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अब एटीएम से जल्द निकाल सकेंगे ईपीएफओ के पैसे
Published / 2025-03-07 21:12:11
अब एटीएम से जल्द निकाल सकेंगे ईपीएफओ के पैसे

ईपीएफओ का बड़ा ऐलान... जल्द मिलेगा एटीएम से सीधा पीएफ के पैसे निकालने का विकल्प एबीएन सेंट्रल डेस्क। नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) जल्द ही अपने ग्राहकों को एटीएम के जरिए सीधे पीएफ से पैसे निकालने की सुविधा देने जा रहा है। केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने गुरुवार को घोषणा की कि ईपीएफओ का नया ईपीएफओ 3.0 वर्जन लॉन्च होने के बाद पीएफ निकासी बैंकिंग लेनदेन की तरह आसान हो जाएगी। ईपीएफओ 3.0 से क्या होगा बदलाव अब पीएफ निकालने के लिए नियोक्ता या ईपीएफओ दफ्तरों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी। एटीएम से सीधे पीएफ बैलेंस निकालने की सुविधा मिलेगी। निकासी प्रक्रिया पहले से ज्यादा तेज और सरल हो जायेगी। जल्द होगी सुविधा लागू तेलंगाना में ईपीएफओ के नये क्षेत्रीय कार्यालय के उद्घाटन पर मंत्री मंडाविया ने कहा कि यह आपका पैसा है और आप जब चाहें इसे एटीएम से निकाल सकेंगे। यह कदम लाखों कर्मचारियों के लिए बड़ी सहूलियत लेकर आयेगा। एटीएम से पीएफ निकासी का प्रोसेस जानें ईपीएफाअ‍े जल्द ही पीएफ निकासी को बैंक खाते से पैसे निकालने जितना आसान बना रहा है। नये ईपीएफओ 3.0 वर्जन के तहत, कर्मचारी भविष्य निधि (पीएफ) खाताधारकों को लंबी क्लेम फाइलिंग प्रक्रियाओं से छुटकारा मिलेगा और वे सीधे एटीएम से निकासी कर सकेंगे। कैसे काम करेगा यह सिस्टमआईटी सिस्टम अपग्रेड : ईपीएफओ अपने आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड कर रहा है ताकि पीएफ निकासी प्रक्रिया को तेजी और सहज बनाया जा सके। अब फंड ट्रांसफर या क्लेम अप्रूवल में देरी नहीं होगी। डायरेक्ट एक्सेस : ईपीएफओ खातों को एटीएम-संगत प्रणाली से जोड़ा जायेगा, जिससे सब्सक्राइबर्स अपने यूएएन (यूनिवर्सल अकाउंट नंबर) या लिंक किये गये बैंक खातों के जरिए सीधे फंड निकाल सकेंगे। सिक्योरिटी और आथेंटिकेशन : निकासी प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए मल्टी-फैक्टर आॅथेंटिकेशन होगा, जिसमें ओटीपी वेरिफिकेशन शामिल होगा। तेज प्रोसेसिंग और तुरंत फंड ट्रांसफर : इस नये सिस्टम के तहत, क्लेम का तुरंत निपटान होगा, जिससे सदस्यों को फंड ट्रांसफर में देरी से राहत मिलेगी।

नयी दिल्ली में 31 मार्च के बाद 15 साल पुरानी गाड़ियों को नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल
Published / 2025-03-01 20:35:19
नयी दिल्ली में 31 मार्च के बाद 15 साल पुरानी गाड़ियों को नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल

एबीएन सेंट्रल डेस्क। दिल्ली की बीजेपी सरकार ने पुरानी गाड़ियों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि 31 मार्च के बाद 15 साल पुरानी गाड़ियों को ईंधन नहीं दिया जायेगा। हम पेट्रोल पंप पर इसको लेकर गैजेट्स लगा रहे हैं, जो करीब 80 प्रतिशत पंप पर लग चुके हैं। 31 मार्च तक सभी पंप पर गैजेट्स लग जायेंगे। फिर 15 साल पुरानी गाड़ियों की पहचान की जायेगी और उन्हें ईंधन नहीं दिया जायेगा। इसके अलावा 15 साल पुरानी गाड़ियों की पहचान के लिए एक टीम बनायी जा रही है। ये टीम दिल्ली में ऐसे वाहनों को प्रवेश करने से रोकेगी और अगर प्रवेश कर गये हैं, तो उन्हें बाहर भेजेगी। पर्यावरण मंत्री ने बताया कि दिल्ली में कुछ बड़े होटल हैं, कुछ बड़े आॅफिस कॉम्प्लेक्स हैं। दिल्ली एयरपोर्ट है, बड़ी कंस्ट्रक्शन साइट्स हैं। हम इन सभी के लिए तुरंत अपने यहां प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एंटी-स्मॉग गन लगाना अनिवार्य करने जा रहे हैं। हम दिल्ली की सभी ऊंची इमारतों के लिए स्मॉग गन लगाना अनिवार्य करने जा रहे हैं। हम दिल्ली के सभी होटलों के लिए स्मॉग गन लगाना अनिवार्य करने जा रहे हैं। इसी तरह, हम सभी कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के लिए इसे अनिवार्य करने जा रहे हैं। हमने आज फैसला किया है कि क्लाउड सीडिंग के लिए हमें जो भी अनुमति चाहिए, हम लेंगे और हम यह सुनिश्चित करेंगे कि जब दिल्ली में गंभीर प्रदूषण हो, तो क्लाउड सीडिंग के जरिए बारिश करायी जा सके और प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके।

जेपीएससी प्रथम घोटाले में 10 आरोपियों का बेल रिजेक्ट
Published / 2025-02-27 19:53:28
जेपीएससी प्रथम घोटाले में 10 आरोपियों का बेल रिजेक्ट

जेपीएससी प्रथम सिविल घोटाले के अब तक 10 आरोपियों को अग्रिम राहत देने से कोर्ट ने किया इनकार, याचिका खारिज टीम एबीएन, रांची। जेपीएससी प्रथम सिविल सेवा भर्ती घोटाले के चार्जशीटेड 10 आरोपियों को सीबीआई कोर्ट से झटका लगा है। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश की अदालत ने इन आरोपियों की ओर से दाखिल जमानत याचिका सुनवाई पश्चात खारिज कर दी है।अदालत ने हरिबंश पंडित, योगेंद्र प्रसाद, प्रवीण रोहित कुजूर एवं बिजय कुमार को अग्रिम राहत देने से इनकार किया है। आरोपियों ने पिछले दिनों अग्रिम जमानत की गुहार लगाते हुए याचिका दाखिल की थी। वहीं अजय सिंह बड़ाईक की याचिका पर सुनवाई पश्चात अदालत ने आदेश सुरक्षित रख लिया है। अदालत अपना सुरक्षित आदेश 28 फरवरी को सुनायेगी। जबकि सीमा सिंह एवं मोहन लाल मरांडी की याचिका पर मार्च के पहले सप्ताह में सुनवाई होगी। इससे पूर्व अरविंद कुमार लाल, लखीराम बास्की, संजय पांडे, अंजना दास एवं साधना जयपुरिया की याचिका खारिज कर चुकी है। मामले में अब तक 32 आरोपियों ने अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है। इसमें से 10 आरोपियों की याचिका खारिज हो चुकी है। बता दें कि सीबीआई कोर्ट ने 16 जनवरी को 47 भ्रष्ट अफसरों समेत 74 लोगों के खिलाफ संज्ञान लेते हुए समन जारी किया है।

झारखंड : पेपर लीक मामले में 10 अरेस्ट
Published / 2025-02-25 19:28:08
झारखंड : पेपर लीक मामले में 10 अरेस्ट

झारखंड में मैट्रिक पेपर लीक मामले में 10 गिरफ्तार, गिरिडीह में ऐसे चुराये गये थे पेपर टीम एबीएन, रांची। झारखंड में दसवीं बोर्ड के पेपर लीक के मामले में पुलिस ने कुल 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें से छह लोगों को पुलिस ने मंगलवार को गिरिडीह के न्यू बरगंडा इलाके में दो घरों में छापेमारी कर गिरफ्तार किया है। ये सभी मैट्रिक के छात्र हैं। बताया जा रहा है कि गिरिडीह जिले में स्ट्रांग रूम में रखने के लिए भेजा गया पेपर इन्हीं में से एक छात्र ने चुराया था। गिरफ्तार किये गये छात्रों से पूछताछ चल रही है। डीजीपी अनुराग गुप्ता ने कहा है कि पेपर लीक के मुख्य आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। हिंदी और साइंस का पेपर लीक झारखंड एकेडमिक काउंसिल की ओर से ली गयी दसवीं की परीक्षा में हिंदी और विज्ञान के पेपर लीक हुए थे। परीक्षा के पहले ही इन दोनों विषयों के पेपर इंटरनेट पर वायरल हो गये थे। कोडरमा के एक गिरोह ने व्हाट्सएप ग्रुप में 350 रुपये में ये पेपर बेचे थे। पेपर उपलब्ध कराने के एवज में क्यूआर कोड से राशि की वसूली की गयी थी। रद्द हुआ था एग्जाम परीक्षा के दौरान जब वायरल पेपर हूबहू मिल गए तो काउंसिल ने इन दोनों पत्रों की परीक्षाएं रद्द कर दी थीं। गिरिडीह में मंगलवार को गिरफ्तार किए गए छह छात्रों से प्रारंभिक पूछताछ में पता चला है कि प्रश्न पत्रों को ट्रक से उतारकर स्ट्रांग रूम तक पहुंचाने के लिए जिन मजदूरों को लगाया गया था, उनमें कुछ छात्र भी थे। उन्होंने ही कुछ पेपर चुरा लिये थे। पुलिस इन छात्रों को हिरासत में लेने के बाद स्ट्रांग रूम भी जांच के लिए पहुंची। विधानसभा में हुआ था हंगामा इस पूरे मामले की जांच को लेकर मंगलवार को डीजीपी अनुराग गुप्ता झारखंड एकेडमिक काउंसिल के अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं। सरकार इस मामले की जांच एसआईटी या सीआईडी को दे सकती है। पेपर लीक की घटना को लेकर मंगलवार को झारखंड विधानसभा में भी जोरदार हंगामा हुआ है।

झारखंड : अब एक साल नहीं बिकेगा गुटखा-पान मसाला
Published / 2025-02-18 21:04:55
झारखंड : अब एक साल नहीं बिकेगा गुटखा-पान मसाला

झारखंड में एक साल के लिए गुटखा और पान मसाला पर बैन, स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया टीम एबीएन, रांची। झारखंड में आज से गुटखा और पान मसाला की बिक्री पर बैन लग गया है। गुटखा बेचने पर कानूनी कार्रवाई होगी। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने इस बाबत अधिसूचना जारी कर दी है। स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कैंसर दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान स्पष्ट कर दिया था कि राज्य में गुटखा पर प्रतिबंध लगेगा क्योंकि राज्य में कैंसर फैलने का सबसे बड़ा कारण गुटखा बना हुआ है। इसकी वजह से युवाओं की जिंदगी बर्बाद हो रही है। गुटखा और पान मसाला पर अधिसूचना निर्गत होने की तारीख से एक साल लिए बैन लगाया गया है। इस आदेश के साथ झारखंड में गुटखा बनाने, स्टोरेज करने, बेचने और वितरण करने पर पूरी तरह से रोक लग गई है। नोटिफिकेशन के मुताबिक जर्दा (टोबैको) या निकोटिन युक्त गुटखा और पान मसाला बेचने पर कार्रवाई होगी। आम लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के सेक्सन 30 (2)(ं) और फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (प्रोहिबिशन एंड रिस्ट्रिक्सन आन सेल्स) रेगुलेशन, 2011 के रेगुलेशन 2,3, और 4 के तहत एक साल के लिए बैन लगाया गया है। एसीएस-कम-फूड सेफ्टी कमीश्नर अजय कुमार सिंह ने आदेश जारी करते हुए निदेशक, पीआरडी को अखबारों के माध्यम से तीन दिनों तक नोटिफिकेशन को पब्लिश कराने को कहा है ताकि आम लोगों को इससे अवगत कराया जा सके। आंकड़ों के मुताबिक झारखंड में ओरल कैंसर पीड़ित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसकी वजह है गुटखा। राज्य में एक लाख की आबादी पर करीब 70 लोग कैंसर पीड़ित हैं। इनमें 40-45 मरीज तंबाकू और गुटखा की वजह से ओरल कैंसर से पीड़ित हैं। आपको बता दें कि जून 2022 में तत्कालीन सीएम हेमंत सोरेन की पहल पर पान मसाला के 11 ब्रांडों पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगाया गया था।

आईएएस पूजा सिंघल को विभाग मिलेगा या नहीं, फैसला 21 को
Published / 2025-02-17 20:56:01
आईएएस पूजा सिंघल को विभाग मिलेगा या नहीं, फैसला 21 को

आईएएस पूजा सिंघल को विभाग नहीं दिए जाने के ईडी के आवेदन पर सुनवाई पूरी, आदेश सुरक्षित टीम एबीएन, रांची। सिविल कोर्ट स्थित पीएमएलए कोर्ट में सोमवार को मनरेगा घोटाले से प्राप्त अवैध कमाई की राशि का मनी लाउंड्रिंग करने के आरोप में ट्रायल फेस कर रहीं आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल के निलंबन वापस के बाद ईडी ने उनको कोई विभाग नहीं दिये जाने के आवेदन सुनवाई हुई। ईडी की ओर से दिया गया आवेदन पर पूजा सिंघल के वकील ने जवाब दाखिल किया। दाखिल जवाब पर ईडी के वकील ने बहस की। बहस पूरी होने के बाद पीएमएलए के विशेष न्यायाधीश पूजा सिंघल ने आदेश सुरक्षित रख लिया। अदालत अपना आदेश 21 फरवरी को सुनायेगी। ईडी ने अपने आवेदन में कहा कि पूजा सिंघल आपराधिक मुकदमा का सामना कर रही है। ऐसे में निलंबन से मुक्ति के बाद उनकी पोस्टिंग की जाती है तो सुनवाई प्रभावित हो सकती है। ईडी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला भी दिया है। मालूम हो कि पूजा सिंघल को नए कानून बीएनएसएस के तहत बीते 7 दिसंबर को पीएमएलए कोर्ट ने जमानत की सुविधा दी थी। जेल से निकलने के बाद राज्य सरकार ने ढाई साल से अधिक समय से निलंबित चल पूजा सिंघल का निलंबन वापस ले ली। इसके बाद उन्होंने कार्मिक विभाग में योगदान दिया है।

नंबर प्लेट से छेड़खानी करने पर होंगी सख्त कार्रवाई, सक्रिय हुई पुलिस
Published / 2025-02-16 18:41:44
नंबर प्लेट से छेड़खानी करने पर होंगी सख्त कार्रवाई, सक्रिय हुई पुलिस

नंबर प्लेट के साथ छेड़खानी करने वालों की खैर नहींपुलिस ने दिखाये सख्त तेवर, अब एक्शन की तैयारीटीम एबीएन, रांची। राजधानी रांची में जब से ऑनलाइन चालान कटना शुरू हुआ है, तब से ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले लोग तरह-तरह की जुगाड़ लगाकर फाइन से बचने में लगे हुए हैं। कोई नंबर प्लेट पर टेप चिपका दे रहा है तो कोई एक डिजिट नंबर ही मिटा दे रहा है। इसे देखते हुए नंबर टेंपरिंग करने वालों के खिलाफ एफआईआर की तैयारी शुरू हो गई है।राजधानी में ट्रैफिक पुलिस इन दोनों खासा परेशान है। दरअसल, ट्रैफिक नियमों में ईमानदारी बरतने के साथ-साथ चालान से बचने के लिए भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने जैसे मामलों पर ब्रेक लगाने के लिए ट्रैफिक पुलिस के द्वारा शहर में लगाए गए ऑटोमेटिक कैमरे के जरिए चालान काटा जा रहा है। मैन्युअल चालान काटना लगभग बंद कर दिया गया है।नतीजा यह हुआ कि ट्रैफिक नियमों को ताक पर रखकर चलने वाले लोग ऑनलाइन चालान से बचने के लिए अपने नंबर प्लेट को ही टेंपर कर वाहन चलाने लगे। गलत नंबर प्लेट होने की वजह से कई लोगों के फाइन नहीं कटे, इसके लिए कुछ लोगों ने किसी अन्य व्यक्ति के कार का नंबर अपनी स्कूटी में लगाकर चलाना शुरू कर दिया। यह मामला इतनी बढ़ गई कि गलती स्कूटी की और चालान पहुंचना कार मालिकों के पास शुरू हो गया।

रांची नगर निगम ने होल्डिंग व ट्रेड लाइसेंस की जांच कर शुरू की कार्रवाई
Published / 2025-02-15 22:54:21
रांची नगर निगम ने होल्डिंग व ट्रेड लाइसेंस की जांच कर शुरू की कार्रवाई

टीम एबीएन, रांची। रांची नगर निगम के राजस्व शाखा की टीम के द्वारा निगम क्षेत्रांतर्गत लगातार होल्डिंग व ट्रेड लाइसेंस की जांच करते हुए विभिन्न भवनों एवं प्रतिष्ठानों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। इस क्रम में आज दिनांक 15.02.2025 को सहायक प्रशासक के नेतृत्व में राजस्व शाखा की गठित टीम के द्वारा मेन रोड स्थित विभिन्न भवनों की जांच की गई। जिसमें सर्वप्रथम सेंट्रो मॉल की जांच की गई एवं भवन परिसर के क्षेत्र की मापी की गई। मापी के क्रम में क्षेत्रफल में अंतर पाया गया। पूर्व में मॉल द्वारा 1,02,732 sq. ft. क्षेत्र का निर्धारण किया गया था, परन्तु मापी के उपरांत 1,98,427 sq. ft. क्षेत्रफल पाया गया। इसके साथ ही मॉल की ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट की जांच की जिसपर पाया गया कि जून माह से मॉल की ऑक्यूपेंसी निर्धारित है। जिसपर सहायक प्रशासक द्वारा जून माह से ऑक्यूपेंसी तिथि मानते हुए री-असेसमेंट करते हुए सात दिनों के भीतर कर का भुगतान करने का निर्देश दिया गया। इसके अलावा राज अस्पताल को तीन दिनों के भीतर री असेसमेंट करने का निर्देश दिया गया। टीम के द्वारा चर्च कॉम्प्लेक्स परिसर की मापी की गई एवं भवन के ग्राउंड फ्लोर के मेज़ नाइन में कुछ नए दुकानें पाई गई, जिसपर सहायक प्रशासक द्वारा उक्त प्रतिष्ठानों को तीन दिनों के भीतर री-असेसमेंट करने एवं टॉप फ्लोर में अधिष्ठापित होर्डिंग्स व मोबाइल टावर के कार्पेट एरिया को गणना में सम्मिलित करते हुए कर का भुगतान करने का निर्देश दिया गया। इसके अलावा मेन रोड स्थित कच्ची बिल्डिंग की भी जांच की गई और तीन दिनों के भीतर री-असेसमेंट करने का निर्देश दिया गया। जांच टीम में नगर प्रबंधक, निगम के कर संग्रहकर्ता, एजेंसी के कर संग्रहकर्ता एवं राजस्व शाखा की अन्य कर्मी उपस्थित थे।

मेडिकल क्लेम पर झारखंड हाई कोर्ट सख्त
Published / 2025-02-11 22:58:00
मेडिकल क्लेम पर झारखंड हाई कोर्ट सख्त

शारीरिक-मानसिक बीमारी के नाम पर भेदभाव न करें, मेडिकल क्लेम पर झारखंड HC की टिप्पणीटीम एबीएन, रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि मानसिक बीमारी के इलाज में होने वाले खर्च को मेडिकल क्लेम के दायरे से बाहर नहीं किया जा सकता। कोई भी कंपनी अपने मौजूदा या रिटायर्ड कर्मचारियों को मेडिकल क्लेम के भुगतान में शारीरिक और मानसिक बीमारी के नाम पर भेदभाव नहीं कर सकती।यह फैसला जस्टिस आनंद सेन की बेंच ने झारखंड स्थित कोल इंडिया की सहयोगी कंपनी बीसीसीएल (भारत कोकिंग कोल लिमिटेड) के एक रिटायर एग्जीक्यूटिव की याचिका पर सुनवाई के बाद सुनाया। अदालत ने बीसीसीएल (BCCL) को आदेश दिया कि वह याचिकाकर्ता की पत्नी के मानसिक स्वास्थ्य इलाज पर किए गए खर्च का भुगतान करे।मानसिक व शारीरिक बीमारियों के इलाज में भेदभाव न करेंबीसीसीएल ने कोल इंडिया और उसकी सहयोगी कंपनियों में लागू कंट्रीब्यूटरी पोस्ट रिटायरमेंट मेडिकेयर स्कीम फॉर एक्जीक्यूटिव्स ऑफ सीआईएल एंड इट्स सब्सिडियरीज के प्रावधान का हवाला देते हुए मानसिक बीमारी के इलाज में किए गए खर्च का भुगतान करने से इनकार कर दिया था। अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद अपने फैसले में कहा कि मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 की धारा 21 यह स्पष्ट करती है कि मानसिक और शारीरिक बीमारियों के इलाज में भेदभाव नहीं किया जा सकता।मेडिकल क्लेम को लेकर झारखंड HC ने क्या कहाकोर्ट ने अधिनियम का हवाला देते हुए कहा है कि प्रत्येक बीमाकर्ता को मानसिक रोगों के उपचार के लिए उसी तरह की स्वास्थ्य बीमा सुविधा प्रदान करनी होगी, जैसे कि शारीरिक बीमारियों के लिए की जाती है। कोर्ट ने कहा, भारत सरकार के अधिनियम के अनुसार, किसी भी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी में मानसिक रोगों के उपचार को बाहर करने के लिए प्रावधान नहीं हो सकता।कोर्ट ने पाया कि कोल इंडिया और इसकी सहयोगी कंपनियों में मेडिकल बीमा की जो योजना लागू है, उसमें मानसिक रोगों के उपचार के खर्च के भुगतान का प्रावधान नहीं है। लेकिन, यह प्रावधान मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के सीधे विरोध में है।कोई भी नीति संसद से पारित कानून के खिलाफ नहीं हो सकतीकोर्ट ने कहा, कोल इंडिया लिमिटेड और उसकी सहायक कंपनियां संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत राज्य की परिभाषा में आती हैं। उनकी कोई भी नीति या संकल्प संसद द्वारा पारित किसी भी कानून के खिलाफ नहीं हो सकती। अगर कोई संकल्प या उसका कोई भाग किसी संसदीय कानून के विपरीत है, तो वह भाग अमान्य माना जाएगा।

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