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ज्ञानवापी परिसर का होगा एएसआई सर्वे
Published / 2023-07-21 19:53:59
ज्ञानवापी परिसर का होगा एएसआई सर्वे

जिला अदालत में हिंदू पक्ष का आवेदन मंजूरएबीएन सेंट्रल डेस्क। वाराणसी के बहुचर्चित ज्ञानवापी परिसर में वजूस्थल को छोड़कर परिसर के सर्वे वाली याचिका पर आदेश आ गया है। जिला जज डॉ अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने मां श्रृंगार गौरी मूल वाद में ज्ञानवापी के सील वजूखाने को छोड़कर बैरिकेडिंग वाले क्षेत्र का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से रडार तकनीक से सर्वे कराने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा है कि एएसआई बताए कि किस तरह से और कैसे सर्वे होगा कि ज्ञानवापी परिसर में किसी भी तरह का नुकसान न हो। सर्वे के संबंध में पूरी तैयारी के साथ एएसआई चार अगस्त तक रिपोर्ट दाखिल करे। इसके साथ ही मुकदमे की सुनवाई की अगली तिथि अदालत ने चार अगस्त नियत की है। अदालत में हिंदू पक्ष की चार वादिनी रेखा पाठक, मंजू व्यास, लक्ष्मी देवी और सीता साहू की तरफ से बीते 16 मई को प्रार्थना पत्र दिया गया था। कहा गया था कि ज्ञानवापी में सील किए गए वजूखाना को छोड़कर बाकी क्षेत्र का एएसआई से रडार तकनीक से सर्वे कराया जाये। इस पर 19 मई को अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने आपत्ति की थी। 14 जुलाई को सुनवाई पूरी हो गई थी। तब कोर्ट ने आदेश के लिए पत्रावली सुरक्षित रखते हुए सुनवाई के लिए 21 मई की तिथि तय की थी। हिंदू पक्ष ने जतायी खुशी जिला जज की अदालत में आवेदन मंजूर  होने पर हिंदू पक्ष ने खुशी जताते हुए इसे बड़ी जीत करार दिया है। हिंदू पक्ष के अधिवक्ताओं ने कहा कि सर्वे से यह स्पष्ट हो जायेगा कि ज्ञानवापी की वास्तविकता क्या है। सर्वे में बिना क्षति पहुचायेंं पत्थरों, देव विग्रहों, दीवारों सहित अन्य निर्माण की उम्र का पता लग जायेगा। वहीं, विपक्षी अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने सर्वे कराने के आवेदन का विरोध किया है। अपर जिला जज (नवम) विनोद कुमार सिंह की अदालत में गुरुवार को ज्ञानवापी परिसर स्थित वजूखाना में गंदगी फैलाने और शिवलिंग जैसी आकृति पर दिये गये विवादास्पद बयान के मामले में दाखिल निगरानी अर्जी पर सुनवाई हुई। एआईएमआईएम के अध्यक्ष असुदद्दीन ओवैसी की ओर से अधिवक्ता एहतेशाम आब्दी और शवनवाज परवेज ने वकालत नामा लगाया। कोर्ट ने अन्य विपक्षीगण को उपस्थित होने के लिए अगली सुनवाई 16 अगस्त की तिथि तय की।

धनखड़ हत्याकांड : आरोपी ओलंपिक पदक विजेता पहलवान सुशील कुमार को अदालत ने दी अंतरिम जमानत
Published / 2023-07-20 11:31:48
धनखड़ हत्याकांड : आरोपी ओलंपिक पदक विजेता पहलवान सुशील कुमार को अदालत ने दी अंतरिम जमानत

एबीएन सेंट्रल डेस्क। दिल्ली की एक अदालत ने सागर धनखड़ हत्याकांड के आरोपी ओलंपिक पदक विजेता पहलवान सुशील कुमार को चिकित्सा आधार पर बुधवार को एक सप्ताह की अंतरिम जमानत दे दी।अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुशील कुमार ने दलीलें सुनने के बाद कहा कि अदालत के समक्ष पेश किये गके दस्तावेजों से पता चलता है कि आरोपी सुशील कुमार दाहिने घुटने के आंशिक लिगामेंट टियर पीएफ से पीड़ित हैं और उन्हें वैकल्पिक सर्जरी की जरूरत है। न्यायाधीश ने आदेश में कहा कि अभियुक्त की वर्तमान चिकित्सा स्थिति को ध्यान में रखते हुए, यह आदेश दिया जाता है कि उसे एक सप्ताह की अवधि के लिए अंतरिम जमानत पर रिहा किया जाये।जमानत की अवधि 23 जुलाई को शुरू होगी और 30 जुलाई को समाप्त होगी।अंतरिम जमानत अवधि समाप्त होने के बाद आरोपी को संबंधित जेल अधीक्षक के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया गया है।उल्लेखनीय है कि पहलवान सुशील कुमार पर अन्य लोगों के साथ मिलकर कथित संपत्ति विवाद को लेकर 4 मई, 2021 को दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम की पार्किंग में पूर्व जूनियर राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियन धनखड़ और उनके दोस्तों पर कथित तौर पर हमला करने का आरोप है। धनखड़ ने बाद में अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, मृत्यु का कारण मस्तिष्क में चोट आना बताया गया था।

खबरदार : अब केदारनाथ में नहीं ले जा सकते मोबाइल फोन...
Published / 2023-07-17 16:28:26
खबरदार : अब केदारनाथ में नहीं ले जा सकते मोबाइल फोन...

केदारनाथ मंदिर में मोबाइल फोन लेकर जाने, फोटो और वीडियो बनाने पर लगा प्रतिबंधएबीएन सोशल डेस्क। हाल में कई विवादास्पद वीडियो के कारण चर्चा में रहे केदारनाथ मंदिर में मोबाइल फोन लेकर प्रवेश करने, फोटो लेने और वीडियो बनाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। मंदिर की व्यवस्थाओं के लिए जिम्मेदार बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने इस संबंध में मंदिर परिसर में जगह-जगह बोर्ड लगा दिये हैं।इन बोर्ड में कहा गया है कि मंदिर परिसर में मोबाइल फोन लेकर प्रवेश न करें, मंदिर के भीतर किसी प्रकार की फोटोग्राफी तथा वीडियोग्राफी पूर्णत: वर्जित है और आप सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में हैं। कुछ अन्य बोर्ड में मंदिर और मंदिर परिसर में मर्यादित वस्त्र ही धारण करने को कहा गया है जबकि एक अन्य बोर्ड में कहा गया है कि मंदिर प्रांगण में तंबू या शिविर स्थापित करना दंडनीय अपराध है। हिंदी और अंग्रेजी में लिखे इन बोर्ड में साफ तौर पर कहा गया है कि ऐसा करते पकड़े जाने पर कानूनी कार्रवाई की जायेगी। हाल में गढ़वाल हिमालय में स्थित केदारनाथ मंदिर में बनाये गये ऐसे कई वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुए जिन्हें लेकर तीर्थ पुरोहितों से लेकर आम श्रद्धालुओं और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने भी आपत्ति प्रकट की थी और धार्मिक स्थानों पर ऐसे कृत्यों को गलत ठहराया था। एक वीडियो में जहां मंदिर परिसर में अपने पुरुष मित्र को नाटकीय अंदाज में घुटनों के बल बैठकर प्रपोज करती एक व्लॉगर दिखाई दी थी, वहीं एक अन्य वीडियो में मंदिर के गर्भगृह में एक महिला नोट उड़ाती दिखाई दी थी। इसके अलावा भी, कई लोगों को केदारनाथ मंदिर में रील बनाते देखा गया था।बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने कहा कि धार्मिक स्थल की एक गरिमा, मान्यताएं और परंपराएं होती हैं और श्रद्धालुओं को उसके अनुरूप ही आचरण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हालांकि बदरीनाथ धाम में ऐसी कोई शिकायतें अभी नहीं आई हैं लेकिन जल्द ही वहां भी ऐसे बोर्ड लगाये जायेंगे।

जेल नहीं अब जुर्माना की तैयारी...
Published / 2023-07-15 21:30:25
जेल नहीं अब जुर्माना की तैयारी...

छोटे जुर्म पर न होगी कारावास की सजाएबीएन सेंट्रल डेस्क। अक्सर सवाल उठाया जाता है कि क्या स्वतंत्रता मिलने के बावजूद देश का कानून उतना संवेदनशील व व्यावहारिक है, जो किसी लोकतांत्रिक देश के लिए अपरिहार्य होना चाहिए। विभिन्न मामलों में कानून की परिभाषा के अंतर्गत तमाम ऐसे व्यवस्थागत अतिक्रमण हैं जिन्हें गंभीर जुर्म की श्रेणी में रखा गया है। जाने-अनजाने में हुए ऐसे जुर्मों को लेकर जेल की सजा और आर्थिक जुर्माना यानी दोनों लागू होने को लेकर भी सवाल उठाये जाते हैं। सवाल यह भी कि जब जेल हुई है तो आर्थिक दंड क्यों? वहीं दूसरी ओर देश में अंग्रेजों के जमाने के तमाम कानून प्रचलित हैं जो स्वतंत्र देश की व्यवस्था में तार्किक नजर नहीं आते। राजग सरकार की उस मुहिम की सराहना करनी होगी कि जिसके अंतर्गत उसके नौ साल के कार्यकाल में 1500 ऐसे कानून निरस्त किये गये, जो अमृतकाल तक पहुंचे देश में न्याय की कसौटी में खरे नहीं उतरते थे। दरअसल, तमाम कानून ऐसे थे जो अंग्रेजी राज को स्वतंत्रता सेनानियों के विरोध से संरक्षित करते थे। वहीं दूसरी ओर व्यक्तिगत आजादी पर अंकुश लगाते थे। इसी दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ी पहल की है और केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जनविश्वास विधेयक पर मोहर लगा दी है। जिसके अंतर्गत 42 कानूनों में बदलाव किया जायेगा। इनके तहत आने वाले 183 प्रावधानों में बदलाव होगा। दरअसल, इस प्रयास का मकसद अदालतों में मुकदमों का बोझ कम करना, कारोबारी सुगमता बढ़ाना तथा छोटे अपराधों के मामलों में लोगों को जेल जाने से बचाना है। दरअसल, यह पहल छोटे अपराधों के मामले में कारावास की सजा को खत्म करने का प्रयास है। ऐसे मामलों में सिर्फ आर्थिक दंड ही लगाया जायेगा। गत बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जनविश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक 2023 को मंजूरी दे दी। दरअसल, इस विधेयक को दिसंबर 2022 में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने संसद में पेश किया था। इस बिल को तार्किक बनाने व इससे जुड़ी विसंगतियों को दूर करने के लिए कालांतर संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया था। दरअसल, इस मुद्दे पर गंभीर मंथन के लिए 31 सदस्यीय समिति का गठन विशेष रूप से किया गया। जिसमें विधायी और विधि मामलों से जुड़े विभिन्न मंत्रालयों के अधिकारियों से लंबा विमर्श किया गया। इतना नहीं, इस मुद्दे पर विभिन्न राज्यों से भी राय ली गई। तदुपरांत, इस वर्ष मार्च में समिति ने अपनी रिपोर्ट दी थी। समिति ने राज्यों को भी ऐसे प्रावधानों में संशोधन के लिए प्रेरित करने की सलाह दी थी। समिति का मानना था कि केंद्र राज्य सरकारों व केंद्र शासित प्रदेशों को प्रेरित करे कि वे जनविश्वास विधेयक की तर्ज पर छोटे जुर्मों को अपराध की श्रेणी से बाहर रखने को कानूनी उपाय करें। दरअसल, विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, आर्थिक दंड का निर्धारण गलती की गंभीरता के अनुसार होना चाहिए। गलती की पुनरावृत्ति पर जुमार्ना राशि में वृद्धि की जायेगी। दरअसल, इस विधेयक में अंग्रेजी शासन के समय से चले आ रहे अनेक ऐसे कानूनों में कारावास की सजा समाप्त करने की सिफारिश है, जो मौजूदा दौर में तार्किक व न्याय की कसौटी पर खरे नहीं उतरते। ब्रिटिश कालीन जिन कानूनों में संशोधन होना है उनमें भारतीय डाकघर अधिनियम 1898, कृषि उपज (ग्रेडिंग और मार्किंग) अधिनियम 1937, औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940, सार्वजनिक ऋण अधिनियम 1944 आदि शामिल हैं। दरअसल, विधेयक में अपराध की गंभीरता के आधार पर आर्थिक दंड को तर्कसंगत बनाने और भरोसे पर आधारित शासन को बढ़ावा देने का प्रस्ताव है। साथ ही इसमें विभिन्न अपराधों के लिये जुमार्ने में समीक्षा का भी प्रावधान है, हर तीन साल में जुमार्ने की राशि दस फीसदी बढ़ा दी जायेगी। वहीं ब्रिटिश शासन को संरक्षण देने वाले भारतीय डाकघर अधिनियम 1898 के सभी अपराधों को खत्म कर दिया जायेगा। दरअसल, कोशिश यही है कि छोटे अपराध के लिये बड़ी सजा न मिले और आर्थिक दंड को सुधारात्मक दृष्टि से उपयोग में लाया जाये। सरकार का कहना है कि यह प्रयास कारोबार को सुगम बनाने और नागरिकों के दैनिक कामकाज को आसान बनाने में सहायक होगा। निस्संदेह, केंद्र सरकार की इस रचनात्मक पहल का स्वागत किया जाना चाहिए।

अब बिना आइडी के ही बदले जायेंगे 2000 रुपये के नोट
Published / 2023-07-11 20:33:19
अब बिना आइडी के ही बदले जायेंगे 2000 रुपये के नोट

आरबीआइ के आदेश को चुनौती वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकारएबीएन सेंट्रल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली अपील पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें मांग पर्ची और पहचान पत्र के बिना 2000 रुपये के नोट बदलने की अनुमति देने वाली भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की अधिसूचना के खिलाफ दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया गया था। अदालत ने कहा कि यह कार्यपालिका के नीतिगत निर्णय से संबंधित मामला है।सीजेआई न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने वकील अश्विनी उपाध्याय द्वारा अपनी व्यक्तिगत क्षमता में दायर की गई अपील को खारिज कर दिया। पीठ ने अपील खारिज करते हुए कहा, यह कार्यपालिका के नीतिगत निर्णय का मामला है। दिल्ली हाईकोर्ट ने 29 मई को उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें मांग पर्ची और पहचान प्रमाणपत्र के बिना 2,000 रुपये के नोट बदलने की अनुमति देने वाली आरबीआई की अधिसूचना को चुनौती दी गयी थी।हाईकोर्ट ने कहा था कि यह निर्णय लोगों को असुविधा से बचाने के लिए लिया गया और वह किसी नीतिगत निर्णय पर अपीलीय प्राधिकारी के रूप में काम नहीं कर सकता। इसने कहा था कि यह नहीं कहा जा सकता कि सरकार का निर्णय त्रुटिपूर्ण या मनमाना है या यह काले धन, धनशोधन, मुनाफाखोरी या भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है। इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की गई थी। उपाध्याय ने कहा था कि अपराधियों और आतंकवादियों द्वारा भी 2,000 रुपये के नोट किसी मांग पर्ची और आधार कार्ड जैसे पहचान प्रमाण पत्र के बिना बदले जा रहे हैं।

चेक बाउंस मामला : अमीषा पटेल ने खुद पर लगे आरोपों को बताया बेबुनियाद
Published / 2023-07-10 17:27:03
चेक बाउंस मामला : अमीषा पटेल ने खुद पर लगे आरोपों को बताया बेबुनियाद

रांची कोर्ट में हाजिर हुई बॉलीवुड अभिनेत्री अमीषा पटेलटीम एबीएन, रांची। चेक बाउंस मामले में झारखंड की राजधानी रांची के व्यवहार न्यायालय में बॉलीवुड अभिनेत्री अमीषा पटेल सशरीर हाजिर हुईं। 21 जून को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट की तरफ से बॉलीवुड अभिनेत्री अमीषा पटेल को सशरीर हाजिर होने का आदेश दिया गया था।जिस आदेश पर सोमवार को अमीषा पटेल कोर्ट में हाजिर हुई और कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान अमीषा पटेल ने अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बताया। जिस पर दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट की तरफ से अगली सुनवाई का निर्देश दिया गया है।अमीषा पटेल को रखना होगा अपना पक्ष शिकायतकर्ता अजय कुमार सिंह के वकील ने बताया कि किसी भी व्यक्ति को अपने पक्ष में बात रखने का हक होता है। उसी हक के आधार पर अभिनेत्री अमीषा पटेल ने खुद को निर्दोष बताया है। शिकायतकर्ता अजय कुमार सिंह की वकील स्मिता पांडेय ने बताया कि अजय कुमार सिंह की तरफ से जिस सबूत के आधार पर केस फाइल किया गया है। उन सभी सबूतों के आधार पर अब आगे की ट्रायल चलेगी। जिसमें अभिनेत्री अमीषा पटेल को भी अपना पक्ष रखना होगा। फिलहाल, अगली तारीख की डेट तय नहीं की गयी है, लेकिन जल्द ही कोर्ट की तरफ से अगली तारीख तय की जायेगी। जिसमें दोनों ओर से पक्ष रखा जायेगा।ढाई करोड़ रुपये के चेक बाउंस का है केसमालूम हो कि अमीषा पटेल पर रांची के फिल्म निर्माता अजय सिंह ने ढाई करोड़ रुपये के चेक बाउंस का केस रांची में दर्ज कराया है। वर्ष 2018 में फिल्म देसी मैजिक बनाने के लिए अमीषा पटेल ने अजय सिंह से ढाई करोड़ रुपये लिये थे। लेकिन फिल्म में नुकसान होने की वजह से फिल्म निर्माता अजय कुमार सिंह को अपना पैसा वापस नहीं मिल पाया।जिसके बाद अजय सिंह ने अमीषा पटेल से अपने पैसे की मांग की। जिस पर अभिनेत्री अमीषा पटेल ने अपने मुंबई आवास पर बुलाकर अजय सिंह को चेक दिया जो बाद में बाउंस हो गया।इसी मामले में फिल्म निर्माता ने शिकायत दर्ज करायी है। शिकायत में अजय कुमार सिंह की तरफ से यह कहा गया है कि अमीषा पटेल ने उन्हें धोखा दिया है। वह पैसे वापस नहीं कर रही हैं।

तबरेज हत्याकांड के 10 आरोपियों को 10-10 साल की सजा, जुर्माना भी
Published / 2023-07-05 21:55:56
तबरेज हत्याकांड के 10 आरोपियों को 10-10 साल की सजा, जुर्माना भी

एबीएन न्यूज नेटवर्क, सरायकेला, जमशेदपुर। तबरेज अंसारी की मौत के मामले पर एडीजे वन अमित शेखर की अदालत ने आइपीसी की धारा 304 के तहत दोषी पाये गये 10 आरोपियों को 10-10 साल की सजा और 15-15 हजार जुर्माने की सजा सुनायी। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में 1 महीने  अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी। इस मामले में इससे पूर्व दो आरोपी सत्यनारायण नायक और सुमंत महतो को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में मामले से रिहा किया गया है। सरायकेला में चोरी के आरोप में ग्रमीणों की भीड़ ने तबरेज अंसारी की पीट-पीट कर हत्या कर दी थी। मामले में कुल 36 लोगों ने गवाही दी थी। तबरेज अंसारी की पत्नी शाहिस्ता परवीन की शिकायत पर मामला दर्ज कराया गया था और फिर कार्रवाई हुई। पत्नी इस सजा से नाखुश फैसला आने के बाद पत्नी शाहिस्ता परवीन ने मीडिया से बातचीत के क्रम में कोर्ट के फैसले से खुद को असंतुष्ट बताया। उन्होंने कहा कि कोर्ट का फैसला इन्हें मंजूर नहीं है। ऊपरी अदालत में जाकर इस फैसले को चुनौती देंगी। शाहिस्ता परवीन ने कहा कि वह चाहती हैं कि मामले के दोषियों को फांसी तक की सजा हो। तबरेज अंसारी परिवार के वकील अलताभ अंसारी ने के अनुसार,जजमेंट में  304 पार्ट वन में 10 साल, 325 में तीन साल, 323 में 8 माह और 295 में एक साल की सजा सुनायी गयी है। चूंकि इसमें इंटेशन का एविडेंस नहीं पाया गया है, और मौत चार दिन बाद हुई है इसलिए मारने का इंटेशन साबित नहीं हुआ है। मामले को लेकर उस समय इसे मॉब लिंचिंग के रूप में भी प्रचारित करने का प्रयास भी किया गया था। इस संबंध में मृतक तबरेज अंसारी की पत्नी शाहिस्ता परवीन की शिकायत पर मामला दर्ज कराया गया था।जिन्हें सजा सुनायी गयी प्रकाश मंडल उर्फ पप्पू मंडल, भीमसेन मंडल, कमल महतो, मदन नायक, अतुल महाली, महेश महाली, विक्रम मंडल, चामू नायक, प्रेमचंद महाली और सुनामो प्रधान को  न्यायालय द्वारा 10 साल की सजा सुनायी गयी है।क्या था मामला सरायकेला थाना क्षेत्र के धातकीडीह गांव में 17 जून 2019 को एक घर में चोरी की नीयत से घुसे तबरेज अंसारी की भीड़ ने पिटाई  कर दी थी। घायल अवस्था में  उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया था। वहां से तबरेज अंसारी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। सरायकेला मंडल कारा में उसकी तबीयत बिगड़ी थी एवं सदर अस्पताल लाये जाने के क्रम इलाज के दौरान तबरेज अंसारी की मौत हो गयी थी। इस संबंध में मृतक की पत्नी शाइस्ता परवीन की शिकायत पर मामला दर्ज कराया गया था। पुलिस अनुसंधान के क्रम में कुल 13 लोगों को आरोपी बना कर गिरफ्तार किया गया था। जिसमें मामले के एक आरोपी कुशल महाली का निधन हो चुका है।

दुष्कर्म मामले में आसाराम को झटके पे झटका
Published / 2023-07-04 13:34:38
दुष्कर्म मामले में आसाराम को झटके पे झटका

बलात्कार मामले में पत्नी और बेटी समेत पांच महिलाओं को नोटिसएबीएन सेंट्रल डेस्क। गुजरात उच्च न्यायालय ने 2013 के बलात्कार मामले में आसाराम की पत्नी, बेटी और तीन महिला शिष्यों को नोटिस जारी किये। इस मामले में इन महिलाओं को बरी कर दिया गया था, जबकि आसाराम को आजीवन कारावास की सजा सुनायी गयी थी। न्यायमूर्ति ए वाई कोगजे और न्यायमूर्ति हसमुख सुथार की खंडपीठ ने आसाराम की पत्नी लक्ष्मीबेन और बेटी भारतीबेन समेत पांच महिलाओं को नोटिस जारी किये।गांधीनगर की एक अदालत ने 2013 में एक पूर्व महिला अनुयायी द्वारा दायर बलात्कार मामले में 31 जनवरी को आसाराम को आजीवन कारावास की सजा सुनायी थी। अहमदाबाद के पास मोटेरा में आसाराम के आश्रम में 2001 से 2007 के बीच महिला से कई बार बलात्कार किया गया था। आसाराम की पत्नी लक्ष्मीबेन, बेटी भारती और चार अनुयायियों पर अपराध में सहायता करने और उकसाने का आरोप था। अदालत ने सबूत के अभाव में उन्हें बरी कर दिया था। राज्य के विधि विभाग ने छह मई 2023 को अभियोजन पक्ष को उनके बरी होने के खिलाफ अपील दायर करने का निर्देश दिया था।बरी किये गये छह में से पांच लोगों के खिलाफ अपील दायर की गयी है। आसाराम (81) 2013 में राजस्थान में अपने आश्रम में एक नाबालिग लड़की से बलात्कार के एक अन्य मामले में जोधपुर की जेल में बंद है।

जेल में ही दिनेश गोप से पूछताछ करेगी इडी
Published / 2023-07-02 21:46:35
जेल में ही दिनेश गोप से पूछताछ करेगी इडी

टेरर फंडिंग, मनी लांड्रिंग मामलाटीम एबीएन, रांची। टेरर फंडिंग मामले में गिरफ्तार पीएलएफआई के सुप्रीमो दिनेश गोप की मुश्किलें अब और बढ़ने वाली है। अभी तक एनआइए दिनेश गोप से पूछताछ कर चुकी है लेकिन अब मनी लांड्रिंग मामले में इडी भी उनसे पूछताछ करेगी। मिली जानकारी के अनुसार ईडी के अधिकारी बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में बंद दिनेश गोप से आज पूछताछ होगी। इडी उससे रुपयों के लेनदेन से लेकर नेताओं और पुलिसवालों के उसकी साठगांठ पर भी पूछताछ कर सकती है। इससे पहले इडी दिनेश गोप को विदेशी हथियार बेचने के नाम पर ठगी करने वाले निवेश पूछताछ की जा चुकी है। वह अभी जेल में है। 21 मई को एनआइए ने दबोचा था दरअसल, टेरर फंडिंग के मामले में एनआईए ने पीएफआई चीफ दिनेश गोप को बीते 21 मई को गिरफ्तार किया था। दिनेश गोप नेपाल में वेष बदलकर रह रहा था। नेपाल से गिरफ्तार करने के बाद उसे दिल्ली लाया गया था। जहां से एनआईए की टीम उसे दिल्ली से रांच लेकर पहुंची थी और 22 मई को एनआईए की स्पेशल कोर्ट में पेश किया था। गिरफ्तारी के बाद दिनेश गोप को पूछताछ के लिए पहली बार 22 मई को रिमांड पर लिया था।इस दौरान दिनेश गोप की निशानदेही पर एनआईए ने भारी मात्रा में हथियार और गोला बारूद बदामद किया था। मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही है ईडी की टीम टेरर फंडिंग के मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने पीएलएफआई सुप्रीमो दिनेश गोप पर शिकंजा कसा है। अब ईडी की टीम होटवार जेल में बंद दिनेश गोप से पूछताछ करेगी। इसके साथ ही दिनेश गोप से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी के मामले में बरामद कैश और अन्य लग्जरी गाड़ियों को लेकर धुर्वा थाने की पुलिस भी पीएलएफआई चीफ से पूछताछ करेगी। शेल कंपनियों में भी किया है निवेश जानकारी के अनुसार, दिनेश गोप ने आतंक दिखाकर वसूले गए पैसे का निवेश शेल कंपनियों में भी किया है। इन कंपनियों का संचालन उसकी दोनों पत्नियां करती थीं। शेल कंपनियों के नाम का भी खुलासा हो चुका है. नोटबंदी के बाद दिनेश गोप का एक सहयोगी भी गिरफ्तार किया गया था। उसने स्वीकार किया था कि वह दिनेश गोप के पुराने नोट को बदलने आया था।

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