अब झारखंड में बिजली दर निर्धारण के नियमों में होगा बदलाव, ड्राफ्ट तैयार टीम एबीएन, रांची। अब झारखंड में बिजली दर निर्धारण के नियमों में बदलाव होगा। इसके लिए झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग ने ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। ड्राफ्ट के मुताबिक नये नियम 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2031 तक की अवधि के लिए लागू होंगे।नये नियम का उद्देश्य झारखंड राज्य में वितरण लाइसेंसधारियों द्वारा प्रतिस्पर्धा, दक्षता, संसाधनों के किफायती उपयोग, अच्छे प्रदर्शन और इष्टतम निवेश को प्रोत्साहित करना है। क्या है नये नियम में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा : विनियमों का उद्देश्य वितरण लाइसेंसधारियों के बीच प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना है। दक्षता और संसाधनों का किफायती उपयोग : विनियमों का उद्देश्य वितरण लाइसेंसधारियों को दक्षता और संसाधनों का किफायती उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना है। नये नियम की खास बातें व्हीलिंग टैरिफ : व्हीलिंग व्यवसाय के लिए निर्धारित एआरआर का उपयोग बिजली की व्हीलिंग के लिए व्हीलिंग टैरिफ निर्धारित करने के लिए किया जायेगा। खुदरा आपूर्ति टैरिफ : खुदरा आपूर्ति व्यवसाय के लिए निर्धारित एआरआर का उपयोग बिजली की खुदरा बिक्री के लिए खुदरा आपूर्ति टैरिफ निर्धारित करने के लिए किया जायेगा। ओपन एक्सेस उपभोक्ता : ओपन एक्सेस उपभोक्ताओं के लिए व्हीलिंग टैरिफ, क्रॉस-सब्सिडी अधिभार और अतिरिक्त अधिभार निर्धारित किया जायेगा।ये भी मापदंड किये गये हैं तय लेखा विवरण का अर्थ प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए तैयार किये गये वित्तीय विवरणों से होगा। अन्य व्यवसाय से आय का अर्थ वितरण लाइसेंसधारी को टैरिफ के अलावा विनियमित व्यवसाय से संबंधित परिसंपत्तियों या जनशक्ति के उपयोग के लिए प्राप्त आय से होगा। नॉन-टैरिफ इनकम का मतलब विनियमित व्यवसाय से संबंधित शुद्ध आय से होगा, जिसमें अन्य व्यवसाय से कोई आय शामिल नहीं है।
आइएएस अधिकारी विनय चौबे को बड़ी राहत, झारखंड शराब घोटाले में अदालत से मिली जमानतटीम एबीएन, रांची। झारखंड शराब घोटाला मामले में 92 दिनों से जेल में बंद वरीय आईएएस अधिकारी विनय चौबे को बड़ी राहत मिली है। 25-25 हजार रुपये के दो निजी मुचलके जमा करने के साथ एसीबी कोर्ट ने उन्हें बीएनएसएस की धारा 187(2) के तहत बुधवार को जमानत दे दी।समय पर चार्जशीट फाइल नहीं होने का मिला लाभइसके साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया कि चौबे राज्य से बाहर जाने से पहले अदालत को सूचित करेंगे और ट्रायल के दौरान अपना मोबाइल नंबर नहीं बदलेंगे। गौरतलब है कि चौबे की गिरफ्तारी को 92 दिन हो चुके हैं, लेकिन अब तक एसीबी ने आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं की, जिसके कारण उन्हें जमानत का लाभ मिला। अदालत में चौबे की ओर से अधिवक्ता देवेश आजमानी ने पैरवी की। चौबे झारखंड सरकार में वरीय पद पर कार्यरत थे और उन पर शराब घोटाले में संलिप्त होने का आरोप है।
परिसर में छात्र की मौत के मामले में बीआईटी-मेसरा पर अदालत ने लगाया 20 लाख का जुर्माना टीम एबीएन, रांची। झारखंड उच्च न्यायालय ने मेसरा स्थित बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान (बीआईटी) परिसर में पिछले साल हुई एक छात्र की हत्या के मामले में संस्थान पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। यह जुमार्ना छात्र के माता-पिता को दिया जायेगा। अदालत ने विद्यार्थियों के सामने आने वाली आपात चिकित्सा स्थितियों से निपटने के लिए राज्य भर के शैक्षणिक संस्थानों और विद्यालयों द्वारा पालन किए जाने वाले दिशा-निर्देश भी तैयार किये।न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की पीठ ने कहा कि बीआईटी-मेसरा अपने संरक्षण में एक छात्र की सुरक्षा करने के अपने कर्तव्य में विफल रहा और संस्थागत विफलता के कारण एक व्यक्ति की जान चली गयी। अदालत ने 12 अगस्त को दिये आदेश में कहा कि झारखंड के सभी शैक्षणिक संस्थानों को एम्बुलेंस सुविधाओं वाले सरकारी और निजी अस्पतालों की एक सूची बनानी होगी।न्यायाधीश ने आदेश दिया कि प्रत्येक स्कूल और कॉलेज में एक डिस्पेंसरी या क्लिनिक होना चाहिए, जिसमें 500 से 1,000 विद्यार्थियों पर एक पुरुष व एक महिला चिकित्सक हो और उनमें जीवन रक्षक दवाइयां व अन्य दवाएं उपलब्ध हों। आदेश के मुताबिक, कक्षाओं और संस्थान के प्रमुख स्थानों पर लगे सूचना पट्टों पर अस्पतालों और चिकित्सकों के नाम व उनके संपर्क नंबर भी प्रमुखता से प्रदर्शित किये जाने चाहिए। अदालत ने कक्षाओं और छात्रावास के प्रवेश द्वारों के अंदर और बाहर सीसीटीवी कैमरे लगाने का भी निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि इसके अलावा विद्यार्थियों और संस्थान के बीच संपर्क बनाये रखने के लिए एक अलग शिकायत प्रकोष्ठ और एक छात्र निगरानी दल का गठन किया जाना चाहिए।उच्च न्यायालय ने कहा कि विद्यार्थियों और अभिभावकों की शिकायत निवारण के लिए संस्थान द्वारा एक पोर्टल या वेबसाइट भी बनाई जानी चाहिए। न्यायमूर्ति प्रसाद ने मामले की सुनवाई करते हुए दोषियों मौसम कुमार सिंह, अभिषेक कुमार, साहिल अंसारी और इरफान अंसारी की याचिकाएं खारिज कर दीं।
झारखंड में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, कार्यालय ने 5 राजनीतिक दलों से मांगे शपथ पत्र टीम एबीएन, रांची। भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली द्वारा सूचित किया गया है कि झारखंड के 5 राजनीतिक दलों यथा हजारीबाग के आपका हमारा पार्टी, गिरिडीह के बहुजन सदन मोर्चा, पूर्वी सिंहभूम के झारखंड दिशोम पार्टी, रांची के हम किसान पार्टी एवं झारखंड जनाधिकार पार्टी द्वारा पिछले 06 वर्षों से लोकसभा, विधानसभा के आम चुनाव, उप चुनाव में भाग नहीं लिया गया है। राजनीतिक दलों के पंजीकरण के लिए दिशा-निर्देशों में उल्लेख है कि यदि कोई दल लगातार 6 वर्षों तक चुनाव नहीं लड़ता है, तो उस दल को पंजीकृत दलों की सूची से हटा दिया जायेगा। इसके अलावा, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29ए के अनुसार, दलों को उनके पंजीकरण के समय नाम, पता, पदाधिकारी आदि जैसे विवरण देने होते हैं और किसी भी बदलाव को बिना किसी देरी के आयोग को सूचित करना होता है।
टीम एबीएन, रांची। 15 अगस्त 2025 को रांची नगर निगम क्षेत्र में आने वाली सभी मांस, मछली और मुर्गे की दुकानें पूरी तरह से बंद रहेंगी। इस दिन इन वस्तुओं की खरीद-बिक्री पर भी पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। रांची नगर निगम ने इसका आदेश जारी कर दिया है। नगर निगम के उप प्रशासक द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि सभी मांस, मछली और मुर्गे की दुकानें 15 अगस्त को बंद रहेंगी। यदि कोई दुकानदार या विक्रेता इन वस्तुओं को बेचते हुए पाया जाता है, तो उसके खिलाफ विधिसम्मत कानूनी कार्रवाई की जायेगी। नगर निगम का यह निर्णय स्वतंत्रता दिवस की गरिमा बनाए रखने और सामाजिक सौहार्द को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। निगम ने सभी व्यापारियों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे निदेर्शों का पालन कर प्रशासन को सहयोग करें।
ईडी की कार्रवाई : रांची, धनबाद, जमशेदपुर सहित 12 ठिकानों पर छापेमारी, 750 करोड़ रुपये के जीएसटी घोटाले का मामला टीम एबीएन, रांची। प्रवर्तन निदेशालय ने गुरुवार सुबह झारखंड में 750 करोड़ रुपये के जीएसटी घोटाले से जुड़े मामले में एक साथ 12 ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई रांची, धनबाद, जमशेदपुर, झरिया सहित विभिन्न जिलों में की गई। ईडी की टीम ने जमशेदपुर जिले के आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में स्क्रैप व्यवसायी और प्रमुख उद्यमी ज्ञानचंद जायसवाल उर्फ बबलू जायसवाल के ठिकानों पर एक साथ छापा मारा। बता दें कि जिन स्थानों पर कार्रवाई हुई, उनमें हथियाडीह स्थित शारदा एंडेवर्स फैक्ट्री और बिष्टुपुर के कांट्रैक्टर्स एरिया स्थित उनका आवास शामिल है। सूत्रों के अनुसार, यह छापेमारी जीएसटी फर्जीवाड़े, टैक्स चोरी और फर्जी बिलिंग से जुड़े मामलों में की गयी है। उल्लेखनीय है कि ज्ञानचंद जायसवाल पूर्व में भी इस मामले में जेल जा चुके हैं। ईडी की टीमें दस्तावेजों की गहन जांच कर रही हैं और डिजिटल सबूतों तथा संदिग्ध लेन-देन की पड़ताल में जुटी हुई हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। हालांकि, ईडी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। संभावना जताई जा रही है कि छापेमारी देर शाम तक जारी रह सकती है। झरिया में भी बड़ी कार्रवाई इधर, धनबाद के झरिया थाना क्षेत्र में भी ईडी ने गुरुवार सुबह बड़ी कार्रवाई की। रांची से पहुंची टीम ने स्थानीय व्यवसायी अमित अग्रवाल उर्फ चीनू अग्रवाल के चार नंबर मेन रोड स्थित जगदंबा फर्नीचर दुकान और फार बिल्डिंग स्थित उनके आवास पर एक साथ छापेमारी की। कार्रवाई आर्थिक अनियमितताओं और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की जांच के तहत की गयी है। ईडी की टीम बैंक दस्तावेज, प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड और डिजिटल सबूतों की जांच में जुटी है। कार्रवाई की खबर फैलते ही झरिया बाजार में हड़कंप मच गया और स्थानीय व्यवसायियों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। रांची के पीपी कंपाउंड में भी छापेमारी ईडी ने रांची के पीपी कंपाउंड स्थित कृष्णा अपार्टमेंट के चौथे मंजिल पर एक फ्लैट समेत शहर के अन्य पांच स्थानों पर भी छापेमारी की है। इन ठिकानों से भी एजेंसी डिजिटल रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जुटा रही है। जानकारी के अनुसार, कई जगहों पर छापेमारी अभी भी जारी है।
सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत बढ़ाने की याचिका पर किया सुनवाई से इनकारएबीएन सेन्ट्रल डेस्क (जोधपुर)। गुजरात और राजस्थान में रेप मामलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 86 साल के आसाराम बापू के लिए अब कानूनी राहत के रास्ते तेजी से सिमट रहे हैं। आज राजस्थान हाईकोर्ट में सजा स्थगन को लेकर लंबित याचिका पर एक बार फिर सुनवाई टल गई। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी दो दिन पहले गुजरात मामले में आसाराम की अंतरिम जमानत बढ़ाने की याचिका पर सुनवाई से मना कर दिया था। आसाराम जोधपुर में नाबालिग से रेप और गुजरात के मोटेरा आश्रम में साधिका से कई सालों तक रेप के मामलों में दोषसिद्ध है।बता दें कि जोधपुर में 2013 के नाबालिग से रेप के मामले में आसाराम की सजा के विरुद्ध अपील लंबित है। जनवरी 2025 में राजस्थान हाईकोर्ट ने आसाराम को मार्च 31 तक मेडिकल ग्राउंड पर अस्थायी जमानत दी थी। अप्रैल में गुजरात हाईकोर्ट से मिली राहत खत्म होने पर राजस्थान हाईकोर्ट ने पहले उसकी जमानत बढ़ाने से मना करते हुए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन न करने और कथित उपदेश देने के आरोपों पर हलफनामा मांगा था। जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस विनीत कुमार माथुर की खंडपीठ ने गत आठ जुलाई को आसाराम की अंतरिम जमानत को 12 अगस्त तक बढ़ाया था। कोर्ट के आदेश में स्पष्ट कहा गया कि आवेदक को अब आगे कोई राहत नहीं दी जाएगी। आसाराम ने 2018 में जोधपुर की विशेष पॉक्सो कोर्ट की ओर से सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट में अपील दायर कर रखी है। यह अपील 21 जुलाई और 25 जुलाई को सूचीबद्ध हुई थी, लेकिन सुनवाई नहीं हो सकी थी। आज भी यह मामला कोर्ट संख्या 5 में सूचीबद्ध हुआ, लेकिन एक बार फिर इसकी सुनवाई टल गई।गुजरात हाईकोर्ट से सात अगस्त तक मिली है जमानतसुप्रीम कोर्ट ने आसाराम को 31 मार्च तक मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत दी थी। निर्देश दिया था कि आगे की राहत के लिए गुजरात हाईकोर्ट में याचिका लगा सकता है। गुजरात हाईकोर्ट ने 28 मार्च को आसाराम को 3 महीने की अस्थायी जमानत दी थी। यह अवधि तीस जून को खत्म होने वाली थी लेकिन दस्तावेजी औपचारिकता में देरी को देखते हुए इसे सात जुलाई तक बढ़ाया गया। तीन जुलाई को गुजरात हाईकोर्ट जस्टिस इलेश वोरा और जस्टिस पीएम रावल की पीठ ने आसाराम के वकील के तीन महीने के विस्तार की मांग को खारिज करते हुए सिर्फ एक महीने का समय दिया, जहां से जमानत फिर से 7 अगस्त तक बढ़ा दी है। कोर्ट ने सख्त शब्दों में कहा- यह अंतिम विस्तार होगा और स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार अंतरिम जमानत का सिलसिला कभी खत्म नहीं होने वाली प्रक्रिया न बन जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने 2023 के फैसले में पॉक्सो मामलों में सभी पीड़ित बच्चों की सहायता के लिए अनिवार्य रूप से सपोर्ट पर्सन की नियुक्ति का दिया था आदेश सपोर्ट पर्सन की भूमिका के लिए प्रशिक्षित और दक्ष पेशेवरों की कमी बनी राज्य सरकारों के लिए चुनौती सपोर्ट पर्सन यौन शोषण पीड़ित बच्चों की कानूनी, चिकित्सकीय व भावनात्मक तरीके से मदद करता है और उन्हें मुख्य धारा में वापस लाने में सहायता करता है। एबीएन सेंट्रल डेस्क। बाल यौन शोषण के सभी मामलों में सपोर्ट पर्सन की अनिवार्य रूप से नियुक्ति के 2023 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पीड़ितों की मदद के लिए बड़ी संख्या में सपोर्ट पर्सन की जरूरत को पूरा करने के लिए द सेंटर फॉर लीगल एक्शन एन बिहेवियर चेंज फॉर चिल्ड्रेन (सी-लैब) ने देश में अपनी तरह का पहला सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया है। सी-लैब देश का एक प्रमुख संस्थान है जो कानून के शासन पर अमल के जरिए बच्चों के सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने में योगदान दे रहा है। अहम बात यह है कि देश में 2019 से 2022 के बीच पॉक्सो के तहत दर्ज मामलों में 300 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है जिससे यौन शोषण के पीड़ित बच्चों की सहायता के लिए योग्य व प्रशिक्षित व सपोर्ट पर्सन की कमी साफ दिख रही है। बताते चलें कि सपोर्ट पर्सन वह होता है जो यौन शोषण के पीड़ित बच्चों की कानूनी, चिकित्सकीय व भावनात्मक तरीके से मदद करता है और उन्हें समाज की मुख्य धारा में वापस लाने में सहायता करता है। सपोर्ट पर्सन की अहमियत को रेखांकित करते हुए शीर्ष अदालत ने राज्य सरकारों को पॉक्सो मामलों में हर पीड़ित बच्चे के लिए अनिवार्य रूप से सपोर्ट पर्सन की नियुक्ति का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से सुनिश्चित हुआ कि न्याय की प्रतीक्षा कर रहे यौन शोषण के शिकार 2.39 लाख बच्चों की मदद के लिए प्रशिक्षित सपोर्ट पर्सन की नियुक्ति होगी जो चिकित्सा, कानूनी व भावनात्मक मामलों में उनकी सहायता करेंगे। हालांकि सपोर्ट पर्सन की भूमिका के लिए प्रशिक्षित और दक्ष पेशेवरों की कमी राज्य सरकारों के लिए चुनौती बनी हुई है। सपोर्ट पर्सन जांच व मुकदमे के दौरान बच्चों की मदद करते हैं और सुनिश्चित करते हैं कि वह मुकदमे की कार्यवाही को समझ सके, उसे भावनात्मक सहारा मिले और ज्ञान की कमी या संवेदनहीन तंत्र की वजह से बच्चों को दोबारा पीड़ा की स्थिति से नहीं गुजरना पड़े। इस कोर्स में पहले व्याख्यान के लिए बुलाये गये जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा, न्याय का पैमाना सिर्फ फैसले ही नहीं बल्कि यह भी है कि पूरी प्रक्रिया के दौरान बच्चे की गरिमा और सम्मान का कितना ख्याल रखा गया। इस पूरी यात्रा में पर्दे के पीछे सबसे बड़ी ताकत सपोर्ट पर्सन होते हैं जो उन्हें मार्ग दिखाते हैं, सुरक्षा करते हैं और सबसे बुरे वक्त में पीड़ित परिवार का संबल व सहारा बनते हैं। चाहे कचहरी हो, थाना या अस्पताल हो वे पीड़ित के घावों पर मरहम लगाने और संकट की घड़ी में धैर्य रखने के लिए एक कंधा मुहैया कराते हैं। सी-लैब की यह पहल प्रशिक्षण से कहीं आगे जाती है। यह सुव्यवस्थित रूपांतरण की दिशा में एक कदम है। यदि यह सही तरीके से होता है तो यह न सिर्फ एक पीड़ित बच्चे को फिर से खड़ा होने में मदद करेगा बल्कि उसे यह विश्वास दिलाएगा कि न्याय संभव है। अपनी तरह के पहले 10 हफ्ते के इस कोर्स में आॅनलाइन और क्लासरूम में पढ़ाई का एक मिश्रण होगा। इसमें एसाइनमेंट और फील्ड वर्क भी होगा। इसके पीछे उद्देश्य यह है कि भावी सपोर्ट पर्सन को यौन शोषण के शिकार बच्चों व उनके परिवारों के सामने आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए जरूरी ज्ञान और कौशल से लैस किया जा सके ताकि न्याय के संघर्ष में बच्चा न अकेला पड़े और न ही अनभिज्ञ रहे। इस अनूठे कोर्स की निदेशक डॉ. संगीता गौड़ ने इसके बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा, पॉक्सो जैसे सख्त कानूनों के बावजूद हमारे हजारों बच्चे अदालतों के चक्कर काट रहे हैं या फिर अपने घर में दुबके हुए हैं और उनकी सहायता व मार्गदर्शन के लिए कोई नहीं है। इन बच्चों के साथ संवेदनशीलता से पेश आने की जरूरत है, उनके जख्मों पर प्यार से मरहम लगाने की जरूरत है और इससे भी अहम यह है कि उन बच्चों को बताया जाए कि उनके कानूनी अधिकार क्या हैं और वे किन चीजों के हकदार हैं। एक प्रशिक्षित सपोर्ट पर्सन बच्चों की मदद करते हुए यह सुनिश्चित कर सकता है कि उनकी गरिमा से खिलवाड़ नहीं हो और न्याय अवश्य मिले। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति जो यौन शोषण के शिकार बच्चों की मदद के क्षेत्र में काम कर रहा हो, सपोर्ट पर्सन के रूप में काम कर रहा हो या सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर बाल सुरक्षा तंत्र का हिस्सा बनना चाहता हो, इस कोर्स में दाखिले के लिए आवेदन कर सकता है। पाठ्यक्रम की कुछ मुख्य विशेषताओं में शामिल हैं- बाल अधिकार और बाल संरक्षण की मूलभूत जानकारी, पॉक्सो एवं बाल यौन शोषण मामलों में बुनियादी कानूनी प्रक्रियाएं, सपोर्ट पर्सन की भूमिकाएं और जिम्मेदारियां, पीड़ितों को मुआवजा और उनके पुनर्वास में सहयोग और मार्गदर्शन व बच्चों के अनुकूल संवाद तथा बाल मन पर गहरे आघात से उन्हें उबारने के लिए कौशल विकसित करना। इस पाठ्यक्रम की एक प्रमुख विशेषता है—बाल पीड़ितों के साथ काम करते समय सपोर्ट पर्सन को मनोवैज्ञानिक प्राथमिक सहायता का प्रशिक्षण देना। सपोर्ट पर्सन यौन शोषण के शिकार बच्चों के लिए उनकी पहली सुरक्षा पंक्ति होते हैं, ऐसे में उन्हें बच्चों से जुड़ने और उनकी स्थिति को समझने के लिए संवेदनशील बनाया जाना आवश्यक है। इस पाठ्यक्रम को पढ़ाने के लिए कानून, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक कार्य के क्षेत्र के विशेषज्ञों और विख्यात हस्तियों को शामिल किया गया है। सी-लैब बाल अधिकारों की सुरक्षा के क्षेत्र में अग्रणी संगठन इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन की परिकल्पना है। यह संगठन बाल यौन शोषण और उससे जुड़े अपराधों—जैसे बच्चों की ट्रैफिकिंग, साइबर जगत में बच्चों के शोषण और बाल विवाह के खिलाफ काम करने के लिए समर्पित है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ एसीबी की कार्रवाई, रोजगार सेवक को रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोचाटीम एबीएन, रांची। झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की मुहिम लगातार जारी है। इसी क्रम में मंगलवार को पलामू प्रमंडल की एसीबी टीम ने लातेहार जिले के मनिका प्रखंड अंतर्गत जमा पंचायत में बड़ी कार्रवाई की। टीम ने रोजगार सेवक चंदन कुमार को पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। सूत्रों के अनुसार, चंदन कुमार ने एक सरकारी योजना से जुड़े कार्य के एवज में एक लाभुक से रिश्वत की मांग की थी। मामले की शिकायत मिलने के बाद एसीबी की टीम ने योजना बनाकर जाल बिछाया और आरोपी को रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया। गिरफ्तारी के तुरंत बाद आरोपी को हिरासत में लेकर एसीबी ने कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस कार्रवाई से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है, वहीं आमजन के बीच भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई को लेकर संतोष की भावना देखी जा रही है।एसीबी ने क्या कहापलामू प्रमंडलीय एसीबी के अधिकारियों ने बताया कि मामले की गहन जांच जारी है। दोष सिद्ध होने पर आरोपी पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ यह मुहिम लगातार जारी रहेगी। जहां से भी शिकायत मिलती है, पहले उसकी जांच की जाती है और पुख्ता सबूत मिलने पर कार्रवाई की जाती है।
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