अडानी और उनकी कंपनियों के खिलाफ कार्यवाही से भारत सरकार का कोई लेना-देना नहींएबीएन सेंट्रल डेस्क। सरकार ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिका में प्रख्यात उद्योगपति गौतम अडानी और उनकी कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही से सरकार का कोई लेना-देना नहीं है तथा इस बारे में अमेरिकी प्रशासन ने भारत सरकार को पहले कोई सूचना नहीं दी थी।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने यहां नियमित ब्रीफिंग के दौरान अडानी पर पूछे गये एक सवाल के जवाब में कहा, यह निजी फर्मों और व्यक्तियों तथा अमेरिकी न्याय विभाग से जुड़ा एक कानूनी मामला है। ऐसे मामलों में स्थापित प्रक्रियाएं और कानूनी रास्ते हैं, जिसे लेकर हमारा मानना है कि उनका पालन किया जायेगा।उन्होंने स्पष्ट किया, इस मुद्दे पर भारत सरकार को पहले से सूचित नहीं किया गया था। समन/गिरफ्तारी वारंट की तामील के लिए किसी विदेशी सरकार द्वारा किया गया कोई भी अनुरोध आपसी कानूनी सहायता का हिस्सा है। ऐसे अनुरोधों की गुण-दोष के आधार पर जांच की जाती है। हमें इस मामले पर अमेरिका की ओर से अभी तक कोई अनुरोध नहीं मिला है।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, आरक्षण के लाभ के लिए धर्म परिवर्तन को संविधान के साथ धोखाधड़ीन्यायमूर्ति महादेवन ने पीठ के लिए 21 पृष्ठ का फैसला लिखाएबीएन सेंट्रल डेस्क (नयी दिल्ली)। सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि बिना किसी वास्तविक आस्था के केवल आरक्षण का लाभ पाने के लिए किया गया धर्म परिवर्तन संविधान के साथ धोखाधड़ी है। न्यायमूर्ति पंकज मिथल और न्यायमूर्ति आर महादेवन ने सी सेल्वरानी की याचिका पर 26 नवंबर को यह फैसला सुनाया तथा मद्रास हाई कोर्ट के 24 जनवरी के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें इसाई धर्म अपना चुकी एक महिला को अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र देने से इनकार कर दिया गया था। महिला ने बाद में आरक्षण के तहत रोजगार का लाभ प्राप्त करने के लिए हिंदू होने का दावा किया था। न्यायमूर्ति महादेवन ने पीठ के लिए 21 पृष्ठ का फैसला लिखा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कोई व्यक्ति किसी अन्य धर्म को तभी अपनाता है, जब वह वास्तव में उसके सिद्धांतों, धर्म और आध्यात्मिक विचारों से प्रेरित होता है। उन्होंने कहा, अगर धर्म परिवर्तन का मुख्य मकसद दूसरे धर्म में वास्तविक आस्था होने के बजाय आरक्षण का लाभ प्राप्त करना है तो इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि ऐसी गलत मंशा रखने वाले लोगों को आरक्षण का लाभ देने से आरक्षण नीति के सामाजिक लोकाचार को ही क्षति पहुंचेगी। पीठ के समक्ष प्रस्तुत साक्ष्य से स्पष्टतया पता चलता है कि अपीलकर्ता ईसाई धर्म को मानती थी तथा नियमित रूप से गिरजाघर में जाकर सक्रिय रूप से इस धर्म का पालन करती थी। पीठ ने कहा, इसके बावजूद वह हिंदू होने का दावा करती है और नौकरी के लिए अनुसूचित जाति समुदाय का प्रमाण-पत्र मांगती है। पीठ ने कहा, इस तरह का दोहरा दावा अस्वीकार्य है और वह ईसाई धर्म अपनाने के बावजूद एक हिंदू के रूप में अपनी पहचान बनाये नहीं रख सकती हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि महिला ईसाई धर्म में आस्था रखती है और महज नौकरी में आरक्षण का लाभ उठाने के उद्देश्य से वह हिंदुत्व का अब तक पालन करने का दावा करती है। ऐसे में महिला को अनुसूचित जाति का दर्जा प्रदान करना आरक्षण के मूल उद्देश्य के खिलाफ होगा और संविधान के साथ धोखाधड़ी होगी।शीर्ष अदालत ने रेखांकित किया कि केवल आरक्षण का लाभ पाने के लिए अपनाये गये धर्म में वास्तविक आस्था के बिना धर्म परिवर्तन करना आरक्षण नीति के मौलिक सामाजिक उद्देश्यों को कमजोर करता है और महिला का कार्य हाशिये पर पड़े समुदायों के उत्थान के उद्देश्य से आरक्षण नीतियों की भावना के विपरीत है। हिंदू पिता और ईसाई माता की संतान सेल्वरानी को जन्म के कुछ समय बाद ही ईसाई धर्म की दीक्षा दी गई थी, लेकिन बाद में उन्होंने हिंदू होने का दावा किया और 2015 में पुडुचेरी में उच्च श्रेणी लिपिक के पद पर आवेदन करने के लिए अनुसूचित जाति प्रमाण-पत्र मांगा। सेल्वरानी के पिता वल्लुवन जाति से थे, जो अनुसूचित जाति में शामिल है और उन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया था, जिसकी पुष्टि दस्तावेजी साक्ष्यों से हो चुकी है। फैसले में कहा गया कि अपीलकर्ता ने ईसाई धर्म का पालन करना जारी रखा, जैसा कि नियमित रूप से गिरजाघर जाने से पता चलता है। इससे उनके हिंदू होने का दावा अस्वीकार्य हो जाता है। पीठ ने कहा कि ईसाई धर्म अपनाने वाले व्यक्ति अपनी जातिगत पहचान खो देते हैं और अनुसूचित जाति के लाभ का दावा करने के लिए उन्हें पुन: धर्मांतरण तथा अपनी मूल जाति द्वारा स्वीकार किए जाने का ठोस सबूत देना होगा। फैसले में कहा गया कि अपीलकर्ता के पुन: हिंदू धर्म में धर्मांतरण या वल्लुवन जाति द्वारा धर्म स्वीकार करने का कोई ठोस सबूत नहीं है।
हेमंत सोरेन को कोर्ट से नहीं मिली राहत, समन की अवहेलना मामले में 4 दिसंबर को अदालत में पेश होने का आदेशटीम एबीएन, रांची। हेमंत सोरेन को समन की अवहेलना मामले में कोर्ट ने राहत नहीं दी है। हेमंत सोरेन को 4 दिसंबर को सशरीर अदालत में पेश होने के आदेश जारी किये गये हैं। एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष जज सार्थक शर्मा की अदालत ने यह आदेश दिया है। इस मामले में कोर्ट ने 11 नवंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। बता दें कि 8.8 एकड़ जमीन के कथित फर्जीवाड़ा मामले में पूछताछ के लिए ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को 10 बार समन जारी किया था।हेमंत सोरेन 20 जनवरी को आठवें समन पर ईडी के सामने पेश हुए। जांच एजेंसी ने कहा कि 8 समन पर उपस्थित नहीं होना समन की अवहेलना है। वहीं कोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए मुकदमा चलाने का निर्देश दिया था।
गौतम अदाणी व सात अन्य के खिलाफ प्रत्यर्पण की हो सकती है कोशिशभारत-अमेरिका प्रत्यर्पण संधि पर 1997 में हस्ताक्षर किये गये थेएबीएन सेंट्रल डेस्क (न्यूयॉर्क)। भारतीय उद्योगपति गौतम अदाणी और सात अन्य के खिलाफ मामला काफी आगे बढ़ सकता है और इससे गिरफ्तारी वारंट जारी होने के साथ प्रत्यर्पण के प्रयास भी हो सकते हैं। करोड़ों डॉलर के रिश्वतखोरी मामले में अमेरिका में दीवानी और आपराधिक आरोप दायर किये जाने के बाद, यहां के एक प्रमुख अटॉर्नी ने यह बात कही। अमेरिकी न्याय विभाग ने भारत के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति अदाणी तथा उनके भतीजे सागर अदाणी सहित सात अन्य पर महंगी सौर ऊर्जा खरीदने के लिए आंध्र प्रदेश और ओडिशा के अधिकारियों को रिश्वत देने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, इसमें अधिकारियों के नाम का खुलासा नहीं किया गया है। इन परियोजनाओं से समूह को 20 साल से अधिक समय में दो अरब डॉलर से अधिक लाभ होने का उम्मीद है। हालांकि, अदाणी समूह ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि अमेरिकी अभियोजकों द्वारा लगाये गये आरोप निराधार हैं और समूह सभी कानूनों का अनुपालन करता है। भारतीय-अमेरिकी वकील रवि बत्रा ने बृहस्पतिवार को पीटीआई-भाषा से कहा, अमेरिकी अटॉर्नी ब्रायन पीस को अदाणी और सात अन्य के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने और वहां भेजे जाने का अधिकार है, जहां वे रहते हैं। उन्होंने कहा, अगर उस देश के पास प्रत्यर्पण संधि है, जैसा कि भारत के पास है, तो संप्रभु राष्ट्रों के बीच द्विपक्षीय समझौते के अनुसार, मूल देश को अमेरिका द्वारा प्रत्यर्पित व्यक्ति को सौंपना चाहिए। एक प्रक्रिया है जिसका मूल देश को अपने कानूनों के अनुरूप पालन करना चाहिए। भारत-अमेरिका प्रत्यर्पण संधि पर 1997 में हस्ताक्षर किए गए थे। न्यूयॉर्क के पूर्वी जिले के अमेरिकी अटॉर्नी पीस ने 62 वर्षीय अदाणी, उनके भतीजे सागर (समूह की नवीकरणीय ऊर्जा इकाई अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक) और इसके पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) विनीत एस जैन के खिलाफ पांच मामलों में आपराधिक अभियोग की घोषणा की है। अभियोग में उन पर झूठे और भ्रामक बयानों के आधार पर अमेरिकी निवेशकों और वैश्विक वित्तीय संस्थानों से धन प्राप्त करने की कई अरब डॉलर की योजना में उनकी भूमिका, प्रतिभूति और वायर धोखाधड़ी और वास्तविक प्रतिभूति धोखाधड़ी करने के षड्यंत्र का आरोप लगाया गया है। अभियोग में एज्योर पॉवर ग्लोबल के पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) रंजीत गुप्ता और पूर्व मुख्य रणनीति एवं वाणिज्यिक अधिकारी रूपेश अग्रवाल तथा एक कनाडाई संस्थागत निवेशक के पूर्व कर्मचारी सिरिल कैबनेस, सौरभ अग्रवाल और दीपक मल्होत्रा पर विदेशी भ्रष्ट आचरण अधिनियम का उल्लंघन करने की साजिश का आरोप लगाया गया है। बुधवार को पीस ने कहा था कि आरोपियों ने अरबों डॉलर के अनुबंध हासिल करने के लिए भारत के सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने के लिए एक विस्तृत योजना बनाई और अदाणी, सागर और जैन ने रिश्वत योजना के बारे में झूठ बोला क्योंकि वे अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों से पूंजी जुटाने की कोशिश कर रहे थे। अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, विदेशी भ्रष्ट आचरण अधिनियम (एफसीपीए) किसी कार्रवाई को प्रभावित करने, गैरकानूनी चूक करने या अनुचित लाभ प्राप्त करने के लिए विदेशी अधिकारियों को भुगतान करने पर प्रतिबंध लगाता है। अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (एसईसी) ने गौतम और सागर अदाणी तथा एज्योर पावर के कार्यकारी कैबनेस पर संघीय प्रतिभूति कानूनों के धोखाधड़ी-रोधी प्रावधानों का उल्लंघन करने का भी आरोप लगाया है।
चुनाव अधिकारी के अलावा सभी वहनों का प्रवेश रहेगा वर्जितएबीएन न्यूज नेटवर्क, बोकारो/गढ़वा। झारखंड विधानसभा चुनाव की मतगणना को लेकर बोकारो के चास कृषि बाजार और गढ़वा के बाजार समिति को मतगणना स्थल बनाया गया है। जहां पर शनिवार 23 नवंबर को मतगणना की जानी है। जिसको लेकर सारी तैयारी कर ली गयी है। बोकारो में चारों विधानसभा के लिए चार अलग-अलग मतगणना केंद्र बनाये गये हैं। बोकारो विधानसभा में 25 टेबल लगाये गये हैं जहां 25 राउंड गिनती की जायेगी। वहीं चंदनकियारी, बेरमो और गोमिया में 20-20 टेबल लगे हैं और 20-20 राउंड गिनती होगी। जिले के चारों विधानसभा के सभी टेबल पर तीन-तीन मतगणना कर्मी तैनात किये गये हैं। पोस्टल बैलेट के लिए अलग से हॉल का इंतजाम किया गया है। पोस्टल मतगणना के लिए 35 टेबल लगाये गये हैं। प्रत्येक टेबल पर चार-चार मतगणना कर्मी तैनात किये गये हैं। वज्रगृह की थ्री लेयर सुरक्षा है। सीआरपीएफ, सीएससी और जिला पुलिस बल को तैनात किया गया है। बोकारो डीसी विजया जाधव ने बताया कि मतगणना की सारी तैयारी पूरी कर ली गयी है। विधानसभा सीट के हिसाब से मतगणना टेबल लगाये गये हैं। मतगणना कर्मियों की प्रतिनियुक्ति कर दी गयी है। वहीं गढ़वा जिले में आब्जर्वर के साथ-साथ शुक्रवार को डीसी और एसपी द्वारा मतगणना स्थल का जायजा लिया गया, जहां दोनों अधिकारियों ने बताया कि हमलोगों की तैयारी को आब्जर्वर ने संतोषजनक बताया। इस दौरान गढ़वा डीसी ने मीडिया से संवाद करते हुए लोगों से अपील की है कि जिस तरह आवाम के सहयोग से शांतिपूर्ण तरीके से वोटिंग संपन्न हुआ है, ठीक उसी तरह लोगों से सहयोग की जरूरत है। ताकि मतगणना के साथ गढ़वा में अंतिम चुनावी प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से पूरा हो सके।
अंतिम चरण की 38 सीटों के लिए आज शाम थम गया चुनाव प्रचार का शोर, 20 नवंबर को होगा मतदानटीम एबीएन, रांची। रविवार को निर्वाचन सदन, धुर्वा में पत्रकार वार्ता करते हुए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार ने कहा है कि दूसरे चरण के चुनाव प्रचार का कार्य सोमवार शाम थम गया। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार की समाप्ति के साथ चुनाव कार्य को लेकर वहां गये (जो वहां के वोटर नहीं हैं) राजनीतिक लोगों को वहां से चले जाना होगा। ऐसे लोगों को कैंपेन की अवधि समाप्ति के बाद पकड़े जाने पर उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होगी। साथ ही उन्होंने कहा कि 20 नवंबर को मतदान कराने के लिए पोलिंग पार्टियां 19 नवंबर को अपने-अपने मतदान केंद्रों पर जायेंगी। इस चरण के चुनाव में किसी भी बूथ पर हेलीड्रापिंग से मतदान कर्मियों को नहीं भेजा जायेगा।मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार ने कहा कि निजी वाहन पर किसी तरह का बोर्ड, बैनर आदि लगा कर चलने पर कार्रवाई होगी। इसके लिए परिवहन विभाग को निर्देशित किया गया है कि वे चेकिंग करें और किसी भी वाहन पर बोर्ड, बैनर आदि मिलने पर मोटर ह्वैकिल नियमों के तहत यथोचित कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने बताया कि दूसरे चरण के 14,218 बूथों में से 48 बूथ को यूनिक बूथ के रूप में विकसित किया गया है। वहीं महिलाओं द्वारा संचालित मतदान केंद्रों की संख्या 239 है। 22 मतदान केंद्र दिव्यांगजनों द्वारा संचालित होंगे। जबकि, युवाओं के हाथों में 26 मतदान केंद्रों की व्यवस्था रहेगी। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार ने बताया कि आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद से लेकर अब तक 196 करोड़ से अधिक की अवैध सामग्री और नकदी की जब्ती की जा चुकी है। वहीं आदर्श आचार संहिता उल्लंघन के मामले में अब तक 85 लोगों पर एफआइआर दर्ज किया गया है। बता दें कि इस चरण में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, पूर्व डिप्टी सीएम सुदेश महतो, विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो, मंत्री इरफान अंसारी, हफीजुल हसन, दीपिका पांडेय सिंह और बेबी देवी जैसे दिग्गज नेताओं के भाग्य का फैसला होगा।
झारखंड हाईकोर्ट ने MS Dhoni को जारी किया नोटिसटीम एबीएन, रांची। झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने रांची की निचली अदालत में दर्ज शिकायतवाद व संज्ञान आदेश को चुनौती देनेवाली क्रिमिनल रिट याचिका पर मंगलवार को सुनवाई की। अदालत ने प्रार्थी का पक्ष सुनने के बाद मामले के प्रतिवादी भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। साथ ही धौनी को जवाब दायर करने को कहा।प्रार्थी मिहिर दिवाकर की ओर से अधिवक्ता अवनीश शेखर ने पक्ष रखते हुए अदालत को बताया कि महेंद्र सिंह धोनी ने अरका स्पोर्ट्स एंड मैनेजमेंट प्रालि के निदेशक मिहिर दिवाकर व उनकी पत्नी सौम्या दास पर 15 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए रांची की निचली अदालत में शिकायतवाद दायर किया है। उसकी सुनवाई करते हुए निचली अदालत ने प्रार्थी के खिलाफ संज्ञान आदेश पारित किया है। अधिवक्ता शेखर ने शिकायतवाद व संज्ञान आदेश को निरस्त करने का आग्रह किया। उल्लेखनीय है कि प्रार्थी मिहिर दिवाकर व अन्य ने क्रिमिनल रिट याचिका दायर की है।उन्होंने दर्ज शिकायतवाद व निचली अदालत द्वारा 20 मार्च को मामले में आरोपी मिहिर दिवाकर और उनकी पत्नी सौम्या दास के खिलाफ लिये गये संज्ञान आदेश को चुनौती दी है। अदालत ने आरोपी मिहिर दिवाकर, उनकी पत्नी सौम्या दास व उनकी कंपनी अरका स्पोर्ट्स मैनेजमेंट को समन जारी किया था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अगर आपने अभी तक अपने पैन कार्ड को आधार कार्ड से लिंक नहीं किया है, तो इसे 31 दिसंबर से पहले जरूर कर लें। ऐसा न करने पर आपका पैन कार्ड निष्क्रिय हो सकता है, जिससे आपको वित्तीय लेन-देन में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। सरकार ने यह कदम वित्तीय धोखाधड़ी रोकने के लिए उठाया है, क्योंकि कई फिनटेक कंपनियां बिना अनुमति के पैन डेटा का गलत उपयोग कर रही थीं। गृह मंत्रालय ने आयकर विभाग को निर्देश दिया है कि पैन के माध्यम से व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा को बढ़ाया जाये। आनलाइन प्रक्रिया वेबसाइट पर जायें - आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल की वेबसाइट www.incometax.gov.in पर जाएं। लिंक पर क्लिक करें - होमपेज पर क्विक लिंक्स विकल्प में लिंक आधार स्टेटस पर क्लिक करें। डिटेल्स दर्ज करें - अपना पैन और आधार कार्ड नंबर दर्ज करें। लिंक की स्थिति जांचें - यदि आपका पैन और आधार लिंक है, तो संदेश में जानकारी दी जाएगी। अगर लिंक नहीं है, तो लिंक आधार विकल्प पर क्लिक करें और सभी आवश्यक विवरण भरें।एसएमएस के जरिए लिंक करने की प्रक्रियाएसएमएस भेजें - अपने रजिस्टर्ड मोबाइल से यूआइडीपीएएन (स्पेस) 12 अंकों का आधार नंबर (स्पेस) पैन नंबर टाइप करें। नंबर पर भेजें - 567678 या 56161 पर यह एसएमएस भेजें। कन्फर्मेशन मैसेज - लिंक होने के बाद आपके पास एक कन्फर्मेशन मैसेज आ जायेगा।ध्यान दें: यह अंतिम तारीख नजदीक है, ऐसे में जल्द से जल्द आधार-पैन लिंक करें और अपनी वित्तीय पहचान को सुरक्षित रखें।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने 7:2 के बहुमत के फैसले में मंगलवार को कहा कि संविधान के तहत सरकारों को आम भलाई के लिए निजी स्वामित्व वाले सभी संसाधनों को अपने कब्जे में लेने का अधिकार नहीं है। हालांकि, भारत के प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली नौ न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि सरकारें कुछ मामलों में निजी संपत्तियों पर दावा कर सकती हैं।प्रधान न्यायाधीश द्वारा सुनाये गये बहुमत के फैसले में न्यायमूर्ति कृष्णा अय्यर के पिछले फैसले को खारिज कर दिया गया जिसमें कहा गया था कि सभी निजी स्वामित्व वाले संसाधनों को संविधान के अनुच्छेद 39 (बी) के तहत वितरण के लिए सरकारों द्वारा अधिगृहीत किया जा सकता है।न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने अपने और उस पीठ के छह अन्य न्यायाधीशों के लिए फैसला लिखा, जिसने इस जटिल कानूनी सवाल पर निर्णय किया कि क्या निजी संपत्तियों को अनुच्छेद 39 (बी) के तहत समुदाय के भौतिक संसाधन माना जा सकता है और आम भलाई के वास्ते वितरण के लिए सरकार के अधिकारियों द्वारा अपने कब्जे में लिया जा सकता है। इसने उन कई फैसलों को पलट दिया, जिनमें समाजवादी सोच को अपनाया था और कहा गया था कि सरकारें आम भलाई के लिए सभी निजी संपत्तियों पर कब्जा कर सकती हैं।न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना ने प्रधान न्यायाधीश द्वारा लिखे गए बहुमत के फैसले से आंशिक रूप से असहमत जताई, जबकि न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया ने सभी पहलुओं पर असहमति जतायी। फैसला अभी सुनाया जा रहा है। अनुच्छेद 31सी, अनुच्छेद 39(बी) और (सी) के तहत बनाए गए कानून की रक्षा करता है जो सरकार को आम भलाई के वास्ते वितरण के लिए निजी संपत्तियों सहित समुदाय के भौतिक संसाधनों को अपने कब्जे में लेने का अधिकार देता है।शीर्ष अदालत ने 16 याचिकाओं पर सुनवाई की जिनमें 1992 में मुंबई स्थित प्रॉपर्टी ओनर्स एसोसिएशन (पीओए) द्वारा दायर मुख्य याचिका भी शामिल थी। पीओए ने महाराष्ट्र आवास और क्षेत्र विकास प्राधिकरण (म्हाडा) अधिनियम के अध्याय 8-ए का विरोध किया है। 1986 में जोड़ा गया यह अध्याय सरकारी प्राधिकारियों को उपकरित भवनों और उस भूमि का अधिग्रहण करने का अधिकार देता है जिस पर वे बने हैं, यदि वहां रहने वाले 70 प्रतिशत लोग पुनर्स्थापन उद्देश्यों के लिए ऐसा अनुरोध करते हैं।
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