टीम एबीएन, रांची। राजधानी के राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) पर एक बार फिर इलाज में लापरवाही का गंभीर आरोप लगा है। परिजनों के अनुसार, मरीज सरिता टेटे को 9 जुलाई को सदर अस्पताल के गायनिक लेबर वार्ड में भर्ती कराया गया था। जांच के बाद उन्हें रिम्स रेफर कर दिया गया, जहां 10 जुलाई को गायनिक विभाग के चौथे तल्ले स्थित सेप्टिक वार्ड में भर्ती किया गया।
परिजनों का आरोप है कि भर्ती के समय ही गर्भ में शिशु की मृत्यु हो चुकी थी। इसके बावजूद डॉक्टरों ने तीन दिनों तक न तो ऑपरेशन कर मृत शिशु को बाहर निकाला और न ही कोई संतोषजनक उपचार किया। उनका कहना है कि लगातार इलाज में देरी के कारण मरीज की हालत बिगड़ती चली गई।
परिजनों ने बताया कि जब उन्होंने मरीज को दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए डिस्चार्ज की मांग की, तो उन्हें कथित रूप से यह कहकर मना कर दिया गया कि जब डिस्चार्ज ही कराना था तो यहां क्यों लेकर आए थे। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष के वरीय निजी सचिव राजेंद्र तिवारी के माध्यम से रिम्स के डीएस से संपर्क किया गया। परिजनों का दावा है कि डीएस ने फोन पर डिस्चार्ज की बात कही, लेकिन काफी देर तक उन्हें डिस्चार्ज पेपर उपलब्ध नहीं कराया गया।
परिजनों का आरोप है कि मरीज की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए आखिरकार बिना औपचारिक डिस्चार्ज प्रक्रिया पूरी हुए एंबुलेंस से उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जहां उनका इलाज जारी है। बताया जा रहा है कि मरीज की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। इस पूरे मामले को लेकर परिजनों में भारी नाराजगी है। उन्होंने रिम्स प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
(नोट: यह समाचार परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। रिम्स प्रशासन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
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