हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की सभी अपीलें की खारिज, एकलपीठ का फैसला बरकरार एबीएन सेंट्रल डेस्क (जोधपुर)। राजस्थान उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने राज्य सरकार की सभी विशेष अपीलों को खारिज करते हुए एकलपीठ के उस महत्वपूर्ण निर्णय को बरकरार रखा है, जिसमें अस्थायी नियुक्ति तिथि से ही सेवा एवं पेंशन लाभ देने के आदेश दिये गये थे। यह फैसला आयुर्वेद चिकित्सक डॉ बिजेंद्र सिंह त्यागी, पवन कुमार शर्मा सहित अन्य याचिकाकर्ताओं के पक्ष में आया है, जिन्हें अब उनकी प्रारंभिक अस्थायी नियुक्ति तिथि से समस्त सेवा व पेंशन परिलाभ मिल सकेंगे। राज्य सरकार की विशेष अपीलों पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति डॉ पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति संदीप तनेजा की खंडपीठ ने कहा कि एकलपीठ का आदेश विधिसम्मत और यथोचित है। अत: इसे बरकरार रखते हुए राज्य सरकार की सभी अपीलें निरस्त की जाती हैं। याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आरएन माथुर और अधिवक्ता यशपाल खिलेरी ने पैरवी की। उन्होंने दलील दी कि वर्ष 1990 से 1993 के बीच आयुर्वेद विभाग में अस्थायी रूप से नियुक्त चिकित्सकों को बाद में नियमित किया गया, लेकिन उनकी प्रारंभिक अस्थायी सेवा अवधि को कुल सेवा काल में नहीं जोड़ा गया और वसूली आदेश जारी कर दिये गये थे। एकलपीठ ने 12 जनवरी 2023 को इन वसूली आदेशों को रद्द करते हुए आरंभिक नियुक्ति तिथि से सेवा व पेंशन लाभ देने के निर्देश दिये थे। राज्य सरकार ने इस निर्णय को चुनौती देते हुए विशेष अपीलें दाखिल कीं, जिन्हें अब खंडपीठ ने पूरी तरह खारिज कर दिया। इस निर्णय से प्रदेश के बड़ी संख्या में आयुर्वेद चिकित्सकों को महत्वपूर्ण राहत प्राप्त हुई है।
चर्चित भोभा सिंह हत्याकांड में उम्र कैद की सजा काट रहा अपराधी अनिल शर्मा की रिहाई पर सरकार से जवाब तलबटीम एबीएन, रांची। रांची के चर्चित भोमा सिंह हत्या मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे कुख्यात अपराधी अनिल शर्मा की रिहाई के लिए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है। शुक्रवार को अनिल शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की अदालत ने सरकार को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि 29 वर्ष से जेल में रहने के बावजूद अब तक अनिल शर्मा को रिहा क्यों नहीं किया गया। अनिल शर्मा की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि वह उम्रकैद की सजा के तहत 14 वर्ष से अधिक की अवधि पूरी कर चुका है और अब तक 29 साल से जेल में बंद है। ऐसे में नियमों के अनुसार उसे रिहा किया जाना चाहिए। बता दें कि 22 जनवरी 1999 को रांची के बिरसा मुंडा जेल में बंद रहते हुए अनिल शर्मा ने बबलू श्रीवास्तव, निरंजन कुमार सिंह, सुशील श्रीवास्तव और मधु मियां के साथ मिलकर कुख्यात भोमा सिंह की हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद भोमा सिंह के चचेरे भाई के बयान पर सभी आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज हुआ था। ट्रायल के बाद कोर्ट ने अनिल शर्मा को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
11.14 करोड़ की संपत्ति कुर्क; अवैध सट्टेबाजी एप केस में कार्रवाई एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय टीम के पूर्व क्रिकेटर सुरेश रैना और शिखर धवन की मुश्किलें बढ़ गयी हैं। गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सट्टेबाजी के केस में कार्रवाई करते हुए दोनों की 11.14 करोड़ की संपत्ति कुर्क कर ली। सूत्र ने बताया कि आनलाइन सट्टेबाजी साइट 1 बीईटी के खिलाफ मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत धवन की 4.5 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति और रैना के 6.64 करोड़ रुपये के म्यूचुअल फंड को कुर्क करने का अनंतिम आदेश जारी किया गया है। करोड़ों की ठगी का आरोप पूर्व क्रिकेटर सुरेश रैना और शिखर धवन से हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय ने पूछताछ की थी। इस दौरान दोनों के बयान दर्ज किये गये थे। बता दें कि, ईडी इस समय कई ऐसे मामलों की जांच कर रही है, जो अवैध बेटिंग एप्स से जुड़े हैं। एजेंसी का मानना है कि इस तरह के बेटिंग एप्स न केवल अवैध हैं, बल्कि इनके जरिए बड़े पैमाने पर धन शोधन की गतिविधियां भी होती हैं।इन एप्स पर आरोप है कि इन्होंने लाखों लोगों और निवेशकों को करोड़ों रुपये का चूना लगाया है या फिर भारी मात्रा में टैक्स की चोरी की है। इस मामले में ईडी ने कार्रवाई तेज की है, खासकर उन विज्ञापनों पर जिनमें फिल्मी सितारे और क्रिकेटर शामिल हैं। इसी कड़ी में अब क्रिकेटरों और फिल्मी हस्तियों की भूमिका को लेकर भी जांच आगे बढ़ायी जा रही है। ईडी के रडार पर और कौन? ईडी की जांच में पाया गया है कि दोनों पूर्व क्रिकेटरों ने 1बीईटी और उसके प्रतिनिधियों के प्रचार के लिए विदेशी संस्थाओं के साथ जानबूझकर समर्थन समझौते किये। ईडी ने इस जांच के तहत इन दोनों के अलावा युवराज सिंह और रॉबिन उथप्पा जैसे अन्य पूर्व क्रिकेटरों, अभिनेता सोनू सूद, उर्वशी रौतेला, मिमी चक्रवर्ती (तृणमूल कांग्रेस की पूर्व सांसद) और अंकुश हाजरा (बंगाली अभिनेता) से भी पूछताछ की है।
सीजीएल परीक्षा पेपर लीक मामले में सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित टीम एबीएन, रांची। झारखंड हाइकोर्ट ने सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता (सीजीएल)-2023 के तहत 21 व 22 सितंबर को ली गयी परीक्षा में गड़बड़ियों की सीबीआइ जांच को लेकर दायर पीआइएल पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान व जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान सभी का पक्ष सुना। मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद खंडपीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। खंडपीठ ने सभी पक्षों को अपना लिखित बहस चार नवंबर तक प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। वहीं खंडपीठ ने सीजीएल परीक्षा के रिजल्ट प्रकाशन पर पूर्व में लगायी गयी रोक (अंतरिम आदेश) को बरकरार रखा। इससे पहले वेरिफिकेशन में सफल अभ्यर्थियों दीपक उरांव व अन्य की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरीय अधिवक्ता गोपाल शंकर नारायण, वरीय अधिवक्ता वी मोहना व अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि परीक्षा में पेपर लीक का आरोप आधारहीन है। ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है, जिससे यह साबित होता है कि पेपर लीक हुआ है। हस्तक्षेपकर्ता की ओर से बहस पूरी होने के बाद प्रार्थियों की ओर से भी पक्ष रखा गया। बताया गया कि राज्य सरकार ने कोर्ट के निर्देश का हवाला देते हुए पूर्व की एसआइटी को खत्म कर दूसरी एसआइटी बना दी, जो गलत है। अनुसंधान सही दिशा में नहीं हो रहा है। सीआइडी जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं कर रही है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए मामले को सीबीआइ को हैंडओवर करना चाहिए, ताकि पेपर लीक की सच्चाई सामने आ सके। प्रार्थी प्रकाश कुमार व अन्य की ओर से पीआइएल दायर की गयी है। इसमें सीजीएल परीक्षा रद्द करने तथा पूरे मामले की सीबीआइ से जांच कराने की मांग की गयी है। परीक्षा में पेपर लीक, पेपर का सील खुला होना और बड़ी संख्या में प्रश्नों को रिपीट करने जैसी गड़बड़ियों के आरोप लगाये गये हैं। सीजीएल परीक्षा-2023 में 3,04,769 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। विभिन्न विभागों में 2025 पदों पर चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति होनी है।
रेप केस में उम्रकैद काट रहे आसाराम को राहत, राजस्थान हाईकोर्ट से 6 महीने की मेडिकल जमानत मंजूर एबीएन सेंट्रल डेस्क। रेप केस में उम्रकैद की सजा भुगत रहे स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम बापू को राजस्थान हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उनकी खराब सेहत को देखते हुए उन्हें 6 महीने की अंतरिम जमानत प्रदान की है। यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय प्रकाश शर्मा और न्यायमूर्ति की खंडपीठ ने सुनवाई के बाद जारी किया।बीमारी का हवाला देकर मांगी थी जमानतफिलहाल आसाराम का इलाज एक निजी अस्पताल में चल रहा है। उन्होंने अपनी गंभीर स्वास्थ्य स्थिति का हवाला देते हुए कोर्ट में नियमित जमानत की अर्जी दी थी। हालांकि अदालत ने स्थायी राहत नहीं दी, बल्कि चिकित्सा कारणों से अंतरिम जमानत को मंजूरी दी है ताकि वे उपचार जारी रख सकें।पहले भी सुप्रीम कोर्ट से मिली थी राहतइससे पहले जनवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने भी आसाराम को मेडिकल ग्राउंड पर मार्च के अंत तक अंतरिम जमानत दी थी। शीर्ष अदालत ने उस समय कहा था कि आसाराम की उम्र अधिक है, उन्हें दो बार हार्ट अटैक आ चुका है और कई गंभीर बीमारियों का सामना कर रहे हैं। आसाराम को अगस्त 2013 में एक नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। जोधपुर की अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनायी थी। यह मामला उस समय देशभर में सुर्खियों में आया था, जब 16 वर्षीय लड़की ने दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज करायी थी कि जोधपुर स्थित आश्रम में आसाराम ने उसके साथ दुष्कर्म किया।
हर महीने 25000 कमाने वालों का कट सकता है PF, EPFO कर सकता है नियमों में बड़ा बदलावएबीएन सेंट्रल डेस्क। मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि श्रम मंत्रालय के आंतरिक आकलन के अनुसार, वेतन सीमा में 10,000 रुपये प्रति माह की वृद्धि से 10 मिलियन से अधिक व्यक्तियों के लिए सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट अनिवार्य हो जाएगा। आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर ईपीएफओ किस प्रस्ताव पर विचार करने जा रहा है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। आने वाले महीनों में कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) और कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) में कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से शामिल करने के लिए वेतन सीमा को बढ़ाकर 25,000 रुपए प्रति माह करने की संभावना है। मौजूदा समय में, वेतन सीमा 15,000 रुपये प्रति माह है। यह ईपीएफ और ईपीएस में अनिवार्य अंशदान की वैधानिक सीमा है – जिसका प्रबंधन ईपीएफओ द्वारा किया जाता है। जिन कर्मचारियों का मूल वेतन 15,000 रुपए प्रति माह से अधिक है, उनके पास इन दोनों ईपीएफओ योजनाओं से बाहर निकलने का विकल्प है। इंप्लॉर्या के पास ऐसे कर्मचारियों को ईपीएफ और ईपीएस के तहत रजिस्टर्ड करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। ईपीएफओ का केंद्रीय न्यासी बोर्ड अपनी अगली बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा कर सकता है जो संभवतः दिसंबर या जनवरी में होगी जहां अंतिम मंजूरी दी जा सकती है।
जानें इस योजना की सभी खासियत नौकरीपेशा लोगों को ईपीएफओ के अंदर ही ईडीएलआई स्कीम के तहत एक अतिरिक्त बीमा कवर मिलता है, जो अनहोनी के वक्त उनके परिवार के लिए बड़ा राहत दे सकता है एबीएन सेंट्रल डेस्क। अगर आप प्राइवेट कर्मचारी हैं तो हर महीने आपकी सैलरी से भी थोड़ा-थोड़ा पैसा कटता होगा और यह आपके पीएफ अकाउंट में चला जाता होगा। ज्यादातर लोग सोचते हैं कि यह पैसा बस रिटायरमेंट के काम आयेगा, लेकिन असली खेल यही है। इसमें PF के साथ एक और स्कीम जुड़ी होती है जिसका नाम है Employees Deposit Linked Insurance Scheme (EDLI) है। हिंदी में इसे कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा स्कीम के नाम से जाना जाता है। यह कोई आम स्कीम नहीं, बल्कि सरकारी बॉडी EPFO की एक ऐसी लाइफ इंश्योरेंस फैसिलिटी है जो मुश्किल वक्त में परिवार को बड़ी राहत देती है। अगर किसी कर्मचारी की नौकरी के दौरान मृत्यु हो जाए, तो उसके घरवालों को इसके तहत 7 लाख रुपये तक का बीमा कवर मिल सकता है, वो भी बिना एक रुपया खर्च किए।पिछले साल अक्टूबर में श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने इस स्कीम को लेकर अप्रैल 2021 से लागू बढ़े हुए बेनिफिट्स को ‘रेट्रोस्पेक्टिव’ तौर पर जारी रखने का ऐलान किया था। यानी अब नौकरी बदलने वालों या पुराने क्लेम्स वालों को भी इसका फायदा मिलेगा।कर्मचारियों के लिए सुरक्षा कवच: EDLI स्कीम की पूरी कहानीभारत में प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों के लिए कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा स्कीम (EDLI) एक बड़ा सहारा है। 1976 में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने इस स्कीम की शुरुआत की थी। यह स्कीम कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और कर्मचारी पेंशन स्कीम (EPS) के साथ मिलकर काम करती है। इसका मकसद है कि अगर किसी कर्मचारी की नौकरी के दौरान अचानक मृत्यु हो जाए, तो उसके परिवार को आर्थिक मदद मिले।क्या है EDLI के फायदे?EDLI स्कीम के तहत, अगर किसी कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है, तो उनके नॉमिनी या कानूनी उत्तराधिकारी को एकमुश्त राशि दी जाती है। यह राशि कर्मचारी की आखिरी सैलरी पर आधारित होती है। 28 अप्रैल, 2021 से EPFO ने इस राशि की अधिकतम सीमा 7 लाख रुपये रखी है । खास बात यह है कि इस स्कीम में कर्मचारी को कोई योगदान नहीं देना पड़ता। इसका पूरा खर्च एम्प्लॉयर उठाता है, जो कर्मचारी की बेसिक सैलरी का 0.5% देता है।यह राशि प्रति माह अधिकतम 75 रुपये तक सीमित है। यह स्कीम हर उस कर्मचारी को कवर करती है, जो EPF का हिस्सा है। इसमें कोई अपवाद नहीं है। चाहे कर्मचारी की मृत्यु भारत में हो या विदेश में, उनके नॉमिनी को इसका लाभ मिलेगा। इसके अलावा, यह कवरेज 24 घंटे लागू रहती है। यानी, यह सिर्फ काम के दौरान ही नहीं, बल्कि हर समय सुरक्षा देती है।क्या है EDLI स्कीम की खास बात?EDLI स्कीम की कई खासियतें इसे और भी उपयोगी बनाती हैं। यह स्कीम उन सभी कर्मचारियों पर लागू होती है, हालांकि, इसका कैलकुलेशन 15,000 रुपये प्रति माह के बेसिक सैलरी पर ही किया जाता है। इसका कैलकुलेशन इस तरह होता है: औसत मासिक सैलरी का 30 गुना, साथ ही 2.5 लाख रुपये का बोनस। हालांकि, कुल राशि 7 लाख रुपये से ज्यादा नहीं हो सकती। इसके अलावा, इसमें कम से कम 2.5 लाख रुपये देने का प्रावधान है, जो 15 फरवरी, 2020 से लागू है।EPF में शामिल हर कर्मचारी को इस स्कीम का लाभ अपने आप मिल जाता है। अगर कोई कंपनी चाहे, तो वह EDLI की जगह अपने कर्मचारियों के लिए कोई दूसरी ग्रुप लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी ले सकती है, बशर्ते उसका लाभ EDLI से कम न हो। जिन संगठनों में 20 या उससे ज्यादा कर्मचारी हैं, उन्हें EPF एक्ट के तहत रजिस्टर करना होता है। इसके बाद उनके सभी कर्मचारी EDLI के दायरे में आ जाते हैं। लाभ पाने वालों में कर्मचारी का जीवनसाथी, अविवाहित बेटियां और 25 साल तक की उम्र के बेटे शामिल हैं।EDLI कैसे कर सकते हैं क्लेम?EDLI के तहत लाभ पाने के लिए प्रक्रिया काफी सरल है। कर्मचारी की मृत्यु के बाद, नॉमिनी या कानूनी उत्तराधिकारी को फॉर्म 5 IF जमा करना होता है। इसके साथ कुछ जरूरी डॉक्यूमेंट जैसे मृत्यु प्रमाण पत्र, गार्जियनशिप या उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (अगर लागू हो) और एक ब्लैंक चेक देना होता है। अगर एम्प्लॉयर का वेरिफिकेशन उपलब्ध न हो, तो फॉर्म को सांसद, विधायक, बैंक मैनेजर या गजेटेड ऑफिसर से वेरिफाई करवाया जा सकता है।फॉर्म जमा करने के बाद, क्षेत्रीय EPF कार्यालय को 30 दिनों के अंदर क्लेम सेटल करना होता है। अगर इसमें देरी होती है, तो 12% सालाना ब्याज देना पड़ता है। यह सुनिश्चित करता है कि परिवार को समय पर मदद मिले।एम्प्लॉयर्स के लिए क्या हैं नियम?EDLI स्कीम एम्प्लॉयर्स को भी कुछ चीजों में छूट देती है। अगर कोई कंपनी चाहे, तो वह कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 (Miscellaneous Provisions Act, 1952) के सेक्शन 17(2A) के तहत EDLI से बाहर निकल सकती है। लेकिन इसके लिए उन्हें अपने कर्मचारियों के लिए ऐसी ग्रुप लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी लेनी होगी, जो EDLI के बराबर या उससे बेहतर लाभ दे। इससे यह सुनिश्चित करता है कि कर्मचारियों का हित सुरक्षित रहे।EDLI स्कीम भारत के कर्मचारी कल्याण ढांचे का एक अहम हिस्सा है। यह न केवल कर्मचारियों के परिवारों को आर्थिक सुरक्षा देती है, बल्कि एम्प्लॉयर्स के लिए भी इसे लागू करना आसान और किफायती है। यह स्कीम EPFO के उस बड़े लक्ष्य को पूरा करती है, जिसमें देश के कर्मचारियों और उनके परिवारों का सामाजिक और आर्थिक कल्याण सुनिश्चित करना शामिल है।
रांची में जारी हुआ ट्रैफिक प्लान, छठ महापर्व के दौरान शहर में मालवाहक वाहनों के प्रवेश पर रहेगी रोकटीम एबीएन, रांची। महापर्व छठ को लेकर ट्रैफिक एसपी राकेश सिंह ने ट्रैफिक का प्लान जारी कर दिया है। छठ पूजा, 27 और 28 अक्टूबर को मनाया जाएगी, छठ पूजा के दौरान सड़कों पर भारी भीड़ उमड़ती है, जिसे देखते हुए रांची के ट्रैफिक प्लान में बदलाव किया गया है। इस संबंध में ट्रैफिक एसपी के द्वारा आदेश जारी कर दिया गया है।ट्रैफिक में बदलावछठ पूजा के मौके पर बड़ी संख्या में लोग भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए तालाब और नदियों में जाते हैं। इसे लेकर रांची ट्रैफिक पुलिस ने शहर की यातायात व्यवस्था में बदलाव किया है। इसके तहत 27 अक्टूबर की सुबह आठ बजे से रात 11 बजे तक और अगले दिन 28 अक्टूबर सुबह दो बजे से लेकर दोपहर एक बजे तक शहर में मालवाहक और भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। इसके तहत निर्धारित समय में मालवाहक और भारी वाहन रिंग रोड होते हुए अपने गंतव्य तक जाएंगे। इससे संबंधित आदेश बुधवार को ट्रैफिक एसपी राकेश सिंह ने जारी किया है। जारी आदेश के अनुसार, छठ महापर्व के मौके पर घाटों में बड़ी संख्या में लोग वाहन से पहुंचते हैं। उनके लिए ट्रैफिक पुलिस की ओर से वाहन पार्किंग की व्यवस्था की गई है। वहीं घाट जाने के लिए मार्ग भी निर्धारित किया गया है। इसके अलावा 25 से ज्यादा स्थानों पर ट्रैफिक को कंट्रोल करने के लिए ट्रैफिक जवानों को तैनात किया जाएगा।जानें कैसी होगी शहर की ट्रैफिक व्यवस्था27 अक्टूबर को सुबह आठ से रात ग्यारह बजे तक एवं 28 अक्टूबर को भोर दो बजे से दोपहर एक बजे तक शहर में मालवाहक वाहनों का प्रवेश वर्जित रहेगा।निर्धारित समय में मालवाहक वाहन, रिंग रोड होकर अपने अपने गंतव्य तक परिचालन करेंगे।27 अक्टूबर को दोपहर दो से रात आठ बजे तक शहरी क्षेत्र में छोटे मालवाहक वाहनों का प्रवेश पूरी तरह से बंद रहेगा।27 अक्टूबर को दिन के तीन से रात आठ बजे तक चांदनी चौक कांके और राम मंदिर के बीच ऑटो और ई रिक्शा का परिचालन वर्जित किया गया है। 27 अक्टूबर को फिरायालाल से चडरी तालाब की ओर जाने वाले वाहन और जेल चौक से फिरायालाल जाने वाले रोड में सभी प्रकार के वाहनों का परिचालन पूरी तरह से बंद रहेगा।आवश्यकता अनुसार दूसरे मार्गों को अल्प समय के लिए डाइवर्ट और स्टॉप भी किया जा सकता है।
रांची के पूर्व डीसी छवि रंजन को सुप्रीम कोर्ट से सशर्त जमानत, झारखंड से बाहर जाने पर रोकटीम एबीएन, रांची। झारखंड की नौकरशाही में लंबे समय से चर्चा में रहे आईएएस अधिकारी छवि रंजन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शुक्रवार को देश की सर्वोच्च अदालत ने रांची के पूर्व उपायुक्त (डीसी) सह आईएएस अधिकारी छवि रंजन को जमीन घोटाला मामले में सशर्त जमानत प्रदान की।अदालत ने इस दौरान कई सख्त शर्तें भी लगाई हैं ताकि जांच प्रक्रिया प्रभावित न हो सके। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि छवि रंजन बिना अदालत की पूर्व अनुमति झारखंड से बाहर नहीं जा सकेंगे। साथ ही, उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और अन्य जांच एजेंसियों के साथ पूरी तरह सहयोग करना होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी भी गवाह या सह-अभियुक्त से संपर्क नहीं करेंगे। कोर्ट ने यह टिप्पणी भी की कि चूंकि यह मामला अब भी ट्रायल के चरण में है, इसलिए जमानत देने से जांच या मुकदमे की निष्पक्षता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।वहीं, ईडी की ओर से पेश वकीलों ने अदालत में तर्क दिया कि छवि रंजन के खिलाफ मजबूत और ठोस सबूत मौजूद हैं।जिनमें भूमि सौदों से संबंधित दस्तावेज, बैंक लेन-देन और इलेक्ट्रॉनिक डाटा शामिल हैं। ईडी ने यह भी कहा था कि यदि उन्हें जमानत दी जाती है, तो जांच प्रभावित हो सकती है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को यह कहते हुए खारिज किया कि जमानत देने से जांच की दिशा पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि अब मामला न्यायालय के अधीन है।इस फैसले के बाद छवि रंजन के परिजनों, शुभचिंतकों और समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। उनके आवास और पैतृक गांव में लोगों ने इस निर्णय को “न्याय की जीत” बताया। दूसरी ओर, ईडी अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई शर्तों के तहत अपनी जांच को और आगे बढ़ाने की तैयारी में जुट गई है।गौरतलब है कि छवि रंजन का नाम तब सुर्खियों में आया जब वे रांची के उपायुक्त के रूप में कार्यरत थे। उनके कार्यकाल के दौरान कई विवादित भूमि फाइलों के स्वीकृति और हस्तांतरण में अनियमितताओं के आरोप लगे। ईडी ने पिछले वर्ष छवि रंजन के रांची स्थित आवास, सरकारी दफ्तरों और कई अन्य ठिकानों पर छापेमारी की थी। इन छापों में बड़ी मात्रा में दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और संपत्ति से जुड़े साक्ष्य जब्त किए गए थे।बताया जाता है कि यह मामला रांची के काशीबाग और हथियाबगीचा इलाके की भूमि के अवैध ट्रांसफर से जुड़ा है, जिसमें सरकारी जमीन को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर निजी व्यक्तियों के नाम कर दिया गया था। ईडी ने इस घोटाले की जांच के दौरान कई रजिस्ट्री कर्मियों, दलालों और सरकारी अधिकारियों से पूछताछ की थी। छवि रंजन को इसी कड़ी में मुख्य आरोपी के रूप में चिह्नित किया गया था।झारखंड की नौकरशाही में यह मामला अब भी सबसे चर्चित भ्रष्टाचार प्रकरणों में से एक माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में भी इस पर लगातार बयानबाजी होती रही है। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय जहां छवि रंजन के लिए राहत लेकर आया है, वहीं जांच एजेंसियों के लिए यह एक नई चुनौती भी बन गया है कि वे मामले की तह तक पहुंचकर ठोस साक्ष्य अदालत के सामने पेश करें।कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने झारखंड की प्रशासनिक व्यवस्था और आईएएस अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर फिर से बहस को गर्म कर दिया है। अब देखने वाली बात होगी कि आगे की जांच और ट्रायल में यह मामला किस दिशा में बढ़ता है।
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