टीम एबीएन, रांची। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई का नाम अदम्य साहस, देशभक्ति और आत्मसम्मान के प्रतीक के रूप में स्वर्णाक्षरों में अंकित है।
झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का बलिदान दिवस प्रतिवर्ष 18 जून को मनाया जाता है। इसी दिन वर्ष 1858 में अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध करते हुए उन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया था। उनका बलिदान भारतीय इतिहास की सबसे प्रेरणादायक घटनाओं में से एक माना जाता है। महारानी लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवंबर 1828 को वाराणसी में हुआ था। उनका बचपन का नाम मणिकर्णिका था, जिन्हें प्यार से मनु कहा जाता था। विवाह के पश्चात वे झांसी की महारानी बनीं।
जब अंग्रेजों ने हड़प नीति के तहत झांसी को अपने अधीन करने का प्रयास किया, तब रानी लक्ष्मीबाई ने इसका डटकर विरोध किया। वर्ष 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में उन्होंने अंग्रेजी सत्ता के विरुद्ध संघर्ष का नेतृत्व किया और वीरता की ऐसी मिसाल प्रस्तुत की, जो आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत है।18 जून 1858 को ग्वालियर के निकट कोटा-की-सराय में अंग्रेजी सेना से युद्ध करते हुए रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं।
अंतिम समय तक उन्होंने अपने साहस और रणकौशल का परिचय दिया। उनका प्रसिद्ध कथन-मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी, आज भी देशभक्ति की भावना को प्रज्ज्वलित करता है। रानी लक्ष्मीबाई बलिदान दिवस का उद्देश्य नई पीढ़ी को राष्ट्रप्रेम, आत्मसम्मान, साहस और कर्तव्यनिष्ठा के मूल्यों से परिचित कराना है।
यह दिवस हमें यह संदेश देता है कि देश की स्वतंत्रता, सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा के लिए हर नागरिक को सदैव तत्पर रहना चाहिए। विद्यालयों, महाविद्यालयों, सामाजिक संस्थाओं तथा विभिन्न संगठनों ने इस अवसर पर संगोष्ठियों, निबंध प्रतियोगिताओं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया जाता है।
रानी लक्ष्मीबाई का जीवन और बलिदान भारतीय नारी शक्ति की महान पहचान है। उनका संघर्ष यह सिद्ध करता है कि दृढ़ संकल्प, साहस और देशभक्ति के बल पर असंभव प्रतीत होने वाली चुनौतियों का भी सामना किया जा सकता है। उनका बलिदान राष्ट्र की अमूल्य धरोहर है, जो आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।
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