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कोडरमा : गला दबाकर पत्नी की जान लेने वाले को कठोर आजीवन कारावास
Published / 2024-03-06 20:58:57
कोडरमा : गला दबाकर पत्नी की जान लेने वाले को कठोर आजीवन कारावास

मात्र 4 माह कार्य दिवस में त्वरित सुनवाई करते हुए सुनायी गयी सजा अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश दितीय  अजय कुमार सिंह की अदालत ने सुनायी सजा, 25000 जुर्माना भी लगाया  जुर्माना की राशि नहीं देने पर  1 वर्ष अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी टीम एबीएन, कोडरमा। पत्नी की गला दबाकर हत्या करने के एक मामले की मात्र 4 माह कार्य दिवस में त्वरित सुनवाई करते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश  द्वितीय अजय कुमार सिंह की अदालत ने बुधवार को आरोपी  दिलीप पंडित 40 वर्ष,  पिता- कमल पंडित काको जयनगर   जिला- कोडरमा निवासी को 302 आईपीसी के तहत दोषी पाते हुए कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनायी। साथ ही 25000 जुर्माना लगाया। जुर्माना की राशि नहीं देने पर  1 वर्ष  अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।   मामला वर्ष 2023 का है। इसे  लेकर जयनगर थाना कांड संख्या 90/ 2023 एवं  90/2023 दर्ज किया गया था। अभियोजन का संचालक लोक अभियोजक पीपी एंजेलिना वारला ने किया। इस दौरान सभी 7 गवाहों का परीक्षण कराया गया। लोक अभियोजक पीपी एंजेलिना वारला  ने कार्रवाई के दौरान अपराध की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय से अभियुक्त को  फांसी की  सजा देने का आग्रह किया। वहीं बचाव पक्ष की ओर से एल ए डीसी डिप्टी चीफ किरन कुमारी  ने दलीलें पेश करते हुए बचाव किया। अदालत ने सभी गवाहों और साक्षयो का अवलोकन करने के उपरांत अभियुक्त को दोषी पाते हुए सजा मुकर्रर की और जुर्माना लगाया। बताते चले कि न्यायालय ने एक दिन पूर्व आरोपी को दोषी उठहराया था। क्या है मामला कोडरमा- इसे लेकर मृतक संगीता देवी के पिता इतवारी पंडित ने जयनगर थाना में आवेदन देकर मामला दर्ज कराते हुए कहा था कि उसकी पुत्री की शादी 23 वर्ष पहले देवेंद्र पंडित उम्र 40 वर्ष पिता कमल पंडित, काको, जयनगर, कोडरमा निवासी के साथ हुई थी। शादी के बाद उसकी  पांच लड़की और एक लड़का है। इधर, 6 -7 वर्षों से दोनों के बीच लड़ाई- झगड़ा होते आ रहा था। कई बार हम लोग  समझने गए और समझाएं भी, पर कोई  फायदा नहीं हुआ। 9 मई 2023 के सुबह 6 बजे मोहल्ले के लोगों के द्वारा फोन आया कि देवेंद्र पंडित (आपका दामाद) आपकी पुत्री का गला दबाकर हत्या कर दिया है। तब हम लोग वहां पहुंचे तो देखें कि मेरी बेटी मृत अवस्था में पर पड़ी हुई है। दामाद से पूछताछ किया तो वह कुछ भी नहीं बोला। आस पड़ोस से पता चला कि मेरा दामाद ही उसकी हत्या गला दबाकर कर दिया है। उनके द्वारा अपने दामाद देवेंद्र पंडित पर पुत्री की गला दबाकर हत्या करने का आरोप लगाते हुए उचित कानूनी कार्रवाई करने की गुहार लगायी गयी थी।

प्रश्न पूछने में पैसे की लेनदेन पर सुप्रीम कोर्ट की खरी-खरी
Published / 2024-03-04 20:34:27
प्रश्न पूछने में पैसे की लेनदेन पर सुप्रीम कोर्ट की खरी-खरी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। सर्वोच्च न्यायालय ने सांसदों और विधायकों के विशेषाधिकार को परिभाषित करते हुए सोमवार को निर्णय दिया कि पैसा लेकर प्रश्न पूछना, पैसा लेकर भाषण करना ओर पैसा लेकर सदन के भीतर वोट देना भ्रष्टाचार है और ऐसा करने वाले सांसदों, विधायकों पर मुकदमा चलेगा।यह निर्णय स्वागत योग्य है, परंतु यदि कोई मंत्री संसद अथवा विधानसभा में किसी सांसद या विधायक के प्रश्न का गलत और गुमराह करने वाला उत्तर देता है और यह साबित हो जाता है कि जिसका संरक्षण देने के लिए वह उत्तर दे रहा है, उससे उसका संबंध है तो ऐसे मंत्रियों पर भी भ्रष्टाचार का मुकदमा चलना चाहिए। इस क्रम में सरयू राय ने झारखण्ड विधानसभा के माननीय अध्यक्ष महोदय को जो पत्र लिखा है, वह भी इसी दायरे में आना चाहिए। इस पत्र की प्रति संलग्न है, जो स्वत: स्पष्ट है। विधायक के रूप में सरयू राय ने विधानसभा में राज्य के माननीय स्वास्थ्य मंत्री से एक सवाल पूछा था कि जमशेदपुर की एक महिला चिकित्सक, रेणुका चैधरी ने कई वर्षों तक सेवा से अनुपस्थित रहने के बावजूद वेतन लिया और अनुपस्थिति की अवधि में फर्जी हस्ताक्षर उपस्थिति पंजिका में किया। एक बार दिनांक 19.08.2013 को तत्कालीन स्वास्थ्य सचिव के आदेश पर तीन सदस्यीय समिति ने जांच की तो पाया कि ये आरोप सही है और चूंकि आरोपी चिकित्सक तब तक अवकाश ग्रहण कर चुकी थी, इसलिए उनके वेतन की पूरी कटौती करने का आदेश पारित हुआ। परंतु जब विधायक सरयू राय ने विधानसभा के वर्तमान बजट सत्र में और इसके पूर्व रांची विधानसभा के विधायक सीपी सिंह ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र में संबंधित प्रश्न उठाया तो सरकार ने उत्तर दिया कि उस समय की उपस्थिति पंजिका जिला यक्ष्मा कार्यालय, जमशेदपुर से गायब हो गयी है और जिस लिपिक (संजय तिवारी) की अभिरक्षा में उपस्थिति पंजिका थी, उसने आत्महत्या कर ली है। यानी जिस उपस्थिति पंजिका के आधार पर वर्ष 2016 में स्वास्थ्य विभाग की तीन सदस्यीय समिति ने पाया कि डॉ रेणुका चैधरी ने उपस्थिति पंजिका पर फर्जी हस्ताक्षर किया है और जिस पंजिका के बारे में एक आरटीआई कार्यकर्ता को विभाग ने उत्तर दिया कि वह उपस्थिति पंजिका गायब नहीं हुई है, वहीं किसी और आरटीआई कार्यकर्ता को विभाग ने लिखित तौर पर बताया कि मांगे गये दस्तावेजों की प्रति खोजी गई, जिसमें उक्त दस्तावेज उपलब्ध नहीं है। दूसरी ओर विधानसभा में स्वास्थ्य मंत्री ने उत्तर दिया कि वह उपस्थिति पंजिका गायब है और आरोपी चिकित्सक पर कार्रवाई करने के लिए माननीय स्वास्थ्य मंत्री ने पूर्वी सिंहभूम जिला के सिविल सर्जन के उपर ही सही तथ्य नहीं बताने के लिए प्रपत्र क गठित कर विभागीय कार्यवाही आरंभ कर दिया है। विधायक श्री सरयू राय ने इस बारे में विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा है और कहा है कि यदि सभा व्यवस्थित होती तो इस प्रश्न के उत्तर पर वाद-विवाद होता तो वे इस बारे में कतिपय सवाल पूछते, परंतु सभा की कार्यवाही बाधित हो गयी, इसलिए सरकार के गलत उत्तर को वे परिभाषित नहीं कर सके। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया है कि वे विधानसभा में गलत उत्तर देने वालों के खिलाफ सदन की अवमानना की कार्रवाई करे, परंतु जब आज माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने पैसा लेकर प्रश्न आदि पूछने के बारे में सांसदों और विधायकों के विशेषाधिकार को परिभाषित कर दिया है, तब प्रश्न उठता है कि विधानसभा में गलत उत्तर देने वाले मंत्री के विरूद्ध भ्रष्टाचार के विरूद्ध आपराधिक कार्रवाई हो सकती है या नहीं। यह सवाल विधायक सरयू राय माननीय विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष उठायेंगे ताकि सरकार में व्याप्त मंत्रियों का भ्रष्टाचार भी इस दायरे में आये और मंत्री बनकर भ्रष्टाचार करने वाले और भ्रष्टाचार के प्रभाव में गलत उत्तर देने वाले मंत्रियों के विरूद्ध भी आपराधिक कार्रवाई हो सके।

अब प्रेस सेवा पोर्टल से होगा समाचार पत्रों और पत्रिकाओं का आॅनलाइन पंजीकरण
Published / 2024-03-02 21:12:02
अब प्रेस सेवा पोर्टल से होगा समाचार पत्रों और पत्रिकाओं का आॅनलाइन पंजीकरण

आरएनआई का नाम बदलकर अब पीआरजीआई- प्रेस रजिस्ट्रार जनरल आफ इंडिया हुआ प्रेस और पत्रिकाओं का पंजीकरण (पीआरपी) अधिनियम, 2023 लागू हुआ; पुराना पीआरबी अधिनियम, 1867 निरस्त कर दिया गया है एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत सरकार ने ऐतिहासिक प्रेस और पत्रिकाओं का पंजीकरण (पीआरपी) अधिनियम, 2023 और इसके नियमों को अपने राजपत्र में अधिसूचित कर दिया है और इसके परिणामस्वरूप यह अधिनियम 1 मार्च, 2024 से लागू हो गया है। अब से, पत्रिकाओं का पंजीकरण प्रेस और पत्रिकाओं के पंजीकरण अधिनियम (पीआरपी अधिनियम), 2023 और प्रेस और पत्रिकाओं के पंजीकरण नियमों के प्रावधानों के अनुसार होगा। अधिसूचना के अनुसार, भारत के प्रेस रजिस्ट्रार जनरल का कार्यालय- पीआरजीआई, जिसे पहले रजिस्ट्रार आफ न्यूजपेपर्स फॉर इंडिया के नाम से जाना जाता था,  नये अधिनियम के उद्देश्यों को पूरा करेगा। डिजिटल इंडिया के मूल्यों के अनुरूप, नया अधिनियम देश में समाचार पत्रों और अन्य पत्रिकाओं के पंजीकरण की सुविधा के लिए एक आनलाइन प्रणाली प्रदान करेगा। नई प्रणाली मौजूदा मैनुअल, बोझिल प्रक्रियाओं को बदल देगी। पुरानी प्रक्रिया में कई चरणों में अनुमोदन शामिल होते हैं जो प्रकाशकों के लिए अनावश्यक कठिनाइयों का कारण बन रहे थे। इससे पहले, सूचना और प्रसारण मंत्री श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने नए अधिनियम के अनुसार विभिन्न आवेदन प्राप्त करने के लिए प्रेस रजिस्ट्रार जनरल का आनलाइन पोर्टल, प्रेस सेवा पोर्टल लॉन्च किया था। किसी पत्रिका के प्रिंटर द्वारा दी गयी सूचना सहित सभी आवेदन, किसी विदेशी पत्रिका के स्थानीय संस्करण के पंजीकरण के लिए आवेदन, किसी पत्रिका के पंजीकरण का प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए प्रकाशक द्वारा आवेदन, पंजीकरण के प्रमाण पत्र में संशोधन के लिए आवेदन,  ट्रांसफर के लिए आवेदन पत्रिकाओं का स्वामित्व, पत्रिका के प्रकाशक द्वारा वार्षिक विवरण प्रस्तुत करना, और पत्रिका के प्रसार के सत्यापन के लिए डेस्क आॅडिट की प्रक्रिया आदि सभी कार्य प्रेस सेवा पोर्टल के माध्यम से आनलाइन होंगे। प्रेस सेवा पोर्टल पेपरलेस प्रोसेसिंग सुनिश्चित करता है और ई-साइन सुविधा, डिजिटल भुगतान गेटवे, तत्काल डाउनलोड के लिए क्यूआर कोड-आधारित डिजिटल प्रमाणपत्र, प्रिंटिंग प्रेस द्वारा सूचना प्रदान करने के लिए आनलाइन प्रणाली, टाइटल उपलब्धता के लिए संभावना का प्रतिशत, पंजीकरण तक आनलाइन पहुंच, सभी प्रकाशकों के लिए डेटा, वार्षिक विवरण दाखिल करना आदि सेवाएं प्रदान करता है।। इसका इरादा एक चैटबॉट-आधारित इंटरैक्टिव शिकायत समाधान सिस्टम स्थापित करने का भी है। प्रेस सेवा पोर्टल के साथ एक नयी वेबसाइट भी है जिसमें सभी संबंधित जानकारी और उपयोगकर्ता के अनुकूल इंटरफेस है। नया पीआरपी अधिनियम पुराने पीआरबी अधिनियम द्वारा आवश्यक पंजीकरण के दायरे से पुस्तकों और पत्रिकाओं को हटा देता है; नया अधिनियम एक पत्रिका को एक समाचार पत्र सहित किसी भी प्रकाशन के रूप में परिभाषित करता है जो नियमित अंतराल पर प्रकाशित और प्रिंट होता है जिसमें सार्वजनिक समाचार या सार्वजनिक समाचार पर टिप्पणियां शामिल होती हैं लेकिन इसमें वैज्ञानिक, तकनीकी और शैक्षणिक प्रकृति की कोई पुस्तक या पत्रिका शामिल नहीं होती है। इसलिए, पुस्तक, या वैज्ञानिक, तकनीकी और शैक्षणिक प्रकृति की पुस्तक या जर्नल सहित को पीआरजीआई के साथ पंजीकरण की आवश्यकता नहीं है। नये अधिनियम के अनुसार, पत्रिकाओं के पंजीकरण के लिए सभी आवेदन केवल प्रेस सेवा पोर्टल के माध्यम से आनलाइन मोड में किये जायेंगे। इस तरह पत्रिकाएं निकालने के इच्छुक प्रकाशकों को इसे प्रकाशित करने से पहले इसका टाइटल पंजीकृत करना होगा। चूंकि पंजीकरण प्रक्रिया आनलाइन होगी और सॉफ्टवेयर के माध्यम से निर्देशित होगी, आवेदन में त्रुटियों की संभावना काफी कम हो जायेगी जिसके परिणामस्वरूप आवेदनों की तेजी से प्रोसेसिंग होगी। आवेदन की स्थिति सभी चरणों में अपडेट की जायेगी और आवेदक को एसएमएस और ईमेल के माध्यम से सूचित किया जायेगा ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके और गलत संचार के कारण होने वाली देरी को समाप्त किया जा सके। नये प्रेस सेवा पोर्टल के माध्यम से पत्रिकाओं के पंजीकरण में शामिल चरण इस प्रकार हैं: किसी पत्रिका के मालिक द्वारा साइन अप करना और प्रोफाइल बनाना पंजीकरण प्रक्रिया शुरू करने के लिए, प्रस्तावित पत्रिका के मालिक को 5 प्राथमिकता के क्रम में प्रस्तावित शीर्षकों के साथ आवश्यक प्रासंगिक दस्तावेज/विवरण प्रस्तुत करके प्रेस सेवा पोर्टल पर साइन अप करना और एक प्रोफाइल बनाना आवश्यक है। ये शीर्षक विकल्प भारत में कहीं भी एक ही भाषा में या एक ही राज्य में किसी अन्य भाषा में किसी पत्रिका के किसी अन्य मालिक के पास पहले से मौजूद शीर्षक से मिलते हुए नहीं होने चाहिए और ये शीर्षक विकल्प इस प्रयोजन के लिए प्रेस रजिस्ट्रार जनरल द्वारा बनाए गए दिशानिदेर्शों के अनुरूप होने चाहिए। प्रेस रजिस्ट्रार जनरल और जिले में निर्दिष्ट प्राधिकारी को एक साथ आवेदन प्रेस सेवा पोर्टल के माध्यम से प्रस्तुत आवेदन प्रेस रजिस्ट्रार जनरल और जिले में निर्दिष्ट प्राधिकारी के लिए एक साथ पहुंच/उपलब्ध होंगे। इसलिए, किसी अन्य कार्यालय/पोर्टल पर अलग से आवेदन जमा करने की कोई आवश्यकता नहीं है। आनर द्वारा प्रकाशकों को निमंत्रण प्रोफाइल के निर्माण के बाद, आनर पोर्टल के माध्यम से अपने पत्रिकाओं से जुड़े नामित प्रकाशकों को निमंत्रण देगा। प्रिंटर (प्रिंटिंग प्रेस के मालिक/कीपर) द्वारा साइन अप करना और आनलाइन सूचना प्रिंटर (प्रिंटिंग प्रेस के मालिक/कीपर) को पोर्टल में आवश्यक प्रासंगिक विवरण प्रस्तुत करके प्रेस सेवा पोर्टल पर एक आनलाइन खाता बनाना आवश्यक है। प्रकाशक द्वारा साइन अप करना और प्रोफाइल बनाना आमंत्रित/नियुक्त प्रकाशकों को प्रासंगिक दस्तावेज/विवरण प्रस्तुत करके पोर्टल पर अपनी प्रोफाइल बनाना आवश्यक है। प्रकाशक द्वारा प्रिंटर का चयन/नामांकित करना पंजीकरण प्रक्रिया के भाग के रूप में, प्रकाशकों को उन मामलों में प्रेस सेवा डेटाबेस से अपने संबंधित प्रिंटिंग प्रेस को नामांकित/चयन करना आवश्यक है जहां प्रिंटिंग प्रेस खाता पहले से ही डेटाबेस में उपलब्ध है। अन्यथा, वे प्रिंटर से पोर्टल में एक आनलाइन प्रोफाइल बनाने का अनुरोध कर सकते हैं, और उसके बाद उन्हें प्रस्तावित पत्रिका के लिए प्रिंटर के रूप में चुन सकते हैं। प्रकाशक द्वारा जमा किया जाने वाला पीरियडिकल पंजीकरण आवेदन अपनी प्रोफाइल बनाने के बाद, प्रकाशक सभी प्रासंगिक विवरण/दस्तावेज भरकर, आवेदन पर ई-हस्ताक्षर करके और भारतकोश के माध्यम से निर्धारित शुल्क का भुगतान करके पंजीकरण के लिए आवेदन जमा कर सकते हैं। आवेदन जमा करने के बाद किसी भी सुधार के लिए विंडो आवेदन जमा करने के बाद, प्रकाशकों के पास आवेदन में मामूली संशोधन करने के लिए 5 दिन (120 घंटे की समय-विंडो) होती है। इस अवधि के बाद आवेदन में कोई संशोधन संभव नहीं है। एक यूनीक एप्लिकेशन रेफरेंस नंबर के साथ रसीद: आवेदन के सफल अपलोड होने पर, प्रेस सेवा पोर्टल एक यूनीक 10 अंकों के अल्फान्यूमेरिक एप्लिकेशन रेफरेंस नंबर (एआरएन) के साथ एक रसीद उत्पन्न करेगा, और प्रकाशक और प्रेस रजिस्ट्रार जनरल भविष्य के सभी पत्राचारों और संदर्भों के लिए इस रेफरेंस नबंर का उपयोग करेंगे।आवेदन और समय पर प्रतिक्रिया में कमियाँ: प्रारंभिक जांच के बाद, भारतीय प्रेस रजिस्ट्रार जनरल (पीआरजीआई) का कार्यालय आवश्यकता पड़ने पर त्रुटियों पर संदेश जारी करेगा। प्रकाशकों को 30 दिन की समय सीमा के भीतर अपने जवाब प्रस्तुत करने होंगे। इस अवधि का पालन करने में विफलता के परिणामस्वरूप आवेदन अस्वीकार कर दिया जाएगा। भारतकोश के माध्यम से पंजीकरण शुल्क का आनलाइन भुगतान सभी प्रकाशकों के लिए प्रेस सेवा पोर्टल में एकीकृत भारतकोश डिजिटल भुगतान प्रणाली के माध्यम से 1000 रुपये (केवल एक हजार रुपये) का पंजीकरण शुल्क भेजना अनिवार्य है। पंजीकरण विवरण में संशोधन प्रेस सेवा पोर्टल पंजीकरण विवरण में संशोधन के लिए आॅनलाइन सुविधा भी प्रदान करता है। पंजीकरण को संशोधित करने और पत्रिकाओं के विवरण में बदलाव के लिए सभी आवेदन पोर्टल के माध्यम से किये जाने हैं। ये विकल्प आॅनर/प्रकाशक प्रोफाइल में उपलब्ध होंगे। प्रेस और आवधिक पंजीकरण अधिनियम, 2023 पारंपरिक दृष्टिकोण से पंजीकरण प्रक्रियाओं में एक आदर्श बदलाव लाने की एक पहल है, और व्यापार करने में आसानी सुनिश्चित करने वाले प्रकाशकों के लिए अधिक अनुकूल वातावरण तैयार करेगा। नया अधिनियम मौजूदा कानूनों से अप्रचलित और पुराने प्रावधानों को हटाने के सरकार के प्रयासों की भी गवाही देता है। विस्तृत जानकारी के लिए, प्रकाशकों और अन्य हितधारकों को सलाह दी जाती है कि वे प्रेस और पत्रिका अधिनियम और पीआरपी नियमों के प्रावधानों को ध्यान से पढ़ें। ज्यादा जानकारी के लिए पढ़ें: https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1989267https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2008020प्रेस एवं आवधिक पंजीकरण अधिनियम, 2023: https://mib.gov.in/sites/default/files/Press%20and%20Registration%20of%20Periodicals%20Act%202023.pdf

आम चुनाव 2024 : आचार संहिता का उल्लंघन करनेवालों की अब खैर नहीं
Published / 2024-03-01 21:50:20
आम चुनाव 2024 : आचार संहिता का उल्लंघन करनेवालों की अब खैर नहीं

आचार संहिता के उल्लंघन पर होगी कड़ी कार्रवाई, लोकसभा चुनाव के लिए सियासी दलों को एडवाइजरी जारी एबीएन सेंट्रल डेस्क। आगामी लोकसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग (ईसीआई) ने शुक्रवार को राजनीतिक दलों को एक एडवाइजरी जारी की। जिसमें उनसे चुनाव प्रचार के दौरान शिष्टाचार और संयम बनाने रखने व मुद्दों पर आधारित बहस की जरूरत पर जोर दिया गया। आयोग ने यह भी कहा कि जिन स्टार प्रचारकों या उम्मीदवारों को पहले भी नोटिस जारी किये गये, उन्हें आचार संहिता के बार-बार उल्लंघन के लिए सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।  एडवाइजरी में कहा, सोशल मीडिया पर प्रतिद्वंद्वियों को बदनाम या अपमानित करने वाले या दूसरों की गरिमा को गिराने वाले पोस्ट साझा नहीं किए जाने चाहिए। आयोग ने राजनीतिक दलों को विभाजनकारी बयानबाजी से दूरे रहने के लिए भी कहा। एडवाइजरी में स्टार प्रचारकों और उम्मीदवारों पर विशेष जोर देते हुए उन्हें आदर्श आचार संहिता के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों उल्लंघनों के प्रति आगाह किया गया है। एडवाइजरी में कहा गया, चुनाव आयोग आगामी चुनाव में समय और सामग्री के संबंध में दिए जाने वाले नोटिस पर पुनर्विचार के लिए आचार संहिता के उल्लंघन का आकलन करेगा।  आयोग ने एडवाइजरी में चुनावी प्रक्रिया की अखंडता को बनाए रखने के लिए कई निर्देश जारी किये हैं, जैसे- जाति या सांप्रदायिक भावनाओं के आधार पर अपील न करने के लिए कहा गया है।  ऐसी गतिविधियों में शामिल न होने के लिए कहा गया है, जो मतभेदों को बढ़ाती हैं या विभिन्न समूहों को आपस में दुश्मनी के लिए उकसाती हैं। मतदाताओं को गुमराह करने के मकसद से झूठे बयानों या निराधार आरोपों का प्रचार नहीं करना है।  व्यक्तिगत हमलों से बचना है और राजनीतिक भाषण में मयार्दा बनाये रखना है।  चुनाव प्रचार के लिए किसी मंदिर/मस्जिद/चर्च/गुरुद्वारा या किसी अन्य पूजा स्थल का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।  राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को ऐसे किसी भी कामों या बयानों से बचने के लिए कहा गया है, जिन्हें महिलाओं के सम्मान और गरिमा में खिलाफ माना जाता है।  मीडिया को असत्यापित और भ्रामक विज्ञापन नहीं दिए जाने चाहिए।  सोशल मीडिया पर संयम बरतना है। प्रतिद्वंद्वियों को बदनाम करने वाले पोस्ट करने से बचना है।  आयोग ने सभी राजनीतिक दलों, उनके नेताओं और चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को आदर्श आचार संहिता और कानूनी ढांचे के दायरे में रहने का आग्रह किया है।

हत्याकांड के आरोपी को हाइकोर्ट से जमानत
Published / 2024-02-29 21:11:36
हत्याकांड के आरोपी को हाइकोर्ट से जमानत

टीम एबीएन, रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने धनबाद के हर्मेंद्र पासवान हत्याकांड के आरोपी वासुदेव तुरी को जमानत की सुविधा प्रदान कर दी है। अदालत ने उसे बीस-बीस हजार के दो निजी मुचलकों पर जमानत की सुविधा प्रदान की है।हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस राजेश कुमार की बेंच में इस मामले की सुनवाई हुई। वासुदेव तुरी की ओर से अधिवक्ता सोनाली भट्टाचार्य ने बहस की। हर्मेंद्र पासवान की हत्या वर्ष 2023 में हुई थी। जिसके बाद उसके परिजनों ने धनबाद के जोड़ा पोखर थाना में कांड संख्या 29/2023 दर्ज करवायी थी।

लोहरदगा : हत्यारोपियों को आजीवन कारावास की सजा
Published / 2024-02-27 22:50:09
लोहरदगा : हत्यारोपियों को आजीवन कारावास की सजा

जमीन विवाद में हुई थी हत्याटीम एबीएन, लोहरदगा। व्यवहार न्यायालय में डीजे-3 अरविंद कुमार टू की अदालत ने मंगलवार को भूमि विवाद में की गई एक व्यक्ति की हत्या  मामले में तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। मामला सदर थाना क्षेत्र के जुरिया बड़का टोली का है। हत्या के तीन आरोपी बिजेन्दर बाखला, दीपक कुजूर और विकास उरांव को डीजे थ्री अरविन्द कुमार टू की अदालत ने किसान चरिया उरांव की हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनायी है, साथ ही हत्या और आर्म्स एक्ट के मामले में दोषी मानते हुए प्रत्येक आरोपियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

नींबू पहाड़ में अवैध खनन मामले में जारी रहेगी सीबीआई जांच
Published / 2024-02-23 21:55:26
नींबू पहाड़ में अवैध खनन मामले में जारी रहेगी सीबीआई जांच

झारखंड हाइकोर्ट ने नींबू पहाड़ अवैध खनन मामले में सीबीआई जांच पर लगी रोक को हटायाटीम एबीएन, रांची। झारखंड हाई कोर्ट ने नींबू पहाड़ अवैध खनन मामले में सीबीआई जांच पर लगी रोक को हटाते हुए राज्य सरकार द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। झारखंड हाईकोर्ट ने साहेबगंज जिले के नींबू पहाड़ में अवैध खनन मामले में सीबीआई को जांच जारी रखने का आदेश दिया गया है। सीबीआई अब इस मामले में अपनी जांच जारी रखेगी।इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की बेंच में हुई है। सीबीआई की ओर से अदालत को यह जानकारी दी गई कि नींबू पहाड़ क्षेत्र में अवैध खनन के मामले का मुद्दा गंभीर है। सीबीआई ने इस मामले में 6 जनवरी 2023 को प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके खिलाफ राज्य सरकार ने 13 जनवरी 2023 को हाईकोर्ट में जाकर सीबीआई की जांच के खिलाफ अपील की थी। हाईकोर्ट ने 13 जनवरी 2023 को सीबीआई की जांच पर रोक लगा दी थी। वहीं, अब झारखंड हाईकोर्ट ने नींबू पहाड़ में अवैध खनन मामले में सीबीआई को जांच जारी रखने का आदेश दिया है।

झारखंड सरकार की याचिका हाईकोर्ट से खारिज
Published / 2024-02-23 14:44:02
झारखंड सरकार की याचिका हाईकोर्ट से खारिज

नींबू पहाड़ मामले में हाईकोर्ट ने खारिज की झारखंड सरकार की याचिकाटीम एबीएन, रांची। नींबू पहाड़ मामले में राज्य सरकार की याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। नींबू पहाड़ पर सीबीआई जांच पर हाईकोर्ट द्वारा लगाई गई रोक को हाईकोर्ट ने हटा दिया है।मामले में हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की कोर्ट ने आज फैसला सुनाया। राज्य सरकार ने क्रिमिनल रिट याचिका दायर कर नींबू पहाड़ अवैध खनन को लेकर सीबीआई की प्राथमिकी को चुनौती दी थी।

दुष्कर्म के आरोपी को सजा ए मौत
Published / 2024-02-21 21:24:20
दुष्कर्म के आरोपी को सजा ए मौत

तीन साल की बच्ची से बलात्कार और बर्बर हत्या के मुजरिम को सजा ए मौत एबीएन सेंट्रल डेस्क। तीन साल की बच्ची से बर्बरता से बलात्कार और हत्या के जुर्म में हरियाणा के गुरुग्राम की एक पॉक्सो अदालत ने मुजरिम सुनील को फांसी की सजा सुनायी है। अदालत ने उस पर हत्या व बलात्कार के मामलों में 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाने के साथ ही सरकार को पीड़िता के परिवार के पुनर्वास के लिए दस लाख रुपए के मुआवजे का भी आदेश दिया है। पॉक्सो अदालत की जज शशि चौहान ने फैसला सुनाते हुए अभियुक्त के खिलाफ दर्ज इसी तरह के चार अन्य मामलों का भी संज्ञान लिया। इनमें तीन मामले गुरुग्राम में और एक मामला मध्य प्रदेश में दर्ज है। यह घटना नवंबर 2018 की है जब तीन बच्चियां अपने घर के बाहर खेल रही थीं। तभी पेशे से मजदूर सुनील वहां पहुंचा और बच्चियों को दस रुपए का लालच देकर अपने साथ चलने को कहा।दो बच्चियां जाने को तैयार नहीं हुईं पर सुनील तीन साल की एक बच्ची को कुछ खिलाने का लालच देकर अपने साथ ले गया। शाम तक बच्ची जब घर नहीं लौटी तो उसके मां-बाप ने उसकी खोज शुरू की और थाने में शिकायत दर्ज कराई। अगले दिन एक मंदिर के सामने विकृत हालत में बच्ची का शव मिला।शव पर कटे के निशान थे, उसका चेहरा एक पालिथिन में लपेटा हुआ था और खोपड़ी को पत्थरों से वार कर कूचा गया था। बच्ची के गुप्तांगों में ईंटों के टुकड़े व लकड़ियां ठूंसी गयी थीं। शव को देखने से ही स्पष्ट था कि बच्ची के साथ बेहद बर्बरता की गयी है। पुलिस ने हफ्ते भर बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और उसकी निशानदेही पर वारदात के समय पहने गए उसके कपड़े झांसी से बरामद किये। घटना के बाद गैरसरकारी संगठन बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) जिसे एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन के नाम से जाना जाता है, की टीम पीड़िता के घर पहुंची और परिजनों को न्याय दिलाने का भरोसा दिया। बचपन बचाओ आंदोलन के वरिष्ठ वकील विद्या सागर शुक्ला ने अदालत में पीड़िता की तरफ से दलीलें पेश की और अभियुक्त के लिए मौत की सजा की मांग की। फैसले पर संतोष जताते हुए विद्या सागर शुक्ला ने कहा कि मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि पीड़िता के परिजनों को न्याय मिला और अपराधी को सजा मिली। यद्यपि पॉक्सो अदालतों में फैसले के लिए छह साल का समय नहीं लगना चाहिए। यह फैसला एक साल के भीतर ही हो जाना चाहिए था। त्वरित फैसले ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने में सहायक होंगे। देश में पॉक्सो के मामलों पर बारीकी से नजर रखने वाले बाल अधिकार कार्यकर्ता और एक्सेस टू जस्टिस कार्यक्रम के कंट्री हेड रवि कांत ने उम्मीद जतायी कि यह फैसला नजीर साबित होगा।उन्होंने कहा, फास्ट ट्रैक स्पेशल अदालतों जैसी विशेषीकृत अदालतों की स्थापना का प्राथमिक उद्देश्य खासतौर से यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम से मुड़े मामलों का त्वरित गति से निपटारा करना था। लेकिन अभी भी 31 जनवरी 2023 तक देश में 2,43,237 मामले लंबित थे और सिर्फ तीन फीसदी मामलों में ही अपराधियों को सजा हो पायी। रवि कांत ने कहा कि पॉक्सो के मामलों में त्वरित गति से सख्त सजा देने से अपराधियों के मन में कानून का भय पैदा होगा और देश में बच्चों के यौन शोषण के मामलों में कमी आएगी। ऐसे में गुरुग्राम की पॉक्सो अदालत ने जो फैसला सुनाया है, उससे अपराधियों के मन में कानून का भय पैदा होगा और इसलिए यह स्वागत योग्य फैसला है।

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