जनवरी से लागू होगी नई व्यवस्था: मनसुख मांडविया एबीएन सेंट्रल डेस्क। श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने बुधवार को कहा कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की पेंशन योजना के दायरे में आने वाले पेंशनभोगी जनवरी से किसी भी बैंक या उसकी शाखा से पेंशन ले सकेंगे। श्रम मंत्रालय ने बयान में कहा कि मांडविया ने कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) 1995 के लिए एक केंद्रीकृत पेंशन भुगतान प्रणाली (सीपीपीएस) के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। वह एढऋड के शीर्ष निर्णय लेने वाले निकाय केंद्रीय न्यासी बोर्ड (सीबीटी) के चेयरपर्सन भी हैं। बयान के अनुसार, केंद्रीकृत पेंशन भुगतान व्यवस्था से पूरे देश में किसी भी बैंक या किसी भी शाखा के माध्यम से पेंशन का वितरण हो सकेगा। मंत्री ने कहा, सीपीपीएस की मंजूरी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के आधुनिकीकरण की दिशा में मील का पत्थर है। इसके तहत पेंशनधारक देश में कहीं भी, किसी भी बैंक, किसी भी शाखा से अपनी पेंशन प्राप्त कर सकेंगे। यह पहल लंबे समय से चली आ रही पेंशधारकों की समस्याओं का समाधान करती है। यह व्यवस्था एक निर्बाध और कुशल वितरण प्रणाली सुनिश्चित करती है। उन्होंने कहा कि यह ईपीएफओ को अपने सदस्यों और पेंशनधारकों की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा करने के लिए अधिक मजबूत, उत्तरदायी और तकनीक-सक्षम संगठन में बदलने के हमारे प्रयासों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। केंद्रीकृत पेंशन भुगतान प्रणाली से ईपीएफओ के 78 लाख से अधिक ईपीएस-95 पेंशनधारकों को लाभ होने की उम्मीद है। केंद्रीकृत प्रणाली पेंशन भुगतान आदेश (पीपीओ) को एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय में स्थानांतरित करने की आवश्यकता के बिना पूरे देश में पेंशन का निर्बाध वितरण सुनिश्चित करेगी। यह उन पेंशनधारकों के लिए बड़ी राहत होगी जो सेवानिवृत्ति के बाद अपने गृहनगर चले जाते हैं। ईपीएफओ की यह सुविधा 1 जनवरी, 2025 से ईपीएफओ की चल रही सूचना प्रौद्योगिकी आधुनिकीकरण परियोजना केंद्रीकृत आईटी युक्त प्रणाली (सीआईटीईएस 2.01) के हिस्से के रूप में शुरू की जाएगी। अगले चरण में, सीपीपीएस आधार-आधारित भुगतान प्रणाली (एबीपीएस) में एक सुचारु परिवर्तन लाएगी। मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि नयी प्रणाली मौजूदा पेंशन वितरण प्रक्रिया से महत्वपूर्ण बदलाव है, जिसके तहत ईपीएफओ के प्रत्येक क्षेत्रीय/क्षेत्रीय कार्यालय को केवल तीन-चार बैंकों के साथ अलग-अलग समझौते करने पड़ते थे। इसमें कहा गया है कि अब पेंशनभोगियों को पेंशन शुरू होने के समय सत्यापन के लिए बैंक शाखा में जाने की जरूरत नहीं होगी और भुगतान जारी होने पर तुरंत जमा कर दिया जायेगा। इसके साथ ही ईपीएफओ को उम्मीद है कि नयी प्रणाली से पेंशन वितरण लागत में महत्वपूर्ण कमी आयेगी।
रेलवे ने अवैध वसूली में 59 किन्नरों को गिरफ्तार कर 20 को भेजा जेलएबीएन सेंट्रल डेस्क (प्रयागराज)। रेल यात्रियों को यात्रा के दौरान किन्नरों द्वारा जबरदस्ती पैसे वसूलने व परेशान किये जाने संबंधी शिकायतों पर तीनों मंडलों से 59 किन्नरों को गिरफ्तार किया है। जिसमें 6900 रुपये जुर्माना वसूलते हुए 20 किन्नरों को जेल भेज दिया है।वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी अमित मालवीय ने मंगलवार को बताया कि रेलयात्रियों की शिकायतों को गम्भीरता से लेते हुये प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त रेल सुरक्षा बल अमिय नन्दन सिन्हा के निर्देशन में 19 अगस्त से 02 सितम्बर तक अभियान चलाया गया। उत्तर मध्य रेलवे के तीनों मण्डलों प्रयागराज, आगरा एवं झांसी में किन्नरों के विरूद्व सघन चेकिंग अभियान चलाकर उनके विरूद्ध विधिक कार्यवाही की गयी। अभियान में रेल अधिनियम-1989 की विभिन्न संबंधित धाराओं के अन्तर्गत 59 किन्नरों को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अभियान भविष्य में भी निरन्तर जारी रहेंगे, ताकि रेल यात्रियों की यात्रा सुरक्षित व सुगम हो सके। यात्रियों की सुरक्षा में रेल सुरक्षा बल उत्तर मध्य रेलवे सदैव तत्पर है।
केंद्र और राज्य सरकार को तत्काल जवाब दाखिल करने का दिया निर्देशटीम एबीएन, रांची। झारखंड उच्च न्यायालय ने केंद्र और झारखंड सरकार को राज्य में आदिवासियों के धर्मांतरण पर तत्काल जवाब दाखिल करने का बीते शुक्रवार को निर्देश दिया। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति अरुण कुमार राय की खंडपीठ इस मुद्दे पर सोमा उरांव नामक व्यक्ति द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय को बताया गया कि राज्य के भीतरी इलाकों में आदिवासियों को गुमराह किया जा रहा है और कभी-कभी उन्हें अलग-अलग धर्म अपनाने के लिए लुभाया जा रहा है। अदालत को बताया गया कि झारखंड में कई कार्यक्रम (चंगाई सभा) आयोजित किए जा रहे हैं और ऐसे आयोजनों से भोले-भाले आदिवासियों को गुमराह किया जाता है, जो बाद में एक अलग धर्म अपनाने के लिए प्रेरित होते हैं। झारखंड सरकार और केंद्र इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने में विफल रहे।सरकारी वकील ने उच्च न्यायालय को बताया कि राज्य के विभिन्न जिलों में आदिवासियों के धर्मांतरण के संबंध में आंकड़े एकत्र किए जा रहे हैं। अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार को अपने हलफनामे दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत इस मामले पर पांच सितंबर को फिर सुनवाई करेगी। याचिकाकर्ता के वकील रोहित रंजन सिन्हा ने पीठ को बताया कि इसी प्रकार की एक जनहित याचिका भारत के उच्चतम न्यायालय में भी लंबित है।उच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान पाया कि डेनियल डेनिश द्वारा दायर एक अन्य जनहित याचिका में भी आदिवासियों के धर्मांतरण को उजागर किया गया है। अदालत ने ओरांव और डेनिश द्वारा दायर दोनों जनहित याचिकाओं को संलग्न करने का आदेश दिया और इन पर एक साथ सुनवाई की जायेगी।
कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर, जॉब के बाद भी मालामाल करने की तैयारी एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत सरकार नौकरीपेशा लोगों के लिए भी समय-समय पर कई बड़े कदम उठाती रहती है। इस कदम के तहत जॉब वाले कर्मचारियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जाती है। ऐसा एक बड़ा कदम एम्पलाइज प्रोविडेंड फंड आगेर्नाइजेशन के रूप में उठाया गया है। दरअसल आगेर्नाइज्ड सेक्टर में काम कर रहे कर्मचारी पीएफ के जरिए न सिर्फ अपना धन संचय करते हैं बल्कि भविष्य भी सुरक्षित करते हैं। ऐसे ही ईपीएफओ से जुड़े करोड़ों कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर सामने आयी है। दरअसल ईपीएफओ के तहत आपकी जॉब खत्म होने यानी आपके रिटायर्ड होने के बाद भी आपको अच्छी खासी पेंशन मिलती है। आइये जानते हैं कि जॉब खत्म होने के बाद भी आप ईपीएफओ के जरिए किसी तरह मालामाल बन सकते हैं। पीएफ खाते में कर्मचारी के साथ-साथ नियोक्ता यानी जहां वह काम करता है वो कंपनी भी अपना सेम राशि के रूप में कंट्रीब्यूशन करती है। दरअसल, ईपीएफओ सरकारी संस्था है इसे भारत सरकार की ओर से ही संचालित किया जाता है। खास बात यह है कि ईपीएफओ के तहत कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने के बाद भी पेंशन मिलती है और यह पेंशन एक दो नहीं बल्कि 6 तरह की होती है। आगेर्नाइज्ड यानी संगठित क्षेत्र में काम कर रहे कर्मचारियों का ईपीएफओ के तहत खाता होता है। इसी खाते में उन्हें अपने वेतन का 12 फीसदी हर माह जमा करना होता है। इसमें कंपनी की ओर से भी सहयोग दिया जाता है। यह जमा राशि दो हिस्सों में होती है। 8.33 प्रतिशत हिस्सा खुद कर्मचारी के वेतन से कटता है जो पेंशन फंड के रूप में जमा होता है। वहीं 3.67 फीसदी हिस्सा कर्मचारी के प्रोविडेंट फंड यानी पीएफ में क्रेडिट हो जाता है।
टीम एबीएन, रांची। राज्य सरकार ने झा प्र से के कई अधिकारियों पर कार्रवाई की हैं। इस संबंध में कार्मिक प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने संकल्प जारी किया है।राज्य सरकार ने अनिल कुमार सिंह, झा0प्र0से0 (को.क्र.-179/20),अवर सचिव, कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग, झारखण्ड, राँची को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है।अरविन्द कुमार, झा0प्र0से0 (कोटि क्रमांक- 78/20), तत्कालीन जिला आपूर्त्ति पदाधिकारी, हजारीबाग के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित किया जाता है।विपिन उराँव, झा0प्र0से0 (कोटि क्रमांक- 803/03), तत्कालीन जिला आपूर्त्ति पदाधिकारी, बोकारो के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित किया जाता है।सदानन्द महतो, झा0प्र0से0 (को0 क्र0-185/20), तत्कालीन प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, बरहरवा, साहेबगंज के विरूद्ध निन्दन का दण्ड अधिरोपित किया जाता है।इस संबंध में कार्मिक प्रशासनिक सेवा तथा राजभाषा विभाग ने संकल्प जारी किया है।
टीम एबीएन, रांची। राज्य सरकार ने झा प्र से के कई अधिकारियों पर कार्रवाई की हैं। इस संबंध में कार्मिक प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने संकल्प जारी किया है।राज्य सरकार ने अनिल कुमार सिंह, झा0प्र0से0 (को.क्र.-179/20),अवर सचिव, कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग, झारखण्ड, राँची को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है।अरविन्द कुमार, झा0प्र0से0 (कोटि क्रमांक- 78/20), तत्कालीन जिला आपूर्त्ति पदाधिकारी, हजारीबाग के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित किया जाता है।विपिन उराँव, झा0प्र0से0 (कोटि क्रमांक- 803/03), तत्कालीन जिला आपूर्त्ति पदाधिकारी, बोकारो के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित किया जाता है।सदानन्द महतो, झा0प्र0से0 (को0 क्र0-185/20), तत्कालीन प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, बरहरवा, साहेबगंज के विरूद्ध निन्दन का दण्ड अधिरोपित किया जाता है।इस संबंध में कार्मिक प्रशासनिक सेवा तथा राजभाषा विभाग ने संकल्प जारी किया है।
दूध-दही पर A1 और A2 के दावे भ्रामक, तुरंत हटायें एफएसएसएआई का आदेशएबीएन सेंट्रल डेस्क। खाद्य सुरक्षा नियामक एफएसएसएआई ने बृहस्पतिवार को ई-कॉमर्स सहित खाद्य कंपनियों को पैकेट से ए-वन और ए-टू प्रकार के दूध और दूध उत्पादों के दावों को हटाने का निर्देश दिया। नियामक ने इस तरह के लेबल को भ्रामक बताया है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने कहा कि ये दावे खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के अनुरूप नहीं हैं। अपने ताजा आदेश में, एफएसएसएआई ने कहा कि उसने इस मुद्दे की जांच की है और पाया है कि ए-वन और ए-टू का अंतर दूध में बीटा-केसीन प्रोटीन की संरचना से जुड़ा हुआ है। हालांकि, मौजूदा एफएसएसएआई नियम इस अंतर को मान्यता नहीं देते हैं। खाद्य व्यवसाय परिचालकों का जिक्र करते हुए नियामक ने कहा, एफबीओ को अपने उत्पादों से ऐसे दावों को हटाने का निर्देश दिया गया है।ई-कॉमर्स मंच को भी उत्पादों और वेबसाइट से इन दावों को तुरंत हटाने के लिए कहा गया। कंपनियों को पहले से मुद्रित लेबल समाप्त करने के लिए छह महीने का समय दिया गया है, इसके अलावा कोई और विस्तार नहीं दिया जायेगा। ए-1 और ए-2 दूध में बीटा-कैसीन प्रोटीन की संरचना अलग-अलग होती है, जो गाय की नस्ल के आधार पर अलग-अलग होती है। नियामक ने इस निर्देश का सख्ती से पालन करने पर जोर दिया। आदेश का स्वागत करते हुए पराग मिल्क फूड्स के चेयरमैन देवेंद्र शाह ने कहा कि एफएसएसएआई का आदेश सही दिशा में उठाया गया कदम है।उन्होंने एक बयान में कहा, ए-1 और ए-2 विपणन मकसद से विकसित की गई श्रेणी है। ...यह जरूरी है कि हम भ्रामक दावों को खत्म करें जो उपभोक्ताओं को गलत जानकारी दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि ए-1 या ए-2 दूध उत्पाद श्रेणी कभी अस्तित्व में नहीं थी और वैश्विक स्तर पर भी यह प्रवृत्ति खत्म हो रही है और उन्होंने कहा कि एफएसएसएआई का स्पष्टीकरण इस व्यापक समझ का समर्थन करता है।
सामने आया पूर्व प्रिंसिपल से पूछे गये प्रश्न एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोलकाता में हाल ही में हुए रेप और मर्डर केस के संदर्भ में सीबीआई को मुख्य आरोपी संजय रॉय का पॉलीग्राफी टेस्ट कराने की अनुमति मिल गयी है। इससे पहले सीबीआई ने आरोपी का मनोवैज्ञानिक परीक्षण भी किया था। अब पॉलीग्राफी टेस्ट के माध्यम से यह जानने की कोशिश की जायेगी कि आरोपी ने कितनी सच्चाई बताई है और कितनी बातें झूठी हैं। इसके अलावा, सीबीआई अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष का भी पॉलीग्राफी टेस्ट कराने की योजना बना रही है। सूत्रों के अनुसार, संदीप घोष के बयान में कई इनकनसिस्टेंसिज पायी गयी हैं। कहा जा रहा है कि पूर्व प्रिंसिपल ने मामले को छिपाने की कोशिश की थी। सीबीआई को अस्पताल की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है, यही कारण है कि पूर्व प्रिंसिपल को लगातार चौथे दिन पूछताछ के लिए बुलाया गया है। रविवार की रात को भी देर तक उनसे पूछताछ की गयी, जो कि 1 बजे तक चली। सीबीआई ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष से पिछले चार दिनों में कौन-कौन से सवाल पूछे... इस पूछताछ का मुख्य उद्देश्य यह है कि सीबीआई को मामले की तह तक पहुंचने में मदद मिले और दोषियों को उचित सजा दिलाई जा सके। सीबीआई की जांच के दौरान लगातार नये खुलासे हो रहे हैं, जो इस जटिल मामले की सच्चाई को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। जब आप हॉस्पिटल आये थे, तब लड़की की बॉडी कहां पर थी? लड़की की बॉडी को आपने कब देखा? आप इतने सालों से मेडिकल प्रोफेशन में हैं। बॉडी को देखने के बाद आपको क्या लगा? कितने ऐसे डॉक्टर थे जो इस डेथ को सुसाइड बता रहे थे? आरोपी संजय रॉय आपसे पहली बार कब मिला था? परिवार को गलत जानकारियां किसके कहने पर दी गयी? अगर आपकी जानकारी में नहीं था तो आपने परिवार को सच क्यों नहीं बताया? आपको किसने बताया था कि ये सुसाइड का केस है? परिवार वाले अस्पताल कब आये थे? उनको कौन हैंडल कर रहा था? क्या आपकी बात फैमिली से हुई थी? घटना की जानकारी देने वाले ने आपको क्या बताया था? और उसके बाद आपने क्या-क्या किया? सोचकर थोड़ा विस्तार से बताइये? 8-9 की रात को हुई इस घटना के बारे में आपको कब पता चला और कैसे? आपके अस्पताल के किसी भी डॉक्टर या आपने पुलिस को इंकुएस्ट प्रोसिडिंग करने से क्यों नहीं रोका था? ये सुसाइड नहीं बल्कि रेप एंड मर्डर है इसकी जानकारी आपको सबसे पहले किसने दी थी। जब आपको पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की फाइंडिंग के बारे में पता चला गया था, उसके बाद आपने क्या क्या किया? किस-किस को इसकी जानकारी दी और उनको क्या बताया? एक सीनियर डॉक्टर होने के नाते आपको पता है कि किसी भी क्राइम सीन को प्रिजर्व किया जाता है आपने ऐसा क्यों नहीं किया? क्या ऐसा करने के लिए आपके पास किसी तरह की इंस्ट्रक्शन आयी थी? क्या आपने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बारे में पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टरों से कोई बात की थी? अगर की थी तो आपने क्या बात की और उन्होंने डेथ के बारे में अपनी क्या फाइंडिंग बतायी? उन डॉक्टरों के नाम क्या थे जिनसे आपकी बात हुई थी? आपने अचानक से इस्तीफा क्यों दे दिया था? कितने ऐसे डॉक्टर थे जो इस डेथ को सुसाइड बता रहे थे? ये सुसाइड नहीं बल्कि रेप एंड मर्डर है इसकी जानकारी आपको सबसे पहले किसने दी थी। आपको कब इस मेडिकल कॉलेज का प्रिंसिपल बनाया गया था, इससे पहले आप की पोस्टिंग कहां-कहां पर रही है? लड़की की बॉडी को आपने कब देखा? आप इतने सालों से मेडिकल प्रोफेशन में हैं। बॉडी को देखने के बाद आपको क्या लगा?
बच्चों के अश्लील वीडियो रखने और देखने को अपराध नहीं मानने के केरल हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने की सुनवाई 120 से ज्यादा गैरसरकारी संगठनों के गठबंधन जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस ने दायर की थी याचिका मद्रास हाई कोर्ट के इसी तरह के एक अन्य फैसले के खिलाफ इस बाल अधिकार संगठन की ओर से दायर अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजारएनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार 2018 से 2022 के बीच बच्चों की अश्लील फिल्मों के मामलों में 2561% की बढ़ोतरी एबीएन सेंट्रल डेस्क। मोबाइल फोन में बच्चों की अश्लील फिल्में और वीडियो डाउनलोड करने या देखने को यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम या सूचना तकनीक अधिनियम के तहत आपराधिक कृत्य नहीं मानने के केरल हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ की अगुआई में न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला व न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा ने सुनवाई के दौरान मद्रास हाई कोर्ट के भी इसी तरह के एक फैसले का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि सिर्फ बच्चों की अश्लील फिल्में देखने भर को अपने आप में आपराधिक कृत्य नहीं माना जा सकता। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि मद्रास हाई कोर्ट के फैसले पर निर्णय सुरक्षित है और इसका केरल हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर भी असर पड़ेगा। लिहाजा याची को फैसले का इंतजार करना चाहिए। केरल हाई कोर्ट ने जून 2024 में 27 साल के सेबिन थामस को आरोपमुक्त कर दिया था जिसके मोबाइल फोन में बच्चों की अश्लील फिल्में पाई गई थीं। हाई कोर्ट ने कहा कि मोबाइल फोन में अपने आप ही या दुर्घटनावश ऐसे वीडियो डाउनलोड हो जाने पर जिसमें बच्चे यौन कृत्यों में लिप्त हैं, पॉक्सो या सूचना कानून तकनीक के तहत अपराध नहीं है। इस मामले में याची जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस देशभर में बच्चों के यौन शोषण, बाल दुव्यार्पार (चाइल्ड ट्रैफिकिंग) और बाल विवाह के खिलाफ काम कर रहे 120 से ज्यादा गैरसरकारी संगठनों का गठबंधन है। याचिका में एलायंस ने कहा कि दोनों उच्च न्यायालयों के फैसलों की देशभर में खासी चर्चा हुई और इससे इस तरह का संदेश गया कि बच्चों के अश्लील वीडियो डाउनलोड करने या देखने पर किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं होगी। इससे बच्चों की अश्लील फिल्में देखने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलेगा जो बच्चों और उनके भले के हित में नहीं होगा। बच्चों की अश्लील फिल्मों के मामलों पर उच्च न्यायालयों के हालिया फैसलों पर जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस के संयोजक रवि कांत ने कहा, ह्लयह चिंता की बात है कि बच्चों की अश्लील फिल्मों और वीडियो जैसे गंभीर अपराधों में विभिन्न राज्यों के हाई कोर्ट भ्रामक फैसले दे रहे हैं जबकि इस तरह के कृत्यों में लिप्त लोगों को बेहद सख्त और स्पष्ट संदेश देने की जरूरत है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार बच्चों की अश्लील फिल्मों के मामलों में बेहद चिंताजनक बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2018 में बच्चों की अश्लील फिल्मों के जहां सिर्फ 44 मामले थे जो 2022 में बढ़कर 1171 तक पहुंच गए। हमें भ्रम फैलाने वाले फैसलों के बजाय इस मुद्दे पर तत्काल ध्यान देने और कार्रवाई करने की जरूरत है। याची की तरफ से अदालत में पेश हुए वरिष्ठ वकील एच.एस. फूलका ने खंडपीठ को बताया कि केरल पुलिस ने पाया है कि 8 से 10 और 15 से 16 आयु वर्ग के कई बच्चों का इस्तेमाल आपत्तिजनक और अश्लील फिल्में बनाने में किया जा रहा है। आरोपी को केरल पुलिस की बाल यौन शोषण निरोधक (सीसीएसई) टीम के विशेष अभियान पी-हंट के दौरान गिरफ्तार किया गया जो बच्चों के खिलाफ अपराधों को रोकने के लिए गठित साइबरडोम के तहत कार्य करती है। सुनवाई के दौरान याची ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के हवाले से बच्चों की अश्लील फिल्मों और वीडियो के मामलों में साल दर साल बढ़ोतरी के ब्योरेवार आंकड़े पेश किए जो इसमें तकरीबन 2516 प्रतिशत की बढ़ोतरी दिखाता है।
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