टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद झारखंड सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भगवान श्री नरसिंह जयंती हिंदू धर्म का एक अत्यंत पावन और श्रद्धापूर्ण पर्व है। यह जयंती भगवान विष्णु के चौथे अवतार श्री नरसिंह भगवान के प्राकट्य दिवस के रूप में मनायी जाती है।
इस वर्ष श्री नरसिंह जयंती 30 अप्रैल दिन गुरुवार को मनाई जायेगी। यह पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने भक्त प्रह्लाद की रक्षा तथा अत्याचारी हिरण्यकश्यप के अंत हेतु नरसिंह रूप में अवतार लिया था। भगवान नरसिंह का स्वरूप अत्यंत अद्भुत और दिव्य है। उनका आधा शरीर मनुष्य का तथा मुख सिंह का है।
यह रूप इस बात का प्रतीक है कि जब-जब संसार में अधर्म, अन्याय और अत्याचार बढ़ता है, तब ईश्वर किसी भी रूप में प्रकट होकर धर्म की रक्षा करते हैं। भगवान नरसिंह शक्ति, साहस, निर्भयता और भक्तवत्सलता के प्रतीक माने जाते हैं। पुराणों के अनुसार हिरण्यकशिपु नामक राक्षस राजा ने कठोर तप कर वरदान प्राप्त किया था कि उसे न कोई मनुष्य मार सके, न पशु, न दिन में, न रात में, न घर में, न बाहर; न अस्त्र से, न शस्त्र से।
वरदान के अहंकार में उसने स्वयं को ईश्वर घोषित कर दिया और सबको अपनी पूजा करने का आदेश दिया। परंतु उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था।जब हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद को अनेक यातनाएं दीं और पूछा कि तेरा भगवान कहाँ है, तब प्रह्लाद ने कहा-भगवान सर्वत्र हैं। क्रोधित होकर उसने महल के स्तंभ पर प्रहार किया, तभी स्तंभ से भगवान नरसिंह प्रकट हुए।
उन्होंने संध्या समय, द्वार की चौखट पर, अपनी जंघा पर बैठाकर नखों से हिरण्यकशिपु का वध किया और भक्त प्रह्लाद की रक्षा की। इस प्रकार भगवान ने वरदान की सभी शर्तों को पूर्ण करते हुए अधर्म का नाश किया। यह पर्व हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति, विश्वास और धर्म की सदैव विजय होती है। जो व्यक्ति भगवान पर अटूट श्रद्धा रखता है, उसकी रक्षा स्वयं ईश्वर करते हैं।
यह दिन भय, संकट, शत्रु बाधा और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति देने वाला माना गया है। अनेक श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर भगवान नरसिंह की पूजा करते हैं। नरसिंह जयंती पर प्रात: स्नान कर व्रत का संकल्प लिया जाता है। भगवान विष्णु और नरसिंह भगवान की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर विधिवत पूजा, मंत्र जाप, आरती और कथा श्रवण किया जाता है। फलाहार कर रात्रि जागरण भी किया जाता है।
मंदिरों में विशेष भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण होता है। इस जयंती का मुख्य उद्देश्य समाज में धर्म, सत्य, साहस और ईश्वर भक्ति का संदेश देना है। यह पर्व बताता है कि चाहे अन्याय कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंतत: सत्य की ही विजय होती है। भगवान नरसिंह जयंती हमें निर्भय होकर धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
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