकओवर किया था। इस हिंसा मामले में बिहार और यूपी के कनेक्शन की भी बात सामने आई थी, वहीं इसके साथ हीं कई ऐसे मैसेजे भी मिले थे जिससे ये बातें पुख्ता हो रही थी कि इस हिंसा के पीछे सुनियोजित साजिश है। फिलहाल इसकी भी जांच की जा रही है कि आखिर वो कौन लोग थे जो दूसरे राज्यों से रांची पहुंच राजधानी का अमन-चैन छीनने की साजिश रचे थे।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के बहुचर्चित कैश कांड में फंसे कांग्रेस के निलंबित विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष के कोर्ट से 8 सप्ताह का समय मांगा है। झारखंड कांग्रेस से निलंबित तीन विधायक इरफान अंसारी, राजेश कच्छप, नमन विक्सल कोंगाड़ी के दल बदल के मामले में बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष के कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान दोनों पक्ष के अधिवक्ता के साथ-साथ निलंबित विधायक भी आॅनलाइन जुड़े थे। कैश कांड में फंसे कांग्रेस के विधायकों के खिलाफ कांग्रेस विधायक दल नेता आलमगीर आलम की शिकायत पर विधानसभा अध्यक्ष रबीन्द्रनाथ महतो ने सुनवाई की। सुनवाई के दौरान निलंबित विधायकों के अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने विधानसभा अध्यक्ष से 8 हफ्ते का समय मांगा है। उनका कहना था कि तीनों विधायक फिलहाल कोलकाता में हैं। सभी राज्य से बाहर हैं, इसलिए जवाब दाखिल करने के लिए तीनों का कोलकाता से बाहर झारखंड आना जरूरी है। इस बात को ध्यान में रखते हुए उन्हें समय दिया जाए। हालांकि आलमगीर आलम के अधिवक्ता उज्ज्वल आनंद ने इस पर आपत्ति दर्ज करते हुए कहा कि जिस मामले की सुनवाई 3 माह में पूरी होनी है, उस मामले में 8 सप्ताह का समय मांगना तर्क संगत नहीं है। इस पर निलंबित विधायक के अधिवक्ता ने कहा कि निर्णय अध्यक्ष महोदय को लेना है। उन्होंने अनुरोध किया है वो 8 सप्ताह का समय दे या जो अच्छा समझे। विधानसभा अध्यक्ष ने दोनों पक्ष को सुनने का बाद फिलहाल सुनवाई स्थगित कर दी। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि अगली सुनवाई के बारे में जानकारी दी जाएगी। आपको बता दें कि पिछली सुनवाई में विधानसभा अध्यक्ष ने निलंबित विधायकों को आवश्यक रूप से जुड़ने का आदेश दिया था। इस आदेश का असर भी दिखा और तीनों विधायक वर्चुअल कांफ्रेंस के जरिये सुनवाई में जुड़े थे।
टीम एबीएन, देवघर/रांची। झारखंड के देवघर एयरपोर्ट की सुरक्षा चूक के मामले में गोड्डा के भाजपा सांसद निशिकांत दुबे, सांसद मनोज तिवारी समेत 9 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। बता दें कि एयरपोर्ट के डीएसपी सुमन आनन की शिकायत पर कुंडा पुलिस थाने में यह FIR दर्ज की गई है। FIR के मुताबिक, 31 अगस्त को गोड्डा से लोकसभा सांसद निशिकांत दुबे, उनके बेटे कनिष्क कांत दुबे, माहिकांत दुबे, मुकेश पाठक, देवता पांडेय, पिंटू तिवारी, सांसद मनोज तिवारी समेत 9 लोग चार्टर्ड विमान से देवघर आए थे। वहीं वापसी के दौरान वे जबरन ATC रूम में घुस गए। FIR में उनपर आरोप लगाया है कि एयरपोर्ट के एटीसी में अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर जबरन एटीसी क्लीयरेंस लेकर प्रवेश किया। बता देंकि देवघर एयरपोर्ट में नाइट टेक ऑफ या लैंडिंग की सुविधा नहीं है। शिकायत के मुताबिक, नाइट ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध न होने के बावजूद एटीसी क्लीयरेंस के लिए दबाव बनाया गया।
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