एबीएन सोशल डेस्क। रांची की गौशाला न्यास समिति द्वारा संचालित हुटूप गौशाला धाम आज केवल गोवंश के संरक्षण का केंद्र नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना, पर्यावरण संरक्षण और भारतीय संस्कृति का जीवंत प्रतीक बन चुका है। एक शताब्दी से भी अधिक पुरानी गोसेवा की इस परंपरा ने समाज के सहयोग से ऐसा स्वरूप ग्रहण किया है, जो प्रत्येक गोभक्त के लिए प्रेरणा का विषय है। गौशाला न्यास समिति के संचालन का शुभारंभ वर्ष 1904 में हुआ। समय के साथ गोवंश की संख्या में निरंतर वृद्धि होने लगी।
ऐसी स्थिति में वृद्ध, लाचार एवं दूध न देने वाली गायों के संरक्षण के लिए वर्ष 1966 में हुटूप गौशाला की स्थापना की गई। इस पवित्र कार्य के लिए समाजसेवी श्री नारायण साबू ने अपनी भूमि का एक हिस्सा अनुदान स्वरूप प्रदान किया, जिसने इस गौधाम की मजबूत आधारशिला रखी। इसके बाद अनेक दानदाताओं, गोभक्तों एवं समाजसेवियों के सहयोग से गौशाला का निरंतर विस्तार होता गया।
आज हुटूप गौशाला लगभग 76 एकड़ के विशाल परिसर में विकसित हो चुकी है। प्राकृतिक वातावरण से घिरा यह गौधाम वर्तमान में लगभग 350 गोवंश का विधिवत पालन-पोषण कर रहा है। यहाँ विशेष रूप से दूध न देने वाली, वृद्ध, बीमार, असहाय तथा प्रशासन द्वारा पकड़े गए निराश्रित गोवंश की सेवा एवं संरक्षण किया जाता है।
रांची गौशाला न्यास समिति की तीन प्रमुख इकाइयाँ संचालित हैं-रांची गौशाला (हरमू रोड), सुकुरहुटू गौशाला (कांके) तथा हुटूप गौशाला (ओरमांझी)। इन तीनों केंद्रों के माध्यम से गोसेवा का व्यापक कार्य निरंतर संचालित किया जा रहा है। कुछ वर्ष पूर्व तक हुटूप गौशाला अनेक मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रही थी। गोवंश के लिए पर्याप्त गौहाल नहीं थे तथा पानी की भी भारी समस्या थी।
किंतु पिछले दो वर्षों में समाज के विभिन्न वर्गों, दानदाताओं एवं गोभक्तों के सहयोग से यहाँ उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिला है। नए गौहालों का निर्माण, परिसर का सुंदरीकरण, व्यापक वृक्षारोपण, कृषि कार्य तथा जल संकट दूर करने के लिए बोरिंग की व्यवस्था जैसी अनेक विकास योजनाओं ने गौधाम का स्वरूप पूरी तरह बदल दिया है।आज यह गौधाम केवल गोवंश का आश्रय स्थल नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शांति का केंद्र भी बन गया है।
प्रतिदिन अनेक श्रद्धालु यहाँ पहुँचकर गौ माता की सेवा करते हैं, उन्हें भोग अर्पित करते हैं तथा प्राकृतिक वातावरण में आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति करते हैं। लोग अपने विवाह की वर्षगांठ, बच्चों के जन्मदिन तथा अन्य शुभ एवं मांगलिक अवसरों पर यहाँ आकर गौपूजन करते हैं और गौ माता से सुख-समृद्धि एवं मंगलमय जीवन का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
भारतीय संस्कृति में गौ माता को अत्यंत पूजनीय माना गया है। शास्त्रों में वर्णित है कि गौ माता में 56 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है। इसलिए गौसेवा केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि मानवता, करुणा और प्रकृति संरक्षण का भी श्रेष्ठ माध्यम है। गौधाम के संचालन एवं व्यवस्थापन का दायित्व गौशाला न्यास समिति द्वारा श्री वासुदेव भाला एवं श्री मुकेश काबरा को सौंपा गया है।
उनके मार्गदर्शन में अनेक गोभक्त मिलकर गौधाम के विकास और गोसेवा के कार्य को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं। गौशाला के विकास में रांची के सांसद एवं केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ,राज्यसभा सांसद आदित्य साहू, राज्यसभा सांसद प्रदीप वर्मा सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं दानदाताओं का उल्लेखनीय योगदान रहा है।
उनके सहयोग से गौहाल निर्माण सहित अनेक विकास कार्य निरंतर जारी हैं कृषि के क्षेत्र में लगातार विकास जारी है।वर्तमान में गौशाला न्यास समिति के अध्यक्ष श्री पुनीत पोद्दार एवं सचिव श्री प्रदीप राजगढ़िया है। गौशाला की तीनों इकाइयों में गोवंश के लिए हरे चारे का उत्पादन किया जाता है। इसके अतिरिक्त आम, लीची सहित अनेक फलदार वृक्ष तथा विभिन्न प्रकार की सब्जियों की खेती भी की जा रही है।
जिनका लाभ प्रत्येक वर्ष गौधाम एवं श्रद्धालुओं को प्राप्त होता है।भविष्य में गौशाला परिसर में बच्चों के लिए पार्क, आध्यात्मिक स्थल, तालाब निर्माण तथा औषधीय एवं जड़ी-बूटी आधारित खेती जैसी कई महत्वपूर्ण योजनाएँ प्रस्तावित हैं। इन योजनाओं के पूर्ण होने से हुटूप गौशाला धाम गोसंरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक कृषि एवं आध्यात्मिक पर्यटन का एक आदर्श केंद्र बनकर उभरेगा।
निस्संदेह, हुटूप गौशाला धाम यह संदेश देता है कि जब समाज सेवा, श्रद्धा और सहयोग एक साथ जुड़ते हैं, तब किसी भी पुण्य कार्य को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया जा सकता है। गौ माता की सेवा भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है और इस पवित्र अभियान में प्रत्येक नागरिक की सहभागिता समाज एवं राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का आधार बन सकती है। उक्त जानकारी मुकेश काबरा (+91 93344 59081) ne दी।
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