टीम एबीएन, रांची। रामगढ़ की पूर्व विधायक ममता देवी की क्रिमिनल अपील पर गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने ममता देवी को जमानत की सुविधा प्रदान कर दी है। हाईकोर्ट ने उन्हें गोला गोली कांड में जमानत दी है। इससे पहले उन्हें एक और मामले में बेल मिल चुकी है, जिसके बाद अब ममता देवी के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो चुका है। वहीं इस केस के दूसरे दोषी राजीव जायसवाल को भी हाईकोर्ट ने बेल दे दी है। कोर्ट ने दोनों को जुर्माना की राशि जमा करने की शर्त पर बेल दी है। ममता देवी की याचिका पर हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस नवनीत कुमार की अदालत में सुनवाई हुई। राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता भोला नाथ ओझा ने पक्ष रखा। वहीं ममता देवी की ओर से अधिवक्ता अनुराग कश्यप ने बहस की।
कोविड-19 के बढ़ते मामलों से चिंतित सुप्रीम कोर्ट, वकीलों को दिया हाइब्रिड मोड पर सुनवाई का ऑप्शनएबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ ने देश में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों की बढ़ती संख्या पर गौर करते हुए बुधवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए वकीलों की दलीलें सुनने का इच्छुक है।प्रधान न्यायाधीश चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की एक पीठ ने कहा कि अदालत वकीलों को हाईब्रिड मोड (परिसर में या ऑनलाइन माध्यम से) से पेश होने की अनुमति देने को तैयार है। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि हम आपकी दलीलें वीडिया कॉन्फ्रेंस के जरिये सुन सकते हैं।केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से बुधवार को सुबह आठ बजे जारी अद्यतन आंकड़ों के अनुसार, भारत में एक दिन में कोरोना वायरस संक्रमण के 4,435 नये मामले आने के बाद देश में अभी तक संक्रमित हुए लोगों की संख्या बढ़कर 4,47,33,719 हो गयी है। पिछले 163 दिन में सामने आये ये सर्वाधिक दैनिक मामले हैं। वहीं, उपचाराधीन मरीजों की संख्या बढ़कर 23,091 पर पहुंच गयी है। मृतक संख्या भी बढ़कर 5,30,916 हो गयी है।
अगली डेट में आरोप तय करेगी ईडी कोर्टटीम एबीएन, रांची। झारखंड में मनी लांड्रिंग और आय से अधिक संपत्ति के मामले में आरोपी निलंबित आईएएस पूजा सिंघल पर संकट के काले बादल लगातार घिरे हुए हैं। अब ईडी की विशेष अदालत ने पूजा सिंघल के द्वारा फाइल किये गये डिस्चार्ज पिटिशन को खारिज कर दिया गया है। कोर्ट ने पूजा सिंघल के डिस्चार्ज पिटिशन को यह कहकर खारिज किया कि उनके पास पर्याप्त सबूत नहीं हैं।आरोपी पूजा सिंघल ने डिस्चार्ज पिटिशन फाइल कर कोर्ट से अनुरोध किया था कि मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय उनके खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं जुटा पायी है, इसलिए उन्हें इस आरोप से मुक्त किया जाये। 25 मार्च को भी पूजा सिंघल के डिस्चार्ज पिटिशन पर विशेष अदालत में सुनवाई हुई थी, जिसमें दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। जिसको लेकर सोमवार 3 अप्रैल को कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें पूजा सिंघल द्वारा फाइल डिस्चार्ज पिटिशन खारिज कर दिया गया। याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने यह कहा कि खुद को निर्दोष साबित करने के लिए पूजा सिंघल के पास पर्याप्त सबूत नहीं हैं।
दो साल की सजा के खिलाफ सूरत कोर्ट ने राहुल गांधी को दी फौरी राहत, अब आगे क्या होगा? एबीएन सेंट्रल डेस्क। बीते महीने सूरत के सीजेएम कोर्ट ने मोदी सरनेम मानहानि केस में कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को दो साल की सजा सुनाई थी। आज इस केस में कोर्ट से राहुल को जमानत मिल गई है। कोर्ट ने कांग्रेस नेता की जमानत 13 अप्रैल तक बढ़ा दी है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी मोदी सरनेम टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में दोषी ठहराए जाने के खिलाफ अदालत में अपील करने के लिए सोमवार को सूरत पहुंचे। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी भी भाई राहुल के साथ सूरत आईं। सूरत कोर्ट ने राहुल को 13 अप्रैल तक जमानत दे दी। वहीं, उनकी सजा के खिलाफ सुनवाई के लिए तीन मई की तारीख दे दी। राहुल के सूरत जाने पर राजनीति भी शुरू हो गई है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि ये लोग अपील के नाम पर हुड़दंग करने जा रहे हैं। वहीं, कांग्रेस का कहना है कि यह राहुल गांधी के साथ उनकी एकजुटता है। मोदी उपनाम केस में अभी क्या हो रहा है? बीते महीने सूरत के सीजेएम कोर्ट ने मोदी सरनेम मानहानि केस में कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को दो साल की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने इस सजा को चुनौती देने के लिए राहुल को एक महीने का समय दिया था। सजा सुनाये जाने के बाद राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता चली गयी थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, कोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए याचिका तैयार की गयी है। इसी कड़ी में राहुल गांधी ने आज सूरत कोर्ट में याचिका दाखिल की। मामला क्या है? 2019 में मोदी उपनाम को लेकर की गई टिप्पणी के मामले में 23 मार्च को सूरत की सीजेएम कोर्ट ने धारा 504 के तहत राहुल को दो साल की सजा सुनाई थी। हालांकि, कोर्ट ने फैसले पर अमल के लिए 30 दिन की मोहलत दे दी। इसके साथ ही उन्हें तुरंत जमानत भी दे दी थी। दरअसल, 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान कर्नाटक के कोलार की एक रैली में राहुल गांधी ने कहा था कि कैसे सभी चोरों का उपनाम मोदी है? इसी को लेकर भाजपा विधायक और गुजरात के पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराया था। उनका आरोप था कि राहुल ने अपनी इस टिप्पणी से समूचे मोदी समुदाय की मानहानि की है। राहुल के खिलाफ आईपीसी की धारा 499 और 500 (मानहानि) के तहत मामला दर्ज किया गया था। कोर्ट के फैसले के बाद क्या हुआ? नियम के अनुसार, अगर किसी सांसद या विधायक को दो साल या इससे अधिक की सजा होती है तो उसकी सदस्यता चली जाती है। राहुल के साथ भी ऐसा ही हुआ। अगले ही दिन 24 मार्च को लोकसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता जाने का आदेश जारी कर दिया। साज सुनाए जाने के 11 दिन बाद राहुल को सूरत कोर्ट ने 13 अप्रैल तक जमानत दे दी। राहुल के मामले अब तीन मई को सुनवाई होगी। आगे क्या होगा? सूरत कोर्ट में सुनवाई के बाद राहुल की सजा बरकरार रह सकती है या कम भी सकती है, या फिर उन्हें बरी भी किया जा सकता है। अगर सूरत कोर्ट से राहत नहीं मिलती तो राहुल के पास हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प भी होगा। सूरत कोर्ट अगर राहुल की सजा पर रोक नहीं लगाता तो भी राहुल ऊंची अदालतों में जा सकते हैं। सांसदी बहाल कराने के लिए राहुल के पास क्या विकल्प? कांग्रेस नेता राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता भी बहाल हो सकती है और वो बरी भी हो सकते हैं लेकिन ये सब कुछ ऊपरी अदालत में तय होगा। राहुल के पास अभी कुछ विकल्प बचे हैं, जैसे: सबसे पहले, राहुल गांधी को सजा के खिलाफ स्टे आर्डर लेने के लिए सूरत कोर्ट गए हैं। यदि वह अपनी संसद की सदस्यता बरकरार रखना चाहते हैं, तो वायनाड लोकसभा सीट के लिए उपचुनाव होने से पहले राहुल गांधी को बरी होना होगा है; केवल उनकी सजा के खिलाफ रोक पर्याप्त नहीं होगी। वह 2024 का चुनाव तभी लड़ सकते हैं जब कोई ऊपरी अदालत उनकी सजा को रद्द कर दे, या यदि सूरत की निचली अदालत का फैसला पलट दिया जाए। अगर ऊपरी अदालत निचली अदालत से राहुल गांधी की दोषसिद्धि को रद्द नहीं करती है तो वह 2031 तक चुनाव नहीं लड़ सकते। यदि उन्हें सजा से स्थगन आदेश मिलता है, तो उन्हें लोकसभा सचिव को सूचित करना होगा और अनुरोध करना होगा कि वह संसद से अपनी अयोग्यता के नोटिस को रद्द कर दें। यदि लोकसभा राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता अयोग्यता की अधिसूचना को रद्द नहीं करती है, तो कांग्रेस नेता लोकसभा अध्यक्ष के फैसले के खिलाफ अदालत जा सकते हैं। 13 अप्रैल को क्या होगा? कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी सजा को चुनौती देते हुए सूरत सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी। अपील के साथ दो याचिकाएं लगाई हैं, पहली सजा के निलंबन के लिए, जो अनिवार्य रूप से नियमित जमानत के लिए है जबकि दूसरी याचिक दोषसिद्धि के निलंबन के लिए है। राहुल गांधी की दोषसिद्धि पर सोमवार को न्यायालय ने रोक नहीं लगायी। हालांकि, अदालत ने शिकायतकर्ता पूर्णेश मोदी को राहुल की दोषसिद्धि पर रोक लगाने की याचिका पर नोटिस जारी किया है। शिकायतकर्ता को 10 अप्रैल तक जवाब दाखिल करने को कहा गया है। अब अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आर पी मोगेरा की अदालत दोषसिद्धि पर रोक लगाने की कांग्रेस नेता की याचिका पर 13 अप्रैल को सुनवाई करेगी। तीन मई को क्या होगा? तीन मई को दूसरे आवेदन यानी दोषसिद्धि के निलंबन की याचिका पर कोर्ट सुनवाई करेगा। यदि याचिका की अनुमति दी जाती है, तो कांग्रेस नेता राहुल गांधी की लोकसभा की सदस्यता बहाल हो जाएगी। इसके बाद ही लोकसभा सचिवालय राहुल की लोकसभा सदस्यता अयोग्यता की अधिसूचना को रद्द करेगी। मामले में क्या राजनीति हो रही है? मानहानि केस में कोर्ट की सजा के खिलाफ याचिका दायर करने जा रहे राहुल के साथ कांग्रेस नेताओं की बड़ी फौज भी सूरत पहुंची है। अब इसको लेकर भाजपा ने निशाना साधा है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने इसे नौटंकी करार दिया और कहा कि ये सब लोग अपील के नाम पर हुड़दंग करने जा रहे हैं। संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर, कांग्रेस और राहुल से सवाल किया कि क्या ये न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश हो रही है? वहीं कानून मंत्री और भाजपा नेता कानून मंत्री किरण रिजिजू ने राहुल गांधी पर निशाना साधा है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि राहुल गांधी जो कर रहे हैं वह भी अपीलीय अदालत पर दबाव बनाने की बचकानी कोशिश है। देश की सभी अदालतें ऐसे हथकंडों से अछूती हैं। रिजिजू के बयान पर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका पर कोई दबाव नहीं बना सकता। हम सूरत जा रहे हैं। कांग्रेस मुख्य विपक्षी पार्टी है और राहुल गांधी हमारी पार्टी के बड़े नेता हैं। यह कोई राजनीतिक नाटक नहीं है। हम उनके साथ खड़े हैं...। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि हम अदालत के फैसले पर बहस नहीं कर सकते लेकिन हम केंद्र सरकार के खिलाफ लड़ सकते हैं।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड हाइकोर्ट ने राजेंद्र इंस्टीट्यूट आॅफ मेडिकल साइंस (रिम्स) की बदहाली और आउटसोर्सिंग के जरिये कर्मियों की नियुक्ति के मामले में सुनवाई की। सुनवाई के दौरान अदालत ने रिम्स पर दस हजार का जुर्माना लगाया है। अदालत ने रिम्स की ओर से जवाब दाखिल करने में बार-बार की जा रही देर पर नाराजगी जाहिर करते हुए जुमार्ना लगाया। हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस संजय मिश्रा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। रिम्स की बदहाली को लेकर दायर कई जनहित याचिकाओं पर हाइकोर्ट एक साथ सुनवाई कर रहा है।
1 मई को होगी मामले की अगली सुनवाई टीम एबीएन, रांची। खान विभाग के मंत्री रहते मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा खुद एवं अपने रिश्तेदारों को लीज आवंटन करने से संबंधित आरटीआई कार्यकर्ता एवं हाईकोर्ट के अधिवक्ता सुनील कुमार महतो की जनहित याचिका की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में हुई। मामले में हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजय कुमार मिश्र की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले के प्रतिवादियों जिनमें राज्य सरकार एवं निदेशालय (ईडी) शामिल है, को जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की सुनवाई 1 मई निर्धारित की। इससे पहले सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने इस जनहित याचिका के मेंटेबिलिटी पर सवाल उठाते हुए कहा गया यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। इसी तरह के समान मामले में शिव शंकर शर्मा एवं अन्य की जनहित याचिका में सीएम हेमंत सोरेन एवं अन्य के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट के खंडपीठ के द्वारा पारित आदेश को पूर्व में सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त कर दिया है।
ईडी कोर्ट से लगा जोरदार झटकाटीम एबीएन, रांची। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी निलंबित आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल के डिस्चार्ज पिटीशन पर ईडी की विशेष कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए पिटीशन को खारिज कर दिया है। डिस्चार्ज याचिका के खारिज होने से पूजा सिंघल को बड़ा झटका लगा है। अब अदालत पूजा सिंघल के खिलाफ आरोप गठन (चार्ज फ्रेम) की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। ईडी कोर्ट के विशेष न्यायाधीश पीके शर्मा ने मनरेगा घोटाला मामले में पूजा सिंगल और ईडी के पक्ष को सुना था। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। पूजा सिंघल की तरफ से अधिवक्ता विश्वजीत मुखर्जी और विक्रांत सिन्हा ने रखा था। वहीं ईडी के तरफ से अधिवक्ता आतिश कुमार ने दलीलें पेश की थी।
100 करोड़ के मिड डे मील घोटाले के आरोपी को बताय था पॉजिटिवटीम एबीएन, रांची। ईडी की गिरफ्त से फरार चल रहे संजय तिवारी की फर्जी कोविड रिपोर्ट तैयार करने के मामले में रांची पुलिस ने कार्रवाई करते हुए रिम्स के एक कर्मचारी सहित दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार प्रियरंजन और अमरदीप ने संजय तिवारी के लिए फर्जी कोविड पॉजिटिव होने की रिपोर्ट तैयार कर दी थी, उसी रिपोर्ट के आधार पर संजय तिवारी ने अदालत को झांसा दिया और फरार हो गया। संजय तिवारी ने अदालत को गुमराह करने के लिए रिम्स से फर्जी कोविड रिपोर्ट बनवा ली थी। रिम्स के चिकित्सा अधीक्षक की ओर से बरियातू थाने में दर्ज की गयी प्राथमिकी में संजय कुमार तिवारी पर रिम्स के नाम से फर्जी कोविड-19 रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आरोप लगाया गया था। एफआईआर दर्ज होने के बाद बरियातू पुलिस ने जब मामले तफ्तीश शुरू की। इसमें जानकारी मिली कि रिम्स में ही कार्यरत एक कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी प्रियरंजन ने संजय तिवारी के लिए किसी एतवा टोप्पो के व्यक्तिगत डाटा को आईसीएमआर के पोर्टल अपलोड कर उसे ही डाउनलोडेड कर रिपोर्ट बनायी गयी। रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव होने की बनायी गयी ताकि संजय तिवारी को फायदा पहुंचाया जा सके। बरियातू पुलिस के द्वारा गिरफ्तार किये जाने के बाद प्रियरंजन ने बताया कि उसे संजय तिवारी के यहां काम करने वाले अमरदीप जो उसका रिश्तेदार लगता है, उसी के कहने पर कोविड का फर्जी सर्टिफिकेट बनाया था। जिसके बाद पुलिस ने अमरदीप को भी गिरफ्तार कर लिया।पुलिस की पूछताछ में अमरदीप ने बताया है कि उसे फर्जी कोविड सर्टिफिकेट बनाने के लिए संजय तिवारी ने 7 हजार रुपये दिये थे। झारखंड सरकार के मिड डे मील के खाते से 100 करोड़ रुपये के फर्जी हस्तांतरण से जुड़े मनी लाउंड्रिंग मामले के आरोपी भानु कंस्ट्रक्शन के संचालक संजय कुमार तिवारी को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कोर्ट में 25 मार्च को सरेंडर करना था। लेकिन संजय तिवारी ने उस सरेंडर से बचने के लिए कोविड होने की गलत जानकारी रांची के पीएमएलए कोर्ट को दी। पीएमएलए कोर्ट को दिएलये गये रिम्स के इलाज संबंधी कागजात और कोविड सर्टिफिकेट की जांच ईडी के रांची जोनल आफिस ने की, तब यह पता चला कि संजय तिवारी के द्वारा जो इलाज संबंधी कागजात और कोविड सर्टिफिकेट दिये गये हैं, वह गलत हैं। हालांकि इसी बीच संजय तिवारी फरार होने में कामयाब हो गया। भानु कंस्ट्रक्शन के संचालक संजय कुमार तिवारी को सशर्त 40 दिन की अंतरिम जमानत दी गयी थी, लेकिन वह समय सीमा पर गबन के बकाया 16.35 करोड़ रुपये बैंक को वह वापस नहीं कर सका। इसके बाद उसने ईडी कोर्ट में सरेंडर किया था। जहां से उसे जेल भेज दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने पक्षकारों के दलीलें सुनने के बाद संजय तिवारी को दो दिनों के लिए एक बार अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था। यह राहत लेन-देन को पूरा करने के उद्देश्य से था, ताकि राशि को उस बैंक खाते में लाया जा सके। लेकिन दोबारा जेल जाने से बचने के लिए संजय कुमार तिवारी ने कोविड का फर्जी सर्टिफिकेट बनावा लिया।
एक अप्रैल से आयकर-बीमा नीति समेत कई जरूरी बदलाव, आपकी वित्तीय सेहत पर सीधा असरएबीएन सेंट्रल डेस्क। नये वित्त वर्ष यानी 2023-24 में प्रवेश करने के साथ ही आयकर समेत कई बदलाव आज से लागू हो गए हैं। इनकी सूची लंबी है। इन बदलावों का सीधा असर आपकी-हमारी वित्तीय सेहत पर पड़ेगा। इसके अलावा, 2023-24 के आम बजट में कई नई घोषणाएं भी की गई हैं, जो आज से लागू होने जा रही हैं। वहीं, सोने की खरीदारी, म्यूचुअल फंड, रीट-इनविट, जीवन बीमा पॉलिसी के प्रीमियम भुगतान संबंधी कई नियम भी बदल रहे हैं। आइये जानते हैं जरूरी बदलावों के बारे में...नयी कर व्यवस्था : 7 लाख तक की कमाई पर अब छूटअगर आप अगले वित्त वर्ष से आयकर रिटर्न भरने के लिए पुरानी या नयी कर व्यवस्था में से किसी एक का चयन नहीं करते हैं तो नयी व्यवस्था में डिफॉल्ट शामिल हो जायेंगे। 2023-24 के बजट में वित्त मंत्री ने इसे पेश किया था। नयी कर व्यवस्था में छूट की सीमा 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 7 लाख रुपये कर दी गयी है। पुरानी कर व्यवस्था में 2.5 लाख रुपये तक की कमाई कर मुक्त है। ध्यान देने वाली बात है कि पुरानी कर व्यवस्था की तरह नई में आपको कई प्रकार की छूट का लाभ नहीं मिलेगा। अगर आप नई कर व्यवस्था का चुनाव करते हैं तो 7.27 लाख रुपये की सालाना कमाई पर 25,000 रुपये का कर देना होगा।स्टैंडर्ड डिडक्शन : 50,000 रुपये का उठा सकते हैं लाभवेतनभोगी कर्मचारियों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन अब नयी कर व्यवस्था का हिस्सा होगा। इसके लिए करदाता 50,000 रुपये तक का दावा कर सकता है, जबकि 15.5 लाख रुपये या उससे अधिक की आय वाले प्रत्येक वेतनभोगी को स्टैंडर्ड डिडक्शन के रूप में 52,500 रुपये का लाभ होता है। नये वित्त वर्ष से गैर-सरकारी कर्मचारियों के लिए लीव एनकैशमैंट की सीमा 25 लाख रुपये कर दी गयी है। पहले यह तीन लाख ही थी। 2002 में इसे तीन लाख रुपये किया गया था।महिला सम्मान बचत योजना पर मिलेगा 7.50 फीसदी ब्याजमहिला सम्मान बचत योजना को पहली बार शुरू किया गया है। इसके तहत महिलाओं या युवतियों के नाम पर अधिकतम दो लाख रुपये तक का निवेश कर सकते हैं। इस पर 7.50 फीसदी की दर से तय ब्याज मिलेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से 2023-24 के बजट में पेश यह योजना केवल दो साल के लिए होगी। यानी महिला सम्मान बचत योजना मार्च, 2025 तक रहेगी। इस अवधि के दौरान दो लाख रुपये के निवेश पर कुल 30,000 रुपये का ब्याज मिलेगा। इसमें आंशिक निकासी की भी सुविधा दी गयी है।वरिष्ठ नागरिकों के लिए बचत योजना में दोगुना निवेशवरिष्ठ नागरिक बचत योजना (एससीएसएस) और पोस्ट ऑफिस मासिक योजना (पीओएमआईएस) में निवेश दोगुना हो जायेगा। एससीएसएस में 15 लाख रुपये सालाना की सीमा अब 30 लाख रुपये हो जायेगी। यानी अगर कोई इसमें अधिकतम 15 लाख रुपये पहले निवेश करता था तो उसे 8 फीसदी ब्याज दर से 5 साल में 6 लाख रुपये का ब्याज मिलता था।अधिकतम 30 लाख की निवेश सीमा पर 12 लाख का ब्याजपोस्ट ऑफिस मासिक योजना में पहले व्यक्तिगत निवेश की सीमा 4.5 लाख रुपये थी, जिसे बढ़ाकर अब 9 लाख रुपये कर दिया गया है। संयुक्त खाते के लिए इस निवेश सीमा को 9 लाख से बढ़ाकर 15 लाख रुपये किया गया है।ऑनलाइन गेमिंग पर लगेगा 30 फीसदी टैक्सऑनलाइन गेमिंग से कितनी भी कमाई हो, अब 30 फीसदी टैक्स का भुगतान करना होगा। पहले 10 हजार रुपये या इससे ज्यादा की कमाई पर ही टैक्स लगता था। इसके अलावा, आयकर रिटर्न दाखिल करते समय अब ऑनलाइन गेमिंग के जरिये मिलने वाली रकम की जानकारी भी देनी होगी।डेट म्यूचुअल फंड : नहीं मिलेगा एलटीसीजी लाभएक अप्रैल से डेट म्युचुअल फंड में निवेश के नियम बदल जायेंगे। इसके तहत, अब लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स (एलटीसीजी) की परिभाषा बदल गयी है। नये नियम उन डेट म्यूचुअल फंड पर लागू होंगे, जिन्होंने शेयर बाजार में 35 फीसदी से कम निवेश कर रखा है। इसके तहत निवेश पर मिलने वाले रिटर्न पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लगेगा। इस कारण निवेशकों को पहले से ज्यादा टैक्स देना पड़ेगा।रीट-इनविट में कर्ज भुगतान पर लगेगा टैक्सनये नियम के तहत रीट और इनविट में कर्ज भुगतान किया जाता है तो इस पर टैक्स लगेगा। इसके तहत कंपनियां यूनिट धारकों को कर्ज पुनर्भुगतान के रूप में रकम देती हैं। रीट ऐसी योजना है जो निवेशकों से पैसा जुटाकर उसे रियल एस्टेट में निवेश करती है। इसी तरह से इनविट ऐसी योजना है जिसके तहत कंपनियां पैसा जुटाकर इन्फ्रा में निवेश करती हैं।महंगी होंगी गाड़ियांदेश में एक अप्रैल से नये उत्सर्जन मानक लागू हो जायेंगे। इससे वाहन निर्माता कंपनियां बीएस-6 के दूसरे चरण के कड़े उत्सर्जन नियम के अनुसार गाड़ियां बनाना या पुरानी गाड़ियों के इंजन अपडेट करना शुरू कर चुकी हैं। इससे कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ रही है। यही वजह है कि मारुति, टाटा मोटर्स, होंडा, किआ और हीरो मोटोकॉर्प समेत कई कंपनियां वाहनों के दाम बढ़ाने वाली हैं।बंद हो सकती हैं ऑल्टो समेत कई कारेंप्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन पर लगाम लगाने के लिए सरकार नए नियम ला रही है। एक अप्रैल से रियल टाइम ड्राइविंग एमिशन (आरडीई) और बीएस-6 का दूसरा चरण लागू हो जाएगा। नए नियमों का पालन नहीं करने वाली गाड़ियों की बिक्री नहीं होगी। इस कारण, मारुति ऑल्टो, होंडा कार्स की डब्ल्यूआरवी और ह्यूंडई आई20 डीजल समेत कई कारों की बिक्री बंद हो सकती है।टोल टैक्स : सात फीसदी तक महंगादेश में टोल टैक्स महंगा हो जायेगा। यूपी में यह 7 फीसदी तक महंगा हो जायेगा। नेशनल हाईवे के टोल प्लाजा पर बढ़ी दरों से टोल की वसूली की जायेगी। वृद्धि एकल यात्रा से लेकर मासिक पास तक पर लागू होगी।कबाड़ नीति : हटेंगे 15 साल पुराने वाहनवाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने, गाड़ियों की ईंधन एफिशिएंसी बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार एक अप्रैल से वाहन कबाड़ नीति लागू करने जा रही है। इसके तहत देश में 15 साल पुराने वाहनों को कबाड़ में भेजने की तैयारी है। सरकार ने साफ किया है कि कौन सी गाड़ियां कबाड़ में जाने वाली हैं। कबाड़ में भेजी जाने वाली गाड़ियों को रिसाइकिल किया जायेगा। इससे धातु, रबड़, कांच आदि कई वस्तुएं प्राप्त होंगी, जिनका वाहन बनाने में दोबारा इस्तेमाल किया जा सकेगा। इस नीति के तहत अगर कोई अपने वाहनों को कबाड़ में भेजता है और उसकी जगह नयी गाड़ी खरीदता है तो उस नयी गाड़ी पर 25 फीसदी तक रोड टैक्स में छूट दी जायेगी।यूपी : 22 रुपये किलो बिकेंगे वाहनयूपी में कबाड़ सेंटर में वाहन बेचने पर 22 रुपये प्रति किलो के हिसाब से दाम मिलेगा। इसमें वाहन के कुल वजन का 65 फीसदी हिस्सा ही मूल वजन माना जाएगा और उस रकम का भी 90 फीसदी ही भुगतान होगा। राज्य सरकार ने दो लक्ष्य तय किये हैं। पहला, सभी सरकारी वाहनों को स्क्रैप करना है। दूसरा, निजी वाहन भी इस नीति के दायरे में आयेंगे, जिनके लिए स्वैच्छिक नीति तय की गयी है।पेट्रोल-डीजल एक अप्रैल से पेट्रोल-डीजल और गैस की नयी कीमतें जारी होंगी। ऐसे में उम्मीद है कि इनमें बढ़ोतरी या फिर कोई बदलाव न हो। हालांकि, पिछले महीने घरेलू गैस सिलिंडर में 50 रुपये का इजाफा किया गया था।जीवन बीमा पॉलिसियों पर अब ज्यादा करएक अप्रैल से जारी होने वाली पांच लाख रुपये से अधिक के सालाना प्रीमियम की परंपरागत जीवन बीमा पॉलिसी से होने वाली कमाई पर टैक्स देना होगा। हालांकि, इसमें यूलिप (यूनिट लिंक्ड प्लान इंश्योरेंस) प्लान पर असर नहीं होगा। ऐसे में इस बदलाव का असर ज्यादा प्रीमियम देने वाले पॉलिसीधारक पर होगा।सोना खरीदारी पर अब छह अंक वाले हॉलमार्कउपभोक्ता मंत्रालय एक अप्रैल से सोने के आभूषणों की बिक्री के नियम बदल रहा है। नये नियम के अनुसार, 31 मार्च, 2023 के बाद चार अंकों के हॉलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन (एचयूआईडी) वाले गहनों की बिक्री नहीं होगी। एक अप्रैल 2023 से सिर्फ छह अंकों वाले हॉलमार्क जूलरी की ही बिक्री की जायेगी। इससे जूलरी की शुद्धता और गुणवत्ता की गारंटी मिलेगी। इससे तमाम जानकारी जुटाना आसान हो जायेगा।भौतिक सोने को ई-गोल्ड में बदलने पर नहीं देना होगा करइलेक्ट्रॉनिक सोने की खरीदारी को बढ़ावा देने के लिए अब भौतिक सोने से ई-गोल्ड में बदलाव पर कोई कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगेगा। यानी अब निवेशक जूलरी बेचकर उसे ई-गोल्ड में निवेश कर सकते हैं। ई-गोल्ड से भौतिक सोने के बदलाव में भी कोई कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगेगा। अब तक सोने की खरीदारी के तीन साल के बाद इस पर 20 फीसदी का टैक्स और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स पर 4 फीसदी उपकर लगता था। बजट में सरकार के उठाये गये कदम से भौतिक सोने को ई-गोल्ड में बदलने को बढ़ावा मिलेगा।
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