आषाढ़ के गुप्त नवरात्र का पावन पर्व 15 जुलाई से

 

आत्मचिंतन, संयम, सेवा, श्रद्धा और आध्यात्मिक जागरण का संदेश देने वाला दिव्य अवसर : संजय सर्राफ 

एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि चैत्र और शारदीय नवरात्रि के बारे में तो सभी जानते हैं लेकिन बहुत कम लोगों को यह जानकारी होती है कि आषाढ़ माह में आने वाली गुप्त नवरात्रि अत्यंत रहस्यमय और प्रभावशाली मानी जाती है। इस विशेष नवरात्रि में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा के साथ-साथ दस महाविद्याओं की भी साधना की जाती है। 

इन विद्याओं में मां काली, मां तारा, मां त्रिपुर सुंदरी, मां भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, मां त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मां मातंगी और मां कमला शामिल है, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से प्रारंभ होने वाली गुप्त नवरात्र इस वर्ष 15 जुलाई से 23 जुलाई तक मनाई जाएगी। यह नौ दिवसीय पर्व देवी शक्ति की उपासना, आत्मशुद्धि, आध्यात्मिक साधना तथा तांत्रिक सिद्धियों की प्राप्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। 

सामान्यत: चैत्र और शारदीय नवरात्र पूरे देश में व्यापक रूप से मनाए जाते हैं, जबकि आषाढ़ और माघ की नवरात्र को गुप्त नवरात्र कहा जाता है। इन दिनों में साधक, संत, योगी और तंत्र-मंत्र की साधना करने वाले श्रद्धालु विशेष रूप से माँ आदिशक्ति की आराधना करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गुप्त नवरात्र का वर्णन विभिन्न पुराणों एवं तांत्रिक ग्रंथों में मिलता है। 

कथा के अनुसार, एक समय देवर्षि नारद ने भगवान से प्रश्न किया कि ऐसे गृहस्थ और साधक, जो गुप्त रूप से देवी की आराधना करना चाहते हैं, उनके लिए कौन-सा श्रेष्ठ समय है। तब देवी उपासना के लिए आषाढ़ और माघ की गुप्त नवरात्र का महत्व बताया गया। माना जाता है कि इन दिनों में श्रद्धापूर्वक की गई साधना शीघ्र फलदायी होती है तथा साधक को माँ दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है। 

गुप्त नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री-की विधिवत पूजा की जाती है। भक्त कलश स्थापना, अखंड ज्योति, दुर्गा सप्तशती का पाठ, देवी कवच, अर्गला स्तोत्र, कीलक स्तोत्र तथा मंत्र-जप के माध्यम से मां भगवती का आह्वान करते हैं। अनेक श्रद्धालु नौ दिनों का व्रत रखकर सात्विक जीवन अपनाते हैं और सेवा, दान तथा संयम का पालन करते हैं।

आषाढ़ गुप्त नवरात्र का प्रमुख उद्देश्य मन, वचन और कर्म की शुद्धि, आत्मबल की वृद्धि तथा आध्यात्मिक उन्नति है। यह पर्व हमें सिखाता है कि सच्ची साधना बाहरी प्रदर्शन नहीं, बल्कि अंतर्मन की पवित्रता और ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा में निहित है। इस अवधि में की गयी प्रार्थना, ध्यान और जप व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा, आत्मविश्वास तथा मानसिक शांति का संचार करते हैं। 

यह पर्व साधकों के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। आषाढ़ गुप्त नवरात्र केवल धार्मिक अनुष्ठान का पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, संयम, सेवा, श्रद्धा और आध्यात्मिक जागरण का संदेश देने वाला दिव्य अवसर है। यदि इन नौ दिनों में श्रद्धा, विश्वास और नियमपूर्वक माँ भगवती की उपासना की जाये, तो जीवन में सुख, समृद्धि, साहस, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यही इस पावन पर्व की सबसे बड़ी विशेषता और सार्थकता है।

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