देशभर में किरकिरी के बाद केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा

 

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट के पेपर लीक विवाद और पिछले कई हफ्तों से चल रहे भारी विरोध प्रदर्शनों और चौतरफा दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है।

मेडिकल छात्रों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकार की चौतरफा आलोचना हो रही थी और इस इस्तीफे को परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। 

बता दें कि, पेपर लीक के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने शुरू से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की और अपने फैसले पर अड़ी रही। आज सरकार और सीजेपी के तीसरे दौर की वार्ता से पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा सौंपा है।

देश के युवाओं की अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता हूं

उन्होंने कहा, मैं देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता हूं। भारत की युवा पीढ़ी के सपनों को साकार करना हम सभी के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन का नैतिक संकल्प रहा है। आदरणीय प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में राष्ट्र की सेवा करने का जो अवसर मुझे प्राप्त हुआ, उसके लिए मैं प्रधानमंत्री का आभार प्रकट करता हूं।

नीट पेपर लीक पर क्या बोले धर्मेंद्र प्रधान

उन्होंने आगे लिखा, तीन मई 2026 को हुई नीट-यूजी की परीक्षा में अनियमितता पाई गई। भारत सरकार ने इसको तुरंत संज्ञान में लेते हुए जांच सीबीआई को सौंपी और परीक्षा को रद्द किया एवं पुनः परीक्षा की तारीख की घोषणा की। इसके साथ ही अगले वर्ष से इस परीक्षा को सीबीटी मोड में करने का निर्णय लिया गया।

धर्मेंद्र प्रधान बोले- छात्रों के साथ अन्याय नहीं होने देंगे

पहले ही दिन से मैंने इसकी जिम्मेदारी ली और इस परिस्थिति से कभी मुंह नहीं मोड़ा। मेरा यह संकल्प था कि हम किसी भी मेधावी छात्र की संभावना परीक्षा माफिया के कारण खराब नहीं होने देंगे, किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने देंगे। उन्होंने आगे लिखा, 16 जुलाई को घोषित नीट-यूजी के परिणाम संतोषजनक रहे, जिसमें गरीब पृष्ठभूमि से आए कई मेधावी छात्रों को भी सफलता मिली।

एंटी-पेपर लीक बिल पर टिकीं निगाहें

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा केवल एक मंत्री का जाना नहीं है, बल्कि यह देश की पूरी परीक्षा और नीतिगत व्यवस्था की पारदर्शिता पर उठे गंभीर सवालों का नतीजा है। अब देश के लाखों प्रभावित छात्रों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सोमवार को संसद में पेश होने वाला नया एंटी-पेपर लीक बिल और केंद्रीय एजेंसियों की चल रही जांच उनकी खोई हुई मानसिक शांति और परीक्षा प्रणाली में उनके भरोसे को वापस बहाल कर पाएगी।

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