टीम एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में 23 दिसंबर 2025 को मंत्रिपरिषद की बैठक आयोजित की गयी। जिसमें कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये। जिनमें प्रमुख हैं :
टीम एबीएन, रांची। झारखंड सरकार ने बैंक आफ इंडिया (बीओआई) के साथ अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन पैकेज को लेकर एक समझौते पर मंगलवार को हस्ताक्षर किये। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की उपस्थिति में वित्त विभाग और बैंक के बीच इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये गये।
समझौते के अनुसार, बैंक आफ इंडिया में खाता खोलने वाले सरकारी कर्मचारियों को दो करोड़ रुपये तक का दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य बीमा, बच्चों के लिए शैक्षणिक लाभ सहित कई सुविधाएं मिलेंगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मौके पर कहा कि बैंक आफ इंडिया ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की जीवन सुरक्षा पर केंद्रित एक पैकेज तैयार कर बेहद संवेदनशील पहल की है।
कर्मचारी चाहे स्थायी हों या संविदा पर, हर कोई चाहता है कि सेवानिवृत्ति के बाद भी वह अपना जीवन आराम एवं शांति से बिता सके। सोरेन ने कहा कि सरकार का दृष्टिकोण राज्य के अंतिम व्यक्ति को सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक रूप से सशक्त बनाना है। सरकार चाहती है कि उसकी योजनाओं के लाभ प्रत्येक व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंचें।
बैंक आफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक सुब्रत कुमार ने कहा कि बैंक झारखंड में 494 शाखाओं का संचालन करता है, जिनमें 300 ग्रामीण, 97 अर्ध-शहरी एवं 97 शहरी क्षेत्रों में हैं। राज्य में बैंक के 264 एटीएम हैं। पैकेज का विवरण देते हुए बैंक आफ इंडिया (बीओआई) के एक अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार के साथ वेतन समझौता तीन वर्गों स्थायी कर्मचारी, सरकारी पेरोल पर संविदा कर्मचारी एवं पेंशनभोगी के लिए किया गया है।
तीनों वर्गों के लिए अलग-अलग सुविधाएं हैं। स्थायी कर्मचारियों के लिए इस पैकेज में दो करोड़ रुपये का हवाई दुर्घटना बीमा, एक करोड़ रुपये का सामान्य दुर्घटना बीमा, स्थायी अक्षमता की स्थिति में एक करोड़ रुपये और आंशिक अक्षमता के लिए 50 लाख रुपये का लाभ शामिल है।
उन्होंने कहा, इसके अतिरिक्त हम 10 लाख रुपये का टर्म इंश्योरेंस और 10 लाख रुपये का शैक्षणिक लाभ भी दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि संविदा कर्मचारियों को 50 लाख रुपए का दुर्घटना बीमा, स्थायी अक्षमता की स्थिति में 50 लाख रुपये और आंशिक अक्षमता के लिए 25 लाख रुपये का लाभ मिलेगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा और उनकी पत्नी हिमानी मोर ने मंगलवार को यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। प्रधानमंत्री ने उनके आवास पर हुई इस मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में फोटो साझा करते हुए यह जानकारी दी।
श्री मोदी ने कहा कि आज सुबह 7 लोक कल्याण मार्ग पर नीरज चोपड़ा और उनकी पत्नी हिमानी मोर से मुलाकात हुई। हमने खेलों के साथ-साथ विभिन्न विषयों पर बातचीत की।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए एक बड़ी शैक्षणिक पहल के तहत सोमवार को दिशोम गुरु शिबू सोरेन इंजीनियरिंग एवं मेडिकल कोचिंग संस्थान की औपचारिक शुरुआत हो गयी। संस्थान का उद्घाटन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने किया। मौके पर कल्याण मंत्री चमरा लिंडा सहित कई विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे।
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि यह परिसर कभी केवल भाषणों का बड़ा मंच हुआ करता था, लेकिन आज यहां भविष्य की सोच वाली एक ठोस योजना आकार ले चुकी है। उन्होंने विद्यार्थियों से लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की अपील करते हुए कहा कि राज्य सरकार आदिवासी बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए लगातार काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि संस्थान परिसर में पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाये, ताकि विद्यार्थी सर्वांगीण विकास से जुड़ सकें। उन्होंने सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना, प्री और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि लाखों छात्र इन योजनाओं से लाभान्वित हो रहे हैं।
कल्याण विभाग की देखरेख में संचालित इस कोचिंग संस्थान में पहले चरण में 300 विद्यार्थियों का चयन किया गया है। इनमें राज्य के विभिन्न बोर्डों से आने वाले छात्र शामिल हैं। इंजीनियरिंग और मेडिकल की कक्षाओं के संचालन की जिम्मेदारी कोटा के प्रतिष्ठित मोशन संस्थान को सौंपी गयी है।
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने बताया कि यह संस्थान आदिवासी छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी का अवसर देगा और आर्थिक कारणों से पीछे रह जाने वाले विद्यार्थियों के लिए यह एक मजबूत मंच साबित होगा। उद्घाटन के साथ ही संस्थान ने राज्य में आदिवासी शिक्षा के क्षेत्र में एक नयी शुरुआत का संकेत दिया है।
टीम एबीएन, रांची। सोशल मीडिया एक्स पर एक यूजर ने सीएम हेमंत को टैग करते हुए एक बच्चे की समस्या से अवगत करवाया। इसके बाद सीएम हेमंत ने मामले को संज्ञान में लिया। सीएम हेमंत ने रांची डीसी को टैग करते हुए लिखा, संज्ञान लें एवं एलेक्स की पढ़ाई हेतु हर संभव मदद पहुंचाते हुए सूचित करें।
दरअसल, पत्रकार सनी शारद ने अपने ट्वीट में सीएम हेमंत को टैग करते हुए लिखा कि चौधरी फ्यूल पेट्रोल पंप की रोशनी के नीचे हर रात 8 वर्षीय एलेक्स मुंडा पढ़ाई करता है। उसकी मां नूतन टोप्पो दिन भर पेट्रोल पंप पर मेहनत-मजदूरी करने के बाद रात को अपने बेटे को पढ़ाती हैं।
सात साल पहले पति के निधन के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी नूतन टोप्पो के कंधों पर आ गयी थी। पत्रकार सनी शारद ने ट्वीट में मां-बेटे के संघर्ष और जज्बे की सराहना करते हुए उम्मीद जतायी थी कि एलेक्स एक दिन अपने परिवार का नाम रोशन करेगा। वहीं, इस ट्वीट पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रतिक्रिया दी।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रांची उपायुक्त को टैग करते हुए निर्देश दिया कि मामले का संज्ञान लिया जाए और एलेक्स की पढ़ाई के लिए हर संभव मदद सुनिश्चित की जाये। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि मामले में संज्ञान लेते हुए जिला शिक्षा अधीक्षक को आवश्यक निर्देश दे दिये गये हैं।
साथ ही जिला प्रशासन की ओर से यह सुनिश्चित किया जायेगा कि एलेक्स को बेहतर शिक्षा उपलब्ध हो और उसे हर संभव सहयोग दिया जाये। वहीं, रांची डीसी ने जवाब देते हुए कहा कि महोदय, संदर्भित मामले में संज्ञान लेते हुए जिला शिक्षा अधीक्षक को आवश्यक निर्देश दिये गये हैं। साथ ही एलेक्स को बेहतर शिक्षा मिलें इसके लेकर जिला प्रशासन हर संभव मदद देगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 28 दिसंबर को रांची आ रही है। वह तीन दिवसीय झारखंड दौरे पर रहेंगी। उनके दौरे को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसको लेकर समाहरणालय में एक बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री और वरीय पुलिस अधीक्षक राकेश रंजन ने की।
बैठक में जिले के सभी बड़े अधिकारी मौजूद थे। बैठक में सुरक्षा व्यवस्था, सड़क और ट्रैफिक व्यवस्था, कार्यक्रम स्थल की तैयारी, साफ-सफाई, पानी, शौचालय और स्वास्थ्य सुविधा पर चर्चा की गयी। उपायुक्त ने कहा कि राष्ट्रपति का दौरा बहुत महत्वपूर्ण है, इसलिए सभी विभाग मिलकर काम करें।
किसी भी तरह की गलती नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सुरक्षा को लेकर सख्त निर्देश दिये। राष्ट्रपति के आने-जाने वाले रास्तों पर पुलिस की तैनाती, बैरिकेडिंग, सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन से निगरानी की जायेगी।
ट्रैफिक व्यवस्था को भी दुरुस्त रखने का निर्देश दिया गया है, ताकि आम लोगों को परेशानी न हो। जरूरत पड़ने पर रास्तों का डायवर्जन किया जायेगा।
स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट रहने और अस्पतालों में जरूरी व्यवस्था रखने को कहा गया है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार रहेगा।
उपायुक्त ने बताया कि तैयारियों की लगातार समीक्षा की जायेगी और हर काम पर नजर रखी जायेगी। जिला प्रशासन ने कहा है कि राष्ट्रपति का रांची दौरा पूरी तरह सुरक्षित और सुचारू तरीके से संपन्न कराया जायेगा।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में नये साल में बिजली महंगी हो सकती है। सूत्रों के हवाले से यह जानकारी सामने आ रही है। कहा जा रहा है कि झारखंड विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) ने राज्य विद्युत नियामक आयोग के सामने बिजली की कीमतों में 60 प्रतिशत तक इजाफे का प्रस्ताव रखा है जिससे प्रति यूनिट 3.50 रुपये तक का इजाफा हो सकता है।
राज्य विद्युत नियामक आयोग अब प्रमंडलों में जनसुनवाई कर आपत्तियां और सुझाव लेगा। उसके बाद स्टेक होल्डर्स की बैठक में सभी पक्षों को सुनने के बाद नयी दर पर आदेश देगा। आमतौर पर नई दरें एक अप्रैल से लागू होती हैं। चालू वर्ष में नयी दरें एक मई से लागू की गयीं। जेबीवीएनएल ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिजली खरीद पर 8,726 करोड़ रुपये से अधिक खर्च का अनुमान लगाया है।
इसमें थर्मल, हाइड्रो और अन्य स्रोतों से खरीदी जाने वाली बिजली शामिल है। इससे पहले 1 मई 2025 से ग्रामीण घरेलू बिजली 40 पैसे प्रति यूनिट और शहरी घरेलू बिजली 20 पैसे प्रति यूनिट महंगी हुई थी, जबकि किसानों को राहत दी गयी थी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत ने पॉक्सो मामलों में बच्चों को न्याय दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक छलांग लगाई है। पहली बार एक वर्ष में दर्ज होने वाले पॉक्सो मामलों से अधिक मामलों का निपटारा किया है। इस दिशा में झारखंड ने राष्ट्रीय निपटान दर 109 प्रतिशत को पीछे छोड़ते हुए 130 प्रतिशत की दर हासिल की है। साल 2025 में जहां झारखंड में प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस (पॉक्सो) कानून के तहत 1434 मामले दर्ज हुए, वहीं अदालतों ने 1867 मामलों का निपटारा किया, जिसमें पिछले कई वर्षों से लंबित मामलों का बड़ा हिस्सा शामिल है।
इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन की पहल पर सेंटर फॉर लीगल एक्शन एंड बिहेवियर चेंज (सी-लैब) फॉर चिल्ड्रन की रिपोर्ट पेंडेंसी टू प्रोटेक्शन: अचीविंग द टिपिंग पॉइंट टू जस्टिस फॉर चाइल्ड विक्टिम्स ऑफ सेक्सुअल एब्यूज के अनुसार वर्ष 2025 में बच्चों के यौन शोषण से जुड़े 80,320 मामले दर्ज हुए, जबकि 87,754 मामलों का अदालती सुनवाई के बाद निपटारा किया गया। इससे निपटाने की दर 109 प्रतिशत तक पहुंच गई। खास बात यह है कि 24 राज्यों में पॉक्सो मामलों के निपटारे की दर 100 प्रतिशत से अधिक रही है। रिपोर्ट में पॉक्सो के तहत सभी लंबित मामलों को चार वर्षों के भीतर खत्म करने के लिए 600 अतिरिक्त ई-पॉक्सो अदालतों की स्थापना करने की सिफारिश की गई है।
मुकदमों को लेकर अक्सर तारीख पर तारीख की छवि से बदनाम भारत में 2023 तक पॉक्सो के 2,62,089 मामले लंबित थे। लेकिन अब एक अहम बदलाव देखने को मिला है क्योंकि निपटाए गए मामलों की संख्या दर्ज किए गए मामलों से ज्यादा हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार देश एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां न्यायिक व्यवस्था अब सिर्फ लंबित मामलों को संभालने के बजाय उन्हें सक्रिय रूप से कम करना शुरू कर रही है। साथ ही रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि लंबित पॉक्सो मामलों को पूरी तरह खत्म करने के लिए चार साल की अवधि में 600 अतिरिक्त ई-पॉक्सो अदालतें स्थापित की जाएं। इसके लिए लगभग 1,977 करोड़ रुपये का प्रावधान किया जाना चाहिए, जिसमें निर्भया फंड का भी उपयोग किया जा सकता है।
रिपोर्ट कुछ गंभीर चिंताओं की ओर भी ध्यान दिलाती है। जैसे कि राज्यों के बीच मामलों के निपटारे की दर में अंतर, दोष सिद्धि की दर में निरंतरता की कमी और लगभग 50 फीसदी मामलों का दो साल तक लंबित रहना। उदाहरण के तौर पर, झारखंड में लंबित मामलों में 16 प्रतिशत मामले 6–10 साल से, 12 प्रतिशत 5 साल से, 19 प्रतिशत 4 साल से, 23 प्रतिशत 3 साल से और शेष 30 प्रतिशत मामले 2 साल से लंबित हैं। ये आंकड़े दिखाते हैं कि कई मामले वर्षों से लंबित हैं। ये आंकड़े उन मामलों को दिखाते हैं जो कई साल पहले न्याय प्रणाली में दर्ज हुए थे, लेकिन अब तक उनमें कोई ठोस प्रगति नहीं हो पाई है। रिपोर्ट बताती है, किसी मामले की प्रक्रिया के शुरुआती दौर से ही लंबित रहने की समस्या शुरू हो जाती है और व्यवस्था को तय समय सीमा के भीतर मामलों को आगे बढ़ाने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
न्यायिक व्यवस्था के व्यापक संदर्भ में इन आंकड़ों के दूरगामी असर पर बात करते हुए इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन के निदेशक (शोध) पुरुजीत प्रहराज ने कहा, भारत आज बाल यौन शोषण के खिलाफ अपने संघर्ष में एक बेहद संवेदनशील और निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। जब न्यायिक व्यवस्था दर्ज किए जाने वाले मामलों से अधिक पॉक्सो मामलों का निपटारा करने लगती है, तब यह सिर्फ आंकड़ों की उपलब्धि नहीं होती, बल्कि यह उस भरोसे की वापसी होती है, जो बच्चों ने व्यवस्था पर खो दिया था। हमारा शोध बार-बार यह दिखाता है कि न्याय में हर दिन की देरी, बच्चे के मानसिक आघात को और गहरा करती है। इसलिए इस गति को बनाए रखना केवल प्रशासनिक जरूरत नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी है। ताकि हर बच्चे के लिए समय पर संवेदनशील और बाल-केंद्रित न्याय अपवाद नहीं, बल्कि हक़ीक़त बन सके। इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन, बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए काम करने वाले नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) का सहयोगी है। जेआरसी 250 से अधिक सहयोगी संगठनों के साथ देश के 451 जिलों में बाल अधिकारों के लिए काम कर रहा है।
राज्यों में देखें, तो सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पॉक्सो के मामलों के निपटान की दर 150 प्रतिशत से अधिक रही है। वहीं, अन्य सात राज्यों में यह निपटान दर 121 से 150 प्रतिशत के बीच रही, जबकि 10 राज्यों ने 100 से 120 प्रतिशत तक की निपटान दर हासिल की। इन 24 राज्यों ने न सिर्फ 2025 में दर्ज हुए मामलों का निपटारा किया, बल्कि वर्षों से लंबित मामलों को भी काफी हद तक समाप्त करने में सफलता पाई।
रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की गई है कि पॉक्सो के लंबित मामलों को शीघ्र निपटाने के मकसद से प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हर साल मामलों के निपटारे की दर 100 प्रतिशत से अधिक बनाए रखें। इसके साथ ही जो राज्य न्यायिक प्रक्रिया में पीछे हैं, उन्हें तकनीकी और प्रशासनिक सहयोग दिया जाए। साथ ही दोषसिद्धि और बरी होने की दरों की नियमित और बारीकी से निगरानी की जाए।
रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि मामलों के बेहतर विश्लेषण और दस्तावेजों की त्वरित उपलब्धता के लिए एआई आधारित कानूनी शोध उपकरणों और दस्तावेज प्रबंधन प्रणालियों का उपयोग किया जाए, ताकि न्याय प्रक्रिया और अदालती कार्यवाही अधिक तेज व प्रभावी हो सके।
यह रिपोर्ट दो दिसंबर 2025 तक उपलब्ध आंकड़ों के विश्लेषण पर आधारित है, जिन्हें नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड (एनजेडीजी), नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) और लोकसभा में पूछे गए सवालों और उनके जवाबों से लिया गया है।
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जितेंद्र परमार
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