एबीएन कैरियर डेस्क। केंद्र और राज्य सरकारें शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब पर लगातार जोर दे रही हैं। उद्देश्य है कि बच्चों को तकनीक आधारित शिक्षा से जोड़कर उन्हें डिजिटल युग के अनुरूप तैयार किया जाए। हालांकि, ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत इन दावों से काफी अलग नजर आती है। बिजली की अनियमित आपूर्ति, कमजोर इंटरनेट नेटवर्क और संसाधनों की कमी के कारण कई स्कूलों में स्मार्ट क्लास केवल कागजों तक ही सीमित होकर रह गयी हैं।
खूंटी जिले के मुरहू प्रखंड का उदाहरण इस स्थिति को स्पष्ट करता है। यहां सरकारी विद्यालयों में स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब की व्यवस्था तो की गयी है, लेकिन नियमित बिजली और बेहतर इंटरनेट के अभाव में उनका समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा है। नतीजतन, छात्र आज भी पारंपरिक पद्धति से पढ़ाई करने को मजबूर हैं। कई विद्यालयों में शिक्षकों की कमी भी डिजिटल शिक्षा के प्रभावी संचालन में बाधा बन रही है।
नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर एक शिक्षक ने बताया कि डिजिटल शिक्षा की पहल स्वागतयोग्य है, लेकिन पहले स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करना आवश्यक है। यदि निर्बाध बिजली, तेज इंटरनेट और उपकरणों के रखरखाव की व्यवस्था नहीं होगी, तो स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकेगा।
मुरहू प्रखंड के उप प्रमुख अरुण कुमार साबू ने कहा कि डिजिटल शिक्षा को सफल बनाने के लिए तकनीकी संसाधनों के साथ-साथ आधारभूत ढांचे को भी मजबूत करना होगा। उन्होंने बताया कि मुरहू में आईसीटी के माध्यम से 12 से 13 स्मार्ट क्लास संचालित हैं, लेकिन खराब इंटरनेट और अनियमित बिजली आपूर्ति के कारण उनका नियमित संचालन संभव नहीं हो पा रहा है। जिले में केवल दो बुनियादी विद्यालय हैं, जिनमें एक खूंटी और दूसरा मुरहू प्रखंड में स्थित है।
अरुण कुमार साबू ने बताया कि मुरहू प्रखंड में कुल 157 स्कूल, 134 सरकारी विद्यालय, 26 सहायता प्राप्त (अनुदानित) स्कूल हैं, जबकि एक स्वयंसेवी संस्था (एनजीओ) करीब 30 स्कूलों का संचालन कर रही है। वहीं लगभग 40 स्कूल ऐसे हैं, जहां केवल 10 से 12 बच्चे ही नामांकित हैं।
अरुण कुमार साबू का कहना है कि सरकार को ऐसे छोटे विद्यालयों का युक्तिकरण कर विद्यार्थियों को बड़े और संसाधनयुक्त स्कूलों में स्थानांतरित करना चाहिए, ताकि स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाओं का बेहतर उपयोग हो सके। उनके अनुसार, केवल स्मार्ट क्लास की घोषणा कर देने से डिजिटल शिक्षा सफल नहीं होगी, जब तक गांवों के स्कूलों में बिजली, इंटरनेट और अन्य बुनियादी सुविधाएं सुदृढ़ नहीं की जातीं।
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