टीम एबीएन, रांची। लखनऊ में हुए दर्दनाक कोचिंग हादसे के बाद देशभर में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। इस घटना में कई छात्रों की मौत के बाद अभिभावकों और आम लोगों के बीच चिंता बढ़ गयी है। झारखंड की राजधानी रांची सहित हजारीबाग, जमशेदपुर और धनबाद में संचालित कई कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
रांची के लालपुर, कांटाटोली, सिरमटोली, सर्कुलर रोड और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं। इनमें पढ़ने के लिए झारखंड के अलावा बिहार समेत अन्य राज्यों से भी छात्र आते हैं। आरोप है कि कई संस्थान संकरी गलियों और बहुमंजिला इमारतों में बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम के संचालित हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि अधिकांश इमारतों में आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) की व्यवस्था नहीं है। कई जगहों पर क्षमता से अधिक छात्रों को एक ही कक्ष में बैठाया जाता है, जिससे किसी आपदा की स्थिति में भगदड़ और जनहानि का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा पर्याप्त वेंटिलेशन, अग्निशमन यंत्र और फायर सेफ्टी मानकों की भी कमी देखने को मिलती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ते कोचिंग व्यवसाय के बीच सुरक्षा मानकों की नियमित जांच और सख्त अनुपालन आवश्यक है। उनका कहना है कि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर निरीक्षण और मानकों की समीक्षा की जानी चाहिए।
अभिभावकों की मांग है कि प्रशासन सभी कोचिंग संस्थानों का व्यापक सुरक्षा आॅडिट कराए और नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर सख्त कार्रवाई करे। उनका कहना है कि छात्रों की जान से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
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