रांची : क्या सचमुच स्कूलों की मनमानी पर लगेगी लगाम!

 

रांची में फीस, किताब और यूनिफॉर्म पर प्रशासन का बड़ा एक्शन 

टीम एबीएन, रांची। रांची में निजी स्कूलों की फीस, अभिभावकों की शिकायतों और नियमों के पालन को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक में कई बड़े फैसले लिये गये, जिनका सीधा असर स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों पर पड़ेगा। 
रांची के मोरहाबादी स्थित आर्यभट्ट सभागार में उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी मंजूनाथ भजंत्री की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गयी। 

इसमें सीबीएसई, आईसीएसई और जैक बोर्ड से जुड़े स्कूलों के प्राचार्य और प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन अधिनियम 2017 के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करना और अबुआ साथी पोर्टल पर मिली शिकायतों का जल्द समाधान करना था। 

तीन दिन में पीटीए बनाने का निर्देश 

उपायुक्त ने सभी स्कूलों को तीन दिनों के भीतर अभिभावक-शिक्षक संघ (पीटीए) का गठन करने और इसकी जानकारी जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय को देने का निर्देश दिया। उन्होंने बताया कि अब तक केवल 13 स्कूलों ने ही जानकारी दी है, जिस पर उन्होंने नाराजगी जताई और तय समयसीमा का पालन नहीं करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी। 

फीस बढ़ोतरी पर सख्त नियम 

बैठक में फीस को लेकर साफ किया गया कि स्कूल स्तर की समिति अधिकतम 10% तक ही फीस बढ़ा सकती है। इससे ज्यादा फीस बढ़ाने के लिए जिला स्तरीय समिति की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। साथ ही, अगली कक्षा में प्रमोशन के लिए किसी भी तरह का पुनर्नामांकन शुल्क लेना पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। 

किताब और यूनिफॉर्म बिक्री पर रोक 

प्रशासन ने स्कूल परिसर में किताबों और यूनिफॉर्म की बिक्री पर रोक लगा दी है। अब अभिभावक खुले बाजार से कहीं से भी किताबें और यूनिफॉर्म खरीद सकते हैं और उन्हें किसी एक दुकान से खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। सीबीएसई स्कूलों को केवल एनसीईआरटी की किताबें लागू करने का निर्देश दिया गया है। 

छात्रों और अभिभावकों के लिए राहत 

इसके अलावा, किसी भी छात्र को वार्षिक परीक्षा से वंचित नहीं किया जायेगा। स्कूलों को परिवहन नियमों का पालन करना होगा और अभिभावकों की शिकायतों का समय पर जवाब देना अनिवार्य किया गया है। प्रशासन ने साफ किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर 50 हजार से 2.5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। साथ ही, मान्यता रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई भी की जायेगी।

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