एबीएन सोशल डेस्क। झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस प्रत्येक वर्ष जुलाई के प्रथम शनिवार को मनाया जाता है। इस वर्ष यह दिवस 4 जुलाई को मनाया जायेगा। इस दिवस का उद्देश्य विश्वभर में सहकारिता आंदोलन के महत्व को रेखांकित करना, सहयोग की भावना को प्रोत्साहित करना तथा सामाजिक, आर्थिक और सतत विकास में सहकारी संस्थाओं की भूमिका के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना है।
इस दिवस का आयोजन संयुक्त राष्ट्र तथा अंतरराष्ट्रीय कोआॅपरेटिव एलायंस के सहयोग से किया जाता है। सहकारिता का अर्थ है- समान उद्देश्य रखने वाले लोगों का स्वेच्छा से एकजुट होकर पारस्परिक सहयोग, लोकतांत्रिक व्यवस्था और समान भागीदारी के आधार पर अपने आर्थिक एवं सामाजिक हितों की पूर्ति करना। इसका मूल मंत्र है-सबके लिए एक और एक के लिए सब।
यही भावना सहकारिता को केवल एक आर्थिक व्यवस्था नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सामूहिक विकास का सशक्त माध्यम बनाती है। विश्व के अनेक देशों की तरह भारत में भी सहकारिता आंदोलन ने कृषि, दुग्ध उत्पादन, बैंकिंग, उपभोक्ता सेवाओं, आवास, लघु उद्योग, महिला स्वयं सहायता समूहों तथा ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
सहकारी संस्थाएं किसानों को ऋण, उन्नत बीज, उर्वरक, भंडारण एवं विपणन की सुविधाएं उपलब्ध कराकर उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाती हैं। साथ ही छोटे उद्यमियों और कमजोर वर्गों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी प्रदान करती हैं। इस दिवस का प्रमुख उद्देश्य सहकारिता के सिद्धांतों स्वैच्छिक सदस्यता, लोकतांत्रिक नियंत्रण, समानता, पारदर्शिता,सामाजिक उत्तरदायित्व और सामुदायिक विकास-को बढ़ावा देना है।
सहकारी संस्थाएँ लाभ कमाने के साथ-साथ समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण को प्राथमिकता देती हैं। यही कारण है कि वे रोजगार सृजन, गरीबी उन्मूलन, महिला सशक्तिकरण तथा समावेशी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह प्रतिस्पर्धा के स्थान पर सहयोग, विश्वास और साझेदारी की भावना को मजबूत करता है।
सहकारी संस्थाओं में प्रत्येक सदस्य को समान अधिकार प्राप्त होता है और सभी निर्णय लोकतांत्रिक प्रक्रिया से लिए जाते हैं। यही व्यवस्था उन्हें पारदर्शी, उत्तरदायी और जनहितैषी बनाती है। आज जब विश्व आर्थिक असमानता, बेरोजगारी और सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब सहकारिता आंदोलन सतत एवं समावेशी विकास का प्रभावी मॉडल बनकर उभरा है।
यह दिवस हमें यह संदेश देता है कि सामूहिक प्रयास,पारस्परिक विश्वास और सहयोग की भावना से ही आत्मनिर्भर, समृद्ध और न्यायपूर्ण समाज का निर्माण संभव है। सहकारिता केवल एक व्यवस्था नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, आर्थिक सशक्तीकरण और मानव कल्याण की ऐसी विचारधारा है, जो वर्तमान और भविष्य-दोनों के लिए समान रूप से प्रासंगिक है।
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