एबीएन सेंट्रल डेस्क। राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने गूगल के मामले में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के फैसले को बरकरार रखा है। आयोग ने प्रौद्योगिकी कंपनी गूगल पर एंड्रॉयड मोबाइल उपकरणों के मामले में प्रतिस्पर्धा रोधी गतिविधियों में शामिल होने को लेकर 1,337.76 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। अपीलीय न्यायाधिकरण की दो सदस्यीय पीठ ने गूगल को निर्देशों का पालन करने और जुर्माना राशि 30 दिन के भीतर जमा करने को कहा है। एनसीएलएटी के चेयरपर्सन न्यायमूर्ति अशोक भूषण और सदस्य आलोक श्रीवास्तव की पीठ ने प्रतिस्पर्धा आयोग के आदेश में कुछ संशोधन भी किये हैं। अपीलीय न्यायाधिकरण ने गूगल की इस अपील को खारिज कर दिया कि प्रतिस्पर्धा आयोग ने जांच में प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन किया है। उल्लेखनीय है कि सीसीआई ने पिछले साल 20 अक्टूबर को गूगल पर एंड्रॉयड मोबाइल उपकरणों के मामले में गैर-प्रतिस्पर्धी गतिविधियों में शामिन होने को लेकर 1,337.6 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया था। नियामक ने कंपनी ने विभिन्न अनुचित व्यापार गतिविधियों से बचने और दूर रहने को भी कहा। प्रतिस्पर्धा आयोग के इस आदेश को अपीलीय न्यायाधिकरण में चुनौती दी गयी थी।
जानें 17 साल में सजा तक पहुंचे मामले की कहानीएबीएन सेंट्रल डेस्क। माफिया अतीक अहमद उमेश पाल अपहरण कांड में दोषी करार दिया गया है। घटना 2006 की है। इसे लेकर मुकदमा 2007 में दर्ज हुआ।अतीक अहमद उमेश पाल अपहरण कांड में उम्रकैद की सजा सुनायी है। अतीक के साथ दोषी करार दिये गये दिनेश पासी और सौलत हनीफ को भी उम्रकैद की सजा सुनायी गयी है। हालांकि, अतीक के भाई अशरफ समेत सात जीवित आरोपी मंगलवार को दोषमुक्त करार दिये गये हैं। माफिया अतीक पर आज से 44 साल पहले पहला मुकदमा दर्ज हुआ था। तब से अब तक उसके ऊपर सौ से अधिक मामले दर्ज हुए, लेकिन पहली बार किसी मुकदमे में उसे दोषी ठहराया गया है।आइये जानते हैं उस मामले में के बारे में जिसमें अतीक दोषी करार दिया गया। कैसे उमेश पाल ने 17 साल तक अतीक को सजा दिलाने के लिए संघर्ष किया। कैसे सजा मिलने से पहले उमेश की हत्या कर दी गयी।किस मामले में दोषी करार दिया गया अतीक?घटना 2006 की है। इसे लेकर मुकदमा 2007 में दर्ज हुआ। लेकिन, कहानी 2005 से शुरू होती। दरअसल 25 जनवरी 2005 का दिन इलाहाबाद पश्चिमी विधानसभा सीट से नवनिर्वाचित विधायक राजू पाल पर जानलेवा हमला हुआ। शहर के पुराने इलाकों में शुमार सुलेमसराय में बदमाशों ने राजू पाल की गाड़ी पर गोलियों की बौछार कर दी थी। सैकड़ों राउंड फायरिंग से गाड़ी में सवार लोगों का पूरा शरीर छलनी हो गया।बदमाशों ने फायरिंग रोकी तो समर्थक राजू पाल को एक टैंपो में लेकर अस्पताल ले जाने लगे। हमलावरों ने ये देखा तो उन्हें लगा राजू जिंदा हैं। तुरंत हमलावरों ने अपनी गाड़ी टैंपो के पीछे लगा ली और फिर फायरिंग शुरू कर दी। करीब पांच किलोमीटर तक वह टैंपो का पीछा करते गये। जबतक राजू पाल अस्पताल पहुंचे, उन्हें 19 गोलियां लग चुकी थीं। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। दस दिन पहले ही राजू की शादी पूजा पाल से हुई थी। राजू पाल के दोस्त उमेश पाल इस हत्याकांड के मुख्य गवाह थे।हत्याकांड के बाद अतीक ने कई लोगों से कहलवाया कि उमेश केस से हट जायें नहीं तो उन्हें दुनिया से हटा दिया जायेगा। उमेश नहीं माने तो 28 फरवरी 2006 को उसका अपहरण कर लिया गया। उसे करबला स्थित कार्यालय में ले जाकर अतीक ने रात भर पीटा था। अतीक ने उनसे अपने पक्ष में हलफनामा लिखवा लिया। अगले दिन उमेश ने अतीक के पक्ष में अदालत में गवाही भी दे दी। हालांकि वह समय बदलने का इंतजार कर रहे थे।जब उमेश ने अतीक के पक्ष में हलफनामा दे दिया फिर अपहरण का मामला कैसे शुरू हुआ?2007 में बसपा सरकार बनी। मायावती मुख्यमंत्री बनीं। 2007 के चुनाव में एक बार फिर शहर पश्चिमी सीट से अतीक के भाई अशरफ को राजू पाल की पत्नी पूजा पाल ने हरा दिया। इसके बाद अतीक पर शिकंजा कसना शुरू हुआ। हालात बदले तो उमेश ने अपने अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया। इस मामले की उमेश सालों पैरवी करते रहे। उमेश पाल ने अपने अपहरण के मामले को लगभग अंजाम तक पहुंचा दिया, लेकिन फैसले से एक महीने पहले उनकी हत्या कर दी गयी। अब इसी मामले में अतीक दोषी करार दिया गया। इसके साथ ही 44 साल तक अपने आतंक को कायम रखने वाले अतीक को जिदंगी में पहली बार सजा होने जा रही है।अपहरण वाले दिन क्या हुआ था? 28 फरवरी 2006 को अतीक के लोगों ने उमेश को उठा लिया। रातभर उन्हें पीटा गया। उमेश को उस समय लगा था कि यह उसकी आखिरी रात है। अतीक ने उससे हलफनामा पर दस्तखत करा लिए। हलफनामे पर लिखा था कि वह घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे। न ही उन्होंने किसी को वहां देखा था। अगले दिन यानी एक मार्च को अतीक ने अदालत में उमेश के हलफनामा को प्रस्तुत कर अदालत के सामने गवाही भी दिलवा दी। उस समय शासन प्रशासन में अतीक की तूती बोलती थी।2007 में जब बसपा सरकार बनी तो स्थिति बदलने लगी। अतीक के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गयी। पांच जुलाई 2007 को उमेश ने अतीक, अशरफ समेत कुल 11 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करायी। इनमें से एक की मौत हो चुकी है।अतीक पर दर्ज हो चुके हैं 101 मुकदमेअतीक के खिलाफ कुल 101 मुकदमे दर्ज हुए। वर्तमान में कोर्ट में 50 मामले चल रहे हैं, जिनमें एनएसए, गैंगस्टर और गुंडा एक्ट के डेढ़ दर्जन से अधिक मुकदमे हैं। उस पर पहला मुकदमा 1979 में दर्ज हुआ था। इसके बाद जुर्म की दुनिया में अतीक ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। हत्या, लूट, रंगदारी अपहरण के न जाने कितने मुकदमे उसके खिलाफ दर्ज होते रहे। मुकदमों के साथ ही उसका राजनीतिक रुतबा भी बढ़ता गया।एक बार एनएसए भी लगाया जा चुका है1989 में वह पहली बार विधायक हुआ तो जुर्म की दुनिया में उसका दखल कई जिलों तक हो गया। 1992 में पहली बार उसके गैंग को आईएस 227 के रूप में सूचीबद्ध करते हुए पुलिस ने अतीक को इस गिरोह का सरगना घोषित कर दिया। 1993 में लखनऊ में गेस्ट हाउस कांड ने अतीक को काफी कुख्यात किया। गैंगस्टर एक्ट के साथ ही उसके खिलाफ कई बार गुंडा एक्ट की कार्रवाई भी की गयी। एक बार तो उसपर एनएसए भी लगाया जा चुका है।कई मुकदमों में मुकर गये गवाहजुर्म और राजनीति के साथ -साथ अतीक अब ठेकेदारी और जमीन के धंधे में भी कूद पड़ा। जमीन की खरीद-फरोख्त और रंगदारी से अतीक ने ही नहीं, बल्कि उसके गुर्गों ने भी अकूत संपत्ति जुटा ली। अतीक का खौफ इतना था कि उसके खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज करने की हिम्मत नहीं करता था। अगर कर भी दिया तो बाद में गवाह मुकर जाते। कई मामलों में वादी ने ही लिखकर दे दिया कि उसने अतीक के खिलाफ गलत मुकदमा दर्ज कराया था। यहां तक कि प्रदेश सरकार ने अतीक के खिलाफ कई गंभीर मुकदमों को वर्ष 2001, 2003 और 2004 में वापस ले लिया था। कई मामलों में तो पुलिस ने अतीक की नामजदगी को गलत बता एफआर लगा दी थी।
टीम एबीएन, जमशेदपुर/ रांची। स्वास्थ्य विभाग में अब अगर कोई बायोमेट्रिक से हाजिरी नहीं बनाता है, तो उसका वेतन कट जायेगा। इस संबंध में आदेश का पत्र स्वास्थ्य विभाग के द्वारा एमजीएम अस्पताल के अधीक्षक को भेजा गया है।एक अप्रैल से बायोमेट्रिक से हाजिरी बनाना अनिवार्य कर दिया गया है। एक अप्रैल से अस्पताल के सभी डॉक्टर, नर्स व अन्य कर्मचारियों को बायोमेट्रिक सिस्टम से हाजिरी बनानी होगी। डॉक्टरों की हाजिरी की निगरानी एनएमसी करेगा। अस्पताल परिसर में लगे खराब बायोमेट्रिक सिस्टम को ठीक कराया जा रहा है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। जिन लोगों ने अभी तक पेन से आधार कार्ड को लिंक नहीं कराया है उनके लिए जरूरी खबर है। क्योंकि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में पेन से आधार लिंक की डेट बढ़ा दी है। क्योंकि अभी तक करोड़ों लोग ऐसे थे जिन्होने पेन से आधार लिंक नहीं कराया था। वहीं आधार से पेन लिंक के लिए जो शुल्क लगाया जा रहा है 1000 रुपये वही रहेगा। साथ ही जो लोग जून 2023 तक भी यह जरूरी काम नहीं करा पायेंगे। उनके लिए जुर्माने की राशि 1000 के स्थान पर 10,000 कर दिया गया है। इसलिए इस बार समय रहते आधार से अभी तक कुछ लोग इस असमंजस में फंसे हैं कि किन-किन लोगों को आधार से पेन लिंक कराना जरूरी है। ऐसे लोगों के लिए बता दें कि इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 139 एए के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति जिसे 1 जुलाई, 2017 को एक स्थायी खाता संख्या (पैन) आवंटित किया गया है। सभी लोगों को आधार से पेन लिंक कराना अनिवार्य है। अभी तक 31 मार्च तक आधार पेन लिंक कराने की लास्ट डेट थी। जिसे अब बढ़ा दिया गया है। यदि आपका भी आधार अभी तक लिंक नहीं हुआ है तो लेट फीस जमा कराकर जरूरी काम निपटा लें।बता दें कि जो लोग असम, जम्मू और कश्मीर और मेघालय में रहते हैं। साथ ही नॉन-रेजिडेंट हैं। पूर्व वर्ष के दौरान किसी भी समय अस्सी वर्ष या उससे अधिक की आयु के रहे हों, या भारत के नागरिक नहीं है ऐसे लोगों के आधार से पेन लिंक कराने की जरूरत नहीं है। यदि आप समय रहते यह जरूरी काम नहीं कराते हैं तो आपका पेन निष्क्रिय कर दिया जायेगा। साथ ही ऐसे लोग अपना आईटीआर भी फाइल भी नहीं कर पायेंगे। साथ ही यदि उसके बाद आप आधार से पेन लिंक करेंगे तो हाई जुर्माना भरना होगा।
टीम एबीएन, साहिबगंज। साहिबगंज जिला अदालत के निर्देश पर साहिबगंज पुलिस ने पशुपति यादव को एक पुराने आपराधिक मामले में गिरफ्तार किया है। पशुपति यादव पत्थर खनन घोटालेबाज दाहू यादव और सुनील यादव के पिता हैं, जो वर्तमान में प्रभात कुमार शर्मा की विशेष पीएमएलए अदालत द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट के बाद से फरार हैं। विशेष रूप से, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हजार करोड़ रुपये के अवैध पत्थर खनन घोटाले में पशुपति यादव को पूछताछ के लिए भी बुलाया था। लेकिन वह उस समन से बचते रहे। जानकारी के अनुसार उसके खिलाफ 2018 में धारा 341, 323 और 504 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गयी थी। लेकिन जमानत मिलने के बाद वह आरोप तय करने के लिए अदालत में पेश नहीं हो रहा था। इसलिए कोर्ट ने उनकी जमानत रद्द कर दी और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। 80 वर्षीय पशुपति यादव को कुछ स्वास्थ्य जटिलताओं के विकसित होने के बाद न्यायिक हिरासत में अस्पताल ले जाया गया था। गौरतलब है कि उनका नाम पहली बार झारखंड पुलिस एएसआई रूपा तिर्की की रहस्यमयी मौत से जुड़े विवाद में सामने आया था। वह कई आपराधिक मामलों में आरोपी है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की मुश्किलें आय से अधिक संपत्ति के मामले में बढ़ती हुई नजर आ रही है। झारखंड हाईकोर्ट ने मामले में मधु कोड़ा, प्रमोद कुमार उर्फ विनोद कुमार को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। बता दें कि आय से अधिक संपत्ति मामले में जांच कर रही सीबीआई की टीम ने आरोपी मधु कोड़ा, प्रमोद कुमार और संजय कुमार चौधरी के केस का अलग-अलग ट्रायल करे की मंजूरी मांगी थी, जिसे निचली कोर्ट ने रिजेक्ट कर दिया था। जिसके बाद सीबीआई ने निचली कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसपर शुक्रवार को सुनवाई हुई।25 अप्रैल को होगी अलगी सुनवाई : झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश गौतम कुमार की पीठ ने मामले में मधु कोड़ा और प्रमोद कुमार को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया और अब मामले में अगली सुनवाई 25 अप्रैल को होगी। बता दें कि आय से अधिक संपत्ति के मामले में तीन लोगों को आरोपी पाया गया था, लेकिन आरोपियों के खिलाफ जांच का दायरा अलग-अलग है। जिसकी वजह सीबीआई ने उनका ट्रायल अलग-अलग किये जाने की मंजूरी मांगी थी।23 महीने के कार्यकाल में कई बड़े घोटाले : कोड़ा का जन्म 6 जनवरी, 1971 को हुआ था और उन्होंने 18 सितंबर, 2006 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। महज, 35 साल की उम्र में मुख्यमंत्री बननेवाले मधु कोड़ा झारखंड के पहले विधायक थे। 23 महीने के सीएम कार्यकाल के दौरान कोड़ा का नाम कई बड़े घोटालों से जुड़ा। कोल ब्लॉक के अवैध आवंटन मामले से लेकर आय से अधिक संपत्ति के मामले में कोड़ा आरोपी पाये गये। कोड़ा को आय से अधिक संपत्ति के मामले में भी उन्हें जेल भेजा गया था और उसके बाद उन्हें चुनाव लड़ने से डिबार भी कर दिया गया था।
राहुल गांधी दोषी करार, तुरन्त मिली जमानतएबीएन सेंट्रल डेस्क। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से 2019 में मोदी सरनेम को लेकर की गयी टिप्पणी के मामले में आज सूरत की अदालत ने फैसला सुना दिया। कोर्ट ने राहुल गांधी को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने उन्हें दो साल की जेल की सजा सुनायी। हालांकि, मामले में उन्हें तुरंत ही जमानत भी मिल गयी।सजा का एलान होने के बाद राहुल गांधी ने ट्विटर पर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा कि मेरा धर्म सत्य और अहिंसा पर आधारित है। सत्य मेरा भगवान है, अहिंसा उसे पाने का साधन।दूसरी तरफ राहुल गांधी के खिलाफ इस मामले में मानहानि का केस दायर करने वाले पूर्णेश मोदी ने बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि हम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि यह न्यायिक प्रक्रिया है और यह एक अहम फैसला है।राहुल पर मोदी उपनाम पर टिप्पणी करने के लिए आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज था। गुजरात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जगदीश ठाकोर, पार्टी विधायक दल के नेता अमित चावड़ा, अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के गुजरात प्रभारी रघु शर्मा और विधायक सहित कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आने के बाद से ही सूरत में मौजूद हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्र सरकार ने आधार कार्ड और वोटर आईडी को लिंक करने की डेडलाइन आगे बढ़ा दी है। पहले यह काम 1 अप्रैल 2023 कर किया जाना था। अब इसके लिए 31 मार्च 2024 तक का समय दिया गया है। बता दें फर्जी मतदान और फर्जी वोटर आईडी की समस्या को खत्म करने के लिए वोटर आईडी और आधार को आपस में लिंक करने की व्यवस्था बनाई गई है। केंद्र ने स्पष्ट कर दिया है कि यह स्वैच्छिक है, अनिवार्य नहीं। वहीं चुनाव आयोग के अनुसार, आधार कार्ड को मतदाता पहचान पत्र से जोड़ने से एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्र में एक ही व्यक्ति का नाम नहीं हो सकेगा। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, यूजर्स आधार को अपनी वोटर आईडी से आॅनलाइन या एसएमएस के माध्यम से लिंक कर सकते हैं। यूआईडीएआई ने 1.2 प्रतिशत आधार संचालकों का किया निलंबन इस बीच, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने दोषपूर्ण गतिविधियों में लिप्त रहने के आरोप में पिछले साल 1.2 प्रतिशत आधार केंद्र आपरेटरों को निलंबित कर दिया है। यूआईडीएआई ने कहा कि गलत कार्यों में लिप्त पाए जाने वाले आधार केंद्र संचालकों पर जरूरी दंडात्मक कार्रवाई भी की जायेगी। प्राधिकरण से जुड़े हुए करीब एक लाख संचालक आधार कार्ड बनाने के साथ ही धारकों के नाम में संशोधन और पता बदलने जैसी सेवाएं देते हैं। साथ ही यूआइडीएआइ ने कहा कि उसने प्रतिदिन एक मशीन पर किए जाने वाले पंजीकरण की संख्या भी सीमित कर दी है। संचालक आधार प्रणाली का दुरुपयोग नहीं कर सकें, इसके लिए यह कदम उठाया गया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सोनभद्र जेल में बंद बसपा सरकार के पूर्व मंत्री याकूब कुरैशी पर कानून का शिकंजा कसता जा रहा है। याकूब की चिह्नित की गयी 31 करोड़ 70 लाख रुपये की संपत्ति को जल्दी ही जब्त किया जायेगा। पुलिस ने जिलाधिकारी को इसकी रिपोर्ट भेज दी है। हापुड़ रोड स्थित अलीपुर जिजमाना में मीट प्लांट अल फहीम मीटैक्स प्राइवेट लिमिटेड को बिना अनुमति चलाने में पूर्व मंत्री याकूब कुरैशी का परिवार फंसा हुआ है। याकूब के दो बेटों इमरान और फिरोज को जमानत मिल चुकी है। खुद याकूब कुरैशी इस समय सोनभद्र की जेल में बंद हैं। गैंगस्टर एक्ट के तहत याकूब की संपत्ति को पुलिस ने चिह्नित किया था। जिले में 26 स्थानों पर याकूब की संपत्ति पायी गयी है। लोक निर्माण विभाग की रिपोर्ट के आधार पर संपत्ति का मूल्यांकन किया गया है। अभी तक याकूब की 31 करोड़ 70 लाख रुपये मूल्य की संपत्ति को जब्त करने की तैयारी पुलिस ने कर ली है। इसमें 12 वाहनों को जब्त किया जा चुका है। अन्य संपत्ति में हापुड़ रोड स्थित स्कूल, अस्पताल, मीट फैक्ट्री, प्लाट, सराय बहलीम स्थित दो मकान आदि शामिल है।एसएसपी रोहित सिंह सजवाण के मुताबिक, खरखौदा थाना क्षेत्र में मीट फैक्टरी के अंदर अवैध रूप से मीट की पैकेजिंग के मामले में पूर्व मंत्री याकूब की 31 करोड़ 70 लाख रुपये की संपत्ति को चिन्हित कर लिया गया है। इसमें 32 दोपहिया और चार पहिया वाहन भी शामिल हैं। जिलाधिकारी को इसकी रिपोर्ट भेज दी गई है। जल्द ही इस चल और अचल संपत्ति के जब्तीकरण की कार्रवाई की जायेगी।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ 24 अपने सभी पाठकों और प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और विश्वास के लिए धन्यवाद।
© 2026 ABN News 24. All Rights Reserved.