इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला एबीएन सेंट्रल डेस्क। वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद परिसर से जुड़े मामले में गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला आया है। हाईकोर्ट ने परिसर में हो रहे अरक के सर्वे को जारी रखने के निर्देश दिए हैं। मुस्लिम पक्ष ने इस सर्वे के खिलाफ अपील की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया है। अब अदालत के फैसले के बाद ज्ञानवापी में सर्वे तुरंत शुरू होगा। हिन्दू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने कोर्ट के फैसले पर बयान दिया है कि अदालत ने सर्वे को मंजूरी दी है। एएसआई ने अपना हलफनामा दे दिया है और अदालत का आदेश आ गया है, ऐसे में अब कोई सवाल नहीं बनता है। वकील ने बताया कि अदालत ने मुस्लिम पक्ष की दलीलों को खारिज किया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली करीब दो दर्जन याचिकाओं पर बुधवार को पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने नियमित सुनवाई शुरू कर दी।मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की संविधान पीठ के समक्ष याचिकाकर्ताओं की ओर से मुख्य अधिवक्ता के तौर पर कपिल सिब्बल ने बहस की शुरुआत की।वरिष्ठ अधिवक्ता श्री सिब्बल ने दलील देते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 के विशेष प्रावधान को संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से नहीं, बल्कि एक राजनीतिक अधिनियम द्वारा हटाया गया था।याचिकाकर्ता मोहम्मद अकबर लोन का प्रतिनिधित्व करने वाले श्री सिब्बल ने याचिकाकर्ताओं की ओर से मुख्य अधिवक्ता के तौर पर दलील देते हुए कहा कि पूर्ववर्ती जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के विशेष प्रावधान को एक राजनीतिक अधिनियम द्वारा हटाया गया था, न कि संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से।इस पर संविधान पीठ की अगुवाई करते हुए न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने उनसे पूछा कि क्या एक निर्वाचित विधानसभा के लिए अनुच्छेद 370 को निरस्त करना संभव है, जिसने पूर्ववर्ती राज्य जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा दिया था।श्री सिब्बल ने कहा कि अनुच्छेद 356 का उद्देश्य (जिसके तहत किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है) एक अस्थायी स्थिति है और इसका उद्देश्य लोकतंत्र को नष्ट करना नहीं है।श्री सिब्बल ने पीठ के समक्ष कहा कि अनुच्छेद 370 के खंड 3 में कल्पना की गई थी कि संविधान सभा को अनुच्छेद 370 को निरस्त करने में भूमिका निभानी चाहिए।इस पर, पीठ ने कहा कि भारत के प्रभुत्व की संप्रभुता की स्वीकृति सभी इरादों और उद्देश्यों के लिए पूर्ण थी और जम्मू और कश्मीर की संविधान सभा ने केवल कुछ विधायी विषयों पर कुछ अधिकार सुरक्षित रखे थे।श्री सिब्बल ने जवाब दिया कि अनुच्छेद 370 के खंड 3 में संविधान सभा का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है, जो अनुच्छेद 370 को निरस्त करने में भूमिका निभाने की उसकी मंशा को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि अदालत को उस ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य को देखना होगा, जिसमें उन्होंने (जम्मू कश्मीर) विलय पत्र पर हस्ताक्षर किये थे। उन्होंने कहा कि इस बात पर कोई विवाद नहीं करता कि वे भारत में एकीकृत हैं लेकिन संवैधानिक प्रावधान के अधीन हैं।श्री सिब्बल ने कहा कि यह उनके लिए एक ऐतिहासिक क्षण था, क्योंकि शीर्ष अदालत इस बात का विश्लेषण करेगा कि 06 अगस्त, 2019 को इतिहास को क्यों उछाला गया और क्या संसद द्वारा अपनायी गयी प्रक्रिया लोकतंत्र के सिद्धांतों और इच्छाशक्ति के अनुरूप थी और यह भी कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को चुप कराया जा सकता है।अनुच्छेद 370 के संबंध में ऐतिहासिक फैसले की वैधता पर सवाल उठाने वाली करीब 23 याचिकाओं पर सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी।
टीम एबीएन, रांची। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार की देर रात कारोबारी विष्णु अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया है। विष्णु अग्रवाल पर दस्तावेज में जालसाजी कर जमीन खरीद- बिक्री करने का आरोप है।एक अगस्त को एमपी-एमएलए के विशेष न्यायाधीश की अदालत में उसे पेश किया जायेगा।
दस्तावेज जालसाजी कर जमीन की खरीद बिक्री मामलाटीम एबीएन, रांची। दस्तावेज जालसाजी कर जमीन की खरीद बिक्री मामले के आरोपी विष्णु अग्रवाल से 31 जुलाई को पूछताछ होगी। ईडी ने समन भेज कर उन्हें पूछताछ के लिए रांची स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में हाजिर होने का निर्देश दिया है। इससे पहले ईडी द्वरा जारी किये गये समन के आलोक में उन्होंने अलग नाम पर हाजिर होने में असमर्थता जताते हुए समय की मांग की थी। 17 जुलाई को हाजिर होने के लिए भेजे गये समन के बदले उन्होंने अपनी बीमारी के नाम पर समय मांगा था।ईडी ने उनके आवेदन पर विचार करने के बाद 26 जुलाई को हाजिर होने के लिए समन भेजा। लेकिन उन्होंने हाजिर होने के बदले धार्मिक कार्यों में व्यस्त होने के नाम पर समय मांगा। ईडी ने उन्हें फिर समय दिया और समन जारी कर 31 जुलाई को हाजिर होने का निर्देश दिया। बताया जाता है कि वह अपने पैतृक गांव में यज्ञ करवा रहे थे। 29 जुलाई को यज्ञ समाप्त होने की सूचना है।
पटना-हटिया एक्सप्रेस में छेड़खानी का मामलाटीम एबीएन, रांची/ पटना। पटना-हटिया एक्सप्रेस में आठ वर्षीय बच्ची के साथ छेड़छाड़ का मामला रांची जीआरपी ने कोडरमा जीआरपी को स्थानांतरित कर दिया है। पॉक्सो एक्ट के तहत जीरो एफआईआर दर्ज होने के बाद मामले को कोडरमा जीआरपी में स्थानांतरित किया गया है।गलत हरकत करते पकड़ायापीड़ित बच्ची की मां ने रांची जीआरपी में लिखित आवेदन देकर प्राथमिकी करते हुए बताया था कि वो पटना से रांची 18623 डाउन पटना-हटिया एक्सप्रेस के एसी कोच में सफर कर रही थी। इसी दौरान कोडरमा स्टेशन पहुंचने पर जब उनकी नींद खुली तो एक रायफलधारी सुरक्षाकर्मी को बेटी के साथ गलत हरकत करते पाया।टीटीई ने नहीं की कार्रवाईमामला कोडरमा से जुड़े होने के कारण छानबीन और कार्रवाई के लिए जीरो एफआईआर को कोडरमा जीआरपी के पास स्थानांतरित कर दिया गया है। सफर के दौरान महिला ने ट्रेन में सवार टीटीई से भी मदद मांगी। लेकिन टीटीई से कोई मदद नहीं मिलने पर उन्होंने रेलवे सुरक्षा एप पर शिकायत की। वहां से भी कोई सहयोग नहीं मिल सका।रांची जीआरपी में प्राथमिकीबहरहाल डर के साये में महिला ने अपनी बच्ची के साथ रांची तक सफर पूरा करने के बाद पूरी घटना की शिकायत डीआरएम से की। तब जाकर रांची जीआरपी में जीरो एफआईआर दर्ज की गयी। इधर, कोडरमा जीआरपी में मामला स्थानांतरित होने के बाद जांच शुरू हो गयी है।थाना प्रभारी ने क्या कहाजीआरपी थाना प्रभारी उपेंद्र पासवान ने बताया कि जिस सुरक्षाकर्मी पर छेड़छाड़ का आरोप है, वह गया जंक्शन से स्कॉट पार्टी के साथ ट्रेन में सवार हुआ था। ऐसे में मामला दूसरे राज्य से जुड़े होने के कारण जांच और अनुसंधान के लिए मुख्यालय से आदेश मांगा गया है। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर कोडरमा से लेकर रांची तक जितने भी स्टेशन पर ट्रेन रूकी है, वहां के सीसीटीवी फुटेज इकठ्ठा किए गए हैं। आरोपित सुरक्षा कर्मी की पहचान की जा रही है। उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर संबंधित एसी कोच के टीटीई और कोच अटेंडेंट के अलावे अन्य यात्रियों से भी पूछताछ की जायेगी। जिसके लिए अलग-अलग टीम बनाई जा रही है।
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की तबीयत खराबएबीएन सेंट्रल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक आधिकारिक नोटिस जारी कर बताया है कि मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की तबीयत खराब है, जिस वजह से वह आज निर्धारित मामलों पर सुनवाई नहीं करेंगे। नोटिस में कहा गया है कि देश के मुख्य न्यायाधीश 28 जुलाई 2023 को सुनवाई नहीं करेंगे। इसके चलते कोर्ट नंबर एक में जस्टिस मनोज मिश्रा और मुख्य न्यायाधीश की पीठ की बैठक रद्द की जाती है। इस पीठ के समक्ष सूचीबद्ध मामलों की सुनवाई नहीं की जायेगी। नोटिस में कहा गया है कि जस्टिस मनोज मिश्रा की एकल पीठ ही चैंबर के मामलों को संभालेगी।
सीबीआई ने द्वितीय जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में गड़बड़ी मामले में दाखिल किया स्टेट्स रिपोर्ट, अगली सुनवाई 16 अगस्त कोटीम एबीएन, रांची। झारखंड हाईकोर्ट में सोमवार को चीफ जस्टिस संजय कुमार मिश्र एवं जस्टिस आनंद सेन की खंडपीठ में द्वितीय जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की सीबीआई जांच कराने एवं राज्य सरकार की अपील की सुनवाई हुई। मामले में सीबीआई की ओर से स्टेटस रिपोर्ट दाखिल किया गया।जिस पर राज्य सरकार ने स्टेटस रिपोर्ट अध्ययन करने के लिए कोर्ट से समय की मांग की। मामले की अगली सुनवाई 16 अगस्त को होगी। इससे पहले इसी मामले में राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता की ओर से कोर्ट को मौखिक रूप से बताया गया कि सरकार ने उन्हें पद पर फिर से बहाल कर प्रमोशन दे दिया है, उनमें से बहुत लोगों का कंफर्मेशन भी हो गया है। इसलिए सरकार की अपील पर मेरिट पर सुनवाई करने का कोई औचित्य नहीं है। सरकार एक तरफ जेपीएससी द्वितीय की परीक्षा के नियुक्त अधिकारियों को रीइंस्टेट कर उन्हें प्रमोशन दे रही है और उनकी नियुक्ति कंफर्म कर रही है वहीं दूसरी ओर नियुक्त अधिकारियों के खिलाफ अपील भी दायर कर रही है, यह समझ से परे है। जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवार एवं प्रिंस कुमार ने पैरवी की। दरअसल, बुद्धदेव उरांव ने जेपीएससी द्वितीय की परीक्षा में अंको की हेरा फेरी एवं एवं रिजल्ट प्रकाशन में गड़बड़ी की जांच सीबीआई से कराने का आग्रह किया है। वही राज्य सरकार की ओर से जेपीएससी द्वितीय के नियुक्त अधिकारियों के खिलाफ एलपीए दायर किया गया है। बता दें कि पहले राज्य सरकार द्वारा ली गई द्वितीय जेपीएससी जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में गड़बड़ी की जांच निगरानी ब्यूरो कर रही थी, बाद में हाईकोर्ट के आदेश पर इसकी जांच सीबीआई को दे दी गयी थी।
वनकर्मी की हत्या मामले में 12 माओवादियों के खिलाफ केस दर्ज, छोटू खरवार का नाम शामिलटीम एबीएन, लातेहार/ रांची। झारखंड पुलिस ने वनकर्मी की हत्या के मामले में 12 माओवादियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। बता दें कि लातेहर जिले की दुरुप पंचायत में वनकर्मी देव कुमार प्रजापति (35 वर्षीय) की पीट-पीटकर हत्या कर दी गयी थी। हत्या का आरोप माओवादियों के एक गुट पर लगा था। अब पुलिस ने हत्या के इस मामले में 12 माओवादियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। लातेहर एसपी ने दी जानकारीलातेहर एक एसपी अंजनी अंजन ने बताया कि 12 माओवादियों के खिलाफ नामजद एफआईआर की गयी है और कई अन्य अज्ञात भी आरोपी बनाये गये हैं। ये सभी प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) के सदस्य हैं। माओवादियों के क्षेत्रीय कमांडर छोटू खरवार, जोनल कमांडर मनीष, सब जोनल कमांडर उज्जवल और प्रदीप का नाम एफआईआर में शामिल है। एसपी ने बताया कि माओवादियों को पकड़ने के लिए छापेमारी की जा रही है। पीट-पीटकर की गयी थी वनकर्मी की हत्याबता दें कि देव प्रजापति पलामू टाइगर रिजर्व में दैनिक वेतन पर वन ट्रैकर का काम करता था। माओवादियों को शक था कि वह पुलिस का मुखबिर है। हत्या के बाद वनकर्मी के घर पर माओवादियों ने चेतावनी भी लिखी थी और लोगों को पुलिस की मुखबिरी नहीं करने को कहा था। माओवादियों ने चार अन्य लोगों को भी पीटकर घायल कर दिया था। वहीं लातेहर जिले में ही सीआरपीएफ के जवानों ने माओवादियों के प्रभाव वाले कुकु गांव से आईईडी बरामद किया है। सीआरपीएफ की 112वीं बटालियन के कमांडेंट प्रमोद साहू ने यह जानकारी दी है। आईईडी को निष्क्रिय कर दिया गया है।
टीम एबीएन, रांची। एटीएस की टीम ने गैंगस्टर अमन श्रीवास्तव के दो गुर्गे ऐजाज अंसारी और मिंकू खान उर्फ शहरियार को गिरफ्तार किया है। दोनों के पास से 49 लाख 83 हजार रुपये बरामद किया है। वहीं, एक स्कॉर्पियो और चार मोबाइल फोन भी जब्त किया है।बता दें कि संगठित अपराधिक गिरोहों के फंडिंग, आर्थिक स्त्रोतों, अपराध से अर्जित किये गये संपत्ति का पता लगाने और इन गिरोहों के खिलाफ ठोस कार्रवाई को लेकर गिरफ्तारी हुई है। बताया गया कि गिरफ्तार दो अपराधी गैंगस्टर अमन श्रीवास्तव, रवि सरदार, फिरोज खान, जहीर अंसारी एवं नेपाली उर्फ महमूद के इशारे पर रंगदारी का पैसा उठाने का काम करता था।
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