हेमंत सोरेन अपने चाचा के श्राद्धकर्म में होंगे शामिलपुलिस कस्टडी में ही रहना होगाटीम एबीएन, रांची। हेमंत सोरेन को झारखंड हाईकोर्ट से एक और झटका लगा है। हाईकोर्ट ने प्रोविजनल बेल वाली उनकी याचिका को खारिज कर दिया है। हेमंत सोरेन की तरफ से उनके चाचा के निधन पर श्राद्धकर्म में शामिल होने के लिए प्रोविजनल बेल की मांग की गयी थी।मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय की अदालत में हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने हेमंत सोरेन की याचिका को खारिज करते हुए किसी भी तरह का प्रोविजनल बेल देने से इनकार कर दिया है। हालांकि हाईकोर्ट ने कहा है कि हेमंत सोरेन अपने चाचा के श्राद्धकर्म में 6 मई को शामिल हो सकते हैं। लेकिन इस दौरान वह पुलिस कस्टडी में ही रहेंगे और उसी दिन जेल वापस लाया जायेगा। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि श्राद्धकर्म में शामिल होने के क्रम में हेमंत सोरेन न तो मीडिया से बात करेंगे और न ही किसी तरह का राजनीतिक भाषण देंगे। झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता धीरज कुमार ने बताया कि हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज करते हुए औपबंधिक जमानत देने से इनकार किया है। वह 6 मई को अपने चाचा के श्राद्धकर्म में जा सकेंगे लेकिन इस दौरान पुलिस कस्टडी में ही रहेंगे।आपको बता दें कि पिछले शनिवार को रांची में झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन के बड़े भाई राजाराम सोरेन का निधन हो गया। वह 84 वर्ष के थे। निधन के बाद उनके पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव नेमरा ले जाया गया। पार्थिव शरीर को उनके दिवंगत भाई लालू सोरेन के पुत्र दयानंद सोरेन ने मुखाग्नि दी।इस दौरान मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन, मंत्री मिथिलेश ठाकुर, विधायक बसंत सोरेन, रूपी सोरेन और कल्पना सोरेन भी मौजूद थीं। उन्हीं के श्राद्धकर्म में शामिल होने के लिए हेमंत सोरेन की ओर से प्रोविजनल बेल देने का आग्रह किया गया था, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया।
अक्षय तृतीया से पूर्व बाल विवाह के खिलाफ राजस्थान हाई कोर्ट का अहम फैसला सभी बाल विवाह निषेध अफसरों से उनके अधिकार क्षेत्र में हुए बाल विवाहों और इनकी रोकथाम के कदमों के बाबत मांगी रिपोर्ट मामले की की गंभीरता और तात्कालिकता का संज्ञान लेते हुए हाई कोर्ट ने जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस की जनहित याचिका पर फौरी सुनवाई करते हुए जारी किया आदेश एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रदेश में बाल विवाह की मौजूदा स्थिति को चिंताजनक बताते हुए राजस्थान हाई कोर्ट ने तत्काल सुनवाई के बाद अंतरिम आदेश जारी कर राज्य सरकार से कहा है कि वह अक्षय तृतीया के मद्देनजर यह सुनिश्चित करे कि कहीं भी बाल विवाह नहीं होने पाए। साथ ही, आदेश में कहा गया है कि बाल विवाह को रोकने में विफलता पर पंचों-सरपंचों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।हाई कोर्ट का यह फौरी आदेश जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस की जनहित याचिका पर आया है। इन संगठनों ने अपनी याचिका में इस वर्ष 10 मई को अक्षय तृतीया के मौके पर बड़े पैमाने पर होने वाले बाल विवाहों को रोकने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की थी। न्यायमूर्ति शुभा मेहता और पंकज भंडारी की खंडपीठ ने याचियों द्वारा बंद लिफाफे में सौंपी गई अक्षय तृतीया के मौके पर होने वाले 54 बाल विवाहों की सूची पर गौर करने के बाद राज्य सरकार को इन विवाहों पर रोक लगाने के लिए बेहद कड़ी नजर रखने को कहा है। यद्यपि इस सूची में शामिल नामों में कुछ विवाह पहले ही संपन्न हो चुके हैं लेकिन 46 विवाह अभी होने बाकी हैं। खंडपीठ ने कहा कि सभी बाल विवाह निषेध अफसरों से इस बात की रिपोर्ट मंगाई जानी चाहिए कि उनके अधिकार क्षेत्र में कितने बाल विवाह हुए और इनकी रोकथाम के लिए क्या प्रयास किये गये। आदेश में यह भी कहा गया कि राज्य सरकार सुनिश्चित करे कि सूची में शामिल जिन 46 बच्चों के विवाह होने हैं, वे नहीं होने पायें। खंडपीठ ने यद्यपि इस बात का संज्ञान लिया कि राज्य सरकार के प्रयासों से बाल विवाहों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आयी है, फिर भी काफी कुछ किया जाना बाकी है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे (2019-21) के आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में 20-24 आयु वर्ग की 25.4 प्रतिशत लड़कियों का विवाह उनके 18 साल की होने से पहले ही हो गया था जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा 23.3 प्रतिशत है। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा- बाल विवाह वह घृणित अपराध है जो सर्वत्र व्याप्त है और जिसकी हमारे समाज में स्वीकार्यता है। बाल विवाह के मामलों की जानकारी देने के लिए पंचों व सरपंचों की जवाबदेही तय करने का राजस्थान हाई कोर्ट का यह फैसला ऐतिहासिक है। पंच व सरपंच जब बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक होंगे तो इस अपराध के खिलाफ अभियान में उनकी भागीदारी और कार्रवाइयां बच्चों की सुरक्षा के लिए लोगों के नजरिए और बर्ताव में बदलाव का वाहक बनेंगी। बाल विवाह के खात्मे के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदम पूरी दुनिया के लिए एक सबक हैं और राजस्थान हाई कोर्ट का यह फैसला इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस पांच गैरसरकारी संगठनों का एक गठबंधन है जिसके साथ 120 से भी ज्यादा गैरसरकारी संगठन सहयोगी के तौर पर जुड़े हुए हैं जो पूरे देश में बाल विवाह, बाल यौन शोषण और बाल दुर्व्यापार जैसे बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर काम कर रहे हैं। हाई कोर्ट का यह आदेश ऐसे समय आया है जब अक्षय तृतीया के मौके पर बाल विवाह के मामलों में खासी बढ़ोतरी देखने को मिलती है और जिसे रोकने के लिए सरकार के साथ जमीनी स्तर पर काम कर रहे तमाम गैरसरकारी संगठन हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। इससे संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से भी संपर्क कर सकते हैं।
महेंद्र सिंह धोनी के साथ हुए फर्जीवाड़ा मामले में कोर्ट में हुई सुनवाई, 4 मई को दी गयी अगली तारीखएबीएन स्पोर्ट्स डेस्क। महेंद्र सिंह धोनी के साथ हुए फर्जीवाड़े मामले में रांची के सिविल कोर्ट में सुनवाई हुई। न्यायिक दंडाधिकारी राज कुमार पांडेय के कोर्ट में सुनवाई के बाद 4 मई की अगली तारीख दी गयी है।सिविल कोर्ट में सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद न्यायालय की तरफ से अरका स्पोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, सौम्या दास और मिहिर दिवाकर के वकील को यह निर्देश दिया गया कि अगली तारीख को खुद या अपने वकील के माध्यम से अपना पक्ष रखें। पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दोनों पक्षों को सभी दस्तावेज न्यायालय के समक्ष पेश करने के लिए कहा था, जो अब तक नहीं रखा गया है। इसलिए कोर्ट ने दोनों पक्षों को अगली तारीख तक सारे दस्तावेज पेश करने का सख्त आदेश दिया। धोनी की तरफ से यह शिकायत उनके करीबी माने जाने वाले सीमांत लोहानी ने करायी है। धोनी की ओर से यह आरोप लगाया गया है कि मिहिर दिवाकर और सौम्या दास के द्वारा उनसे 15 करोड़ रुपये की फर्जीवाड़ा की गयी है। शिकायत दर्ज होने के बाद 5 जनवरी को कोर्ट में सुनवाई हुई थी, जिसके बाद कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए दोनों के खिलाफ समन जारी कर दिया था।बता दें कि अरका स्पोर्ट्स लिमिटेड नाम की कंपनी बनाकर मिहिर दिवाकर सौम्या दास और महेंद्र सिंह धोनी पूरे देश में क्रिकेट अकादमी खोलना चाहते थे। जिसमें कई तरह की कागजी समझौते किये गये थे। लेकिन क्रिकेट अकादमी खोलने के दौरान मिहिर दिवाकर और सौम्या दास के द्वारा नियमों की धज्जियां उड़ायी गयी। जिसके बाद महेंद्र सिंह धोनी ने करार को तोड़ दिया। लेकिन सौम्या दास और मिहिर दिवाकर ने करार टूटने के बाद भी कई जगहों पर क्रिकेट अकादमी खोलने का काम चालू रखा। जिसको देखते हुए महेंद्र सिंह धोनी ने दोनों को कानूनी नोटिस भेजा और धोनी की ओर से सीमांत लोहानी ने पूरे मामले पर कोर्ट में केस किया। मामले में शिकायतकर्ता की तरफ से धारा 420, धारा 406, धारा 467, धारा 468, धारा 471 और धारा 120 बी के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है।
सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग : हरियाणा में एक और संदिग्ध हिरासत में लिया गयाएबीएन सेंट्रल डेस्क। मुंबई में बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान के घर के बाहर गोलीबारी के मामले में हरियाणा में एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक एक अधिकारी के मुताबिक संदिग्ध गिरफ्तार किये गये दो आरोपियों में से एक से संबंधित था और सभी घटना से पहले और बाद में लगातार संपर्क में थे। अधिकारी ने बताया कि ऐसा माना जा रहा है कि हिरासत में लिया गया संदिग्ध जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के छोटे भाई अनमोल बिश्नोई से निर्देश ले रहा था। अनमोल बिश्नोई ने सोशल मीडिया पोस्ट में इस घटना की जिम्मेदारी ली थी। मंगलवार को पुलिस ने कहा कि जांच में गिरफ्तार दोनों को काम पर रखने में लॉरेंस बिश्नोई गिरोह की भूमिका का संकेत मिला है।14 अप्रैल को सलमान खान के गैलेक्सी अपार्टमेंट घर के बाहर गोलीबारी में शामिल होने के आरोप में दो संदिग्धों, 24 वर्षीय विक्की साहब गुप्ता और 21 वर्षीय सागर जोगेंद्र पाल को मंगलवार तड़के गुजरात के भुज में गिरफ्तार किया गया था। अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तार किये गये आरोपी बिहार से हैं और हिरासत में लिये गये संदिग्धों को अपनी गतिविधियों के बारे में जानकारी देते थे और इंटरनेट का इस्तेमाल कर कॉल किये जाते थे।अधिकारी ने कहा कि अपराध को अंजाम देने के बाद पाल और गुप्ता मुंबई से भुज के लिए रवाना हो गये, जबकि आरोपियों ने सूरत के पास बातचीत के लिए जिस मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे थे उसका सिम कार्ड बदल दिया। पुलिस ने जांच के दौरान कहा, पुलिस को गुमराह करने के लिए आरोपियों ने बार-बार अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया। लेकिन उन्होंने संचार के दौरान उसी नंबर का इस्तेमाल किया।अधिकारी ने कहा कि इसके तुरंत बाद, संदिग्ध का पता लगाया गया और उसे हरियाणा में हिरासत में लिया गया और पूछताछ के लिए मुंबई लाया गया। हालांकि, अभी तक संदिग्ध को गिरफ्तार नहीं किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले पुलिस ने कहा था कि गिरफ्तार आरोपियों पाल और गुप्ता को सलमान खान के घर पर शूटिंग के लिए करीब 1 लाख रुपये दिये गये थे और काम के बाद और पैसे देने का वादा किया गया था।
हेमंत सोरेन की जमानत याचिका पर हुई सुनवाई, पीएमएलए कोर्ट ने 23 अप्रैल की दी अगली तारीख टीम एबीएन, रांची। पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की जमानत याचिका पर पीएमएलए कोर्ट में सुनवाई हुई। मंगलवार को कोर्ट में सुनवाई के दौरान हेमंत सोरेन के वकील ने बेल के लिए दी गई अर्जी के बाद आग्रह किया कि उनके मुवक्किल को जमानत दी जाए।वहीं ईडी के वकील की तरफ से न्यायाधीश के समक्ष यह आग्रह किया गया कि हेमंत सोरेन को जमानत नहीं दिया जाए क्योंकि अभी उन पर लगे आरोपों को लेकर छानबीन जारी है। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद न्यायाधीश ने ईडी को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। पीएमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश राजीव रंजन ने ईडी को निर्देश देते हुए कहा कि जांच एजेंसी को ऐसा क्यों लगता है कि उन्हें अभी बेल नहीं दिया जाए। पीएमएलए कोर्ट की तरफ से 23 अप्रैल को सुनवाई की अगली तारीख रखी गई है। 23 अप्रैल को पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के मामले पर सुनवाई के बाद ये स्पष्ट हो पाएगा की उन्हें बेल दिया जाए या अभी जांच को देखते हुए उन्हें जेल में ही रखना सही होगा। किसी भी एजेंसी की तरफ से यदि किसी को भी गिरफ्तार किया जाता है तो फिर बेल पिटीशन की पहली सुनवाई पर कोर्ट की तरफ से जांच एजेंसी को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया जाता है। इसी को देखते हुए हेमंत सोरेन मामले में भी पीएमएलए कोर्ट के न्यायाधीश ने ईडी की टीम को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद 23 अप्रैल को मामले पर सुनवाई की जाएगी।
रामनवमी पर सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वाले जायेंगे सीधे जेल, गाइडलाइन जारीटीम एबीएन, रांची। अगर कोई रामनवमी के दौरान सोशल मीडिया का फायदा उठाकर सांप्रदायिक तनाव या किसी अन्य तरह की अफवाह फैलाता है तो वह सीधे सलाखों के पीछे जायेगा, इसलिए जरूरी है कि पहले सोशल मीडिया पर पोस्ट की जांच करें और फिर उन पर विश्वास करें। प्रशासन ने इसे लेकर गाइडलाइन जारी की है।जिला स्तरीय मॉनिटरिंग सेलत्योहारों के दौरान कई ऐसे तत्व होते हैं जो समाज में सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने की कोशिश करते हैं ताकि माहौल खराब हो और किसी दूसरे पक्ष को फायदा मिले। रामनवमी त्योहार को देखते हुए पुलिस भी ऐसे तत्वों को बख्शने के मूड में नहीं है।झारखंड पुलिस के प्रवक्ता सह आईजी ऑपरेशन अमोल वेणुकांत होमकर ने बताया कि रामनवमी त्योहार को देखते हुए सबसे ज्यादा फोकस सोशल मीडिया पर रहेगा, इसके लिए सभी जिलों में सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल का गठन किया गया है, मॉनिटरिंग सेल बिल्कुल हाईटेक है। राज्य के विभिन्न जिलों से आने वाली सूचनाएं मुख्यालय स्थित नियंत्रण कक्ष में एकत्र की जायेंगी।उन्होंने बताया कि राज्य के सभी जिलों के एसएसपी, एसपी और डीसी को अपने-अपने सोशल मीडिया सेल द्वारा जारी दिशा-निर्देशों को लोगों के साथ-साथ महावीरी अखाड़ों और अन्य शांति समितियों को साझा करने का निर्देश दिया गया है।हाईटेक है सोशल मीडिया सेलसोशल मीडिया पर नजर रखने के लिए जो मॉनिटरिंग सेल बनाया गया है वह काफी हाईटेक है। उदाहरण के तौर पर अगर कोई किसी अनजान सर्वर से मैसेज वायरल करता है, तो इसकी जानकारी तुरंत मॉनिटरिंग सेल के जरिए साइबर टीम को दे दी जायेगी। सोशल मीडिया के अलग-अलग विंग के लिए अलग-अलग टीमें बनायी गयी हैं। व्हाट्सएप, फेसबुक और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म पर नजर रखी जा रही है।सत्यापन के लिए पुलिस को करें कॉलझारखंड पुलिस के प्रवक्ता आईजी अमोल वेणुकांत होमकर ने बताया कि सोशल मीडिया को लेकर जिलों के डीसी और एसपी को एक दर्जन से अधिक निर्देश जारी किये गये हैं। उनसे शहर के प्रमुख चौराहों पर सोशल मीडिया से संबंधित साइन लगाने और हेल्पलाइन नंबर भी जारी करने के निर्देश दिये गये हैं।क्या बोले आइजीआईजी अमोल होमकर के मुताबिक, समाज में अफवाह फैलाने के लिए कई तरह के मैसेज फैलाये जाते हैं। ऐसे में आम लोगों से अपील की गयी है कि वे तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम या अपने स्थानीय थाने में फोन कर इसकी जानकारी दें, सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों के बारे में पुलिस से बात करें और पुलिस से पूछें कि क्या यह जानकारी सही है। इसी क्षण से सामाजिक तत्वों के खतरनाक मंसूबे विफल हो जायेंगे।गाइडलाइंस भी की गयीं जारीरामनवमी पर सोशल मीडिया के जरिए किसी भी तरह की कोई अफवाह न फैलायी जा सके, इसके लिए सभी जिलों में दिशा-निर्देश भी जारी किये गये हैं। सोशल मीडिया पर भ्रामक खबरें फैलाने वालों की जानकारी देने के लिए जिला स्तर पर फोन नंबर भी जारी किये गये हैं। गाइडलाइंस में आम लोगों से भी कहा गया है कि वे कभी भी कोई भड़काऊ संदेश प्रचारित न करें। अगर उनके मोबाइल पर कोई आपत्तिजनक मैसेज आता है तो वह इसकी सूचना पुलिस को अवश्य दें। गाइडलाइंस में यह भी बताया गया है कि मैसेज को एक जगह से दूसरी जगह भेजने वाला भी उतना ही दोषी है जितना मैसेज बनाने वाला भी, इसलिए इस सबमें सावधानी बरतें।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, जमशेदपुर। जमशेदपुर की जीएसटी इंटेलीजेंस टीम ने 5000 करोड रुपये के जीएसटी घोटाले में शामिल दो जुड़वा भाइयों अमित गुप्ता और सुमित गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है। गुप्ता बंधुओं की गिरफ्तारी कोलकाता से हुई है और उन्हें लेकर आज टीम जमशेदपुर पहुंची।अमित गुप्ता और सुमित गुप्ता की मेडिकल जांच जीएसटी टीम ने एमजीएम अस्पताल में कराया और उसके बाद न्यायालय में प्रस्तुत किया। जीएसटी घोटाले में पहले ही दो लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। गुप्ता बंधु साल्ट लेक कोलकाता में रहते थे और सीबीडीटी के अधीन काम करने वाली जीएसटी इंटेलिजेंस की टीम ने उनको साल्ट लेक स्थित फ्लैट से पकड़ा है।जीएसटी टीम के सूत्रों का कहना है कि यह कल 5000 करोड़ का जीएसटी घोटाला है जिसमें से 3000 करोड़ का घोटाला गुप्ता बंद होने किया है जबकि शुरुआती पूछताछ में करीब 300 करोड़ रुपये के घोटाले की बात इन दोनों जुड़वा भाइयों ने स्वीकार कर ली है।जीएसटी इंटेलिजेंस की टीम के अनुसार दोनों जुड़वा भाई चीन भागने की तैयारी में थे।उनके भागने से पहले ही विभागीय टीम ने उनको पकड़ लिया। इस मामले में पहले ही शिव कुमार देवड़ा नामक व्यापारी को गिरफ्तार किया जा चुका है और उसने पूछताछ के दौरान गुप्ता बंधुओं का नाम लिया था। यह दोनों भाई एक ही अपार्टमेंट में रहते थे और अलग-अलग फ्लोर में ही रहकर अपना सिंडिकेट चलाते थे।
20 प्रतशत से अधिक लंबित वादोें के निपटारा का लक्ष्यएबीएन न्यूज नेटवर्क, लातेहार। झारखंड विधिक सेवा प्रधिकार के निर्देष पर 27 अप्रैल को व्यवहार न्यायालय लातेहार में विशेष लोक आदालत का आयोजन किया जायेगा। इसके लिए प्री लोक आदालत सिटिंग 21 अप्रैल से शुरू किया जायेगा। इस विशेष लोक आदालत में चेक बाउंस और बिजली से संबधित लंबित वादों का निपटारा किया जायेगा।कुल लंबित वादों का 20 प्रतिषत स अधिक वादों का निपटारा का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए लातेहार व्यवहार न्यायालय में तैयारी शुरू कर दी यी है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार सिंह ने न्यायिक पदाधिकारियों की बैठक कर निपटारे योग्य वादों को चिन्हीत करने एवं दोनों पक्षों के लोगों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिये, जिससे कि विशेष लोक आदालत को सफल बनाया जा सके।मेडिएटर, पीएलवी संग सचिव की हुई बैठकविशेष लोक आदालत की सफलता को लेकर जिला विधिक सेवा प्रधिकार परिसर में सचिव स्वाति विजय उपाध्याय के नेतृत्व में मेडिएटर एवं पारा लीगल वोलिएंटर की बैठक की गयी। इसमें लोक आदालत में ज्यादा से ज्यादा वादों का निपटारा कैसे हो इसपर मंथन किया गया। कुल लंबित वादों का 20 प्रतिषत से ज्यादा वादों के निपटारा करने में सबकी भागीदारी सुनिश्चित की गयी एवं विशेष लोक आदालत को सफल बनाने की अपील की गयी।बैठक में अधिवक्ता अनिल कुमार ठाकुर, पंकज कुमार संजय कुमार, लाल अरविंद नाथ शाहदेव, सुनील कुमार, नवीन गुप्ता, बनवारी प्रसाद, वासुदेव पांडेय, देवेंद्र कुमार द्विवेदी, प्रदीप उपाध्याय, नरोत्तम पांडेय, मिथिलेश कुमार, सविता साहू, संतोष रंजन, अरविंद गुप्ता, कुमार अमित, विक्रांत सिंह, धीरेंद्र शुक्ला, प्रमोद कुमार पांडेय, अब्दुल सलाम, रमन कुमार महतो, स्वप्निल कुमार सिंह, कौशल किशोर पांडेय, आभाष कुमार, अशोक कुमार सिंह, रितु रानी, रजनीश भूषण और अमित कुमार गुप्ता, हरिओम पाण्डेय, कौशल पाण्डेय, उज्जवल पाण्डेय, श्याम किशोर पाण्डेय, बिपिन पाण्डेय, बदरू दोजा, सब्दर अली, प्रज्ञा सिंह, मनोज मिश्रा, आर्यन कुमार, आदि मौजूद थे।
चुनाव आयोग ने जारी की गाइडलाइनदेश में लोक सभा चुनाव 19 अप्रैल से सात चरणों में होंगे। 4 जून को चुनाव परिणाम की घोषणा होगीएबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में लोक सभा चुनाव 19 अप्रैल से सात चरणों में होंगे। 4 जून को चुनाव परिणाम की घोषणा होगी। अगर आप एक वास्तविक मतदाता है और किसी कारण से आपके पास वोटर आईडी कार्ड नहीं है तो भी आप वोट डाल सकते हैं। पिछले महीने जारी एक आदेश में, चुनाव आयोग ने कहा कि जो मतदाता अपना वोटर आईडी कार्ड प्रस्तुत करने में सक्षम नहीं हैं, उन्हें अपनी पहचान स्थापित करने के लिए वैकल्पिक फोटो पहचान दस्तावेजों में से एक प्रस्तुत करना होगा।दिखाना होगा इनमें से कोई एक डॉक्यूमेंटअगर आपके पास वोटर आईडी कार्ड नहीं है तो अपना वोट डालने के लिए चुनाव अधिकारी को आधार कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, बैंक या डाकघर द्वारा जारी फोटोयुक्त पासबुक, श्रम मंत्रालय द्वारा जारी स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के तहत भारत के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी स्मार्ट कार्ड में से कोई एक दिखाना होगा।इसके अलावा भारतीय पासपोर्ट, फोटो के साथ पेंशन दस्तावेज, केंद्र या राज्य सरकारों या कर्मचारियों को जारी किये गये फोटो के साथ सेवा आई-कार्ड, सांसदों, विधायकों और जारी किये गये आधिकारिक पहचान पत्र, और सामाजिक न्याय मंत्रालय द्वारा जारी अद्वितीय विकलांगता आई-कार्ड भी स्वीकार किये जायेंगे।स्पेलिंग की गलतियों पर ध्यान न दें अधिकारी : चुनाव आयोगकोई भी वास्तविक मतदाता वोट देने के अधिकार से वंचित न रहे, यह सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग ने राज्य चुनाव अधिकारियों से कहा है कि वे लिपिकीय या वर्तनी संबंधी त्रुटियों को नजरअंदाज करें, बशर्ते मतदाता की पहचान वोटर आई-कार्ड के माध्यम से स्थापित की जा सके।इसमें यह भी कहा गया है कि किसी अन्य विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी द्वारा जारी वोटर आईडी कार्ड को पहचान के लिए स्वीकार किया जायेगा, बशर्ते कि वोटर का नाम उस मतदान केंद्र की मतदाता सूची में हो जहां वह आया है।
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