टीम एबीएन, रांची। आने वाले समय में सबसे बड़ा संकट पानी का है। पीने के पानी का। खेती-बाड़ी के लिए पानी का। इसलिए जरूरी है कि हम पानी बचायें। जल संचय करें। खेतों में, बंजर भूमि में पानी संचय के लिए जगह बनायें। अगर पानी नहीं बचेगा, तो हम भी नहीं बचेंगे। यह बात तीन दिवसीय कृषि व्यापार मेला का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कही।
कार्यक्रम में ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, सांसद महुआ माजी के अलावा कृषि विभाग के अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान मौजूद थे। दुनिया में आज जो चल रहा है, उससे सबसे अधिक प्रभावित किसान हो रहे हैं। इस संकट में हम कैसे किसानों को तैयार करें। कम पानी में अधिक खेती कैसे करें। हर जगह जलवायु परिवर्तन की चिंता है।
आने वाले वक्त में पानी की घोर समस्या होने जा रही है। पीने व खेती के लिए पानी को लेकर। वैसे तो धरती में सबसे अधिक पानी ही है। लेकिन वह उपयोग का नहीं है। किसानों से आग्रह है कि अपने-अपने खेतों में जल संचय के लिए काम करना शुरू कर दें। यह आपके पीढ़ियों के लिए वरदान साबित होगा। इसके लिए किसी के आदेश की जरूरत नहीं है।
हमने बंजर जमीनों में जल संचय करने का काम शुरू किया। जो नये आंकड़े आ रहे हैं, वह बता रहे हैं चापाकल में पानी खत्म हो जायेगा। अगर आज से जल संचय का काम शुरू किया, तो आपदा से राहत मिलेगी। जहां भी चापाकल है, वहां पर रिचार्ज करने के लिए सॉकपीट बनाइये।
जल संचय का काम करिये। आने वाला समय पानी को लेकर बड़ी चुनौती वाली है। कई सारे आंकड़े उपलब्ध हैं। जिसमें विकास की लकीर खींचने की तैयारी हो रही है। हम नये युग में प्रवेश तो करेंगे, लेकिन विनाश भी आयेगा। हमें संतुलन बनाना होगा। सड़क-उद्योग के नाम पर जंगल उजाड़े जा रहे हैं।
50-100 साल पुराने पेड़ों को उजाड़ा जा रहा है। इसके मुकाबले वृक्षारोपण का काम चींटियों की तरह चल रहा है। हमारे पास जो आंकड़े हैं और देश के जो आंकड़े कहते हैं, इस तरह बोरिंग किया गया है, मानो छलनी से ज्यादा छेद जमीन में कर दिया गया है।
छलनी में पानी नहीं रूकेगा। यह मानिये जितना इस धरती से लेते हैं, उसका कुछ हिस्सा हमें देना भी पड़ेगा। इसलिए सभी किसान भाइयों, आज के इस तकनीक युग में कम पानी में अधिक से अधिक खेती करें। ड्रिप एरिगेशन इसलिए लाया गया। ताकि हम कम पानी में खेती कर पायें।
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