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अब 19 तक जेल में ही रहेंगे केजरीवाल
Published / 2024-06-05 18:38:31
अब 19 तक जेल में ही रहेंगे केजरीवाल

केजरीवाल की अंतरिम जमानत याचिका खारिज, न्यायिक हिरासत 19 जून तक बढ़ीएबीएन सेंट्रल डेस्क। दिल्ली की एक विशेष अदालत ने कथित आबकारी नीति घोटाले से संबंधित धनशोधन के एक मामले के आरोपी मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की मेडिकल अधार पर सात दिन की अंतरिम जमानत याचिका ठुकराते हुए विशेष अदालत ने बुधवार को उनकी न्यायिक हिरासत 19 जून तक बढ़ा दी।राउज एवेन्यू स्थित प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) मामलों से संबंधित कावेरी बावेजा की विशेष अदालत ने यह आदेश पारित किया। विशेष अदालत ने केजरीवाल के स्वास्थ्य की चिंताओं से संबंधित उनके अधिवक्ता के सवालों पर कहा कि मेडिकल जांच से संबंधित कुछ निर्देश दिये गये हैं। जरूरत के मुताबिक याचिकाकर्ता की अर्जी पर आगे भी विचार किया जायेगा।

जयराम रमेश को आज ही जवाब देने की सख्ती
Published / 2024-06-03 21:20:32
जयराम रमेश को आज ही जवाब देने की सख्ती

आज ही जवाब दें... जयराम रमेश को चुनाव आयोग से लगा झटका, डीएम को धमकाने के मामले में समय देने से इनकारचुनाव आयोग ने सोमवार को कांग्रेस नेता जयराम रमेश को उनके इस दावे की पुष्टि के लिए अतिरिक्त समय देने से इनकार कर दिया कि लोकसभा चुनाव के लिए 4 जून की मतगणना से पहले 150 जिलाधिकारियों और कलेक्टरों को प्रभावित करने का प्रयास किया गया थाएबीएन सेंट्रल डेस्क। चुनाव आयोग ने सोमवार को कांग्रेस नेता जयराम रमेश से कहा कि वे वोट काउंटिंग से पहले गृह मंत्री के 150 कलेक्टर्स को फोन करने के दावे पर आज ही जवाब दें और शाम तक सबूत पेश करें। रमेश को चुनाव आयोग ने रविवार शाम तक उन आरोपों का तथ्यात्मक विवरण प्रस्तुत करने के लिए कहा था, जो उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लगाये थे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने सोमवार को आयोग को पत्र लिखकर अपना जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का और समय मांगा।रमेश को लिखे पत्र में चुनाव आयोग ने कहा कि आयोग समय बढ़ाने के आपके अनुरोध को सिरे से खारिज करता है और आपको निर्देश देता है कि आप तथ्यात्मक आरोपों के साथ आज यानी 3 जून शाम 7 बजे तक जवाब दाखिल करें। ऐसा करने में विफल रहने पर यह मान लिया जाएगा कि आपके पास इस मामले में कहने के लिए कुछ भी ठोस नहीं है और आयोग उचित कार्रवाई के लिए आगे बढ़ेगा। चुनाव आयोग ने कहा कि उनके इस आरोप का मंगलवार को होने वाली मतगणना प्रक्रिया की शुचिता पर सीधा असर पड़ता है। रमेश ने क्या दावा किया? रमेश ने दावा किया था कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जिलाधिकारियों या कलेक्टरों को फोन कर रहे हैं और उन्हें खुलेआम डराने-धमकाने में लगे हैं। चुनाव के दौरान जिला मजिस्ट्रेट या कलेक्टर अपने-अपने जिलों के निर्वाचन अधिकारी होते हैं। रमेश ने दावा किया कि शाह पहले ही 150 जिला मजिस्ट्रेट या कलेक्टरों से बात कर चुके हैं। आयोग ने कहा कि किसी भी जिलाधिकारी ने इस तरह के किसी अनुचित प्रभाव की सूचना नहीं दी है, जैसा कि उन्होंने आरोप लगाया है।

मध्य प्रदेश में मुस्लिम पुरुष और हिंदू महिला की शादी गैर-कानूनी : हाई कोर्ट
Published / 2024-06-01 21:09:29
मध्य प्रदेश में मुस्लिम पुरुष और हिंदू महिला की शादी गैर-कानूनी : हाई कोर्ट

एबीएन सेंट्रल डेस्क। 27 मई को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि एक मुस्लिम पुरुष और एक हिंदू महिला की आपस में शादी नहीं हो सकती है, ना तो इस्लामिक कानूनों के मुताबिक और न ही स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत हाई कोर्ट ने कहा कि इस्लामिक कानून किसी मुस्लिम पुरुष की मूर्ति पूजा या आग की पूजा करने वाली हिंदू महिला से शादी की अनुमति नहीं देता है और स्पेशल मैरिज एक्ट से भी ऐसी शादी को वैधता नहीं मिल सकती।  हालांकि विश्लेषक, हाई कोर्ट के इस फैसले की आलोचना कर रहे हैं। विश्लेषकों का कहना है कि यह फैसला स्पेशल मैरिज एक्ट के लागू करने के उद्देश्यों के खिलाफ है। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा है कि मुस्लिम पुरुष और हिंदू महिला की शादी, जिसमें दोनों शादी के बाद अपने-अपने धर्म को मानते हों, वह शादी भी वैध नहीं हो सकती। मध्य प्रदेश के मुस्लिम पुरुष और हिंदू महिला के जोड़े ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इन दोनों ने आपस में तय किया था कि शादी के बाद कोई अपना धर्म नहीं बदलेगा और अपने-अपने धर्मों को मानते रहेंगे। इस जोड़े ने कहा है कि उन्होंने पहले स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी के लिए मैरिज आफिसर के पास आवेदन दिया था, लेकिन दोनों के परिवार वालों की आपत्तियों के चलते शादी रजिस्टर्ड नहीं हो सकी। दोनों ने अदालत से सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की थी, ताकि वे अपनी शादी का पंजीयन करा सकें। स्पेशल मैरिज एक्ट 1954 में पारित कानून है जिसके तहत अंतर-धार्मिक वैवाहिक जोड़े अपनी शादी का पंजीयन करा सकते हैं। इस कानून के तहत विवाह करने को इच्छुक जोड़े मैरिज आफिसर के पास इस संबंध में आवेदन देते हैं। इस आवेदन के बाद मैरिज आफिसर 30 दिनों के लिए एक नोटिस जारी करते हैं। इस अवधि में, कोई भी व्यक्ति यह कहते हुए आपत्ति दर्ज करा सकता है कि यह जोड़ा, विवाह पंजीकृत कराने के लिए आवश्यक शर्तों को पूरा नहीं करते हैं। ऐसी स्थिति में विवाह का पंजीयन नहीं होता है। इस मामले में लड़की के परिवार ने आरोप लगाया कि वह परिवार के गहने लेकर घर से चली गयी थी। लड़की के परिवार वालों ने अपनी आपत्ति में यह भी कहा है कि अगर अंतर-धार्मिक विवाह होने दिया गया तो पूरे परिवार को सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ेगा। कोर्ट ने सबसे पहले इस बात पर विचार किया कि ये शादी वैध होगी या नहीं। इसके बाद कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत ऐसी शादी वैध नहीं है। इसके बाद अदालत ने यह भी कहा कि स्पेशल मैरिज एक्ट भी उस शादी को वैध नहीं करेगा जो पर्सनल लॉ के तहत वैध नहीं है। कोर्ट ने ऐसा कहने का आधार 2019 के सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को बनाया जिसमें कहा गया था कि मुस्लिम पुरुष का उस गैर-मुस्लिम महिला से विवाह वैध नहीं होगा जो अग्नि या मूर्तियों की पूजा करती हैं। हालांकि, एक मुस्लिम पुरुष यहूदी या ईसाई महिला से शादी कर सकता है। ऐसी शादी को वैध माना जा सकता है, बशर्ते महिला इन तीनों धर्मों में से किसी एक को अपना ले। हालांकि इस जोड़े की दलील थी कि स्पेशल मैरिज एक्ट के सामने पर्सनल लॉ की अहमियत नहीं होनी चाहिए और उनकी शादी को रजिस्टर करने की अनुमति दी जानी चाहिए। लेकिन मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इस पर सहमति नहीं जताई। हाई कोर्ट ने कहा कि अगर शादी पर पाबंदी है, तो यह कानून उसे वैध नहीं ठहरा सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने पुलिस सुरक्षा संबंधित उनकी याचिका को खारिज कर दिया। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले से पारिवारिक मामलों के कई कानून विशेषज्ञ असहमत नजर आते हैं। हाई कोर्ट ने वास्तव में यह कहा है कि उन मुस्लिम पुरुष और हिंदू महिला के बीच शादी, जो अपने-अपने धर्म को मानते रहना चाहते हैं, स्पेशल मैरिज एक्ट या मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत वैध नहीं हो सकती। इन विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले में स्पेशल मैरिज एक्ट लागू करने वाले उद्देश्यों को नकार दिया गया। स्पेशल मैरिज एक्ट के उद्देश्यों में कहा गया है कि यह कानून सभी भारतीयों के विवाह के लिए बनाया गया है, चाहे विवाह करने वाला कोई भी पक्ष या किसी भी धर्म को क्यों न मानता हो। इसमें कहा गया है कि विवाह करने वाले जब तक स्पेशल मैरिज एक्ट के लिए जरूरी शर्तों का पालन करते हैं तब तक वे, शादी के लिए कोई भी रीति रिवाज अपना सकते हैं। वकील और परिवार संबंधित कानूनों की एक्सपर्ट मालविका राजकोटिया ने इस फैसले पर कहा कि यह कानून के हिसाब से सही फैसला नहीं है। इसे सुप्रीम कोर्ट में पलट दिया जाएगा। इस फैसले में स्पेशल मैरिज एक्ट के मूल भाव को शामिल नहीं किया गया है, जिसका उद्देश्य अंतर-धार्मिक विवाहों को सुविधाजनक बनाना था। महिला अधिकार संबंधी मामलों की वकील वीना गौड़ा ने कहा- कोर्ट के एक अवलोकन के रूप में भी यह बेहद भ्रामक है। मेरी तो यही इच्छा है कि इस्लामिक कानून पर ध्यान केंद्रित करते हुए न्यायाधीश ने स्पेशल मैरिज एक्ट (जो अंतरधार्मिक विवाह को सुविधाजनक बनाता है) के उद्देश्य और कारणों पर भी विचार किया होता। बेंगलुरु स्थित नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में पारिवार संबंधी कानून की प्रोफे़सर सरसु एस्तेर थॉमस भी इस नजरिए से सहमत दिखती हैं। उन्होंने कहा, यह फैसला बिल्कुल भी सही नहीं है। फैसले में स्पेशल मैरिज एक्ट का बिल्कुल भी ध्यान नहीं रखा गया है। इसमें इस्लामिक कानून का ध्यान रखा गया है। जबकि स्पेशल मैरिज एक्ट विभिन्न धर्मों के लोगों को विवाह करने की अनुमति देता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस फैसले में गलत तरीके से कहा गया है कि पर्सनल लॉ के तहत निषिद्ध विवाह स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत नहीं किये जा सकते। हालांकि, स्पेशल मैरिज एक्ट में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इस कानून के तहत कौन से विवाह नहीं हो सकते, जैसे कि एक दूसरे के रक्त संबंधी रिश्तेदारों के विवाह नहीं हो सकते हैं, या फिर आयु संबंधी पात्रता नहीं रखने वालों के विवाह इस कानून के तहत नहीं हो सकते। क्या उच्च न्यायालय के इस फैसले का असर अंतर-धार्मिक जोड़ों के बीच विवाह पर पड़ेगा? विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा नहीं होना चाहिए। हालांकि, उनका मानना है कि इससे अंतर-धार्मिक विवाह को लेकर उत्साह कम होता है। वीना गौड़ा ने कहा, यह पुलिस सुरक्षा की मांग करने वाली एक रिट याचिका में न्यायालय का अवलोकन मात्र है। इसलिए यह कोई बाध्यकारी फैसला नहीं है। न्यायालय विवाह की वैधता पर विचार नहीं कर रहा था। वहीं मालविका राजकोटिया ने कहा, विवाह रोकने का कोई निर्देश नहीं है। अब हमें देखना होगा कि क्या रजिस्ट्रार इस फैसले के आधार पर क्या करते हैं? रजिस्ट्रार अभी भी अंतर-धार्मिक विवाह को पंजीकृत कर सकते हैं। विवाह की वैधता को न्यायालय बाद में तय कर सकता है। प्रोफेसर सरसु एस्तेर थॉमस ने कहा कि अगर इस फैसले को लागू किया गया तो, स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी करने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए इसका बहुत ही बुरा प्रभाव हो सकता है क्योंकि यह फैसला कह रहा है कि ये वैध विवाह नहीं है। यह वैध बच्चों को अवैध मान सकता है क्योंकि उनके माता-पिता की शादी वैध नहीं होगी। और यह सिर्फ इस्लामिक कानून पर लागू नहीं होगा।

मंत्री आलमगीर आलम भेजे गये जेल
Published / 2024-05-30 21:20:27
मंत्री आलमगीर आलम भेजे गये जेल

मंत्री आलमगीर आलम की रिमांड अवधि समाप्त, कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेजा जेलटीम एबीएन, रांची। टेंडर कमीशन घोटाला मामले में मंत्री आलमगीर आलम की 14 दिनों की रिमांड अवधि गुरुवार को समाप्त हो गयी। 14 दिनों की रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद मंत्री आलमगीर आलम को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें सीधे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। आलमगीर आलम को गिरफ्तार करने के बाद प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने पहले 6 दिनों की रिमांड ली, छह दिनों की रिमांड पर पूछताछ के बाद फिर पांच दिनों की रिमांड अवधि ली गई। 11 दिनों की रिमांड अवधि पूरी होने के बाद ईडी की टीम ने एक बार फिर तीन दिनों की रिमांड ली। तीन दिनों की रिमांड अवधि भी गुरुवार को समाप्त हो गयी। ऐसे में 14 दिनों की रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद ईडी की टीम के पास आलमगीर आलम से पूछताछ के लिए समय मांगने का कोई विकल्प नहीं बचा। क्योंकि नियमानुसार ईडी किसी को भी अधिकतम 14 दिनों तक रिमांड पर रख सकती है। आलमगीर आलम का पक्ष रख रहे उनके वकील किसलय प्रसाद ने बताया कि 14 दिनों की रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का अनुरोध कोर्ट से किया गया। जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। उन्होंने बताया कि उन्होंने कोर्ट से मांग की है कि मंत्री आलमगीर आलम शारीरिक रूप से बीमार हैं। 74 वर्ष की उम्र होने के कारण उन्हें कई तरह की जटिलताओं का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए जेल में प्रोटोकॉल के तहत जो भी सुविधाएं हैं, वो सारी सुविधाएं उन्हें मुहैया करायी जाये। उन्होंने जेल के अंदर मंत्री आलमगीर आलम को मेडिकल सुविधा मुहैया कराने का अनुरोध किया। जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया।

7 तरह की पेंशन देता है ईपीएफओ, ऐसे उठा सकते हैं लाभ
Published / 2024-05-28 20:55:10
7 तरह की पेंशन देता है ईपीएफओ, ऐसे उठा सकते हैं लाभ

एबीएन सेंट्रल डेस्क। किसी भी कंपनी या किसी सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की ओर से पेंशन स्कीम चलाई जाती है। ईपीएफओ अपने ग्राहकों को 7 प्रकार की पेंशन मुहैया कराती है। पेंशन क्लेम करने के लिए अलग-अलग नियम और शर्तें हैं। इस पेंशन योजना को ईपीएफओ, ईपीएस- 1995 के नाम से चलाता है। जिसके अंतर्गत ईपीएफओ अपने कर्मचारियों को पेंशन के अलावा भी कई और लाभ प्रदान कराता है।कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की इस योजना का लाभ तभी उठाया जा सकता है, जब कर्मचारी ने कम से कम 10 साल तक नौकरी पूरी की हो। इस योजना को 1995 में लॉन्च किया गया था। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के द्वारा दिए जाने वाले पेंशन कुछ इस प्रकार है। आइये जानते हैंकौन सी हैं ये सात योजनाएं :  सुपर एनुवेशन या वृद्धावस्था पेंशन ईपीएफ इस पेंशन योजना के तहत उन कर्मचारी को लाभ देता है, जिन्होंने 10 साल पूरे कर लिये हैं। इसके अलावा वे 58 साल के हो गये हों। पूर्व पेंशन अगर आपकी उम्र 50 साल से ज्यादा है, साथ ही अगर अपने अपनी सेवा के 10 साल पूरे कर लिये हैं उसके बाद नौकरी छोड़ दिया है और किसी ऐसे संस्थान में काम नहीं करते, जहां ईपीएफ अधिनियम मान्य नहीं है। ऐसी स्थिति में आप पूर्व पेंशन का लाभ उठा सकते हैं। दिव्यांग पेंशन दिव्यांग होने के कारण नौकरी छोड़ने पर दिव्यांगो को पेंशन दी जा सकती है। इस पेंशन को पाने के लिए न्यूनतम उम्र या 10 वर्ष की सेवा की कोई आवश्यकता नहीं है। विधवा या बाल पेंशन कर्मचारी की मृत्यु के मामले में, कर्मचारी की पत्नी और 25 साल से कम उम्र के दो बच्चे को एक साथ पेंशन मिलता है। अगर कोई बच्चा विकलांग हो जाता है तो उसे जीवन भर पेंशन मिलती रहेगी। अनाथ पेंशन किसी कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है और पत्नी भी नहीं है तो 25 साल से कम उम्र के दो बच्चों से अधिक को एक ही समय में पेंशन दी जाती है। सबसे बड़े बच्चे के 25 साल का हो जाने पर पेंशन बंद हो जायेगी। नामांकित पेंशन कर्मचारी की मृत्यु पर नामांकित व्यक्ति पेंशन ले सकता है। यह तभी कर सकते हैं जब उसके परिवार में पत्नी-बच्चे जीवित नहीं हो। आश्रित माता-पिता की पेंशन अगर ईपीएफओ कर्मचारी शादी शुदा हो और उसकी मौत हो जाती है। सदस्य ने किसी को नामांकित भी नहीं किया है तो उसके पिता या माता को पेंशन दी जाती है।

आचार संहिता : भाजपा, इरफान अंसारी और सेल को कड़ी चेतावनी
Published / 2024-05-24 21:20:25
आचार संहिता : भाजपा, इरफान अंसारी और सेल को कड़ी चेतावनी

निर्वाचन आयोग ने आचार संहिता उल्लंघन मामले में झारखंड भाजपा, विधायक इरफान अंसारी व सेल को दिये ये निर्देश टीम एबीएन, रांची। निर्वाचन आयोग ने आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में झारखंड भाजपा, कांग्रेस विधायक इरफान अंसारी और बोकारो की स्टील अथॉरिटी आफ इंडिया (सेल) को चेतावनी दी है और नियमों का अक्षरश: अनुपालन करने का निर्देश दिया है। इधर, झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार के निर्देश के बाद बोकारो स्टील प्लांट प्रबंधन ने अपने आदेश को पुनरीक्षित करते हुए 25 मई को अपने कर्मियों को सवैतनिक अवकाश देने की घोषणा की है। इसके साथ ही जो कर्मी शिफ्ट में मतदान करने जाएंगे, उनको दो महीने के अंदर एक दिन का अवकाश भी मिलेगा। भाजपा पर झारखंड में चौथे और पांचवें चरण के मतदान के दौरान मतदान केंद्रों पर मानक मतदाता पर्ची की जगह अबकी बार 400 पार नारा के साथ फोटो, चुनाव चिह्न आदि के साथ मतदाता पर्ची वितरण करने का आरोप है। इसे लेकर एफआइआर भी दर्ज है। झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार द्वारा भाजपा के प्रदेश संयोजक (विधि प्रकोष्ठ) सुधीर श्रीवास्तव को पत्र के माध्यम से सूचित किया गया है कि भारत निर्वाचन आयोग के दिशा निर्देश के तहत वोटरों को अनधिकृत पहचान पत्र सादे कागज पर देना है और उस पर किसी दल विशेष का चिह्न, प्रत्याशी का नाम और दल का नाम नहीं होना चाहिए। उन्होंने इस दिशा निर्देश को पार्टी के सभी पदाधिकारियों, कार्यकतार्ओं को अवगत कराते हुए उसका अनुपालन सुनिश्चित कराने को कहा गया है। लोकसभा आम चुनाव 2024 के लिए झारखंड के लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में निर्धारित मतदान की तिथि को निगोशिएबुल इनस्ट्रूमेंट्स एक्ट 1881 की धारा के तहत सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है।

पांच दिन और ईडी के शिकंजे में मंत्री आलमगीर
Published / 2024-05-22 19:17:02
पांच दिन और ईडी के शिकंजे में मंत्री आलमगीर

मंत्री आलमगीर आलम की बढ़ी मुश्किलें, पीएमएलए कोर्ट ने बढ़ायी 5 दिनों की रिमांड अवधि टीम एबीएन, रांची। आज ग्रामीण विकास एवं संसदीय कार्य मंत्री आलमगीर आलम को पीएमएलए कोर्ट में पेश किया गया जहां कोर्ट ने मंत्री आलमगीर आलम की रिमांड अवधि 5 दिन के लिए बढ़ा दी गयी है। बता दें कि 6 दिनों की रिमांड अवधि खत्म होने के बाद मंत्री आलमगीर आलम को पेश किया गया था।ईडी की ओर से 8 दिनों की रिमांड के लिए कोर्ट से आग्रह किया गया था, लेकिन कोर्ट ने 5 दिन की रिमांड अवधि बढ़ाई है। अब टेंडर घोटाला से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी मंत्री आलमगीर आलम से 5 दिनों तक ईडी पूछताछ करेगी। गौरतलब है कि ईडी ने मंत्री आलमगीर आलम के पीएस संजीव लाल और उसके नौकर जहांगीर आलम को 7 मई को गिरफ्तार किया था। छापेमारी के दौरान जहांगीर के फ्लैट से ग्रामीण विकास विभाग के कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, लेटर हेड और बड़ी मात्रा में कैश मिले थे। जहांगीर ने माना था कि वह संजीव के निर्देश पर ही फ्लैट में दस्तावेज और कैश रखता था। संजीव लाल उस फ्लैट का इस्तेमाल कैश और दस्तावेज रखने के लिए करता था। आलमगीर आलम के हिस्से में हो कमीशन की राशि आती थी, संजीव उसे रखने का इस्तेमाल करता था। मंत्री आलमगीर आलम के पीए के नौकर के घर से करोड़ रुपए बरामद होने के बाद आलमगीर आलम को ईडी ने पूछताछ के लिए बुलाया था। लगभग 10 घंटे पूछताछ चली, जिसके बाद उन्हें छोड़ दिया गया। ईडी ने आलमगीर आलम को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया था जिसके बाद देर शाम ईडी ने मंत्री आलमगीर आलम को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दूसरे दिन लगभग 6 घंटे तक उनसे सवाल-जवाब किये गये।

झारखंड : चतरा, कोडरमा और हजारीबाग में थम गया चुनाव प्रचार
Published / 2024-05-18 18:01:01
झारखंड : चतरा, कोडरमा और हजारीबाग में थम गया चुनाव प्रचार

झारखंड में दूसरे चरण की 3 सीटों पर आज थम गया प्रचार, चुनाव मैदान में हैं कुल 54 प्रत्याशीटीम एबीएन, रांची। झारखंड में लोकसभा चुनाव का दूसरा चरण (देश में पांचवां चरण) 20 मई को होगा। 3 सीटों में राज्य में चुनाव होंगे। इस चरण की 3 सीटों पर चतरा, कोडरमा और हजारीबाग में 20 मई को सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान होगा। जिसे लेकर चुनावी शोर थम गया है। इतने प्रत्याशी हैं मैदान में बीते शुक्रवार को इन सीटों पर दलों और प्रत्याशियों का चुनाव प्रचार चरम पर था। वहीं, शनिवार को शाम 5 बजे चुनाव प्रचार थम गया। इसलिए विभिन्न दल और प्रत्याशी शनिवार को भी अपना पूरा जोर लगाये। शाम 5 बजे से उनका डोर टू डोर जनसंपर्क अभियान शुरू हुआ। तीनों सीटों पर कुल 54 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं, जिनमें 2 महिलाएं तथा 23 निर्दलीय हैं। चतरा में 22, हजारीबाग में 17 तथा कोडरमा में 15 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। इनकी प्रतिष्ठा लगी दांव पर चतरा सीट से इस बार भाजपा ने कालीचरण सिंह को प्रत्याशी बनाया है। वहीं इंडिया गठबंधन की तरफ से कांग्रेस ने केएन त्रिपाठी को टिकट दिया है। कोडरमा सीट से इस बार भी भाजपा ने अन्नपूर्णा देवी को मैदान में उतारा है। वहीं इंडिया गठबंधन की ओर से भाकपा माले ने बगोदर विधायक विनोद सिंह को प्रत्याशी बनाया है। हजारीबाग में भाजपा से हजारीबाग सदर विधायक मनीष जायसवाल को मैदान में उतारा है। जबकि इंडिया गठबंधन ने इस सीट पर मांडू के विधायक जेपी भाई पटेल को टिकट दिया है।

हेमन्त की जमानत पर अब सुनवाई 21 मई को संभव
Published / 2024-05-17 19:35:49
हेमन्त की जमानत पर अब सुनवाई 21 मई को संभव

हेमंत सोरेन को सुप्रीम कोर्ट से आज भी नहीं मिली राहतजमानत पर अब 21 मई को होगी सुनवाईटीम एबीएन, रांची। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन को सुप्रीम कोर्ट से शुक्रवार (17 मई) को भी कोई राहत नहीं मिली। हेमंत सोरेन की जमानत याचिका पर अब 21 मई को सुनवाई होगी। लोकसभा चुनाव के लिए हेमंत सोरेन ने सुप्रीम कोर्ट से जमानत मांगी है। उनकी जमानत पर इसके पहले 13 मई को सुनवाई हुई थी। उस दिन जस्टिस संजीव खन्ना और दीपांकर दत्ता की पीठ ने उनकी याचिका पर सुनवाई की थी। संजीव खन्ना ने सुनवाई की तारीख 20 मई तय की थी, लेकिन हेमंत सोरेन के वकील कपिल सिब्बल के आग्रह पर 17 मई की तारीख मुकर्रर की थी। 17 मई को सुनवाई शुरू हुई, तो कपिल सिब्बल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को मिली जमानत के आधार पर प्रचार करने के लिए रिहाई देने की मांग की थी। हेमंत सोरेन के वकील की दलीलों का प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के वकील ने विरोध किया। साथ ही कहा कि जवाब दाखिल करने के लिए उसे समय की जरूरत है। इसके बाद जस्टिस खन्ना ने अगली सुनवाई की तारीख 21 मई तय कर दी।

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