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सरकारी शिक्षकों को छुट्टी लेने के लिए अब अपनानी होगी ये प्रक्रिया
Published / 2022-12-24 13:52:10
सरकारी शिक्षकों को छुट्टी लेने के लिए अब अपनानी होगी ये प्रक्रिया

शिक्षा सचिव ने संशोधन संबंधी आदेश किया जारीटीम एबीएन, रांची। झारखंड के सरकारी स्‍कूलों में कार्यरत शिक्षकों को अब छुट्टी लेने से पहले नई प्रक्रिया का पालन करना होगा। छुट्टी लेने संबंधी पुरानी प्रक्रिया को खत्‍म कर दिया गया है। इसका पत्र शिक्षा सचिव के रवि कुमार ने 23 दिसंबर को जारी कर दिया।सचिव ने जारी आदेश में लिखा है कि विभागीय (पत्रांक- 2761, दिनांक- 7.12.2022) द्वारा विद्यालय में शैक्षणिक व्यवस्था के सुदृढीकरण एवं शिक्षकों के अवकाश पर जाने के संदर्भ में अवकाश स्वीकृति से संबंधित कतिपय दिशा-निर्देश निर्गत किये गये हैं।उक्‍त निर्देश में कहा गया था कि किसी भी विद्यालय में शिक्षक के अवकाश पर जाने की सूचना पूर्व से विनिर्दिष्ट व्हाट्सएप पर देते हुए यथावश्यक संबंधित जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक से स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा, ताकि विद्यालय में आवश्यक अतिरिक्त अनुश्रवण सुनिश्चित किया जा सके। विद्यालय में शिक्षण कार्य व मध्याह्न भोजन संबंधी कार्य सुचारु रूप से चलता रहे।इसे विलोपित करते ये निर्देश जारी किया गया है। उसके मुताबिक, किसी विद्यालय के शिक्षक अवकाश में जाने पर छुट्टी प्रधानाध्यापक, प्रभारी प्रधानाध्यापक से और एकल शिक्षक विद्यालय के शिक्षक एवं प्रधानाध्यापक व प्रभारी प्रधानाध्यापक के अवकाश में जाने पर अवकाश प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी से स्वीकृति कराना सुनिश्चित करेंगे, ताकि विद्यालय में आवश्यक अतिरिक्त अनुश्रवण का कार्य सुनिश्चित किया जा सके। विद्यालय में शिक्षण कार्य एवं मध्याह्न भोजन संबंधी कार्य सुचारु रूप से चलता रहे। अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के मुख्‍य प्रवक्‍ता नसीम अहमद ने कहा कि बीते बुधवार को संगठन का शिष्‍टमंडल शिक्षा सचिव से मिला था। उन्‍होंने कहा था कि शिक्षकों के अवकाश स्वीकृति में उत्‍पन्‍न हुई भ्रांतियों को दूर किया जायेगा। एक संशोधन पत्र जल्द निर्गत कर दिया जायेगा। इसके तहत ही शुद्धि पत्र जारी किया गया है।

सरकारी विभागों में 10 साल से कार्यरत कर्मियों की सेवा होगी नियमित
Published / 2022-12-22 23:22:50
सरकारी विभागों में 10 साल से कार्यरत कर्मियों की सेवा होगी नियमित

झारखंड हाई कोर्ट ने जारी किया आदेशटीम एबीएन, रांची। झारखंड हाई कोर्ट  ने राज्य सरकार के ट्रांसपोर्ट एवं अन्य विभागों में 10 साल से अधिक समय से कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मियों की सेवा नियमित  करने का आदेश दिया है। जस्टिस डॉ एसएन पाठक की कोर्ट ने गुरुवार को नरेंद्र कुमार तिवारी सहित 11 अन्य लोगों की अलग-अलग याचिकाओं पर यह आदेश पारित किया।राज्य सरकार के ट्रांसपोर्ट एवं अन्य विभागों में कॉन्ट्रैक्ट पर 10 साल से ज्यादा वक्त से काम करने वाले कर्मियों ने अपनी सेवा नियमित करने की राज्य सरकार से गुहार लगायी थी, लेकिन राज्य सरकार ने उनके आग्रह को नामंजूर कर दिया था। इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। वर्ष 2017 में हाई कोर्ट ने भी उनकी याचिका को खारिज कर दिया था।इसके बाद सभी प्रार्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने विभाग को केस रिमांड बैक कर दिया और गाइडलाइन फ्रेम कर ट्रांसपोर्ट विभाग में 10 साल से ज्यादा समय से काम कर रहे कर्मियों को नियमित करने पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार की ओर से फिर से उनके आग्रह को खारिज कर दिया गया और इन्हें वर्ष 2018 में नौकरी से हटा दिया गया।नौकरी से हटाये गये लोगों ने पुन: हाई कोर्ट में रिट याचिका दाखिल की थी। कोर्ट ने सभी प्रार्थियों की याचिका को स्वीकार करते हुए उनकी सेवा को नियमित करने का आदेश राज्य सरकार को दिया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और अधिवक्ता विपुल पोद्दार ने पैरवी की।

शीना बोरा हत्याकांड : आर्म्स एक्ट में सरकारी गवाह श्यामवर राय को मिली जमानत
Published / 2022-12-22 15:13:18
शीना बोरा हत्याकांड : आर्म्स एक्ट में सरकारी गवाह श्यामवर राय को मिली जमानत

एबीएन सेंट्रल डेस्क। मुंबई के बहुचर्चित शीना बोरा हत्याकांड के सरकारी गवाह श्यामवर राय को आर्म्स एक्ट मामले में गुरुवार को बांद्रा मजिस्ट्रेट कोर्ट ने जमानत दे दी है।सरकारी गवाह श्यामवर राय शीना बोरा हत्या मामले के मुख्य आरोपित इंद्राणी मुखर्जी के ड्राइवर थे। जमानत की प्रक्रिया पूरी करने के बाद आज श्यामवर राय जेल से बाहर आ सकते हैं।श्यामवर राय को आर्म्स एक्ट मामले में वर्ष 2015 में गिरफ्तार किया गया था। मुंबई पुलिस की छानबीन में श्यामवर राय ने शीना बोरा मौत मामले की जानकारी दी थी। इससे यह मामला काफी गरमाया था। पुलिस ने इंद्राणी मुखर्जी, उनके पूर्व पति संजीव खन्ना और पति पीटर मुखर्जी को भी गिरफ्तार किया था।शीना बोरा हत्याकांड में पुलिस ने श्यामवर राय को सरकारी गवाह बनाया था। इस मामले में श्यामवर राय को पहले ही जमानत मिल गई थी। आज बांद्रा मजिस्ट्रेट कोर्ट से श्यामवर राय को आर्म्स एक्ट मामले भी जमानत मिल गई। शीना बोरा हत्या मामले में आरोपित इंद्राणी मुखर्जी, उनके पूर्व पति संजीव खन्ना और पीटर मुखर्जी को पहले ही जमानत मिल चुकी है।

कोडरमा : दहेज हत्या मामले में पति-सास को 12 वर्ष का सश्रम कारावास
Published / 2022-12-21 22:54:31
कोडरमा : दहेज हत्या मामले में पति-सास को 12 वर्ष का सश्रम कारावास

दहेज की मांग को लेकर विवाहिता की गला घोंटकर हत्या कर दी गयी थीजिला जज द्वितीय की अदालत ने सुनायी सजा विवाह के बाद अपाची बाइक और एक लाख अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर कर रहे थे प्रताड़ित वर्ष 2019 में मृतका की हुई थी शादी टीम एबीएन, कोडरमा। दहेज हत्या के मामले में सुनवाई करते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय अजय कुमार सिंह की अदालत ने सतगावां थाना क्षेत्र अंतर्गत पूतोडीह, ऊपर टोला निवासी और मृतका कविता कुमारी के पति वरुण कुमार पिता लालमणि प्रसाद यादव और सास सरिता देवी पति लालमणि प्रसाद यादव धारा 304इ/34  में दोषी पाते हुए बुधवार को 12-12 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। बताते चलें कि सतगावां थाना क्षेत्र अंतर्गत गाजेडीह निवासी और मृतका कविता कुमारी के भाई निरंजन कुमार पिता सुरेंद्र प्रसाद यादव ने सतगावां थाना कांड संख्या 61/21 में दहेज हत्या का मामला दर्ज कराया था, दर्ज मामले में उसने कहा था कि उसकी बहन कविता कुमारी का विवाह वर्ष 2019 में पूतोडीह सतगावां निवासी वरुण कुमार पिता लालमणि प्रसाद यादव के साथ हिन्दू रीति रिवाज के साथ हुआ था, विवाह के समय मैं अपने बहनोई को उपहार स्वरूप 3 लाख 51 हजार नगद, लगभग दो लाख का जेवर और फ्रिज, कूलर, टीवी, गोदरेज, पलंग व अन्य सामान दिया था। शादी के कुछ दिनों तक सब कुछ ठीकठाक रहा, उसके बाद मेरी बहन को उसके ससुराल वाले ससुर लालमणि प्रसाद यादव, सास सरिता देवी और बहनोई वरुण कुमार तीनों मिलकर मेरी बहन पर दबाव बनाते हुए एक लाख अतिरिक्त दहेज और अपाची बाइक की मांग करने लगे। इसकी सूचना मेरी बहन ने फोन पर दी, जिसके बाद मैं और मेरे पिता बहन के ससुराल गए और गरीबी का हवाला देते हुए अतिरिक्त दहेज देने से असमर्थ होने की बात कही, जिसके बाद मेरी बहन को अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर बराबर प्रताड़ित किया जाने लगा।

दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला : मरीज चाहे कहीं का भी हो, सरकारी अस्पताल को करना होगा इलाज...
Published / 2022-12-21 13:23:47
दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला : मरीज चाहे कहीं का भी हो, सरकारी अस्पताल को करना होगा इलाज...

एबीएन सेंट्रल डेस्क। दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में सरकारी अस्पतालों को सभी नागरिकों का इलाज करना होगा, चाहे मरीज का निवास स्थान कहीं भी क्यों न हो। अदालत ने यह भी कहा कि सरकारी अस्पताल इलाज के लिए मतदाता पहचान-पत्र दिखाने पर जोर नहीं दे सकते। जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने बिहार के एक निवासी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि अस्पताल दिल्ली के बाहर से आने वाले मरीजों को इलाज मुहैया करने से इंकार नहीं कर सकते।याचिकाकर्ता का आरोप था कि राजधानी के सरकारी लोक नायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल ने केवल दिल्ली के निवासियों को मुफ्त एमआरआई जांच की सुविधा दी है। दिल्ली सरकार ने अदालत को आश्वस्त किया कि अस्पताल द्वारा मरीज के निवास स्थान के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया गया है, जैसा कि याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है।अदालत ने कहा वे (अस्पताल) यहां मतदाता पहचान पत्र के लिए जोर नहीं दे सकते, एम्स या दिल्ली के किसी अन्य अस्पताल में, आप नागरिकों को बाहर से आने (और इलाज कराने) से नहीं रोक सकते। दिल्ली सरकार के वकील सत्यकाम ने कहा कि यह साबित करने के लिए रिकॉर्ड में कोई तथ्य नहीं है कि याचिकाकर्ता को अपना मतदाता पहचान-पत्र प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था।

अब 10 फरवरी को होगी लीव इनकैशमेंट से जुड़े मामले की सुनवाई
Published / 2022-12-19 14:35:35
अब 10 फरवरी को होगी लीव इनकैशमेंट से जुड़े मामले की सुनवाई

टीम एबीएन, रांची। झारखंड हाईकोर्ट के पांच न्यायाधीशों की बेंच ने लीव इनकैशमेंट से जुड़े मामले की सुनवाई की। पांच जजों की बेंच में झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ रविरंजन, जस्टिस अपरेश कुमार सिंह, जस्टिस एस चंद्रशेखर, जस्टिस सुजित नारायण प्रसाद और जस्टिस राजेश शंकर ने सुनवाई की। न्यायिक सेवा के रिटायर्ड अधिकारी कुमार मिश्रा के द्वारा लीव इनकेशमेंट के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है। सोमवार की सुनवाई के बाद वृहद पीठ ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 फरवरी की तारीख मुकर्रर की है। झारखंड हाईकोर्ट ने इस मामले में हाईकोर्ट के अधिवक्ता सुमित गड़ोदिया को अमेकस क्यूरी नियुक्त किया है। वह झारखंड हाईकोर्ट का पक्ष रख रहे हैं।

लश्कर-ए-तैयबा के फरार कमांडर अब्दुल राशिद की संपत्ति कुर्क
Published / 2022-12-17 23:50:58
लश्कर-ए-तैयबा के फरार कमांडर अब्दुल राशिद की संपत्ति कुर्क

एबीएन सेंट्रल डेस्क। जम्मू-कश्मीर के अधिकारियों ने शनिवार को लश्कर-ए-तैयबा के फरार कमांडर अब्दुल राशिद उर्फ जहांगीर की संपत्ति को कुर्क कर लिया है। फरार कमांडर अब्दुल राशिद नियंत्रण रेखा के पार से काम कर रहा है और आतंकवाद को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रहा है।डोडा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अब्दुल कयूम ने कहा कि डोडा जिले के थाथरी के खानपुरा गांव में चार कनाल से अधिक की भूमि को न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर सीआरपीसी की संबंधित धाराओं के तहत राजस्व और पुलिस अधिकारियों की एक संयुक्त टीम द्वारा कुर्क किया गया।उन्होंने कहा कि पुलिस अन्य स्थानीय आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने की प्रक्रिया में है, जो पाकिस्तान में घुसपैठ कर चुके हैं और वर्चुअल मोड या सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को आतंकी गतिविधियों में शामिल होने और जिले में आतंकवाद को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रहे हैं।एसएसपी ने कहा कि राशिद 1993 में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) गया था और विध्वंसक गतिविधियों को अंजाम देने के इरादे से हथियारों का प्रशिक्षण प्राप्त कर लौटा था।पाकिस्तान से घुसपैठ के बाद वह अन्य खूंखार और कट्टर आतंकवादियों के साथ सक्रिय रहा और जिले में आगजनी और विस्फोट की घटनाओं के अलावा नागरिकों और सुरक्षा बलों पर कई हमलों में शामिल पाया गया। इसके अलावा उसके द्वारा कई स्थानीय युवाओं को उकसाया गया और आतंकवाद में भर्ती किया गया।उन्होंने कहा कि थाथरी का एक अन्य आतंकवादी कमांडर मोहम्मद अमीन उर्फ खुबैब शुरू में राशिद द्वारा प्रेरित और भर्ती किया गया था। अमीन वर्तमान में पाकिस्तान से काम कर रहा है और जम्मू संभाग के डोडा, किश्तवाड़ और रामबन जिलों में आतंकवाद को पुनर्जीवित करने के लिए प्रयास कर रहा है। उसने हाल के दिनों में आईईडी विस्फोट, ड्रोन गिराने और हथियारों की तस्करी सहित कई आतंकवादी घटनाओं की साजिश रची थी।राशिद और अमीन दोनों ने एक दशक पहले पाकिस्तान में अपनी घुसपैठ को अंजाम दिया और जिन्हें स्थानीय अदालत द्वारा अपराधी घोषित किया गया। अधिकारी ने कहा कि डोडा और जम्मू क्षेत्र के अन्य जिलों के विभिन्न पुलिस थानों में उनके खिलाफ कई प्राथमिकी दर्ज हैं।

बिल्कीस बानो की पुनरीक्षण याचिका सुप्रीमकोर्ट ने की खारिज
Published / 2022-12-17 23:36:25
बिल्कीस बानो की पुनरीक्षण याचिका सुप्रीमकोर्ट ने की खारिज

एबीएन सेंट्रल डेस्क। सुप्रीमकोर्ट ने बिल्कीस बानो की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें सामूहिक बलात्कार मामले के 11 दोषियों की सजा माफ करने की याचिका पर गुजरात सरकार से विचार करने के लिए कहने संबंधी शीर्ष अदालत के आदेश की समीक्षा का अनुरोध किया गया था। बानो 2002 में गुजरात दंगों के दौरान सामूहिक बलात्कार की शिकार हुई थीं और उनके परिवार के सात सदस्यों की हत्या कर दी गई थी। प्रक्रिया के अनुसार, शीर्ष अदालत के फैसले के खिलाफ पुनरीक्षण याचिका पर फैसला संबंधित निर्णय सुनाने वाले न्यायाधीश अपने कक्ष में करते हैं। कक्ष में विचार करने के लिए यह याचिका 13 दिसंबर को न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ के समक्ष आई थी। शीर्ष अदालत के सहायक पंजीयक द्वारा बानो की वकील शोभा गुप्ता को भेजे गए संदेश में कहा गया है, मुझे आपको यह सूचित करने का निर्देश दिया गया है कि उच्चतम न्यायालय में दायर उक्त पुनरीक्षण याचिका 13 दिसंबर, 2022 को खारिज कर दी गई।बानो ने एक दोषी की याचिका पर शीर्ष अदालत द्वारा 13 मई को सुनाए गए आदेश की समीक्षा किए जाने का अनुरोध किया था। शीर्ष अदालत ने गुजरात सरकार से नौ जुलाई 1992 की नीति के तहत दोषियों की समय से पूर्व रिहाई की मांग वाली याचिका पर दो महीने के भीतर विचार करने को कहा था। गुजरात सरकार ने सभी 11 दोषियों की सजा माफ करते हुए उन्हें 15 अगस्त को रिहा कर दिया था।

ओबीसी आरक्षण : मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की रोक हटाने की मांग वाली याचिका खारिज
Published / 2022-12-16 22:37:15
ओबीसी आरक्षण : मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की रोक हटाने की मांग वाली याचिका खारिज

एबीएन सेंट्रल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरियों में और शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले के लिए ओबीसी आरक्षण को 14 फीसदी से बढ़ाकर 27 फीसदी किये जाने के फैसले को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की रोक को हटाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दी है। जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने ये आदेश दिया।सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता जया ठाकुर से पूछा कि आखिर आप इस फैसले से कैसे प्रभावित हैं। कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर आप अगर अपनी याचिका वापस नहीं लेते तो हम आप पर जुर्माना लगायेंगे। दरअसल, 2019 में राज्य में कमलनाथ की सरकार के दौरान सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में बढाए गए ओबीसी आरक्षण के फैसले पर मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने रोक लगा दिया था।मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ जया ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल किया था। याचिका में हाई कोर्ट की रोक को हटाने की मांग की गई थी। इस याचिका में कहा गया था कि हाईकोर्ट के इस रोक के चलते पिछले तीन सालों में सरकारी नौकरियों में भर्तियां बंद हो गयी है।

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