टीम एबीएन, रांची। झारखंड की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में सीएम हेमंत सोरेन के नेतृत्व में विश्व आर्थिक सम्मेलन में झारखंड की पहली आधिकारिक भागीदारी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। सीएम ने कहा है कि प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण विकास के आदर्शों से प्रेरित होकर, झारखंड दावोस में वैश्विक साझेदारों के साथ जुड़ने के लिए उत्सुक है।
स्विटजरलैंड में भारत के राजदूत मृदुल कुमार ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को विश्व आर्थिक सम्मेलन 2026 में उनकी भागीदारी के बारे में जानकारी दी। यह झारखंड का दावोस में पहला आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल है, जो राज्य की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है।
दावोस में झारखंड की भागीदारी प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण विकास के विषय पर आधारित है, जो सतत विकास, लचीलापन, विश्वास और दीर्घकालिक आर्थिक परिवर्तन पर केंद्रित विश्व आर्थिक सम्मेलन 2026 के उद्देश्य से पूरी तरह मेल खाता है।
टीम एबीएन, रांची। नगर निकाय चुनाव की तैयारी को अंतिम रूप देने में राज्य निर्वाचन आयोग जुटा हुआ है। शुक्रवार को राज्यभर के सभी 48 नगर निकायों के निर्वाची पदाधिकारी और सह निर्वाची पदाधिकारियों के साथ बैठक की गयी।
आयोग कार्यालय में आयोजित बैठक सह प्रशिक्षण कार्यक्रम में चुनाव के हर विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्य निर्वाचन आयुक्त अलका तिवारी ने कहा कि चुनाव की घोषणा होते ही निर्वाची पदाधिकारी और सह निर्वाचन प्रभारी की भूमिका अहम हो जाती है।
राज्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि नामांकन के वक्त प्रत्याशियों के द्वारा भरे जाने वाले फॉर्म और चुनाव चिन्ह आवंटन के समय निर्वाचन पदाधिकारी की अहम भूमिका होती है। जिसे बड़े ही सतर्कता के साथ निभानी चाहिए। उन्होंने निर्वाचन से जुड़े पदाधिकारियों को सलाह दी।
साथ ही कहा कि आयोग के द्वारा जारी निर्वाचन पुस्तिका का अध्ययन जरूर कर लें। क्योंकि उसी के अनुरूप निकाय चुनाव संपन्न कराने में अपनी भूमिका का निर्वहन किया जाएगा। छोटी-छोटी बातों से कई बार विवाद बढ़ जाता है, इसलिए नियम संगत चुनाव के दौरान कार्य करें। राज्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि चुनाव निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो, इसकी जिम्मेदारी सभी पदाधिकारियों पर होगी।
इसके लिए पूरी सतर्कता के साथ निर्वाचन के दौरान काम करने की आवश्यकता है। अलका तिवारी ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण काउंटिंग होती है, जो अच्छे ढंग से और निष्पक्ष रूप से संपन्न हो, इस पर जरूर ध्यान रखने की जरूरत है। चुनाव के दौरान प्रत्याशियों एवं उनके समर्थकों पर पदाधिकारियों को पूरी तरह से नजर रखने का निर्देश दिए हैं।
राज्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि हर हाल में चुनाव शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष ढंग से संपन्न हो इसके लिए सभी प्रशासनिक तैयारी रखी जाए। उन्होंने कहा कि चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही आदर्श आचार संहिता लागू होगी। इसका पालन कराने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए. इसके अनुपालन की जिम्मेदारी सभी पदाधिकारियों पर होगी।
इस मौके पर निर्वाचन आयोग के सचिव राधेश्याम प्रसाद ने चुनाव कार्य की तैयारियों पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पदाधिकारियों को चुनाव पूर्व उन्हें दी गई जिम्मेदारी से अवगत कराया गया है। आवश्यकता पड़ने पर आने वाले समय में वीडियो कॉफ्रेसिंग से भी निर्देशित किया जायेगा।
टीम एबीएन, रांची। रांची जिले में पिछले कुछ दिनों से पड़ रही भीषण शीतलहर एवं अत्यधिक ठंड के मौसम को देखते हुए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD), रांची द्वारा जारी विशेष बुलेटिन के आधार पर जिला प्रशासन द्वारा जनसुरक्षा एवं स्वास्थ्य की दृष्टि से आवश्यक सावधानियां बरतने हेतु अपील की जाती है।
वर्तमान में जिले में न्यूनतम तापमान 8-10 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है तथा शीतलहर की स्थिति येलो जोन में बनी हुई है। ऐसी स्थिति में ठंड से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं (जैसे सर्दी-खाँसी, निमोनिया, हाइपोथर्मिया आदि) से बचाव अत्यंत आवश्यक है।
अभिभावक अपने बच्चों को ठंड से बचाने के लिए अतिरिक्त सतर्क रहें। बच्चों को मोटे गर्म कपड़े पहनाकर ही घर से बाहर भेजें। यदि बच्चा बीमार महसूस करे तो तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लें। स्कूल जाने वाले बच्चों को समय से पहले घर से निकालने से बचें, क्योंकि सुबह का समय सबसे अधिक ठंडा होता है।
जिला प्रशासन द्वारा स्थिति की निरंतर निगरानी की जा रही है। आवश्यकतानुसार आगे के निर्देश जारी किए जाएंगे।
टीम एबीएन, रांची। कुरमाली भाषा परिषद, रांची ने मोरहाबादी मैदान में आयोजित टुसू महोत्सव में राज्यपाल संतोष गंगवार की गरिमामयी उपस्थिति से इस बार का टुसू महोत्सव और भी भव्य बनाया। राज्यपाल के आगमन से महोत्सव की रौनक बढ़ गयी और कार्यक्रम में उत्साह का माहौल देखने को मिला।
वैसे तो केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री एवं रांची सांसद संजय सेठ, राज्यसभा सांसद महुआ माजी, झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, जमशेदपुर के पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो आदि भी महोत्सव में शामिल हुए। लेकिन महोत्सव में पहली बार राज्यपाल की उपस्थिति से महोत्सव में चार चांद लग गया।
मौके पर राज्यपाल श्री गंगवार ने कुरमाली भाषा एवं लोक संस्कृति की सराहना करते हुए कहा कि टुसू पर्व झारखंड की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने ऐसी परंपराओं को संरक्षित और प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इस तरह का आयोजन करने के लिए कुरमाली भाषा परिषद परिवार बधाई के पात्र हैं।
महोत्सव के दौरान पारंपरिक टुसू गीत, नृत्य और लोक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हुईं, जिन्हें दर्शकों ने खूब सराहा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कलाकार, समाजसेवी और गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कुरमाली भाषा परिषद के अध्यक्ष डॉ राजा राम महतो ने तहे दिल से राज्यपाल का सम्मान कर आभार व्यक्त किया।
उल्लेखनीय है कि झारखंड की राजधानी रांची शहर में टुसू महोत्सव आयोजित करने का श्रेय कुरमाली भाषा परिषद और परिषद के अध्यक्ष डॉ राजा राम महतो को जाता है। डॉ राजाराम महतो ने टुसू पर्व को गांव से शहर में लाने का कार्य किया। सबसे पहले झारखंड बनने के बाद बर्ष 2001 में रांची के के के कॉलोनी में कुरमाली भाषा परिषद के तत्वावधान में टुसू महोत्सव का अयोजन किया गया था।
बाद टुसू पर्व की पूर्व संध्या पर प्रति वर्ष मोरहाबादी मैदान में टुसू महोत्सव वृहत पैमाने पर मनाया जाता है। कुरमाली भाषा परिषद की ओर से महोत्सव में आने वाले टुसू दलों, कलाकारों और पीठा प्रतियोगिता में भाग लेने वाली महिलाओं को प्रोत्साहित किया जाता रहा है।
टीम एबीएन, रांची। मकर संक्रांति से एक दिन पहले झारखंड की लोक परंपरा से जुड़े टुसू महोत्सव का भव्य आयोजन राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में आरंभ हो गया है। प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी इस महोत्सव की शुरुआत उत्साह, लोकगीत और पारंपरिक रंगों के साथ हुई। कार्यक्रम का शुभारंभ राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
इस आयोजन का दायित्व कुरमाली भाषा परिषद द्वारा निभाया जा रहा है। टुसू महोत्सव झारखंड की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक माना जाता है। यह पर्व न केवल झारखंड, बल्कि पश्चिम बंगाल और ओडिशा में भी बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। हर साल मकर संक्रांति की पूर्व संध्या पर मोरहाबादी मैदान में इसका आयोजन किया जाता है। जिसमें झारखंड के कोने-कोने से लोग पारंपरिक वेशभूषा में ढोल-नगाड़ों और बाजा-गाजा के साथ शामिल होते हैं।
इस अवसर पर राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने भी पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार टुसू की पूजा-अर्चना की। आयोजन स्थल पर उनका स्वागत गुड़ पीठा, झारखंड के पारंपरिक व्यंजनों और विभिन्न प्रकार के मिष्ठानों से किया गया। राज्यपाल ने झारखंड की लोक संस्कृति की सराहना की। साथ ही कहा कि ऐसे आयोजन नयी पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत बनाते हैं।
टीम एबीएन, रांची। रांची के धुर्वा से लापता बच्चों के मामले ने तूल पकड़ लिया है। सोमवार को केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी धुर्वा स्थित लापता बच्चों के आवास पर पहुंचीं और पीड़ित परिजनों से मुलाकात कर उनका हाल-चाल जाना। उन्होंने पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने परिजनों से पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी ली और उनकी पीड़ा को गंभीरता से सुना।
बातचीत के दौरान बच्चों की मां भावुक हो उठीं और अपने बच्चों की जल्द व सकुशल बरामदगी की गुहार लगायी। इस दौरान माहौल बेहद संवेदनशील हो गया, जिसे देखते हुए मंत्री ने परिवार को ढांढस बंधाया और भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है।
केंद्रीय मंत्री ने मौके पर ही झारखंड की डीजीपी तदाशा मिश्रा से दूरभाष पर बातचीत की। उन्होंने न केवल स्थिति की जानकारी ली, बल्कि लापता बच्चों की मां और परिजनों की भी सीधे डीजीपी से बात करवायी, ताकि उनकी आवाज शीर्ष स्तर तक पहुंचे और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस मामले में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जायेगी।
अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि संबंधित प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को लगातार समन्वय बनाकर बच्चों की जल्द से जल्द तलाश और सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहायता उपलब्ध करायी जायेगी और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त संसाधन भी लगाये जायेंगे।
इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि यदि घटना के पहले 24 घंटे में स्थानीय पुलिस ने गंभीरता और तत्परता दिखाई होती तो शायद आज यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। उन्होंने दो टूक कहा कि लापरवाही किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है और इस मामले में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
मंत्री ने यह भी कहा कि जिस स्थान पर यह घटना हुई है, वहां से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर राज्य का पुलिस मुख्यालय स्थित है। इसके अलावा राज्य के सभी मंत्री और मुख्यमंत्री भी चंद मिनटों की दूरी पर कार्य करते हैं। इसके बावजूद राजधानी में इतनी गंभीर घटना हो जाना और लंबे समय तक किसी ठोस कार्रवाई का न होना, राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
मौके पर स्थानीय जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी मौजूद रहे। सभी ने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और बच्चों की शीघ्र बरामदगी की मांग की। लोगों का कहना था कि यह मामला केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे समाज की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
टीम एबीएन, रांची। 12 जनवरी को भारत के महान आध्यात्मिक गुरु और सबसे बड़े युवा आइकन स्वामी विवेकानन्द जी की जयंती है। स्वामी विवेकानंद को करोड़ों युवा अपना आदर्श मानते हैं और उनके जोशीले विचारों से प्रेरणा लेते हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्वामी विवेकानंद को नमन किया है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने लिखा, युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद जी की जयंती पर सादर नमन। आज राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर सभी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं, जोहार।
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने सोशल मीडिया पर लिखा, युगपुरुष एवं महान दार्शनिक स्वामी विवेकानंद जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन तथा राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर समस्त देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं। भारतीय संस्कृति को विश्व-पटल पर गौरव दिलाने वाले स्वामी विवेकानंद जी के विचार और आदर्श युवाओं के लिए सदैव प्रेरणास्रोत हैं।
विवेकानन्द का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता के एक बंगाली परिवार में हुआ था। उनके पिता विश्वनाथ दत्त कलकत्ता के उच्च न्यायालय में एक वकील थे। विवेकानंद के जन्म के समय उनका नाम नरेंद्र नाथ दत्त रखा गया था। 25 साल की आयु में विवेकानंद ने स्वामी रामकृष्ण परमहंस से प्रेरित हो कर अपना घर छोड़ दिया था और एक सन्यासी की तरह अपना जीवन बिताने लगे थे।
स्वामी विवेकानंद की 39 वर्ष की आयु में 4 जुलाई 1902 को मृत्यु हो गयी थी। उनकी मृत्यु का कारण रात 9 बजे ध्यान करते समय मस्तिष्क में रक्त वाहिका का टूटना बताया गया था।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में प्रस्तावित विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से पहले की जा रही तैयारियों के तहत 2003 की मतदाता सूची से वर्तमान मतदाता सूची की 70 प्रतिशत पैरेंटल मैपिंग पूरी कर ली गयी है। यह जानकारी मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने शनिवार को दी।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने जिला निर्वाचन पदाधिकारी, निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी, सहायक निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी और उप निर्वाचन पदाधिकारियों के साथ बैठक कर प्री-रिवीजन अभ्यास की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि शहरी क्षेत्रों में मतदाताओं की मैपिंग को प्राथमिकता दी जाये।
के. रवि कुमार ने कहा कि सरकारी कार्यालयों में विशेष शिविर लगाकर सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को मैपिंग प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया जाये, ताकि कार्य तेजी और सटीकता के साथ पूरा किया जा सके।
उन्होंने बताया कि राज्य के बाहर से आये मतदाताओं की मैपिंग उनके संबंधित राज्यों की पिछली विशेष गहन पुनरीक्षण वाली मतदाता सूची से की जाये और उनके नाम अलग रजिस्टर में दर्ज किये जायें।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने एब्सेंट, शिफ्टेड, डेथ और डुप्लीकेट मतदाताओं की एएसडीडी सूची का डिजिटलीकरण शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे आगामी गहन पुनरीक्षण के दौरान कार्य आसान होगा और यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि कोई भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची से वंचित न रहे।
उन्होंने मतदाता पहचान पत्र की गुणवत्ता सुधारने के लिए बूथ लेवल अधिकारियों को मोबाइल फोन से फोटो लेकर बीएलओ ऐप में अपडेट करने का प्रशिक्षण देने पर जोर दिया। के. रवि कुमार ने कहा कि 28 जनवरी से 6 फरवरी के बीच मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों का प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जाये, ताकि गहन पुनरीक्षण के दौरान बेहतर समन्वय स्थापित हो सके।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि कार्यालय द्वारा जारी स्टीकरों पर संबंधित मतदान केंद्र के बीएलओ का नाम, मतदान केंद्र संख्या, विधानसभा क्षेत्र और मोबाइल नंबर अंकित कर क्षेत्रों में लगाये जायें। इससे आम नागरिकों को अपने बीएलओ से संपर्क करने में आसानी होगी।
उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग के 1950 टॉलफ्री नंबर और बुक ए कॉल फीचर के व्यापक प्रचार-प्रसार का निर्देश दिया। साथ ही मैपिंग के दौरान निर्धारित आठ चेकपॉइंट्स का सख्ती से पालन करने और गलत मैपिंग से बचने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक में बीएलओ को मोबाइल से फोटो लेकर बीएलओ एप में अपडेट करने का प्रशिक्षण देने तथा 28 जनवरी से 6 फरवरी के बीच मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट-2 के प्रशिक्षण को सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिये गये।
इस समीक्षा बैठक में बोकारो जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त अजय नाथ झा, नोडल पदाधिकारी प्रशिक्षण देव दास दत्ता, उप निर्वाचन पदाधिकारी धीरज ठाकुर, अवर निर्वाचन पदाधिकारी सुनील कुमार सहित सभी जिलों के अधिकारी आॅनलाइन माध्यम से उपस्थित रहे।
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