टीम एबीएन, रांची। ईडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को 24 अगस्त को पूछताछ के लिए बुलाया है। हालांकि मुख्यमंत्री की ओर से अबतक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है कि वह इडी कार्यालय पूछताछ के लिए जायेंगे या फिर दोबारा समय लेंगे। प्रोजेक्ट भवन में जब मीडिया ने उनसे पूछा कि कल क्या होगा।तो उन्होंने इतना ही कहा : आप सब के साथ ही रहेंगे। इधर, सूत्रों ने बताया कि सीएम लगातार विधि-विशेषज्ञों से इस मुद्दे पर राय ले रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के भी बड़े अधिवक्ताओं के संपर्क में हैं। हालांकि अभी तक सीएम की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया है।
टीम एबीएन, रांची। देवघर में भी योगेंद्र तिवारी और उसके सहयोगियों के कई ठिकानों पर ईडी की छापेमारी चल रही है। देवघर में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व जिला 20 सूत्री उपाध्यक्ष मुन्नम संजय और पंडित बीएन झा पथ स्थित अभिषेक आनंद झा के आवास पर भी ईडी की रेड चल रही है।
झारखंड में एक साथ 32 जगहों पर ईडी की रेडमंत्री रामेश्वर उरांव के आवास पर भी हो रही है छापेमारीटीम एबीएन, रांची। झारखंड के कई शहरों में ईडी ने एक बार फिर से दबिश दी है। ईडी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रांची के हरमू के साथ-साथ दुमका और देवघर में भी एक साथ छापेमारी की जा रही है। मिली सूचना के अनुसार छापेमारी शराब घोटाले को लेकर की गयी है। रांची में मंत्री रामेश्वर उरांव, तिवारी ब्रदर्स सहित कई लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। जानकारी के अनुसार बुधवार अहले सुबह ईडी की एक दर्जन से ज्यादा टीम रेड के लिए निकली है। ईडी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार झारखंड के 32 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की जा रही है। मंत्री रामेश्वर उरांव के रांची स्थित आवास पर भी छापेमारी की जा रही है। बताया जा रहा है कि रांची में कुल सात जगहों पर ईडी रेड कर रही है। जामताड़ा में भी छापेमारी चल रही है। वहीं देवघर में कुल आठ जगहों पर छापेमारी की सूचना है। बताया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ वाले सिंडिकेट को लेकर ही झारखंड में छापेमारी चल रही है। दुमका में शराब व्यवसायी योगेंद्र तिवारी के कार्यालय, उनके करीबियों और उनके परिजनों के ठिकाने पर छापेमारी हुई है। बता दें कि दुमका शहर में अलग-अलग पांच जगहों पर ईडी की छापेमारी चल रही है, जिसमें टाटा शोरूम चौक स्थित तनिष्क शोरूम, तिवारी ऑटोमोबाइल, कुम्हारपाड़ा स्थित पप्पू शर्मा और कुम्हार पाड़ा स्थित ठेका बाबा मंदिर के नजदीक अनिल सिंह के घर पर ईडी की कार्रवाई चल रही है। तनिष्क शोरूम और तिवारी ऑटोमोबाइल शराब कारोबारी योगेंद्र तिवारी के करीबी का बताया जा रहा है, जबकि शेष दोनों पप्पू शर्मा और अनिल सिंह शराब कारोबारी के कर्मी हैं। इसके अतिरिक्त गिलान पाड़ा स्थित कार्यालय में भी छापेमारी की सूचना है। ईडी की रेड के दौरान आसपास रहने वाले लोगों की भारी भीड़ जमा हो गयी है। इसे देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किये गये हैं। वहीं मिली जानकारी के अनुसार कोलकाता में छापेमारी की जा रही है।वहीं देवघर में भी ईडी की छापेमारी चल रही है। देवघर में संयुक्त बिहार के मुख्यमंत्री रहे और कांग्रेस नेता के आवास सहित कई ठिकानों पर ईडी की छापेमारी चल रही है। बता दें कि देवघर में कांग्रेस के नेता और 20 सूत्री उपाध्यक्ष मुन्नम संजय के आवास पर ईडी की कार्रवाई चल रही है। जमीन कारोबारी अभिषेक झा के आवास पर भी ईडी की टीम पहुंची है और छापेमारी कर रही है। अभिषेक झा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री पंडित विनोदनंद झा के पोते हैं। पूर्व में मधुपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट से वो चुनाव भी लड़ चुके हैं।
1 करोड़ नकदी के साथ 39 किलो सोने-हीरे के जेवरात बरामद एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एनसीपी प्रमुख शरद पवार के करीबी और उनकी पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष के घर पर छापेमारी की है। ईडी ने शनिवार को कहा कि उसने मनी लॉन्ड्रिंग और बैंक ऋण धोखाधड़ी के मामले में एनसीपी के पूर्व कोषाध्यक्ष ईश्वरलाल जैन, उनके परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों के परिसरों पर छापेमारी की है।इस दौरान तलाशी में 1.1 करोड़ रुपये नकद और करीब 25 करोड़ रुपये मूल्य के 39 किलोग्राम सोने-हीरे के आभूषण जब्त किये हैं। ईडी सूत्रों ने बताया कि ये छापेमारी महाराष्ट्र के जलगांव, नासिक और ठाणे में जैन के 13 ठिकानों पर की गयी। इस दौरान ईडी अधिकारियों ने मोबाइल फोन से ऐसे दस्तावेज बरामद किए हैं जो जैन के बेटे मनीष द्वारा नियंत्रित रियल्टी फर्म में लक्जमबर्ग इकाई से 50 मिलियन यूरो के एफडीआई प्रस्ताव का संकेत देते हैं। ईडी अधिकारियों के मुताबिक छापेमारी में जलगांव में 2 बेनामी संपत्तियों के अलावा, राजमल लखीचंद समूह से संबंधित 50 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की 60 संपत्तियों का विवरण भी इकट्ठा किया गया है।ईडी के अधिकारियों ने कहा कि जैन द्वारा नियंत्रित 3 ज्वेलरी फर्मों के खातों की जांच के दौरान, उन्हें पता चला कि राजमल लखीचंद समूह से जुड़ी पार्टियों के माध्यम से फर्जी खरीद-बिक्री सौदों के जटिल जाल के माध्यम से ऋण दिये गये और प्रमोटरों ने उस पैसे को अचल संपत्तियों में निवेश किया है।बता दें कि पिछले साल दिसंबर में सीबीआई की दिल्ली इकाई ने राजमल लखीचंद ज्वैलर्स, आरएल गोल्ड और मनराज ज्वैलर्स और इसके प्रमोटरों- ईश्वरलाल जैन, मनीष जैन और उनके परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ तीन बैंक धोखाधड़ी के केस दर्ज की थीं। आरोप है कि जैन ने कथित तौर पर भारतीय स्टेट बैंक से 353 करोड़ रुपये का ऋण लिया और उसका भुगतान नहीं किया। इन्हीं प्राथमिकी के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र व उत्तर प्रदेश सरकार को मजबूत बाल सुरक्षा तंत्र पर अमल के निर्देश दियेशीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को तत्काल सहायक व्यक्ति पारिस्थितिकी विकसित करने की दिशा में कदम उठाने को कहा एबीएन सेंट्रल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को पॉस्को कानून के तहत लागू किये जाने वाले नियमों और प्रावधानों पर अमल और इनकी निगरानी के वास्ते दिशा-निर्देश तय करने के लिए सभी हितधारकों की एक समिति बनाने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट्ट और न्यायमूर्ति जे अरविंद कुमार की खंडपीठ ने यह आदेश उत्तर प्रदेश के ललितपुर में 13 साल की नाबालिग से सामूहिक बलात्कार के घिनौने मामले में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी द्वारा स्थापित संगठन बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) की ओर से अगस्त 2022 में दायर की गई समादेश याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को सभी सहायक व्यक्तियों (सपोर्ट पर्संस), उनकी शैक्षणिक योग्यता और अब तक कितने मामलों में उनकी नियुक्ति हुई है, की सूची तैयार करने के आदेश भी दिये। शीर्ष अदालत ने सहायक व्यक्तियों की योग्यता के मानदंड तय करने की रूपरेखा बनाने और उनके नियमित अंतराल पर प्रशिक्षण पर भी जोर दिया। साथ ही उसने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा कि सहायक व्यक्तियों के वेतन-भत्ते तय करते समय वह उनके कौशल और अनुभव को भी ध्यान में रखे। खंडपीठ ने जिला बाल सुरक्षा इकाइयों से बाल सुरक्षा संगठनों से जुड़े सहायक व्यक्तियों के नाम साझा करने को भी कहा है। आदेश में यह भी कहा गया है कि नियम 12 के तहत बाल कल्याण समितियों द्वारा पॉक्सो के मामलों की रिपोर्टिंग के मानदंडों पर समुचित अमल सुनिश्चित करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया बनायी जाये। साथ ही शीर्ष अदालत ने महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय को चार अक्तूबर से पहले सहायक व्यक्तियों की ड्यूटी और सेवाशर्तों से जुड़ी चीजें तय करने के लिए राष्ट्रव्यापी दिशानिर्देश तैयार करने को कहा है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (एमडब्लूसीडी) जैसे सभी हितधारकों को पॉक्सो अधिनियम के खंड 39 के तहत सभी प्रासंगिक नियमों व प्रावधानों पर सख्ती से अमल सुनिश्चित करने को कहा गया है। सभी सहायक व्यक्तियों को कुशल मजदूर मानते हुए उन्हें न्यूनतम वेतन कानून, 1948 के नियमों के अनुसार भुगतान करने को कहा गया है। आदेश में कहा गया है कि सहायक व्यक्ति की उपलब्धता सुनिश्चित करना सिर्फ एक सलाह या निर्देशिका नहीं बल्कि पीड़ित का कानूनी अधिकार है। खंडपीठ ने कहा कि यौन शोषण के शिकार बच्चों की सहायता के लिए पॉक्सो अधिनियम के तहत तैयार किया गया नियमों -कानूनों का यह ढांचा प्रशंसनीय है लेकिन आवश्यकता कागज पर मिले इन कानूनी अधिकारों और इन पर अमल की जमीनी हकीकत के फासले को पाटने की है।इसके लिए सरकारों को अग्रसक्रिय तरीके से ढांचागत तंत्र को मजबूत करने और मानव संसाधनों को इसके हिसाब से प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है। आदेश में यह भी कहा गया है कि बच्चों के कोमल मन को यौन शोषण और उत्पीड़न से पहुंचा सदमा अपने आप में भयावह तो है ही, इस घाव को भरने के लिए किसी तरह की सहायता और सुरक्षा नहीं मिल पाने से स्थिति और गंभीर हो जाती है।इस तरह के अपराधों में मुजरिम को कानून के तहत कड़े से कड़ा दंड मिल जाने भर से बच्चे को न्याय नहीं मिल जाता बल्कि सरकारी मशीनरी द्वारा जांच व मुकदमे की पूरी प्रक्रिया के दौरान उसकी सहायता, देखभाल और उसकी सुरक्षा का विश्वास दिलाने से मिलता है। बच्चे के साथ सचमुच में न्याय हुआ है, यह तभी माना जा सकता है जब उसका अपना गरिमा बोध वापस मिल जाए, वह समाज की मुख्य धारा में लौट आए, खुद को सुरक्षित महसूस करे और भविष्य के प्रति एक उम्मीद जाग जाये।बीबीए ने बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियमों -कानूनों पर अमल में राज्य सरकारों की घोर विफलता, यौन शोषण के शिकार बच्चों को उनके कानूनी हक दिलाने में लापरवाही और उनकी सुरक्षा से समझौतों को उजागर करते हुए संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत 2022 में यह समादेश याचिका दायर की थी।याचिका में शीर्ष अदालत को उत्तर प्रदेश के ललितपुर में सामूहिक बलात्कार की शिकार उस दलित लड़की के साथ हुई भयावह घटना से भी अवगत कराया गया जिसमें पांच महीने तक कोई एफआईआर तक नहीं दर्ज की गयी। पांच महीने तक भटकने के बाद पीड़ित बच्ची शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंची। लेकिन न्याय में कोई मदद तो दूर थाना प्रभारी ने थाने में ही उसके साथ बलात्कार किया। ऐसे में पहले से ही सदमे की शिकार बच्ची की क्या हालत हुई होगी, यह अकल्पनीय है। सुप्रीम कोर्ट के वकील और जाने-माने बाल अधिकार कार्यकर्ता भुवन ऋभु ने कहा कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के 2021 के आंकड़ों के अनुसार पॉक्सो अदालतों में सिर्फ दो फीसद मामलों में ही अपराधियों को सजा मिल पाती है। इस संदर्भ में देखें तो यौन उत्पीड़न के शिकार बच्चों और उनके परिवारों के लिए न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में इस फैसले के दूरगामी परिणाम होंगे। एक व्यक्ति जो सदमे के शिकार बच्चों को ढाढस बंधाये, इलाज कराने और क्षतिपूर्ति दिलाने में उसकी मदद करे और इससे भी कहीं ज्यादा बच्चे व उसके परिवार को जटिल कानूनी प्रक्रिया का सामना करने के लिए मानसिक रूप से तैयार करे, ऐसे सहायक व्यक्ति की उपलब्धता पूरी आपराधिक न्याय प्रक्रिया के लिए उत्प्रेरक का काम करेगी। अब जरूरत सिर्फ इस पर पूरी ईमानदारी से अमल करने की है।
चारा घोटाला मामले में दायर की याचिकाएबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना/ रांची। सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लालू प्रसाद यादव की जमानत रद्द करने के लिए अपनी याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने की मांग की। सुप्रीम कोर्ट चारा घोटाला मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता लालू प्रसाद यादव को झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा दी गई जमानत को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका को सूचीबद्ध करने पर सहमत हो गया है। सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में 25 अगस्त को सुनवाई होगी। ...हम लड़ेंगे और जीतेंगे : तेजस्वी वहीं इस मामले पर बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव का कहना है, ...हम कोर्ट में अपना पक्ष रखेंगे। वे हमें कितना भी परेशान करें, कुछ नहीं होगा। हमें स्पष्ट है कि हमें क्या करना है। कोई भी उनसे डरने वाला नहीं है। ...हम लड़ेंगे और जीतेंगे।
मणिपुर हिंसा मामले में जांच के लिए CBI ने उतारे 53 अफसर, 29 महिला अधिकारीएबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने मणिपुर हिंसा मामलों की जांच के लिए बुधवार को विभिन्न रैंक की 29 महिला अधिकारियों सहित 53 अधिकारियों को तैनात किया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। सीबीआई ने बताया कि तीन उप महानिरीक्षक रैंक के अधिकारी राज्य में हिंसा के मामलों की जांच के लिए अपनी-अपनी टीम का नेतृत्व करेंगे, जिनमें महिला अधिकारी लवली कटियार और निर्मला देवी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी संयुक्त निदेशक घनश्याम उपाध्याय को रिपोर्ट करेंगे जो विभिन्न मामलों में जांच की निगरानी करेंगे। 3 मई को राज्य में पहली बार जातीय हिंसा भड़कने के बाद से 160 से अधिक लोग मारे गये हैं, और कई सौ लोग घायल हुए हैं। बहुसंख्यक मेइती समुदाय की अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में आदिवासी एकजुटता मार्च आयोजित किए जाने के दौरान यह हिंसा भड़की थी। मणिपुर की कुल आबादी में मेइती समुदाय के लोगों की संख्या लगभग 53 प्रतिशत है और वे ज्यादातर इम्फाल घाटी में रहते हैं, जबकि आदिवासी नगा और कुकी समुदाय के लोगों की संख्या 40 प्रतिशत है और वे ज्यादातर पहाड़ी जिलों में रहते हैं।
सीएम हेमंत सोरेन को ईडी का नोटिस, 9 महीने बाद जारी हुआ दूसरा समनटीम एबीएन, रांची। झारखंड में मनी लांड्रिग और जमीन घोटाले की चल रही जांच में ईडी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सीएम हेमंत सोरेन को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है। मंगलवार को सुबह से ही ईडी दफ्तर की गितिविधि बढ़ी हुई थी। दोपहर बाद ईडी ने सीएम हेमंत सोरेन को पूछताछ के लिए नोटिस भेज दिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लेकर राजधानी से बड़ी खबर है, प्रवर्तन निदेशालय ने सीएम हेमंत सोरेन को दूसरा समन जारी करते हुए पूछताछ के लिए ईडी दफ्तर बुलाया है। हालांकि सीएम को दोबारा बुलाये जाने की आधिकारिक पुष्टि नही हो पाई है। कैसे आये सीएम ईडी की नजर में 6 मई 2022 को ईडी ने मनरेगा घोटाले में राज्य की तत्कालीन खान सचिव पूजा सिंघल और उनके सहयोगियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान ईडी को 19.41 करोड़ मिले थे। जांच के बाद ईडी ने बताया था कि जब्त पैसों में अधिकांश राशि राज्य के बड़े राजनीतिज्ञों और नौकरशाहों की है। इसके बाद आठ जुलाई 2022 को ईडी ने अवैध खनन के मामले में मुख्यमंत्री के बरहेट विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा और उनके सहयोगियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस मामले में ईडी ने 19 जुलाई 2022 को पंकज मिश्रा को मास्टरमाइंड बताते हुए गिरफ्तार किया था। बाद में ईडी ने 25 अगस्त को सत्ता के गलियारे में चर्चित रहे प्रेम प्रकाश, सीए जे जयपुरिया के ठिकानें पर छापेमारी की। इस दौरान प्रेम के यहां से सीएम हाउस में तैनात दो सिपाहियों की एके 47 और 60 कारतूस बरामद किये थे, जबकि जयपुरियार के यहां से संपत्ति और निवेश से जुड़े कच्चे कागजात व फाइलें बरामद की गयी थीं। वहीं रवि केजरीवाल ने एजेंसी को जो बयान दिया था, उसमें हेमंत सोरेन का जिक्र किया गया था, बाद में रवि केजरीवाल के बयान के सत्यापन में भी कई चीजें ईडी की जानकारी में आयी थीं, जिसके बाद सीएम को ईडी ने पहली बार 1 नवंबर 2022 को समन भेज 3 नवंबर को हाजिर होने को कहा था। उस दौरान मुख्यमंत्री ने पत्र भेजकर ईडी से समय मांग लिया था लेकिन उसके बाद ईडी ने सीएम को दोबारा समन भेजा और फिर 17 नवम्बर 2022 को सीएम ईडी दफ्तर में हाजिर हुए थे। पिछली बार सीएम हेमंत सोरेन को अवैध खनन मामले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने अपने दफ्तर बुलाया था। 17 नवंबर को सीएम हेमंत सोरेन से करीब नौ घंटे तक पूछताछ हुई थी। उस दिन हेमंत सोरेन अपने भाई बसंत सोरेन के साथ दोपहर करीब 12 बजे ईडी के दफ्तर पहुंचे थे। दिनभर चली मुलाकात के बाद करीब 9 बजे कल्पना सोरेन ईडी दफ्तर पहुंची और उन्हें अपने साथ लेकर घर गयीं। ईडी की छापेमारी के बारे में तब सीएम हेमंत सोरेन ने आरोप लगाया था कि यह सरकार को अस्थिर करने की कोशिश है। उन्होंने ये भी आरो लगाया था कि जब से सरकार बनी है तब से उनके खिलाफ षड्यंत्र रचा जा रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने यहां तक कहा था कि सत्तापक्ष के विधायकों के घर ही छापेमारी होती है। उन्होंने राज्यपाल पर भी राजनीति संरक्षण देने की बात कही थी। तब पूछताछ के लिए ईडी की पटना और दिल्ली कार्यालय से वरिष्ठ अधिकारी रांची पहुंचे थे, सीएम से पूछताछ को लेकर राजभवन और भाजपा आॅफिस में भी सुरक्षा सख्त कर दी गयी थी। इसके अलावा हिनू चौक से होटल ग्रीन एकर्स तक धारा 144 लगा दिया गया था। पूरे रांची में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये थे।
उच्चतम न्यायालय ज्ञानवापी सर्वेक्षण पर रोक लगाने की मस्जिद समिति की याचिका पर सुनवाई करेगाएबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को वाराणसी के विवादित ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने की अनुमति के खिलाफ मस्जिद समिति ने गुरुवार को उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। शीर्ष अदालत के समक्ष दायर अपनी विशेष अनुमति याचिका में अंजुमन इंतजामिया मस्जिद समिति वाराणसी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा 03 अगस्त गुरुवार को पारित आदेश पर रोक लगाने की मांग की।मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त की। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता एम निज़ामुद्दीन पाशा ने पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए तत्काल सुनवाई की गुहार लगायी थी।शीर्ष अदालत के समक्ष श्री पाशा ने सर्वेक्षण पर तत्काल रोक लगाने की गुहार लगाते हुए कहा- मैंने विशेष अनुमति याचिका ईमेल कर दी है... उन्हें (सर्वेक्षण) जारी न रखने दें। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने जवाब दिया- हम इस पर तुरंत विचार करेंगे।मस्जिद का प्रबंधन करने वाली इस समिति ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के कुछ घंटों के भीतर ही शीर्ष न्यायालय का रुख किया। उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के उस फैसले पर मुहर लगा दी थी, जिसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को ज्ञानवापी परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने की अनुमति दी गयी थी। समिति ने अपनी विशेष अनुमति याचिका में दलील दी है कि उच्च न्यायालय के आदेश को इस तरह के अभ्यास से उत्पन्न गंभीर जोखिमों के कारण रद्द किया जा सकता है, जिसके पूरे देश में परिणाम हो सकते हैं।याचिका में पिछले साल एक सर्वेक्षण के लिए एक आयुक्त नियुक्त किये जाने पर पूरे मुद्दे की अत्यधिक मीडिया कवरेज और सांप्रदायिक रंगों का हवाला दिया गया है।इस आधार पर यह भी दावा किया गया कि ऐसी यह पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 के प्रावधानों के बिल्कुल खिलाफ थी। इस अधिनियम के तहत 15 अगस्त 1947 को प्रचलित धार्मिक स्थानों के स्वरूप को बनाये रखना अनिवार्य कर दिया था। उच्च न्यायालय ने 03 अगस्त को वाराणसी जिला अदालत के 21 जुलाई के आदेश के खिलाफ समिति की याचिका खारिज कर दी, जिसमें यह पता लगाने के लिए सर्वेक्षण का आदेश किया गया था कि क्या मस्जिद पहले से मौजूद मंदिर पर बनायी गयी थी।
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