जानिये हाईकोर्ट ने क्यों हटाया बैनएबीएन सेंट्रल डेस्क। नागालैंड सरकार ने 2020 में डॉग मीट पर बैन लगा दिया था। गुवाहाटी हाईकोर्ट ने हाल ही में नागालैंड सरकार के उस नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया, जिसमें प्रदेश में कुत्ते के मांस यानी डॉग मीट की खरीद-बिक्री पर रोक लगायी गयी थी। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2011 पर भी सवाल उठाये। सरकार के किस नोटिफिकेशन पर विवाद नागालैंड सरकार ने 4 जुलाई 2020 को डॉग मीट पर बैन के लिए नोटिफिकेशन जारी किया। यह नोटिफिकेशन राज्य के चीफ सेक्रेटरी की तरफ से जारी किया गया था और कुत्ते के मांस की खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी गई थी। नोटिफिकेशन में कॉमर्शियल और रेस्टोरेंट्स जैसी जगहों पर भी डॉग मीट की बिक्री प्रतिबंधित की गयी थी। नागालैंड सरकार ने यह कदम फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी आफ इंडिया के साल 2014 के उस सर्कुलर के बाद उठाया था, जिसमें कहा गया था कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड रेगुलेशन, 2011 में जिन जानवरों का जिक्र है, उसके अलावा किसी अन्य प्रजाति के जानवर का वध पूरी तरह प्रतिबंधित है। अधिनियम में क्या कहा गया है? फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड रेगुलेशन, 2011 के नियम 2.5.1 (ए) में जानवर को भेड़ परिवार, बकरी परिवार, सुअर परिवार, मवेशी और कुक्कुट व मछली के रूप में परिभाषित किया गया है। हाईकोर्ट ने क्या-क्या कहाहाईकोर्ट में जस्टिस मारली वानकुंग की सिंगल जज की बेंच ने मामले पर सुनवाई करते कहा कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड रेगुलेशन, 2011 में डॉग यानी कुत्ते का नाम नहीं होना चौंकाने वाला नहीं है, क्योंकि पूर्वोत्तर भारत के कुछ इलाकों में ही डॉग मीट खाया जाता है। इस स्थिति में लिस्ट में इसका नाम शामिल करना अकल्पनीय होता। हाईकोर्ट ने कहा कि नागा इलाकों में आज भी कुत्ते के मांस चाव से खाया जाता है और यह सदियों से चला आ रहा है। हाईकोर्ट ने किताब और दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि नागालैंड के तमाम जनजातीय समूहों में सदियों से डॉग मीट के सेवन का जिक्र मिलता है। बचाव पक्ष ने क्या दलील दीसुनवाई के दौरान एनिमल्स एंड ह्यूमन सोसाइटी इंटरनेशनल/इंडिया की तरफ से पेश वकील ने दलील दी कि जिस तरीके से कुत्तों को तस्करी करके लाया जाता है वह चिंता का विषय है। कुत्तों के पैर बांध दिये जाते, मुंह पर भी रस्सी बांध दी जाती है और बोरी में भर दिया जाता है। कई-कई दिनों तक कोई खाना-पानी भी नहीं दिया जाता है। यह जानवरों से क्रूरता की श्रेणी में आता है। हाईकोर्ट ने इस बात का संज्ञान लिया की संस्था की तरफ से कुत्तों के साथ बर्बरता की जो तस्वीरें साझा की गई थीं, उससे क्रूरता जाहिर हो रही है, लेकिन इससे डॉग मीट पर बैन को जायज नहीं ठहराया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि जानवरों के खिलाफ बर्बरता के मामले में आईपीसी का सहारा लिया जा सकता है।
टीम एबीएन, रांची। नामकुम थाना क्षेत्र में नौ जनवरी, 2023 को नामकुम बाजार स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से पैसा लेकर जा रही महिला से पांच लाख रुपये लूट मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने पांच माह बाद ओडिशा के गंजाम से ए अनिल पिता ए रामू को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उसके पास से ढाई लाख रुपये नकद भी बरामद किये हैं। जानकारी के अनुसार, नौ जनवरी को बैंक से पैसे लेकर भूतपूर्व सैनिक प्रभात शंकर की पत्नी गीता देवी बाहर निकली। उसी दौरान बाइक सवार दो युवकों ने पैसे की थैली लूटकर फरार हो गये थे। एसएसपी के निर्देश पर ग्रामीण एसपी के निर्देश पर टीम गठित की गयी थी। अनुसंधान के क्रम में तकनीकी शाखा के सहयोग से मिले इनपुट के आधार पर पुअनि धीरज ने ओडिशा से गिरफ्तार किया। गिरफ्तार ए अनिल ने लूट में शामिल ओडिशा निवासी साथी की भी जानकारी दी जिसे पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। पुलिस के पहुंचने से पहले ही वो फरार हो गया। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए प्रयासरत है।
रिमांड पर शुक्रवार को होगी बहसटीम एबीएन, रांची। बरियातू रोड स्थित सेना के कब्जे वाली 4. 55 एकड़ जमीन की अवैध तरीके से खरीद बिक्री मामले में ईडी द्वारा गिरफ्तार किए गए कोलकाता के व्यवसायी अमित अग्रवाल और जगतबंधु टी इस्टेट के मालिक दिलीप घोष को गुरुवार को ईडी के विशेष न्यायाधीश दिनेश राय कोर्ट में पेश किया गया। ईडी ने इन दोनों से पूछताछ के लिए 5 दिनों की रिमांड कोर्ट से मांगी थी। आज दोनों को पेशी के बाद कोर्ट ने जेल भेजने का दिया। रिमांड पर कल (शुक्रवार) बहस होगी।इन दोनों की गिरफ्तारी बुधवार को देर रात कोलकाता से हुई थी। गिरफ्तारी से पहले ईडी ने उनसे पूछताछ की थी, लेकिन दोनों ने ईडी की टीम को संतोषजनक जवाब नहीं दिया था। दिलीप घोष ने ही बरियातू स्थित सेना के कब्जे वाली जमीन की खरीदारी की थी। इस मामले में ईडी ने दिलीप घोष को 10 मई को पूछताछ के लिए समन जारी किया था लेकिन वह ईडी के समक्ष हाजिर नहीं हुआ था, पेश नहीं होने का उसने कोई कारण भी नही बताया था।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में एक बार फिर ईडी की कार्रवाई में तेजी आई है। ईडी ने साहिबगंज में 1000 करोड़ के खनन घोटाले में दाहू यादव, उसके भाई सुनील यादव और बेटे राहुल यादव के ठिकानों पर छापेमारी की। रविवार देर शाम करमापहाड़ और आसपास की पहाड़ियों पर यह छापेमारी की गयी। छापेमारी में 4 थानों की पुलिस शामिल थी। साहिबगंज में हुए अवैध खनन और मनी लाउड्रिंग के आरोपियों में से एक दाहू यादव ईडी के मोस्ट वांटेड आरोपी के लिस्ट में शामिल है। दाहू यादव पूछताछ के लिए 18 जुलाई, 2022 को हाजिर हुआ था, जिसके बाद से ही वह फरार चल रहा है। उसके घर पर कुर्की-जब्ती तक की जा चुकी है। बावजूद इसके दाहू यादव अभी भी ईडी और पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।कौन है दाहू यादव?दाहू यादव 1000 करोड़ अवैध खनन मामले में मुख्य आरोपीदाहू यादव महीनों से झारखंड पुलिस की नजर में फरार हैगैंग्स ऑफ साहिबगंज का नामी अपराधी है दाहू यादवदाहू यादव को पंकज मिश्रा का खास सहयोगी बताया जाता हैअवैध खनन मामले में पंकज मिश्रा बीते साल 19 जुलाई को हुए थे गिरफ्तारदाहू यादव के खिलाफ बहुत पहले से वारंट जारी हैक्या है अवैध खनन घोटाला?8 जुलाई 2022 को ईडी ने पहली बार अवैध खनन मामले में छापेमारी कीसीएम के विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा के ठिकानों पर छापेमारी हुईमिश्रा के आवास पर 5 करोड़ से ज्यादा कैश, अहम दस्तावेज बरामद हुएपंकज के साथ अन्य आरोपियों के खातों से 11 करोड़ से ज्यादा रूपए मिले19 जुलाई को पंकज मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया गयापंकज की गिरफ्तारी के बाद ED ने 1000 करोड़ के अवैध खनन की पुष्टि कीपंकज के ही आवास पर सीएम के बैंक खाते से जुड़ा चेकबुक मिलाइसके बाद सीएम के एक और करीबी प्रेम प्रकाश के घर छापेमारी हुईप्रेम प्रकाश के आवास से अहम दस्तावेज, एके-47 राइफल बरामद हुआअवैध खनन मामले में दाहू यादव और बच्चू यादव जैसे नाम भी सामने आयेझारखंड में एक बार फिर ईडी की कार्रवाईपटना, कोलकाता, रांची, धनबाद और हजारीबाग में रेडधनबाद में 5 लोगों के ठिकानों पर हो रही है छापेमारीधनबाद में जगनारायण सिंह के ठिकानों पर दबिशपुंज सिंह, टीपी सिंह, मनोज सिंह के घर पर छापेमारीसुरेंद्र जिंदल के घर और ऑफिस पर ED का छापाहजारीबाग में बालू कारोबारी संजय सिंह के ठिकानों पर रेडकागजातों को खंगाल रही है ED की 5 सदस्यीय टीमबालू कारोबारी संजय सिंह के पार्टनर हैं जगनारायण सिंह सैंड माइनिंग से जुड़े केस में हो रही छापेमारीधनबाद- अलोकिक ग्रुप के मालिक के घर पर रेडईडी ने अलोकिक ग्रुप के मालिक के घर पर की रेडधनबाद के मेमको मोड़ में है आवास और ऑफिसअलोकिक ग्रुप के मालिक है रितेश शर्मा हजारीबाग : बालू कारोबारी संजय सिंह के आवास पर रेड जारीमिशन रोड स्थित आवास पर ईडी की छापेमारी जारीकागजातों को खंगालने में जुटी पांच सदस्यीय टीमहजारीबाग में फिर एक बार ईडी की छापोमारी देखने को मिली है। बालू कारोबारी संजय सिंह के मिशन रोड स्थित आवास पर ईडी की छापेमारी जारी है। पांच सदस्यीय टीम कागजातों को खंगाल रही है। आपको बता दें कि संजय सिंह के पार्टनर जगनारायण सिंह के ठिकानों पर भी धनबाद में ईडी की रेड चल रही है। मामला बिहार के औरंगाबाद में सैंड माइनिंग से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।
गिरफ्तारी के बाद रांची लाया गया 25 लाख का इनामी नक्सली दिनेश गोप, पुलिस करेगी पूछताछटीम एबीएन, रांची। उग्रवादी संगठन पीएलएफआई के सुप्रीमो दिनेश गोप को एनआईए के द्वारा गिरफ्तार करने के बाद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रांची ले आया गया है। रांची एयरपोर्ट पर दिनेश गोप के पहुंचने से पहले ही पूरे एयरपोर्ट को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के अनुसार दिनेश गोप की दिल्ली से गिरफ्तारी हुई है। गिरफ्तारी के बाद रविवार को झारखंड के प्रतिबंधित नक्सली संगठन पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएलएफआई) के फरार सुप्रीमो दिनेश गोप को रांची लाया गया है। रांची में एनआईए के साथ-साथ झारखंड एटीएस और रांची पुलिस की टीम उससे पूछताछ कर रही है।इससे पहले एनआईए ने एक प्रेस रिलीज जारी कर दिनेश गोप की गिरफ्तारी के संबंध में मीडिया को जानकारी दी है। एनआईए के अनुसार, दिनेश गोप के खिलाफ झारखंड, बिहार और ओडिशा राज्यों में 102 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से अधिकांश मामले हत्या, अपहरण, धमकी, जबरन वसूली और पीएलएफआई के लिए धन जुटाने से संबंधित हैं। एनआईए ने भी दिनेश गोप के सिर पर पांच लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया था, जबकि झारखंड सरकार ने 25 लाख की घोषणा थी, दिनेश गोप करीब दो दशक से फरार चल रहा था। दिनेश गोप झारखंड के खूंटी, रांची, सिमडेगा, गुमला, चाईबासा, लोहरदगा जैसे जिलों के लिए आतंक का दूसरा नाम था। उसने अपने दहशत और डर के दम पर अकूत संपत्ति बनायी थी। उसकी दो पत्नी है और दोनों ही फिलहाल जेल में बंद हैं। उसके आतंक को देखते हुए उस पर झारखंड पुलिस ने 25 लाख का इनाम घोषित किया था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। एसबीआई का यह स्पष्ट।किया है कि सोशल मीडिया पर चल रहीं उन अफवाहों के बाद सामने आया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि दो हजार के नोट बदलवाने के लिए आईडी प्रूफ ले जाने की बात की जा रही थी।देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने रविवार को बताया है कि ग्राहक दो हजार के नोट बिना किसी आईडी प्रूफ और फॉर्म भरे ही बैंक की विभिन्न शाखाओं से बदलवा सकेंगे।एसबीआई ने कहा है कि 20 हजार कीमत तक के नोट बिना आईडी प्रूफ के बदलवाये जा सकेंगे। बता दें कि एसबीआई का यह स्पष्टीकरण, सोशल मीडिया पर चल रहीं उन अफवाहों के बाद सामने आया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि दो हजार के नोट बदलवाने के लिए आईडी प्रूफ, आधार कार्ड दिखाने के साथ ही एक फॉर्म भी भरना होगा।रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को एलान किया था कि 2000 के करेंसी नोट चलन से बाहर होंगे। हालांकि नोटों को बदलने के लिए रिजर्व बैंक ने 30 सितंबर तक का वक्त दिया है। इस दौरान लोग बैंकों में जाकर अपने दो हजार के नोट अन्य करेंसी नोट से बदल सकते हैं। अब स्टेट बैंक ने अपने सभी स्थानीय हेड ऑफिस के चीफ जनरल मैनेजर्स को भेजी जानकारी में बताया है कि 20 हजार तक की कीमत के दो हजार के नोट बिना किसी आईडी प्रूफ और मांग पर्ची के बदले जा सकेंगे। अपने ही खाते में दो हजार के नोट जमा करने की रिजर्व बैंक ने कोई सीमा तय नहीं की है लेकिन यह ग्राहकों को केवाईसी और अन्य वैधानिक नियमों पर निर्भर करेगा।20 मई को भेजी जानकारी में एसबीआई ने कहा है कि दो हजार के नोट बदलवाने के लिए किसी आईडी प्रूफ की भी जरूरत नहीं होगी।बैंक ने अपने अधिकारियों से कहा है कि वह जनता के साथ सहयोग करें ताकि दो हजार के नोट बदलने की पूरी प्रक्रिया बिना किसी परेशानी के और आसानी से पूरी हो सके।नोट बदलने की प्रक्रिया 23 मई से शुरू होगी लेकिन कुछ लोग शनिवार को ही बैंक पहुंच गये। एसबीआई ने बताया कि ऐसे लोगों को समझाकर वापस भेजा गया।कुछ ग्राहकों ने दो हजार के नोट बैंक में जमा करने के लिए डिपॉजिट मशीन का भी इस्तेमाल किया। कुछ लोगों ने खरीददारी कर दो हजार के नोट खर्च करने की कोशिश की लेकिन रिजर्व बैंक के नोटिफिकेशन के बाद बाजार में भी लोग दो हजार के नोट लेने में हिचक रहे हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद में मिले शिवलिंग की उम्र का पता लगाने के लिए कॉर्बन डेटिंग समेत विभिन्न वैज्ञानिक सर्वेक्षणों को फिलहाल स्थगित कर दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 मई को आधुनिक तकनीक का उपयोग करके संरचना की आयु का निर्धारण करने का आदेश दिया था। संचरना के शिवलिंग होने का दावा किया गया है। हालांकि, मस्जिद के अधिकारियों ने कहा है कि संरचना वजू खाना में एक फव्वारे का हिस्सा है, जहां नमाज से पहले हाथ, पैर और मुंह धोते हैं। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने शिवलिंग के वैज्ञानिक सर्वेक्षण और कार्बन डेटिंग के उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ मस्जिद समिति की याचिका पर केंद्र, उत्तर प्रदेश सरकार और हिंदू याचिकाकर्ताओं को नोटिस जारी किये।पीठ ने कहा, चूंकि विवादित आदेश के निहितार्थों की बारीकी से जांच की जानी चाहिए, इसलिए आदेश में संबंधित निर्देशों का कार्यान्वयन अगली तारीख तक स्थगित रहेगा। पीठ में जस्टिस पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन भी शामिल थे। शीर्ष अदालत संरचना की उम्र निर्धारित करने के लिए कार्बन डेटिंग सहित वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। शिवलिंग के प्रस्तावित वैज्ञानिक सर्वेक्षण को फिलहाल स्थगित करने की दलील पर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार दोनों ने सहमति व्यक्त की है।
दो हजार के नोट चलन से बाहर होंगे, बैंकों में 30 सितंबर तक बदले जा सकेंगे एबीएन सेंट्रल डेस्क। आरबीआई ने 2000 रुपये के नोट को चलन से वापस लेने की घोषणा की है। भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों को सलाह दी है कि वे तत्काल प्रभाव से 2000 रुपये मूल्यवर्ग के बैंकनोट जारी करना बंद करें। हालांकि 2000 रुपये मूल्यवर्ग के बैंक नोट वैध मुद्रा बने रहेंगे। जानकारी के मुताबिक, क्लीन नोट पॉलिसी के तहत आरबीआई ने यह फैसला लिया है। आरबीआई ने कहा है कि यह नोट 30 सितंबर तक कानूनी रूप से वैध रहेंगे। आरबीआई ने नवंबर 2016 में आरबीआई एक्ट 1934 की धारा 24(1) के तहत ये नोट निकाले थे। रिजर्व बैंक ने नोटबंदी के बाद इन नोटों को जारी किया था।यह फैसला इसलिए लिया गया था ताकि उस समय 500 और 1000 रुपये के जो नोट चलन से हटाये गये थे, उनका बाजार और अर्थव्यवस्था पर असर कम किया जा सके। जब दूसरे मूल्य के बैंक नोट पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो गए, तब दो हजार रुपये को चलन में लाने का उद्देश्य पूरा हो गया। आरबीआई ने कहा कि 2000 रुपये के बैंक नोटों को लाने के उद्देश्य के एक बार पूरा हो जाने के बाद 2018-19 में 2000 रुपये के नोटों की छपाई बंद कर दी थी। उस समय तक अन्य मूल्यवर्ग के बैंक नोट पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो गये थे। आरबीआई ने यह भी बताया है कि मार्च 2017 से पहले 2000 रुपये मूल्यवर्ग के बैंक नोटों में से लगभग 89 प्रतिशत जारी किए गए थे।
द केरल स्टोरी पर ममता बनर्जी ने मुंह की खाईसुप्रीम कोर्ट ने बैन हटाया, तमिलनाडु सरकार को भी सुरक्षा इंतजाम के दिये निर्देशएबीएन सेंट्रल डेस्क। तमिलनाडु सरकार ने बुधवार को दिये गये अपने हलफनामे में कहा था कि राज्य में द केरल स्टोरी की स्क्रीनिंग पर कोई बैन नहीं लगाया गया है। एमके स्टालिन सरकार ने निमार्ताओं के दावों का खंडन करते हुए कहा कि ये दलील गलत है कि तमिलनाडु में फिल्म दिखाने पर रोक लगायी गयी है।सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (18 मई 2023) को लव जिहाद और धर्मांतरण के बाद लड़कियों को आतंकी गतिविधियों में धकेलने पर बनी फिल्म द केरल स्टोरी पर पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा लगाये गये प्रतिबंध पर रोक लगा दी। इतना ही नहीं, कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार के उस बयान को भी सुना, जिसमें कहा गया कि तमिलनाडु में फिल्म के प्रदर्शन पर प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई प्रतिबंध नहीं है।तमिलनाडु सरकार के एडवोकेट जनरल के बयान को रिकॉर्ड करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को आदेश दिया कि जिन सिनेमाघरों में यह फिल्म दिखायी जा रही है, उसे और उसमें फिल्म देखने आने वाले लोगों को वह सुरक्षा मुहैया कराये।इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से भी कहा कि फिल्म द केरला स्टोरी में उचित डिस्क्लेमर होना चाहिए। फिल्म निमार्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा कि 20 मई की शाम 5 बजे तक डिस्क्लेमर जोड़ा जायेगा।हरीश साल्वे ने कहा कि फिल्म में डिस्क्लेमर इस बात को साबित करने के लिए कोई प्रामाणिक डेटा उपलब्ध नहीं है कि धर्मांतरण के 32,000 या कोई अन्य आंकड़ा हैं और फिल्म इस मुद्दे के काल्पनिक संस्करण का प्रतिनिधित्व करती है जोड़ा जायेगा।भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जीबी परदीवाला की बेंच ने इस मामले को जुलाई 2023 में होने वाली अगली सुनवाई तक के लिए टाल दिया है। अंतरिम आदेश में पीठ ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार का निर्णय प्रथम दृष्टया व्यापकता से ग्रस्त है।इससे पहले बुधवार (17 मई 2023) को सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल की ओर पेश अधिवक्ता ने सर्वोच्च न्यायालय में तर्क दिया कि केरल की इस कहानी में अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया है और यह फिल्म हेरफेर किए गए तथ्यों पर आधारित है। इससे राज्य में सांप्रदायिक वैमनस्य और कानून व्यवस्था से संबंधित स्थिति खड़ी हो सकती है।इस फिल्म के निर्माता ने राज्य में इस फिल्म को ना दिखाने के सरकार के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी थी। अपनी याचिका में निर्माता ने पश्चिम बंगाल सिनेमा (विनियमन) अधिनियम, 1954 की धारा 6 (1) की संवैधानिकता को भी चुनौती दी है, जिसके तहत पश्चिम बंगाल सरकार ने फिल्म पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया था।इस पर राज्य सरकार ने कहा कि फिल्म पर प्रतिबंध खुफिया सूचनाओं पर आधारित एक नीतिगत निर्णय है। इससे याचिकाकर्ताओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं हुआ है। याचिकाकर्ता के वित्तीय नुकसान को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं बताया जा सकता है। इसके अलावा, राज्य सरकार ने यह भी तर्क दिया कि पश्चिम बंगाल सिनेमा (विनियमन) अधिनियम के रूप में संवैधानिकता की एक धारणा है, जो उन फिल्म प्रदर्शनियों के लिए एक अपवाद बनाती है, जो शांति भंग कर सकती है।वहीं, तमिलनाडु सरकार ने बुधवार को दिये गये अपने हलफनामे में कहा था कि राज्य में द केरल स्टोरी की स्क्रीनिंग पर कोई बैन नहीं लगाया गया है। एमके स्टालिन सरकार ने निर्माताओं के दावों का खंडन करते हुए कहा कि ये दलील गलत है कि तमिलनाडु में फिल्म दिखाने पर रोक लगायी गयी है।तमिलनाडु ने कहा था कि ये फिल्म 5 मई 2023 को 19 मल्टीप्लेक्स में रिलीज की गयी, लेकिन फिल्म में जाने-पहचाने कलाकारों के न होने, कलाकारों के खराब प्रदर्शन और दर्शकों की संख्या में कमी के कारण मल्टीप्लेक्स मालिकों ने खुद ही 7 मई 2023 को फिल्म की स्क्रीनिंग बंद कर दी थी। उन्होंने कहा कि फिल्म निर्माताओं ने जानबूझकर झूठा बयान दिया है कि राज्य सरकार ने फिल्म की स्क्रीनिंग पर बैन लगाया है।हलफनामे में आगे दावा किया गया था कि राज्य में फिल्म की स्क्रीनिंग करने वाले सभी सिनेमाघरों के लिए सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किये गये थे। रिलीज से पहले शहरों में जिला पुलिस अधीक्षकों और पुलिस आयुक्तों को राज्य की कानून व्यवस्था पर नजर रखने के लिए अलर्ट जारी किया था। 25 डीएसपी सहित 965 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को फिल्म दिखाने वाले 21 सिनेमाघरों की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया था।
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