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अब जामा मस्जिद में लड़कियों की एंट्री पर कोई रोक नहीं
Published / 2022-11-24 20:40:28
अब जामा मस्जिद में लड़कियों की एंट्री पर कोई रोक नहीं

पाबंदी के चंद घंटे बाद बदला फैसला  एबीएन सेंट्रल डेस्क। दिल्ली की मशहूर जामा मस्जिद के प्रशासन द्वारा मुख्य द्वारों पर नोटिस लगाकर मस्जिद में लड़कियों के अकेले या समूह में प्रवेश पर रोक लगाते ही विवाद खड़ा हो गया। ऐसे में दिल्ली उपराज्यपाल (एलजी) वीके सक्सेना ने जामा मस्जिद के शाही इमाम बुखारी से बात की। एलजी ने प्रतिबंध लगाने वाले आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया। सूत्र के मुताबिक, जिसके बाद इमाम बुखारी ने आदेश को रद्द करने पर सहमति जताई है। इस अनुरोध के साथ ही कहा कि आगंतुक मस्जिद की पवित्रता का सम्मान करें और बनाए रखें।  बता दें कि गुरुवार को ही जामा मस्जिद के प्रशासन ने मुख्य द्वारों पर नोटिस लगाकर मस्जिद में लड़कियों के अकेले या समूह में प्रवेश पर रोक लगाई थी। इस फैसले पर विवाद शुरू होने के बाद शाही इमाम ने कहा था कि यह आदेश नमाज पढ़ने आने वाली लड़कियों के लिए नहीं है। महिला अधिकार कार्यकतार्ओं ने इस फैसले को प्रतिगामी तथा अस्वीकार्य बताया। मस्जिद प्रशासन के सूत्रों ने कहा कि तीन मुख्य प्रवेश द्वारों के बाहर कुछ दिन पहले नोटिस लगाए गए थे, जिन पर तारीख नहीं थी। हालांकि, एलजी के अनुरोध के बाद आदेश निरस्त हो गया है। शाही इमाम ने दिया था ये तर्क बता दें कि शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने जामा मस्जिद में लड़कियों के प्रवेश पर रोक लगाते हुए तर्क दिया था कि जामा मस्जिद इबादत की जगह है और इसके लिए लोगों का स्वागत है। लेकिन लड़कियां अकेले आ रही हैं और अपने दोस्तों का इंतजार कर रही हैं। यह जगह इस काम के लिए नहीं है। इस पर पाबंदी है। बुखारी ने यह भी कहा था कि ऐसी कोई भी जगह, चाहे मस्जिद हो, मंदिर हो या गुरद्वारा हो, ये इबादत की जगह हैं। इस काम के लिए आने पर कोई पाबंदी नहीं है। आज ही 20-25 लड़कियां आईं और उन्हें दाखिले की इजाजत दी गई। वहीं, दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने इसे महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन बताते नोटिस जारी किया। यह जानकारी उन्होंने ट्वीट करके दी है। उनका कहना था कि जामा मस्जिद में महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी लगाना पूरी तरह गलत है। पुरुष की तरह महिलाओं को भी इबादत का हक है।

झारखंड : अवैध माइनिंग और वसूली रैकेट के कोड वर्ड ईडी ने किया डिकोड
Published / 2022-11-23 10:02:32
झारखंड : अवैध माइनिंग और वसूली रैकेट के कोड वर्ड ईडी ने किया डिकोड

टीम एबीएन, रांची। झारखंड में अवैध माइनिंग और वसूली के रैकेट की मॉडस ऑपरेंडी यानी संचालन के तौर-तरीकों के बारे में ईडी ने चौंकाने वाले फैक्ट डिकोड किये हैं। मसलन, घोटाले में संलिप्त अफसर अवैध वसूली की राशि एक-दूसरे को ट्रांसफर करने के दौरान लाख रुपये के लिए किलो कोड वर्ड का इस्तेमाल करते थे। अगर किसी अफसर ने दूसरे को अवैध वसूली के अगर 10 लाख रुपये भेजे तो इसके कन्फर्मेशन के लिए जो मैसेज भेजा जाता था, उसमें लिखा होता था 10 किलो भेजा। पैसे पाने वाला अफसर भी इसी तरह जवाब देता था। 10 किलो मिला या 5 किलो प्राप्त हुआ। ईडी ने अवैध माइनिंग घोटाले की जांच के दौरान सामने आई ऐसी कई जानकारियां राज्य सरकार को भेजी गई एक रिपोर्ट में साझा की है। अवैध माइनिंग और वसूली के मामले में जांच और अभियुक्तों से पूछताछ के दौरान मिली जानकारियों के आधार पर ईडी अब झारखंड सरकार की पूर्व माइनिंग सेक्रेटरी पूजा सिंघल सहित कम से कम तीन जिला- साहिबगंज, पाकुड़ और दुमका के डिस्ट्रिक्ट माइनिंग अफसरों को अभियुक्त बनाने की तैयारी कर रही है। सीनियर आईएएस पूजा सिंघल को ईडी ने मनरेगा घोटाले से अर्जित राशि की मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में बीते 11 मई को गिरफ्तार किया था। इसके पहले 6-7 मई को पूजा सिंघल और उनसे संबंधित लोगों के डेढ़ दर्जन से भी ज्यादा ठिकानों पर छापामारी कर 19 करोड़ रुपये नगद समेत निवेश और मनी लांड्रिंग से जुड़े कई दस्तावेज बरामद किये गये थे। नगद राशि उनके लिए काम करने वाले सीए सुमन कुमार के आवास और दफ्तर से जब्त की गई थी। उनके मोबाइल फोन से मिले चैट और उनसे हुई पूछताछ के आधार पर ईडी ने अपनी चार्जशीट में बताया है कि वह डिस्ट्रिक्ट माइनिंग अफसरों और माइन्स सेक्रेटरी पूजा सिंघल के बीच अवैध वसूली के एजेंट की भूमिका में थे। माइनिंग अफसर सीधे पूजा सिंघल के बजाय उन तक रुपये पहुंचाते थे। ईडी ने राज्य सरकार को जो रिपोर्ट भेजी है, उसमें पूजा सिंघल एवं अन्य के खिलाफ दायर चार्जशीट की कॉपी भी संलग्न है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अवैध माइनिंग के रैकेट से पूजा सिंघल ने बड़े पैमाने पर अवैध कमाई की है। इस रिपोर्ट में संलग्न साक्ष्यों के आधार पर राज्य सरकार पूजा सिंघल एवं अन्य अफसरों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज करायेगी। ईडी के सूत्रों के अनुसार, अवैध खनन और वसूली में साहिबगंज के डिस्ट्रिक्ट माइनिंग अफसर विभूति कुमार, दुमका के डीएमओ कृष्ण चंद्र किस्कू और पाकुड़ के डीएमओ प्रदीप शाह की भूमिका को लेकर पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं। इन अफसरों ने पूछताछ में भी अवैध वसूली की बात स्वीकार की है। इन तीनों के खिलाफ भी ईडी जल्द ही चार्जशीट फाइल करेगी।इनके अलावा पूजा सिंघल के पति अभिषेक झा के कई बैंक अकाउंट्स में लेनदेन की जांच के दौरान भी ईडी को कई चौंकाने वाले तथ्य हाथ लगे हैं। ईडी ने अभिषेक झा की ओर से इस मामले में अग्रिम जमानत के लिए दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत को बताया है कि अभिषेक झा ने ऑस्ट्रेलियन डॉलर की बड़ी रकम इंडियन करेंसी में एक्सचेंज करायी है। अभिषेक झा ने डॉलर को रुपये में एक्सचेंज किये गये पैसो को अपने अकाउंट में जमा तो किया, लेकिन यह स्पष्ट तौर पर नहीं बताया कि पैसा आने का जरिया क्या था।

नाबालिग के दुष्कर्मी को 20 साल की कैद
Published / 2022-11-21 23:22:45
नाबालिग के दुष्कर्मी को 20 साल की कैद

अदालत ने 1 लाख जुर्माने की रकम पीड़ित को दिये जाने का दिया आदेशअदालत के आदेश के बाद 4 साल पहले पुलिस ने दर्ज की थी रिपोर्टएबीएन सेंट्रल डेस्क। जिला अदालत ने 13 साल की बच्ची के रेपिस्ट मकसूद को 20 साल के कैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने पीड़िता को बतौर प्रतिकार जुर्माने से मिलने वाली 1 लाख की धनराशि देने का आदेश दिया है।पश्चिम शरीरा में 4 साल पहले हुए रेप के मामले में पुलिस ने आरोपी के खिलाफ केस की फटकार के बाद दर्ज किया था। पीड़ित व उसकी मां ने इंसाफ पाने के लिए कई दिनों तक पुलिस अधिकारियों के चक्कर लगाने के बाद अदालत से गुहार लगायी थी।

उत्तर प्रदेश : मुख्तार अंसारी के रिश्तेदार की 3.25 करोड़ की संपत्ति कुर्क
Published / 2022-11-21 23:07:22
उत्तर प्रदेश : मुख्तार अंसारी के रिश्तेदार की 3.25 करोड़ की संपत्ति कुर्क

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अवैध तरीके से धन, भू-सम्पत्ति व अचल सम्पत्ति अर्जित करने वाले माफियाओं के विरुद्ध अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत अभियुक्त मंसूर अंसारी और उसकी पत्नी आबदा अंसारी की अवैध ढंग से अर्जित की गयी संपत्ति कुर्क की गयी है। मंसूर अंसारी मुख्तार अंसारी का करीबी रिश्तेदार है। 25 अक्टूबर 1991 को मंसूर अंसारी के नाम पर मौजा चक हमीद परगना व तहसील गाजीपुर में रकबा 38 वर्गमीटर भू-सम्पत्ति खरीदी गयी थी। उस पर भवन निर्माण हुआ है।26 फरवरी 2016 को मंसूर ने मौजा कपूरपुर शहर, गाजीपुर में नगर पालिका न. 193 का जुज भग रकबा 78.10 वर्गमीटर स्वंय के नाम से भू-संपत्ति खरीदी है। उस जमीन पर भी भवन का निर्माण हुआ है।तीसरी अवैध सम्पत्ति है जो 27 जनवरी 2004 को अंसारी ने खरीदी है। अभियुक्त ने यह भूमि अपनी पत्नी के नाम पर मौजा कपूरपुर शहर, गाजीपुर में नगर पालिका न. 26 का रकबा 59 वर्गमीटर क्रय की। इस पर भवन निर्माण हुआ है।अवैध तरीके से अर्जित धन से खरीद फरोख्त की गयी इन जमीनों का दाखिल खारिज न कराना और अन्य अवैध क्रिया-कलाप किये जाने के कारण उपरोक्त अभियुक्त से सम्बन्धित अचल भू-सम्पत्ति को गाजीपुर पुलिस प्रशासन ने सोमवार को कुर्की की कार्रवाई की है। इस पूरी सम्पत्ति की कुल अनुमानित कीमत तीन करोड़ 25 लाख रुपये आंकी गयी है।

छावला दुष्कर्म कांड :  उपराज्यपाल से मंजूरी मिलने के बाद दोषियों को बरी होने के फैसले को चुनौती देगी दिल्ली सरकार
Published / 2022-11-21 17:42:00
छावला दुष्कर्म कांड : उपराज्यपाल से मंजूरी मिलने के बाद दोषियों को बरी होने के फैसले को चुनौती देगी दिल्ली सरकार

एबीएन सेंट्रल डेस्क। उपराज्यपाल वी के सक्सेना ने 2012 के छावला सामूहिक दुष्कर्म एवं हत्या मामले में मौत की सजा पाने वाले तीन दोषियों को बरी करने के सुप्रीमकोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका दायर करने की मंजूरी दे दी है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सक्सेना ने मामले में दिल्ली सरकार का प्रतिनिधित्व करने के लिए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की सेवाएं लेने की भी मंजूरी दे दी है। अधिकारी ने कहा, उपराज्यपाल ने तीनों आरोपियों को बरी करने के उच्चतम न्यायालय के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करने की मंजूरी दे दी है। दिल्ली की एक निचली अदालत ने द्वारका के छावला इलाके में नौ फरवरी 2012 को 19 वर्षीय एक युवती के सामूहिक दुष्कर्म एवं हत्या मामले में तीनों आरोपियों को मौत की सजा सुनाई थी, जिसे दिल्ली उच्च न्यायालय ने बरकरार रखा था। आरोपियों ने सजा के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया था, जिसने सात नवंबर 2022 के अपने फैसले में निचली अदालत और उच्च न्यायालय के फैसले को रद्द कर दिया था।

जज हत्याकांड : हाई कोर्ट ने मांगी अपडेट रिपोर्ट
Published / 2022-11-18 21:13:56
जज हत्याकांड : हाई कोर्ट ने मांगी अपडेट रिपोर्ट

टीम एबीएन, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डा रवि रंजन और न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ में धनबाद के जज उत्तम आनंद हत्याकांड मामले की सुनवाई हुई। सीबीआई ने अदालत में प्रगति रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में सीबीआई ने अदालत को बताया गया कि इस मामले में व्हाट्एप चैट मंगाया गया है। इसके लिए भारत सरकार के मिनिस्ट्री आॅफ होम अफेयर्स में आवेदन दिया गया है। आवेदन अभी लंबित है। अदालत ने प्रगति रिपोर्ट देखने के बाद सीबीआई को समय देते हुए अपडेट जानकारी पेश करने का निर्देश दिया। इससे पूर्व सुनवाई में सीबीआई ने अदालत को बताया था कि इस मामले में अनुसंधान को आगे बढ़ाने के लिए इंटरपोल की मदद ली जायेगी। उल्लेखनीय है कि जज हत्या मामले में दो दोषियों को उम्रकैद की सजा दी गई है। धनबाद सीबीआई की विशेष अदालत में छह अगस्त को दोषी राहुल वर्मा और लखन वर्मा को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। साथ ही दोनों पर 25 -25 हजार का जुर्माना भी लगाया था।

झारखंड : रिम्स प्रबंधन को हाई कोर्ट की फटकार
Published / 2022-11-18 21:05:11
झारखंड : रिम्स प्रबंधन को हाई कोर्ट की फटकार

टीम एबीएन, रांची। रिम्स की बदहाली और रिम्स से जुड़े अन्य मामलों में शुक्रवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। हाई कोर्ट ने रिम्स प्रबंधन को फटकार लगाते हुए कहा कि शर्म आनी चाहिए कि एक ट्रॉली लेने के लिए मोबाइल गिरवी रखना पड़ता है। झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डॉ रवि रंजन और जस्टिस सुजित नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने विभिन्न मामलों की सुनवाई एक साथ की। रिम्स से जुड़ी कई रिट याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान रिम्स की बदहाली पर कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की। वहीं, नियुक्ति से जुड़े मामले पर अदालत कहा कि जांच के लिए कमेटी गठित होगी। इसके साथ कोर्ट ने रिम्स की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि रिम्स कोर्ट चला रहा। हाई कोर्ट के खंडपीठ में रिम्स में फोर्थ ग्रेड पर होने वाली नियुक्ति से संबंधित मामले में भी सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने विज्ञापन में की गई गलतियों की जांच कराने की बात कही। अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि विज्ञापन में झारखंड का नागरिक होने की शर्त लगाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ जांच कमेटी का गठन किया जाएगा। इस दौरान रिम्स ने माना कि अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 23 नवम्बर की तिथि निर्धारित की है। उल्लेखनीय है कि पूर्व में अदालत में उक्त पदों पर चयनित हुए अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देने पर रोक लगा दी थी।

ईडी आफिस से 9.15 घंटे बाद निकले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन
Published / 2022-11-17 23:13:13
ईडी आफिस से 9.15 घंटे बाद निकले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन

मुख्यमंत्री की पत्नी कल्पना सोरेन लेने पहुंची थी ईडी दफ्तर 9.15  घंटे की पूछताछ के बाद पत्नी कल्पना संग निकले बाहर टीम एबीएन, रांची। एक हज़ार करोड़ से अधिक अवैध खनन घोटाले मामले में ईडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बुधवार को 9.15 घंटे तक पूछताछ की। पूछताछ के बाद रात 9.40 बजे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ईडी कार्यालय से बाहर निकले और सीएम आवास के लिए अपने काफिल के साथ रवाना हो गए। बताया जा रहा है कि सीएम की पत्नी कल्पना सोरेन उन्हें लेने के लिए ईडी कार्यालय पहुंची थी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बुधवार की दोपहर 11.55  बजे ईडी कार्यालय पहुंचे थे। ईसके बाद से इडी की टीम उनसे लगातार पूछताछ कर रही थी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूछताछ के लिए ईडी कार्यालय के बाहर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। ईडी ऑफिस के बाहर 200 संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी, ताकि किसी प्रकार की कोई गलत गतिविधि उत्पन्न ना हो सके। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पहुंचने के पहले रांची जिला प्रशासन ने ईडी ऑफिस समेत संवेदनशील जगहों पर धारा 144 लगा दिया था, ताकि राजनीतिक दल के कार्यकर्ता शक्ति प्रदर्शन न कर सके। बताते चलें कि हेमंत सोरेन ने ईडी से 3 हफ्ते का समय मांगा था, लेकिन ईडी ने 3 हफ्ते का समय देने से इंकार कर दिया था। ईडी ने दोबारा समन जारी कर 17 नवंबर को पूछताछ के लिए बुलाया था।

सेना में महिलाओं के लिए नेवी ने खोला यूनिवर्सिटी एंट्री स्कीम का दरवाजा
Published / 2022-11-17 10:22:17
सेना में महिलाओं के लिए नेवी ने खोला यूनिवर्सिटी एंट्री स्कीम का दरवाजा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। सेना में महिलाओं की एंट्री के लिए एक और बंद दरवाजा खोल दिया गया है, जो अब तक सिर्फ पुरुषों के लिए हुआ करता था। वो है नेवी यूनिवर्सिटी एंट्री स्किम। ये स्कीम अब तक सिर्फ पुरुषों के लिए थी। लेकिन अब इसके जरिए महिलाओं को भी इंडियन नेवी में जॉब मिल सकेगी। ये जानकारी केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में दी है। इस संबंध में एक याचिका की सुनवाई के दौरान केंद्र ने बताया कि नेवी यूनिवर्सिटी एंट्री स्कीम के जरिए नौसेना के कुछ ब्रांचों में जॉब के लिए अब महिलाएं भी अप्लाई कर सकती हैं। हाईकोर्ट में बताया गया कि नेवी के एग्जीक्यूटिव ब्रांच जेनरल सर्विस (एक्स) कैडर, आईटी, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल शाखाओं में यूनिवर्सिटी एंट्री स्किम के जरिए महिलाओं के लिए नौकरी का रास्ता साफ कर दिया गया है।महिलाओं के साथ भेदभाव क्योंसेना की भर्तियों में महिलाओं के साथ भेदभाव का आरोप लगाते हुए अटॉर्नी कुश कालरा ने दिल्ली हाई कोर्ट में जनहित याचिका लगाई थी। इसपर हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा कि महिलाओं को भी पुरुषों के समान अवसर देने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाये हैं?इसके जवाब में केंद्र की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जेनरल चेतन शर्मा ने कहा कि याचिका में जो मुद्दा उठाया गया है, उसे पहले ही हल किया जा चुका है। सरकार ने महिलाओं को इंडियन नेवी यूनिवर्सिटी एंट्री स्कीम के जरिए नौसेना के आईटी, टेक्निकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल ब्रांच, एग्जीक्यूटिव ब्रांच जेनरल सर्विस कैडर में जाने की अनुमति दे दी है।

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