एबीएन सोशल डेस्क। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत के महान आध्यात्मिक चिंतक, युवा प्रेरणास्रोत एवं विश्वविख्यात संन्यासी स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि प्रत्येक वर्ष 4 जुलाई को श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई जाती है। इसी दिन वर्ष 1902 में मात्र 39 वर्ष की आयु में उन्होंने बेलूर मठ में महासमाधि ग्रहण की थी।
उनकी पुण्यतिथि केवल श्रद्धांजलि अर्पित करने का अवसर नहीं है, बल्कि उनके विचारों, आदर्शों और राष्ट्रनिर्माण के संदेश को आत्मसात करने का भी प्रेरक दिवस है। स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में नरेंद्रनाथ दत्त के रूप में हुआ था। वे रामकृष्ण परमहंस के परम शिष्य थे। उन्होंने भारतीय संस्कृति, वेदांत और सनातन दर्शन को विश्व मंच पर नई पहचान दिलाई।
वर्ष 1893 में शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद में दिए गए उनके ऐतिहासिक संबोधन अमेरिका की बहनों और भाइयों ने पूरी दुनिया को भारतीय आध्यात्मिकता की शक्ति से परिचित कराया। स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि का उद्देश्य उनके जीवन मूल्यों, राष्ट्रप्रेम, आत्मविश्वास, सेवा, शिक्षा और मानवता के संदेश को जन-जन तक पहुँचाना है।
उनका मानना था कि शिक्षा केवल जानकारी प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति के भीतर निहित शक्ति और चरित्र का विकास करने का साधन है। वे युवाओं को आत्मविश्वासी, कर्मठ और राष्ट्र के प्रति समर्पित बनने की प्रेरणा देते थे। उनका प्रसिद्ध संदेश- उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको आज भी करोड़ों युवाओं के लिए सफलता का मंत्र बना हुआ है।
इस अवसर पर देशभर के विद्यालयों, महाविद्यालयों, सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं में संगोष्ठियों, विचार गोष्ठियों, व्याख्यानों, योग शिविरों, सेवा कार्यों तथा उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए जाते हैं। अनेक स्थानों पर उनके साहित्य का अध्ययन, युवाओं के लिए प्रेरक कार्यक्रम तथा समाजसेवा से जुड़े आयोजन भी किए जाते हैं। स्वामी विवेकानंद का संपूर्ण जीवन त्याग, सेवा, आध्यात्मिक चेतना और राष्ट्रभक्ति का अनुपम उदाहरण है।
उनकी शिक्षाएँ आज भी भारत को आत्मनिर्भर, सशक्त और नैतिक मूल्यों से युक्त राष्ट्र बनाने की प्रेरणा देती हैं। उनकी पुण्यतिथि हमें यह संकल्प लेने का अवसर प्रदान करती है कि हम उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाकर समाज और राष्ट्र के विकास में सक्रिय योगदान दें। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
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