टीम एबीएन, रांची। सोनाहातु थाना क्षेत्र अंतर्गत लान्दुपडीह गांव में डायन कहकर पत्थर से कुचल कर जानलेवा हमला करने वाली महिला करूणा देवी पति फणिभूषण महतो की अग्रिम जमानत याचिका आज न्यायायुक्त दिवाकर पांडेय की अदालत ने खारिज कर दी। उल्लेखनीय है कि पिछले 27 मई को लान्दुपडीह गांव की एक विधवा वृद्ध महिला करुणा देवी पति चित्तरंजन महतो को घर के पीछे गोबर लीपने के दौरान गांव की ही करूणा देवी पति फणिभूषण महतो ने गाली गलौज करते हुए पत्थर से सिर और चेहरा में कुचल कर बुरी तरह से घायल कर दिया था। इस संबंध में वृद्ध महिला के पुत्र बिपिन बिहारी महतो ने सोनाहातु थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी थी। रांची सिविल कोर्ट के अधिवक्ता मृत्युंजय प्रसाद ने आरोपी महिला की अग्रिम जमानत का पुरजोर विरोध किया।
रांची के पूर्व उपायुक्त छवि रंजन सहित सात की न्यायिक हिरासत अवधि बढ़ायी गयीटीम एबीएन, रांची। चेशायर होम रोड की एक एकड़ जमीन की बिक्री से जुड़े मनी लाउंड्रिंग मामले में आरोपित रांची के पूर्व उपायुक्त छवि रंजन सहित सात की न्यायिक हिरासत अवधि पीएमएलए कोर्ट ने दो सप्ताह के लिए बढ़ा दी है। इससे पूर्व जेल में बंद आरोपितों को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से शुक्रवार को पेश किया गया। अदालत ने अगली पेशी की तिथि 19 जुलाई निर्धारित की है। वर्तमान में यह मामला आरोप गठन के बिंदु पर सुनवाई पर लंबित है। आरोपितों को पुलिस पेपर सौंप दिया गया है। मामले में रांची के पूर्व उपायुक्त छवि रंजन, प्रेम प्रकाश, भरत प्रसाद, राजेश राय, इम्तियाज अहमद, अफसर अली और मो सद्दाम न्यायिक हिरासत में है। जबकि कारोबारी विष्णु अग्रवाल को हाई कोर्ट से जमानत प्राप्त है। वहीं एक आरोपित पुनीत भार्गव फरार चल रहा है।
देश में लागू हुए 3 नये अधिनियम कानून, झारखंड के सभी राज्यों में नई व्यवस्था के तहत की जा रही है एफआइआरटीम एबीएन, रांची। 1 जुलाई से पूरे देश में 3 नये अधिनियम कानून लागू हो गये हैं। इसे लेकर झारखंड पुलिस ने कार्य प्रारंभ कर दिया है। सभी राज्यों में नयी व्यवस्था के तहत प्राथमिकी दर्ज की जा रही है। गिरिडीह के एसपी दीपक ने बताया कि 3 नए अधिनियम के आधार पर अब परिवर्तित धाराओं में कांड दर्ज किये जायेंगे। इसमें पूरे सिस्टम को पूरी न्यायिक प्रणाली को और पूरे कानून को पारदर्शी बनाने का हर संभव प्रयास किया गया है। उन्होंने बताया कि अब घटना कहीं भी हो, व्यक्ति कोई भी हो, प्राथमिकी किसी भी थाना में जाकर दर्ज करवायी जा सकती है। उस प्राथमिकी की, प्राथमिकी के बाद आगे की कार्रवाई की जानकारी आवेदक को समय- समय पर मिलती जायेगी। एसपी दीपक ने बताया कि यह बहुत बड़ा क्रांतिकारी कदम है। इस व्यवस्था में पारदर्शिता रहेगी और लोगों का भरोसा कानून व्यवस्था पर बढ़ेगा। एसपी ने बताया कि इन नये कानून अपराध नियंत्रण और विधि व्यवस्था संधारण में पुलिस को काफी सहयोग मिलेगा। आर्थिक अपराध, आतंकवाद, महिला हिंसा समेत कई मामले में नए कानून का समावेश, धाराओं को समावेश किया गया है। उन्होंने बताया कि महिला हिंसा के मामले में कठोर सजा का समावेश हुआ है।
भारत निर्वाचन आयोग ने 20 अगस्त को अद्यतन मतदाता सूची के प्रकाशन की तिथि की निर्धारित मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण का कार्य ससमय दक्षता से पूर्ण करें पदाधिकारी टीम एबीएन, रांची। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार ने भारत निर्वाचन आयोग की ओर से मतदाता सूची के प्रकाशन को लेकर प्राप्त निर्देशों के आलोक में सभी जिलों के जिला निर्वाचन पदाधिकारियों एवं उप निर्वाचन पदाधिकारियों के साथ निर्वाचन सदन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक की। उन्होंने सभी जिलों में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम का कार्य पूरी दक्षता के साथ ससमय सम्पन्न कराने के निर्देश सभी संबंधित पदाधिकारियों को दिये। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा 25 जून से मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम का कार्य प्रारंभ करने के निर्देश प्राप्त हैं। इस दौरान सभी बीएलओ को मतदाताओं के घर-घर जाकर मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्य करना है। इस दौरान 1 जुलाई को अर्हता तिथि मानते हुए 18 वर्ष पूरे करने वाले नए मतदाताओं को मतदाता सूची से जोड़ने का कार्य करना है साथ ही शिफ्टेड, डुप्लीकेट और मृत मतदाताओं का सत्यापन करते हुए मतदाता सूची से उनका विलोपन नियमानुसार सुनिश्चित करना है। इस दौरान उन्होंने कहा कि मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम के दौरान सभी बीएलओ को रंगीन मतदाता सूची दी गयी है, उस सूची से मिलान करते हुए पुराने लेमिनेटेड कार्ड को बदलने का कार्य किया जाना है, इस दौरान इस बात का भी ध्यान रखा जाना है कि नए सूची में यदि किसी का फोटो साफ नहीं दिख रहा तो वैसे कार्ड को भी बदलना है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि भारत निर्वाचन आयोग के निदेर्शानुसार 1 जुलाई तक उक्त कार्य के साथ साथ 1500 से अधिक मतदाता संख्या वाले मतदान केंद्रों की सूची समर्पित करें ताकि आवश्यकतानुसार नये मतदान केंद्रों की जरूरत का निर्णय ससमय किया जा सके। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्र में 500 से अधिक मतदाता वाले हॉउसिंग सोसाईटीज में सोसाइटी के अंदर ही मतदान केंद्र बनाने का निर्देश पहले ही जारी है, इस बाबत सभी संबंधित सोसाईटी एवं उस हेतु चयनित मतदान केंद्र की सूची भी ससमय उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने सभी मतदाताओं से भी अपील की कि मतदाता पुनरीक्षण कार्यक्रम के दौरान जिन मतदाताओं का नाम मतदाता सूची में नहीं है अथवा किसी प्रकार के सुधार कराने हैं। वे अविलंब आनलाइन माध्यम से अथवा अपने बीएलओ से मिलकर अपना आवेदन समर्पित कर दें जिससे आने वाले विधानसभा चुनाव में वे अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें। बैठक में अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी डॉ नेहा अरोड़ा, संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुबोध कुमार, ओएसडी गीता चौबे, अवर निर्वाचन पदाधिकारी सुनील कुमार सहित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के जिला निर्वाचन पदाधिकारी, उप निर्वाचन पदाधिकारी उपस्थित रहे।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय अजय कुमार सिंह की आदालत ने सुनायी सजा, 5000 रुपये जुर्माना भी लगाया जुर्माना की राशि नहीं देने पर 6 माह अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी अदालत ने त्वरित सुनवाई करते हुए आरोप गठन के करीब डेढ़ माह के अंदर सुनायी सजा टीम एबीएन, कोडरमा। डोमचांच थाना कांड संख्या 13/ 2024 एसटी 52/ 2024 लकड़ी चुनने गयी बिरहोरीन महिला के साथ जबरन दुष्कर्म किये जाने के एक मामले की सुनवाई करते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय अजय कुमार सिंह की अदालत ने गुरुवार को आरोपी संजय बिरहोर, उम्र 40 वर्ष, पिता मंगर विरहोर, ग्राम - जिओरायडीह, थाना- डोमचांच,जिला कोडरमा,, निवासी को आईपीसी की धारा 376 (2)(एन) का दोषी पाते हुए 16 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनायी है। साथ ही 5000 रुपये जुर्माना लगाया। जुर्माना की राशि नहीं देने पर 6 माह अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। क्या है मामला मुक्तभोगी महिला ने थाना को दिये आवेदन में कहा था कि 2 फरवरी 2024 को समय करीब 10 बजे मैं अपने गांव के दो अन्य वीरहोरीन के साथ चंदन चूल्हा जंगल में बकरी चराने गयी थी। जब हम लोग घर वापस आ रहे थे तब वह उन दोनों विरहोरीन के पीछे आ रही थी। इसी दौरान कोई मेरे पीछे से आकर मेरा मुंह दबा दिया। जब पीछे देखी तो मेरे ही गांव का संजय विरहोर पिता मंगल बिरहोर, मेरा मुंह दबाकर पकड़े हुए हैं। संजय विरहोर मुझे घसीट कर जंगल में एक पेड़ के पास ले गया और साड़ी फाड़ दिया और रस्सी से मुझे पेड़ में बांध दिया और जबरदस्ती मेरे साथ बलात्कार किया। वह पुन: मुझे वहां से घसीट कर पश्चिम दिशा में दूर ले जाकर जमीन में पटक दिया तथा दोबारा वहां मेरे साथ जबरदस्ती बलात्कार किया। फिर मैं संध्या में किसी तरह छुड़ाकर भाग कर गांव आयी और गांव के लोगों को बतायी। गांव के रात्रि करीब 9 बजे संजय को पकड़ कर ग्रामीण महिलाओं ने बंद कर रखा और पुलिस को सौंप दिया। भुक्तभोगी महिला ने पुलिस से उचित कार्रवाई करने का अनुरोध किया था। अभियोजन का संचालक लोक अभियोजक पीपी एंजेलिना वारला ने किया। इस दौरान सभी 10 गवाहों का परीक्षण कराया गया। लोक अभियोजक पीपी ने कार्रवाई के दौरान न्यायालय से अभियुक्त को अधिक से अधिक सजा देने का आग्रह किया। वहीं बचाव पक्ष की ओर से एलएडीसीएस की अधिवक्ता किरण कुमारी ने दलीलें पेश करते हुए बचाव किया। अदालत ने सभी गवाहों और साक्ष्यो का अवलोकन करने के उपरांत अभियुक्त को दोषी पाते हुए सजा मुकर्रर की और जुर्माना लगाया।
एटीएम आपरेटरों ने आरबीआइ से की फीस बढ़ाने मांगएबीएन सेंट्रल डेस्क। एटीएम से पैसा निकालने वालों से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आयी है। आपको तय फ्री लिमिट के बाद कैश निकालने पर ज्यादा शुल्क चुकाने पड़ सकते हैं। दरअसल, देश के एटीएम आॅपरेटरों ने कैश निकासी पर ग्राहकों की ओर से भुगतान किये जाने वाले इंटरचेंज फीस में बढ़ोतरी की मांग की है। एटीएम आॅपरेटर ने इस सिलसिले में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) से संपर्क किया है।23 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन करने की डिमांडएटीएम उद्योग परिसंघ चाहता है कि इस इंटरचेंज फीस को बढ़ाकर अधिकतम 23 रुपये प्रति ट्रांजेक्शन किया जाये ताकि बिजनेस के लिए ज्यादा फंडिंग जुटायी जा सके। एटीएम बनाने वाली कंपनी एजीएस ट्रांजैक्ट टेक्नोलॉजीज के कार्यकारी निदेशक स्टेनली जॉनसन ने कहा कि दो साल पहले इंटरचेंज रेट में बढ़ोतरी की गयी थी। हम आरबीआई से संपर्क कर रहे हैं और उम्मीद है कि वे इसका समर्थन करेगी। हमने फीस को बढ़ाकर 21 रुपये करने की अपील है, जबकि कुछ अन्य एटीएम बनाने वाली कंपनियों ने इसे बढ़ाकर 23 रुपये करने की मांग की है। पिछली बार, इसे बढ़ाने में कई साल लग गये थे लेकिन मुझे लगता है कि सभी लोग एकमत हैं और यह केवल समय की बात है कि फीस में बढ़ोतरी कब होगी।2021 में हुई थी बढ़ोतरीबता दें कि साल 2021 में एटीएम ट्रांजैक्शन पर इंटरचेंज फीस 15 रुपये से बढ़ाकर 17 रुपये कर दी गयी थी। एटीएम इंटरचेंज वह फीस होती है जो कार्ड जारी करने वाले बैंक (जारीकर्ता) की ओर उस बैंक को दिया जाता है जहां कार्ड का इस्तेमाल नकदी निकालने के लिए किया जाता है। एक अन्य एटीएम निर्माता ने कहा- इंटरचेंज रेट बढ़ाने के लिए हर जगह अपनी मांगों को उठाया गया है। एनपीसीआई के माध्यम से एक प्रतिनिधित्व भेजा गया है और बैंक भी फीस पर बढ़ोतरी के लिए राजी है। इंटरचेंज शुल्क में वृद्धि एनपीसीआई द्वारा लिया गया निर्णय है क्योंकि दर उनके द्वारा तय की जाती है। मालूम हो कि मौजूदा समय में देश के छह मेट्रो शहरों बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई और नई दिल्ली में बैंक अपने बचत बैंक खाताधारकों को एक महीने में न्यूनतम पांच फ्री ट्रांजैक्शन की सुविधा देते हैं, जबकि किसी अन्य बैंक के एटीएम पर तीन बार लेन-देन फ्री है।
पीड़िता को मिलेगा 10.5 लाख रुपये का मुआवजादिल्ली के तीस हजारी की विशेष पॉक्सो अदालत ने सुनाया ऐतिहासिक फैसलाएबीएन सेंट्रल डेस्क। दिल्ली की एक अदालत ने 13 साल की एक नाबालिग बच्ची से विवाह के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 49 वर्षीय आरोपी को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 (पीसीएमए), बलात्कार व पॉक्सो की धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए दस साल के सश्रम कारावास की सजा सजा सुनायी है। साथ ही अदालत ने पीड़िता को 10.5 लाख रुपए का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। अभियुक्त दो किशोरवय बेटियों का पिता है। उसने अदालत में बच्ची को बालिग साबित करने की कोशिश की लेकिन बोन एज टेस्ट से यह साबित हो गया कि विवाह के समय पीड़िता की उम्र 13 साल से थोड़ी ही ज्यादा थी। दिल्ली के तीस हजारी की विशेष पॉक्सो अदालत के जज अंकित मेहता ने फैसले में सभी पहलुओं पर विचार करते हुए अभियुक्त को बाल विवाह और बलात्कार की धाराओं में मिलने वाली अधिकतम सजा सुनाई।मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष यह साबित करने में सफल रहा कि पीड़िता परिस्थितियों से लाचार थी और बच्ची के हालात का फायदा उठाते हुए उसकी मर्जी के खिलाफ उसका विवाह और यौन शोषण किया गया। बच्ची के पिता नहीं थे जबकि मां का मानसिक संतुलन ठीक नहीं था और वह भी बच्ची के साथ नहीं रहती थी। ऐसे में बच्ची को उसकी नानी ने पाला पोसा लेकिन खराब स्वास्थ्य व गरीबी के कारण वह जल्द से जल्द बच्ची के हाथ पीले करना चाहती थी। इस मामले में पड़ोसियों ने बच्ची के साथ लगातार मारपीट को देखकर दिल्ली पुलिस को सूचना दी जिसने फिर जांच और एफआईआर की प्रक्रिया शुरू की। यह दिल्ली विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) था जिसने पीड़िता की कानूनी और अन्य तरीकों से मदद के लिए जो कि बच्ची को न्याय दिलाने के लिए जरूरी था, वकील वीरेंदर वर्मा की नियुक्ति की। फैसले का स्वागत करते हुए वीरेंदर वर्मा ने कहा कि उन्होंने अदालत से आरोपी को अधिकतम व सश्रम कारावास की सजा के अलावा बच्ची को पर्याप्त क्षतिपूर्ति देने की मांग की थी। उन्होंने कहा, मैं अदालत का आभार प्रकट करता हूं जिसने इस मामले के सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार करते हुए फैसला सुनाया। दिल्ली की अदालत के इस फैसले को ऐतिहासिक और स्वागत योग्य बताते हुए अधिवक्ता, बाल अधिकार कार्यकर्ता एवं बाल विवाह मुक्त भारत (सीएमएफआई) के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा कि इस फैसले से एक बार यह तथ्य स्थापित हुआ है कि बाल विवाह का एक ही नतीजा है और वह है बच्चों से बलात्कार। मैं उम्मीद करता हूं कि यह फैसला एक नजीर बनेगा। बाल विवाह के खिलाफ निर्णायक कदमों से हम 2030 तक देश से इसका खात्मा कर सकते हैं। सरकार का लक्ष्य भारत को एक विकसित देश बनाने का है पर यह 18 वर्ष की उम्र तक अनिवार्य मुफ्त शिक्षा और बाल विवाह के खात्मे से ही संभव हो पायेगा। इससे पहले पीड़िता ने अदालत में अपने बयान में कहा कि वह इकलौती संतान थी लेकिन उसके माता-पिता नहीं थे। वह अपनी नानी के घर पली-बढ़ी जहां उसे बोझ समझा जाता था।बच्ची ने बताया कि उसकी नानी की तबीयत खराब रहती थी। इसलिए उन्होंने गांव के सरपंच और अन्य ग्रामीणों से सिफारिश की कि इससे पहले कि उन्हें कुछ हो जाये, वे किसी तरह बच्ची का विवाह करा दें। इसमें एक महिला ने बिचौलिए की भूमिका निभायी और उसकी नानी को बताया कि उसकी नजर में एक लड़का है जो अच्छा कमाता है और जिसकी पहली पत्नी का निधन हो चुका है।बच्ची ने बताया कि इसी बीच उसकी नानी की मृत्यु हो गई और उसके बाद ग्रामीणों ने उसकी मर्जी के खिलाफ जबरन उस व्यक्ति से विवाह करा दिया। आरोपी ने 23 फरवरी 2017 को बिहार में उससे विवाह किया जब वह सिर्फ 13 साल की थी। विवाह के बाद उसे पता चला कि आरोपी पूर्व में दो शादियां कर चुका था। उसकी पहली पत्नी का निधन हो गया जिससे उसकी दो किशोर उम्र की बेटियां हैं जो आरोपी की मां के साथ रहती हैं जबकि दूसरी पत्नी उसे छोड़कर चली गयी थी। बच्ची ने बताया कि विवाह के पहले दो महीनों में आरोपी उसकी बेरहमी से पिटाई और यौन उत्पीड़न करता था। इस बात की खबर गांव में फैल जाने पर आरोपी उसे दिल्ली ले आया जहां यौन संबंध बनाने के लिए वह लगातार उसका उत्पीड़न करता था। बच्ची ने अदालत को दिए बयान में बताया कि उसके साथ साल भर तक लगातार बलात्कार होता रहा और उसे पता नहीं था कि वह कहां जाये और किससे मदद मांगे। उसकी 66 वर्षीय सास ने भी उसका उत्पीड़न किया और एक बच्चे की लालसा में आरोपी के साथ यौन संबंध बनाने के लिए लगातार दबाव डालती रही। पीड़िता की शिकायत पर उसकी सास को भी आरोपी बनाया गया था लेकिन अदालत ने उसे बरी कर दिया। इससे संबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क कर सकते हैं।
इन पदाधिकारियों पर चलेगी विभागीय कार्रवाई, राज्य सरकार से मिली स्वीकृतिटीम एबीएन, रांची। राम प्रवेश कुमार, झा०प्र०से० (चतुर्थ सीमित बैच), तत्कालीन अंचल अधिकारी, वलिपुर, धनबाद, सम्प्रति अंचल अधिकारी, करमाटांड, जामताड़ा के विरूद्ध झारखंड सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2016 के नियम-14 के तहत असंचयात्मक प्रभाव से एक वेतन वृद्धि पर रोक का दण्ड अधिरोपित किए जाने के प्रस्ताव पर राज्य सरकार ने स्वीकृति दी है। चंद्रशेखर सिंह, सेवानिवृत झा०प्र०से०, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, सोनवर्षा, सहरसा (बिहार) के विरूद्ध झारखंड पेंशन नियमावली के नियम-43 (ख) के तहत उनकी समूची पेंशन आजीवन रोकने का दंड अधिरोपित किये जाने के प्रस्ताव पर राज्य सरकार ने स्वीकृति दी है।अवधेश कुमार पांडेय, सेवानिवृत झा०प्र० से० (कोटि क्रमांक-528/03), तत्कालीन, नगर आयुक्त, धनबाद नगर निगम, धनबाद के विरूद्ध झारखण्ड पेंशन नियमावली के नियम-43 (ख) के अंतर्गत उनके पेंशन से 05 प्रतिशत राशि की कटौती एक वर्ष तक करने का दण्ड अधिरोपित करने के प्रस्ताव पर राज्य सरकार ने स्वीकृति दी है।डॉ अशोक कुमार पाठक, तत्कालीन सिविल सर्जन, बोकारो के विरूद्ध गठित प्रपत्र क सापेक्ष विभागीय कार्यवाही संचालित करने के प्रस्ताव पर राज्य सरकार ने स्वीकृति दी है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अगर आपने अभी तक आधार कार्ड अपडेट नहीं किया अभी तक तो करवा लें। बस कुछ ही दिन रह गये आधार को अपडेट करवा लें। दरअसल, 14 जून के बाद इसके लिए आपको जुर्माना लग सकता है। इसको जितना जल्दी अपडेट करवा लें उतना ही अच्छा है।यदि आपके पास भी 10 साल पुराना आधार कार्ड है और अभी तक अपडेट नहीं कराया तो यह खबर आपके लिए है। सरकार ने आधार अपडेट कराने के लिए 14 जून 2024 की तारीख तय की है। वहीं, 14 जून में कुछ ही दिन बाकी है। इस तारीख तक आप अपने आधार को फ्री में अपडेट करा सकते हैं।अगर आपने अभी तक नहीं करवाया अपडेट तो इस पर जुर्माना भी लगे तो फिर आधार अपडेट की हालत पैन अपडेट जैसी हो जायेगी। आइये आपको आधार कार्ड अपडेट कैसे करें बताते हैं।इन दस्तावेज का होना जरूरी हैआधार अपडेट के लिए आपको दो जरूरी डॉक्यूमेंट की जरूरत होगी। पहला पहचान पत्र और दूसरा एड्रेस प्रूफ। वैसे आधार अपडेट के लिए आधार सेंटर पर 50 रुपये का शुल्क लगता है लेकिन यूआइडीएआइ के मुताबिक 14 जून तक यह सेवा फ्री है। पहचान पत्र के तौर पर आप पैन कार्ड और एड्रेस के लिए वोटर कार्ड दे सकते हैं।घर बैठें करें ऐसे अपडेट मोबाइल या लैपटॉप से यूआइडीएआइ की वेबसाइट के जरिए आधार अपडेट आधार के विकल्प पर क्लिक करें।इसके बाद आधार नंबर डाले फिर ओटीपी के जरिए लॉगिन करें।इसके बाद डॉक्यूमेंट पर क्लिक करें और वेरिफाई करें।अब नीचे ड्रॉप लिस्ट से पहचान पत्र और एड्रेस प्रूफ की स्कैन की हुई कॉपी को अपलोड करें।इसके बाद सबमिट पर क्लिक कर दें। इसके बाद आपको एक रिक्वेस्ट नंबर मिलेगा और फॉर्म सबमिट हो जायेगा। वहीं, आप रिक्वेस्ट नंबर से आप अपडेट का स्टेटस भी चेक कर सकेंगे।कुछ दिनों बाद आपका आधार अपडेट हो जायेगा।
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